Discover how Harsingar can bring happines

हारसिंगार के चमत्कारी उपाय: घर लाएं सुख, शांति और समृद्धि

भारतवर्ष में अनेक फूलों को धार्मिक, आयुर्वेदिक और वास्तुशास्त्र में विशेष स्थान प्राप्त है। इन्हीं में से एक है हारसिंगार (Harsingar), जिसे पारिजात या शैफालिका के नाम से भी जाना जाता है। पारिजात यानी हारसिंगार का पौधा न केवल आयुर्वेद में गुणकारी है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी इसका महत्व अत्यधिक है। जानिए इससे जुड़े कुछ ऐसे सरल उपाय जो दूर कर सकते हैं जीवन की कई परेशानियां। यह फूल न केवल अपनी सुंदरता और सुगंध के लिए जाना जाता है, बल्कि इसके आध्यात्मिक और औषधीय गुण भी इसे विशेष बनाते हैं। आइए जानते हैं हारसिंगार से जुड़े कुछ ऐसे चमत्कारी उपाय, जो आपकी कई तरह की परेशानियों को दूर कर सकते हैं। हारसिंगार का पौधा घर में लगाने से क्या होते हैं लाभ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, हारसिंगार (Harsingar) का पौधा घर के उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। यह पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। हरसिंगार से कार्यक्षेत्र में मिलेगी तरक्की नौकरी या व्यापार में सफलता पाने के लिए हरसिंगार (Harsingar) के फूलों को विशेष रूप से प्रभावशाली माना गया है। मान्यता है कि यदि हरसिंगार के 21 फूल लेकर उन्हें लाल कपड़े में बांधकर घर या व्यापार स्थल के पूजा स्थान पर माता लक्ष्मी के समीप रखा जाए, तो इससे व्यापार में प्रगति होती है और नौकरी में भी बेहतर अवसर प्राप्त होते हैं। यह उपाय न केवल करियर में सकारात्मक बदलाव लाता है, बल्कि यदि कोई रुकावट या समस्या आ रही हो, तो उसे भी दूर करने में मदद करता है। आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए उपाय यदि कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी या पैसों की कमी से जूझ रहा है, तो हरसिंगार (Harsingar) से जुड़ा यह उपाय लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इसके लिए हरसिंगार के पौधे की जड़ का एक छोटा-सा टुकड़ा लें और उसे घर में उस स्थान पर रखें जहां आप धन-संपत्ति या पैसे रखते हैं। ऐसा करने से धीरे-धीरे आर्थिक समस्याएं कम होने लगती हैं और घर में धन की स्थिरता आने लगती है। विवाह में आ रही बाधाएं होंगी दूर यदि किसी व्यक्ति के विवाह में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तो पारिजात से जुड़ा यह सरल उपाय लाभकारी हो सकता है। मंगलवार के दिन पारिजात के फूलों को हल्दी की गांठ के साथ नारंगी कपड़े में बांध लें और इसे अपने घर के मंदिर में माता गौरी की प्रतिमा या चित्र के सामने अर्पित करें। ऐसा विधिपूर्वक करने से विवाह की संभावनाएं मजबूत होती हैं और शीघ्र विवाह के योग बनने लगते हैं। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय नौकरी में तरक्की पाने के लिए करें हरसिंगार का यह उपाय अगर लगातार प्रयासों के बावजूद भी नौकरी में पदोन्नति (Harsingar) नहीं मिल रही है, तो मंगलवार के दिन यह उपाय लाभकारी हो सकता है। हरसिंगार के फूलों का एक गुच्छा लें और उसे लाल कपड़े में सावधानीपूर्वक लपेटकर माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करें। हरसिंगार से जुड़ी धार्मिक मान्यता जहां सामान्यतः किसी भी फूल के जमीन पर गिरने के बाद उसे पूजा में उपयोग नहीं किया जाता, वहीं हरसिंगार के फूलों को विशेष महत्व प्राप्त है। केवल वे फूल जो अपने आप पेड़ से टूटकर गिरते हैं, पूजा के लिए स्वीकार्य माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरसिंगार का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था और इंद्रदेव ने इसे स्वर्गलोक में स्थापित किया था। इसी वजह से इसे स्वर्ग से धरती पर आया एक पवित्र और दिव्य पौधा माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि जिस घर में हरसिंगार का पौधा होता है, वहां माँ लक्ष्मी का स्थायी वास बना रहता है और उस घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Harsingar #harsingar #spiritualplant #vastutips #peaceandprosperity #miracleplant #naturalremedies

