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असम में CJP नेता आशुतोष रांका हिरासत में, कई कार्यकर्ता भी पकड़े गए; देर रात रिहाई

गुवाहाटी: असम पुलिस ने 27 सितंबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत करीब 35 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुवाहाटी में हिरासत में लिया। ये लोग पार्टी की पहली क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक में शामिल होने वाले थे। हिरासत के बाद CJP नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे शांतिपूर्ण बैठक रोकने की कोशिश बताया। सभी हिरासत में लिए गए लोगों को रविवार रात करीब 10 बजे रिहा कर दिया गया। क्षेत्रीय बैठक से पहले हुई कार्रवाई CJP ने रविवार को गुवाहाटी में अपनी पहली Regional Volunteers’ Meeting आयोजित करने की योजना बनाई थी। बैठक पहले अथगांव के खड़गा चौधरी रोड स्थित एक निजी स्थल पर निर्धारित थी, लेकिन आयोजकों के मुताबिक बाद में कार्यक्रम की जगह बदलकर असम सचिवालय के सामने चौधरी टीला कर दी गई। बैठक शुरू होने से पहले ही पुलिस ने कई CJP नेताओं और स्वयंसेवकों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। आशुतोष रांका समेत करीब 35 लोग हिरासत में हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका के अलावा अंकित भारद्वाज, प्रेम आकाश और CJP के असम समन्वयक साहिल समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 35 लोगों को गुवाहाटी के काहिलीपाड़ा स्थित 10वीं असम पुलिस बटालियन परिसर में ले जाया गया। रांका ने हिमंत बिस्वा सरमा पर लगाया आरोप हिरासत के दौरान आशुतोष रांका ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधा। रांका ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि CJP असम के सरकारी स्कूलों, बाढ़, जमीन और काजीरंगा से जुड़े मुद्दों को उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बैठक निजी स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से होने वाली थी। ये रांका और CJP के राजनीतिक आरोप हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CJP ने पुलिस कार्रवाई को बताया गलत CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि रांका और अन्य नेताओं को शुरुआत में अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा था और वकीलों को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। दीपके ने चेतावनी दी थी कि यदि नेताओं को रिहा नहीं किया गया तो वह खुद असम पहुंचेंगे। यह पार्टी का आरोप था। हिरासत के दौरान शुरू की भूख हड़ताल CJP के मुताबिक काहिलीपाड़ा पुलिस परिसर में रखे जाने के बाद हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। पार्टी ने इसे हिरासत के विरोध में उठाया गया कदम बताया। बाहर मौजूद समर्थकों ने भी रिहाई की मांग की। असम में किन मुद्दों को उठाने की थी तैयारी? CJP नेताओं के मुताबिक संगठन असम में सरकारी स्कूलों की स्थिति, बाढ़, जमीन से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची संशोधन पर चर्चा करना चाहता था। रिपोर्ट्स के अनुसार CJP नेताओं ने हाल में राज्य के कुछ विपक्षी नेताओं से भी मुलाकात की थी और असम में संगठन के विस्तार पर बातचीत की थी। पुलिस की विस्तृत आधिकारिक सफाई नहीं आई उपलब्ध प्रमुख रिपोर्ट्स में असम पुलिस की ओर से हिरासत के लिए कोई विस्तृत सार्वजनिक कानूनी कारण नहीं बताया गया है। CJP का दावा था कि बैठक निजी जगह पर शांतिपूर्ण तरीके से होनी थी, जबकि पुलिस ने कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सीमित कर दी। इस कार्रवाई की कानूनी परिस्थितियों पर पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। रविवार रात सभी को किया गया रिहा करीब दिनभर हिरासत में रहने के बाद रविवार रात आशुतोष रांका और अन्य CJP नेताओं को छोड़ दिया गया। रांका ने सोशल मीडिया पर रिहाई की जानकारी देते हुए अपनी हिरासत को “illegal detention” कहा और बताया कि उन्होंने पुलिस से उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ने के लिए कहा, जहां से उन्हें हिरासत में लिया गया था। “Illegal” शब्द रांका का दावा है; किसी अदालत ने इस हिरासत को अवैध घोषित नहीं किया है। असम में बढ़ी राजनीतिक हलचल आशुतोष रांका और CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत के बाद असम में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। CJP इसे अपने संगठन और मुद्दों को उठाने से रोकने की कार्रवाई बता रही है। दूसरी ओर इस घटना पर राज्य सरकार या असम पुलिस की विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही हिरासत के आधिकारिक आधार को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सकेगा। source – The Indian Express / Times of India / Hindustan Times / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत की जेल से 7 ‘अमेरिकी जासूस’ रिहा? जानिए पूरा सच!

