कालाष्टमी 2025: 22 या 23 मार्च, कब है यह शुभ तिथि? जानें पूजा विधि और महत्व

Kalashtami 2025 Date, Puja Vidhi & Spiritual Significance

हिंदू धर्म में कालाष्टमी (Kalashtami) का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव के रुद्र रूप कालभैरव को समर्पित है और इसे हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में कालाष्टमी 22 और 23 मार्च को पड़ रही है, लेकिन इसकी सही तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में उलझन है। आइए जानते हैं कि कालाष्टमी 2025 कब है, इसकी शुभ तिथि और पूजा के नियम क्या हैं।

कालाष्टमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 मार्च को सुबह 4:23 बजे आरंभ होगी और 23 मार्च को सुबह 5:23 बजे समाप्त होगी। काल भैरव देव की पूजा निशा काल में की जाती है, इसलिए चैत्र माह की कालाष्टमी 22 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन निशा काल में पूजा का शुभ समय देर रात 12:04 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा।

शुभ योग

ज्योतिषीय दृष्टि से फाल्गुन माह की कालाष्टमी (Kalashtami) पर वरीयान और शिववास योग का संयोग बन रहा है। शिववास योग में काल भैरव की पूजा करने से साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इसके अतिरिक्त, इस दिन बालव और कौलव करण का भी विशेष योग बन रहा है।

कालाष्टमी का महत्व

कालाष्टमी (Kalashtami) का व्रत भगवान शिव (Lord Shiva) के कालभैरव (Kaalbhairav) रूप को समर्पित है। कालभैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है, जो समय के स्वामी और काल के नियंत्रक हैं। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को समय और मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

कालाष्टमी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी होता है, जो शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों की अशुभ स्थिति से परेशान हैं। इस व्रत को रखने से ग्रहों की अशुभ स्थिति का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

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कालाष्टमी पूजा के नियम

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें:
    कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव (Lord Shiva) और कालभैरव (Kaalbhairav) की पूजा के लिए तैयारी करें।
  2. व्रत का संकल्प लें:
    पूजा से पहले व्रत का संकल्प लें। इस दिन अन्न और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। फलाहार और दूध से बने पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।
  3. कालभैरव की पूजा करें:
    कालभैरव (Kaalbhairav) की पूजा करने के लिए उनकी मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें फूल, धूप, दीपक और भोग अर्पित करें। इसके बाद “ओम कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।
  4. कथा सुनें:
    कालाष्टमी के दिन कालभैरव (Kaalbhairav) की कथा सुनना शुभ माना जाता है। इससे व्रत का पूरा फल मिलता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
  5. रात्रि जागरण करें:
    कालाष्टमी के दिन रात्रि जागरण करना शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव और कालभैरव के मंत्रों का जाप करें और उनकी आरती करें।
  6. दान करें:
    कालाष्टमी के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है। इससे भगवान कालभैरव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।

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