Anu Sharma

Oral health In Women

महिलाओं में माइग्रेन और बॉडी पेन का कारण बन सकती है खराब ओरल हेल्थ: स्टडी

लोग अक्सर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की बात करते है, लेकिन ओरल हेल्थ (Oral health) को अधिकतम नजरअंदाज कर दिया जाता है। ओरल हेल्थ सबके सम्पूर्ण स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है फिर वो चाहे महिला हो या पुरुष। महिलाओं की ओरल हेल्थ (Women’s oral health) उनके पूरे जीवन में हॉर्मोनल फ्लेक्च्युएशन से काफी प्रभावित होती है, खासतौर पर यौवन, मासिक धर्म, गर्भावस्था, मेनोपॉज आदि में। इस दौरान मसूड़ों से संबंधित बीमारियों और अन्य मौखिक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का रिस्क बढ़ जाता है। हाल ही में हुई एक स्टडी में यह पता चला है कि महिलाओं में ओरल हेल्थ बोन हेल्थ, माइग्रेन से संबंधित है। आइए जानें महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine) के बारे में।  महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine): पाएं जानकारी इलिनोइस डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ (Illinois Department of Public Health) ले अनुसार महिलाएं अपने पूरे जीवन हॉर्मोनल बदलावों का अनुभव करती रहती हैं। कुछ खास स्टेजेज के दौरान उन्हें खास ओरल हेल्थ (Oral health) की जरूरत होती है। इसलिए अपनी ओरल हेल्थ का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है। एक स्टडी यह बताती है कि खराब मौखिक स्वास्थ्य से महिलाओं को माइग्रेन और बॉडी पेन का जोखिम बढ़ सकता है। आइए जानें महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine) के बारे में की गयी इस स्टडी के बारे में। महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine): क्या कहती है स्टडी? हाल ही में की एक स्टडी में यह पाया गया है कि महिलाओं की खराब ओरल हेल्थ (Oral health) उनमें माइग्रेन और बॉडी पेन का कारण बन सकती है। इस स्टडी में खास ओरल माइक्रोब्स और कई पेन कंडीशंस के बीच में संबंध पाया गया है इस स्टडी में 67 महिलाएं शामिल थी, जिनमे से कुछ महिलाओं को फाइब्रोमायल्जिया था। फाइब्रोमायल्जिया एक ऐसी क्रोनिक कंडीशन है जिसके कारण मांसपेशियों में दर्द, थकावट और नींद में समस्या जैसी परेशानियां होती है। इस स्टडी के रिजल्ट्स में यह पाया गया कि खराब ओरल हेल्थ वाली महिलाओं में माइग्रेन और बॉडी पेन की संभावना अधिक थी।  इस स्टडी के अनुसार जिन महिलाओं की ओरल हेल्थ (Women’s oral health) सही नहीं है, उनमें चार ओरल माइक्रोबियल स्पीशीज की मात्रा अधिक होती है जो उम्र के बढ़ने के साथ दर्द से जुड़ी हुई हैं। इसलिए, शोधकर्ता नियमित रूप से अपनी ओरल हेल्थ का ध्यान रखने की सलाह देते हैं। आइए जानें ओरल हेल्थ को हेल्दी कैसे रखा जा सकता है? इसे भी पढ़ें: क्यों मनाया जाता है International No Diet Day? जानिए इसकी थीम और हिस्ट्री के बारे में ओरल हेल्थ को हेल्दी कैसे रखा जा सकता है?  अगर आप समूर्ण रूप से हेल्थ रहना चाहते हैं, तो अपनी ओरल हेल्थ (Oral health) का भी ध्यान रखें। ओरल हेल्थ (Oral health) को हेल्दी बनाये रखने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Mango and Milk Oral health #Oralhealth #women’soralhealth #bodypain #migraine #Linkbetweenwomen’soralhealthandbodypainandmigraine

आगे और पढ़ें
OnePlus 13T and OnePlus 13

OnePlus 13T and OnePlus 13 में अंतर: जानिए कौन सा स्मार्टफोन है आपके लिए बेहतर?

