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केदारनाथ धाम में बिगड़ा मौसम, हेलीकॉप्टर सेवाओं पर असर; 27 सितंबर तक यात्रा स्थगित

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में भारी बारिश के अलर्ट के बीच केदारनाथ धाम का मौसम बिगड़ गया है। खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण धाम के लिए संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा को 26 सितंबर की दोपहर से 27 सितंबर 2026 तक स्थगित कर दिया है। खराब मौसम के कारण हेली सेवा बंद 26 सितंबर को केदारघाटी में बारिश और खराब मौसम के कारण केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा संचालित नहीं हो सकी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम अनुकूल होने के बाद ही हेली सेवाओं और यात्रा संचालन को सामान्य करने का फैसला लिया जाएगा। रेड अलर्ट के बाद प्रशासन का फैसला मौसम विभाग की चेतावनी के बाद रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने केदारनाथ धाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने के आदेश जारी किए। गढ़वाल मंडल प्रशासन ने भी मौसम की स्थिति और अलग-अलग जिलों से मिली जानकारी की समीक्षा के बाद चारधाम यात्रा को 27 सितंबर तक स्थगित रखने का निर्णय लिया। रुद्रप्रयाग में भारी बारिश की चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 27 सितंबर को भी उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। रुद्रप्रयाग के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। IMD ने चारधाम यात्रा मार्गों पर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़कें बाधित होने का खतरा भी बना हुआ है। 15 सितंबर से दोबारा शुरू हुई थी हेली सेवा केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा मानसून के कारण जून में बंद कर दी गई थी। चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में इसे 15 सितंबर 2026 से दोबारा शुरू किया गया था। गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी जैसे हेलीपैड से केदारनाथ के लिए उड़ानों का संचालन किया जा रहा था। 15 से 30 सितंबर के पहले स्लॉट के हजारों टिकट पहले ही बुक हो चुके थे। खराब विजिबिलिटी में उड़ान संभव नहीं केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन काफी हद तक मौसम और दृश्यता पर निर्भर रहता है। बारिश, घना कोहरा, बादल या तेज हवाएं होने पर सुरक्षा कारणों से उड़ानों को रोक दिया जाता है। इससे पहले भी केदारघाटी में मौसम अचानक खराब होने पर हेलीकॉप्टर उड़ानों को रोकना और विमानों की आपात लैंडिंग कराना पड़ा है। यात्रियों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील प्रशासन ने केदारनाथ और अन्य चारधाम यात्रियों से मौसम सामान्य होने तक सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और पर्यटकों व श्रद्धालुओं से यात्रा शुरू करने से पहले मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है। मौसम सुधरने के बाद ही शुरू होगी यात्रा फिलहाल प्रशासन मौसम और यात्रा मार्गों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है। बारिश कम होने और मार्ग सुरक्षित पाए जाने के बाद ही केदारनाथ यात्रा और हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन पर अगला निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में केदारनाथ जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा एडवाइजरी देखने के बाद ही यात्रा शुरू करने की सलाह दी गई है। source – Amar Ujala / NDTV / Hindustan Times / India Meteorological Department जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR के खिलाफ प्रकाश राज ने जताया विरोध, बोले- ‘हर योग्य मतदाता का नाम सूची में रहना चाहिए’

बेंगलुरु: अभिनेता प्रकाश राज ने कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) का विरोध करते हुए प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है। 1 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित ‘Election Commission Chalo’ मार्च में प्रकाश राज समेत कई नागरिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। मार्च के दौरान बेंगलुरु पुलिस ने प्रकाश राज और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। ‘SIR वापस लिया जाए’- प्रकाश राज प्रदर्शन के दौरान प्रकाश राज ने कहा कि SIR प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि नागरिक संगठनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। अभिनेता किशोर भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। ‘Election Commission Chalo’ अभियान का किया था ऐलान प्रकाश राज ने 25 अगस्त को ही घोषणा कर दी थी कि नागरिक संगठनों के साथ 1 सितंबर को बेंगलुरु में Election Commission Chalo अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अभी समय है तो इतनी बड़ी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने की जरूरत क्यों है। उन्होंने दावा किया कि इससे आम मतदाताओं को दस्तावेज और सत्यापन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रकाश राज का नाम भी ‘Shifted’ कैटेगरी में आया था इस विवाद से पहले प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। हालांकि कर्नाटक चुनाव अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम ‘permanently shifted’ कैटेगरी में इसलिए रखा गया क्योंकि Booth Level Officer की जांच में वह पिछले चार वर्षों से अपने पुराने पंजीकृत पते पर नहीं रह रहे थे। चुनाव अधिकारी ने कहा कि प्रकाश राज का नाम पहले शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सक्रिय था और वह अपने वर्तमान पते पर Form 6 के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं। एक करोड़ से ज्यादा नाम ASDDO कैटेगरी में कर्नाटक में SIR के दौरान चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार करीब 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others श्रेणी में चिन्हित किए गए