Nidhi Sinha

Before Bihar elections

बिहार चुनाव से पहले RJD में बड़ा बदलाव: मंगनी लाल मंडल होंगे नए प्रदेश अध्यक्ष

बिहार की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) से पहले बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश नेतृत्व में परिवर्तन की घोषणा होने जा रही है, जो पार्टी की रणनीति और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। वरिष्ठ नेता मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) को RJD का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा रहा है। वे मौजूदा अध्यक्ष जगदानंद सिंह की (Jagdanand Singh) जगह लेंगे। इस बदलाव को पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की स्वीकृति प्राप्त है। 19 जून को होगा औपचारिक ऐलान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह निर्णय 19 जून को होने वाली राज्य परिषद की बैठक में औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। उसी दिन चुनाव परिणाम आने के बाद वे आधिकारिक तौर पर नए प्रदेश अध्यक्ष बन जाएंगे। यह जानकारी पार्टी के भीतर चल रहे संगठनात्मक चुनावों के बीच सामने आई है। इस प्रक्रिया को राजद के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. रामचंद्र पुरबे ने भी मंजूरी दे दी है। मंगनी लाल मंडल: अनुभव और सामाजिक समीकरण का संगम हालांकि बीच में वे नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की JDU में शामिल हो गए थे, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव (2024 Lok Sabha elections) में टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने JDU छोड़ दी और 6 जनवरी 2025 को RJD में दोबारा शामिल हो गए। RJD को कैसे होगा फायदा? बिहार में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) होने हैं और ऐसे समय में मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाना एक सोच-समझी रणनीति मानी जा रही है। सामाजिक समीकरण: मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) EBC समुदाय से आते हैं, जो बिहार में बड़ी संख्या में मौजूद है। RJD इस समुदाय को साधकर अपना सामाजिक आधार और मज़बूत करना चाहती है। राजनीतिक अनुभव: उनका लंबा अनुभव और प्रशासनिक पकड़, पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर मजबूती देने में मदद करेगी। तेजस्वी यादव का समर्थन: तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की युवा नेतृत्व क्षमता और मंडल के अनुभवी राजनीतिक कौशल का मेल पार्टी को आने वाले चुनाव में बेहतर स्थिति में ला सकता है। इसे भी पढ़ें: माई बहन मान योजना बिहार की करोड़ों महिलाओं के लिए अमृत: डॉ मनोज पांडेय जगदानंद सिंह की विदाई अब तक RJD के प्रदेश अध्यक्ष रहे जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) को पार्टी के वरिष्ठ और निष्ठावान नेताओं में गिना जाता है, लेकिन हाल के महीनों में पार्टी के भीतर कुछ असंतोष की खबरें सामने आई थीं। मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) की नियुक्ति इस असंतोष को शांत करने और नए उत्साह के साथ चुनाव में जाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) को RJD की कमान सौंपना केवल एक नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि एक चुनावी रणनीति का हिस्सा है। उनका सामाजिक आधार, राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ, RJD को आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly Election) में एक मज़बूत विकल्प बना सकता है। अगर यह दांव सफल रहता है, तो RJD न सिर्फ सत्ता में वापसी का रास्ता तय कर सकती है, बल्कि बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में एक नया समीकरण भी बना सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi #biharelection2025 #rjdnews #mangnilalmandal #biharpolitics #laluprasad #nitishkumar #biharupdate #breakingnews #politicalnews

