Anu Sharma

Career in yoga

Career in yoga: कोर्स से लेकर इंस्टीट्यूट्स तक योगा में करियर बनने के लिए पाएं इसके बारे में पूरी जानकारी

योगा (Yoga) के बारे में न केवल आज पूरा विश्व जानता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक बचाव के लिए इसे अपनाया भी है। भारत में शुरू हुई इस तकनीक को आजकल करोड़ों लोग अपने जीवन का जरूरी हिस्सा बना चुके हैं। ऐसा माना गया है कि नियमित रूप से योगा करने से कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। लेकिन, योगा (Yoga) की शुरुआत करने के लिए एक्सपर्ट की सलाह और मार्गदर्शन लेना जरूरी है। अगर आप योगा (Yoga) में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि आप इसका कहां कोर्स कर सकते हैं और उसमे कितना समय लगेगा आदि। आइए जानें कि योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga)? इसकी पढ़ाई कहां से की जाए, यह जानकारी भी पाएं। योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga): योगा कोर्स  योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए आप कई कोर्स कर सकते हैं, जो इस प्रकार हैं: योगा कोर्स करवाने वाले मुख्य इंस्टीट्यूट्स हमारे देश में ऐसे कई इंस्टीट्यूट्स हैं जो यह कोर्स कराते हैं। इनकी लिस्ट बहुत लंबी है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? योगा में करियर बनाने के लिए किन स्किल्स का होना जरूरी है? योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए कैंडिडेट्स में निम्नलिखित स्किल्स होना जरूरी है:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  #HowtomakeacareerinYoga #Yoga #YogaScience #MainInstitutesOfferingYogaCourses #CareerinYoga

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link between diabetes and loneliness

Loneliness: अकेलेपन का कनेक्शन ब्लड शुगर से – क्या कहती है रिसर्च?

डायबिटीज (Diabetes) यानी मधुमेह एक ऐसी समस्या है, जो आजकल लोगों की खराब जीवनशैली के कारण बढ़ती जा रही है। डायबिटीज (Diabetes) के कारण कई गंभीर रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस रोग की संभावना को कम करने के लिए एक्सपर्ट सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। वहीं, एक और परेशानी जिससे आजकल अधिकतर पब्लिक परेशान है वो है अकेलापन (Loneliness)। यह अकेलापन (Loneliness) भी कई रोगों का कारण बन सकता है जैसे स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि। लेकिन, एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) का कारण भी बन सकता है। आइए जानें डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness): पाएं जानकारी  हेल्थलाइन (Health line) के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और कई कंडीशंस का कारण बन सकता है जैसे डिप्रेशन और एंग्जायटी। एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन (Loneliness) न केवल मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि इससे फिजिकल हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है। यानी डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) पाया गया है। इस स्टडी के अनुसार जो लोग सोशली आइसोलेटेड होते हैं, उनमें डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर का खतरा बढ़ सकता है। इस स्टडी में ऐसा पाया गया है कि जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं उनमें डायबिटीज (Diabetes) का रिस्क 34% अधिक होता है। इन लोगों में अकेले नहीं रहने वाले लोगों की तुलना में 75% अधिक पुअर शुगर कंट्रोल भी पाया गया है। इस स्टडी से यह भी पता चलता है कि अकेलापन (Loneliness) डायबिटीज का एक महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकता है जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है। डायबिटीज और अकेलेपन से कैसे बचें?  डायबिटीज (Diabetes) से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल को ठीक बनाए रखना जरूरी है। इसमें सही डायट का सेवन करना, एक्सरसाइज और योगा करना, तनाव से बचना आदि शामिल है। इसके साथ ही नियमित रूप से चेक-अप कराना भी इसके लिए महत्वपूर्ण माना गया है। अकेलेपन से बचाव के लिए यह सुझाव आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं: वालंटियर बने दूसरों की मदद करना अकेलेपन को दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। इसके लिए उन ग्रुप्स और आर्गेनाईजेशन को ज्वाइन करें, जो यह कार्य करते हैं। इसके साथ ही आप सपोर्ट ग्रुप को भी ज्वाइन कर सकते हैं।  एक्टिव रहें एक्टिव रहने से आप अपने अकेलापन (Loneliness), डायबिटीज (Diabetes) और कई समस्याओं से बचा जा सकता है। यही नहीं इससे आप अन्य लोगों से भी मिलजुल सकते हैं। इसके लिए आप योगा, कार्डियो जैसी क्लासेज को ज्वाइन कर सकते हैं। अपने प्रियजनों और दोस्तों से बात करें अकेलापन (Loneliness) को दूर करने के लिए उन लोगों के सम्पर्क में रहें जो आपके करीबी हैं। ऐसे लोगों से कनेक्ट करते रहें जो आपको पॉजिटिव रहने में मदद करें। कुछ ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप्स और फोरम्स को भी ज्वाइन कर सकते हैं। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में आप जान ही गए होंगे। अब जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) के बारे में कुछ और। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा डायबिटीज के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Thelinkbetweendiabetesandloneliness #diabetes #loneliness 