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Is West-Facing Kitchen Good

क्या पश्चिम दिशा में किचन बनाना सही है? जानें वास्तु शास्त्र की राय और उपाय

भारतीय वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वास्तु का विशेष महत्व होता है। जिस प्रकार घर में मुख्य द्वार, पूजा स्थान या शयनकक्ष के लिए दिशाओं का ध्यान रखना जरूरी होता है, उसी तरह रसोईघर (किचन) की दिशा भी जीवन पर प्रभाव डालती है। अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि पश्चिम दिशा में रसोई बनाना शुभ होता है या अशुभ? आइए इस लेख में जानते हैं इस विषय पर विस्तृत जानकारी, पौराणिक मान्यताओं और वास्तु विशेषज्ञों की सलाह।  क्या कहता है वास्तु शास्त्र?  वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर यानी किचन अग्नि तत्व से जुड़ा होता है, इसलिए इसे आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में बनाना सबसे उत्तम माना गया है। अग्नि देवता का संबंध दक्षिण-पूर्व से है और यह दिशा ऊर्जा, उत्साह और स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन आधुनिक समय में ज़मीन की स्थिति या घर के नक्शे के अनुसार सभी के लिए यह दिशा उपलब्ध हो पाना संभव नहीं होता। पश्चिम दिशा में रसोई का निर्माण शुभ है या अशुभ, यह जानना हर गृहिणी के लिए जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि रसोई पश्चिम दिशा में बनी हो तो क्या यह अशुभ है? पश्चिम दिशा में रसोई: शुभ या अशुभ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर के लिए सबसे उपयुक्त स्थान आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा मानी जाती है, क्योंकि यह दिशा शुक्र ग्रह की होती है, जो सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का कारक है। यदि किसी कारणवश रसोई इस दिशा में नहीं बनाई जा सकती, तो पूर्व दिशा भी एक विकल्प हो सकती है। लेकिन यदि रसोई पश्चिम दिशा में है, तो इसे वास्तु की दृष्टि से अनुकूल नहीं माना जाता। पश्चिम दिशा में किचन होने से घर में लगातार बीमारियों, तनाव, गृह कलह और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। चूंकि रसोई अग्नि तत्व से जुड़ी होती है और पश्चिम दिशा इससे मेल नहीं खाती, इसलिए यह स्थिति घर की ऊर्जा को असंतुलित कर सकती है और अशुभ प्रभाव ला सकती है। पश्चिम दिशा में किचन है तो ये उपाय अपनाएं वास्तु दोष होने पर क्या करें उपाय? यदि आपके घर में किचन पश्चिम दिशा में है और आप दिशा बदलना संभव नहीं समझते, तो वास्तु विशेषज्ञ कुछ सरल उपायों से नकारात्मकता को कम करने की सलाह देते हैं: चूल्हा इस प्रकार लगाएं कि खाना बनाते समय मुंह पूर्व दिशा की ओर हो। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर दिशा की ओर भी किया जा सकता है। पश्चिम दिशा में किचन हो तो दीवारों का रंग हल्का पीला, क्रीम या संतरी (ऑरेंज) रखें। ये रंग ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से किचन में गौ धूप, कपूर या हवन सामग्री जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है। किचन के उत्तर-पूर्व कोने में तांबे का बर्तन रखें। यह ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। किचन की पूर्वी दीवार पर भगवान अन्नपूर्णा माता या श्री गणेश जी की तस्वीर लगाएं। रसोई में नियमित सफाई और पर्याप्त वेंटीलेशन जरूरी है। किचन में एक छोटा सा पौधा भी सकारात्मक ऊर्जा देता है। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय पश्चिम दिशा में रसोई: क्या कहा गया है शास्त्रों में? वास्तु शास्त्र में किसी भी दिशा को पूर्णत: निषेध नहीं किया गया है। हर दिशा में जीवन और प्रकृति के तत्वों का सामंजस्य होता है। यदि उस दिशा में रसोई बनती है, तो उसमें कुछ सावधानियों और उपचारों से वास्तु दोष को नियंत्रित किया जा सकता है। पश्चिम दिशा को यम की दिशा भी माना जाता है, परंतु यदि उसका सही उपयोग किया जाए, तो यह दिशा भी समृद्धि का स्रोत बन सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi news उत्तर-पूर्व दिशा #vastu #kitchenvastu #westfacingkitchen #vastutips #vasturemedies #homeenergy #positivevibes

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gold ring finger

सोने की अंगूठी किस उंगली में पहनते हैं आप? कहीं ये आदत न बन जाए मुसीबत की जड़!

