मासिक कार्तिगाई 2025: 26 मई को मनाएं यह पावन पर्व, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि

Masik Karthigai

मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह में कृतिका नक्षत्र के दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, भगवान शिव (Lord Shiva) और भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की आराधना के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन दीप जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक मनाया जाता है।

ज्येष्ठ माह में मासिक कार्तिगाई की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार 26 मई को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि दोपहर 12:11 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। इसी दिन सुबह 8:23 बजे से कृतिका नक्षत्र का योग भी आरंभ हो जाएगा। चूंकि मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) व्रत कृतिका नक्षत्र के शुभ संयोग में मनाया जाता है, इसलिए इस वर्ष यह पावन पर्व 26 मई को ही विधिपूर्वक मनाया जाएगा।

शुभ योग

इस बार मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) पर विशेष और दुर्लभ शोभन योग का संयोग बन रहा है। यह शुभ योग सुबह 7 बजकर 2 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके अलावा, इसी दिन दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से शिववास योग भी प्रारंभ हो जाएगा। मान्यता है कि शिववास योग के दौरान भगवान शिव )Lord Shiva) कैलाश पर्वत पर माता गौरी (Mata Gauri) के साथ विराजमान रहते हैं। ऐसे में इस योग में शिव की पूजा और आराधना करने से भक्तों को इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

मासिक कार्तिगाई का धार्मिक महत्व

मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव (Lord Shiva) और भगवान मुरुगन (Lord Murugan)  की पूजा के लिए समर्पित होता है। कहा जाता है कि इस दिन दीप जलाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अज्ञानता का नाश होता है। यह पर्व आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

मासिक कार्तिगाई कथा 

पौराणिक मान्यता के अनुसार, मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) का दिन भगवान मुरुगन (Lord Murugan)  के जन्म से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भगवान शिव (Lord Shiva) की तीसरी आंख से इसी दिन भगवान मुरुगन का प्राकट्य हुआ था। वे छह विभिन्न रूपों में प्रकट हुए और छह अप्सराओं ने उनका पालन-पोषण किया। बाद में देवी पार्वती ने इन छह स्वरूपों को एकाकार कर एक बालक का रूप प्रदान किया। इसी कारण भगवान मुरुगन को ‘षण्मुख’ या ‘शनमुघम’ कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है—छह मुखों वाले देवता।

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पूजन विधि

मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai)  के दिन भगवान शिव और भगवान मुरुगन (Lord Murugan)  की पूजा विधि इस प्रकार है: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर पूजा स्थल पर उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान शिव और भगवान मुरुगन की तस्वीर स्थापित करें। भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और धूप-दीप अर्पित करें। भगवान मुरुगन को विशेष रूप से फूल, फल और पंचामृत चढ़ाएं। इसके पश्चात दोनों देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करें और श्रद्धा से उनकी आरती करें। आरती के बाद प्रसाद सभी में बांटें। इस दिन घर में धूप और कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही, दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।

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