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Excessive salt intake

Excessive Salt Intake: भारत में एक साइलेंट महामारी, जो स्वास्थ्य के लिए है एक बड़ा खतरा

नमक (Salt) यानी साल्ट खाने का एक जरूरी हिस्सा है, जिसकी मात्रा खाने में ज्यादा हो या कम, दोनों ही स्थितियों में खाने का स्वाद पूरी तरह से बदल जाता है। नमक शरीर के लिए फायदेमंद है और कई कार्यों को करने में उपयोगी है जैसे फ्लूइड बैलेंस, नर्व और मसल फंक्शन व मसल फंक्शन को मेंटेन करना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अधिक नमक (Salt) खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है? हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) एक साइलेंट महामारी की तरह है, जो कई गंभीर समस्याओं के रिस्क को बढ़ा रही है। आइए जानें कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (ICMR) के अनुसार हमारे देश में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) करना एक साइलेंट महामारी के समान है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम्स और किडनी डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। आइए जानें विस्तार में कि कौन-कौन से कारण है जिसकी वजह से भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) को एक साइलेंट महामारी माना जा रहा है:  यह तो थी जानकारी कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? अब जानिए कि नमक की खपत कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा नमक की खपत कम करने के लिए क्या करें?  नमक का भी सही या कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। नमक (Salt) की खपत को कम करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं: यह तो थी जानकारी भारत में अधिक नमक (Salt) के सेवन के बारे में। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी दोनों लोगों को कम सोडियम युक्त नमक के सेवन करने की सलाह देते हैं, ताकि कई गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है ताकि लोगों को अधिक नमक से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जा सके। याद रखें कि नमक (Salt) के शरीर के लिए लाभ और हानियां उसकी मात्रा पर निर्भर करती हैं। अगर इसको कम और सही मात्रा में लिया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #WhyhighsaltintakeisasilentepidemicinIndia #Excesssaltintake #silentepidemic #salt #heartproblems

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UPSC Recruitment 2025

UPSC Recruitment 2025: असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर और अन्य पदों के लिए योग्यता और आवेदन प्रक्रिया

यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (Union Public Service Commission) यानी यूपीएससी (UPSC) ने एक नई नोटिफिकेशन निकाली है। इसके अनुसार उन्होंने असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर (Assistant Drugs Controller) और जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर पोस्ट्स के लिए आवेदन शुरू किए हैं। अगर आप इनमें आवेदन करना चाहते हैं, तो आप इसके लिए अभी अप्लाई कर सकते हैं। यह भी बता दें कि अप्लाई करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। यानी इच्छुक कैंडिडेट इस तिथि से पहले अप्लाई करें अन्यथा इसके बाद वो अप्लाई नहीं कर पाएंगे। इससे मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ और फॅमिली वेलफेयर में 24 पदों को भरा जाएगा। आइए जानें यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के बारे में। यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर (Assistant Drugs Controller), बॉटनिस्ट और जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर पोस्ट्स के लिए अप्लाई करने की तिथि 12 जुलाई थी यानी यह 12 जुलाई से यह शुरू हो चुकी है। आइए जानें इसकी योग्यता और अन्य चीजों के बारे में: यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के लिए योग्यता यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के लिए आयु सीमा एप्लिकेशन फीस यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली इन पोस्ट्स के लिए सामान्य, ओबीसी वर्गो के लिए एप्लिकेशन फीस 25 रुपए रखी गई है। जबकि एससी, एसटी, महिलाओं आदि को कोई भी फीस नहीं देनी है। उनके लिए यह पूरी तरह से फ्री है। इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? कैसे करें अप्लाई? यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के लिए अप्लाई करने का तरीका इस प्रकार है:  यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के बारे में खास बात यह भी है कि इनमें कैंडिडेट्स को अच्छी सैलरीज के साथ ही हाउस रेंट, अलाउंस, मेडिकल फैसिलिटी, प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी, पेंशन आदि मिलेंगे। यानी अगर आप यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यानी यूपीएससी (UPSC) की इन पोस्ट्स के लिए योग्य हैं तो इसके लिए अप्लाई करना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #VacanciesbyUPSC #UPSC #UnionPublicServiceCommission #AssistantDrugsController #Botanist #JuniorScientificOfficer