भारत में सोने की अंगूठी पहनना न केवल फैशन और परंपरा का हिस्सा है, बल्कि इसे समृद्धि, सौभाग्य और शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। खासकर शादीशुदा स्त्रियों और पुरुषों के लिए सोने की अंगूठी पहनना आम बात है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंगूठी किस उंगली में पहनना चाहिए और किसमें नहीं – इसका सीधा प्रभाव आपकी सेहत, धन-धान्य और जीवन की ऊर्जा पर पड़ सकता है? अगर आप भी बिना ज्योतिषीय या स्वास्थ्य दृष्टिकोण जाने अंगूठी पहनते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।  सोने की अंगूठी का धार्मिक महत्व भारत में सोने को बेहद पवित्र धातु माना जाता है। इसे माता लक्ष्मी का प्रतीक कहा गया है। यही वजह है कि लोग इसे गहनों के रूप में पहनते हैं ताकि देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। लेकिन आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों मानते हैं कि सोना शरीर में ऊष्मा पैदा करता है, और इसका असर शरीर की ऊर्जा प्रणाली पर पड़ता है। ज्योतिष और विज्ञान दोनों मानते हैं कि सोने की अंगूठी गलत उंगली में पहनना ला सकता है दुर्भाग्य और स्वास्थ्य समस्याएं। जानिए किस उंगली में पहनना है सही और क्यों बाकी उंगलियों से बचना जरूरी है। कौन सी उंगली में नहीं पहननी चाहिए सोने की अंगूठी? मध्यमा उंगली (Middle Finger) मध्यमा उंगली में सोने की अंगूठी पहनना शुभ नहीं माना जाता। यह उंगली शनि ग्रह से जुड़ी होती है, जबकि सोना सूर्य से संबंधित है। इन दोनों ग्रहों के स्वभाव में विरोध होने के कारण, इस उंगली में सोने की अंगूठी (Gold Ring) पहनना जीवन में बाधाएं, धन हानि और नकारात्मकता को आमंत्रित कर सकता है। इसे ऐसा कदम माना जाता है जैसे कोई व्यक्ति खुद ही अपने लिए परेशानी खड़ी कर रहा हो। इसलिए इस उंगली में सोने की अंगूठी पहनने से हमेशा बचना चाहिए। अंगूठा (Thumb) जहां तक अंगूठे की बात है, आमतौर पर इस उंगली में अंगूठी पहनने की परंपरा नहीं है। विशेष रूप से सोने की अंगूठी तो बिल्कुल भी नहीं पहननी चाहिए, क्योंकि अंगूठा चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इस उंगली में सोने की बजाय चांदी का उपयोग अधिक शुभ और लाभकारी होता है। सोने की अंगूठी (Gold Ring) पहनने से यहां मानसिक असंतुलन और भावनात्मक अशांति की संभावना बढ़ सकती है, इसलिए इसे धारण करने से परहेज करना चाहिए। कनिष्ठा उंगली (Little Finger) कनिष्ठा उंगली बुध ग्रह से जुड़ी होती है, जो संवाद कौशल, बुद्धिमत्ता, तर्कशक्ति और व्यापार से संबंधित होता है। यदि कोई व्यक्ति संवाद, लेखन या व्यवसाय के क्षेत्र में है और अपनी बातों में प्रभाव बढ़ाना चाहता है, तो इस उंगली में सोने की अंगूठी पहनना फायदेमंद हो सकता है। यह निर्णय क्षमता को बेहतर बनाती है और सोच में स्पष्टता लाती है। कौन सी उंगली है सबसे शुभ? तर्जनी उंगली (Index Finger) अगर आप अपने भीतर आत्मविश्वास, विवेक और आध्यात्मिक गुणों को विकसित करना चाहते हैं, तो तर्जनी उंगली में सोने की अंगूठी पहनना लाभकारी साबित हो सकता है। यह उंगली गुरु ग्रह बृहस्पति से संबंधित होती है, जिसे शिक्षा, ज्ञान और नेतृत्व का प्रतीक माना गया है। अनामिका उंगली (Ring Finger) सोने की अंगूठी (Gold Ring) पहनने के लिए अनामिका उंगली को सबसे शुभ माना जाता है। यह उंगली सूर्य और शुक्र ग्रह से जुड़ी होती है, जो आकर्षण, रचनात्मकता, प्रसिद्धि और नेतृत्व जैसी गुणों को बढ़ावा देती है। इसलिए शादी के बाद अधिकतर महिलाएं इसी उंगली में अंगूठी पहनती हैं, जिसे मंगलकारी और शुभ संकेत माना जाता है। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग नियम ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पुरुषों और महिलाओं के लिए अंगूठी पहनने के नियम थोड़े अलग होते हैं। पुरुषों को दाहिने हाथ में अंगूठी पहननी चाहिए, जबकि स्त्रियों के लिए बायां हाथ शुभ माना जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Gold Ring #goldring #ringfinger #vastutips #astrologytips #ringwearingrules #jewelrytips #stayalert #luckycharm #avoidmistakes

