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जमुई मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पुलिस मुठभेड़ पर उठे सवाल

पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले में मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में नंदन के पैर में गोली लगी, जबकि उसका साथी हरेराम यादव भागने की कोशिश में घायल हुआ। हालांकि अब इस मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर आरोपी के परिवार और ABVP ने सवाल उठाए हैं और पारदर्शी जांच की मांग की है। 19 सितंबर की घटना के बाद वायरल हुआ था वीडियो मामला 19 सितंबर 2026 का है। पुलिस के मुताबिक जमुई में दो नाबालिग छात्र-छात्रा को कुछ युवकों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और कथित छेड़छाड़ की थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया और आरोपियों की पहचान शुरू की। मामले की जांच के लिए महिला अधिकारी के नेतृत्व में SIT भी गठित की गई। नंदन यादव के पैर में लगी गोली 22 सितंबर को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव और हरेराम यादव को गिरफ्तार किया। मुंगेर रेंज के DIG राकेश कुमार के मुताबिक नंदन यादव के पैर में गोली लगी, जबकि हरेराम यादव भागने की कोशिश के दौरान घायल हुआ। दोनों को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने क्या बताई मुठभेड़ की कहानी? पुलिस के अनुसार नंदन यादव को पकड़ने के दौरान उसने कथित तौर पर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लगी। हालांकि मुठभेड़ के घटनाक्रम और बरामद हथियार को लेकर बाद में सवाल उठने शुरू हो गए। ABVP ने पूछा- हथियार कहां है? अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पुलिस की मुठभेड़ की कहानी पर कई सवाल उठाए हैं। ABVP नेताओं ने पूछा कि यदि वास्तव में आरोपी और पुलिस के बीच गोलीबारी हुई थी तो घटनास्थल से हथियार की आधिकारिक बरामदगी क्यों नहीं दिखाई गई। संगठन ने घटनास्थल की बैरिकेडिंग, साक्ष्यों के संरक्षण और गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हरेराम की चोट को लेकर भी उठे सवाल ABVP ने हरेराम यादव की चोट को लेकर भी पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में उसके पैर में गंभीर चोट या फ्रैक्चर होने की बात सामने आई थी। बाद में उसकी अदालत में पेशी से जुड़े वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि यदि चोट इतनी गंभीर थी तो वह अगले दिन सामान्य रूप से कैसे चल रहा था। हालांकि Amar Ujala की पड़ताल के मुताबिक सोशल मीडिया पर नंदन और हरेराम की चोटों को लेकर भ्रम भी फैला। पुलिस का कहना है कि गोली नंदन यादव को लगी थी, जबकि हरेराम को भागते समय चोट आई थी और उसके पैर टूटने की बात सही नहीं थी। आरोपी की मां ने लगाया ‘फर्जी एनकाउंटर’ का आरोप नंदन यादव की मां ने बेटे की घटना में भूमिका को गलत बताते हुए नहीं बचाया, लेकिन पुलिस मुठभेड़ पर सवाल जरूर उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने नंदन को पकड़ने के बाद उसके पैर में गोली मारी और इसे मुठभेड़ बताया। यह परिवार का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अपने बयान में इसे गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ बता रही है। अस्पताल में रखने के तरीके पर भी विवाद 26 सितंबर को यह सवाल भी उठा कि नंदन यादव को अस्पताल के सामान्य कैदी वार्ड के बजाय एक अलग आइसोलेशन वार्ड में क्यों रखा गया। अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि नंदन फिलहाल मरीज के रूप में भर्ती है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कैदी वार्ड से जुड़ी व्यवस्था लागू होगी। कई आरोपी हिरासत में पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो, वाहन नंबर और डिजिटल सबूतों के जरिए आरोपियों की पहचान की गई। इसके साथ ही पीड़ित नाबालिगों की पहचान उजागर करने वाला वीडियो शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है। मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग जमुई की मूल घटना को लेकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग व्यापक रही है, लेकिन इसके साथ पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी बहस शुरू हो गई है। एक तरफ पुलिस का दावा है कि आरोपी ने भागने और फायरिंग की कोशिश की, जबकि दूसरी ओर परिवार और ABVP मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इन सवालों से पुलिस मुठभेड़ के फर्जी होने की पुष्टि नहीं होती और अंतिम निष्कर्ष किसी स्वतंत्र या आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। source – Hindustan Times / Dainik Jagran / Times Now Navbharat / Amar Ujala / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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तेलंगाना में तूफान का कहर! पेड़ उखड़े, छतों की चादरें उड़ीं