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Control BP, Sugar & Depression

ब्लड प्रेशर, शुगर और डिप्रेशन को कंट्रोल करने के लिए यह ड्रिंक्स हैं बेहतरीन

हेल्दी रहने के लिए कई चीजों को महत्वपूर्ण माना गया है उन्हीं में से एक है सही आहार का सेवन। हाई ब्लड प्रेशर (Blood Pressure), डायबिटीज (Diabetes) और डिप्रेशन जैसी समस्याएं आजकल सामान्य होती जा रही हैं। हेल्दी आहार के साथ ही ड्रिंक्स का सेवन करना भी इनसे बचाव के लिए जरूरी हैं। ऐसा माना गया है कि डिहाइड्रेशन कई समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में पानी और अन्य हेल्दी ड्रिंक्स पीना ब्लड प्रेशर, डायबिटीज (Diabetes) और डिप्रेशन के रोगियों के लिए फायदेमंद माने गए हैं। कुछ पेय पदार्थ खासतौर पर ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को कंट्रोल करने, ब्लड शुगर को कम करने और डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। आइए जाने ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) के बारे में। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) हारवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Harvard School of Public Health) के अनुसार पानी वो ड्रिंक है जो शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही दूध को भी हेल्थ के लिए फायदेमंद पाया गया है। आइए जानें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स (Best Drinks for Blood Pressure, Diabetes and Depression) के बारे में:  ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को मैनेज करने के लिए इन ड्रिंक्स का सेवन करें: डायबिटीज (Diabetes) डायबिटीज (Diabetes) को कंट्रोल में रखने के लिए पानी, बिना चीनी के चाय व कॉफी और लो फैट मिल्क को फायदेमंद पाया गया है। इसके अलावा अन्य फायदेमंद ड्रिंक्स इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा डिप्रेशन (Depression) डिप्रेशन एक ऐसी समस्या है जिससे आजकल बहुत से लोग प्रभावित हैं। डिप्रेशन के लिए बेस्ट ड्रिंक्स इस प्रकार हैं: कैमोमाइल चाय: कैमोमाइल चाय को अपने शांत करने और तनाव से बचाव वाले गुणों के लिए जाना जाता है। इससे स्ट्रेस और एंग्जायटी को मैनेज करने में मदद मिलती है।  हिबिस्कस टी: कुछ स्टडीज यह बताती हैं कि हिबिस्कस टी यानी गुड़हल की चाय में मूड को सही रखने वाले गुण होते हैं। इससे डिप्रेशन को दूर करने में मदद मिलती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Diabetes #bloodpressure #sugarcontrol #depressionrelief #healthydrinks #naturalremedies

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Phone Under ₹13,000

वाटरप्रूफ और पावरफुल: रियलमी का वाटरप्रूफ 5जी स्मार्टफोन मात्र 13,000 रुपये से कम में

