Anu Sharma

Mivi Superpods Concerto TWS

दो फोन, एक कनेक्शन: मिवी सुपरपॉड्स कॉन्सर्टो टीडब्ल्यूएस हुआ लॉन्च

मिवी (Mivi) एक प्रसिद्धि भारतीय कंज्यूमर एलेक्ट्रॉनिस ब्रांड है जो हाई क्वालिटी ऑडियो प्रोडक्ट जिसमें हेडफोन, ईयरफोन, स्पीकर और अन्य उपकरणों का निर्माण करने के लिए जानी जाती है। भारतीय ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार यह कंपनी बेहतरीन डिजाइन और किफायती प्रोडक्ट्स को बनाती है। यह कंपनी समय-समय पर नए उतपदों को लांच करे रहते हैं। कम समय में ही इस कंपनी के उत्पादों ने लोकप्रियता हासिल की है। हाल ही ने इन्होने एक नए उत्पाद को लांच किया है, जो कई फीचर्स के साथ उपलब्ध है। इस उत्पाद का नाम है मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस (Mivi Superpods Concerto TWS)। आइए पाएं पूरी जानकारी मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस के बारे में विस्तार से और जानें इसके फीचर्स के बारे में। मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस: पाएं जानकारी मिवी (Mivi) ने इंडियन मार्किट में एक नया उत्पाद निकाला है जिसके विशेष फीचर्स इसे और खास बना रहे हैं।इसकी कीमत भी किफायती है, यही कारण है कि यह कम समय में ही चर्चा का विषय बन सकता है। मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस (Mivi Superpods Concerto TWS) प्रीमियम Hi-Res ऑडियो, LDAC, एक्टिव नॉयस कैंसिलेशन और कई अन्य फीचर्स के साथ उपलब्ध है। जैसे इसकी बैटरी लाइफ जो लगभग साथ घंटे तक की है। यानी अगर आप इन्हें एक बार चार्ज कर ली हैं तो यह लम्बे समय तक चलते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें एक समय पर दो डिवाइस के साथ कनेक्ट कर सकते हैं और यह आईओएस व एंड्राइड दोनों के साथ काम करते हैं। यह ईयरबड्स (Earbuds) ग्लास फिनिश के साथ आते हैं यानी इसका डिजाइन और फिनिश भी बेहतरीन है। मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस (Mivi Superpods Concerto TWS) की कीमत मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस (Mivi Superpods Concerto TWS) की कीमत 3,999 रुपये है और यह कई रंगों में उपलब्ध है। इसमें चार रंग उपलब्ध हैं जो इस प्रकार हैं स्पेस ब्लैक, मिस्टिक सिल्वर, मेटैलिक ब्लू और रॉयल शैंपेन। इन ईयरबड्स (Earbuds) को आप ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। यानी, मिवी (Mivi) की ऑफिशियल वेबसाइट के अलावा अमेजॉन, फ्लिपकार्ड से इसे खरीदा जा सकता है। आप ऑफलाइन स्टोर्स से भी इसे बाय कर सकते हैं। आपको इन ईयरबड्स (Earbuds) के साथ एक साल की वारंटी भी मिलेगी। मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस के फीचर्स मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस (Mivi Superpods Concerto TWS) के जरिए कंपनी अपने ग्राहकों को कई सुविधाएं प्रदान कर रही है। इन ईयरबड्स (Earbuds) के कई फीचर्स हैं जैसे Hi-Res ऑडियो, LDAC और एक्टिव नॉयज कैंसिलेशन फीचर्स।    एक्टिव नॉयज कैंसिलेशन से एंबिएंट नॉयस को रोका जा सकता है। इसके अलावा मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस (Mivi Superpods Concerto TWS) में डॉल्बी ऑडियो का सपोर्ट भी मिलेगा जिसकी वजह से ग्राहकों को बिलकुल साफ आवाज सुनाई देगी। यह ईयरबड्स (Earbuds) 3डी साउंडस्टेज के साथ हैं जो मिवी (Mivi) की खास ऑडियो टेक्नोलॉजी है। इस टेक्नोलॉजी की वजह से इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक और बेहतर हो सकता है।  इसे भी पढ़ें: Apple iPhone 17 Air: अब तक का सबसे पतला iPhone कब होगा लॉन्च?  मिवी (Mivi) सुपर कनेक्ट ऐप का इन ईयरपॉड्स में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आप आईओएस और एंड्राइड दोनों प्लैटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। यह ईयरपॉड्स टाइप-सी पोर्ट के माध्यम से चार्ज होते हैं जो एक तेज चार्जिग स्पोर्ट है। इसमें दस मिनट की चार्जिंग से पांच सौ मिनट्स तक प्लेटाइम मिलेगा। इन ईयरबड्स (Earbuds) का वजन  44 ग्राम है और इसका मेजरमेंट 5.9×5.9×3.1 सेमी है। इनमें माइक्रो-टेक्सचर्ड यूनी-बॉडी मेटल डिजाइन के साथ उपलब्ध है। मिवी की सह-संस्थापक और सीएमओ, मिधुला देवभक्तुनी ने इन ईयरबड्स (Earbuds) को लांच किया। उनके अनुसार मिवी सुपरपॉड्स कंसर्टो टीडब्ल्यूएस (Mivi Superpods Concerto TWS) को 5 इंडस्ट्री लीडिंग टेक्नोलॉजीज द्वारा बनाया गया है। यह बेहतरीन ऑडियो अनुभव प्रदान करते हैं। देवभक्तुनी ने यंग यूजर्स की जरूरतों को पूरा करने वाले इस ऑडियो प्रॉडक्स्ट प्रदान करने के मिवी (Mivi) के मिशन को मजबूत करने में गर्व व्यक्त किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Mivi Superpods Concerto TWS #MiviSuperpodsConcertoTWS #Mivi #earbuds #Superpods

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Human Coronavirus HKU1

कोलकाता में कोरोनावायरस HKU1 के मामले की पुष्टि: यहां जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