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि भारत की जेल से “7 अमेरिकी जासूसों” को रिहा कर दिया गया है। लेकिन यह दावा भ्रामक है। असल में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद सात विदेशी नागरिकों में केवल एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक हैं। उन्हें अदालत ने डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी है। किसी अदालत ने इन सातों को “अमेरिकी जासूस” घोषित नहीं किया है और NIA की जांच अभी जारी है। कौन हैं ये सात विदेशी नागरिक? NIA ने 13 मार्च 2026 को सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक—विक्टर कामिन्स्की, पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव और मैक्सिम होंचारुक—शामिल हैं। मैथ्यू को कोलकाता एयरपोर्ट से, जबकि यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। NIA ने क्या आरोप लगाए थे? NIA की शुरुआती FIR में सातों पर UAPA की धारा 18 के तहत कथित आतंकी साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग भारत के रास्ते बिना आवश्यक अनुमति के मिजोरम पहुंचे और वहां से अवैध रूप से म्यांमार गए। एजेंसी के मुताबिक उन्होंने म्यांमार के Ethnic Armed Groups को drone warfare, drone operations, assembly और jamming technology से जुड़ी ट्रेनिंग दी। क्या ये ‘अमेरिकी जासूस’ थे? नहीं, उपलब्ध रिकॉर्ड ऐसा साबित नहीं करते। सात आरोपियों में केवल मैथ्यू वैनडाइक अमेरिकी नागरिक हैं, बाकी छह यूक्रेन के नागरिक हैं। इसके अलावा NIA की चार्जशीट या अदालत के आदेश में सातों को “अमेरिकी जासूस” घोषित नहीं किया गया है। उन पर गंभीर सुरक्षा संबंधी आरोप जरूर लगे हैं, लेकिन आरोपी होना और किसी अदालत द्वारा जासूसी का दोषी ठहराया जाना अलग बातें हैं। इसलिए “भारत ने 7 अमेरिकी जासूस छोड़ दिए” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत या भ्रामक है। चार्जशीट में क्यों नहीं लगी UAPA? इस मामले में बड़ा घटनाक्रम 8 सितंबर 2026 को हुआ, जब NIA ने पहली चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। इसके बजाय Immigration and Foreigners Act, 2025 से जुड़ी धाराओं के तहत आरोप लगाए गए। NIA ने अदालत को बताया कि UAPA से जुड़े पहलुओं की आगे जांच जारी है और पर्याप्त आधार मिलने पर supplementary chargesheet दाखिल की जा सकती है। India Today ने NIA सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि जांच में उस समय तक आरोपियों द्वारा भारत के खिलाफ सीधे गतिविधियां करने का निर्णायक सबूत नहीं मिला था, हालांकि संभावित लिंक की जांच जारी रखी गई। कैसे मिली डिफॉल्ट बेल? UAPA मामले में जांच एजेंसी के पास तय अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का समय होता है। सातों आरोपियों को 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और 180 दिनों की अवधि 8 सितंबर को पूरी हुई। NIA की उस तारीख की चार्जशीट में UAPA आरोप शामिल नहीं होने के बाद अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को 18 सितंबर को डिफॉल्ट बेल दी। अदालत ने यह भी कहा कि इसी कानूनी सिद्धांत के आधार पर दूसरे सह-आरोपी भी डिफॉल्ट बेल के पात्र हैं। डिफॉल्ट बेल मिलने का मतलब आरोपी का आरोपों से बरी होना नहीं होता। इसका संबंध जांच और चार्जशीट की वैधानिक समयसीमा से है। विदेश जाने की अनुमति कैसे मिली? 24 सितंबर को दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने सातों विदेशी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने-अपने देशों में परिवार से मिलने जाने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार Article 21 से जुड़े व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है और NIA ने भी यह नहीं कहा था कि जांच पूरी करने के लिए निकट भविष्य में सातों की भारत में शारीरिक मौजूदगी जरूरी है। सातों को NIA की जांच में जरूरत पड़ने पर सहयोग करने, अपना पता, फोन नंबर और ईमेल उपलब्ध कराने जैसी शर्तों का पालन करना होगा। क्या केस खत्म हो गया है? नहीं। NIA ने मामले में कोई closure report दाखिल नहीं की है। एजेंसी ने अदालत को स्पष्ट किया है कि UAPA के तहत जांच जारी है और आगे पर्याप्त सबूत मिलने की स्थिति में supplementary chargesheet दाखिल की जा सकती है। इसलिए जेल से रिहाई या एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति को मामले में “क्लीन चिट” नहीं माना जा सकता। आखिर वायरल दावे का सच क्या है? दावा: भारत ने जेल से 7 अमेरिकी जासूसों को रिहा कर दिया। सच्चाई: सात लोगों में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक हैं। उन्हें किसी अदालत ने “जासूस” घोषित नहीं किया है। उन्हें डिफॉल्ट बेल मिली है और अदालत ने शर्तों के साथ एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है। NIA की UAPA जांच अभी जारी है। इसलिए “7 अमेरिकी जासूस रिहा” वाला दावा भ्रामक है, जबकि सात विदेशी आरोपियों को तिहाड़ जेल से कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत मिलने की बात सही है। source – The Indian Express / India Today / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार में बाढ़ के बीच नीदरलैंड्स में मैथिली ठाकुर का कार्यक्रम, उठे सवाल

पटना: बिहार के कई जिलों में बाढ़ और भारी बारिश का खतरा बने रहने के बीच अलीनगर से BJP विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर के नीदरलैंड्स दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। मैथिली ठाकुर नीदरलैंड्स में आयोजित Eindeloos India Festival में सांस्कृतिक प्रस्तुति देने पहुंची हैं। आलोचक एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि मैथिली पहले ही कह चुकी हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्र अलीनगर में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है और वह अपने क्षेत्र के लोगों के संपर्क में हैं। नीदरलैंड्स में सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुईं मैथिली मैथिली ठाकुर इन दिनों नीदरलैंड्स के दौरे पर हैं, जहां वह Eindeloos India Festival में बिहार की लोकसंस्कृति और संगीत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। नीदरलैंड्स स्थित इंडिया हाउस में भारत के राजदूत कुमार तुहिन ने मैथिली ठाकुर और बिहार से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इस दौरान मैथिली ने पारंपरिक ‘चैती’ लोकगीत भी प्रस्तुत किया। बिहार में बाढ़ और भारी बारिश का खतरा जारी दूसरी ओर बिहार सितंबर में गंभीर बाढ़ की स्थिति से गुजर चुका है। 