हैदराबाद: तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में तेज हवाओं, धूल और बारिश ने अचानक तबाही मचा दी। बुधवार शाम मोरमपल्ली बंजारा गांव में इतनी तेज हवाएं चलीं कि कई पेड़ उखड़ गए, घरों की छतों पर लगी टिन की चादरें उड़ गईं और सड़कों पर मलबा बिखर गया। स्थानीय लोगों ने हवाओं को ‘बवंडर जैसा’ बताया, हालांकि अधिकारियों ने इसे tornado घोषित नहीं किया है। अचानक अंधेरा छाया, फिर चलीं तेज हवाएं घटना 23 सितंबर 2026 की शाम भद्राद्री कोठागुडेम जिले के Burgampadu मंडल स्थित मोरमपल्ली बंजारा गांव में हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक अचानक आसमान में काले बादल छा गए और तेज धूल भरी हवाएं चलने लगीं। कुछ ही देर में पेड़ गिरने लगे और कई घरों की छतों की चादरें हवा में उड़ गईं। सड़क पर पलटा ठेला, ट्रैफिक भी प्रभावित तेज हवाओं के कारण सड़क किनारे लगा एक ट्रैफिक स्टैंड भी गिर गया। पेड़ों, धूल और दूसरे मलबे के सड़क पर जमा होने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में सड़क पर बिखरा मलबा और पलटा हुआ ठेला दिखाई दिया। एक फल विक्रेता घायल The New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक घटना में एक फल विक्रेता के घायल होने की सूचना है, जबकि कुछ अन्य लोगों को भी मामूली चोटें आईं। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की मौत की सूचना नहीं है। कई घरों को पहुंचा नुकसान तेज हवाओं ने इलाके में कई मकानों को भी नुकसान पहुंचाया। घरों पर लगी धातु की चादरें उड़ गईं और पेड़ गिरने से लोगों में दहशत फैल गई। Deccan Chronicle के मुताबिक हवाएं करीब एक घंटे तक प्रभावी रहीं और इस दौरान कई लोग सुरक्षा के लिए अपने घरों के अंदर ही रहे। राजुपेटा ब्रिज को भी नुकसान भारी बारिश का असर केवल मोरमपल्ली बंजारा तक सीमित नहीं रहा। जिले के Mulakalapally इलाके में Akeru stream पर बना Rajupeta Bridge भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ। इससे आसपास के कुछ गांवों की सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित हुई। क्या यह Tornado था? घटना के कई वीडियो और स्थानीय लोगों के बयानों में हवाओं को ‘tornado-like’ यानी बवंडर जैसी बताया गया। हालांकि अधिकारियों या मौसम विभाग की ओर से अभी इस घटना को आधिकारिक रूप से tornado घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल तेज आंधी या gale-force winds की घटना के रूप में ही देखा जा रहा है। भारी बारिश के अलर्ट के बीच बंद रहे स्कूल भारी बारिश और मौसम संबंधी चेतावनियों को देखते हुए भद्राद्री कोठागुडेम जिला प्रशासन ने 23 और 24 सितंबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की थी। यह आदेश सरकारी, निजी और आवासीय स्कूलों पर लागू किया गया था। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने के निर्देश भी दिए थे। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का दिखा असर इसी अवधि में बंगाल की खाड़ी में बने Deep Depression के कारण दक्षिण और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी हुई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 24 सितंबर को उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिण ओडिशा क्षेत्र में मौजूद Deep Depression को लेकर मौसम चेतावनियां जारी की थीं। तेलंगाना के कई हिस्सों में भी बारिश और आंधी का असर देखने को मिला। फिलहाल प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। source – The New Indian Express / Deccan Chronicle / India Meteorological Department जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराजा हरि सिंह जयंती विशेष: शिक्षा, सामाजिक सुधार और जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय से जुड़ा ऐतिहासिक सफर

जम्मू: जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक महाराजा हरि सिंह का जन्म 23 सितंबर 1895 को जम्मू के अमर महल में हुआ था। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्हें शिक्षा के लिए राजस्थान के अजमेर स्थित मयो कॉलेज भेजा गया। बाद में उन्होंने देहरादून के Imperial Cadet Corps में सैन्य प्रशिक्षण लिया। महाराजा हरि सिंह का जीवन सामाजिक सुधारों, शिक्षा के विस्तार और 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों के लिए याद किया जाता है। 13 साल की उम्र में मयो कॉलेज भेजे गए महाराजा हरि सिंह, राजा अमर सिंह के पुत्र थे और महाराजा प्रताप सिंह के भतीजे थे। 1908 में 13 वर्ष की आयु में उन्हें मयो कॉलेज, अजमेर भेजा गया। 1909 में पिता की मृत्यु के बाद उनकी शिक्षा पर ब्रिटिश प्रशासन ने विशेष ध्यान दिया। मयो कॉलेज के बाद उन्होंने देहरादून में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया और 1915 में जम्मू-कश्मीर की State Forces के Commander-in-Chief बनाए गए। 