Ambedkar statue clash Thane

Ambedkar statue clash Thane: महाराष्ट्र के ठाणे में डॉ बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर पहले माल्यार्पण करने को लेकर दो गुटों में हुई झड़प

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली में सोमवार को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह के दौरान हुई मामलू कहासुनी को लेकर दो गुटों में (Ambedkar statue clash Thane) झड़प हो गई। दरअसल, यह झड़प बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने को लेकर कहासुनी के बाद हुई। संबंधित मामले में सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक डोंबिवली पुलिस थाने के अधिकारी ने बताया कि “घटना मशाल चौक पर हुई। अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि “लोग रविवार देर रात 1:45 बजे से ही समारोह स्थल पर एकत्र होने लगे थे। एक समूह बाबासाहेब की प्रतिमा पर पहले माल्यार्पण करना चाहता था, लेकिन दूसरे समूह के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। इसे लेकर उनके बीच हुई बहस झड़प में तब्दील हो गई। इस झड़प में कुछ लोग घायल हुए और वाहनों को नुकसान पहुँचाया। उन्होंने कहा, “गिरफ्तार और घायलों में महिलाएं भी शामिल हैं। हालाँकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। फ़िलहाल घटना की जांच जारी है।” आयोजित कार्यक्रम के दौरान अराजक तत्वों ने विवाद कर शुरू कर (Ambedkar statue clash Thane) दिया पथराव  यही नहीं, इसके अलावा अकोला शहर के गंगा नगर बाईपास के पास अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने विवाद कर पथराव शुरू कर (Ambedkar statue clash Thane) दिया। सूचना पाते ही ओल्ड सिटी पुलिस की टीम घटनास्थल पर जा पहुंची। और पहुंचकर सबसे पहले स्थिति को नियंत्रण में किया। हालांकि इस बीच दोनों समूहों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया। जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान किसी अनजान शख्स ने पास में खड़ी गाड़ी पर पत्थर फेंका। इस बीच मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया। ओल्ड सिटी के पीएसओ ने मौके पर पहुंचकर जमा भीड़ को हटाया और कार्यक्रम को बंद कराया।  इसे भी पढ़ें: – मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अहमद बदावी का निधन सीम देवेंद्र फडणवीस ने बाबासाहेब आंबेडकर की 134वीं जयंती पर मुंबई के चैत्यभूमि में उन्हें पुष्पांजलि की अर्पित  बता दें कि सोमवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बाबासाहेब आंबेडकर की 134वीं जयंती पर मुंबई के चैत्यभूमि में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार, विधान परिषद के अध्यक्ष राम शिंदे, संजय शिरसाट और राज्य कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने भी मध्य मुंबई के शिवाजी पार्क में स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर (Ambedkar statue clash Thane) के अंतिम विश्राम स्थल चैत्यभूमि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। बता दें कि इससे पहले फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि “एक प्रख्यात अर्थशास्त्री, सामाजिक न्याय के वैश्विक प्रतीक और भारतीय संविधान के जनक, भारत रत्न बाबासाहेब आंबेडकर को उनकी जयंती पर नमन।”  Latest News in Hindi Today Hindi news Ambedkar statue clash Thane #AmbedkarStatueClash #ThaneNews #BabasahebAmbedkar #MaharashtraPolitics #DalitRights #AmbedkarJayanti #StatueDispute #CasteConflict #PoliticalClash #ThaneViolence

आगे और पढ़ें
Political switch in Maharashtra

Muslim leader leaves Congress: वक्फ बिल पास होते ही कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, महाराष्ट्र के इस बड़े मुस्लिम नेता ने छोड़ी पार्टी

संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशाेधन बिल पास होने के बाद से बीजेपी के सहयोगी दलों में इस्तीफों का दौर जारी है। कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देन शुरू कर दिया है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी अछूती नहीं है। वक्फ संशाेधन बिल पास होने के बाद कांग्रेस का एक बड़े मुस्लिम चेहरे ने पार्टी का साथ छोड़ (Muslim leader leaves Congress) दिया है। ध्यान देने वाली बात यह कि एक तरफ कांग्रेस जहां खुद को मजबूत करने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियों में जोरशोर से जुटी है, तो वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के पूर्व विधायक यूसुफ अब्राहनी ने पार्टी के सभी पद और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अब्राहनी ने अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। इसके साथ ही उसकी एक प्रति मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा व सांसद गायकवाड़ को भी भेजी है। संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा के अलावा दिवंगत बाबा सिद्दीकी और उनके बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी छोड़ दिया था कांग्रेस का साथ (Muslim leader leaves Congress)  कांग्रेस से इस्तीफा देने के बारे में यूसुफ अब्राहनी ने बताया कि “पार्टी की बहुत बुरी हालत है। और इसके जिम्मेदार पार्टी के नेता ही है।” जानकारी के मुताबिक उन्होंने यह बात राहुल गांधी को विस्तार से बताई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इससे वे बहुत निराश है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे है कि जल्द ही कांग्रेस के कई और नेता पार्टी को से इस्तीफा दे सकते हैं। गौरतलब हो कि पिछले साल संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा के अलावा दिवंगत बाबा सिद्दीकी और फिर उनके बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी कांग्रेस को राम-राम बोल (Muslim leader leaves Congress) दिया था। इसे भी पढ़ें:- सीएम योगी ने अपने तीसरे टर्म को लेकर कही यह बड़ी बात, मचा सियासी हड़कंप  यूसुफ अब्राहनी राज्य मंत्री के दर्जे के साथ म्हाडा के अध्यक्ष के रूप में भी कर चुके हैं (Muslim leader leaves Congress) बता दें कि पेशे से वकील यूसुफ अब्राहनी कई मुस्लिम संगठनों और एसोसिएशन से भी जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वो इस्लाम जिमखाना के अध्यक्ष हैं। वो राज्य मंत्री के दर्जे के साथ म्हाडा के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं। यही नहीं, वो मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अहम बात यह कि पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता भी छोड़ दी। हालांकि पूर्व विधायक यूसुफ अब्राहनी ने अपनी भविष्य की रणनीति के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। अभी तक कुछ नहीं पता चला है कि उनकी अगली रणनीति क्या होगी। क्या वो किसी अन्य दल में शामिल होंगे या फिर राजनीति से तौबा कर लेंगे। खैर, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दिए इस्तीफा पत्र (Muslim leader leaves Congress) में उन्होंने कांग्रेस और पार्टी से मिले स्नेह के लिए धन्यवाद भी दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi News  Muslim leader leaves Congress #CongressCrisis #WaqfBill #MuslimLeaderExit #MaharashtraPolitics #PoliticalShakeup #IndianPolitics #CongressNews #WaqfControversy #PartySwitch #MinorityPolitics

आगे और पढ़ें
Mahakaleshwar Temple

महाकाल का शृंगार: क्यों हर दिन बदलता है भगवान शिव का स्वरूप?

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के रूप महाकाल (Mahakaal) का प्रतिदिन विशेष शृंगार किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। आइए जानते हैं कि प्रतिदिन महाकाल का शृंगार अलग-अलग क्यों किया जाता है और इसके पीछे की क्या कहानी है। महाकाल का शृंगार: एक दिव्य परंपरा महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में भगवान शिव के रूप महाकाल का शृंगार प्रतिदिन अलग-अलग तरीके से किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। महाकाल का शृंगार उनके विभिन्न रूपों और भावों को दर्शाता है, जो भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप के करीब ले जाता है। शृंगार के पीछे का धार्मिक महत्व महाकाल का शृंगार (Mahakal Shringar) केवल सजावट नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है। यह शृंगार भगवान शिव के विभिन्न रूपों और उनकी लीलाओं को दर्शाता है। प्रतिदिन अलग-अलग शृंगार करने के पीछे का उद्देश्य भक्तों को भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों के दर्शन कराना और उनकी कृपा प्राप्त करना है। महाकाल का अनूठा शृंगार 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में विराजित बाबा महाकाल का हर दिन विभिन्न रूपों में शृंगार होता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार के विभिन्न रूप इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व महाकाल के शृंगार का महत्व उज्जैन स्थित महाकाल (Mahakaleshwar Temple) के मंदिर में हर दिन आरती के बाद बाबा को एक अलग रूप में सजाया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार (Mahakal Shringar) का यह अनूठा तरीका भक्तों को भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं और रूपों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है। यह शृंगार न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रति समर्पण और भक्ति का संदेश भी देता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Mahakaleshwar Temple #UddhavThackeray #BJP #ModiGovt #MaharashtraPolitics #ShivSena #LokSabhaElections #IndianPolitics #PoliticalAttack #MaharashtraNews #ModiVsOpposition