11 सितंबर तक राज्य के 15 जिलों में करीब 46.88 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे। गंगा और उसकी सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं। 26 सितंबर को नेपाल के तराई क्षेत्र में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए बिहार प्रशासन ने फिर 17 संवेदनशील जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और NDRF-SDRF को अलर्ट मोड पर रखा। सोशल मीडिया पर क्यों उठ रहे सवाल? मैथिली ठाकुर के नीदरलैंड्स दौरे की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि राज्य में बाढ़ और बारिश से जुड़ी चुनौतियों के बीच एक विधायक का विदेश में सांस्कृतिक कार्यक्रम करना कितना उचित है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में इसे जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारियों से जोड़कर आलोचना की गई, जबकि दूसरे यूजर्स ने कहा कि मैथिली कलाकार भी हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना उनकी पेशेवर भूमिका का हिस्सा है। ये सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं हैं और इन्हें व्यापक जनमत का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। पहले भी बाढ़ को लेकर ट्रोल हुई थीं मैथिली नीदरलैंड्स दौरे से पहले भी मैथिली ठाकुर को बिहार में बाढ़ के दौरान मुंबई में Rolls-Royce में नजर आने को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके जवाब में मैथिली ठाकुर ने कहा था कि “भगवान की कृपा से मेरे क्षेत्र में बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है।” उन्होंने बताया था कि 17 सितंबर को वह अपने क्षेत्र में गई थीं और लोगों से मुलाकात कर स्थानीय स्थिति की जानकारी ली थी। अलीनगर की विधायक हैं मैथिली ठाकुर मैथिली ठाकुर दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं। दरभंगा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर उन्हें अलीनगर की मौजूदा विधायक के रूप में दर्ज किया गया है। इसी वजह से उनकी गायिका और विधायक—दोनों भूमिकाओं को लेकर अक्सर सार्वजनिक चर्चा होती रही है। उन्होंने इससे पहले भी कहा है कि उनके लिए अपने क्षेत्र के लोगों से मिलना और उनकी समस्याएं समझना उनकी राजनीतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। मैथिली ने विदेश में बिहार की संस्कृति को किया प्रस्तुत नीदरलैंड्स के कार्यक्रम में मैथिली ठाकुर ने बिहार की पारंपरिक लोकसंगीत शैली को पेश किया। उन्होंने चैती गीत के जरिए बिहार के ग्रामीण जीवन, पारिवारिक रिश्तों और लोक परंपराओं के बारे में भी दर्शकों को बताया। आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनकी प्रस्तुति की सराहना की। विवाद का केंद्र- कलाकार और जनप्रतिनिधि की दोहरी भूमिका मैथिली ठाकुर को लेकर चल रही बहस का मुख्य मुद्दा उनकी दोहरी भूमिका है। वह एक स्थापित लोकगायिका होने के साथ-साथ निर्वाचित विधायक भी हैं। आलोचक चाहते हैं कि प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में जनप्रतिनिधि की सार्वजनिक मौजूदगी अधिक दिखे, जबकि मैथिली का पक्ष है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है और वह क्षेत्र के लोगों से संपर्क में हैं। उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नीदरलैंड्स दौरे के कारण उनके क्षेत्र में राहत या प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए। फिलहाल मैथिली ठाकुर का नीदरलैंड्स दौरा सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ-साथ राजनीतिक जिम्मेदारियों और कलाकार के पेशेवर जीवन के बीच संतुलन को लेकर नई बहस का विषय बना हुआ है। source – Dainik Jagran / Navbharat Times / India Today / Darbhanga District Administration जय राष्ट्र न्यूज़

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‘सुगम परिवहन’ पर विवाद, पुरानी बसों को लेकर उठे सवाल! नई रंगत में पुरानी बसें चलाने का आरोप

भोपाल: मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद शुरू हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा लॉन्च होने के एक दिन बाद ही विवादों में आ गई है। 25 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से 351 बसों को हरी झंडी दिखाई थी। इनमें 180 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जबकि 171 ऐसी बसें हैं जो पहले से अलग-अलग शहरों में सिटी बस सेवा के तहत चल रही थीं। इन्हीं पुरानी बसों को नए रंग-रूप में शामिल किए जाने को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद सेवा शुरू होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ बसों के वीडियो सामने आए। इनमें बसों पर लगाई गई नई रंगीन रेडियम स्ट्रिप उखड़ती दिखाई दे रही है, जबकि कुछ वीडियो में बसों के अंदरूनी हिस्सों की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या पहले से चल रही पुरानी सिटी बसों को केवल रंग-रोगन कर नई योजना के तहत पेश किया गया है। 351 में से 171 बसें पहले से थीं संचालन में रिपोर्ट्स के अनुसार लॉन्च की गई 351 बसों में 180 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें पीएम ई-बस सेवा से जुड़ी हैं, जबकि बाकी 171 बसें पहले से शहरी क्षेत्रों में संचालित सिटी बसें हैं। नई व्यवस्था में इन बसों को एमपी यात्री परिवहन कंपनी के तहत लाकर एक समान branding और रंग देने का काम किया गया है। कांग्रेस ने बसों की हालत पर उठाए सवाल मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर बस की बाहरी परत उखड़ने का वीडियो शेयर करते हुए सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुरानी बसों को नया रंग देकर योजना के तहत उतारा गया है और उनकी वास्तविक स्थिति, फिटनेस तथा यात्रियों की सुरक्षा की जांच होनी चाहिए। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्ट्स में ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि सभी पुरानी बसें असुरक्षित या अनफिट हैं। बसों की उम्र और मेंटेनेंस भी चर्चा में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि योजना में शामिल पुरानी डीजल बसों में कई लगभग 7 से 8 वर्ष पुरानी हैं और पहले भी उनके खराब होने या रखरखाव से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ बसों की सीट, हैंडल, ड्राइवर एरिया, CCTV और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि प्रत्येक बस की तकनीकी फिटनेस से जुड़ा विस्तृत सरकारी ऑडिट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। सरकार का उद्देश्य क्या है? राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का उद्देश्य गांवों और शहरों के बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को इंटरसिटी और इंट्रासिटी बस सेवाओं से जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य पहले साल करीब 1,500 और 2031 तक 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करना है। बसों में GPS और पैनिक बटन की भी योजना सरकार के अनुसार नई व्यवस्था में बसों की निगरानी के लिए GPS, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग, CCTV और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक Command and Control Centre के जरिए बसों की लोकेशन और समय पर भी निगरानी रखने की योजना है। पुरानी बसों को नया रंग क्यों दिया गया? रिपोर्ट्स के मुताबिक पुरानी सिटी बसें पहले अलग-अलग रंग और स्थानीय व्यवस्थाओं के तहत संचालित होती थीं। नई सेवा में उन्हें एक समान पहचान देने के लिए नया रंग और branding दी गई। भोपाल स्मार्ट सिटी से जुड़ी अधिकारी अंजू अरुण कुमार के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि बसों को एकरूपता देने के लिए संबंधित कंपनी ने रंग और branding का काम किया है। अब फिटनेस और सुरक्षा पर जवाब का इंतजार विवाद का मुख्य सवाल यह नहीं है कि कुछ बसें पहले से चल रही थीं, बल्कि यह है कि नई व्यवस्था में शामिल करने से पहले उनकी fitness, maintenance और safety standards की जांच किस स्तर पर की गई। फिलहाल वायरल वीडियो और कांग्रेस के आरोपों के बाद यह मुद्दा चर्चा में है। सरकार की ओर से पुरानी बसों की तकनीकी स्थिति पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही तस्वीर और साफ होगी। source – Akashvani News / Dainik Jagran / Free Press Journal / Hindusthan Samachar जय राष्ट्र न्यूज़

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गोरखपुर में भारी बारिश से जलभराव, रवि किशन ने किया निरीक्षण; डेढ़ घंटे में 150 MM बारिश से कई इलाके डूबे

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव हो गया। नगर निगम के अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम के मुताबिक करीब डेढ़ घंटे में 150 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कई सड़कों, बाजारों, घरों और दुकानों में पानी भर गया। स्थिति का जायजा लेने के लिए गोरखपुर सांसद रवि किशन ने महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त अजय जैन और अन्य अधिकारियों के साथ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया तथा पानी जल्द निकालने के निर्देश दिए। डेढ़ घंटे की बारिश से शहर हुआ पानी-पानी 26 सितंबर को गोरखपुर में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम के ऑटोमेटिक रेन गेज ने महज डेढ़ घंटे में करीब 150 MM बारिश दर्ज की। तेज बारिश के बाद शहर के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों में जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया और कई जगह नाले ओवरफ्लो हो गए। घरों और दुकानों में घुसा पानी बारिश के कारण दाऊदपुर, इंदिरा नगर, तारामंडल, तिवारीपुर, इलाहीबाग, विजय चौक, धर्मशाला बाजार, बिलंदपुर और गोरखनाथ समेत कई इलाकों में पानी भर गया। कुछ निचले इलाकों में घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया और लोगों का घरेलू सामान पानी में तैरने लगा। कई परिवारों को ऊंचे स्थानों या घरों की ऊपरी मंजिलों पर जाना पड़ा। जिला अस्पताल की OPD तक पहुंचा पानी भारी बारिश का असर सरकारी संस्थानों पर भी दिखाई दिया। जिला अस्पताल की OPD और डॉक्टरों के चेंबर तक बारिश और नालियों का पानी पहुंच गया। महिला अस्पताल, नगर निगम परिसर, आकाशवाणी परिसर और कई सरकारी कार्यालयों के आसपास भी जलभराव दर्ज किया गया। मरीजों और उनके परिजनों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। रवि किशन ने किया जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण गोरखपुर के BJP सांसद रवि किशन भी जलभराव की स्थिति देखने के लिए सड़क पर उतरे। उन्होंने महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त अजय जैन और नगर निगम के अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रवि किशन ने अधिकारियों से जलनिकासी के लिए पंप चलाने और प्रभावित क्षेत्रों से जल्द से जल्द पानी निकालने को कहा। करीब 3 हजार परिवार प्रभावित अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक लालडिग्गी, घंटाघर, रायगंज, बिलंदपुर, कालेपुर और आसपास के इलाकों में जलभराव के कारण करीब 3,000 से अधिक परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह सड़क और नाली का अंतर दिखाई देना बंद हो गया। पानी में वाहन बंद होने से लोगों को घुटनों तक पानी में पैदल चलना पड़ा। बाजारों में भी भारी नुकसान महेवा गल्ला मंडी, साहबगंज और राप्ती कॉम्प्लेक्स समेत कई कारोबारी इलाकों में दुकानों के अंदर पानी घुस गया। महेवा मंडी के व्यापारियों ने करीब ₹50 लाख से अधिक के सामान के नुकसान का दावा किया है। राप्ती कॉम्प्लेक्स की निचली मंजिल की करीब 15 दुकानों में भी पानी भरने की बात सामने आई। ये नुकसान के आंकड़े व्यापारियों के शुरुआती दावे हैं और अंतिम प्रशासनिक आकलन अलग हो सकता है। जलभराव पर रवि किशन और BJP पार्षद में नोकझोंक बारिश के बाद जलनिकासी को लेकर सांसद रवि किशन और BJP पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी के बीच फोन पर हुई बातचीत भी चर्चा में आ गई। वायरल वीडियो में दोनों तरकुलानी और रामगढ़ताल क्षेत्र से पानी निकालने को लेकर बात करते