1925 में संभाली जम्मू-कश्मीर की सत्ता महाराजा प्रताप सिंह के निधन के बाद 1925 में हरि सिंह जम्मू-कश्मीर के महाराजा बने। उनके शासनकाल में प्रशासन, शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था में कई बदलाव किए गए। उनके कार्यकाल को लेकर इतिहासकारों की अलग-अलग व्याख्याएं रही हैं, लेकिन शिक्षा के विस्तार और कुछ सामाजिक भेदभाव कम करने के लिए उठाए गए कदम उनके शासन की प्रमुख विशेषताओं में गिने जाते हैं। शिक्षा के विस्तार पर दिया जोर महाराजा हरि सिंह के शासनकाल में प्राथमिक शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया गया। 1930 के आसपास राज्य में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा लागू करने के प्रयास किए गए और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी अलग व्यवस्थाएं विकसित की गईं। उनके दौर में स्कूलों की संख्या बढ़ाने, छात्रवृत्ति देने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को शिक्षा से जोड़ने के उपाय किए गए। छुआछूत के खिलाफ भी उठाए कदम महाराजा हरि सिंह के शासन में वंचित समुदायों के लिए सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों और अन्य सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने से जुड़े आदेश जारी किए गए। 31 अक्टूबर 1932 को राज्य के मंदिरों को वंचित जातियों के लोगों के दर्शन और पूजा के लिए खोलने की घोषणा भी की गई थी। इस फैसले का उस समय कुछ धार्मिक वर्गों ने विरोध किया था। लंदन में भारत के सम्मान और समानता की बात 1930 में हुए पहले Round Table Conference में महाराजा हरि सिंह ने भारतीय रियासतों के प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया। सम्मेलन में उन्होंने भारत को सम्मान और समानता का दर्जा मिलने की बात कही और भारतीय रियासतों को भावी संघीय व्यवस्था में बराबरी का स्थान दिए जाने का समर्थन किया। सम्मेलन के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनके समान अधिकारों और नागरिकता से जुड़े विचार दर्ज हैं। 1947 में लिया सबसे महत्वपूर्ण फैसला भारत की आजादी के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत था। अक्टूबर 1947 में कबायली हमलावरों के जम्मू-कश्मीर में प्रवेश और तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच महाराजा हरि सिंह ने भारत से सैन्य सहायता मांगी। उन्होंने Instrument of Accession पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ। भारत सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में accession की प्रक्रिया अक्टूबर 1947 में पूरी होने का उल्लेख है। यह फैसला जम्मू-कश्मीर के आधुनिक राजनीतिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक बना। आज भी 23 सितंबर को मनाई जाती है जयंती जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2022 में 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। आधिकारिक गजट के मुताबिक हर साल 23 सितंबर को यह अवकाश मनाया जाता है। 23 सितंबर 2026 को उनकी 131वीं जयंती पर जम्मू-कश्मीर में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 1961 में हुआ निधन महाराजा हरि सिंह का निधन 26 अप्रैल 1961 को मुंबई में हुआ। वह जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक महाराजा थे। उनके पुत्र डॉ. कर्ण सिंह बाद में जम्मू-कश्मीर की राजनीति और भारतीय सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। महाराजा हरि सिंह की विरासत पर राजनीतिक और ऐतिहासिक मतभेद मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा सुधार, सामाजिक बदलाव और 1947 के Instrument of Accession में उनकी भूमिका जम्मू-कश्मीर के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। source – Ministry of External Affairs / Jammu & Kashmir Official Gazette / Round Table Conference Records / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र UCC समिति में विवाद के बीच जस्टिस आरसी चव्हाण का इस्तीफा, पब्लिक फीडबैक प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मुंबई: महाराष्ट्र में Uniform Civil Code (UCC) के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने वाली समिति से बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने जनता की राय लेने के लिए तैयार की जा रही प्रश्नावली, समिति में पर्याप्त चर्चा न होने और 19 सितंबर की बैठक में एक गैर-सदस्य की मौजूदगी पर सवाल उठाए। चव्हाण ने 19 सितंबर को इस्तीफा भेजा, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने 21 सितंबर को स्वीकार कर लिया। ‘हां या ना’ वाले सवालों पर जताई आपत्ति जस्टिस चव्हाण की प्रमुख आपत्ति UCC को लेकर जनता से फीडबैक लेने के तरीके पर थी। समिति की योजना कई जटिल सामाजिक और वैवाहिक मुद्दों पर लोगों से मुख्य रूप से ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब लेने की थी। चव्हाण का मानना था कि विवाह, पारिवारिक संबंध और विवाद समाधान जैसे विषयों पर विस्तृत राय लेने की जरूरत है और केवल दो विकल्पों में जवाब सीमित करने से लोगों के विचार पूरी तरह सामने नहीं आ पाएंगे। प्रश्नावली पहले ही फाइनल होने का किया दावा 19 सितंबर को समिति की दूसरी ऑनलाइन बैठक हुई थी। चव्हाण ने अपने इस्तीफे में