वनप्लस एक चाइनीज स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी है, जिसकी स्थापना साल 2013 में हुई थी। यह कंपनी स्मार्टफोन बनाने में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। अन्य स्मार्टफोन कंपनीज की तरह यह कंपनी में समय-समय पर नए प्रोडक्ट्स लांच करती रही है। हाल ही में इस कंपनी ने वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) लांच किया है। यह फोन अभी चाइना में ही लांच हुआ है। लेकिन, यह एक फ्लैगशिप स्मार्टफोन है जो कई नए फीचर्स के साथ उपलब्ध है। ऐसा माना जा रहा है कि इस फोन के फीचर्स वनप्लस 13 (Oneplus 13) के जैसे हैं। आइए जानें वनप्लस 13टी और वनप्लस 13 के बीच में अंतर (Difference between OnePlus 13T and OnePlus 13) के बारे में। वनप्लस 13टी और वनप्लस 13 के बीच में अंतर (Difference between OnePlus 13T and OnePlus 13): पाएं जानकारी वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) और वनप्लस 13 (Oneplus 13) के कुछ फीचर एक जैसे हैं, लेकिन इनमें कुछ अंतर भी हैं। वनप्लस 13टी और वनप्लस 13 के बीच में अंतर (Difference between OnePlus 13T and OnePlus 13) इस प्रकार है: डिस्प्ले  अगर बात की जाएं वनप्लस 13 (Oneplus 13) की डिस्प्ले की, तो वनप्लस 13 का यह 6.82 इंच है लेकिन वनप्लस 13टी की डिस्प्ले इससे थोड़ी छोटी है। वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) के डिस्प्ले का साइज 6.32 इंच है। वहीं वनप्लस 13 का डिस्प्ले रिजोल्यूशन भी 13टी से अधिक है। कैमरा वनप्लस 13 में ट्रिपल कैमरा है,जिसमें 50 मेगापिक्सेल का प्राइमरी सेंसर, 50 मेगापिक्सेल का टेलीफोटो लेंस और 50 मेगापिक्सेल का अल्ट्रा-वाइड-एंगल शूटर है। वनप्लस 13 (Oneplus 13) में  ड्यूल कैमरा है, जिसमें 50 मेगापिक्सेल का प्राइमरी सेंसर और 50 मेगापिक्सेल का 2x टेलीफोटो लेंस है।  बैटरी वनप्लस 13टी और वनप्लस 13 के बीच में अंतर (Difference between OnePlus 13T and OnePlus 13) में बैटरी भी शामिल है। वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) की बैटरी वनप्लस 13 से बड़ी है। वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) की बैटरी 6260mAh की है लेकिन वनप्लस 13 में 6000mAh की बैटरी है। यही नहीं, वनप्लस 13 (Oneplus 13) में वायरलेस चार्जिंग है लेकिन दूसरे नए फोन में वायरलेस चार्जिंग नहीं है। वेट वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) दूसरे फोन (Phone) के मुकाबले अधिक हल्का और पतला है। इसका वेट केवल 185 ग्राम है और मोटाई  8.15mm है। वहीं दूसरी और वनप्लस 13टी का वजन 210 ग्राम है और मोटाई 8.5mm है। एक और अंतर यह भी है कि वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट सेंसर है। लेकिन, वनप्लस 13 (Oneplus 13) में अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर है। इसे भी पढ़ें:- BSNL का सस्ता प्लान: 180 दिनों की वैलिडिटी के साथ फ्री कॉलिंग और डेटा की टेंशन खत्म प्राइस अगर बात की जाए दोनों स्मार्टफोन्स की कीमत की, तो वनप्लस 13टी. वनप्लस 13 (Oneplus 13) के मुकाबले बहुत सस्ता है। वनप्लस 13टी (Oneplus 13T) की कीमत है ₹39,990 है और वनप्लस 13 का प्राइस ₹66,998 है। यह तो थे वनप्लस 13टी और वनप्लस 13 के बीच में अंतर (Difference between OnePlus 13T and OnePlus 13)। इन दोनों में कुछ समानताएं हैं लेकिन बहुत से अंतर भी हैं। आप अपनी सुविधानुसार मनचाहा मोबाइल फोन चुन सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi   #Smartphone #DifferencebetweenOnePlus13TandOnePlus13 #OnePlus13T #OnePlus13