सुनाई देते हैं। बातचीत के दौरान राजनीतिक तंज भी हुए। हालांकि वायरल वीडियो के पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है। कमिश्नर ने भी परखी जलनिकासी व्यवस्था भारी बारिश को देखते हुए मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने महापौर और अन्य अधिकारियों के साथ सुमेर सागर नाला, धर्मशाला ब्रिज, राप्ती कॉम्प्लेक्स और अन्य संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण किया। अधिकारियों को अगले तीन से चार दिनों तक अलर्ट रहने, suction machines तैयार रखने और जलभराव की सूचना मिलने पर तत्काल टीम भेजने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम की टीमें जलनिकासी में जुटीं नगर आयुक्त अजय जैन ने डोमिनगढ़, इलाहीबाग और लालडिग्गी पंपिंग स्टेशन समेत कई जगहों का निरीक्षण किया। सभी पंपिंग स्टेशनों को लगातार चलाने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पंप लगाने के निर्देश दिए गए। फिलहाल शहर के निचले और जलभराव वाले इलाकों की निगरानी जारी है। प्रशासन ने बारिश के दौरान लोगों से सावधानी बरतने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की अपील की है। source – Amar Ujala / Dainik Jagran / Hindustan / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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LPU में छात्रों का हंगामा, Jalandhar-Phagwara हाईवे जाम; कथित रेप मामले को लेकर रातभर प्रदर्शन

फगवाड़ा: पंजाब के Lovely Professional University (LPU) में एक छात्रा के साथ कथित रेप से जुड़ी सूचना के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। रविवार तड़के बड़ी संख्या में छात्र कैंपस से बाहर निकले, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे पर धरना देकर यातायात रोक दिया। पुलिस ने शुरुआत में कहा था कि कथित घटना की पुष्टि करने वाली कोई शिकायत नहीं मिली थी, लेकिन बाद में जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला ने बताया कि छात्रों के बयान के आधार पर रेप का मामला दर्ज किया जा रहा है। रात करीब 2 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक LPU कैंपस में तनाव शनिवार देर रात से बढ़ना शुरू हुआ। सोशल मीडिया और छात्रों के बीच एक संदेश फैल रहा था कि विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न हुआ है। The Tribune के मुताबिक प्रदर्शन सबसे पहले गर्ल्स हॉस्टल के आसपास शुरू हुआ और इसके बाद अलग-अलग हॉस्टलों के छात्र भी इसमें शामिल होते गए। तड़के करीब 4 बजे तक प्रदर्शनकारी यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से निकलकर नेशनल हाईवे पर पहुंच गए। कैंपस में तोड़फोड़ और आगजनी वायरल वीडियो में छात्रों की भीड़ कैंपस के अंदर खिड़कियों के शीशे, गमले और अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाती दिखाई दी। कुछ वस्तुओं में आग लगाए जाने की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक विश्वविद्यालय की संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और इसके बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Jalandhar-Phagwara हाईवे पर लगा लंबा जाम प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के बाहर जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे को भी ब्लॉक कर दिया। इससे हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कपूरथला पुलिस की बड़ी टीम मौके पर पहुंची और छात्रों से बातचीत शुरू की गई। पहले पुलिस ने कहा- शिकायत नहीं मिली कपूरथला के SSP गौरव तूरा ने शुरुआती बयान में कहा था कि पुलिस को कथित रेप की कोई औपचारिक शिकायत या उसकी पुष्टि करने वाला सबूत नहीं मिला था। उन्होंने बताया कि वायरल संदेशों के बाद छात्र बड़ी संख्या में जमा हो गए थे और विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर उनकी कुछ शिकायतें थीं। पुलिस ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति शांत करने का प्रयास किया। DIG बोले- छात्रों के बयान पर दर्ज हो रहा केस बाद में जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला ने कहा कि छात्रों का दावा है कि करीब तीन दिन पहले एक छात्रा के साथ कथित रेप हुआ था और इसके बाद वह अपने घर चली गई। DIG के मुताबिक छात्रों के बयान के आधार पर रेप का मामला दर्ज किया जा रहा है। हालांकि कथित पीड़िता की पहचान, घटना की परिस्थितियां और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। छात्र ने लगाया निर्माण मजदूर पर आरोप प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने दावा किया कि कथित घटना में एक निर्माण मजदूर शामिल था। उसी छात्र ने यह भी दावा किया कि पीड़िता को घर भेज दिया गया और बाद में उसके बारे में आत्महत्या की अफवाह फैली। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने अभी तक कथित पीड़िता के बारे में सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई पुष्टि नहीं की है। LPU ने अफवाहों को बताया ‘झूठा और भ्रामक’ Lovely Professional University ने छात्रों के लिए जारी संदेश में सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं को “false and misleading” बताया। विश्वविद्यालय ने छात्रों से किसी भी तरह की हिंसा या अफवाह में शामिल न होने और हॉस्टल या अपने कमरों में सुरक्षित रहने की अपील की। LPU प्रशासन का कहना है कि कैंपस सुरक्षित है। बाहर के लोगों के शामिल होने का भी दावा एक प्रदर्शनकारी छात्र ने वीडियो में दावा किया कि शुरुआत में विरोध शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में विश्वविद्यालय का गेट खुलने के बाद कुछ बाहरी लोग परिसर में घुस आए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। यह प्रदर्शनकारी छात्र का दावा है। पुलिस ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि हिंसा में कितने बाहरी लोग शामिल थे या उनकी पहचान हो चुकी है। पुलिस की भारी तैनाती, स्थिति नियंत्रण में घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर और हाईवे के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। कपूरथला पुलिस के मुताबिक छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई और स्थिति को धीरे-धीरे नियंत्रण में लाया गया। मामले में अब पुलिस का मुख्य फोकस कथित यौन अपराध से जुड़े आरोपों की जांच, हिंसा में शामिल लोगों की पहचान और विश्वविद्यालय संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करने पर है। source – NDTV / The Indian Express / The Tribune / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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लखनऊ में आफत की बारिश, सितंबर का पुराना रिकॉर्ड टूटा! हनुमान सेतु पर 200 MM से ज्यादा वर्षा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगातार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। 