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gold investment

Gold Price: सोना की बढ़ती कीमत और भारतीय संस्कृति का सुनहरा निवेश

हाल के दिनों में जियो पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tension)  खासकर इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच सोने की कीमतों (Gold Price) में काफी तेजी देखी जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को सोना 2,200 रुपये की बढ़त के साथ 1,01,540 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया। यह लगातार तीसरा दिन रहा जब सोने की कीमतों (Gold Price) में तेजी देखी गई। इस उतेजी के साथ ही अब यह चर्चा होने लगी है कि क्या आने वाले महीनों में सोने की कीमतें सवा लाख रुपये प्रति 10 ग्राम या उससे भी अधिक तक पहुंच सकती हैं?  सोने की कीमतों में उछाल के पीछे का कारण व्यापार से जुड़े जानकारों की मानें तो सोने की कीमतों में तेज़ी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण है मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव। इजराइल द्वारा ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी (Iran’s Nuclear Facility) पर किए गए सैन्य हमले ने वैश्विक बाजारों में डर और अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। ऐसे संकटपूर्ण समय में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश करते हैं और सोना सदियों से ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश (Safe Investment) के रूप में जाना जाता रहा है। इसी वजह से सोने की मांग में तेजी से बढ़ी और सोने की कीमतों (Gold Price) में उछाल आया। इसके अलावा अमेरिका में हाल ही में जारी महंगाई दर के आंकड़े अपेक्षा से कम रहे, जिससे यह संभावना बनी कि अमेरिका का फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो डॉलर कमजोर होता है और सोना मजबूत होता है। इससे निवेशक ब्याज न देने वाले लेकिन स्थिर रिटर्न देने वाले साधनों की ओर रुख करते हैं, जिससे भी सोने की कीमतों को बल मिला। आने वाले 12 महीनों में क्या होगा? विश्व स्तर पर भी सोने के भविष्य को लेकर सकारात्मक अनुमान लगाए जा रहे हैं। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) का अनुमान है कि अगले एक वर्ष में सोने की कीमतें 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती हैं। वहीं, गोल्डमैन सैक्स ने भी अपना अनुमान दोहराते हुए कहा है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक गोल्ड खरीदारी की वजह से यह 2025 के अंत तक 3,700 डॉलर और 2026 तक 4,000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। हालांकि व्यापार से जुड़े कुछ जानकारों की मानें तो इजराइल-ईरान संघर्ष के बावजूद वैश्विक तेल आपूर्ति में फिलहाल कोई बड़ा व्यवधान नहीं होगा। इसके बावजूद जियो पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tension) और आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति में सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय भारत में सोने का सांस्कृतिक और निवेश से जुड़े महत्व भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं है, यह भावनाओं, परंपराओं और आस्थाओं से जुड़ा हुआ है। शादियों से लेकर त्योहारों तक, सोना भारतीय समाज का अहम हिस्सा रहा है। धनतेरस, अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर सोने की खरीद (Gold Price) शुभ मानी जाती है। ग्रामीण भारत में तो सोना अक्सर संपत्ति के रूप में संचित किया जाता है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बेचा या गिरवी रखकर आर्थिक मदद ली जा सकती है। निवेश के नजरिए से देखें तो सोना हमेशा ही एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प रहा है। जब शेयर बाजार अस्थिर होते हैं या महंगाई बढ़ती है, तब सोने में निवेश एक स्थायी रिटर्न का साधन बन जाता है। यही कारण है कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। इजराइल-ईरान संघर्ष (Israel-Iran Tension) के चलते बनी वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिका की मौद्रिक नीति और निवेशकों की मानसिकता के कारण सोने की कीमतों (Gold Price) में तेजी जारी रहने की संभावना है। आने वाले 12 महीनों में यह 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकता है। भारत जैसे देश में, जहां सोने का धार्मिक, सामाजिक और निवेश के दृष्टिकोण से गहरा महत्व है, यह तेजी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Gold Price #goldprice #indianinvestment #goldmarket #goldvalue #indianculture #goldrate #goldtrend2025 #goldnews

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RBI Repo Rate

RBI ने रेपो रेट में 0.50% की कटौती, होम लोन और EMI होंगे सस्ते

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 जून 2025 को अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए बैंकों से लोन लेने वालों को बड़ी राहत दी है। RBI ने रेपो रेट (Repo Rate) में 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50% की कटौती का ऐलान किया है। इस घोषणा के साथ ही रेपो रेट अब घटकर 5.50% पर आ गया है। यह 2025 की पहली छमाही में तीसरी बार रेपो रेट में कटौती है और अब तक की सबसे बड़ी। इससे पहले फरवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस पॉइंट की कटौतियां की गई थीं। कुल मिलाकर इस साल अब तक 100 बेसिस पॉइंट की कटौती हो चुकी है। क्या है रेपो रेट? रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है जिस पर आरबीआई (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटती है तो बैंकों को कम ब्याज पर कर्ज मिलता है, जिससे वे भी उपभोक्ताओं को सस्ते लोन दे सकते हैं। इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेश तथा उपभोग को प्रोत्साहन मिलता है। कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में भी कटौती RBI ने कैश रिजर्व रेशियो यानी CRR में भी 1% की कटौती कर इसे 3% कर दिया है। इसका मतलब है कि अब बैंक अपनी जमा राशि का छोटा हिस्सा ही आरबीआई के पास रिजर्व में रखेंगे और उनके पास लोन देने के लिए ज्यादा पूंजी उपलब्ध होगी। इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा, खासकर होम लोन (Home Loan) और पर्सनल लोन (Personal Loan) की दरों में गिरावट के रूप में। EMI में राहत: आम आदमी को सीधा फायदा रेपो रेट (Repo Rate) में कटौती का सबसे बड़ा फायदा होम लोन लेने वालों को मिलेगा। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का होम लोन 8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया है, तो उसकी मौजूदा EMI 43,391 रुपये बनती है। नई दर के अनुसार अगर ब्याज 7.5% हो जाता है, तो EMI घटकर 40,280 रुपये हो जाएगी। यानी हर महीने करीब 3,111 रुपये और सालभर में लगभग 37,000 रुपये की बचत होगी। टेन्योर घटाएं या EMI? विशेषज्ञों की मानें तो अगर ग्राहक EMI को जस का तस बनाए रखते हैं और टेन्योर घटा लेते हैं, तो उन्हें ब्याज पर अधिक बचत मिलेगी। ऊपर दिए उदाहरण में लोन की अवधि लगभग 3 साल कम हो सकती है और कुल ब्याज में 15.44 लाख रुपये तक की बचत संभव है। यह लंबे समय में बेहतर वित्तीय निर्णय साबित हो सकता है। क्या करें लोन धारक? अगर आपका होम लोन EBLR (External Benchmark Lending Rate) से जुड़ा है — जो कि अधिकतर बैंकों में रेपो रेट (Repo Rate) होता है — तो आपको इस कटौती का सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले महीनों में बैंक आपकी EMI या टेन्योर को फिर से निर्धारित कर सकते हैं। हालांकि, यदि आपका लोन अभी भी MCLR या बेस रेट से जुड़ा है, तो विशेषज्ञों की सलाह है कि आप उसे EBLR आधारित लोन में कन्वर्ट करवा लें, ताकि ब्याज दरों में गिरावट का फायदा तुरंत मिल सके। कुछ बैंक इस प्रक्रिया के लिए मामूली शुल्क लेते हैं, लेकिन दीर्घकालिक बचत के लिए यह एक समझदारी भरा कदम है। RBI का यह फैसला क्यों? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह फैसला देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए लिया गया है। अप्रैल 2025 में खुदरा महंगाई घटकर 3.16% पर आ गई है, जो पिछले 6 वर्षों में सबसे कम है। इसके अलावा, मानसून की अच्छी शुरुआत और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने की जरूरत महसूस की गई। इन कारकों को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट और CRR में कटौती की गई है। इसे भी पढ़ें: World Environment Day 2025: प्रकृति से जुड़ने के लिए प्लास्टिक की जगह रिसाइकिल प्रोडक्ट का करें इस्तेमाल किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ? इस मौद्रिक नीति (Credit Policy) बदलाव से खासकर हाउसिंग, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कारोबारियों को सस्ता कर्ज मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। RBI की यह नीतिगत घोषणा आम आदमी, उद्योगों और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सस्ती दरों पर कर्ज की उपलब्धता उपभोग और निवेश को बढ़ावा देगी, जिससे देश की आर्थिक विकास दर को मजबूती मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस राहत का असर आम लोगों की जेब से लेकर देश की वित्तीय प्रणाली तक साफ दिखेगा। Latest News in Hindi Today Hindi  #CreditPolicy #RBI #EMI #MSME #CRR