आगे और पढ़ें
World AIDS Vaccine Day

World AIDS Vaccine day की थीम, हिस्ट्री और उद्देश्य के बारे में जानें

एड्स (AIDS) को एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है। यह समस्या ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस यानी एचआईवी (HIV) के कारण होती है। इस बीमारी की वजह से रोगी के इम्यून सिस्टम को नुकसान होता है, जिससे शरीर इंफेक्शंस और बीमारियों से बचने में सक्षम नहीं हो पाता। अगर एचआईवी (HIV) का उपचार सही समय पर न किया जाए, तो यह एड्स (AIDS) का कारण बन सकता है। हर साल मई 18 को वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे (World AIDS Vaccine Day) के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को उन वैक्सीन्स के बारे में जागरूक करना हैं, जो एचआईवी इन्फेक्शन और एड्स (AIDS) से बचा सकती हैं। आइए जानें वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे (World AIDS Vaccine Day) के बारे में। एड्स से बचाव के बारे में भी जानें। वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे (World AIDS Vaccine Day): पाएं जानकारी वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे (World AIDS Vaccine Day) को मनाने का उद्देश्य एचआईवी (HIV) की वैक्सीन के बारे में लोगों को जागरूक करना है, ताकि लोग इस भयानक रोग से बच सकें। इस दिन को मनाने के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं: वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे (World AIDS Vaccine Day) की थीम और इतिहास इस साल वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे (World AIDS Vaccine Day) की थीम है सभी के लिए वैक्सीनेशन मानवता के लिए संभव है। इस थीम में इस बात पर जोर दिया गया है कि हर व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी उम्र या जगह का हो, उन तक जीवन बचाने वाली वैक्सीन्स पहुंचाना जरूरी है। इस दिन की शुरुआत 1998 में हुई थी। यह दिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के 1997 के भाषण की याद में मनाया जाता है, जिसमें उन्होंने एक दशक के भीतर एड्स (AIDS) वैक्सीन विकसित करने की चुनौती दी थी। इसे भी पढ़ें: क्यों मनाया जाता है International No Diet Day? जानिए इसकी थीम और हिस्ट्री के बारे में एड्स से बचाव कैसे संभव है?  कुछ सावधानियों को बरत कर एड्स (AIDS) से बचाव संभव है। यह तरीके इस प्रकार हैं:  अगर आपके मन में एड्स या एड्स वैक्सीनेशन के बारे में कोई भी सवाल है, तो अपने डॉक्टर या एक्सपर्ट से बात करें और उनसे सही सलाह लें। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। #WorldAIDSVaccineDay #AIDS #HIV #Vaccine #AIDSVaccine

आगे और पढ़ें
Plastic Cooler Vs Iron Cooler

Plastic Cooler Vs Iron Cooler: कूलर खरीदने से पहले जान लें ये महत्वपूर्ण बातें

गर्मी के मौसम में तपती और जला देने वाली गर्मी से बचना बहुत जरूरी है। इसके लिए एयर कंडीशनर या एयर कूलर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर बात की जाए कूलर की, तो एयर कंडीशन की तुलना में कूलर किफायती होता है। हालांकि, एयर कूलर एयर कंडीशन की तुलना में कम प्रभावी माना गया है। आजकल बाजार में दो तरह के कूलर्स फेमस हैं एक प्‍लास्टिक कूलर (Plastic Cooler) और दूसरा लोहे वाला कूलर। अगर आप भी इन दोनों विकल्पों को लेकर थोड़ा सा कन्फ्यूज हैं तो यह जानकारी आपके लिए निसंदेह फायदेमंद है। आइए जानें प्लास्टिक कूलर बनाम आयरन कूलर (Plastic Cooler Vs Iron Cooler) के बारे में। प्लास्टिक कूलर बनाम आयरन कूलर (Plastic Cooler Vs Iron Cooler): कौन सा है बेहतर? प्लास्टिक कूलर और आयरन कूलर दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। आइए जानें इनके बारे में। प्लास्टिक कूलर (Plastic Cooler)  प्लास्टिक कूलर (Plastic Cooler) के बेनिफिट्स इस प्रकार हैं: नुकसान आयरन कूलर (Iron Cooler) आयरन कूलर (Cooler) के भी कई फायदे हैं लेकिन इसके भी कुछ नुकसान हैं। आइए पाएं इसके बारे में जानकारी आयरन कूलर के फायदे इसे भी पढ़ें:- साइज से लेकर कीमत तक: एसी खरीदने से पहले जानिए ये 5 जरूरी बातें आयरन कूलर के नुकसान Latest News in Hindi Today Hindi Plastic Cooler Vs Iron Cooler #PlasticCoolerVsIronCooler #Cooler #PlasticCooler  #IronCooler

आगे और पढ़ें
Mango Milk and Curd

आम और दूध या दही का मिश्रण: सेहत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक?

आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार, हर भोजन का अपना स्वाद, हीलिंग और कूलिंग एनर्जी और पोस्ट-डायजेस्टिव इफेक्ट होता है। आयुर्वेद (Ayurveda) में हेल्थ को मैंटेन और रिस्टोर करने के लिए भोजन बहुत जरूरी रोल निभाता है। ऐसा भी माना गया है कि सही फूड कॉम्बिनेशन से डायजेशन सही रहता है और सेहत पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ता है। लेकिन, कुछ कॉम्बिनेशंस को सेहत के लिए नुकसानदायक माना गया है। आम एक ऐसा फल है जो सबसे अधिक पसंद किया जाता है। मेंगो शेक और मेंगो लस्सी ऐसे ड्रिंक्स हैं, जो गर्मियों में सबसे अधिक पीयें जाते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि यह कॉम्बिनेशन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? आइए जानें कि आम और दूध व दही का कॉम्बिनेशन (Combination of mango and milk or curd) क्यों है सेहत के लिए हानिकारक? आम और दूध व दही का कॉम्बिनेशन (Combination of mango and milk or curd): क्या है सेहत के लिए नुकसानदायक? आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार फलों को अगर दूध के साथ खाया जाए तो यह हमारे डायजेस्टिव हेल्थ के लिए नुकसानदायक है। ऐसा माना जाता है कि भोजन को गलत मिश्रण के सेवन से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ऐसे ही आम और दूध व दही का कॉम्बिनेशन (Combination of mango and milk or curd) का सेवन करने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं: एक्सपर्ट्स के अनुसार आम और दूध व दही का कॉम्बिनेशन (Combination of mango and milk or curd) खाने से एसिडिटी भी हो सकती है। फलों में फाइबर होता है जिसे दूध या दही (Milk or curd) से साथ खाना पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि फलों का सेवन खाली पेट ही करना चाहिए ताकि इनमे मौजूद न्यूट्रिशंस का पूरा फायदा हमें मिल सके। इसके साथ ही दूध या दही (Milk or curd) को आम के साथ खाने से बचें। इसे भी पढ़ें: Virgin Mojito: एक ताजा और स्वादिष्ट पेय जो गर्मी से दिलाये राहत इन कॉम्बिनेशंस का भी न करें सेवन दूध और तरबूज या खरबूजा का सेवन भी एक साथ न किए जाने की सलाह दी जाती है। दूध और खरबूजा और तरबूज दोनों ही ठंडे होते हैं। दूध लैक्सटिव होता है और तरबूज व खरबूजा ड्यूरेटिक होते हैं। अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में दूध को पचने में अधिक समय लगता है। आयुर्वेदा (Ayurveda) में यह भी बताया गया है कि दूध को खट्टी चीजों के साथ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इनसे भी पाचन तंत्र को नुकसान हो सकता है। ये फूड कॉम्बिनेशन पाचन संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं और कई तरह की अन्य बीमारियां  हो सकती हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Mango and Milk #Milkandcurd #Ayurveda #Combinationofmangoandmilkorcurd #mangoandmilkorcurd