हाल ही में कोलकोता में एक महिला में ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) का निदान हुआ है। यह एक सांस संबंधी वायरस है, जिसके लक्षणों में सर्दी-जुकाम आदि शामिल है। गंभीर मामलों में यह निमोनिया (Pneumonia) का कारण भी बन सकता है। हालांकि, डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस वायरस से किसी को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन इसे लेकर सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। डॉक्टर्स की मानें, तो मरीज महिला में सर्दी-जुकाम और खांसी की समस्या पिछले लगभग 15 दिनों से थी लेकिन अभी उसकी कंडीशन ठीक है। बहुत से लोगों को इस वायरस के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बारे में जानकारी होना आवश्यक है। जानिए ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) के बारे में विस्तार से।  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) क्या है? अल्बामा पब्लिक हेल्थ (Alabama Public Health) के अनुसार सामान्य ह्यूमन कोरोना वायरसिस में टाइप्स 229इ, एनएल63, ओसी43 और एचकेयू1 शामिल हैं। इनके कारण रोगी को माइल्ड से लेकर गंभीर अपर.रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इलनेस बीमारियां महसूस हो सकती हैं जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम। अधिकतर लोग अपने जीवन में कभी न कभी इन वायरसिस से संक्रमित हो सकते हैं। यह बीमारियां आमतौर भी कम समय तक ही रहती हैं। अन्य हयूमन कोरोनावायरसिस की तरह ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) भी लो रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट बीमारियों का कारण बन सकता है जैसे निमोनिया (Pneumonia) और ब्रोंकाइटिस आदि। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, छोटे बच्चों, बूढ़ों और कार्डियोपल्मोनरी डिजीज से पीड़ित लोगों में यह रोग अधिक सामान्य है। ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 के लक्षण क्या हैं?  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) के सामान्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं: इन लक्षणों के अलावा रोगी को अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं। जैसा की पहले ही बताया गया है कि गंभीर स्थितियों में यह समस्या निमोनिया (Pneumonia) और ब्रोंकाइटिस की वजह बन सकती हैं। यह लक्षण नजर आने पर सावधानी बरते और जरूरत पड़ने पर मेडिकल हेल्प लेना भी आवश्यक है। ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू 1 का उपचार  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) के उपचार या सुरक्षा के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और न ही इसके कारण होने वाली बीमारियों का कोई उपचार है। इससे पीड़ित अधिकतर लोग खुद ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन, इसके लक्षणों से राहत पाने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित चीजों की सलाह दे सकते हैं: इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 से बचाव यह वायरस (Virus) संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकता है। यह उनकी खांसी और छींक के माध्यम से फैलता है या क्लोज कांटेक्ट जैसे संक्रमित व्यक्ति को छूने या हाथ मिलाने से भी फैल सकता है। इस वायरस के कारण साल के किसी भी समय लोग संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन पतछड़ और सर्दी के मौसम में इसकी संभावना बढ़ जाती है। छोटे बच्च्चों में भी इसकी संभावना अधिक रहती है। आप इन चीजों का ध्यान रख कर ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) से बच सकते हैं:  अगर आपके मन में इस बीमारी के बारे में कोई भी सवाल या चिंता है, तो डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Human Corona virus HKU1 #HumanCoronavirusHKU1 #HCoV-HKU1 #Pneumonia #coronavirus

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Foods To Avoid Empty Stomach

जानिए इन 7 फूड्स के बारे में जिन्हें खाली पेट खाने से करना चाहिए नजरअंदाज

व्यस्त जीवनशैली के कारण हम में से अधिकतर लोग नाश्ते स्किप कर देते हैं, जो पूरी तरह से गलत है। ब्रेकफास्ट हमारे दिन का सबसे महत्वपूर्ण मील है, क्योंकि इसमें हम 10 से 12 घंटे बाद कुछ खाते हैं। जब इतने अंतर के बाद जब हम कुछ खाते हैं, तो सावधानियां बतरनी बहुत जरूरी हैं। दिन की शुरूआत में जो चीज सबसे पहले आपके पेट में जाती है, वही तय करती है कि आपका बाकी दिन कैसा बीतेगा? क्या आप जानते हैं कि जब हम खाली पेट (Empty Stomach) कुछ फूड्स का सेवन करते हैं, तो चाहे वो हेल्दी हों लेकिन पेट और डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स का कारण बन सकती हैं? जबकि कुछ फूड्स खाली पेट खाना सेहत के लिए अच्छा होता है। आइए जानें कौन से हैं वो फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach)? फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार जब बात कई सामान्य नाश्तों की आती है, तो उनमें प्रोटीन और फाइबर की कमी होती है, जिससे आपको खाने के अगले मौके से पहले ही भूख लगने लगती है। वहीं, दूसरी चीजें फैट से भरी होती हैं और पेट को भरा और असहज महसूस करा सकती हैं। ऐसे में इस बात का पता होना चाहिए कि कौन से हैं वो फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach)?  1. खट्टे फल (Citrus fruits) खट्टे फल (Citrus fruits) खाने में स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन यह कई बार समस्या के कारण भी बन सकते हैं। खट्टे फल (Citrus fruits) जैसे संतरा, निम्बू, चकोतरा आदि को खाली पेट (Empty Stomach) खाने से बचना चाहिए। इनमें सिट्रिक एसिड बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे पेट में एसिडिटी बढ़ सकती है। सुबह खाली पेट इन्हें खाने से पेट में एसिडिटी बढ़ती है जिससे हार्टबर्न और अन्य कई समस्याएं हो सकती हैं।  2. चाय (Tea) अधिकतर लोग खाली पेट (Empty Stomach) सुबह उठते ही चाय (Tea) पीना पसंद करते हैं। इसी से उनके दिन की शुरुआत होती है। लेकिन, खाली पेट इसे पीना हानिकारक हो सकता है। स्टडीज की मानें तो अधिकतर लोग सुबह खाली पेट (Empty Stomach) चाय (Tea) पीने से परेशानियों का सामना कर सकते हैं। ऐसा भी माना गया है कि खाली पेट इसे पीने से जी मिचलाने और हार्टबर्न जैसे समस्याएं हो सकती हैं। इसका कारण यह है कि इसके टैनिन के कारण पैंक्रियाज ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन रिलीज करता है। इस प्रक्रिया से थकान और भूख बढ़ सकती है। 3. मसालेदार आहार (Spicy food) सुबह खाली पेट (Empty Stomach) मसालेदार आहार का सेवन करने से भी बचना चाहिए। यह मसालेदार आहार पेट की लायनिंग में समस्या का कारण बन सकता है। इससे डायजेशन प्रभावित हो सकता है और इसके साथ ही इससे कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। 4. कॉफी (Coffee) कॉफी उन प्रसिद्ध पेय पदार्थों में से एक है, जिसे बहुत से लोग सुबह उठते ही पीना पसंद करते हैं। लेकिन, यह बिलकुल भी हेल्दी नहीं है। कॉफी में कैफीन होता है जिसे इसकी अलर्टनेस को बढ़ाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। लेकिन, जब इसे खाली पेट (Empty Stomach) पिया जाता है, जो इसका प्रभाव उल्टा भी हो सकता है। इसके कारण लोग एंग्जायटी और घबराहट महसूस कर सकते हैं। 5. दही (Yogurt) दही खाने का एक हेल्दी विकल्प है, क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम होता है। लेकिन, जब इसे खाली पेट (Empty Stomach) खाया जाता है तो पेट का एसिडिक एन्वॉयर्नमेंट हेल्दी गट बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है, जिससे उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू कम हो सकती है। 6. तला हुआ भोजन (Oily food) पूरी, पकोड़े, भटूरे जैसे पसंदीदा नाश्ते को भी खाली पेट (Empty Stomach) खाना नुकसानदायक हो सकता है। तले हुए आहार में फैट कंटेंट अधिक होता है जिससे ब्लोटिंग व अपच जैसी परेशानियां हो सकती है और सुस्ती आ सकती है। इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे 7. अधिक मीठी चीजें (Sugary food) अगर आपको मीठी चीजें खाना पसंद है और आप अक्सर मिठाईयां, पेस्ट्रीज या मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, तो ध्यान रखें इन्हें नजरअंदाज करना बहुत जरूरी है। खासतौर पर इन्हें खाली पेट (Empty Stomach) नहीं खाना चाहिए। इससे इंसुलिन और ब्लड शुगर लेवल एकदम से बढ़ सकते हैं। इससे बाद में सुस्ती और थकावट का अनुभव हो सकता है। इसके साथ ही इससे डायरिया होने की संभावना भी बढ़ सकती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi  Foods To Avoid Empty Stomach #FoodsToAvoidEmptyStomach #EmptyStomach #Citrusfruits #Tea