आगे और पढ़ें
Eknath Shinde & Kunal Kamra

हम व्यंग्य को समझते हैं, लेकिन इसकी एक सीमा होनी चाहिए: एकनाथ शिंदे 

महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। कॉमेडियन कुणाल कामरा (Comedian Kunal Kamra) द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy CM Eknath Shinde) पर की गई टिप्पणी के बाद विवाद तेजी से बढ़ गया है। एक ओर उद्धव ठाकरे (Udhaw Thakrey) गुट कुणाल कामरा के समर्थन में खड़ा है, तो दूसरी ओर मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने कामरा को समन जारी कर पेश होने के लिए कहा है। इस विवाद के बीच अब एकनाथ शिंदे का बयान भी सामने आ गया है, जिसमें उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बीबीसी मराठी के एक कॉन्क्लेव में इस मामले पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को है और हम व्यंग्य को समझते हैं, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए। किसी के खिलाफ बयान देना ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह ‘सुपारी’ लेकर बोला गया लगे। हर किसी को अपनी भाषा और स्तर का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।” एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने आगे कहा कि कुणाल कामरा (Kunal Kamra) की टिप्पणी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि किसी एजेंडे के तहत दिया गया बयान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि वे काम करने वाले व्यक्ति हैं और अनावश्यक बहस में पड़ना नहीं चाहते। शिवसेना कार्यकर्ताओं की तोड़फोड़ जब शिंदे से पूछा गया कि क्या वे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई तोड़फोड़ का समर्थन करते हैं, तो उन्होंने इस पर संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं कभी भी तोड़फोड़ का समर्थन नहीं करता, लेकिन जब कोई व्यक्ति आरोप लगाता है, तो उसे भी अपनी भाषा और स्तर का ध्यान रखना चाहिए। कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी। मैं संवेदनशील और सहनशील हूं, लेकिन सभी कार्यकर्ता इतने सहनशील नहीं हो सकते।” इस बयान से स्पष्ट होता है कि शिंदे सीधे तौर पर तोड़फोड़ का समर्थन नहीं कर रहे, लेकिन इसे कार्यकर्ताओं की स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं। क्या कहा था कुणाल कामरा ने? कुणाल कामरा  (Kunal Kamra)  ने मुंबई के खार इलाके में स्थित हैबिटेट स्टूडियो में एक कार्यक्रम के दौरान फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के गाने का संशोधित संस्करण प्रस्तुत कर एकनाथ शिंदे पर कटाक्ष किया था। इस प्रस्तुति में उन्होंने ‘गद्दार’ शब्द का उपयोग कर शिंदे पर तंज कसा, जिससे शिवसेना (Shiv Sena) कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया। इसके बाद रविवार रात बड़ी संख्या में शिवसेना (Shiv Sena) कार्यकर्ता होटल यूनिकॉन्टिनेंटल के बाहर इकट्ठा हुए, जहां क्लब स्थित था, और उन्होंने क्लब व होटल परिसर में तोड़फोड़ कर दी। इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ने कुणाल कामरा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। एमआईडीसी थाने के एक अधिकारी ने बताया कि कामरा पर भारतीय दंड संहिता की धारा 353(1)(बी) (सार्वजनिक उत्पात संबंधी बयान) और 356(2) (मानहानि) समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इसे भी पढ़ें: योगी सरकार के 8 साल: सेवा, सुरक्षा और सुशासन की मिसाल विवाद के राजनीतिक मायने इस पूरे विवाद का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर साफ दिख रहा है। एक तरफ उद्धव ठाकरे गुट इस मामले में कुणाल कामरा का समर्थन कर रहा है, तो दूसरी तरफ शिवसेना (शिंदे गुट) अपने नेता के बचाव में खड़ा है। यह विवाद न केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है, बल्कि इसमें कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस भी तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इसे हास्य और व्यंग्य की स्वतंत्रता मान रहे हैं, वहीं अन्य इसे लक्षित हमले के रूप में देख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कानूनी प्रक्रिया में इस मामले का क्या नतीजा निकलता है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) पर क्या प्रभाव पड़ता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Eknath Shende #ComedianKunalKamra #Shivsena #EknathShende #MahrashtraPolice

