खाटू श्याम मंदिर: क्या है श्याम बाबा की प्रतिमा के बदलते रंग का रहस्य?

Mysterious Color Change of Khatu Shyam Idol

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर न केवल भारत बल्कि दुनियाभर में भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) के कलियुगीन अवतार श्री श्याम बाबा को समर्पित है, जिनकी प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि इसका रंग समय-समय पर बदलता है। कभी यह प्रतिमा काली दिखती है, कभी हल्की भूरी, तो कभी बिल्कुल उजली और चमकदार। भक्त इसे बाबा का चमत्कार मानते हैं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी इस रहस्य को समझने का प्रयास करता है। तो आखिर क्या है खाटू श्याम की प्रतिमा के रंग बदलने का रहस्य? आइए जानते हैं इससे जुड़ी कथा, मान्यताएं और संभावित कारण।

कौन हैं खाटू श्याम?

खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) को महाभारत के युद्ध में वीरता और बलिदान का प्रतीक माने जाने वाले बर्बरीक का कलियुगीन स्वरूप माना जाता है। बर्बरीक, घटोत्कच और नाग कन्या मोरवी का पुत्र था, जो अत्यंत पराक्रमी और तीन बाणों का धनी था। भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध से पूर्व उसकी परीक्षा ली और उसके बलिदान की मांग की। बर्बरीक ने बिना झिझक अपना शीश श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया। श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में तुम श्याम नाम से पूजे जाओगे और मेरी ही तरह भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करोगे।

क्या है प्रतिमा के बदलते रंग का रहस्य?

कृष्ण पक्ष:

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, जैसे ही माह का कृष्ण पक्ष आरंभ होता है, खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) की प्रतिमा को सांवले यानी श्याम वर्ण रूप में अलंकृत किया जाता है। इस समय उन्हें विशेष चंदन और अन्य सुगंधित सामग्री से श्रृंगारित किया जाता है, जिससे प्रतिमा में पीले रंग की आभा दिखाई देती है। यह रूप बाबा के सौम्य और करुणामय स्वरूप को दर्शाता है, जो भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।

शुक्ल पक्ष:

वहीं जब शुक्ल पक्ष आता है, तब श्याम बाबा को शालिग्राम स्वरूप में सजाया जाता है। इस रूप में उनकी प्रतिमा में गहरे काले रंग की झलक देखने को मिलती है। विशेषकर अमावस्या के दिन बाबा का अभिषेक विविध औषधीय द्रव्यों और पवित्र सामग्रियों से किया जाता है, जिससे उनका वास्तविक रूप उभरकर सामने आता है। यह गहरा रंग उनकी गंभीरता, तेज और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है।

भक्तों के लिए एक रहस्य, परंपरा के लिए श्रद्धा का प्रतीक:

धार्मिक मान्यता के अनुसार, खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) की प्रतिमा महीने के 23 दिन श्याम वर्ण यानी हल्का पीला रूप धारण करती है, जबकि 7 दिन वह शालिग्राम रूप यानी गहरे रंग में दिखाई देती है। यह परिवर्तन केवल एक चमत्कार नहीं, बल्कि मंदिर की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। बाबा के इन दोनों स्वरूपों का दर्शन भक्तों को उनकी विविध लीलाओं और स्वरूपों की अनुभूति कराता है, जिससे उनकी भक्ति और गहरी हो जाती है।

धार्मिक मान्यता और महत्व

खाटू श्याम जी को भगवान श्रीकृष्ण (Lord ShriKrishna) के कलियुग में प्रकट हुए रूप के तौर पर पूजा जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के समय वीर योद्धा बर्बरीक, जो आगे चलकर खाटू श्याम के नाम से विख्यात हुए, ने अपनी भक्ति और समर्पण में भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश अर्पित कर दिया था। श्रीकृष्ण उनकी निःस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और उनके भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। इसीलिए आज खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) को हारे का सहारा कहा जाता है।

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मंदिर की प्राचीन परंपरा का अभिन्न अंग है रंग परिवर्तन

मान्यताओं के अनुसार, खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) की प्रतिमा हर माह लगभग 23 दिन श्याम वर्ण यानी हल्के पीले स्वरूप में और शेष 7 दिन शालिग्राम यानी गहरे काले रूप में भक्तों को दर्शन देती है। यह रूपांतरण श्रद्धालुओं के लिए भले ही एक चमत्कार जैसा प्रतीत होता हो, लेकिन यह वास्तव में मंदिर की सदियों से चली आ रही एक विशेष परंपरा है। इस परंपरा के अंतर्गत बाबा को विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगारित किया जाता है, जिससे उनकी विविध लीलाओं और रूपों का दर्शन संभव हो पाता है।

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