आगे और पढ़ें
Kidney stone

गर्मी में किडनी स्टोन के मामलों में वृद्धि: AINU के विशेषज्ञों की चेतावनी

किडनी स्टोन (Kidney stone) एक ऐसी समस्या है, जो आजकल आम होती जा रही है। हमारे यूरिन में कई डिसॉल्व्ड मिनरल्स और अन्य तत्व होते हैं। जब यूरिन में इन मिनरल्स और तत्वों का लेवल बहुत अधिक हो जाता है, तब स्टोन बनते हैं। किडनी स्टोन (Kidney stone) शुरू में छोटे आकार के होते हैं लेकिन बाद में यह बड़े हो सकते हैं। किडनी में कुछ स्टोन किसी भी तरह की समस्या का कारण नहीं बनते हैं लेकिन कई बार  युरेटर तक पहुंच जाते हैं जो, किडनी और ब्लैडर के बीच में मौजूद एक ट्यूब होती है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में किडनी स्टोन (Kidney stone) के मामले 2 से 2.5 गुना बढ़ जाते हैं। आइए जानें कि किडनी स्टोन के बारे में विशेषज्ञ क्या कहते हैं (What do experts say about kidney stone)? इसके साथ ही किडनी स्टोन से बचने (Prevention of kidney stones) के बारे में भी जानकारी पाएं।  किडनी स्टोन के बारे में विशेषज्ञ क्या कहते हैं (What do experts say about kidney stone)? हैदराबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी (AINU) के एक्सपर्ट्स के अनुसार गर्मी के मौसम में किडनी स्टोन (Kidney stone) के मामले बहुत अधिक बढ़ चुके हैं। यह परसेंटेज दो से ढाई गुना तक है। एक्सपर्ट्स के अनुसार  इस मौसम में इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी में रोजाना 300 से 400 मरीजों का इलाज हो रहा है। यही नहीं, उनका यह भी कहना है कि यह डेटा हाल के सालों में सबसे अधिक है। यानी, इस साल पिछले सालों की तुलना में अधिक किडनी स्टोन्स के मामले सामने आए हैं। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि किडनी स्टोन के मामले खासतौर पर एडल्ट्स और बच्चों में बढ़ रहे हैं। यह तो आप जान ही गए होंगे कि किडनी स्टोन के बारे में विशेषज्ञ क्या कहते हैं (What do experts say about kidney stone)? उनके अनुसार इस समस्या के कई कारण हैं जैसे कम पानी पीना, अधिक जंक फूड का सेवन और अधिक गर्मी आदि। किडनी स्टोन के कारण क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार यूरिन में मिनरल्स, एसिड्स और अन्य सब्सटांस होते हैं जैसे कैल्शियम, सोडियम, ऑक्सालेट और यूरिन एसिड। जब यूरिन में इनके पार्टिकल्स बहुत ज्यादा होते हैं लेकिन लिक्विड कम होते हैं तो इसके कारण यह आपस में चिपकना शुरू कर देते हैं। इससे क्रिस्टल और स्टोन बन सकते हैं। इन्हें बनने में कई साल या महीने लग सकते हैं।  इसे भी पढ़ें: Virgin Mojito: एक ताजा और स्वादिष्ट पेय जो गर्मी से दिलाये राहत किडनी स्टोन से बचने (Prevention of kidney stones) के तरीके जिन भी चीजों का हम सेवन करते हैं, उसका प्रभाव हमारे शरीर और किडनी स्टोन (Kidney stone) पर पड़ता है। लेकिन, कुछ किडनी स्टोन से बचने के तरीके (Prevention of kidney stones) से इसे कम किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं: नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Kidney Stone #Kidneystones #kidneystone #stones #preventionofkidneystones #urine #Whatdoexpertssayaboutkidneystones

आगे और पढ़ें
Virgin Mojito

Virgin Mojito: एक ताजा और स्वादिष्ट पेय जो गर्मी से दिलाये राहत

गर्मी के मौसम में अधिक गर्मी के कारण बार-बार कुछ ठंडा पेय पदार्थ पीने का मन करता है। गर्मियों में निम्बू पानी (Lemon water) एक लोकप्रिय ड्रिंक है जो तुरंत ताजगी प्रदान करता है। इसके साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखने और गर्मी से राहत पाने में यह मदद करता है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito) निम्बू पानी (Lemon water) का ही मॉडर्न रूप है, जो गर्मी के दिनों में खुद को ठंडा रखने का बेहतरीन तरीका है। रेस्टोरेंट्स में यही ड्रिंक आपको बहुत महंगा मिलेगा। वहीं, घर पर आप आसानी से इसे बना सकते हैं। इसके लिए आपको किसी खास इंग्रेडिएंट की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, सामान्य घर में पड़ी चीजों से इसे बनाया जा सकता है। आइए जानें घर पर वर्जिन मोजितो को बनाने का आसान तरीका क्या है? वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito): कैसे बनाएं इसे घर पर? वर्जिन मोजितो को निम्बू (Lemon), पुदीना, और सोडा वाटर के साथ बनाया जाता है। इसमें सोडा वाटर का इस्तेमाल होता है जिसके कारण यह निम्बू पानी (Lemon water) से अलग और स्वादिष्ट बनता है। वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito) को बनाने की इंग्रेडिएंट्स इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक वर्जिन मोजितो (Virgin Mojito) बनाने की विधि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह ड्रिंक सामान्य निम्बू पानी (Lemon water) से बहुत स्वादिष्ट होगा और आपके घर के हर सदस्य को यह पसंद आएगा। इस रेसिपी को ट्राई करने के बाद इसे पीने के लिए न तो आपको किसी रेस्टोरेंट में जाने की जरूरत है न ही फालतू पैसे खर्च करने की आवश्यकता है। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Virgin Mojito #VirginMojito #LemonWater #Lemon #Drink