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Health Benefits Of Curd

रोजाना दही खाने के हैं 7 कमाल के फायदे, लेकिन किस समय खाना है सही?

योगर्ट यानी दही (Curd), दूध के लैक्टिक फेरमेंटशन को कहा जाता है। फेरमेंटशन प्रोसेस के दौरान, दूध में बैक्टीरिया लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं, जो दूध को गाढ़ा कर देता है। इसे अपनी स्मूदनेस, फ्रेश और मजेदार स्वाद के लिए जाना जाता है। यह स्वास्थ्यवर्धक और सबसे वैल्युबल थेराप्यूटिक खाद्य पदार्थों में से एक है। यह कैल्शियम, विटामिन बी, विटामिन बी-12 पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है। रोजाना अपनी डायट में एक कप दही (Curd) को शामिल करने से कई हेल्थ और ब्यूटी बेनेफिट्स हो सकते हैं। दही (Curd) की कंसिस्टेंसी स्मूद या गाढ़ी हो सकती है। जानें रोजाना दही खाने के हेल्थ बेनेफिट्स (Health benefits of eating yogurt daily) के बारे में। यह भी जानें कि इसे दिन के किस समय खाना चाहिए? रोजाना दही खाने के हेल्थ बेनेफिट्स (Health benefits of eating yogurt daily): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार दही (Curd) बहुत न्यूट्रिशियस होता है और इसे रोजाना खाने से हेल्थ के लिए कई तरह से फायदेमंद है, जैसे इसे खाने से हार्ट डिजीज और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क कम होता है और वजन को सही बनाए रखने में भी मदद मिलती है। रोजाना दही खाने के हेल्थ बेनेफिट्स (Health benefits of eating yogurt daily) इस प्रकार हैं: 1. पेट के लिए बेहतरीन  दही (Curd) में फायदेमंद बैक्टीरिया के लाइव कल्चर्स होते हैं, जिन्हें प्रोबायोटिक्स (Probiotics) कहा जाता है। यह प्रोबायोटिक्स (Probiotics) पेट के लिए फायदेमंद होते हैं। यह पाचन को सही रखते हैं, पोषक तत्वों के एब्जोर्प्शन में मदद करते हैं और बोवेल मूवमेंट को सही बनाए रखने में मदद करते हैं। 2. इम्युनिटी बढ़ाए दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (Probiotics) इम्यून सेल्स के प्रोडक्शन को और नेचुरल किलर सेल्स की एक्टिविटी को बढ़ाते हैं। इससे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलती है और कई इंफेक्शंस व बीमारियों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है और इम्यून सिस्टम में सुधार होता है। 3. पाचन को सुधारे दही के बेनेफिट्स (Benefits of yogurt) में पाचन में सुधार शामिल है। दही (Curd) में मौजूद लाइव कल्चर लैक्टोज को ब्रेक डाउन करने में मदद करते हैं और इससे लैक्टोज इनटॉलेरेंस वाले लोगों के लिए इसे पचाना आसान होता है। इसके साथ ही प्रोबायोटिक्स (Probiotics) हेल्दी गट बैक्टीरिया की ग्रोथ में भी फायदेमंद है। इससे डाइजेस्टिव डिसऑर्डर्स जैसे डायरिया, कब्ज आदि का जोखिम कम होता है। 4. न्यूट्रिएंट एब्जोर्प्शन में फायदेमंद दही (Curd) में लैक्टिक एसिड होता है। यह दूध में मौजूद प्रोटीन को ब्रेकडाउन में मदद करता है और कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स के एब्जोर्प्शन को बढ़ाता है। इससे हड्डियों के स्वास्थ्य और शरीर में न्यूट्रिएंट्स के उपयोग में सुधार करने में मदद मिल सकती है।  5. वजन रहे सही दही के बेनेफिट्स (Benefits of yogurt) में वजन को सही बनाए रखना भी जरूरी है। दही (Curd) में कैलोरीज कम और प्रोटीन अधिक मात्रा में होती है। इससे भूख कम होती है और वजन को सही बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अधिक प्रोटीन कंटेंट से लीन मसल मास की डेवलपमेंट में भी हेल्प मिलती है। 6. बोन हेल्थ दही (Curd) कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत है। हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने के लिए यह एक जरुरी मिनरल है। दही के बेनेफिट्स (Benefits of yogurt) में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों से बचाव और बोन हेल्थ को सही बनाए रखना शामिल है। 7. हार्ट के लिए अच्छा दही (Curd) में बायोएक्टिव पेप्टिड्स होते हैं जो ब्लड प्रेशर को रेगुलेट रखने और हाइपरटेंशन के जोखिम को कम करने में सहायता करते हैं। इसके साथ ही दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (Probiotics) को कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार भी जोड़ा जाता है। यानी इसके फायदों में हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करना शामिल है। इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत दही खाने का सही समय दही खाना सबके लिए फायदेमंद है लेकिन इसे सही मात्रा में ही खाना चाहिए। कुछ खास बीमारियों से पीड़ित लोगों को इसे खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे खाने से उनकी स्थिति बदतर हो सकती है। दही खाने का बेहतरीन समय है सुबह या दोपहर। आयुर्वेदा की मानें तो लंच और डिनर के बाद दही (Curd) खाने से डाइजेशन सही रहता है। रात को इसे खाने से स्लीप साइकिल में समस्या हो सकती है और कई पाचन सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Health benefits of curd #Healthbenefitsofeatingcurddaily #Probiotics #Benefitsofcurd #curd