26 सितंबर को हनुमान सेतु क्षेत्र में करीब 200.8 से 201.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसे स्थानीय मौसम रिकॉर्ड में सितंबर की सबसे भारी बारिश बताया गया है। वहीं अमौसी स्थित मुख्य मौसम केंद्र पर 24 घंटे में 135.8 मिमी बारिश दर्ज हुई। शहर के कई हिस्सों में जलभराव, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। हनुमान सेतु इलाके में 200 MM से ज्यादा बारिश क्षेत्रीय मौसम आंकड़ों के मुताबिक शनिवार को हनुमान सेतु के आसपास 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। दैनिक जागरण ने इसे लखनऊ में सितंबर महीने के लिए मौसम विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड में सबसे अधिक बारिश बताया है। हालांकि शहर के अलग-अलग वर्षामापी केंद्रों पर आंकड़े अलग रहे। अमौसी मौसम केंद्र ने 135.8 मिमी और अलीगंज कंट्रोल रूम ने 152.2 मिमी बारिश दर्ज की। 2022 के बाद अमौसी में सबसे ज्यादा बारिश अमौसी स्थित लखनऊ के मुख्य मौसम केंद्र पर दर्ज 135.8 मिमी बारिश सितंबर 2022 के बाद सबसे अधिक एक-दिवसीय वर्षा रही। 16 सितंबर 2022 को यहां 160.3 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। इस मॉनसून सीजन में भी यह लखनऊ के मुख्य मौसम केंद्र पर एक दिन में हुई सबसे अधिक बारिश है। शहर के कई इलाके पानी में डूबे लगातार बारिश से जानकीपुरम, आशियाना, गोमती नगर, इंदिरा नगर, हजरतगंज, अलीगंज, चारबाग, चौक और आलमबाग समेत कई इलाकों में जलभराव हुआ। कुछ स्थानों पर सड़क पर घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया। जानकीपुरम के कुछ हिस्सों में दो फीट तक पानी जमा होने की खबर है। कई जगह सड़क धंसने और पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। स्कूल-कॉलेज रहे बंद भारी बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए लखनऊ प्रशासन ने शनिवार को प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक सभी स्कूलों में शिक्षण कार्य बंद रखने का आदेश दिया था। खराब मौसम के चलते स्कूलों के साथ कॉलेज और विश्वविद्यालयों की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। बिजली व्यवस्था भी हुई प्रभावित तेज बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली नेटवर्क को नुकसान पहुंचा। लखनऊ समेत राज्य में बड़ी संख्या में 11 KV feeders और substations के बंद होने की सूचना मिली। UPPCL ने अधिकारियों को खराबी जल्द ठीक करने और मरम्मत टीमों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने का निर्देश दिया। 25 डिग्री तक गिरा दिन का तापमान लगातार बादल और बारिश के कारण लखनऊ का अधिकतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो सामान्य से करीब आठ डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 20.6 डिग्री दर्ज किया गया, जिसे सितंबर में पिछले करीब 12 वर्षों का सबसे कम न्यूनतम तापमान बताया गया है। बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से हुई भारी बारिश मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारी बारिश के पीछे बंगाल की खाड़ी से आया मौसमी सिस्टम प्रमुख कारण रहा। इस सिस्टम से बड़ी मात्रा में नमी उत्तर प्रदेश की ओर पहुंची और कई जिलों में लगातार भारी बारिश हुई। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अलर्ट 27 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई। लखनऊ समेत आसपास के कई जिलों को भारी बारिश वाले क्षेत्र में रखा गया, जबकि कुछ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया। तेज हवाएं भी चलने का अनुमान जताया गया। मौसम विभाग के मुताबिक 28 सितंबर से बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना है और अक्टूबर के शुरुआती दिनों में प्रदेश से मॉनसून की वापसी की परिस्थितियां बन सकती हैं। बारिश ने ठप की रोजमर्रा की जिंदगी दो दिनों से अधिक समय तक चली बारिश ने राजधानी में ट्रैफिक, स्कूल, बिजली और रोजमर्रा की सेवाओं पर बड़ा असर डाला। कई इलाकों में लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाए, जबकि कैब, डिलीवरी और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुईं। फिलहाल प्रशासन जलभराव वाले इलाकों की निगरानी कर रहा है और लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। source – India Meteorological Department / Dainik Jagran / Hindustan Times / Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, बोले- ‘पक्षपात से BJP को मिला अनुचित फायदा’

मुजफ्फरपुर: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के कथित “पक्षपातपूर्ण रवैये” से भारतीय जनता पार्टी को चुनावों में अनुचित लाभ मिला है। किशोर ने चुनावी खर्च, प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए। ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। SIR विवाद के बीच आया प्रशांत किशोर का बयान प्रशांत किशोर ने 25 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाए। उनसे हाल में सामने आई उस रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया था, जिसमें Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग टिप्पणियों और आपत्तियों का दावा किया गया था। ‘2021 में ही उठाया था आयोग की निष्पक्षता का सवाल’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर पहली बार सवाल अब नहीं उठाया है। उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय भी BJP को चुनाव आयोग के कथित पक्षपात का फायदा मिला था। किशोर उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होते तो पश्चिम बंगाल में BJP का प्रदर्शन अलग हो सकता था। यह किशोर का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी आधिकारिक जांच ने स्थापित नहीं किया है। बांकीपुर उपचुनाव का भी दिया उदाहरण किशोर ने हाल के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उदाहरण भी दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग और BJP द्वारा बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च की अनदेखी की गई। किशोर ने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियां न होतीं तो उनकी जीत का अंतर और बड़ा होता। इससे पहले उन्होंने पटना के SSP की कथित “पक्षपातपूर्ण भूमिका” को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत भी दर्ज कराई थी। पैसे, नौकरशाही और वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके अनुसार चुनाव प्रक्रिया केवल एक स्तर पर नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर प्रभावित हो रही है। उन्होंने चुनाव में धन के इस्तेमाल, सरकारी अधिकारियों की भूमिका और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीबी मुकाबलों में आयोग का कथित पक्षपात परिणाम पर असर डाल सकता है। इन आरोपों को चुनाव आयोग या किसी अदालत ने प्रमाणित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दिया बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग में कथित समस्याएं केवल मौजूदा CEC के कार्यकाल से शुरू नहीं हुई हैं। उन्होंने पूर्व चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों और पद छोड़ने के बाद मिली जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ quid pro quo का उनका आरोप प्रमाणित तथ्य नहीं है। चुनाव आयोग में कथित मतभेद की रिपोर्ट क्या है? The Indian Express की जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में SIR समेत विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर कई लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों और कुछ NDA सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी? चुनाव आयोग ने कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और लिखित टिप्पणियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार SIR से संबंधित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से थे। SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पूछ चुका है सवाल दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को “logical discrepancy” से जुड़े नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने कुछ नोटिसों के लगभग “mechanical” तरीके से जारी होने पर चिंता जताते हुए आयोग से उनकी प्रक्रिया और आधार समझाने को कहा। चुनाव आयोग पर राजनीतिक बहस तेज प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। एक ओर प्रशांत किशोर और विपक्ष के कई नेता आयोग पर निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून और संस्थागत नियमों के तहत संचालित हो रही हैं। फिलहाल किशोर के आरोप राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। source – PTI / The Indian Express / Times of India / The Federal जय राष्ट्र न्यूज़

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सोनम वांगचुक का गंभीर आरोप, अमित शाह के इस्तीफे की मांग

लेह: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा और पुलिस फायरिंग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की है। घटना की पहली बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर बिना उचित आदेश के गोली चलाई गई थी। उन्होंने इस मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की। ये आरोप वांगचुक के हैं; पुलिस ने कार्यक्रम से जुड़े कुछ आरोपों को “झूठा और भ्रामक” बताया है। 24 सितंबर की बरसी पर उठाई इस्तीफे की मांग वांगचुक ने 24 सितंबर 2026 को लेह में आयोजित स्मृति कार्यक्रम में कहा कि पिछले साल हुई हिंसा में चार लोगों की मौत के लिए राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए। यह उनकी राजनीतिक मांग है; किसी न्यायिक संस्था ने शाह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की है। पुलिस फायरिंग को लेकर लगाए गंभीर आरोप सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि 2025 की हिंसा के दौरान सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया और गोलियां लोगों के शरीर के ऊपरी हिस्सों में लगीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि फायरिंग के लिए स्पष्ट आदेश नहीं था। इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, क्योंकि जांच रिपोर्ट अब तक जारी नहीं की गई है। न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग 24 सितंबर 2025 की घटना के बाद केंद्र सरकार ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया था। लद्दाख प्रशासन के आधिकारिक नोटिस के मुताबिक आयोग को हिंसा की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत की जांच का जिम्मा दिया गया था। आयोग ने अक्टूबर 2025 में कार्यवाही शुरू की थी। वांगचुक का कहना है कि एक साल बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से लोगों में अविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट जारी नहीं की गई तो स्वतंत्र “People’s Tribunal” बनाने पर विचार किया जाएगा। अपनी सुरक्षा को लेकर भी जताई आशंका वांगचुक ने कार्यक्रम में अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका जताई। उन्होंने दावा किया कि उन्हें ऐसे संदेश मिल रहे हैं कि उनका “एनकाउंटर” हो सकता है। इस आशंका के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसे वांगचुक द्वारा व्यक्त की गई चिंता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पिछले साल चार लोगों की हुई थी मौत 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया था। पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। इसके बाद 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को National Security Act के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में उनकी हिरासत समाप्त कर दी थी। लद्दाख पुलिस