आगे और पढ़ें
Top Sunscreen Brands in India

Top Sunscreen Brands in india: चिलचिलाती गर्मी में अपने स्किन को प्रोटेक्ट करें सनस्क्रीन से

गर्मी के मौसम में चिलचिलाती धुप से खुद को बचाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हल्के और कॉटन के कपड़े पहनें, दोपहर के समय घर से बाहर जानें से बचें, खुद को कवर कर के रखें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और अच्छे सनस्क्रीन (Sunscreen) का इस्तेमाल करें। अच्छे सनस्क्रीन (Sunscreen) से त्वचा की रक्षा होती है और यह हानिकारक अल्ट्रावॉइलेट रेज (Ultraviolet Rays) से पूरा दिन सुरक्षा प्रदान करता है। इन रेज से बचाव से न केवल प्रीमेच्योर एजिंग के लक्षण जैसे झुर्रियां व डार्क स्पोर्ट्स कम हो सकते हैं, बल्कि स्किन कैंसर का रिस्क भी कम होता है। स्किन को इन हानिकारक अल्ट्रावॉइलेट रेज  (Ultraviolet Rays) से बचाने के लिए सही सनस्क्रीन का चुनाव करना बेहद जरूरी है। आइए जानें इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) के बारे में। इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) यू.एस फ़ूड एंड ड्रग (U.S Food and Drug) के अनुसार आप सनस्क्रीन का उपयोग किस तरह से करते हैं और अपनी स्किन को बचाने के लिए आप अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, इससे कई समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है जैसे सनबर्न, स्किन कैंसर, समय से पहले एजिंग आदि। इसलिए, आपको सही सनस्क्रीन (Sunscreen) का चुनाव करना चाहिए। इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) इस प्रकार हैं:  लैक्मे सन एक्सपर्ट अल्ट्रा मैट SPF 50 PA+++(Lakme Sun Expert Ultra Matte SPF 50 PA+++) लैक्मे को अपने बेहतरीन ब्यूटी प्रोडक्ट्स के लिए जाना जाता है। लैक्मे सन एक्सपर्ट अल्ट्रा मैट SPF 50 PA+++ एक लाइटवेट सनस्क्रीन है, जो बिलकुल भी चिपचिपा नहीं है। यह सनस्क्रीन (Sunscreen) यूवीए और यूवीबी रेज से सुरक्षा प्रदान करता है। अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो भी यह आपके लिए उपयुक्त है। यही नहीं, यह वाटर रेसिस्टेंट और स्वेट रेजिस्टेंस भी है।  डॉट & की वाटरमेलन कूलिंग सनस्क्रीन SPF 50+ (Dot & Key Watermelon Cooling Sunscreen SPF 50+) डॉट & की एक लोकप्रिय स्किनकेयर ब्रांड है, जिसका वाटरमेलन कूलिंग सनस्क्रीन एसपीएफ 50+ पीए++++ सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉइलेट रेज (Ultraviolet Rays) से बचाव के लिए बेहतरीन विकल्प है। यह हर तरह की त्वचा के लिए उपयुक्त होगा। यह बिलकुल हल्का और नॉन- स्टिकी सनस्क्रीन है। यही नहीं, यह सनस्क्रीन फ्रेग्नेंस और पैराबेन फ्री है। अगर आपकी स्किन ऑयली या ड्राई है, तो यह आपके लिए बेस्ट सनस्क्रीन है। मामाअर्थ मिनरल बेस्ड सनस्क्रीन SPF 50 (Mamaearth Mineral Based Sunscreen SPF 50) इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) में यह भी शामिल है। यह वो सनस्क्रीन (Sunscreen) है, जो यूवीए और यूवीबी रेज के लिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन प्रदान करता है। यह नेचुरल इंग्रिडेंट्स से भरपूर है जैसे कॅरोट सीड आयल, जोजोबा आयल और शिया बटर आदि। अच्छी बात यह भी हैं कि इनमें किसी भी तरह का कोई हानिकारक केमिकल नहीं है। द डर्मा को 1% हयालूरोनिक सनस्क्रीन एक्वा जेल (The Derma Co 1% Hyaluronic Sunscreen Aqua Gel) इंडिया में टॉप सनस्क्रीन ब्रैंड्स (Top Sunscreen Brands in India) में यह स्क्रीन SPF 50 PA++++के साथ है। यह सनस्क्रीन यूवीए व यूवीबी रेज और ब्लू लाइट्स से सुरक्षा प्रदान करता है। इससे सनडैमेज से बचाव होता है और स्किन हेल्दी रहती है। इसके साथ ही यह हयालूरोनिक एसिड और विटामिन इ युक्त है, जिससे स्किन हाइड्रेट रहती है और लाइन्स व झुर्रियां कम होने में मदद मिलती है। यह सनस्क्रीन (Sunscreen) किसी भी स्किन टाइप के  लिए उपयुक्त है और बिना किसी समस्या के जल्दी एब्जॉर्ब हो जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक बायोटिक बायो सैंडलवुड सनस्क्रीन एसपीएफ 30 (Biotique Bio Sandalwood Sunscreen SPF 30) यह एक हर्बल (Herbal) सनस्क्रीन है, जो यूवीए और यूवीबी किरणों से पूरी सुरक्षा प्रदान करता है। यह चंदन, हल्दी और नीम जैसे प्राकृतिक तत्वों से भरपूर है। यही नहीं, यह सनस्क्रीन (Sunscreen) पैराबेन और सल्फेट जैसे हानिकारक रसायनों से भी फ्री है। यानि, यह अल्ट्रावॉइलेट रेज (Ultraviolet Rays) से पूरी तरह से सुरक्षा करता है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Top Sunscreen Brands In India #TopSunscreenBrandsinIndia #UltravioletRays  #Sunscreen #TopSunscreenBrands #UVAandUVBrays #SunscreenBrands