थे। SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाता शामिल रहे। आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं, उन्हें नोटिस और दावा-आपत्ति प्रक्रिया के जरिए अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का किया बचाव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने SIR का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग के साथ मतदाताओं का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव संविधान, कानून और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत आयोजित किए जाते हैं और राजनीतिक दलों तथा उम्मीदवारों के प्रतिनिधि विभिन्न चरणों में प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। BJP और JD(S) भी उठा चुके हैं सवाल कर्नाटक में SIR को लेकर केवल प्रकाश राज या कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने ही सवाल नहीं उठाए हैं। BJP और JD(S) ने भी जुलाई में चुनाव आयोग के सामने प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। दोनों दलों ने कुछ क्षेत्रों में घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए थे। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जवाब में कहा था कि SIR चुनाव आयोग के निर्देशों और कानून के अनुसार किया जा रहा है। SIR को लेकर जारी है राजनीतिक और कानूनी बहस कर्नाटक में SIR को लेकर मतदाता सूची से संभावित नाम हटने, दस्तावेज सत्यापन और प्रक्रिया की समयसीमा जैसे विषयों पर लगातार बहस चल रही है। प्रकाश राज और प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सत्यापन किया जा रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जोरदार हंगामा, BJP विधायक विक्रम रंधावा को बाहर निकाला गया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़ा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद जोरदार हंगामा हुआ। प्रस्ताव में वर्ष 2000 और नवंबर 2024 में विधानसभा से पारित पुराने प्रस्तावों का संदर्भ दिए जाने पर BJP विधायकों ने विरोध किया। हंगामे के दौरान BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों की मदद से सदन से बाहर निकाल दिया गया। उमर अब्दुल्ला ने पेश किया राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव 25 सितंबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया कि यह मांग 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को विधानसभा से पारित प्रस्तावों के अतिरिक्त है और इसे केंद्र सरकार को भेजा जाए। उमर अब्दुल्ला ने सभी दलों से इसका समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य का दर्जा पूरे जम्मू-कश्मीर से जुड़ा मुद्दा है। 2000 के प्रस्ताव के जिक्र पर भड़की BJP BJP विधायकों की मुख्य आपत्ति प्रस्ताव में 26 जून 2000 के autonomy resolution का संदर्भ दिए जाने पर थी। उस समय फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने जम्मू-कश्मीर को 1953 से पहले जैसी अधिक स्वायत्त संवैधानिक स्थिति देने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। बाद में तत्कालीन केंद्र सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। सदन के वेल में पहुंचे BJP विधायक जैसे ही प्रस्ताव पेश किया गया, BJP विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कई सदस्य सदन के वेल में पहुंच गए। कुछ विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं। विरोध के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने को कहा, लेकिन हंगामा जारी रहने के बाद सदन की कार्यवाही करीब 30 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। विक्रम रंधावा को मार्शलों ने बाहर निकाला हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकालने का निर्देश दिया गया। इसके बाद विधानसभा के मार्शलों ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक रंधावा और अन्य BJP विधायक प्रस्ताव के खिलाफ लगातार विरोध और नारेबाजी कर रहे थे। BJP ने लगाया ‘autonomy agenda’ वापस लाने का आरोप जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव की आड़ में वर्ष 2000 के autonomy resolution को दोबारा राजनीतिक बहस में लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि BJP राज्य के दर्जे की बहाली के मुद्दे पर अपनी स्थिति रख सकती है, लेकिन पुराने autonomy resolution का संदर्भ स्वीकार नहीं करेगी। यह BJP का राजनीतिक पक्ष है। उमर अब्दुल्ला ने कहा- राज्य का दर्जा सभी का मुद्दा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं है। उन्होंने केंद्र की ओर से पहले बताई गई delimitation, elections और statehood की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि परिसीमन और चुनाव हो चुके हैं और अब राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि विधानसभा के जरिए केंद्र सरकार को उसके पूर्व आश्वासनों की याद दिलाई जा रही है। PDP और सज्जाद लोन ने भी रखा अपना पक्ष PDP विधायक वहीद पारा ने राज्य के दर्जे वाले प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन कहा कि इसमें Article 370 और Article 35A का भी स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए था। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद लोन ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन किया और BJP के विरोध की आलोचना की। ये संबंधित दलों और नेताओं के राजनीतिक रुख हैं। नवंबर 2024 के प्रस्ताव का भी जिक्र मौजूदा प्रस्ताव में 6 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पारित प्रस्ताव का भी संदर्भ है। उस प्रस्ताव में विशेष दर्जे और संवैधानिक गारंटी की बहाली पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की मांग की गई थी। 