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Tulsi plant dried

तुलसी के नियम: सूख जाए तुलसी का पौधा तो घबराएं नहीं, अपनाएं ये उपाय, मिलेगी सुख-समृद्धि

तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय माना जाता है। इसे केवल एक साधारण पौधा नहीं, बल्कि देवी का स्वरूप माना गया है। तुलसी (Tulsi) को ‘विष्णुप्रिया’ कहा गया है और यह हर घर की आस्था, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी (Tulsi) का पौधा घर में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि समय के साथ तुलसी के पत्ते सूख जाते हैं या पौधा पूर्ण रूप से सूख जाता है। ऐसे में कई लोग भ्रमित हो जाते हैं कि क्या सूखी तुलसी को फेंकना पाप होगा या इसके लिए कोई विशेष नियम हैं? तो आइए जानें तुलसी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताएं और सूखी तुलसी से जुड़े नियम (Tulsi Rule), जिनका पालन करने से दोष नहीं लगता, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। तुलसी का धार्मिक महत्व तुलसी (Tulsi) का उल्लेख अनेक पुराणों और धर्मग्रंथों में मिलता है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में तुलसी (Tulsi) की महिमा का विस्तृत वर्णन है। माना जाता है कि तुलसी के पौधे में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का वास होता है। इसे घर में लगाना पवित्रता का प्रतीक माना गया है। हर दिन तुलसी की पूजा करना, उसके सामने दीप जलाना और “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जाप करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और दरिद्रता दूर होती है। क्या करें सूखी हुई तुलसी के पत्तों या पौधे का? अगर आपके घर में तुलसी (Tulsi) का पौधा बिना मौसम के अचानक सूख जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह घर में बढ़ती नकारात्मक ऊर्जा, पारिवारिक कलह या आर्थिक नुकसान का संकेत हो सकता है। हालांकि तुलसी का सूखना स्वाभाविक भी हो सकता है, लेकिन यदि यह अनायास और बिना कारण हो रहा है, तो कुछ विशेष उपायों को अपनाकर आप सकारात्मक ऊर्जा को फिर से आमंत्रित कर सकते हैं। 1. तुलसी की जड़ को प्रवेश द्वार पर टांगेसूखी तुलसी (Tulsi) के पौधे की जड़ को धीरे से निकालकर साफ पानी से धो लें। इसके बाद इसे लाल या पीले रंग के साफ कपड़े में लपेट लें और घर के मुख्य द्वार पर टांग दें। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनाए रखता है। 2. तुलसी की लकड़ियों से बनाएं दीपकसूखी हुई तुलसी (Tulsi) से सात छोटी-छोटी लकड़ियां एकत्र करें और इन्हें सूत या कलावे से बांध दें। अब इन लकड़ियों को गाय के घी में डुबोकर एक दीपक में रखें और भगवान विष्णु के सामने जलाएं। यह उपाय विशेष रूप से एकादशी या त्रयोदशी तिथि पर करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में शांति बनी रहती है। 3. गंगाजल से करें शुद्धिकरणतुलसी (Tulsi) की इन्हीं सात लकड़ियों को साप्ताहिक रूप से गंगाजल में भिगो दें। इसके बाद उसी गंगाजल से पूरे घर में हल्का छिड़काव करें। यह विधि घर से नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने में सहायक होती है और वातावरण को पवित्र बनाती है। 4. तुलसी की लकड़ी पर्स या तिजोरी में रखेंतुलसी की सात लकड़ियों को पूजन कर एक लाल कपड़े या पीले धागे में बांध लें। अब इसे अपने पर्स, तिजोरी या धन रखने के स्थान में रखें। यह उपाय धन की स्थिरता बनाए रखने में सहायक माना गया है और इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां 5. तुलसी की जड़ से करें ग्रह दोष निवारणयदि आपकी कुंडली में ग्रह दोष हैं, तो सूखी तुलसी की थोड़ी सी जड़ लेकर उसे लाल कपड़े में लपेटें और इसे गले या बाजू में धारण करें। यह उपाय नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को कम करता है और कुंडली में संतुलन स्थापित करता है। इन सभी उपायों में आस्था और श्रद्धा अत्यंत आवश्यक है। तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि एक देवी स्वरूप है, जिसकी पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। इसलिए जब भी तुलसी का पौधा सूख जाए, तो उसे फेंकने के बजाय इन उपायों से उसका सम्मानजनक निस्तारण करें और उसके दिव्य प्रभाव का लाभ उठाएं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Tulsi #Tulsi #VastuTips #PlantCare #HolyBasil #TulsiRemedies #SpiritualBenefits #PositiveEnergy #HinduRituals #GardeningTips