कहा कि कुछ सदस्यों ने प्रश्नावली में बदलाव और विशेषज्ञों से उसकी समीक्षा कराने का सुझाव दिया था। लेकिन उनके मुताबिक समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई पहले ही एक प्रश्नावली तैयार कर सदस्यों को भेज चुकी थीं और वेबसाइट तैयार होने के बाद उसे अपलोड करने की बात कही गई थी। यह चव्हाण द्वारा अपने इस्तीफे में व्यक्त किया गया पक्ष है। ‘गैर-सदस्य’ की मौजूदगी पर भी सवाल चव्हाण ने बैठक में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह की मौजूदगी और उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाया था। उस समय सिंह मूल सात सदस्यीय समिति में शामिल नहीं थे। चव्हाण के अनुसार सिंह ने UCC की वेबसाइट में बदलाव को लेकर सुझाव दिए और उसके बाद समिति अध्यक्ष ने अधिकारियों को आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए। चव्हाण ने सवाल किया कि जब वह औपचारिक सदस्य नहीं थे तो बैठक में उनकी भूमिका किस आधार पर तय हुई थी। दो दिन बाद शत्रुघ्न सिंह समिति में शामिल इस पूरे विवाद में एक नया घटनाक्रम 21 सितंबर को सामने आया। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने शत्रुघ्न सिंह को UCC समिति में Member-cum-Senior Adviser नियुक्त कर दिया। यानी जिस अधिकारी की 19 सितंबर की बैठक में मौजूदगी पर जस्टिस चव्हाण ने सवाल उठाया था, उन्हें दो दिन बाद औपचारिक रूप से समिति से जोड़ दिया गया। सिंह इससे पहले उत्तराखंड की UCC समिति में भी जस्टिस रंजना देसाई के साथ काम कर चुके हैं। उत्तराखंड UCC में भी काम कर चुके हैं शत्रुघ्न सिंह शत्रुघ्न सिंह उत्तराखंड में UCC तैयार करने वाली पांच सदस्यीय समिति का हिस्सा थे। वह कानून का मसौदा तैयार करने और विभिन्न पक्षों से बातचीत करने वाली टीम में शामिल रहे। उत्तराखंड विधानसभा ने फरवरी 2024 में UCC विधेयक पारित किया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 27 जनवरी 2025 से वहां समान नागरिक संहिता लागू हुई। UCC के विरोधी नहीं हैं जस्टिस चव्हाण इस्तीफे के बाद जस्टिस चव्हाण ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति UCC की अवधारणा से नहीं, बल्कि समिति में अपनाई जा रही प्रक्रिया से है। उन्होंने कहा कि वह करीब दस वर्षों से इस विषय पर काम कर रहे हैं और UCC लागू किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करते समय अलग-अलग समुदायों के बीच टकराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, gender neutrality और न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप पर जोर दिया। जुलाई में बनाई गई थी सात सदस्यीय समिति महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में UCC का मसौदा और सिफारिशें तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई थी। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। समिति को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से संबंधित कानूनी, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर छह महीने के भीतर रिपोर्ट देने का जिम्मा दिया गया है। सरकार ने आरोपों पर नहीं दी विस्तृत प्रतिक्रिया Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री ने कहा कि सरकार जस्टिस चव्हाण की ओर से उठाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं देगी और समिति अपना काम जारी रखेगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चव्हाण की जगह अलग से नया सदस्य नियुक्त नहीं किया जाएगा। हालांकि इसके साथ ही 21 सितंबर को शत्रुघ्न सिंह को Member-cum-Senior Adviser नियुक्त किए जाने की खबर भी सामने आई है। फिलहाल समिति UCC को लेकर जनता से राय लेने और आगे की सिफारिशें तैयार करने की प्रक्रिया में है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Bar & Bench जय राष्ट्र न्यूज़

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अमृतसर में पुलिस और गैंगस्टर के बीच मुठभेड़, पैर में गोली लगने के बाद आरोपी गिरफ्तार

अमृतसर: पंजाब के अमृतसर जिले के मत्तेवाल इलाके में पुलिस और एक वांछित आरोपी के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी हरमन सिंह उर्फ हरमन गोपा राय ने नाके पर रुकने का इशारा किए जाने के बाद पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया। गुप्त सूचना के बाद लगाया गया था नाका अमृतसर ग्रामीण के SSP कंवलप्रीत सिंह चहल के मुताबिक पुलिस को हरमन की मत्तेवाल क्षेत्र में मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद मत्तेवाल थाना प्रभारी सब-इंस्पेक्टर दलजीत सिंह की टीम ने इलाके में नाकाबंदी की। पुलिस का दावा है कि आरोपी को रोकने का प्रयास किया गया तो उसने पुलिसकर्मियों की ओर गोलियां चला दीं। SHO के बेहद करीब से गुजरी गोली पुलिस के अनुसार हरमन ने करीब तीन से पांच राउंड फायर किए। इनमें से एक गोली थाना प्रभारी दलजीत सिंह के बेहद करीब से गुजरी और वह बाल-बाल बच गए। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई के दौरान हरमन के पैर में गोली लगी और पुलिस ने उसे काबू कर लिया। अस्पताल में कराया गया भर्ती घायल आरोपी को पुलिस हिरासत में लेने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उसकी हालत को लेकर तत्काल किसी गंभीर खतरे की जानकारी सामने नहीं आई है। घटना के बाद अमृतसर ग्रामीण SSP समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सबूत जुटाए। कई मामलों में वांछित होने का दावा पुलिस के मुताबिक हरमन कई आपराधिक मामलों में वांछित था। उसके खिलाफ बोपाराय इलाके में फायरिंग से जुड़ा एक मामला भी बताया गया है। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और कथित गैंग कनेक्शन की जांच कर रही है। कुछ रिपोर्ट्स में उसका नाम हरमनजीत सिंह और उपनाम हरमन गोपा राय या हरमन बोपाराय भी बताया गया है। ग्रेनेड हमले से कनेक्शन की भी जांच पुलिस हरमन की गुरदासपुर क्षेत्र में हुए हालिया हैंड ग्रेनेड हमले से कथित भूमिका की भी जांच कर रही है। Tribune के मुताबिक अमृतसर पुलिस इस संबंध में गुरदासपुर पुलिस से जानकारी जुटा रही है। इस मामले में आरोपी की भूमिका जांच का विषय है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले उसके खिलाफ लगे आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। पिस्टल बरामद होने की खबर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी के कब्जे से एक पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस अब हथियार की फॉरेंसिक जांच और अन्य मामलों से संभावित लिंक की पड़ताल कर रही है। आगे की जांच जारी पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी किन मामलों में शामिल रहा, उसके अन्य सहयोगी कौन हैं और किसी संगठित गैंग से उसका संबंध है या नहीं। मुठभेड़ 23 सितंबर 2026 को हुई और आरोपी फिलहाल पुलिस की निगरानी में इलाज करा रहा है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। source – Hindustan Times / The Tribune / Amar Ujala / UNI जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से अपील, बोलीं- सेहत के लिए हानिकारक चीजों का विज्ञापन न करें

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फिल्मी सितारों और लोकप्रिय कलाकारों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का विज्ञापन या endorsement न करने की अपील की है। गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकप्रिय कलाकारों का बच्चों और युवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में की अपील राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। इसी समारोह में उन्होंने फिल्म जगत के कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी बात की। राष्ट्रपति ने कहा कि सफल फिल्म कलाकारों में देश के करोड़ों लोगों, खासकर युवाओं को प्रभावित करने की क्षमता होती है। ‘हानिकारक पदार्थों का endorsement न करें’ अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने लोकप्रिय फिल्मी कलाकारों से अपील की कि वे ऐसे पदार्थों का प्रचार न करें जो लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई सफल कलाकार अनुशासित जीवनशैली के फायदे बताता है तो बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उससे प्रभावित होते हैं और उसका अनुसरण करते हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, “Star वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं।” युवाओं पर सितारों के प्रभाव का किया जिक्र राष्ट्रपति ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं पर फिल्मी सितारों के प्रभाव की बात कही। उनका कहना था कि लोकप्रिय कलाकार केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी जीवनशैली, पहनावा और उनके द्वारा प्रचारित उत्पाद भी लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने कलाकारों से स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस राष्ट्रपति की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने सेलिब्रिटीज द्वारा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले उत्पादों के विज्ञापनों पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने ऐसे उत्पादों की बिक्री और उनके नियमन पर बहस छेड़ दी। हालांकि राष्ट्रपति का मुख्य संदेश फिल्म कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी और युवाओं पर उनके प्रभाव को लेकर था। फिल्म इंडस्ट्री के छोटे कलाकारों की भी उठाई बात अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने फिल्म इंडस्ट्री के मजदूरों, छोटे कलाकारों, सहायकों और संघर्षरत लोगों के लिए सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि creative economy में योगदान देने वाले पर्दे के पीछे के लोगों को भी सम्मान मिलना चाहिए और फिल्म उद्योग में संवेदनशील कार्य संस्कृति विकसित की जानी चाहिए। जूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की regional juries में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात भी कही। उनके मुताबिक किसी भी क्षेत्र में महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल होने से अधिक व्यापक मानवीय दृष्टि विकसित होती है। अनंत नाग को मिला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति ने उनके अभिनय को सहज, संयमित और प्रामाणिक बताते हुए उनकी सराहना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से की गई यह अपील अब celebrity endorsements और कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा का विषय बन गई है। source – President of India / Press Information Bureau / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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ऋषिकेश का रामझूला बंद, मरम्मत का काम जारी! 