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UCEED Counselling 2025

UCEED Counselling: काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू, जल्दी करें आवेदन और सुरक्षित करें अपनी सीट

अंडरग्रेजुएट कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन फॉर डिजाइन (Undergraduate Common Entrance Examination for Design) यानी यूसीइइडी को आईआईटी बॉम्बे द्वारा आयोजित किया जाता है। इन्होने इसका रिजल्ट 7 मार्च 2025 को घोषित कर दिया है। अब आईआईटी बॉम्बे( IIT Bombay) ने इसके लिए कॉउंसलिंग शुरू कर दी है और इसके लिए एक नोटिफिकेशन भी जारी की गयी है। उम्मीदवार आसानी से ऑनलाइन इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं। इस कॉउंसलिंग के आधार पर ही योग्य उम्मीदवारों को देश के बेहतरीन डिजाइन इंस्टीट्यूट्स में यूजी डिजाइन कोर्सेस में प्रवेश मिलेगा। अधिक जानकारी आप ऑफिशियल वेबसाइट पर पा सकते हैं। आइए पाएं जानकारी यूसीइइडी काउंसलिंग (UCEED Counselling) के बारे में। यूसीइइडी काउंसलिंग (UCEED Counselling): पाएं जानकारी जो उम्मीदवार यूसीडी परीक्षा में सफल हुए हैं, वो आईआईटी के विभिन्न परिसरों में बैचलर ऑफ डिजाइन प्रोग्रमम में प्रवेश के लिए कॉउंसलिंग और सीट अलॉटमेंट प्रोसेस में भाग ले सकते हैं। इस कॉउंसलिंग प्रोसेस में भाग लेने वाले मुख्य इंस्टीट्यूट्स में आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी इंदौर, आईआईटी रुड़की, आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay), आईआईटी गुवाहाटी और आईआईआईटीडीएम जबलपुर आदि शामिल हैं। इस कॉउंसलिंग में कैंडिडेट्स को उनके रैंक्स, सीट्स, प्राथमिकता आदि के अनुसार सीट मिलने का मौका मिलेगा। अन्य जानकारी आपको इनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी।  यूसीइइडी काउंसलिंग (UCEED Counselling) प्रोसेस और फीस यूसीडी परीक्षा में भाग लेने वाले कैंडिडेट्स को 4000 रुपए फीस जमा करानी होगी और यह फीस पूरी तरह से नॉन-रिफंडेबल है यानी यह बापस नहीं होगी। आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) द्वारा इसके बारे में पूरी जानकारी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी की है। इसमें इस प्रोग्राम के लिए 245 सीटें उपलब्ध हैं। यह सीट आवंटन कैंडिडेट्स को मेरिट लिस्ट और उमीदवार की प्राथमिकता के आधार पर होगा। इस बात का ध्यान रखें कि इस सीटों का आवंटन स्टेप बाय स्टेप तरीके से किया जाएगा। अगर किसी कैंडिडेट को पहले राउंड में सीट नहीं मिलती है, तो वो अगले राउंड में शामिल हो सकते हैं। इसी तरह से पांच राउंड आयोजित किए जाएंगे। इसकी जानकारी भी प्रतियोगियों को पहले ही प्रदान कर दी जाएगी। यूसीइइडी काउंसलिंग (UCEED Counselling) सीट एलोकेशन और अन्य जानकारी अंडरग्रेजुएट कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन फॉर डिजाइन (Undergraduate Common Entrance Examination for Design) यानी यूसीइइडी की परीक्षा के लिए ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन पिछले साल 1 अक्टूबर को शुरू हुआ था और इसकी परीक्षा 19 जनवरी 2025 को आयोजित की गयी थी। आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) द्वारा यूसीइइडी काउंसलिंग (UCEED Counselling) सीट एलोकेशन के लिए पांच राउंड आयोजित किए जाएंगे। इस हर एक रौँफ के बाद कट-ऑफ लिस्ट को निकाला आएगा, जिससे यह तय होगा कि किस उम्मीदवार को अगले रॉउंड में सीट मिलेगी। कैसे करें अप्लाई? जो कैंडिडेट यूसीईईडी परीक्षा में उपस्थित हुए थे और कॉउंसलिंग के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, वो इस तरह से इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं: इसे भी पढ़े: 12वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका, जानें आवेदन प्रक्रिया और योग्यता ध्यान रखें कि अंडरग्रेजुएट कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन फॉर डिजाइन (Undergraduate Common Entrance Examination for Design) यानी यूसीइइडी काउंसलिंग (UCEED Counselling) 14 मार्च से शुरू हो चुकी है और यह पांच राउंड्स में होगी। कॉउंसलिंग के लिए आप इस रेजिस्ट्रेशन को  केवल 31 मार्च तक ही कर सकते हैं। इसके बाद आप रेजिस्ट्रेशन नहीं कर पाएंगे। पहले राउंड के सीट अलॉटमेंट का रिजल्ट 21 अप्रैल को आएगा।  इस बात का भी ध्यान रखें कि ऑनलाइन सीट अलॉट करने की प्रोसेस के दौरान किया गया एडमिशन ऑफर ही फाइनल होगा। जरूरी फीस के भुगतान, डाक्यूमेंट्स के वेरिफिएशन और अन्य फॉर्मलिटीज के बाद ही प्रतियोगी को प्रवेश मिलेगा। योग्य उमीदवार इस मौके को न गवाएं और आज ही यूसीइइडी काउंसलिंग (UCEED Counselling) के लिए आवेदन करें।  Latest News in Hindi Today Hindi news UCEED Counselling #UndergraduateCommonEntranceExaminationforDesign #UCEED #UCEEDCounselling #IIT Bombay #IIT