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Tejashwi Yadav calls NDA rule in Bihar a 20-year failure

𝟐𝟎 बरस से ढो रहा है बिहार 𝐍𝐃𝐀 की नाकाम निकम्मी सरकार: तेजस्वी यादव

बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। चुनाव आयोग जल्द ही चुनाव के तारीखों की घोषणा कर सकता है। चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ-साथ राज्य में सियासी पारा भी बढ़ने लगा है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। खास तौर पर विपक्षी दलों ने NDA सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस कड़ी में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) लगातार मौजूदा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पिछले कुछ वर्षों में बिहार की राजनीति में एक मजबूत विपक्षी चेहरा बनकर उभरे हैं, लगातार जनसभाओं, मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से NDA पर हमला बोलते आ रहे हैं। वे विशेष रूप से युवाओं, बेरोजगारी, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों को उठाकर जनता का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। व्यंग्यात्मक कार्टून से सियासी हमला तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक व्यंग्यात्मक कार्टून साझा किया। इस कार्टून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की प्रतीकात्मक छवियों को एक आम आदमी द्वारा ढोते हुए दिखाया गया है। इस प्रतीकात्मक चित्र के ज़रिए तेजस्वी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बिहार की जनता पिछले 20 वर्षों से NDA की ‘निकम्मी और नाकारा’ सरकार का बोझ उठाने को मजबूर है। उन्होंने इस पोस्ट के साथ लिखा, “20 बरस से ढो रहा है बिहार, एनडीए की नाकाम निकम्मी सरकार। इसके साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, ढहते पुल, पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली, बाढ़ और सूखा जैसे मुद्दों की ओर इशारा करते हुए यह तंज कसा कि इन समस्याओं के बावजूद सरकार ने कोई ठोस समाधान नहीं निकाला। 𝟐𝟎 बरस से ढो रहा है बिहार𝐍𝐃𝐀 की नाकाम निकम्मी सरकार!#TejashwiYadav #Bihar #RJD #india pic.twitter.com/Z8mQOFuaaR — Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) June 4, 2025 चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया की भूमिका तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के इस डिजिटल प्रहार को एक सटीक चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। आज की राजनीति में सोशल मीडिया एक बेहद प्रभावशाली मंच बन चुका है और तेजस्वी इसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। वे युवाओं और डिजिटल माध्यम (Bihar Politics) से जुड़े मतदाताओं को सीधे अपनी बात पहुंचा रहे हैं। खासकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं को जागरूक करने के लिए वे लगातार सोशल मीडिया (Social Media) पर सक्रिय हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि एनडीए सरकार के खिलाफ एक बड़ा मनोवैज्ञानिक हमला है। ऐसे कार्टून और टिप्पणियों के जरिए तेजस्वी अपने विरोध को रचनात्मक और सरल भाषा में जनता के सामने ला रहे हैं, जो आम लोगों को आसानी से समझ में आता है। इसे भी पढ़ें:- बीजेपी नेता के बेटे के वायरल हुए 130 से अधिक अश्लील वीडियो, मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने कही यह बात  चुनावी समीकरण और आगे की राह राजनीति के जानकारों की मानें तो आगामी चुनाव में तेजस्वी यादव की रणनीति न केवल मौजूदा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की है, बल्कि वह खुद को एक विकल्प के रूप में मजबूती से पेश कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए की ओर से इस प्रकार के लगातार हमलों का क्या जवाब दिया जाएगा। गौरतलब है कि बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में जातीय समीकरण, विकास के मुद्दे और युवा वर्ग की भागीदारी हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में राजद की ओर से उठाए जा रहे सवालों और डिजिटल रणनीति का कितना असर होता है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। अब ऐसे में यह कहा जा सकता है कि बिहार का राजनीतिक (Bihar Politics) तापमान चुनाव की घोषणा से पहले ही काफी बढ़ चुका है और जैसे-जैसे तारीख नज़दीक आएगी, यह लड़ाई और अधिक तीखी होती जाएगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Bihar Politics #TejashwiYadav #BiharPolitics #NDAFailure #NitishKumar #BJPinBihar #BiharElections2025 #OppositionVoice #PoliticalNews

