US warns Iran: इस वजह से अमेरिका ने ईरान को दी सैन्य हमला करने की धमकी

War threat Iran

अमेरिका और ईरान की अदावत किसी से छुपी नहीं है। आये दिन दोनों एक दूसरे को देख लेने की धमकी देते (US warns Iran) रहते हैं। अमेरिका को डर है कि कहीं ईरान परमाणु बम न बना ले। इसके चलते अमेरिका ने ईरान को चेतावनी देते हुए ये साफ कहा है कि “अगर ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं छोड़ता तो उसके खिलाफ सैन्य हमले का अगुवा इजराइल होगा।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “अगर इसके लिए सेना की आवश्यकता होगी तो हम वह भी करेंगे। इसमें स्पष्ट रूप से इजराइल बहुत अधिक शामिल होगा। वे इसके नेता होंगे। लेकिन कोई भी हमारा नेतृत्व नहीं करता है और हम वही करते हैं जो हम करना चाहते हैं।” तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि “ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा, अमेरिकी निवेश पर आपत्ति नहीं।” ट्रंप ने यह टिप्पणी ओमान में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच होने वाली वार्ता से पहले बुधवार को की। इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि वार्ता प्रत्यक्ष होगी, जबकि ईरान ने इस अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत को अप्रत्यक्ष बताया है। 

ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (US warns Iran) 

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दरअसल, अमेरिका इस बात से चिंतित है (US warns Iran) कि तेहरान पहले से कहीं अधिक एक कारगर हथियार के करीब है। कारण यही जो ट्रंप ने बुधवार को कहा कि “वार्ता के समाधान पर पहुंचने के लिए उनके पास कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।” अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता के पहले बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि “ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा।” उन्होंने यह भी कहा कि “दोनों देशों के बीच कोई समझौता होने पर ईरान में अमेरिकी निवेश पर भी कोई ऐतराज नहीं है।” दरअसल, राष्ट्रपति पेजेशकियन की टिप्पणियां विश्व शक्तियों के साथ 2015 के परमाणु समझौते के बाद ईरान के रुख में बदलाव को दर्शाती हैं। बता दें कि उस समझौते में तेहरान ने अमेरिकी विमान खरीदने की मांग की थी, लेकिन प्रभावी रूप से अमेरिकी कंपनियों को देश में आने से रोक दिया था।

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100 बार सत्यापन कर लिया है, चाहिए तो इसे 1,000 बार फिर से कर लें (US warns Iran)

इस बीच तेहरान में दिए गए भाषण में पेजेशकियन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का जिक्र करते हुए कहा कि “उन्हें ईरान में अमेरिकी निवेशकों के निवेश से कोई आपत्ति नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि “अमेरिकी निवेशक ईरान आएं और निवेश करें।” बेशक इस तरह के व्यावसायिक प्रस्ताव से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समझौते में दिलचस्पी बढ़ सकती है। बता दें कि राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में विश्व शक्तियों के साथ ईरान के परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था और अब देश के साथ एक नया समझौता करना चाहते हैं। गौरतलब हो कि पिछले साल अपने चुनाव के दौरान पश्चिमी देशों तक पहुंच बनाने के लिए प्रचार करने वाले पेजेशकियन ने यह भी कहा कि “शनिवार को ओमान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरघची और पश्चिम एशिया के लिए अमेरिका के राजदूत स्टीव विटकॉफ के बीच होने वाली वार्ता अप्रत्यक्ष रूप से होगी। ट्रंप ने कहा है कि वार्ता प्रत्यक्ष रूप से होगी और ईरान ने (US warns Iran) इससे इनकार भी नहीं किया है। हालांकि पेजेशकियन ने यह भी कहा कि “हम परमाणु बम नहीं बना रहे। आपने 100 बार इसका सत्यापन कर लिया है। चाहिए तो इसे 1,000 बार फिर से कर लें।”

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