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Black plastic kitchen tools

ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स का इस्तेमाल करने से पहले जान लें इनसे जुड़े खतरों के बारे में

किचन हमारे घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें खाना बनाने में हमारा अधिकतर समय बीतता है। किचन यूटेंसिल्स यानी रसोई इस्तेमाल होने वाले बर्तनों का प्रयोग खाना बनाने जैसे काटने, गर्म करने, मिक्स करने आदि में होता है। अलग-अलग कामों के लिए अलग बर्तनों की जरूरत होती है। ऐसे में यह एक डिस्कशन का विषय है कि खाना पकाने के लिए कौन से बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए और किन बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए? बाजार में तरह-तरह के बर्तन मौजूद हैं। लेकिन, एक स्टडी के अनुसार काले रंग के प्लास्टिक किचन उपकरणों (Kitchen appliances) या टूल्स का इस्तेमाल सेहत के लिए बहुत अधिक हानिकारक है। आइए जानें कि ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) के बारे में क्या कहती है स्टडी? ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools): क्या कहती है स्टडी?  हाइजीन फूड सेफ्टी (Hygiene food safety) के अनुसार लकड़ी के बर्तनों और उपकरणों के उपयोग को लेकर लम्बे समय से हाइजीन और फूड सेफ्टी इंडस्ट्री में बहस का विषय रहा है। इसके बारे में ऐसा लगता है कि हर व्यक्ति की अपनी वैध राय है। लेकिन, इनके भी अपने लाभ और हानियां हैं। ऐसे ही किचन में कौन से बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके बारे में भी लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है। हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार काले रंग के प्लास्टिक में हानिकारक केमिकल हो सकते हैं। इनका नाम है फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant), जिनका इस्तेमाल आग से बचाव के लिए किया जा सकता है। आग से बचाव में यह फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन हेल्थ के लिए यह हानिकारक हैं। ऐसा पाया गया है कि इन केमिकल्स का लेवल कुछ प्रोडक्ट्स में बहुत अधिक था जैसे काले रंग के प्लास्टिक से बने खिलौने, बर्तनों, डब्बों आदि में। अगर आपके घर में भी ऐसे उत्पाद हैं, तो आपको तुरंत उन्हें फैंक देना चाहिए। यह तो थी जानकारी ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) के बारे में स्टडी के बारे में। अब यह जानते हैं कि इनसे क्या समस्याएं हो सकती हैं? ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) के इस्तेमाल से क्या समस्याएं हो सकती हैं?  स्टडी में यह पाया गया है कि इसमें मौजूद फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant) कैंसर और थायराइड जैसे रोगों का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही इनसे अन्य रोगों का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए, एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों की मानें, तो इनके इस्तेमाल से बचना चाहिए। अपने बच्चों को भी इनके इस्तेमाल से बचाना चाहिए। क्योंकि, यह केमिकल भ्रूण और बाल विकास और न्यूरोबिहेवियरल फंक्शन और प्रजनन और प्रतिरक्षा प्रणाली विषाक्तता से भी सम्बन्धित हैं। अपने घर में इस्तेमाल होने वाले किचन उत्पादों की जांच करें और यह भी सुनिश्चित करें कि वो हमारे लिए सुरक्षित हैं या नहीं। अपने दोस्तों और परिवार को भी इसके बारे में बताएं ताकि वो भी सेफ रहें। इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत इस समस्या से बचाव के लिए क्या करें?  एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant) युक्त इन ब्लैक प्लास्टिक किचन टूल्स (Black plastic kitchen tools) का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। प्लास्टिक से बने इस किचन उपकरणों (Kitchen appliances) की जगह स्टेनलेस स्टील के उपकरणों का इस्तेमाल करें। आप ऐसे नॉन-प्लास्टिक टूल्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो हेल्थ के लिए हानिकारक न हो। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के अनुसार एल्यूमीनियम के बर्तन में खाना बनाना भी सेहत के लिए हानिकारक है। इसके अलावा, नॉन-स्टिक बर्तनों का भी अधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वहीं, पीतल के बर्तन में अधिक तापमान पर नमक और खट्टी चीजें बनाने से बचना चाहिए। प्लास्टिक के खाना पकाने के बर्तन और कटिंग बोर्ड से भी बचें क्योंकि यह BPA जैसे हानिकारक केमिकल रिलीज कर सकते हैं। । ऐसा भी माना जाता है कि किचन उपकरणों (Kitchen appliances) में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करना भी भोजन में मौजूद पोषक तत्व वैसे ही मौजूद रहते हैं। यानी स्टेनलेस स्टील और मिट्टी के बर्तनों को सुरक्षित माना गया है। इसके अलावा अपने घर को साफ और सुरक्षित रखने के लिए उचित स्टेप्स का पालन करें। इससे फ्लेम रिटार्डेंट (Flame Retardant) के जोखिम को कम किया जा सकता है और हेल्दी रहने में मदद मिल सकती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi Black plastic kitchen tools #Blackplastickitchentools #Kitchenappliances #Flame Retardant 