रियलमी (Realme) एक ऐसी कंपनी है जो कम कीमत में हाई क्वालिटी के स्मार्टफोन्स को बनाती है। इसकी खासियतहै पावरफुल प्रोसेसर, अच्छा कैमरा और ऐसी बैटरी जो लंबे समय तक चलती है। अपने कई बेहतरीन फीचर्स के कारण यह स्मार्टफोन (Smartphone) लोगों में पॉपुलर हैं। इस कंपनी के फोन अच्छे डिजाइन के साथ आते हैं। अभी इस कंपनी ने एक नया वाटरप्रूफ फोन लांच किया है जिसकी कीमत बहुत कम है। इसे अभी इंडियन मार्केर्ट में निकाला गया है और इस फोन के लिए कंपनी ग्राहकों को बहुत से डिस्काउंट व ऑफर्स भी दे रही है। अगर आप सस्ते या कम कीमत में अपने लिए अच्छा फोन खरीदना चाहते हैं, तो यह आपके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। आइए जानें रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G) के बारे में।  रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G): जानिए क्या हैं इसकी खासियतें? जैसा की पहले ही बताया गया है कि रियलमी (Realme) का यह फोन बहुत ही कम कीमत में उपलब्ध है। यह फोन 6जीबी और 8जीबी रैम के साथ है और इसमें 128जीबी स्टोरेज भी है। इसके फीचर्स इस प्रकार हैं: डिस्प्ले:  रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G) फोन 6.72 इंच डिस्प्ले के साथ मिल रहा है इसके साथ ही इसमें आईपीएस एलसीडी है। अगर बात की जाए रिफ्रेश रेट और रिजोल्यूशन की, तो इसका रिफ्रेश रेट है 20Hz और रिजोल्यूशन 1080 x 2400 पिक्सल है।  प्रोसेसर:  रियल में या यह फोन ऑक्टा-कोर सीपीयू के साथ आपको मिलेगा और इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6400 है। स्टोरेज:  रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G) फोन दो वेरिएंट में उपलब्ध है। इसमें एक है 6जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज के साथ और दूसरा है 8जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज के साथ। इसके साथ ही यह स्मार्टफोन (Smartphone) एंड्रॉइड 15 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ मिल रहा है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? कैमरा:  इस रियलमी (Realme) फोन में डुअल रियर कैमरा और 50एमपी प्राइमरी सेंसर है और यही नहीं इसमें 2एमपी सेकेंडरी सेंसर भी मौजूद है। इसका फ्रंट कैमेरा 8एमपी का है। संक्षेप में कहा जाए तो फोटोग्राफी और वीडियोज बनाने के लिए यह फोन एक अच्छा विकल्प हो सकता है।  अगर बात की जाए रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G) के अन्य फीचर्स के बारे में तो इसमें धूल और पानी को रोकने के लिए आईपी69 रेटिंग है। यही नहीं, फिंगरप्रिंट सेंसर भी इसमें हैं जिससे ग्राहकों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। इसमें दो सिम का इस्तेमाल किया जा सकता है और इसमें फास्ट इंटरनेट स्पीड के लिए 5जी है। रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G) की  6000mAh बैटरी है, जो 45W फास्ट चार्जिंग को स्पोर्ट करती है। कम समय में यह फोन पूरा चार्ज हो जाता है। रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G) की कीमत यह स्मार्टफोन (Smartphone) तीन रंगों में उपलब्ध है जो इस प्रकार हैं मिडनाइट ब्लू,लूनर सिल्वर और स्टेलर पिंक। इसकी कीमत विभिन्न वेरिएंट्स के लिए अलग है, जैसे 6जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज वाला रियलमी पी3x 5जी (Realme P3x 5G) फोन 11,699 रुपये का है। इसके साथ ही 8जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज वाला यह स्मार्टफोन 12,699 रुपये का है।  रियलमी (Realme) का यह फोन फ्लिपकार्ट और रियलमी के स्टोर से आप खरीद सकते हैं। रियलमी (Realme) के इस फोन को खरीदते हुए ग्राहकों को कई ऑफर्स भी मिल रहे हैं। इस फोन के पीछे का डिजाइन बीगन लेदर डिजाइन का है जो इसे और अधिक आकर्षक बना रहा है। इनमें डिस्काउंट के साथ ही एक्सचेंज ऑफर्स भी मिल रहे हैं। तो किफायती दामों में इस स्मार्टफोन (Smartphone) को खरीदने का मौका न गवाएं और आज ही इसे खरीदें।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Realme #realme #5gphone #waterproofphone #budgetsmartphone #realme5g #under13000

