Career in yoga

Career in yoga: कोर्स से लेकर इंस्टीट्यूट्स तक योगा में करियर बनने के लिए पाएं इसके बारे में पूरी जानकारी

योगा (Yoga) के बारे में न केवल आज पूरा विश्व जानता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक बचाव के लिए इसे अपनाया भी है। भारत में शुरू हुई इस तकनीक को आजकल करोड़ों लोग अपने जीवन का जरूरी हिस्सा बना चुके हैं। ऐसा माना गया है कि नियमित रूप से योगा करने से कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। लेकिन, योगा (Yoga) की शुरुआत करने के लिए एक्सपर्ट की सलाह और मार्गदर्शन लेना जरूरी है। अगर आप योगा (Yoga) में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि आप इसका कहां कोर्स कर सकते हैं और उसमे कितना समय लगेगा आदि। आइए जानें कि योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga)? इसकी पढ़ाई कहां से की जाए, यह जानकारी भी पाएं। योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga): योगा कोर्स  योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए आप कई कोर्स कर सकते हैं, जो इस प्रकार हैं: योगा कोर्स करवाने वाले मुख्य इंस्टीट्यूट्स हमारे देश में ऐसे कई इंस्टीट्यूट्स हैं जो यह कोर्स कराते हैं। इनकी लिस्ट बहुत लंबी है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? योगा में करियर बनाने के लिए किन स्किल्स का होना जरूरी है? योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए कैंडिडेट्स में निम्नलिखित स्किल्स होना जरूरी है:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  #HowtomakeacareerinYoga #Yoga #YogaScience #MainInstitutesOfferingYogaCourses #CareerinYoga

आगे और पढ़ें
Why Practice Yoga on an Empty Stomach

योग क्यों करना चाहिए खाली पेट? जानिए वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण 

योग भारतीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। लेकिन जब भी योग की बात होती है, अक्सर सलाह दी जाती है कि इसे खाली पेट किया जाए। आखिर ऐसा क्यों? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक या आयुर्वेदिक कारण है? आज इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि योग (Yoga) खाली पेट क्यों करना चाहिए और इसके पीछे विशेषज्ञों और रिसर्च का क्या कहना है। योग और पाचन – एक सीधा संबंध योग करते समय शरीर के कई हिस्सों पर खिंचाव और दबाव पड़ता है, खासतौर पर पेट और आंतों पर। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद या तीन से साढ़े तीन घंटे के अंदर योग करेंगे तो इससे ना ही खाना ठीक तरह से डायजेस्ट हो पायेगा और ना ही योगासन का आपको लाभ मिलेगा। योग से जुड़े जानकारों की मानें  भोजन के तुरंत बाद योग करने से एसिडिटी (Acidity), गैस (Gas), उल्टी (Vomiting) जैसा एहसास और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। इससे न केवल योग का लाभ कम होता है, बल्कि शरीर को नुकसान भी हो सकता है। क्या कहती है रिसर्च? The American Journal of Physiology के रिसर्च के अनुसार भोजन के बाद बॉडी का ब्लड फ्लो डायजेस्टिव सिस्टम की ओर होता है। ऐसे में कोई भी शारीरिक क्रिया  विशेषकर योग की शैली से नुकसान पहुंच सकता है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (2020) की रिपोर्ट के अनुसार व्यायाम या योग भोजन के तुरंत बाद करने से अपच indigestion, एसिड रिफ्लक्स acid reflux और ब्लोटिंग bloating की शिकायत आम हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार,भोजन के बाद शरीर में अग्नि (पाचन ऊर्जा) सक्रिय रहती है। यदि आप इस समय योग करते हैं, तो ऊर्जा विभाजित हो जाती है – न पाचन ठीक से होता है, न योग के लाभ मिलते हैं। आयुर्वेद योग को सतोगुणी क्रिया मानता है, जो शुद्धता, संयम और एकाग्रता को बढ़ावा देता है — और यह तभी संभव है जब पेट खाली हो। कब करें योग? योग विशेषज्ञों की राय है कि भोजन और योग के बीच कम से कम 3 से 3.5 घंटे का अंतराल होना चाहिए। अगर आपने दोपहर 1 बजे खाना खाया है, तो योग 4:30 या 5 बजे से पहले नहीं करना चाहिए। वैसे आप भोजन के तुरंत बाद आप वज्रासन जरूर कर सकते हैं, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा आसन है जो पाचन में मदद करता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक खाली पेट योग के फायदे खाली पेट योग करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और आयुर्वेद से सिद्ध एक प्रभावी तरीका है जिससे न केवल शरीर को लाभ होता है बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा भी जागृत होती है। चाहे आप शुरुआत कर रहे हों या अनुभवी योगी हों, यह नियम हमेशा याद रखें – योग से पहले पेट खाली रखें और इसका लाभ आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर लाभ होगा। नोट: अगर आप किसी भी शारीरिक या मानसिक से परेशान हैं तो हेल्थ से जुड़े एक्सपर्ट से मिलें। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट आपके परेशानियों को समझकर उसका सही इलाज कर सकते हैं।   Latest News in Hindi Today Hindi news पाचन ऊर्जा Yoga #Yoga #EmptyStomachYoga #Ayurveda #HealthBenefits #YogaRoutine #MorningYoga #YogaForEnergy