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Bubble tea benefits

Boba Tea: क्या है बोबा चाय? क्या सेहत के लिए फायदेमंद है ये चाय?

इनदिनों एक नया पेय पदार्थ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसका नाम बोबा टी (Boba Tea) यानी बोबा चाय है। इसे बबल टी (Bubble Tea) के नाम से भी जाना जाता है। बोबा टी का चलन ताइवान से शुरू हुआ और अब यह एशिया, अमेरिका, यूरोप और भारत जैसे देशों में भी काफी प्रसिद्ध हो चुका है। आज हम रिसर्च के अनुसार बोबा टी (Boba Tea) क्या है, इसके फायदे (Boba Tea Benefits) क्या हैं और इसके संभावित दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं यह समझने कोशिश करेंगे। बोबा टी क्या है? बोबा टी एक ठंडा, मीठा पेय है जिसे चाय, दूध, शक्कर और टैपिओका पर्ल्स (Boba pearls) से बनाया जाता है। टैपिओका पर्ल्स काले रंग की छोटी-छोटी गोलियां होती हैं जो टैपिओका स्टार्च से बनता है। इस पेय पदार्थ चाय की तरह होता है लेकिन इसमें चबाने के लिए टैपिओका पर्ल्स मिलता है। बोबा टी या बबल टी अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे:  बोबा टी के फायदे (Benefits of Boba Tea) क्या हैं?  अलग-अलग रिसर्च के अनुसार बोबा टी के कई फायदे हैं जैसे: 1. एनर्जी बूस्टर बोबा टी में चाय और शक्कर की मौजूदगी से शरीर को त्वरित ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद कैफीन मानसिक सतर्कता को भी बढ़ाने में सहायक माना गया है। 2. सकारात्मक मूड में मददगार NCBI के रिसर्च के अनुसार चाय में मौजूद एल-थेनाइन (L-theanine) और कैफीन होने की वजह से मूड अच्छा रहता है और तनाव कम हो सकता है।  3. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यदि बोबा टी को ग्रीन टी (Green Tea) या ब्लैक टी (Black Tea) के साथ बनाया जाए, तो उसमें मौजूद कैटेचिन (catechins) और पॉलीफेनॉल्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जो उम्र बढ़ने और कई बीमारियों से जुड़े होते हैं। 4. व्यक्तिगत पसंद के अनुसार अनुकूलन यह पेय कई प्रकार के स्वादों, मिल्क ऑप्शन जैसे सोया, बादाम, ओट्स और स्वीटनर के ऑप्शन के साथ मिलाकर तैयार किया जा सकता है। बोबा टी के संभावित साइडइफेक्ट्स अलग-अलग रिसर्च के अनुसार बोबा टी के कई साइडइफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसे: 1. शक्कर की ज्यादा मात्रा बोबा टी में प्रयुक्त फ्लेवर सिरप और टैपिओका पर्ल्स में काफी मात्रा में शक्कर होती है। Harvard T.H. Chan School of Public Health के अनुसार अत्यधिक चीनी का सेवन मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज़ और हृदय रोगों का कारण बन सकता है। 2. फाइबर की कमी टैपिओका पर्ल्स में फाइबर नहीं होता और यह मुख्यतः स्टार्च से बना होता है। इसके अत्यधिक सेवन से पेट में भारीपन या कब्ज की समस्या हो सकती है। 3. कैलोरीज का उच्च स्तर एक सामान्य बोबा टी कप में लगभग 300-500 कैलोरी हो सकती हैं। यह किसी एक समय के भोजन के बराबर हो सकता है। वजन नियंत्रित करने वालों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक 4. कैफीन की मात्रा यदि कोई व्यक्ति कैफीन के प्रति संवेदनशील है, तो बोबा टी में मौजूद चाय कैफीन के कारण अनिद्रा, घबराहट या हृदय गति में तेजी जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकती है। बोबा टी (Boba Tea) एक आधुनिक पेय पदार्थ है जो स्वाद और अनुभव दोनों के स्तर पर लोगों को आकर्षित करता है। यदि इसे संयम में और स्वस्थ विकल्पों (कम चीनी, लो-फैट दूध) के साथ लिया जाए तो यह सुरक्षित और आनंददायक हो सकता है। लेकिन इसका अत्यधिक सेवन न केवल वजन बढ़ा (Weight Gain) सकता है, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि बोबा टी को कभी-कभी एक ट्रीट के रूप में लें, न कि नियमित पेय के रूप में।  नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Boba Tea #BobaTea #BubbleTea #HealthyDrinks #TapiocaPearls #MilkTea #TeaLovers #NutritionFacts #IsBobaHealthy

