Aurangzeb’s Tomb Sparks Rift in Mahayuti Alliance

औरंगजेब की कब्र को लेकर महायुति में बढ़ता मतभेद

महाराष्ट्र में मुग़ल शासक औरंगजेब (Mughal ruler Aurangzeb) की कब्र को लेकर विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है, जिसमें महायुति के विभिन्न दलों के बीच मतभेद और तनाव देखने को मिल रहे हैं। यह विवाद खासतौर पर एनसीपी और हिंदू संगठनों जैसे वीएचपी और बजरंग दल के बीच बढ़ रहा है। एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा और इस कब्र को बचाने के पक्ष में बोलते हुए हिंदू संगठनों को कड़ी फटकार लगाई। उनका मानना है कि यह कब्र शिवाजी महाराज के संघर्ष का प्रतीक है और इसे हटाना ऐतिहासिक दृष्टिकोण से गलत होगा। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी का बयान एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने इस विवाद पर अपना स्पष्ट रुख पेश करते हुए कहा कि यह कब्र हमारी शौर्य की प्रतीक है और हमें इसे बचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह कब्र उस संघर्ष की याद दिलाती है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुआ था। इसे हटाना हमारी ऐतिहासिक धरोहर को मिटाने जैसा होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने कब्र को हटाने का अल्टीमेटम दिया है, वे इसका कोई हल नहीं निकाल सकते। मुख्यमंत्री ने पहले ही कह दिया था कि कब्र का निर्णय ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के पास है, न कि किसी राजनीतिक दल के पास। मिटकरी ने कहा, “यदि कोई यह कहता है कि हम इसे तोड़ देंगे, तो ऐसा नहीं होगा। हम थोड़ा धैर्य रखें और अपने वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।” अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में इस समय किसानों की समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन हिंदू संगठन इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे इस तरह के विवादित मुद्दों को उठाकर राज्य के असली मुद्दों से ध्यान हटा रहे हैं। “किसानों की सेवा करो, कार सेवा करने की बजाय किसानों के लिए प्रदर्शन करो, तभी लोगों से आशीर्वाद मिलेगा,” उन्होंने कहा। मिटकरी ने जोर दिया कि कब्र को रहने दिया जाए, लेकिन औरंगजेब का महिमामंडन न हो, क्योंकि यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने जैसा होगा। एनसीपी और एसपी का रुख महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र पर विवाद बढ़ने के बाद, NCP और SP ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। NCP-SP के उपाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने सांगली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे अब बातचीत की शुरुआत ‘जय शिवराय’ से करें, न कि ‘हेलो’ से। शिंदे ने यह भी कहा, “हम सभी शिवाजी महाराज के मावले हैं, और यही हमारी पहचान है।” इस आदेश से यह स्पष्ट है कि NCP और SP अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं और हिंदू समुदाय के सम्मान को बनाए रखने के लिए शिवाजी महाराज के नाम का प्रचार कर रहे हैं। यह कदम भी औरंगजेब की कब्र के विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, क्योंकि शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच का संघर्ष महाराष्ट्र के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर विशेष रूप से संवेदनशील है और अपने कार्यकर्ताओं के बीच एकता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट का बयान महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के बीच भी जुबानी जंग हुई। महाराष्ट्र विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने कहा कि कब्र की मौजूदगी महाराष्ट्र के इतिहास को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह बताना चाहिए कि औरंगजेब यहां आए थे और इसी भूमि पर उन्हें दफनाया गया।” दानवे ने जोर देते हुए कहा कि यह कब्र हमारी संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है, और इसे हटाने की मांग एक साजिश है, जो इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है। “अगर किसी को हिम्मत है तो वे जाकर इसे हटाकर दिखाएं,” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार राजनीतिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक महत्व औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) पर विवाद ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर हिंदू संगठनों का मानना है कि औरंगजेब की कब्र को हटाकर इस भूमि को ‘स्वतंत्रता’ का प्रतीक बनाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इस कब्र को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि यह कब्र उन संघर्षों और पराजयों का प्रतीक है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुए थे, और हमें इसे एक ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। यह विवाद सिर्फ एक कब्र का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी मुद्दा बन गया है। यह सवाल उठता है कि क्या हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहर को सही संदर्भ में स्वीकार करना चाहिए, या इसे अपने वर्तमान राजनीतिक और सांस्कृतिक रुख के अनुसार बदलने की कोशिश करनी चाहिए। यह निश्चित रूप से एक जटिल सवाल है, जो भविष्य में और भी राजनीतिक चर्चाओं और विवादों को जन्म दे सकता है। औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) को लेकर चल रहे इस विवाद ने महायुति की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। जहां एक ओर कुछ नेता इसे महाराष्ट्र के इतिहास और संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे से राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर प्रभाव पड़ेगा, और यह निश्चित रूप से आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Mughal ruler Aurangzeb #AurangzebTombDispute #MahayutiPolitics #ShivSenaVsBJP #MaharashtraPolitics #HinduSentiments #HistoryDebate #AurangzebGrave #PoliticalConflict #MarathaPride #HindutvaAgenda

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