आगे और पढ़ें
Yoga for High BP

High Blood Pressure के लिए यह 4 योगासन, ब्लड सर्कुलेशन और हार्ट हेल्थ को बनाएंगे दुरुस्त

हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हायपरटेंशन (Hypertension) वो समस्या है, जिसमें रोगी का ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक होता है। अगर इसे सही समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक आदि। हाई ब्लड प्रेशर  (High blood pressure) को कंट्रोल करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करना बहुत आवश्यक है। नियमित रूप से योगा करना न केवल हमारे बॉडी बल्कि माइंड हेल्थ के लिए भी फायदेमंद पाया गया है। ऐसा भी पाया गया है कि योगा करने से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। आइए हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) के बारे में। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana For High Blood Pressure) आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार हायपरटेंशन (Hypertension) को बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि अधिकतर रोगियों में इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता। इसके निदान के लिए नियमित चेकअप बहुत जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) इस प्रकार हैं:  उत्कटासन (Utkatasana) उत्कटासन में करने वाले की पोजीशन चेयर जैसी लगती है, इसलिए इसे चेयर पोज भी कहा जाता है। इस आसन को करने से कई मसल ग्रुप्स की एक्सरसाइज होती है और हाइपरटेंशन को मैनेज करने में मदद मिलती है। इस करने से ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर को रेगुलर रहने में मदद मिलती है। यही नहीं, इससे हार्ट रेट बढ़ता है और स्ट्रेस भी कम होता है। यानी, उत्कटासन को करने से हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) को कंट्रोल करने में आसानी होती है। भद्रासन (Bhadrasana) भद्रासन यानी बटरफ्लाई पोज करने से हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है क्योंकि इसे करने से स्ट्रेस कम होता है और शांत रहने में आसानी होती है। स्ट्रेस को हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) के रिस्क फैक्टर्स में से एक माना जाता है। भद्रासन करना भी बेहद सरल है। इसके लिए आपको इस तरह से योगा मैट पर बैठना है कि आपके पैरों के तलवे साथ जुड़े हों। अब अपने पैरों को हाथों को पकड़ें और अपने घुटनों को ऊपर-नीचे करें। भद्रासन को करते हुए अपनी पीठ सीधी होनी चाहिए। ताड़ासन (Tadasana) हाइपरटेंशन का कारण कई चीजें हैं जैसे खराब लाइफस्टाइल, जेनेटिक्स और अंडरलायिंग हेल्थ कंडीशंस आदि। ताड़ासन यानी माउंटेन पोज एक आसान योगासन (Yogasana) है, जो हायपरटेंशन (Hypertension) को कम करने में मदद करता है। हालांकि यह आसन सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर को कम नहीं करता है लेकिन ताड़ासन करने से स्ट्रेस कम होती है, शांति मिलती है और संपूर्ण कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में सुधार होता है जिससे ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक त्रिकोणासन (Trikonasana) त्रिकोणासन यानी ट्राइएंगल पोज करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरती है, स्ट्रेस कम होती है और रिलेक्स रहने में मदद मिलती है। यानी, हायपरटेंशन (Hypertension) की समस्या से राहत मिल सकती है। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि इस आसन को सही से करना बेहद जरूरी है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है,(High blood pressure) तो इस योगासन (Yogasana) को शुरू करने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट और योग इंस्ट्रक्टर से बात करना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  #highbloodpressure #yogasanaforhighbloodpressure #yogaasana, #hypertension #Trikonasana #Tadasana #Bhadrasana #Utkatasana

आगे और पढ़ें
Benefits of Vrikshasana

Vrikshasana: तनाव से रहना चाहते हैं दूर तो कर सकते हैं वृक्षासन

टेँशन यानी तनाव ऐसी समस्या है, जो आजकल सामान्य होती जा रही है खासतौर पर युवाओं में। भविष्य में तनाव बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है और इससे रोजाना का जीवन भी प्रभावित होता है। योगा को तनाव से छुटकारा पाने का बेहतरीन तरीका माना जाता है। हालांकि, माइंड ही नहीं बल्कि बॉडी के लिए भी योगा को कई तरह से फायदेमंद माना गया है। ऐसे कई योगासन (Yogasana) हैं, जिनका अभ्यास करना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इन्हीं में से एक है वृक्षासन (Vrikshasana)। वृक्षासन (Vrikshasana) का दूसरा नाम ट्री पोज भी है। आइए जानें कि वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं? इसके साथ ही इसे करने के तरीके के बारे में भी जानें। वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) आर्ट ऑफ लिविंग (Art of living) के अनुसार वृक्षासन (Vrikshasana) एक संस्कृत शब्द है जिसमें वृक्ष का अर्थ है पेड़ और आसन का अर्थ है पोजीशन यानी इस योगासन (Yogasana) में करने वाले की पोजीशन वृक्ष की तरह लगती है। इसके फायदे इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें: World Environment Day 2025: प्रकृति से जुड़ने के लिए प्लास्टिक की जगह रिसाइकिल प्रोडक्ट का करें इस्तेमाल वृक्षासन (Vrikshasana) कैसे करें? इस योगासन (Yogasana)  को करना बेहद आसान है। वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं, यह आप जान ही गए होंगे। इस आसन को इस तरह से किया जा सकता है: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Vrikshasana  #BenefitsofVrikshasana #Vrikshasana #Yogasana #Asanas #TreePose

आगे और पढ़ें
Translate »