60% काम पूरा, अब फरवरी 2027 तक बढ़ी समयसीमा

ऋषिकेश: उत्तराखंड के प्रसिद्ध रामझूला पुल पर इन दिनों मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम जारी है। मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम को जोड़ने वाला यह पुल फिलहाल आम लोगों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद है। लोक निर्माण विभाग (PWD) का दावा है कि करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन निर्माण में देरी के चलते पुल को खोलने की समयसीमा अब बढ़ाकर फरवरी 2027 कर दी गई है। 25 जुलाई से पूरी तरह बंद है रामझूला रामझूला को मरम्मत कार्य के चलते 25 जुलाई 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इससे पहले पुल पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पहले ही सुरक्षा कारणों से रोक दी गई थी और केवल पैदल यात्रियों को आने-जाने की अनुमति थी। PWD ने पुल के डेक, सस्पेंडर वायर और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को बदलने तथा मजबूत करने का काम शुरू किया है। पहले दिसंबर तक पूरा होना था काम शुरुआत में अधिकारियों ने मरम्मत कार्य पूरा कर दिसंबर 2026 तक पुल को दोबारा खोलने का लक्ष्य रखा था। जुलाई में अधिकारियों ने भी कहा था कि मरम्मत, अपग्रेडेशन और नवीनीकरण के बाद पुल को दिसंबर तक खोलने की योजना है। हालांकि सितंबर में सामने आई ताजा जानकारी के मुताबिक निर्माण कार्य की गति अपेक्षा से धीमी रहने के कारण अब समयसीमा को फरवरी 2027 तक बढ़ा दिया गया है। PWD का दावा- 60 प्रतिशत काम पूरा PWD के नरेंद्रनगर डिवीजन के मुताबिक रामझूला के मरम्मत कार्य का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। 22 सितंबर की रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल पुल के डेक को बदलने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि काम तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है, ताकि पुल को तय समय से पहले भी खोला जा सके। करीब ₹10-11 करोड़ की लागत से हो रही मरम्मत रामझूला के मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के लिए करीब ₹10 से ₹11 करोड़ की परियोजना तैयार की गई है। इसमें पुल के सस्पेंडर वायर, डेक और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की मरम्मत शामिल है। करीब 220 मीटर लंबा यह सस्पेंशन ब्रिज 1980 के दशक में बनाया गया था और वर्षों से स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। व्यापारियों पर पड़ा असर रामझूला बंद होने का सीधा असर मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र के व्यापारियों पर भी पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि पुल बंद होने के बाद इलाके में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी कम हो गई है, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है। स्थानीय व्यापारी चाहते हैं कि निर्माण कार्य की गति बढ़ाई जाए और पुल जल्द से जल्द खोला जाए। पर्यटकों को लेना पड़ रहा वैकल्पिक रास्ता रामझूला बंद रहने के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जानकी सेतु और लक्ष्मणझूला क्षेत्र के वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़ गया है और बुजुर्ग यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहनों की वापसी की भी उम्मीद मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद रामझूला पर पैदल यात्रियों के साथ दोपहिया वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। पहले पुल पर दोपहिया वाहन चलते थे, लेकिन सस्पेंडर वायर क्षतिग्रस्त होने और सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट के बाद उन पर रोक लगा दी गई थी। फिलहाल रामझूला पूरी तरह बंद है और PWD मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है। अब स्थानीय लोगों, व्यापारियों और पर्यटकों की नजर इस बात पर है कि पुल फरवरी 2027 की नई समयसीमा से पहले खुल पाता है या नहीं। source – Amar Ujala / Live Hindustan / Hindustan Times / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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₹10 हजार के बकाया वेतन का विवाद, मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान!