ने कुछ आरोप किए खारिज स्मृति कार्यक्रम के दौरान वांगचुक ने आरोप लगाया कि भारी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के कारण लोग कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके। लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को “false, baseless and misleading” बताया। पुलिस का कहना था कि किसी व्यक्ति को कार्यक्रम में शामिल होने से नहीं रोका गया और बैरिकेडिंग केवल यातायात तथा भीड़ प्रबंधन के लिए की गई थी। लद्दाख की मांगों को लेकर जारी है गतिरोध लद्दाख के कई संगठन लंबे समय से पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय भूमि और रोजगार की सुरक्षा तथा संवैधानिक संरक्षण की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन प्रमुख मांगों पर अंतिम समाधान अभी सामने नहीं आया है। वांगचुक का ताजा बयान इसी व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक विवाद के बीच आया है। source – India Today / Moneycontrol / Ladakh Administration / PIB / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई में 14 फीट से ऊंची झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई! 39 हजार से ज्यादा निर्माण रडार पर

मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर की झोपड़पट्टियों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। यह कार्रवाई 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी। BMC के मुताबिक पूरे मुंबई में ऐसे 39,111 ढांचे चिन्हित किए गए हैं। कार्रवाई के ऐलान के बाद झोपड़ीवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध भी शुरू हो गया है। 1 अक्टूबर से शुरू होगा तीन महीने का अभियान BMC ने 19 सितंबर को घोषणा की कि झोपड़पट्टी क्षेत्रों में किए गए अनधिकृत अतिरिक्त निर्माण और 14 फीट या उससे अधिक ऊंचे ढांचों के खिलाफ विशेष कार्रवाई शुरू की जाएगी। महानगरपालिका ने प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे अनधिकृत हिस्से खुद हटा लें। ऐसा नहीं करने पर नागरिक निकाय की टीम कार्रवाई करेगी। यह अभियान 31 दिसंबर तक जारी रहने वाला है। 39,111 निर्माणों की पहचान BMC के आंकड़ों के मुताबिक शहर और उपनगरों में कुल 39,111 ऐसी झोपड़ी संरचनाएं चिन्हित की गई हैं जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। इनमें लगभग 3,348 संरचनाएं मुंबई शहर, 4,536 पश्चिमी उपनगरों और 31,227 पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं। BMC के अनुसार मुंबई में कुल करीब 2.23 लाख झोपड़ी संरचनाएं दर्ज हैं। 14 फीट की सीमा पर उठे सवाल BMC के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि कार्रवाई के लिए 14 फीट की ऊंचाई को ही आधार क्यों बनाया गया। 24 सितंबर को BMC की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में अलग-अलग दलों के पार्षदों ने प्रशासन से इस सीमा का आधार स्पष्ट करने को कहा। कई सदस्यों ने यह भी सवाल किया कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले निर्वाचित प्रतिनिधियों से चर्चा क्यों नहीं की गई। पुनर्वास के बिना कार्रवाई का विरोध समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि इससे हजारों परिवारों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि किसी भी तरह की तोड़फोड़ से पहले प्रभावित लोगों के पुनर्वास की स्पष्ट योजना बनाई जाए। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने भी “पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई” की मांग की है। ये संबंधित नेताओं के राजनीतिक रुख हैं। BJP पार्षद ने भी नोटिस रोकने की मांग की BMC के फैसले पर विरोध केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। BJP पार्षद और BMC हाउस के नेता गणेश खनकर ने भी नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर कार्रवाई और नोटिस प्रक्रिया रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि झोपड़पट्टियों में बड़ी आबादी रहती है और किसी भी कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास व वैकल्पिक आवास को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। कानूनी नोटिस भी भेजा गया गोवंडी के New Sangam Welfare Society की ओर से BMC कमिश्नर, SRA, MMRDA और महाराष्ट्र सरकार के हाउसिंग विभाग को कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में कार्रवाई की प्रक्रिया और प्रभावित निवासियों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रईस शेख का दावा है कि इस अभियान से लगभग 34 हजार निवासियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह संख्या उनका दावा है, BMC का आधिकारिक प्रभावित-जनसंख्या आंकड़ा नहीं। कुछ इलाकों में नोटिस भेजे जाने शुरू मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार BMC ने कुछ झोपड़ी धारकों को कार्रवाई से जुड़े नोटिस जारी करना भी शुरू कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ कोलीवाड़ा और गांवठाण क्षेत्रों में भी नोटिस मिलने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी है। क्यों शुरू की गई कार्रवाई? BMC का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य झोपड़पट्टी क्षेत्रों में किए गए अनधिकृत अतिरिक्त निर्माणों को हटाना और सुरक्षा जोखिम कम करना है। हाल में कुर्ला समेत कुछ पहाड़ी और भूस्खलन-प्रभावित इलाकों में जोखिम सामने आने के बाद प्रशासन ने ऐसी ऊंची और अनधिकृत संरचनाओं पर कार्रवाई की जरूरत बताई है। कार्रवाई से पहले बढ़ा सियासी और कानूनी दबाव अभियान शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन इससे पहले ही BMC पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बढ़ गया है। जहां महानगरपालिका इसे सुरक्षा और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, वहीं कई पार्षद और नेता पुनर्वास, 14 फीट की सीमा के आधार और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि BMC 1 अक्टूबर से तय योजना के मुताबिक अभियान शुरू करती है या विरोध के बाद इसमें कोई बदलाव किया जाता है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Mid-Day जय राष्ट्र न्यूज़

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