बगलामुखी जयंती 2025: वृद्धि योग और शुभ संयोग से होंगे बिगड़े काम बन

Baglamukhi Jayanti 2025

हिन्दू धर्म में देवी बगलामुखी  (Devi Baglamukhi)  की पूजा का विशेष महत्व है। बगलामुखी जयंती पर देवी की उपासना करने से ना केवल व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक परेशानियाँ दूर होती हैं, बल्कि उसे जीवन में प्रगति और समृद्धि भी मिलती है। इस वर्ष बगलामुखी जयंती 5 मई 2025 को मनाई जाएगी और इस दिन वृद्धि योग सहित कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो जीवन के अटके कार्यों को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।

बगलामुखी का महत्व

देवी बगलामुखी (Devi Baglamukhi) को “पीताम्बर देवी” भी कहा जाता है। वे शक्ति की देवी हैं और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली मानी जाती हैं। बगलामुखी की पूजा से व्यक्ति के सारे विघ्न दूर होते हैं और उसे हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। खासकर यह देवी उन लोगों के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती हैं जो किसी मुश्किल स्थिति में फंसे हों या जिनकी किस्मत प्रतिकूल हो। देवी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और जीवन के बिगड़े हुए काम भी सुधर जाते हैं।

इस वर्ष बगलामुखी जयंती पर बनेगा विशेष योग

वैदिक पंचांग के अनुसार, बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) 5 मई 2025 को मनाई जाएगी। इस विशेष दिन मां बगलामुखी की पूजा के साथ-साथ वृद्धि योग और अन्य शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इस तिथि को और भी महत्वपूर्ण बना देते हैं। वृद्धि योग एक ऐसा योग है, जब किसी शुभ कार्य या पूजा का फल त्वरित रूप से मिलता है। यह योग व्यक्ति की सफलता में चार चाँद लगाता है और उसके सभी बिगड़े काम को सुधारने में मदद करता है। इस दिन देवी बगलामुखी (Devi Baglamukhi) की पूजा से न केवल शत्रुओं पर विजय मिलती है, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और मानसिक दृष्टिकोण से भी उन्नति होती है।

वृद्धि योग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष बगलामुखी जयंती पर वृद्धि योग का संयोग बन रहा है, जो रात 12:20 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस शुभ योग में देवी बगलामुखी की आराधना करने से आर्थिक उन्नति, भाग्य में वृद्धि और सफलता के प्रबल संकेत मिलते हैं। साथ ही देवी की कृपा से जीवन के तमाम संकट दूर हो सकते हैं।

रवि योग
इस विशेष दिन पर रवि योग भी बन रहा है, जो दोपहर 2:01 बजे से शाम 5:36 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि रवि योग में मां बगलामुखी की आराधना करने से साधकों की मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं और इच्छित सफलता प्राप्त होती है।

शिववास योग
बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) पर शिववास योग का भी संयोग बन रहा है, जो सुबह 7:35 बजे से आरंभ होगा। इस योग में भगवान शिव कैलाश पर देवी पार्वती के साथ विराजमान रहते हैं। इस पावन समय में की गई पूजा से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।

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बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) पर पूजा विधि

इस दिन देवी बगलामुखी की पूजा का विशेष महत्व है। पूजा के दौरान श्रद्धालु पीले कपड़े, पीले फूल, और पीली वस्तुएं चढ़ाते हैं, क्योंकि देवी बगलामुखी का रंग पीला है। पूजा में विशेष रूप से नवग्रह शांति, वशीकरण, और शत्रुनाशक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। सबसे प्रभावशाली मंत्रों में से एक है:

“ॐ बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ॐ स्वाहा।”

इस मंत्र का जप करने से न केवल शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। बगलामुखी जयंती के दिन देवी बगलामुखी (Devi Baglamukhi) के हवन और यज्ञ का आयोजन भी अत्यंत फलदायक माना जाता है।

नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।

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