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PM Modi latest speech

उधर से गोली आएगी तो इधर से गोला चलेगी: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शनिवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक भव्य रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर सख्त रुख अपनाया और विकास की नई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। जंबूरी मैदान में आयोजित इस विशाल जनसभा में उन्होंने न केवल देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया, बल्कि सामाजिक सुधारों और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी ऐतिहासिक योगदान देने वाली लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर (Ahilyabai Holkar) को श्रद्धांजलि दी। “गोली के बदले गोला मिलेगा” – ऑपरेशन सिंदूर पर दो टूक अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “आज 140 करोड़ भारतीय कह रहे हैं कि अगर तुम उधर से गोली चलाओगे, तो यहां से गोला चलेगा।” यह बयान देश की सुरक्षा नीति में भारत के बदले हुए रुख और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की भावना को दर्शाता है। पीएम मोदी (PM Modi) ने यह भी स्पष्ट किया कि अब भारत किसी भी प्रकार के हमले या उकसावे पर चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि देश की सीमाएं पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हैं और सरकार आतंकी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। दतिया और सतना को मिली हवाई सेवा की सौगात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रैली के दौरान दतिया और सतना एयरपोर्ट का उद्घाटन कर इन शहरों को देश के हवाई नेटवर्क से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि “अब दतिया और सतना जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर भी आधुनिक हवाई सेवा से जुड़ गए हैं। यह सिर्फ यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि विकास का नया द्वार है।” पीएम मोदी (PM Modi) ने आगे कहा कि यह अवसर सिर्फ एक उद्घाटन नहीं है, बल्कि यह लोकसेवा और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो लाखों लोगों के जीवन में बदलाव लाएगा। अहिल्याबाई होल्कर को दी श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मंच से समाज सुधारक और महान शासिका अहिल्याबाई होल्कर (Ahilyabai Holkar) को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “अहिल्याबाई का जीवन हमें सिखाता है कि शासन का अर्थ सिर्फ सत्ता नहीं, सेवा है। उनके कार्य आज भी हमारी प्रेरणा हैं।” इस अवसर पर उनकी 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया। पीएम मोदी (PM Modi) ने अहिल्याबाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके योगदान पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। महिला सशक्तिकरण को बताया सरकार की प्राथमिकता रैली से पहले पीएम मोदी (PM Narendra Modi) लोकमाता अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि “अहिल्याबाई का जीवन महिलाओं की शक्ति और आत्मनिर्भरता का उदाहरण है। आज उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सरकार बेटियों को हर क्षेत्र में आगे लाने के लिए प्रतिबद्ध है।” इसे भी पढ़ें:- बीजेपी नेता के बेटे के वायरल हुए 130 से अधिक अश्लील वीडियो, मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने कही यह बात  जनता का जोरदार समर्थन रैली स्थल पर लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। पीएम मोदी (PM Modi) को देखने के लिए हजारों लोग तिरंगे लेकर पहुंचे थे। उन्होंने पीएम मोदी (PM Modi) के स्वागत में हाथ लहराए और नारे लगाए। पीएम भी अपनी खुली गाड़ी में बैठकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते नजर आए। इस अवसर पर पीएम मोदी का संबोधन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद अहम रहा। उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब निर्णायक नेतृत्व और तेज़ विकास के रास्ते पर है—जहां जनता की सेवा और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। Latest News in Hindi Today Hindi news PM Narendra Modi #PMModi #ModiSpeech #IndiaSecurity #ModiWarning #ModiOnTerror #NationalSecurity #IndiaNews #ModiStatement

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Monsoon tips for car

Monsoon tips for car: इन 10 टिप्स को अगर आपने कर लिया फॉलो, तो बारिश में भी आपकी कार रहेगी चकाचक 