आगे और पढ़ें
Ajit Pawar on Muslims

Ajit Pawar on Muslims: जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे- अजित पवार 

महाराष्ट्र में नागपुर हिंसा को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। दरअसल, पूरा का पूरा विवाद महायुति सरकार द्वारा छत्रपति संभाजीनगर से औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग के बीच शुरू हुआ था। नागपुर हिंसा को लेकर विपक्ष द्वारा राज्य सरकार की आलोचना जारी रहने के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने मुंबई में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ सांप्रदायिक सद्भाव और एकता पर जोर देते हए कहा कि “होली, गुड़ी पड़वा और ईद जैसे त्यौहार एकजुटता को बढ़ावा देते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से मनाया जाना चाहिए, क्योंकि एकता ही देश की असली ताकत है।” यही नहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने मुसलमानों को (Ajit Pawar on Muslims) आश्वासन देते हुए कहा कि “आपका भाई अजित पवार आपके साथ है। जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, दो समूहों के बीच संघर्ष भड़काकर कानून व्यवस्था को बाधित करेगा, तथा कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा, फिर वो चाहे कोई भी हो.. उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं किया जाएगा।” ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं- अजित पवार  अजित पवार यही नहीं रुके, (Ajit Pawar on Muslims) उन्होंने आगे कहा कि “जो कोई भी दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करेगा, उसे कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने एकता पर जोर देते हुए कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बीआर अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और अन्य जैसे कई महान नेताओं ने सभी धर्मों और जातियों को साथ लेकर सामाजिक प्रगति का मार्ग दिखाया है। हमें इस विरासत को आगे बढ़ाना है। भारत एकता और विविधता का प्रतीक है। हमने अभी होली मनाई है और अब गुड़ी पड़वा और ईद आने वाली है। ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं। हमारी असली ताकत एकता में है।” बता दें कि रमजान इस्लामी धर्म का सबसे पवित्र महीना है। यह हिजरी (इस्लामी चंद्र कैलेंडर) के नौवें महीने में आता है। इस पवित्र अवधि के दौरान, मुसलमान भोर से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है। #WATCH | Mumbai | Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar, at an Iftar party hosted by him, says, "…India is a symbol of unity in diversity… We should not fall into the trap of any divisive forces. We have just celebrated Holi, Gudi Padwa and Eid are coming – all these festivals… pic.twitter.com/5s7hMhdGmb — ANI (@ANI) March 22, 2025 इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग एनसीपी अजित पवार गुट की तरफ से  किया गया था इफ्तारी का आयोजन बता दें कि मुसलमानों के पाक माह रमज़ान पर एनसीपी अजित पवार (Ajit Pawar on Muslims) गुट की तरफ से मुंबई के इस्लाम जिम खाना में इफ्तारी का आयोजन किया गया था। इस मौके पर अजित पवार, छगन भुजबल, सना मलिक, प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, नवाब मलिक सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। इसके अलावा भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी मौजूद थे। इस दौरान अजित पवार ने यह भी कहा कि “रमजान सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। और जरूरतमंदों की पीड़ा को समझने की प्रेरणा देता है।” बता दें कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय के पवित्र ग्रंथ को जलाये जाने की अफवाह के बाद मध्य नागपुर में सोमवार को तनाव उत्पन्न हो गया और पुलिस पर पथराव किया गया। इस दौरान चार लोग घायल हो गए।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ajit Pawar on Muslims #AjitPawar #MuslimsInIndia #MaharashtraPolitics #AjitPawarStatement #IndianPolitics #MuslimRights #NCP #PoliticalNews #SecularIndia #MaharashtraNews