आगे और पढ़ें
World Hypertension Day

World Hypertension Day: जानें क्यों मनाया जाता है हाइपरटेंशन डे और इससे बचने का क्या है उपाय

हाइपरटेंशन (Hypertension) यानी हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure), एक ऐसी समस्या है जिसमें आर्टरीज वाल्स पर दबाव डालने वाले ब्लड की फाॅर्स बहुत अधिक होती है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार यह समस्या गंभीर हो सकती है लेकिन इससे पीड़ित अधिकतर रोगियों में इसका कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक करना और इससे बचाव और कंट्रोल को प्रोमोट करना है। आइए वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day) के बारे में जानें विस्तार से। इस समस्या से बचाव के बारे में भी जानें। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day): पाएं जानकारी वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World hypertension day) को बनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हाइपरटेंशन (Hypertension), इसके रिस्क के बारे में बताना और जागरूक करना है। इसके साथ ही इस दिन के माध्यम से लोगों को इस रोग से बचने के तरीकों को भी बताया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हाइपरटेंशन (Hypertension) से पूरी दुनिया में लगभग दस लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इससे कई समस्याओं का रिस्क बढ़ सकता है जैसे हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और किडनी डिजीज आदि। हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हाइपरटेंशन के लक्षणों को जल्दी पहचान कर सही उपचार हो सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अब जानिए वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम (Theme of World Hypertension Day) और इतिहास के बारे में। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम (Theme of World Hypertension Day) और इतिहास इस साल वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम (Theme of World Hypertension Day)  है ब्लड प्रेशर को सही से मापें, इसे कंट्रोल करें और लंबे समय तक जीएं। यह थीम ब्लड प्रेशर को सही से मापने और इसकी कॉम्प्लीकेशन्स से बचाव पर जोर देती है। क्योंकि, इससे लम्बे समय तक जीने में मदद मिल सकती है। अगर बात की जाए इस दिन के इतिहास की, तो इस दिन की शुरुआत 14 मई 2005 को वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग (WHL) द्वारा की गई थी। बाद में, 2006 से इसे हर साल 17 मई को मनाया जाने लगा। इसे भी पढ़ें: काला बिछुआ के फायदे: आयुर्वेदिक उपचार का एक प्रभावी विकल्प है यह पौधा हाइपरटेंशन से बचाव के तरीके हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हाइपरटेंशन (Hypertension) की समस्या से बचाव के तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi World Hypertension Day #highbloodpressure #hypertension #ThemeofWorldHypertensionDay  #Worldhypertensionday