बारिश का मौसम जहाँ सुकून और ताज़गी लेकर आता है। वहीं कार ड्राइव करने वालों के लिए बारिश का मौसम कई तरह की समस्या भी लेकर आता है। पानी भरे रास्ते, फिसलन, कम विज़िबिलिटी और कार में सीलन जैसी समस्याएँ इस मौसम में आम हो जाती हैं। ऐसे में यदि आपकी कार की समय पर देखभाल न की जाए तो यह न केवल आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है, बल्कि आपकी सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। यहाँ हम आपको बता रहे हैं बारिश के मौसम में कार की देखभाल (Monsoon tips for car) से जुड़े कुछ बेहद उपयोगी और आसान टिप्स, जो आपकी कार को बनाएंगे मौसम के लिहाज से पूरी तरह तैयार। Monsoon tips for car: बारिश के मौसम में कार को सुरक्षित रखने के लिए 10 टिप्स  1. कार के वाइपर को करें चेंज  बारिश में सबसे ज़रूरी होता है विंडस्क्रीन का साफ रहना। पुराने या घिसे हुए वाइपर शीशे को ठीक से साफ नहीं कर पाते, जिससे विज़िबिलिटी कम हो जाती है। बारिश से पहले वाइपर ब्लेड की जांच करवा लें और जरूरत हो तो नया लगवाएं। 2. ब्रेक सिस्टम की जांच कराएं भीगे रास्तों पर ब्रेक का सही तरीके से काम करना बेहद ज़रूरी है। ब्रेक में किसी भी प्रकार की ढील या घिसाव को नजरअंदाज न करें। ABS (Anti-lock Braking System) वाले वाहनों की जांच भी जरूर करवाएं। 3. टायर की ग्रिप है बेहद अहम पानी से भरी सड़कों पर कार को कंट्रोल में रखने के लिए टायर की ग्रिप मजबूत होनी चाहिए। पुराने या घिसे हुए टायर बारिश में स्किड कर सकते हैं। टायर में सही प्रेशर बनाए रखें और ट्रैड डेप्थ कम से कम 2 मिमी रखें। 4. हेडलाइट और टेल लाइट करें चेक  बरसात में विज़िबिलिटी कम हो जाती है, ऐसे में हेडलाइट और टेल लाइट का ठीक तरह से काम करना बेहद ज़रूरी है। अगर रोशनी धीमी है या बल्ब पुराना हो चुका है तो उसे जरूर बदलवाएं। इसलिए बारिश के मौसम में कार टिप्स  (Monsoon tips for car) के लिए इस गाड़ी की लाइट से जुड़ी बातों को ध्यान रखना चाहिए।   5. बैटरी कंडीशन की करें जांच  नमी और ठंडे मौसम में बैटरी पर असर पड़ता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करें कि बैटरी ठीक से चार्ज हो रही है और उसके टर्मिनल साफ़ और कसकर जुड़े हुए हैं। 6. इंजन के नीचे स्कर्टिंग लगवाएं पानी से भरी सड़कों पर चलते समय इंजन में पानी जाने का खतरा रहता है। इस स्थिति से बचने के लिए इंजन के नीचे प्रोटेक्शन स्कर्टिंग लगवाना एक समझदारी भरा कदम है। 7. एसी और डीफ़ॉगर की जांच बारिश के मौसम में शीशों पर धुंध जमना आम है। ऐसे में डीफ़ॉगर और एयर कंडीशनर का सही से काम करना ज़रूरी है ताकि विंडो विज़िबिलिटी बनी रहे। 8. कार के अंदरूनी हिस्सों को सूखा रखें बारिश में कार के अंदर पानी या नमी आना आम बात है। इसलिए कार मैट्स को समय-समय पर धूप में सुखाएं और फर्श को सूखा रखें, जिससे फफूंदी या बदबू न फैले। इसे भी पढ़ें:- विदेश से सोना-चांदी लाना अब नहीं रहा आसान: क्या है सरकार के नए नियम? 9. कार वॉश के बाद वॉटरप्रूफिंग कोटिंग कराएं बारिश के मौसम में कार की बॉडी को जंग लगने से बचाने के लिए एंटी-रस्ट कोटिंग या वॉटरप्रूफिंग करवाना एक अच्छा उपाय है। इससे कार की पेंटिंग भी सुरक्षित रहती है। 10. इमरजेंसी किट तैयार रखें बारिश के मौसम में कार टिप्स (Monsoon tips for car) में इस टिप्स को ध्यान रखकर इमरजेंसी किट तैयार रखें क्योंकि बारिश के मौसम में अचानक खराब मौसम या रास्ते में फंस जाने की संभावना रहती है। ऐसे में टॉर्च, फर्स्ट एड किट, एक्स्ट्रा फ्यूज, मोबाइल चार्जर, पावर बैंक और बेसिक टूल्स हमेशा कार में रखें। Latest News in Hindi Today Hindi news Monsoon tips for car #MonsoonCarTips #CarCare #RainySeasonMaintenance #CarProtection #AutoCare

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Ankita Bhandari murder case

Ankita Bhandari Murder Case: क्या हुआ था अंकिता के साथ 18 सितंबर 2022 को?

