उत्तर प्रदेश से एक अचंभित करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, सूबे के संभल जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होने की खबर है। खबर के मुताबिक संभल जिले में दर्जन भर से ऐसे मुर्दे थे जो मनरेगा में (Dead Registered as Workers in MGNREGA) मजदूरी कर रहे थे। न सिर्फ मजदूरी कर रहे थे बल्कि उन्हें बाकायदा उसका भुगतान भी किया जा रहा था। है न, चौंकाने वाली बात? बता दें कि संभल जिले में दर्जन से अधिक मरे लोगों को कथित तौर पर मजदूर बताकर उनके नाम से फर्जी तरीके से मजदूरी निकाली गई है। बता दें कि यह घोटाला संभल जिले के पंवासा ब्लॉक के अतरासी गांव में हुआ, जो जिला मुख्यालय बहजोई से लगभग आठ किलोमीटर दूर है। बड़ी बात यह कि इस बात की पुष्टि जिला प्रशासन ने स्वयं की है। खैर, मामले की जांच चल रही है और ग्राम प्रधान से वसूली शुरू कर दी गई है।
ग्राम प्रधान सुनीता यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान मृतक ग्रामीणों (Dead Registered as Workers in MGNREGA) के नाम पर बनवाया जॉब कार्ड

इस पूरे मामले पवार संभल के जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया ने कहा कि “यह मामला करीब सात महीने पहले मेरे संज्ञान में आया था। जांच के आदेश दिए गए थे। मामले में गबन 10 प्रतिशत से कम होने पर हम संबंधित अधिकारी से वसूली करते हैं। इस मामले में 1.05 लाख रुपये का गबन पाया गया, जिसकी वसूली प्रधान से की जा रही है। इसके अलावा गांव में अन्य विकास कार्यों की भी जांच की जा रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” दरअसल, गांव की मौजूदा ग्राम प्रधान सुनीता यादव पर अपने कार्यकाल के दौरान मृतक ग्रामीणों (Dead Registered as Workers in MGNREGA) के नाम पर जॉब कार्ड बनाने और कागजों पर फर्जी तरीके से काम दिखाकर मजदूरी निकालने का आरोप है। चौंकाने वाली बात यह है कि लाभार्थी मजदूरों में एक इंटर कॉलेज के प्राचार्य का भी नाम है। और तो और उससे भी बड़ी बात यह कि उसे इस बात की जानकारी भी नहीं थी। जानकारी के मुताबिक मुलायम सिंह यादव इंटर कॉलेज के प्राचार्य ऋषिपाल सिंह ने कहा कि “मेरी जानकारी के बिना मेरे नाम से जॉब कार्ड बना दिया गया। मैंने कभी मनरेगा के तहत काम नहीं किया, फिर भी मेरा नाम रिकॉर्ड में दर्ज है और पैसे निकाल लिए गए। जांच के दौरान मुझे पूछताछ के लिए भी बुलाया गया।”
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दर्जन भर मृत व्यक्तियों के नाम पर बनाए गए हैं (Dead Registered as Workers in MGNREGA) जॉब कार्ड
यही नहीं, गाँव के ही संजीव कुमार ने बताया कि “मेरे दादा जगत सिंह का 2020 में निधन हो गया था। हमें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनके नाम पर मनरेगा के तहत मजदूरी निकाली जा (Dead Registered as Workers in MGNREGA) रही है। हमें तो तब पता चला, जब अधिकारी गांव में जांच करने आए। हमने सुन रखा था कि करीब एक दर्जन मृत व्यक्तियों के नाम पर जॉब कार्ड बनाए गए हैं।” इसके अलावा शिकायतकर्ता निर्मल दास ने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रधान के दिवंगत ससुर और उनके परिवार के कई सदस्यों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाए गए हैं। मनरेगा केंद्र सरकार की योजना है जिसके तहत ग्रामीण नागरिकों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों का रोजगार मुहैया कराया जाता है।
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