Sawan Somvar Vrat 2025

Sawan Somvar Vrat 2025: शिवलिंग पर अर्पित करें ये 11 चीजें, होगी हर मनोकामना पूरी

सावन का महीना भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना का सबसे पावन समय होता है। इस माह में प्रत्येक सोमवार को व्रत और पूजन का विशेष महत्व है, जिसे “सावन सोमवार व्रत” कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं। विशेष रूप से सावन सोमवार को शिवलिंग (Shivling) पर कुछ खास वस्तुएं चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और दुर्भाग्य दूर होकर किस्मत चमकने लगती है। आइए जानते हैं, शिवलिंग पर कौन-कौन सी चीजें चढ़ानी चाहिए और उनका आध्यात्मिक महत्व क्या है— शिवलिंग पर अर्पित करें ये 11 चीजें 1. गंगाजल – पवित्रता और शुद्धि का प्रतीक गंगाजल को भगवान शिव का सबसे प्रिय जल माना जाता है। इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन एवं शरीर की शुद्धि होती है। 2. दूध – आरोग्यता और संतुलन का प्रतीक शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह क्रोध और तनाव को भी शांत करता है। 3. बेलपत्र – शिव का विशेष प्रिय बेलपत्र को त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ध्यान रखें कि बेलपत्र ताजे और साफ हों। 4. भस्म – वैराग्य और तपस्या का चिन्ह शिव भस्मधारी हैं, इसलिए उन्हें भस्म अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। 5. धतूरा और आक – संकटों से रक्षा धतूरा और आक के फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से जीवन में आ रही बाधाएं और रोग दूर होते हैं। यह उपाय शत्रुओं से रक्षा और मानसिक शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है। 6. शहद – मधुरता और प्रेम का प्रतीक शहद शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन में सौहार्द, प्रेम और पारिवारिक शांति बनी रहती है। यह रिश्तों को मधुर बनाने वाला उपाय है। 7. सफेद पुष्प – सौम्यता का प्रतीक भगवान शिव को श्वेत पुष्प अत्यंत प्रिय होते हैं। कमल, कनेर और कुंद के फूल अर्पित करने से मानसिक शुद्धता और ईश्वर कृपा प्राप्त होती है। 8. फल और ताजे भोग – सुख और समृद्धि का माध्यम शिवलिंग पर मौसमी फल और मिठाई अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासतौर पर नारियल, केला और मिश्री शिवजी को अर्पित करना शुभ माना जाता है। 9. पंचामृत – पांच तत्वों का संतुलन पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन के पंचतत्व संतुलित होते हैं। यह उपाय सौभाग्य और दीर्घायु की प्राप्ति में सहायक होता है। 10. अक्षत और रोली – समर्पण का प्रतीक शुद्ध अक्षत (कच्चे चावल) और रोली से तिलक करने से पूजा का पूरक रूप बनता है। इससे शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 11. केसर – विवाह में सफलता यदि कोई कन्या योग्य वर की प्राप्ति की इच्छा रखती है, तो शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाना अत्यंत लाभकारी होता है। यह उपाय वैवाहिक जीवन में सुख और सौभाग्य लाता है। पूजा विधि का विशेष ध्यान रखें शिवलिंग पर ये सभी सामग्री अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। पूजन पूर्व दिशा की ओर मुख करके करें और पूरे विधिविधान से श्रद्धा और संयम के साथ यह अनुष्ठान करें। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां व्रत रखने के नियम: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Sawan2025 #SawanSomvar #ShivBhakti #Mahadev #ShivlingPuja #SomvarVrat #LordShiva #ShivaWorship #SawanVratTips #HarHarMahadev #SawanSomvarVrat2025

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क्या शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद खा सकते हैं? जानें शास्त्रों की मान्यताएं और नियम

हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। विशेषकर सावन माह, प्रदोष व्रत, सोमवार व महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल आदि अर्पित करते हैं। लेकिन एक सवाल अक्सर भक्तों के मन में आता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद (विशेषकर दूध, जल, फल आदि) क्या खाया जा सकता है या नहीं? क्या यह शुभ होता है या फिर इससे बचना चाहिए? आइए जानें भगवान शिव को अर्पित की गई पूजा सामग्री का क्या होता है महत्व? जानिए अभिषेक में चढ़े दूध, जल, भांग और बेलपत्र को खाने से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और उनके पीछे का तात्त्विक कारण।  शिवलिंग की पूजा और उसकी विशेषता शिवलिंग, भगवान शिव का निराकार रूप है और इसे सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और संहार का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग (Shivling) पर जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस प्रक्रिया को ‘अभिषेक’ कहा जाता है, जो कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का मुख्य साधन है। परंतु, प्रसाद के रूप में जो वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं, उनके उपयोग के कुछ विशिष्ट नियम भी शास्त्रों में दिए गए हैं। पौराणिक संदर्भ शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के मुख से चण्डेश्वर नामक गण उत्पन्न हुए थे, जिन्हें भूत-प्रेतों का अधिपति माना जाता है। मान्यता है कि शिवलिंग पर अर्पित किया गया भोग या प्रसाद चण्डेश्वर को समर्पित होता है। इसी कारण यह विश्वास प्रचलित है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद भोजन के रूप में ग्रहण करना ऐसा है, जैसे भूत-प्रेतों का भोजन करना। इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को खाने की मनाही होती है। मूर्ति पर अर्पित प्रसाद को किया जा सकता है ग्रहण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी, पीतल और तांबे जैसे धातुओं से बने शिवलिंग (Shivling) पर चढ़ाए गए प्रसाद को ग्रहण करना दोषरहित होता है। ऐसे प्रसाद को खाने से किसी प्रकार की बाधा नहीं होती। इसके अलावा, भगवान शिव (Lord Shiva) की प्रतिमा पर चढ़ाया गया प्रसाद भी शुभ और ग्रहणीय माना गया है। मान्यता है कि शिव मूर्ति पर अर्पित प्रसाद को श्रद्धापूर्वक सेवन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रसाद से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियां शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष सामग्री चढ़ाना निषेध माना गया है, जिनमें तुलसी के पत्ते और हल्दी प्रमुख हैं। ऐसे पदार्थों को भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, शिवलिंग पर अर्पित किए जाने वाले भोग को पीतल या चांदी जैसे पवित्र धातुओं से बने पात्र में रखना चाहिए। ध्यान रखें कि भोग को कभी भी सीधे भूमि पर न रखें। जब पूजा विधिवत पूर्ण हो जाए, तब उस प्रसाद को श्रद्धापूर्वक शिवलिंग के निकट से हटाना चाहिए। इससे धार्मिक मर्यादा बनी रहती है और पूजा सफल मानी जाती है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? प्रसाद से जुड़े आवश्यक नियम शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करना वर्जित माना गया है, जिनमें तुलसी के पत्ते और हल्दी प्रमुख हैं। शिवलिंग को प्रसाद अर्पित करते समय इसे पीतल या चांदी जैसे पवित्र धातु के पात्र में रखकर ही चढ़ाना चाहिए। कभी भी प्रसाद को सीधे भूमि पर नहीं रखना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद को शिवलिंग के समीप से उठाकर विधिपूर्वक अलग स्थान पर रखना चाहिए। इससे पूजा में शुद्धता बनी रहती है और धार्मिक नियमों का पालन भी होता है। बेलपत्र और धतूरा क्यों नहीं खाते? बेलपत्र भगवान शिव (Lord Shiva) को अत्यंत प्रिय है, लेकिन यह औषधीय गुणों से युक्त होते हुए भी आमतौर पर सेवन के योग्य नहीं माना गया है। वहीं धतूरा विषैला होता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है। इसलिए ये पूजन सामग्री केवल पूजा तक ही सीमित रखी जाती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Shivling #shivling #prasad #hindubeliefs #shivpuja #spiritualrules #scripturalbeliefs #shivalinga #prasadrituals

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