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) में आखिरकार करीब ढाई साल बाद न्याय की एक किरण दिखाई दी। 19 साल की मासूम अंकिता की हत्या  (Ankita Bhandari Murder) के मामले में शुक्रवार को कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों आरोपियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने यह फैसला 97 में से 47 गवाहों की गवाही और ढाई साल से अधिक की लंबी सुनवाई के बाद सुनाया। इस मामले में दोषियों में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य भी शामिल है, जो भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। कोर्ट ने दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अंकिता की हत्या: VIP सिस्टम का काला सच घटना 18 सितंबर 2022 की है, जब पौड़ी जिले के यमकेश्वर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत अंकिता की हत्या कर दी गई। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, जो रिजॉर्ट का मालिक था, ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता को चीला नहर में धक्का दे दिया, जिससे उसकी डूबने से मौत हो गई। जांच में सामने आया कि पुलकित अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले खास मेहमानों को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बना रहा था। जब अंकिता ने इसका विरोध किया, तो उसे रास्ते से हटा दिया गया। यह न सिर्फ एक जघन्य अपराध था, बल्कि यह हमारे समाज में सत्ता और पैसे के दम पर महिलाओं को दबाने की मानसिकता को भी उजागर करता है। भाजपा नेता के बेटे की करतूत अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) में खास बात यह रही कि मुख्य आरोपी पुलकित आर्य भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। जब यह मामला सामने आया, तो प्रदेशभर में भारी आक्रोश फैला। जनता का गुस्सा इतना था कि सरकार को तत्काल पुलकित के पिता को पार्टी से बाहर निकालना पड़ा और इस केस की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन करना पड़ा। इसे भी पढ़ें:- पहले 19 साल के प्रेमी से करवाया अपनी ढाई साल की बेटी दुष्कर्म, फिर घोंटा बच्ची का गला कोर्ट का फैसला, लेकिन सवाल अब भी बाकी इस केस में अभियोजन पक्ष की ओर से 47 गवाहों की गवाही, तमाम सबूत और जांच के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। यह फैसला निश्चित ही अंकिता के परिवार और समाज के लिए एक सुकून की बात है, लेकिन कुछ बड़े सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। 1. वो VIP कौन थे? अदालत ने दोषियों को सजा तो सुना दी, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि वे ‘वीआईपी मेहमान’ कौन थे, जिनके लिए अंकिता से ‘स्पेशल सर्विस’ की मांग की जा रही थी? 2. जांच में क्यों नहीं आई पूरी सच्चाई? एसआईटी की जांच के बावजूद भी वह पूरा नेटवर्क या सिस्टम सामने नहीं आया, जो इस अपराध के पीछे काम कर रहा था। क्या जांच दबाव में की गई? 3. क्या राज्य सरकार अब आगे और कोई कार्रवाई करेगी? क्या सरकार अब इन सवालों का जवाब देगी या केस का फैसला आने के बाद यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari) को इंसाफ मिला, लेकिन यह इंसाफ अधूरा है। जब तक उस वीआईपी संस्कृति पर लगाम नहीं लगती, जब तक महिलाओं को शोषण से सुरक्षित माहौल नहीं मिलता, तब तक इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। कोर्ट के फैसले ने जरूर न्याय की उम्मीद जगाई है, लेकिन समाज को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई और अंकिता इस तरह से बलि न चढ़े। यह घटना सिर्फ एक लड़की की हत्या नहीं थी, बल्कि यह सिस्टम के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत है। Latest News in Hindi Today Hindi news Ankita Bhandari #JusticeForAnkita #UttarakhandCrime #PulkitArya #VanantraResort #WomenSafety #ChillaCanal #SITInvestigation #FastTrackCourt #IndiaNews

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CM Nitish Kumar

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सभी वर्गों को मिलेगा सम्मान

बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की सरकार ने सामाजिक समावेशिता और सभी वर्गों के न्यायोचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए दो नए आयोगों का गठन किया है। यह कदम समाज के हर तबके की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। समाज के हर वर्ग के लिए सुनवाई और समाधान बिहार सरकार (Bihar Government) ने उच्च जाति विकास आयोग (Upper Caste Development Commission) और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग (State Scheduled Tribe Commission) का गठन करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य के हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इन दोनों आयोगों का कार्य केवल समस्याएं पहचानना नहीं होगा, बल्कि यह आयोग सरकार को नीतिगत सुझाव भी देंगे ताकि हर वर्ग को उसका अधिकार मिल सके। उच्च जाति विकास आयोग की भूमिका सरकार द्वारा गठित उच्च जाति विकास आयोग का नेतृत्व भाजपा नेता और पूर्व मंत्री महाचंद्र प्रसाद सिंह को सौंपा गया है। आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद होंगे और इसके अन्य सदस्य दयानंद राय, जय कृष्ण झा और राजकुमार सिंह हैं। इनका कार्यकाल तीन वर्षों का निर्धारित किया गया है। यह आयोग बिहार में उच्च जातियों की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर आयोग राज्य सरकार को सुझाव देगा कि इस वर्ग के उत्थान के लिए किन योजनाओं और संसाधनों की आवश्यकता है। अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि केवल पिछड़े वर्गों को ही सहायता की आवश्यकता है, लेकिन इस आयोग के गठन से यह संदेश गया है कि हर वर्ग की जरूरतें अलग हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए नीति बनानी चाहिए। अनुसूचित जनजाति आयोग: अधिकारों की रक्षा की ओर कदम बिहार सरकार (Bihar Government) ने अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा और उनके सतत विकास को ध्यान में रखते हुए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की है। इस आयोग के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार बनाए गए हैं, जबकि उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सुरेंद्र उरांव को दी गई है। अन्य सदस्य प्रेमशिला गुप्ता, तल्लू बासकी और राजू कुमार हैं। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य बिहार की आदिवासी आबादी की समस्याओं की गहराई से पड़ताल करना और उनके समाधान के लिए सरकार को व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव देना है। यह आयोग भी तीन वर्षों तक कार्य करेगा और एक माध्यम बनेगा जिससे आदिवासी समुदाय की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचे। समावेशी विकास की ओर निर्णायक कदम इन दोनों आयोगों का गठन बिहार सरकार की एक रणनीतिक सोच का परिणाम है, जिसमें समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार अब केवल किसी एक वर्ग के विकास पर ध्यान नहीं देगी, बल्कि हर समाज, जाति और समुदाय को विकास के पथ पर साथ लेकर चलेगी। यह प्रयास इस बात का भी संकेत है कि समाज में समानता और न्याय की स्थापना बिना समग्र दृष्टिकोण के संभव नहीं है। यदि राज्य का हर नागरिक अपने आप को प्रशासनिक निर्णयों में सहभागी और प्रतिनिधित्व प्राप्त महसूस करेगा, तो सामाजिक ताना-बाना और मजबूत होगा। इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े होते हैं। जैसे: 1. क्या इन दोनों आयोगों द्वारा दिए गए सुझावों को कानूनी रूप से लागू करने की कोई गारंटी या स्पष्ट नीति बनाई गई है? 2. क्या इन आयोगों के गठन के बाद अन्य वर्गों (जैसे पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय) के लिए भी समान रूप से ठोस और प्रभावी नीतिगत प्रयास किए जाएंगे? 3. आयोगों द्वारा प्राप्त रिपोर्टों और सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता भी निगरानी रख सके? इस नई पहल के साथ बिहार सरकार (Bihar Government) ने यह संकेत दिया है कि सामाजिक संतुलन और हर वर्ग को विकास में सहभागी बनाना उसकी प्राथमिकता है। यदि यह प्रयास ईमानदारी से लागू किए जाते हैं, तो यह राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news #BiharGovernment #NitishKumar #CMNitishKumar #BiharPolitics