आगे और पढ़ें
Aurangzeb’s Tomb Sparks Rift in Mahayuti Alliance

औरंगजेब की कब्र को लेकर महायुति में बढ़ता मतभेद

महाराष्ट्र में मुग़ल शासक औरंगजेब (Mughal ruler Aurangzeb) की कब्र को लेकर विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है, जिसमें महायुति के विभिन्न दलों के बीच मतभेद और तनाव देखने को मिल रहे हैं। यह विवाद खासतौर पर एनसीपी और हिंदू संगठनों जैसे वीएचपी और बजरंग दल के बीच बढ़ रहा है। एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा और इस कब्र को बचाने के पक्ष में बोलते हुए हिंदू संगठनों को कड़ी फटकार लगाई। उनका मानना है कि यह कब्र शिवाजी महाराज के संघर्ष का प्रतीक है और इसे हटाना ऐतिहासिक दृष्टिकोण से गलत होगा। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी का बयान एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने इस विवाद पर अपना स्पष्ट रुख पेश करते हुए कहा कि यह कब्र हमारी शौर्य की प्रतीक है और हमें इसे बचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह कब्र उस संघर्ष की याद दिलाती है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुआ था। इसे हटाना हमारी ऐतिहासिक धरोहर को मिटाने जैसा होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने कब्र को हटाने का अल्टीमेटम दिया है, वे इसका कोई हल नहीं निकाल सकते। मुख्यमंत्री ने पहले ही कह दिया था कि कब्र का निर्णय ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के पास है, न कि किसी राजनीतिक दल के पास। मिटकरी ने कहा, “यदि कोई यह कहता है कि हम इसे तोड़ देंगे, तो ऐसा नहीं होगा। हम थोड़ा धैर्य रखें और अपने वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।” अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में इस समय किसानों की समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन हिंदू संगठन इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे इस तरह के विवादित मुद्दों को उठाकर राज्य के असली मुद्दों से ध्यान हटा रहे हैं। “किसानों की सेवा करो, कार सेवा करने की बजाय किसानों के लिए प्रदर्शन करो, तभी लोगों से आशीर्वाद मिलेगा,” उन्होंने कहा। मिटकरी ने जोर दिया कि कब्र को रहने दिया जाए, लेकिन औरंगजेब का महिमामंडन न हो, क्योंकि यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने जैसा होगा। एनसीपी और एसपी का रुख महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र पर विवाद बढ़ने के बाद, NCP और SP ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। NCP-SP के उपाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने सांगली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे अब बातचीत की शुरुआत ‘जय शिवराय’ से करें, न कि ‘हेलो’ से। शिंदे ने यह भी कहा, “हम सभी शिवाजी महाराज के मावले हैं, और यही हमारी पहचान है।” इस आदेश से यह स्पष्ट है कि NCP और SP अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं और हिंदू समुदाय के सम्मान को बनाए रखने के लिए शिवाजी महाराज के नाम का प्रचार कर रहे हैं। यह कदम भी औरंगजेब की कब्र के विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, क्योंकि शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच का संघर्ष महाराष्ट्र के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर विशेष रूप से संवेदनशील है और अपने कार्यकर्ताओं के बीच एकता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट का बयान महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के बीच भी जुबानी जंग हुई। महाराष्ट्र विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने कहा कि कब्र की मौजूदगी महाराष्ट्र के इतिहास को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह बताना चाहिए कि औरंगजेब यहां आए थे और इसी भूमि पर उन्हें दफनाया गया।” दानवे ने जोर देते हुए कहा कि यह कब्र हमारी संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है, और इसे हटाने की मांग एक साजिश है, जो इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है। “अगर किसी को हिम्मत है तो वे जाकर इसे हटाकर दिखाएं,” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार राजनीतिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक महत्व औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) पर विवाद ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर हिंदू संगठनों का मानना है कि औरंगजेब की कब्र को हटाकर इस भूमि को ‘स्वतंत्रता’ का प्रतीक बनाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इस कब्र को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि यह कब्र उन संघर्षों और पराजयों का प्रतीक है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुए थे, और हमें इसे एक ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। यह विवाद सिर्फ एक कब्र का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी मुद्दा बन गया है। यह सवाल उठता है कि क्या हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहर को सही संदर्भ में स्वीकार करना चाहिए, या इसे अपने वर्तमान राजनीतिक और सांस्कृतिक रुख के अनुसार बदलने की कोशिश करनी चाहिए। यह निश्चित रूप से एक जटिल सवाल है, जो भविष्य में और भी राजनीतिक चर्चाओं और विवादों को जन्म दे सकता है। औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) को लेकर चल रहे इस विवाद ने महायुति की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। जहां एक ओर कुछ नेता इसे महाराष्ट्र के इतिहास और संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे से राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर प्रभाव पड़ेगा, और यह निश्चित रूप से आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Mughal ruler Aurangzeb #AurangzebTombDispute #MahayutiPolitics #ShivSenaVsBJP #MaharashtraPolitics #HinduSentiments #HistoryDebate #AurangzebGrave #PoliticalConflict #MarathaPride #HindutvaAgenda

