बुरहानपुर।
बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के ग्राम पंचायत नागझरी में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ एक जागरूक ग्रामीण ने ऐसा अनोखा प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। गांव के युवक लखन पटेल ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर पंचायत सचिव सहित पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका यह विरोध न केवल प्रतीकात्मक था, बल्कि एक गहरी सामाजिक पीड़ा और जनता की आक्रोशित आवाज को उजागर करता हुआ दिखा।
पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप
लखन पटेल का आरोप है कि ग्राम पंचायत नागझरी में लंबे समय से भ्रष्टाचार और मनमानी चरम पर है। उन्होंने कहा कि पंचायत की अधिकांश योजनाओं और शासकीय लाभों का वितरण सही पात्रों तक नहीं पहुंच रहा। नियमों और दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, जबकि वास्तव में जिन परिवारों को सहायता की जरूरत है, वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
लखन पटेल ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट, जो गरीब और बेघर लोगों के लिए है, उसमें भी भारी गड़बड़ी की गई है। उन्होंने बताया कि एक सरकारी कर्मचारी को ही इस योजना का लाभ दे दिया गया है, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है। यह घटना न केवल योजना की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है।
अभद्र व्यवहार का आरोप
लखन पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह पंचायत कार्यालय किसी जानकारी की मांग करने या शिकायत दर्ज कराने पहुंचते हैं, तो पंचायत के कर्मचारी उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही की जगह वहां डर और दबाव का माहौल बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है मानो पंचायत कार्यालय जनता की सुविधा का केंद्र न होकर कुछ व्यक्तियों के हित साधन का अड्डा बन गया है।
आंखों पर पट्टी बांधकर दिया संदेश
लखन पटेल का विरोध प्रदर्शन बेहद प्रतीकात्मक रहा। उन्होंने कलेक्टर कार्यालय के सामने आंखों पर काली पट्टी बांधकर यह संदेश दिया कि “यदि शासन और प्रशासन भ्रष्टाचार के मामलों पर आंखें मूंदकर बैठे रहेंगे, तो आम नागरिकों को भी आंखें बंद कर लेना चाहिए। या तो चुप्पी साध लें या फिर आवाज उठाएं।”
उनका यह कदम यह बताता है कि लोकतंत्र में जनता की जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंद लेंगे, तो गरीब और जरूरतमंदों की आवाज कहीं दबकर रह जाएगी। ऐसे में हर जागरूक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह सामने आए और अपनी बात रखे।
निष्पक्ष जांच की मांग
लखन पटेल ने जिला कलेक्टर से अपील करते हुए पंचायत की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा और वास्तविक हितग्राही लगातार वंचित होते रहेंगे।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई, तो वह व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे और ग्रामीणों को साथ लेकर पंचायत स्तर पर जवाब मांगेंगे।
जनता में चर्चा का विषय बना प्रदर्शन
लखन पटेल का यह अनोखा विरोध अब ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से पंचायत की गड़बड़ियों को सहा है, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आया। लखन पटेल ने हिम्मत दिखाकर न केवल पंचायत सचिव पर उंगली उठाई, बल्कि प्रशासन का ध्यान भी इस ओर आकर्षित किया है।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी माना कि पंचायत में योजनाओं का लाभ अक्सर उन्हीं लोगों को मिलता है जिनका पंचायत कर्मियों से नजदीकी संबंध है। वहीं गरीब, मजदूर और कमजोर वर्ग की आवाज को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस कारण गांव में असमानता और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
प्रशासन की जिम्मेदारी
यह मामला अब जिला प्रशासन के सामने है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक ढिलाई भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देगी। पंचायत स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार से सीधे-सीधे गरीब और जरूरतमंद प्रभावित होते हैं, इसलिए यह प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
लोकतंत्र में जनता की ताकत
लखन पटेल का यह अनोखा विरोध लोकतंत्र में जनता की ताकत का प्रतीक है। एक साधारण ग्रामीण ने आंखों पर पट्टी बांधकर यह दिखा दिया कि यदि सत्ता और तंत्र आंख मूंदकर बैठे रहेंगे, तो आम जनता भी आंखें मूंद सकती है। मगर, विकल्प यही है कि अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जाए।
यह विरोध केवल पंचायत स्तर की गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि जब भी जनता संगठित होकर अपनी बात रखती है, तो सबसे बड़े तंत्र को भी जवाब देना पड़ता है।