आगे और पढ़ें
Benefits of black nettle

काला बिछुआ के फायदे: आयुर्वेदिक उपचार का एक प्रभावी विकल्प है यह पौधा

काला बिछुआ (Black nettle) को बाघनखी, हाथाजोड़ी, बिछु, उलट-कांटा आदि के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम है मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua)। यह एक ऐसा पौधा है जो केवल बरसात के मौसम में उगता है और उसके बाद यह सुख जाता है। जब इसका फल सुख जाता है और फट जाता है, तो उसमे से एक बड़ा काला और भूरा बीज निकलता है। यह पौधा दो मीटर तक ऊंचा होता है और इसके पत्ते किडनी के आकार के होते हैं। इस पौधे में कई औषधीय गुण होते हैं। इसके बीज और पत्तियों का इस्तेमाल आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा प्रणालियों में किया जाता है। संक्षेप में कहा जाए तो यह बेहद फायदेमंद पौधा है। आइए जानें क्या हैं काला बिछुआ के फायदे (Benefits of black nettle)? काला बिछुआ के फायदे (Benefits of black nettle): पाएं जानकारी काला बिछुआ (Black nettle) अपने खास बनावट के लिए प्रसिद्ध है। इसके बीज देखने में जंगली जानवर के मुड़े हुए नाखून जैसे लगते हैं, इसलिए इसका नाम बाघनख है। यह असली पौधा केवल विंध्याचल के जंगलों, हिमालय आदि में मिलता है। काला बिछुआ (Black nettle) यानी मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua) एक हेल्थ के लिए लाभदायक पौधा है। काला बिछुआ के फायदे (Benefits of black nettle) इस प्रकार हैं: पेट के लिए फायदेमंद काला बिछुआ (Black nettle) के बीज और पत्ते पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद हैं जैसे कब्ज, गैस, एसिडिटी आदि। पेट की समस्याओं के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। स्किन प्रॉब्लम्स से छुटकारा स्किन प्रॉब्लम्स से राहत पहुंचाने में भी काला बिछुआ (Black nettle) को फायदेमंद पाया गया है। स्किन की परेशानियों जैसे पिम्पल्स, एक्जिमा आदि से राहत पाने में इस पौधे के बीज और पत्ते को बेनेफिशियल पाया गया है। यानी, स्किन के लिए इस पौधे का इस्तेमाल किया जा सकता है।  सांस संबंधी समस्याओं से राहत सांस संबंधी समस्याओं से भी यह पौधा राहत पहुंचा सकता है। काला बिछुआ (Black nettle) के फायदे में यह बेहद महत्वपूर्ण है। अस्थमा और  ब्रोंकाइटिस जैसी सांस सम्बन्धित प्रॉब्लम्स के ट्रीटमेंट में इसका इस्तेमाल किया जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इम्यूनटी को करे मजबूत काला बिछुआ (Black nettle) यानी मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua) के बीज और पत्ते इम्युनिटी को भी मजबूत कर सकते हैं। इसके साथ ही ऐसा भी माना गया है कि बुखार और दर्द के ट्रीटमेंट में भी मार्टिनिया एनुआ (Martynia annua) का उपयोग किया जा सकता है।  इसके अलावा काला बिछुआ (Black nettle) में एंटी-कोलेस्ट्रॉल, एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant), एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द दूर करने वाले गुण होते हैं। वीक मेमोरी, पीठ में दर्द, डायबिटीज, सीने में जलन जैसी बीमारियों के इलाज में भी इस पौधे को लाभदायक पाया गया है। नोट:-यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Benefits of black nettle #Martyniaannua #blacknettle #Benefitsofblacknettle

आगे और पढ़ें
Translate »