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Vastu Turtle Placement

वास्तु के अनुसार कछुआ रखने से घर में होगी धन की बरसात, जानें कछुए रखने की सही दिशा और महत्व

वास्तु शास्त्र में कछुआ (Tortoise) को बेहद शुभ और समृद्धि लाने वाला प्रतीक माना गया है। यह दीर्घायु, स्थिरता और धन का प्रतीक है। घर में लकड़ी या क्रिस्टल का कछुआ रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन का प्रवाह बढ़ता है। लेकिन, इसे सही दिशा और सही तरीके से रखना जरूरी है, नहीं तो इसका प्रभाव कम हो सकता है।  क्यों होता है कछुआ शुभ? कछुए (Tortoise) को भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हिंदू धर्म में कछुए को भगवान विष्णु का कूर्म अवतार माना जाता है। समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने कछुए का रूप धारण किया था, जिससे यह जीव शक्ति, धैर्य और समृद्धि का प्रतीक बन गया। फेंगशुई में भी कछुआ एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे जीवन में स्थिरता, दीर्घायु और आर्थिक समृद्धि लाने वाला माना जाता है। वास्तु और फेंगशुई के अनुसार, घर या कार्यालय में कछुए को रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। लकड़ी और क्रिस्टल का कछुआ क्यों है खास? विभिन्न प्रकार के कछुए (Tortoise) बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन लकड़ी और क्रिस्टल से बने कछुए को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कछुआ रखने की सही दिशा इसे भी पढ़ें:- इस दिन से शुरू होने वाली है Char Dham Yatra 2025, साइबर ठगी से बचने हेतु पुलिस ने श्रद्धालुओं से की यह खास अपील घर में कछुआ रखने के लाभ घर में कछुआ (Tortoise) रखने को वास्तु शास्त्र में अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल सौभाग्य और समृद्धि लाने वाला होता है, बल्कि घर के वातावरण को भी सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। आइए जानते हैं, कछुआ रखने के प्रमुख लाभ: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Tortoise #VastuTips #TurtleForWealth #VastuRemedies #HomeVastu #TortoiseDirection #ProsperityTips #FengShuiVastu #SpiritualHome #WealthVastu #LuckyTurtle

