जब हनुमान जी ने सूर्य को समझा फल, निगल गए पूरे ब्रह्मांड का उजाला
हनुमान जी (Hanuman Ji) को बल, बुद्धि और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। वे बालपन से ही असाधारण शक्तियों से संपन्न थे और यही कारण है कि उनकी बाल लीलाएं भी उतनी ही अद्भुत और चमत्कारी हैं, जितनी उनकी युवावस्था की वीरता। ऐसी ही एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जब बालक हनुमान ने सूर्य देव (Lord Sun) को लाल फल समझकर निगल लिया था। इस घटना से न केवल धरती बल्कि पूरे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया और देवताओं में हाहाकार मच गया था। बाल हनुमान की भूख और सूर्य को फल समझने की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा केसरी और माता अंजनी के घर एक विलक्षण बालक का जन्म हुआ, जिसे मारुति नाम दिया गया। यह बालक साधारण नहीं था, उसमें देवताओं द्वारा प्रदान की गई दिव्य शक्तियां विद्यमान थीं। बचपन से ही मारुति बेहद चंचल, बलवान और बुद्धिमान थे। एक दिन उन्होंने आकाश में चमकते हुए सूर्य को देखा, जो उन्हें एक लाल और दमकते हुए पके आम की तरह प्रतीत हुआ। उसे देखकर उनके भीतर उसे खाने की इच्छा जाग उठी। वे तुरंत आकाश की ओर उड़ चले और इतनी तेजी से बढ़े कि देवता भी अचंभित रह गए। हनुमान जी (Hanuman Ji) ने सूर्य को पकड़ने की कोशिश की और अंत में उसे निगल लिया। जैसे ही उन्होंने सूर्य को निगला, समस्त पृथ्वी पर अंधकार छा गया और दिन में ही रात जैसा माहौल बन गया। इससे सभी जीव-जंतु भयभीत हो उठे। देवताओं की चिंता और इंद्र का हस्तक्षेप इसके बाद सभी देवता चिंतित होकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने इंद्र देव को निर्देश दिया कि वे उस बालक को रोकें। इंद्र देव ने अपने वज्र से मारुति यानी हनुमान जी पर प्रहार किया, जिससे वे सीधे धरती पर गिर पड़े। यह देखकर ब्रह्मा जी ने हनुमान जी (Hanuman Ji) को उठाया और कहा, “यह बालक असाधारण है, इसे कोई भी क्षति नहीं पहुंचा सकता।” इसके बाद ब्रह्मा जी ने उन्हें अमरता और विजय का वरदान दिया। अन्य देवताओं ने भी हनुमान जी को अनेक शक्तियां प्रदान कीं—जैसे अग्नि से रक्षा, जल में न डूबने की क्षमता, हवा में उड़ने की कला और अनेकों दिव्य वरदान। परंतु, बाल्यावस्था में हनुमान जी जब अपनी शक्तियों का अनुचित प्रयोग करने लगे और ऋषियों की तपस्या में विघ्न डालने लगे, तो ऋषियों ने उन्हें श्राप दिया कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाएंगे और तब तक नहीं याद कर पाएंगे, जब तक कोई उन्हें स्मरण न कराए। इसी कारण जब आगे चलकर हनुमान जी (Hanuman Ji) की भेंट श्रीराम से हुई, तभी उन्हें अपनी सभी दिव्य शक्तियों का पुनः स्मरण हुआ और वे भगवान राम के अनन्य भक्त व शक्तिशाली बजरंगबली के रूप में प्रतिष्ठित हुए इसे भी पढ़ें:- क्यों चढ़ाया जाता है हनुमान जी को सिंदूर? जानिए त्रेता युग से जुड़ी यह अद्भुत कथा देवताओं का समाधान और हनुमान को वरदान समस्त देवताओं ने वायुदेव को शांत करने और हनुमान जी (Hanuman Ji) की क्षमा याचना हेतु मिलकर उन्हें अनेक वरदान दिए। ब्रह्मा जी, इंद्र देव, वरुण देव, यमराज आदि ने बालक हनुमान को अमरता, अजेयता, बल, बुद्धि, वेदों का ज्ञान और हर प्रकार के दैवीय वरदान दिए। इस प्रकार हनुमान जी त्रेतायुग के सबसे बलशाली और बुद्धिमान देवता बने। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Hanuman Ji #Hanuman #HanumanStory #HinduMythology #SuryaDev #IndianLegends #HanumanJayanti #MythologicalTales #LordHanuman #SpiritualIndia #DivineStories