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Colors of Holi

बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंगों को हटाने के लिए आसान टिप्स

होली (Holi) यानि रंगों का त्यौहार, जिसे हमारे देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छी की जीत का भी प्रतीक माना जाता है। सर्दियों के अंत और वसंत के आने पर इसका मजा दोगुना हो जाता है। इसमें लोग एक दूसरे को रंग लगते हैं, मिठाईयां खाते हैं और कुछ धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि रंगों से खेलना मौज-मस्ती से भरा और आनंददायी होता है। लेकिन, इसके बाद रंग को रिमूव करना एक मुश्किल काम है। कई बार यह होली के रंग (Colors of Holi) और रंगों को छुड़ाने का तरीका स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है। आइए जानें कि बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin) कौन से हैं? बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin): पाएं जानकारी द योगा इंस्टिट्यूट (The yoga institute) के अनुसार होली (Holi) का उल्लास खत्म होने के बाद रंगों के निशान भयभीत करने वाले होते हैं। यही नहीं, कुछ रंग त्वचा में जलन को दाग का कारण बन सकते हैं। ऐसे में बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin) कौन से हैं, इस बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।  स्किन को साफ करें रेगुलर टिश्यू कि जगह स्किन से होली (Holi) के रंग को रिमूव करने के लिए सबसे पहले वाइप्स का इस्तेमाल करें। इसके लिए वेट वाइप्स का प्रयोग करना एक बेहतरीन विकल्प है। इसके लिए ऐसे वाइप्स का इस्तेमाल करें जिसमें नेचुरल और स्किन के लिए लाभदायक इंग्रेडिएंट्स मौजूद हों। इसके लिए आप नेचुरल ऑयल्स का भी प्रयोग कर सकते हैं जैसे कोकोनट ऑयल, ओलिव ऑयल और बेबी ऑयल आदि। कुछ फैसपैक्स आ सकते हैं काम कुछ घर पर बनाए नेचुरल फेस मास्क न केवल स्किन से रंगों को निकाल सकते ,हैं बल्कि स्किन और शांत और नरिश भी कर सकते हैं। इन फेस पैक्स को आप आसानी से बना सकते हैं। बेसन और दही, मुल्तानी मिटटी और रोज वॉटर या एलोवेरा और शहद का फेसपैक आपकी स्किन के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इनसे स्किन को पोषण मिलेगा। स्क्रब का इस्तेमाल  होम मेड स्क्रब से भी होली के रंग (Colors of Holi) को छुड़ाया जा सकता है। इसके लिए बेसन दही और हल्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे डेड स्किन के साथ-साथ होली (Holi) के जिद्दी रंगों को स्किन से निकालने में मदद मिलती है। स्किन पर इस स्क्रब लगाएं, आराम से मालिश करें और फिर धो लें। इसके साथ ही निम्बू के रस और शहद का मिश्रण भी इसमें लाभदायक हो सकता है। निम्बू की ब्लीचिंग प्रॉपर्टीज रंग को कम करने में मदद कर सकती हैं। आर्गेनिक साबुन का इस्तेमाल  बिना स्किन को नुकसान पहुंचाए होली के रंग छुड़ाने के तरीके (Ways to remove Holi colours without harming skin) में आर्गेनिक साबुन के इस्तेमाल शामिल है। बाजार में कुछ ऐसे ऑर्गनिक साबुन मौजूद हैं, जिनके इस्तेमाल से होली के रंग (Colors of Holi) छुड़ाए जा सकते हैं। ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करें, जिनमे हार्श केमिकल और आर्टिफिशियल फ्रेग्नेंस न हों। इससे स्किन से रंग आसानी से निकल जाते हैं और त्वचा नरिश व मॉइस्चराइज होती है। यह तो थे होली के रंग (Colors of Holi) छुड़ाने के कुछ तरीके। अब जानिए कि त्वचा को कोई नुकसान न हो इसके लिए होली (Holi) से पहले आप क्या कर सकते हैं?  इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत होली से पहले रखें इन बातों का ध्यान होली (Holi) खेलने से पहले भी आप कुछ बातों का ध्यान रख कर अपनी स्किन को नुकसान से बचा सकते हैं। यह तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Ways to remove Holi colours #ColorsofHoli #Holi #WaystoremoveHolicolourswithoutharmingskin #harmfulcolors

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Benefits of clove water

लौंग के पानी के फायदे: वजन कम करने से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने तक