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Maa Lakshmi

इन 5 छोटे जीवों का घर में हो रहा है आगमन, तो समझलें लक्ष्मी जी आ रही हैं आपके घर 

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कुछ जीवों (Creature) का घर में आना शुभ संकेत माना जाता है। इन्हें देखकर न सिर्फ खुश होना चाहिए, बल्कि इनका सम्मान भी करना चाहिए, क्योंकि ये धन और सुख-समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं ये शुभ जीव? लक्ष्मी जी आ रही हैं आपके घर  1. छिपकली– धनवर्षा का संकेत शास्त्रों में छिपकली को बेहद शुभ माना गया है। अगर घर में छिपकली दिखाई दे, खासकर अगर वह आपके शरीर पर गिर जाए, तो यह बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है। कहते हैं कि इससे धन लाभ होता है और लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है। 2. तोता – समृद्धि का प्रतीक शकुन शास्त्र के अनुसार, घर में तोते का आना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे भगवान कुबेर का प्रतीक माना जाता है। जब तोता घर में प्रवेश करता है, तो यह सुख-समृद्धि और खुशहाली का संकेत होता है। कहा जाता है कि तोता अपने साथ सकारात्मक समाचार लेकर आता है। 3. चींटी – मेहनत का फल मिलता है चींटियों का घर में आना भी शुभ माना जाता है, खासकर अगर वे लाल चींटियां हों। मान्यता है कि चींटियों को शक्कर डालने से मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) प्रसन्न होती हैं इसके साथ ही, ऐसा माना जाता है कि तोते के आगमन से घर में धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। 4. तितली – सुख-शांति का संदेश तितली का घर में प्रवेश करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसे सौभाग्य और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। अगर तितली आपके सिर के ऊपर से गुजर जाए, तो यह बहुत ही शुभ संकेत होता है। 5. गौरैया (चिड़िया) – खुशखबरी लाती है गौरैया का घर में आना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अगर गौरैया आपके घर में घोंसला बना ले, तो वहां सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसे भी पढ़ें:- जहाँ रक्तबीज का वध करके अंतर्ध्यान हुईं थीं माँ काली, नवरात्रि में दर्शन से पूरी होती हैं मनोकामनाएँ क्या करें जब ये जीव दिखें? नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Maa Lakshmi #GoddessLakshmi #LuckySigns #HomeProsperity #WealthAttracting #SpiritualSigns #VastuTips #PositiveEnergy #GoodLuck #LakshmiBlessings #FortuneSigns

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जूते-चप्पल को सही जगह पर रखकर बनाएं घर को सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र

हमारे जीवन में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। वास्तु के अनुसार घर की हर छोटी-बड़ी चीज का सही स्थान और दिशा हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। ऐसे में जूते-चप्पल, जो हमारे दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हैं, उन्हें रखने के लिए भी वास्तु नियमों का पालन करना जरूरी है। अगर जूते-चप्पल को गलत जगह या गलत तरीके से रखा जाए, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और जीवन में अशांति आ सकती है। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार जूते-चप्पल को घर में कहां और कैसे रखना चाहिए। जूते-चप्पल रखने का सही स्थान इसे भी पढ़ें:- सपने में सांप देखने का मतलब: डरने की नहीं, समझने की है जरूरत जूते-चप्पल रखने के कुछ अन्य वास्तु नियम नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news जूते-चप्पल #PositiveHomeVibes #VastuTips #HomeEnergy #GoodVibesOnly #OrganizedLiving #ClutterFreeHome #HomeHappiness #PositiveEnergy #VastuShastra #PeacefulLiving

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Bedroom Vastu Tips

Bedroom Vastu Tips: बेडरूम में नेगेटिव एनर्जी से बचने के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स

वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम (Bedroom) घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि यहां हम अपना अधिकांश समय आराम और नींद में बिताते हैं। लेकिन कई बार बेडरूम डिजाइन करते समय लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो नेगेटिव एनर्जी को आकर्षित करती हैं। इससे न केवल नींद प्रभावित होती है, बल्कि जीवन में तनाव और समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। आइए जानते हैं कि बेडरूम बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कैसे नेगेटिव एनर्जी से बचा जा सकता है। बेडरूम के लिए जरूरी चीजें शास्त्रों के अनुसार बेडरूम का आरामदायक और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए सबसे पहले एक अच्छी क्वालिटी का गद्दा होना चाहिए, जो पीठ दर्द और शरीर के दर्द से बचाव करता है। इसके अलावा, कमरे में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए, लेकिन बहुत तेज रोशनी से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह नींद को प्रभावित कर सकती है। नाइट लैंप का उपयोग करने से कमरे में शांति बनी रहती है। बेडरूम के रंग (Bedroom Color) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हल्के और सौम्य रंग मानसिक शांति प्रदान करते हैं, जबकि अधिक गहरे रंग तनाव बढ़ा सकते हैं। साथ ही, कमरे में अच्छी सुगंध का होना भी आवश्यक है, जिसके लिए सुगंधित मोमबत्तियां या एसेंशियल ऑयल डिफ्यूज़र का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, अच्छी क्वालिटी के परदे भी जरूरी हैं, जो कमरे में पर्याप्त अंधेरा बनाए रखते हैं और गोपनीयता सुनिश्चित करते हैं। बेडरूम के लिए वास्तु टिप्स (Bedroom Vastu Tips) 1. बेडरूम की दिशा और स्थान वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह दिशा स्थिरता और शांति का प्रतीक मानी जाती है। अगर बेडरूम उत्तर-पूर्व दिशा में बनाया जाता है, तो यह नेगेटिव एनर्जी को आकर्षित करता है और जीवन में अशांति लाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार बेडरूम कभी भी घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं होना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और व्यक्ति की मानसिक शांति प्रभावित होती है। 2. बेड की सही पोजिशनिंग बेडरूम में बेड की सही पोजिशनिंग बेहद जरूरी है। वास्तु के अनुसार, बेड हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर सिर करके लगाना चाहिए। इससे नींद अच्छी आती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर बेड उत्तर दिशा की ओर सिर करके लगाया जाता है, तो यह नेगेटिव एनर्जी (Negative Energy) को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, बेड कभी भी खिड़की या दरवाजे के ठीक सामने नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का रिसाव होता है। 3. दर्पण का गलत प्लेसमेंट बेडरूम (Bedroom) में दर्पण का गलत प्लेसमेंट भी नेगेटिव एनर्जी को आकर्षित करता है। वास्तु के अनुसार, दर्पण कभी भी बेड के सामने नहीं लगाना चाहिए। इससे व्यक्ति की ऊर्जा प्रभावित होती है और नींद में बाधा आती है। अगर बेडरूम में दर्पण लगाना जरूरी हो, तो इसे बेड के साइड में लगाएं और सोते समय इसे कपड़े से ढक दें। इससे नेगेटिव एनर्जी (Negative Energy) से बचा जा सकता है। 4. बेडरूम की सफाई और वेंटिलेशन है जरूरी राजाराम के अनुसार, बेडरूम को अधिक आरामदायक बनाने के लिए उसमें पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह होना आवश्यक है। यदि कमरे में खिड़की नहीं है या वेंटिलेशन सही नहीं है, तो यह सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, ताजी हवा के लिए उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था करना जरूरी है। साथ ही, बेडरूम में अनावश्यक सामान और गंदगी इकट्ठा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) बढ़ सकती है। एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित कमरा सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा, ताजगी बनाए रखने के लिए कमरे में एक छोटा इनडोर प्लांट लगाना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे भी पढ़ें:- दो बार बन रहा है यह दुर्लभ योग, जानें किनके लिए है विशेष शुभ 5. पौधों का चयन बेडरूम (Bedroom) में पौधे लगाना अच्छा माना जाता है, लेकिन कुछ पौधे नेगेटिव एनर्जी को बढ़ावा देते हैं। वास्तु के अनुसार, बेडरूम में कांटेदार पौधे या सूखे हुए पौधे नहीं रखने चाहिए। बेडरूम में तुलसी, मनी प्लांट या लकी बांस जैसे पौधे रख सकते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करते हैं। 6. प्रकाश का सही उपयोग बेडरूम (Bedroom) में प्रकाश का सही उपयोग भी बेहद जरूरी है। वास्तु के अनुसार, बेडरूम में तेज रोशनी वाले बल्ब या ट्यूब लाइट नहीं लगाने चाहिए। इससे मन अशांत होता है और नींद प्रभावित होती है। बेडरूम में हल्की और मध्यम रोशनी का उपयोग करना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news #BedroomVastu #VastuTips #PositiveEnergy #VastuForHome #BedroomDecor #VastuShastra #HomeEnergy #VastuRemedies #HealthyLiving #VastuForPeace

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स्वस्तिक का महत्व

Swastik benefits : स्वस्तिक बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान, तभी मिलेगा शुभ परिणाम