सूरत: गुजरात के सूरत में महज ₹10 हजार के कथित बकाया वेतन को लेकर शुरू हुआ विवाद करोड़ों रुपये के नुकसान में बदल गया। पुलिस के मुताबिक एक पूर्व अकाउंटेंट ने अपने पुराने मालिक को “सबक सिखाने” के इरादे से श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। भीषण आग में कई दुकानें और भारी मात्रा में कपड़ा जल गया, जिसका नुकसान करीब ₹24 करोड़ आंका गया है। मामले में 33 वर्षीय पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। 9 सितंबर को लगी थी भीषण आग सूरत के सारोली इलाके स्थित श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में 8 और 9 सितंबर की दरमियानी रात भीषण आग लगी थी। शुरुआत में इसे सामान्य आग की घटना माना जा रहा था, लेकिन CCTV फुटेज और पुलिस जांच में मामला कथित आगजनी का निकला। आग इतनी भीषण थी कि बाजार में रखा करोड़ों रुपये का कपड़ा और अन्य सामान जलकर खाक हो गया। अलग-अलग रिपोर्ट्स में प्रभावित दुकानों की संख्या 14 से 17 के बीच बताई गई है, जबकि पुलिस ने कुल नुकसान लगभग ₹24 करोड़ बताया है। पूर्व अकाउंटेंट पर आग लगाने का आरोप सूरत क्राइम ब्रांच ने मामले में 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वह महाराष्ट्र के धुले जिले का रहने वाला है और अप्रैल 2026 से मार्केट की एक दुकान में अकाउंटेंट के तौर पर काम करता था। उसे करीब ₹30 हजार प्रतिमाह वेतन मिलता था। बाद में काम को लेकर मालिक और दूसरे अकाउंटेंट से विवाद होने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी। आरोपी का दावा था कि उसके करीब ₹10 हजार अभी भी बकाया थे। ₹150 का पेट्रोल खरीदकर रची साजिश पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी ने कथित तौर पर केवल ₹150 का पेट्रोल खरीदा और रात में मार्केट पहुंचा। CCTV में एक व्यक्ति चेहरा ढककर बैग के साथ मार्केट में प्रवेश करता दिखाई दिया। पुलिस का आरोप है कि उसने कपड़ों के पैकेट पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जो देखते ही देखते आसपास की दुकानों तक फैल गई। पहले भी की थी आग लगाने की कोशिश India Today की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर इससे पहले भी दुकान में आग लगाने की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रयास सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने दोबारा योजना बनाई और पेट्रोल का इस्तेमाल कर आग लगाने का आरोप है। CCTV से पुलिस आरोपी तक पहुंची आग लगने के बाद पुलिस ने मार्केट और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज और अन्य सूचनाओं के आधार पर जांच एजेंसियां विनोद सावले तक पहुंचीं। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद आरोपी अपना मोबाइल बंद कर परिवार के साथ सूरत से निकल गया था। वह राजस्थान के खाटू श्याम और बाद में अयोध्या गया। कुछ दिनों बाद सूरत लौटने पर उसे डिंडोली इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। ₹10 हजार का विवाद, ₹24 करोड़ का नुकसान सूरत के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त करणराज वाघेला के मुताबिक आग से कुल नुकसान करीब ₹25 करोड़ तक हो सकता है, जबकि नष्ट हुए टेक्सटाइल की कीमत लगभग ₹24 करोड़ आंकी गई है। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि पेट्रोल किस तरह खरीदा गया और पूरी घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। व्यापारियों को हुआ भारी नुकसान श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में बड़ी मात्रा में नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के लिए तैयार कपड़ों का स्टॉक रखा हुआ था। आग के कारण कई व्यापारियों का माल पूरी तरह नष्ट हो गया। एक दुकान मालिक ने अकेले करीब ₹6 करोड़ के नुकसान का दावा किया है। हालांकि व्यापारियों के व्यक्तिगत नुकसान का अंतिम आंकड़ा जांच और मूल्यांकन के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस जांच जारी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर पूरी वारदात का reconstruction भी कराया है। मामले में आगजनी के पीछे कथित वेतन विवाद और कार्यस्थल पर अपमान के आरोपों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि ₹10 हजार के कथित बकाया भुगतान से शुरू हुए विवाद ने पूरे टेक्सटाइल मार्केट के व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। source – The Indian Express / India Today / Times of India / Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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गरबा में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर उषा ठाकुर का बयान, 4.5 लाख लड़कियों को लेकर किया दावा

इंदौर: मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री और BJP विधायक उषा ठाकुर ने गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की एंट्री का विरोध करते हुए नया बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि पहले हर साल गरबा आयोजनों के दौरान करीब 4.5 लाख हिंदू लड़कियां गैर-हिंदू युवकों के साथ चली जाती थीं, जिससे जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा था। हालांकि ठाकुर ने इस आंकड़े के समर्थन में कोई आधिकारिक स्रोत या प्रमाण नहीं बताया है। उनके बयान के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है। गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का किया समर्थन इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उषा ठाकुर से गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने की मांग को लेकर सवाल किया गया था। ठाकुर ने इस तरह की रोक का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें गरबा आयोजनों में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों की ओर से की जा रही ऐसी मांगों का भी समर्थन किया। 