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vitamin d

विटामिन डी डेफिशिएंसी: इस कमी से बढ़ सकता है इन 5 बीमारियों का जोखिम

विटामिन डी (Vitamin D) एक ऐसा जरूरी न्यूट्रिएंट है, जिसका इस्तेमाल हमारा शरीर कैल्शियम और फोस्फरस को एब्जॉर्ब करने के लिए करता है। अगर बात की जाए कैल्शियम और फोस्फरस की, तो यह हमारी हड्डियों और दांतों को बनाने और मजबूत बनाये रखने में मददगार हैं। इसके साथ ही इनके कई अन्य लाभ भी हैं। विटामिन डी (Vitamin D) का मुख्य स्त्रोत सूरज की रोशनी को माना गया है है। हालांकि, कुछ फूड्स से भी इसे प्राप्त किया जा सकता है। शरीर में विटामिन डी की कमी यानी डेफिशिएंसी होने से कई समस्याएं होने का रिस्क रहता है। आइए जानें विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) के बारे में। विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार विटामिन डी (Vitamin D) को सूरज की रोशनी, कई फूड्स और सप्लीमेंट्स से प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद भी विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) दुनिया भर में सामान्य समस्याओं में से सबसे सामान्य है।  विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) इस प्रकार हैं  रिकेट्स रिकेट्स बच्चों में होने वाली समस्या है, जिसमें उनकी हड्डियां कमजोर और सॉफ्ट हो जाती है। इससे हड्डियों का आकर अलग हो जाता है। ऐसा माना गया है कि इसका मुख्य कारण होता है विटामिन डी (Vitamin D) की कमी। लोग इस समस्या को गरीबी और कुपोषण से जोड़ कर देखते हैं। वयस्कों में इस स्थिति को ऑस्टियोमलेशिया के नाम से जाना जाता है। इसके कारण हड्डियों में दर्द हो सकता है और मसल्स कमजोर हो सकते हैं। यह नहीं इससे फ्रैक्चर का रिस्क भी बढ़ सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस शरीर में कैल्शियम के एब्ज़ोर्प्शन के लिए विटामिन डी (Vitamin D) जरूरी है। इसकी कमी के कारण बोन डेंसिटी कम होती है और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ता है। यही नहीं इससे हड्डियों के टूटने का रिस्क भी अधिक हो जाता है। यह समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन उम्र के बढ़ने के साथ ही इस रोग के विकसित होने की संभावना बढ़ती है। ऑटोइम्यून डिजीज  ऐसा पाया गया है कि विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) ऑटोइम्यून डिजीज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऑटोइम्यून कंडीशन से पीड़ित व्यक्तियों में अक्सर लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल पाया गया है। यह कंडीशंस हैं मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस, टाइप 1 डायबिटीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, रूमेटाइड आर्थराइटिस आदि। हालांकि, इसके बारे में अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। कुछ कैंसर विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) से कुछ कैंसर होने का रिस्क भी बढ़ता है। कुछ स्टडीज भी इन दोनों के लिंक के बारे में बताती हैं। ऐसा माना गया है कि इस कमी से ब्रेस्ट कैंसर और बाउल कैंसर का रिस्क बढ़ता है। ऐसा भी पाया गया है कि लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल से सम्पूर्ण कैंसर मोर्टेलिटी में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही यह भी पाया गया है कि इससे प्रोस्टेट और पैंक्रियाटिक कैंसर का रिस्क बढ़ता है। यानी, यह कमी कैंसर की संभावना को बढ़ा सकती है, जो एक गंभीर समस्या का विषय है। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा कार्डियोवैस्कुलर डिजीज विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज  से भी जोड़ा गया है, जिसमें कई हार्ट डिजीज शामिल हैं।  यह भी पाया गया है कि इससे बुजुर्गों की मसल्स कमजोर हो सकती हैं और उन्हें दर्द हो सकता है। विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन और अन्य मेंटल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। यह कमी मूड डिसऑर्डर्स का कारण भी बन सकती है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Vitamin D #vitamind #healthtips #bonehealth #immunity #diseaserisk #nutrition #healthawareness

