1 मार्च से इस्लाम धर्म के पवित्र महीने रमजान की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में दुनिया भर करोड़ों लोग रोजा रखते हैं और शाम को इफ्तारी करते हैं। मुस्लिम देशों में बड़ी धूमधाम के साथ इफ्तारी मनाई जाती है। बता दें कि इफ्तारी में कई तरह के व्यंजन का समावेश होता है। लेकिन आप जानते हैं पड़ोसी मूल पाकिस्तान में लोगों की हालत इस कदर खस्ता (Pakistan food crisis) है कि वो इफ्तारी भी नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, पाकिस्तान में महंगाई अपने चरम पर है। पाकिस्तान में इफ्तारी के लिए जरूरी सामान की कीमतें आसमान छू रही है। आपको जानकार हैरानी होगी कि पाकिस्तान में सिर्फ फलों की कीमत ही नहीं बल्कि सब्जियों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। रमजान से पहले ही राशन की दुकानों में आटा, चावल, दाल और बेसन जैसे बुनियादी चीजों की कमी हो गई है। कारण यही जो पाकिस्तान के लिए इफ्तारी बड़ी महंगी पड़ रही है। वैसे भी त्योहारों के मौके पर देश भर महंगाई अपने आप बढ़ जाती है।
पिछले 6 महीने से स्थिति हो गई है बेहद खराब (Pakistan food crisis)

दुकानदारों के अनुसार पिछले 6 महीने से स्थिति बेहद खराब (Pakistan food crisis) हो गई है और ग्राहकों की लंबी कतारें लगी हैं। महंगाई की मार से बचने ग्राहक स्थानीय बड़े बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं और अधिक कीमतों वाले सामान खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अभी भी लोगों को कोई राहत की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है, क्योंकि सरकार ने कुछ बड़ा कदम नहीं उठाया है। इस बढ़ती महंगाई के खिलाफ लोगों के मन में रोष है। लोगों का कहना है कि सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उसे लोगों की कोई परवाह नहीं है। आसमान छूती महंगाई के इस दौर में रोजेदार भला इफ्तारी करे भी तो कैसे करे? सरकार को हम गरीबों के बारे में सोचना चाहिए और जरूरी कदम उठाने चाहिए।
सब्जी, फल और मीट की कीमतों में काफी (Pakistan food crisis) हो चुकी है वृद्धि
जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में रमजान से पहले ही सब्जी, फल और मीट की कीमतों में काफी वृद्धि (Pakistan food crisis) हो चुकी है। पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट समा टीवी के मुताबिक पिछले तीन दिनों की तुलना में कीमतों में काफी अंतर देखा गया है। रोजमर्रा की चीजें मसलन, टमाटर, केले लहसुन और सेब की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं। कीमतें सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। बात करें लाहौर की तो, लाहौर में सेब 335 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। अंडे के दाम 200 रुपये से बढ़कर 290 रुपये हो गया है। यही नहीं, मीट की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाहौर में मीट 800 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
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पाकिस्तान के लोग हैं कि इफ्तारी का भी (Pakistan food crisis) नहीं कर पा रहे हैं जुगाड़
बता दें कि 1 मार्च को रमजान का चांद दिखने के साथ ही तरावीह शुरू हो गई है और इसी दिन से माहे रमजान की शुरुआत हो गई जबकि 2 मार्च से पहला रोजा रखा गया। इस्लामिक मान्यता के अनुसार पवित्र रमजान के महीने में अपनों ईमानदारी से कमाए गए पैसों से सहरी और इफ्तार की जाती है। गौर करने वाली बात यह कि रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्य उदय से पहले उठकर सहरी करते हैं और फिर नमाज पढ़ते हैं। इसके बाद दिनभर रोजेदार रोजा रखते हैं। सूर्यास्त होने के बाद वे खजूर खाकर अपना रोजा खोलते हैं। रोजा खोलने के बाद शाम को नमाज पढ़ी जाती है। उसके बाद इफ्तार शुरू होता है। इफ्तार के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। लोग अपने परिजनों, दोस्तों और शुभ चिंतकों के साथ मिलकर इफ्तारी करते हैं। लेकिन पाकिस्तान के लोग हैं कि इफ्तारी का भी जुगाड़ (Pakistan food crisis) नहीं कर पा रहे हैं।
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