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Mamata Banerjee news

ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिकरण निंदनीय: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का नाम रखकर इस सैन्य अभियान का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे एक राजनीतिक स्टंट करार दिया और साफ कहा कि इससे सेना के सम्मान को राजनीतिक रंग देना गलत है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने यह टिप्पणी कोलकाता स्थित नबन्ना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के नाम में “सिंदूर” शब्द जोड़ना केवल राजनीतिक आकर्षण बढ़ाने के लिए किया गया है, ताकि आम जनता में भावनात्मक लहर पैदा की जा सके। उनके मुताबिक BJP इस सैन्य कार्रवाई को वोट बैंक में बदलने की साजिश कर रही है। “बंगाल कभी बीजेपी के हाथ नहीं जाएगा” प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने यह स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल कभी भी भारतीय जनता पार्टी के नियंत्रण में नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां की जनता BJP की राजनीति को अच्छी तरह समझती है और ऐसे हथकंडे अब काम नहीं आने वाले। मुर्शिदाबाद की घटना: सीधे बीजेपी को ठहराया जिम्मेदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने राज्य के मुर्शिदाबाद जिले में हुई एक हालिया घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में उनके पास ठोस सबूत हैं और जरूरत पड़ने पर वे सभी दस्तावेज सार्वजनिक कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा राज्य की शांति व्यवस्था को भंग करने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों पर तंज कसते हुए ममता बनर्जी ने कहा “कभी उन्हें चाय बेचने वाला कहा गया, फिर चौकीदार और अब वे देशभर में सिंदूर बेच रहे हैं। यह शोभा नहीं देता।” उन्होंने आगे कहा कि मोदी की सिंदूर पर आधारित बयानबाजी देश की राजनीतिक गरिमा को नुकसान पहुंचा रही है और यह केवल भावनात्मक मुद्दों को भुनाने की कोशिश है। महिलाओं का अपमान और भाजपा की चुप्पी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने भाजपा पर महिलाओं के अपमान को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में ऐसे मामलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। उनका कहना था कि जिन नेताओं पर महिलाओं के अपमान के आरोप लगे हैं, उन्हें संरक्षण दिया जाता है, जबकि सच्ची लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। इसे भी पढ़ें:-  इन देशों के साथ-साथ अब भारत भी एयर डिफेंस सिस्टम पर बढ़ा रहा है अपना फोकस असम और कूचबिहार से लाई गई भीड़ प्रधानमंत्री की एक जनसभा को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि उस कार्यक्रम में जो भीड़ दिखाई गई थी, वह स्थानीय नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि असम और कूचबिहार से लोगों को लाकर रैली में शामिल किया गया, ताकि जनसमर्थन का झूठा प्रदर्शन किया जा सके। विदेशों में विपक्ष रख रहा है भारत की बात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने इस बात की सराहना की कि विपक्षी दलों के नेता विदेशों में जाकर “ऑपरेशन सिंदूर” पर भारत का पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जब विपक्ष अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि को मजबूत कर रहा है, दूसरी ओर भाजपा केवल प्रचार में लगी हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) के इस बयान ने केंद्र सरकार और भाजपा की रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के नाम को राजनीति से जोड़कर इसे देश की सैन्य गरिमा के साथ खिलवाड़ बताया। यह स्पष्ट संकेत है कि 2024 के आम चुनावों की तैयारी में भाजपा और विपक्ष के बीच टकराव और तेज़ होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news CM Mamata Banerjee #MamataBanerjee #OperationSindoor #IndianPolitics #BJPvsTMC #BreakingNews #WestBengalNews

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