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Ice Bath Benefits & Risks You Should Know

आइस बाथ- एक लोकप्रिय ट्रेंड जिसके कई हैं फायदे, लेकिन इसके इन स्वास्थ्य जोखिमों से रहें सावधान

पिछले कुछ समय से आइस बाथ (Ice bath) चैलेंज सोशल मीडिया पर बहुत प्रचलित हो रहा है। ऐसा माना गया है कि इसके कई फायदे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो इससे कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर आप आइस बाथ के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि इसे कायरोथेरेपी भी कहा जाता है। इसमें ठंडे पानी में बर्फ मिला कर नहाया जाता है ताकि सूजन और मांसपेशियों में दर्द को कम किया जा सके। लेकिन, हाल ही में हुई रिसर्च बताती हैं कि आइस बाथ (Ice bath) से कई नुकसान भी हो सकते हैं। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार अगर आइस बाथ (Ice bath) को सही से लिया जाए तो यह उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जो स्पोर्ट्स में भाग लेते हैं। लेकिन, इसको आजमाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लें और इसकी सही तकनीक के बारे में जान लें। आइए जानें आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath) के बारे में। हायपोथर्मिया ठंडे पानी में ज्यादा समय रहने से शरीर पर फिजिकल रिएक्शन हो सकता है। 15 डिग्री सेल्सियस  से कम तामपान के पानी में जाना बहुत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इसमें शरीर का तापमान बहुत कम हो सकता है जिसे हायपोथर्मिया कहा जाता है। यह एक एमेर्जेंसी हैं, जिसमें तुरंत डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता होती है। यही नहीं, ठंडे पानी से बाहर आने के बाद भी शरीर का टेम्प्रेचर कम हो सकता है और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर पर असर आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of Ice bath) ब्लड प्रेशर से भी संबंधित हैं। इससे हार्ट रेट बढ़ जाती और यह अनकण्ट्रोल हो सकती है। इसका प्रभाव ब्लड प्रेशर पर भी पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। यही नहीं, अधिक ठंड से एकदम हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है। उन लोगों के लिए आइस बाथ (Ice bath) खासतौर पर खतरनाक है जिन्हें हार्ट, ब्लड वेसल्स या दिमाग से सम्बन्धित कोई समस्या है। सांस संबंधी समस्याएं आइस बाथ (Ice bath) के दौरान ठंडे पानी में रहने से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जैसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस। इस पानी में अधिक देर तक रहने से नर्वस और ब्लड वेसल्स को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे पैरों और हाथों में दर्द, उनका सुन्न होना या ठंड के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। यह तो थे आइस बाथ से जुड़े हेल्थ रिस्क्स (Health risks of ice bath)। आइए जानें कि सही मार्गदर्शन और सलाह के बाद आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) के बारे में। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा आइस बाथ के फायदे (Benefits of ice bath) आइस बाथ के फायदे (Benefits of Ice bath) इस प्रकार हो सकते हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Ice bath #icebath #coldtherapy #healthtrend #cryotherapy #wellnesstips

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Delhi Bumper Recruitment 2025

दिल्ली में बंपर भर्ती: जेल वार्डर समेत 2000 से अधिक पोस्ट्स के लिए कर सकते हैं अप्लाई