स्वस्तिक का प्रतीक हिन्दू धर्म में एक बेहद शुभ और पवित्र चिन्ह माना जाता है। यह चिन्ह न केवल धार्मिक अवसरों पर, बल्कि जीवन के हर पहलू में सकारात्मकता और समृद्धि का संकेत देता है। प्राचीन काल से यह प्रतीक शांति, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। आज भी भारतीय घरों में स्वस्तिक के चिन्ह को शुभ माना जाता है और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में इसका प्रयोग किया जाता है। लेकिन स्वस्तिक बनाने से पहले कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, ताकि इसके परिणाम सकारात्मक और शुभ हों।  स्वस्तिक का महत्व स्वस्तिक का आकार और प्रतीक एक क्रॉस के रूप में होता है, जिसमें चार समान लंबाई की शाखाएँ होती हैं जो एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। यह प्रतीक सूर्य की चारों दिशाओं को दर्शाता है, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में फैलती है। स्वस्तिक का अर्थ है ‘कल्याण’, ‘शांति’ और ‘सौम्यता’। यह धर्म, सुख, समृद्धि और आशीर्वाद का प्रतीक है। हिन्दू धर्म में स्वस्तिक का प्रयोग पूजा-पाठ, उत्सवों और संस्कारों में प्रमुख रूप से किया जाता है। स्वस्तिक बनाने से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें स्वस्तिक को शुभ और परिणामकारी बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए: सही दिशा में स्वस्तिक बनाएं स्वस्तिक बनाने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि स्वस्तिक का चिन्ह किस दिशा में बनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में स्वस्तिक का चिन्ह हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर बनाना शुभ माना जाता है। इन दिशाओं में स्वस्तिक बनाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। स्वस्तिक के निशान का आकार और अनुपात स्वस्तिक का आकार भी महत्वपूर्ण होता है। स्वस्तिक के चार भाग समान रूप से और समांतर होने चाहिए। यदि स्वस्तिक के प्रत्येक भाग की लंबाई में भिन्नता होगी, तो यह शुभ संकेत नहीं माना जाता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी पूजा या कार्य में विघ्न आ सकता है। स्वस्तिक के बीच में एक बिंदु का होना कुछ विद्वान और धार्मिक गुरु यह मानते हैं कि स्वस्तिक के बीच में एक बिंदु होना चाहिए। यह बिंदु देवताओं के आशीर्वाद का प्रतीक होता है। बिना बिंदु के स्वस्तिक में आधिकारिक शक्ति का अभाव होता है। स्वस्तिक के बनाए जाने का समय स्वस्तिक का प्रतीक विशेष रूप से उन समयों में बनाना चाहिए, जब विशेष पूजा का आयोजन किया जा रहा हो। जैसे कि व्रत, महा पूजा, शादी, गृह प्रवेश, आदि। इसके अलावा, यह सुनिश्चित करें कि स्वस्तिक को दिन के शुभ समय में और बिना किसी विघ्न के बनाना जाए। स्वस्तिक का प्रयोग घर में स्वस्तिक का प्रयोग घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, और मंदिरों में शुभ लाभ के लिए किया जाता है। घर में स्वस्तिक के प्रतीक को रांगोली के रूप में, या दीवारों पर सजावट के रूप में बनाना चाहिए। यह घर के प्रत्येक सदस्य के लिए सुख-शांति और समृद्धि लाता है। इसके अलावा, स्वस्तिक को घर में किसी भी स्थान पर फर्श या आंगन में बनाना शुभ माना जाता है, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो। स्वस्तिक को सफाई से बनाएं स्वस्तिक का चिन्ह हमेशा साफ-सुथरी और स्वच्छ जगह पर बनाएं। यदि आपके पास स्वस्तिक बनाने के लिए रंगों का प्रयोग हो, तो उन रंगों का चयन भी शुद्ध और पवित्र होना चाहिए। इसे भी पढ़ें:- इन 3 दिनों तक बंद रहते हैं कपाट, बंटता है अनोखा प्रसाद! सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त में स्वस्तिक बनाना स्वस्तिक का प्रतीक शुभ मुहूर्त में बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में विशेष दिनों का महत्व होता है, जैसे कि बुधवार, रविवार और अन्य विशेष तिथियां, जो स्वस्तिक के लिए सबसे उत्तम मानी जाती हैं। सर्वोत्तम सामग्रियों का चयन स्वस्तिक बनाते समय यदि आप स्वस्तिक को किसी वस्तु पर उकेर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह वस्तु शुद्ध और पवित्र हो। उदाहरण स्वरूप, स्वस्तिक को लकड़ी, धातु, पत्थर, मिट्टी, या कागज पर उकेरा जा सकता है, लेकिन इसकी शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। स्वस्तिक के लाभ स्वस्तिक का प्रयोग करने से घर में शांति और सुख बढ़ता है। यह बुरे समय से बचने का उपाय भी माना जाता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है। जिन घरों में नियमित रूप से स्वस्तिक का प्रतीक लगाया जाता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता और घर में स्थिरता बनी रहती है। स्वस्तिक का सही ढंग से उपयोग करने से घर में समृद्धि, ताजगी और शांति बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news स्वस्तिक #SwastikSymbol #VastuTips #AuspiciousSigns #SpiritualSymbols #PositiveEnergy #HinduTraditions #GoodLuck #VedicWisdom #SacredSymbols #Prosperity

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