लौंग को अंग्रेजी में क्लोव कहा जाता है और यह एक ऐसा सामान्य मसाला है, जो लगभग सभी रसोईघरों में पाया जाता है। यह मसाला हर व्यंजन की खुशबु और स्वाद को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इसमें कई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज होती हैं? यह मसाला कई जरूरी पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है और इसमें मौजूद कंपाउंड कुछ हेल्थ कंडीशंस में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इस मसाले के ही नहीं बल्कि लौंग का पानी (Clove water) पीने के भी कई फायदे हैं। आइए पाएं जानकारी लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) के बारे में विस्तार से। लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार लौंग एक बेहतरीन मसाला है, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। यह मसाला एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) से भरपूर होता है और इसमें ब्लड शुगर को रेगुलेट करने और बैक्टीरिया को नष्ट करने आदि के गुण होते हैं। लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) इस प्रकार हैं:  एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) से भरपूर लौंग का पानी (Clove water) अपनी एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज के लिए जानी जाती है। आयुर्वेदा के अनुसार खाली पेट इस पानी को पीने से कई हानिकारक फौरन एजेंट्स से शरीर को लड़ने में मदद मिलती है। इससे कई समस्याओं से छुटकारा पाने में सहायत मिल सकती है।  डाइजेशन को सही रखने में मददगार लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) पेट से भी जुड़े होते हैं। खाली पेट इस पानी को पीने से डाइजेशन बूस्ट करने में मदद मिलती है। इससे डाइजेशन सिस्टम सुधरता है। लौंग अपने वायुनाशक गुणों के लिए जाना जाता है, जो गैस और सूजन से राहत दिलाने में मदद करता है। इम्युनिटी को मजबूत करे लौंग का पानी (Clove water) इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर को इन्फेक्शन्स से लड़ने में मदद करते हैं। लौंग के पानी को नियमित रूप से पीने से कई बीमारियों का जोखिम कम होता है जैसे फ्लू सीजन। यह सम्पूर्ण स्वास्थ्य को सही रखने और सामान्य सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए जरूरी है। लिवर फंक्शन को सुधारे लौंग का पानी (Clove water) लिवर हेल्थ के लिए बेहतरीन हैं। यह लिवर शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लौंग में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) टॉक्सिन्स और फ्री रेडिकल्स के कारण लिवर को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। इसका नियमित रूप से सेवन करने से लिवर फंक्शन सही रहने में मदद मिलती है। वजन को रखे सही लौंग के पानी के फायदे (Benefits of clove water) में वजन को सही रखना भी शामिल है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं या अपने वजन को सही बनाए रखना चाहते हैं, तो अपनी रूटीन में इस पानी को शामिल करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें मौजूद कंपाउंड्स से ब्लड शुगर को रेगुलेट रखने और क्रेविंग को कम करने में मदद मिलती है। सुबह खाली पेट इसे पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है, जिससे आसानी से वजन कम हो सकता है। एनर्जी लेवल को बढ़ाये अपने दिन की शुरुआत लौंग के पानी से करने से प्राकृतिक रूप से एनर्जी बूस्ट होती है। लौंग ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन डिलीवरी को सुधारता है। जिससे पूरा दिन एनर्जी बनी रहती है। ओरल हेल्थ को सुधारे  लौंग का पानी (Clove water) ओरल हेल्थ पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। लौंग में प्रकृति एंटीसेप्टीक गुण होते हैं, जिससे सांस की बदबू को ओरल इंफेक्शंस को कम करने में सहायता होती है। लौंग का पानी (Clove water) दांत के दर्द और मसूड़ों की परेशानी को कम करने में भी फायदेमंद है। यानी, यह सम्पूर्ण दांतों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।  इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत कैसे बनाएं लौंग का पानी? लौंग का पानी (Clove water) बनाने के लिए एक गिलास पानी को थोड़ा गर्म कर लें और उसमें तीन से चार लौंग ड़ाल दें। इस पानी को रात भर ऐसे ही रहने दें। सुबह इस पानी को लगभग दस मिनटों तक उबाल लें। इस पानी को ठंडा होने दें और सुबह खाली पेट इसे पीएं। इस पानी को पीने से आपको कई हेल्थ बेनेफिट्स मिलेंगे। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi   #Clovewater #Benefitsofclovewater #clove #antioxidants

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World kidney day

क्या युवाओं में बढ़ रहा है किडनी कैंसर का रिस्क? जानिए कैसे बचा जा सकता है इस समस्या से?

वर्ल्ड किडनी डे (World kidney day) को हर साल मार्च महीने के दूसरे गुरूवार को मनाया जाता है। इस साल इसे 13 मार्च को सेलेब्रेट किया जा रहा है। वर्ल्ड किडनी डे (World kidney day) को किडनी और किडनी हेल्थ के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है, ताकि किडनी डिजीज और इससे जुडी समस्याओं के बढ़ते प्रभावों को कम किया जा सके। किडनी कैंसर (Kidney cancer) की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्या युवाओं में भी बढ़ रही है। यह हेल्थ सिस्टम, रोगियों और सोसाइटी के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है। आइए जानें युवाओं में बढ़ती किडनी कैंसर की समस्या (Problem of kidney cancer is increasing among youth) के बारे में। युवाओं में बढ़ती किडनी कैंसर की समस्या (Problem of kidney cancer is increasing among youth) : पाएं इसके बारे में जानकारी नेशनल किडनी फाउंडेशन (National Kidney Foundation) के अनुसार किडनी कैंसर (Kidney cancer) का सबसे सामान्य ट्रीटमेंट है सर्जरी, जिससे किडनी का पूरा या आंशिक भाग रिमूव कर दिया जाता है। हालांकि, इसका उपचार रोग की स्टेज, रोगी की उम्र, हेल्थ और अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करता है। किडनी कैंसर (Kidney cancer) रीनल सेल कार्सिनोमा बाकी सब कैंसरों का लगभग 2-3% हिस्सा है। कुछ समय पहले तक यह मामले केवल 60 साल की उम्र से अधिक बुजुर्गों में ही देखे जाते थे। लेकिन, पिछले कुछ दशकों में 30 और चालीस साल के लोगों में भी इसके मामलों में वृद्धि हुई है। इस बात को नेशनल कैंसर रजिस्ट्री में भी इसे नोटिस किया है कि 50 साल से कम उम्र के लोगों में 15-20% बढ़ोतरी हुई है। इसके लिए बहुत से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं जैसे जीवनशैली में बदलाव या एनवायर्नमेंटल एक्सपोजर आदि। युवाओं में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) और स्मोकिंग जैसे रिस्क फैक्टर्स भी किडनी कैंसर (Kidney cancer) का कारण बन सकते हैं। इसके लिए लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है, ताकि वो अपनी जीवनशैली को हेल्दी बनाए रखें। इसके अलावा जेनेटिक प्रेडिस्पोसिशन्स (Genetic predispositions) भी कम उम्र के लोगों में किडनी कैंसर का कारण बन सकते हैं। जिन लोगों को इस रोग का अधिक रिस्क होता है, उन्हें जेनेटिक टेस्टिंग की सलाह दी जाती है। यह तो थी जानकारी युवाओं में बढ़ती किडनी कैंसर की समस्या (Problem of kidney cancer is increasing among youth) के बारे में। अब जानिए इसके उपचार और बचाव के बारे में। किडनी कैंसर का उपचार किडनी कैंसर (Kidney cancer) का उपचार कई फैक्टर्स पर निर्भर होता है। इसके उपचार के तरीके इस प्रकार हैं:  अन्य उपचार इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे किडनी कैंसर से बचाव किडनी कैंसर (Kidney cancer) से बचाव के सामान्य तरीके इस प्रकार हैं: इस वर्ल्ड किडनी डे (World kidney day) किडनी हेल्थ के महत्व के प्रति जागरूक रहने पर अपना ध्यान फोकस करना करें। हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करें, नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग कराएं और किडनी कैंसर (Kidney cancer) के जल्दी निदान और ट्रीटमेंट के बारे में जानें। किडनी हेल्थ पर ध्यान देने से हम युवाओं में किडनी कैंसर की समस्या को कम कर सकते हैं जिसका उपचार न केवल संभव है बल्कि इससे बचा भी जा सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi kidney cancer #kidneycancer #Kidneyhealth #worldkidneyday #Problemofkidneycancerisincreasingamongyouth