4.5 लाख लड़कियों को लेकर किया दावा उषा ठाकुर ने दावा किया कि पहले हर साल गरबा आयोजनों के दौरान करीब 4.5 लाख लड़कियां दूसरे समुदाय के युवकों के साथ चली जाती थीं। उन्होंने आगे इसे जनसांख्यिकीय बदलाव से भी जोड़ा। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इस संख्या के समर्थन में किसी सरकारी रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड या अन्य सत्यापित आंकड़े का हवाला नहीं दिया। इसलिए इसे फिलहाल उषा ठाकुर का राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए। तिलक और कलावा को लेकर भी कही बात ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग गरबा में शामिल होने के लिए तिलक लगाने या कलावा बांधने जैसे तरीके अपनाते हैं और अपनी धार्मिक पहचान छिपाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए। यह उनका आरोप है और इसके समर्थन में उन्होंने कोई विशिष्ट मामला या आधिकारिक डेटा पेश नहीं किया। गरबा के कमर्शियल रूप पर भी जताई आपत्ति उषा ठाकुर ने केवल गैर-हिंदुओं की एंट्री ही नहीं, बल्कि गरबा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरबा मूल रूप से शक्ति की उपासना और धार्मिक साधना से जुड़ा पर्व है, लेकिन अब कई जगह इसे कपड़ों, गहनों और टैटू के प्रदर्शन तक सीमित किया जा रहा है। ठाकुर के अनुसार इससे गरबा का आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। कांग्रेस ने बयान पर मांगी माफी उषा ठाकुर के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने कहा कि बिना प्रमाण के लाखों हिंदू महिलाओं को लेकर इस तरह का दावा करना आपत्तिजनक है और ठाकुर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी गरबा को लेकर दिए जा रहे बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे बयानों से सामाजिक माहौल खराब होता है। मध्य प्रदेश में गरबा को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस नवरात्रि से पहले मध्य प्रदेश में गरबा पंडालों में मुस्लिम और अन्य गैर-हिंदू लोगों की एंट्री को लेकर कई BJP नेताओं के बयान सामने आए हैं। भोपाल से BJP विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री विश्वास सारंग ने भी इस मुद्दे पर सख्त शर्तों या प्रतिबंध का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इन बयानों का विरोध किया है। फिलहाल उषा ठाकुर के 4.5 लाख लड़कियों वाले दावे की कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला गरबा आयोजनों में प्रवेश के नियमों के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। source – The New Indian Express / Aaj Tak / Amar Ujala / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

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दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को उनके पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर और भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया सम्मान 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान करते हुए उनके अभिनय और भारतीय सिनेमा में योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि अनंत नाग का अभिनय थिएटर और सिनेमा की बेहतरीन विशेषताओं का संगम है। उन्होंने उनके अभिनय को स्वाभाविक, संयमित और प्रामाणिक बताया। पांच दशक से ज्यादा लंबा रहा फिल्मी सफर अनंत नाग ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उन्होंने सबसे ज्यादा कन्नड़ सिनेमा में अभिनय किया, लेकिन हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई। 1970 के दशक में फिल्मों में सक्रिय हुए अनंत नाग ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। उनका सहज अभिनय और संवाद अदायगी उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है। ‘अंकुर’ और ‘मालगुडी डेज’ से मिली खास पहचान अनंत नाग ने कन्नड़ फिल्मों के साथ-साथ हिंदी सिनेमा में भी महत्वपूर्ण काम किया। श्याम बेनेगल की फिल्म ‘अंकुर’ सहित कई चर्चित फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। टीवी सीरीज ‘मालगुडी डेज’ में उनके अभिनय ने भी उन्हें देशभर के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया। उनके करियर में गंभीर, हास्य और चरित्र भूमिकाओं का खास मिश्रण देखने को मिला। सम्मान कर्नाटक को किया समर्पित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की घोषणा के बाद अनंत नाग ने इस सम्मान को कर्नाटक और वहां के लोगों को समर्पित किया था। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने उनके अभिनय करियर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनंत नाग लंबे समय से कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दी बधाई दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए अनंत नाग के नाम की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई दशकों से अनंत नाग के सहज अभिनय, बहुमुखी प्रतिभा और कलात्मक कौशल ने भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से कन्नड़ सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी है। भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा में किसी कलाकार को उसके जीवनभर के योगदान के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। अनंत नाग को यह पुरस्कार मिलने के साथ उनका नाम उन चुनिंदा कलाकारों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने लंबे समय तक भारतीय सिनेमा को अपने अभिनय से समृद्ध किया है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अनंत नाग के अलावा ममूटी, कार्तिक आर्यन और यामी गौतम समेत कई कलाकारों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। source – President of India / PIB / NDTV / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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