आगे और पढ़ें
Sanjay Raut on Maharashtra Govt

महाराष्ट्र सरकार का शासन औरंगजेब से भी बदतर: संजय राउत 

महाराष्ट्र में मुगल शासक औरंगजेब (Aurangzeb) पर शुरू हुआ विवाद और राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बहस में अब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद पड़े हैं। राउत ने कहा है कि भाजपा की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार औरंगजेब से भी बदतर है। इस नकारी सरकार के कारण ही महाराष्ट्र के किसान मर रहे हैं, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या करने को मजबूर हैं।  बता दें कि औरंगजेब (Aurangzeb) को लेकर पिछले कई दिनों से सियासी संग्राम चल रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा विधायक अबु आजमी ने औरंगजेब को क्रूर शासक मानने से इनकार करते हुए कहा कि औरंगजेब के समय में भारत सोने की चिड़िया थी। औरंगजेब के समय में मंदिर नहीं तोड़ गए थे और संभाजी महाराज की हत्या राजनीतिक कारण से हुई थी। आजमी के इस बयान का सभी पार्टियों ने विरोध किया और खूब सियासी बयानबाजी हुई। बात औरंगजेब की कब्र खोदने तक पहुंच गई। अब इस विवाद में संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद गए हैं।  जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे- संजय  संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘औरंगजेब को जमीन के नीचे दफन हुए 400 साल हो चुका है, उसे भूल जाइए। क्या महाराष्ट्र के किसान औरंगजेब (Aurangzeb) के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। वे भाजपा की अगुवाई वाली सरकार की वजह से ऐसा कर रहे हैं।’ संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से मुगल शासक औरंगजेब ने अत्याचार किए थे, उसी तरह ये सरकार भी जनता पर अत्याचार कर रही है। इनकी वजह से किसान, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या कर रही। जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे हैं।   इसे भी पढ़ें:-गिरिडीह में होली जुलूस पर पत्थरबाजी, हिंसक झड़प और आगजनी संजय राउत ने यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के उस टिप्पणी पर दी। जिसमें फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा था कि हर देशवासी महसूस कर रहा है कि छत्रपति संभाजी नगर में मौजूद औरंगजेब की कब्र को हटा देना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता औरंगजेब का कब्र हटाने की नहीं सोच रही, वह इस अत्याचारी सरकार को हटाने की सोच रही है। यह सरकार राज्य को लूटने में जुटी हुई है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sanjay Raut #SanjayRaut #MaharashtraPolitics #ShivSena #UddhavThackeray #EknathShinde #BJPShivSena #Aurangzeb #MVA #MaharashtraNews #PoliticalControversy

आगे और पढ़ें
Dhananjay Munde resigns

Dhananjay Munde resigns : महाराष्ट्र सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे ने दिया इस्तीफा