दिल्ली में सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले लोगों के लिए अब एक बेहतरीन अवसर है। दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) यानी डीएसएसएसबी (DSSSB) ने एक नई नोटिफिकेशन जारी की है। इस नोटिफिकेशन के अनुसार डीएसएसएसबी (DSSSB) ने 2000 से भी अधिक पोस्ट्स निकाली हैं। यह पोस्ट्स मलेरिया इंस्पेक्टर, पीजीटी, जेल वार्डर आदि की हैं। अगर आप इसके लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो ध्यान रखें कि 8 जुलाई से इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगर आप इसके बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं। इसके साथ ही आप इसके माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई भी कर सकते हैं। आइए जानें इसके बारे में। डीएसएसएसबी द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) के बारे में पाएं जानकारी दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) ने लगभग 2119 पोस्ट्स निकाली हैं और यह बात जानना आपके लिए जरूरी है कि इसके लिए अप्लाई आप केवल 7 अगस्त तक कर सकते हैं। उसके बाद यह प्रोसेस बंद हो जायेगी और इसके लिए आपको अप्लाई करने का मौका नहीं मिलेगा।  डीएसएसएसबी द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) की डिटेल्स डीएसएसएसबी द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) के लिए विभिन्न पोस्ट्स के लिए कैंडिडेट को आवश्यक योग्यता और अनुभव की जरूरत होगी। इन 2119 पोस्ट्स की डिटेल इस प्रकार है: इनके बारे में अधिक जानकारी आपको दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (Delhi Subordinate Service Selection Board) की ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी। कैसे करें अप्लाई? डीएसएसएसबी (DSSSB) द्वारा निकाली पोस्ट्स (Posts by DSSSB) के लिए अप्लाई करने से पहले यह जानना भी आपके लिए जरूरी है कि जनरल और अन्य कुछ केटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए इसकी एप्लीकेशन फीस केवल 100 रुपए है। जबकि, अन्य कुछ वर्गों और महिलाओं के लिए यह पूरी तरह से फ्री है। यानी, उन्हें इन पोस्ट्स के लिए अप्लाई करने के लिए कुछ भी पे नहीं करना होगा। इसके लिए आप इस तरह से अप्लाई कर सकते हैं: इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? डीएसएसएसबी (DSSSB) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। इसका लिंक आपको गूगल पर सर्च करने पर भी मिल जाएगा। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi news DSSSB #DelhiJobs #GovtJobs2025 #JailWarderRecruitment #SarkariNaukri #JobAlert #ApplyNow

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Air Pollution May Trigger Anxiety and Depression

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी: एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा

एयर पॉल्यूशन (Air pollution) गंभीर समस्याओं में से एक है। हमारे देश में यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। इस परेशानी का मुख्य कारण माना जाता जाता है गाड़ियों और इंडस्ट्रीज से निकले धुएं को। इस धुएं से कई हानिकारक गैसें निकलती हैं जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड आदि। इनडोर और आउटडोर पॉल्यूशन सांस संबंधी और कई रोगों का कारण बन सकता है। लेकिन, हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार इसका प्रभाव मेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। डब्ल्यूएचओ ने एंग्जायटी और डिप्रेशन को पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के साथ लिंक किया है। आइए जानें पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में। पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा के अनुसार लगभग पूरी दुनिया की अधिकतम आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है, जो डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन लिमिट्स से अधिक है तथा जिसमें प्रदूषकों का स्तर बहुत अधिक है। डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में एक हैरान करने वाली जानकारी दी है। उनके अनुसार एयर पॉल्यूशन (Air pollution) मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे एंग्जायटी और डिप्रेशन का एक मुख्य कारण हो सकता है। एयर पॉल्यूशन (Air pollution) में मौजूद  हानिकारक पार्टिकल्स और गैसेस से हमारे दिमाग और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह सब हमारी ब्लडस्ट्रीम पर पहुंच कर दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। इससे मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स को बढ़ावा मिलता है। यह तो थी पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में जानकारी। अब जानते हैं एयर पॉल्यूशन के अन्य प्रभावों के बारे में।  एयर पॉल्यूशन के दिमाग पर इफेक्ट  जैसा की पहले ही बताया गया है कि एयर पॉल्यूशन (Air pollution) से मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही इससे मेंटल हेल्थ की क्वालिटी कम होती है जिससे नींद में भी समस्या आ सकती है और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।  बच्चों और पहले से ही मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के रोगी पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के प्रति अधिक सेंसिटिव हो सकते हैं।  हालांकि, पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में अभी अधिक स्टडी की जानी जरूरी है। यही नहीं, लोगों को एयर पॉल्यूशन (Air pollution) के सम्पर्क में आने से भी बचना चाहिए, ताकि कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सके।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने के उपाय? एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने  के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Air pollution #airpollution #WHOwarning #mentalhealth #anxiety #depression #toxicair #healthalert

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