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Benefits of drinking Tulsi water

तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे

भारतीय रसोईघर में ऐसी कई हर्ब्स पाई जाती हैं, जिनके बहुत से हेल्थ बेनेफिट्स हैं। तुलसी (Tulsi) उन्हीं में से एक है, जिसे बेजिल के नाम से भी जाना जाता है। यह हिन्दू संस्कृति के अनुसार एक पवित्र पौधा है और इसकी हर घर में पूजा की जाती है। इसे आयुर्वेदा की गोल्डन रेमेडी और हर्ब्स की क्वीन भी कहा जाता है। तुलसी (Tulsi) की चाय या पानी पीने के कई फायदे हैं। यह हर्ब शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत लाभदायक मानी गई है। आइए जानें कि रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning) क्या हो सकते हैं?    रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार तुलसी (Tulsi) के फाइबर, मिनरल्स से भरपूर होती है और इसके साथ ही इसमें प्लांट बेस्ड ओमेगा-3 फैट भी होता है। आप इन्हें पेय पदार्थों में भिगो कर खा सकते हैं और इससे बने बेवरेजेज भी बहुत प्रचलित हैं। रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning) इस प्रकार हैं:  स्ट्रेस से दिलाए आराम तुलसी के पत्तों में एडाप्टोजेन्स होते हैं, जो शरीर में तनाव के लेवल को कम करने में उपयोगी होते हैं। रोजाना तुलसी (Tulsi) के पत्तों का सेवन करने या इसका पानी पीने से स्ट्रेस और प्रेशर से आराम मिल सकता है। यही नहीं, इससे नसें शांत रहती हैं और काम करने की कैपेसिटी भी बढ़ती है। यह नर्वस सिस्टम के कई कामों के लिए फायदेमंद है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरने में भी मदद मिलती है। डाइजेशन में सुधार सुबह तुलसी का पानी (Tulsi water) पीने से डाइजेशन सिस्टम में भी सुधार होता है। इससे इंटेस्टाइन से जुड़े मसल्स के कार्यो में बढ़ोतरी होती है, जिससे बाउल मूवमेंट्स में मदद मिलती है। तुलसी (Tulsi) शरीर के एसिड रिफ्लेक्स को बैलेंस बनाए रखती है, जिससे शरीर में pH लेवल भी बना रहता है। यानी, रोजाना तुलसी का पानी (Tulsi water) पीने से पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। शरीर के ब्लड शुगर लेवल को रखे सही रोजाना सुबह तुलसी का पानी पीने के बेनेफिट्स (Benefits of drinking Tulsi water every morning) पैंक्रिएटिक सेल्स से भी सम्बन्धित हैं। तुलसी (Tulsi) में ऐसे कंपोनेंट्स होते हैं, जो शरीर में इंसुलिन को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। जब इंसुलिन का स्तर नियंत्रित रहता है, तो यह शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। सुबह इसे खाना या इसके पानी को पीने से ब्लड शुद्ध रहता है और ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग होता है, जिससे खराब मेटाबॉलिज्म के कारण होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है। जिन लोगों को डायबिटीज है या हाई ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) अधिक है उन्हें सुबह ही इस पानी को पीने से लाभ मिल सकता है। सर्दी-जुकाम में फायदेमंद तुलसी (Tulsi) में एंटी-वायरल प्रॉपर्टीज होती हैं, जो वायरल इंफेक्शंस से बचाव में फायदेमंद साबित हो सकती हैं। यही नहीं, सामान्य सर्दी जुकाम जैसी समस्याओं के इलाज में भी यह हर्ब काम आ सकती है।  सांस की बदबू से बचाये सांस की बदबू एक बड़ी परेशानी है, जिससे आप इस सिंपल नुस्के से राहत पा सकते हैं। सांस की बदबू न केवल सेहत के लिए नुकसानदायक है बल्कि लोगों के सामने भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सुबह तुलसी के पत्तों को चबाना या इसका पानी पीने से यह समस्या कुछ हद तक दूर हो सकती है। तुलसी (Tulsi) में एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जिसके कारण जो माइक्रोबैक्टीरिया जो सांस की बदबू का कारण बनते हैं, वो नष्ट हो जाते हैं।  इसे भी पढ़ें: ब्लैक कॉफी पीने के 8 अद्भुत फायदे: इसे पीकर करें सुबह की शुरुआत इम्युनिटी बूस्ट करे तुलसी एंटी-ऑक्सीडेंट्स (Antioxidant) से भरपूर होती है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल चाय में किया जाता है। यह इम्युनिटी को बूस्ट करने का बेहतरीन प्राकृतिक तरीका है। तुलसी (Tulsi) में विटामिन ए,बी और सी होते हैं, जो शरीर को प्रभावी रूप से हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। सुबह तुलसी का पानी (Tulsi water) पीने से हेल्दी इम्यून सेल्स को बनाने को बूस्ट करते हैं और इससे कई वायरल डिजीज से बचाव में मदद मिलती है।   नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Benefits of drinking Tulsi water #BenefitsofdrinkingTulsiwatereverymorning #Tulsi #Tulsiwater #Benefitsoftulsiwater

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