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) ने आज यानी मंगलवार को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadnavis) ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। जल्द ही विधानसभा में इसकी औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। धनंजय मुंडे का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है, जो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। संतोष देशमुख हत्याकांड से जुड़ा इस्तीफा धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) का इस्तीफा बीड जिले के मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या से जुड़े घटनाक्रमों के बाद सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें हत्या की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इस हत्या के आरोप में मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड समेत कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हत्या की जांच के दौरान यह साफ हुआ कि मुख्य आरोपी वाल्मिक कराड धनंजय मुंडे के बेहद करीबी सहयोगी थे। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे विपक्ष का दबाव भी बढ़ता गया। इस पूरे मामले के कारण महाराष्ट्र सरकार को धनंजय मुंडे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा। विपक्ष ने दिया सरकार को अल्टीमेटम विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला था। विपक्षी दलों ने ऐलान किया था कि यदि धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) इस्तीफा नहीं देते, तो वे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। विपक्ष का आरोप था कि सरकार अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है और हत्या के मुख्य आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। सदन में हंगामे की आशंका के बीच एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार रात उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) के आवास पर एक बैठक की। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मामले की गंभीरता पर चर्चा की और धनंजय मुंडे को इस्तीफा देने की सलाह दी। धनंजय मुंडे पर इस्तीफे का दबाव क्यों बढ़ा? हत्या के मुख्य आरोपी वाल्मिक कराड और धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) के करीबी संबंध जगजाहिर हैं। खुद धनंजय मुंडे भी कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि कराड उनके विश्वासपात्र हैं। जब संतोष देशमुख हत्या (Santosh Deshmukh Murder) के चौंकाने वाले सबूत सामने आए, तो धनंजय मुंडे की मुश्किलें बढ़ गईं। क्या है संतोष देशमुख हत्याकांड? संतोष देशमुख हत्या (Santosh Deshmukh Murder) बीते साल दिसंबर का है, जब मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख को अगवा कर लिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अपहरण एक ऊर्जा कंपनी से जबरन वसूली की कोशिश को विफल करने के कारण हुआ था। आरोप है कि संतोष देशमुख ने कंपनी से अवैध वसूली को रोकने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें किडनैप कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई। हत्या के आरोपियों के धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) से करीबी संबंधों की बात सामने आने के बाद इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे धनंजय मुंडे की भूमिका पर सवाल उठने लगे। सरकार की सख्ती और आगे की कार्रवाई महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले ही संकेत दे दिए थे कि यदि धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) की संलिप्तता साबित होती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एनसीपी के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद थे, लेकिन पार्टी की छवि बचाने के लिए वरिष्ठ नेताओं ने धनंजय मुंडे को इस्तीफा देने की सलाह दी। अब जब मुंडे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, तो सवाल उठता है कि आगे क्या होगा? इसे भी पढ़ें:- कांग्रेसी प्रवक्ता के इस बयान पर मचा सियासी घमासान, रोहित शर्मा को कहा मोटा तो बीजेपी ने की राहुल से तुलना राजनीतिक असर और विपक्ष की रणनीति धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) का इस्तीफा महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह घटनाक्रम न केवल एनसीपी के लिए एक झटका है, बल्कि भाजपा और शिवसेना के लिए भी एक अवसर हो सकता है। विपक्षी दल अब इस मुद्दे को और उछालने की कोशिश कर सकते हैं ताकि सत्तारूढ़ दल की छवि को नुकसान पहुंचे। इस बीच, एनसीपी (NCP) को अपनी छवि सुधारने और संगठन को मजबूत करने के लिए नए रणनीतिक कदम उठाने होंगे। पार्टी नेतृत्व अब यह तय करेगा कि धनंजय मुंडे को आगे क्या भूमिका दी जाए या उनसे पूरी तरह दूरी बना ली जाए। धनंजय मुंडे का इस्तीफा (Dhananjay Munde Resignation) महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। संतोष देशमुख हत्याकांड से जुड़ी जांच और विपक्ष के भारी दबाव के चलते मुंडे को पद छोड़ना पड़ा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह भुनाने की कोशिश करता है। इस घटनाक्रम से साफ है कि अब महाराष्ट्र में राजनीति (Maharashtra Politics) और भी तीव्र होने वाली है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक गर्मा सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Dhananjay Munde #SantoshDeshmukhMurder #NCP #MaharashtraPolitics #Dhananjay Munde #Maharashtra #BJP

आगे और पढ़ें
Translate »