25 सितंबर की घटना के बाद राज्य के दर्जे और पुराने autonomy resolution को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और BJP के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। फिलहाल प्रस्ताव को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है। source – The Indian Express / The Tribune / Daily Excelsior / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर 25 सितंबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने AISA से जुड़े छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक नेताओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। AISA और सिविल सोसाइटी समूहों ने किया प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन All India Students’ Association (AISA) की दिल्ली इकाई और कुछ सिविल सोसाइटी समूहों ने किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान “ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो” जैसे नारे भी लगाए गए। कई प्रदर्शनकारी हिरासत में रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए या पुलिस द्वारा रोके गए प्रमुख लोगों में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और CPI(ML) Liberation के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में करीब 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। मनोज झा और प्रशांत भूषण भी प्रदर्शन में शामिल आयोजकों के मुताबिक प्रदर्शन में RJD सांसद मनोज झा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और कई अन्य लोग भी शामिल हुए। इसके अलावा SFI और Indian Youth Congress से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ अलग-अलग विरोध कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पुलिस ने क्यों रोका प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कोई आवेदन या अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई थी ताकि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें। SIR विवाद बना प्रदर्शन की बड़ी वजह यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी हालिया रिपोर्ट्स के बाद हुआ। The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और electoral roll data management से जुड़े कुछ मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। युवा कांग्रेस ने भी किया विरोध इसी दिन भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर मार्ग पर रोक दिया और कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हिरासत को लेकर भी उठा विवाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। पुलिस की ओर से कहा गया कि कार्रवाई अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कारण की गई। हिरासत की परिस्थितियों को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं। चुनाव आयोग पर जारी है राजनीतिक बहस CEC ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को तय कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। ऐसे में जंतर-मंतर का प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। source – Hindustan / ThePrint / The Tribune / Amar Ujala / ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के मॉडल टाउन में हल्दीराम वाली इमारत में लगी भीषण आग, 30 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके में हल्दीराम आउटलेट वाली एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग के बाद इमारत और आसपास के परिसरों से करीब 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। आग बुझाने के लिए दिल्ली फायर सर्विस की 23 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं है। The New Indian Express दूसरी मंजिल पर लगी आग घटना 25 सितंबर 2026 की दोपहर की है। अधिकारियों के मुताबिक मॉडल टाउन की बहुमंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर आग लगी, जहां हल्दीराम का आउटलेट भी मौजूद है। कुछ ही देर में आग और धुएं ने बड़ा रूप ले लिया। इमारत से घना काला धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। The Times of India दमकल की 23 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं दिल्ली फायर सर्विस को दोपहर में आग लगने की सूचना मिली। शुरुआत में चार दमकल गाड़ियों को भेजा गया था, लेकिन आग की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त गाड़ियां बुलाई गईं। बाद में कुल 23 दमकल वाहनों को आग बुझाने के अभियान में लगाया गया। करीब 4 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया, जिसके बाद कूलिंग ऑपरेशन शुरू किया गया। The Print Hindi पुलिस ने 30 लोगों को सुरक्षित निकाला आग की सूचना मिलने के बाद मॉडल टाउन थाने के हेड कॉन्स्टेबल पवन शुरुआती responders में शामिल रहे। इसके बाद SHO और अन्य पुलिसकर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने प्रभावित इमारत के साथ आसपास की इमारतों में मौजूद लोगों को भी बाहर निकालना शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान में करीब 30 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। The New Indian Express कोई हताहत नहीं इतनी बड़ी आग के बावजूद घटना में किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की खबर नहीं है। पुलिस का कहना है कि समय रहते इमारत को खाली करा लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। आसपास की इमारतों से भी लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया था। The Print शॉर्ट सर्किट की आशंका पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि आग लगने का अंतिम कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। दमकल विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही हैं। The New Indian Express VIDEO में दिखा काले धुएं का गुबार घटना के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं। इनमें इमारत से बड़ी मात्रा में काला धुआं निकलता दिखाई देता है, जबकि सड़क पर दमकल कर्मी आग बुझाने में जुटे नजर आते हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद घटना तेजी से चर्चा में आ गई। Times Now Hindi समय रहते रेस्क्यू से टला बड़ा हादसा मॉडल टाउन जैसे व्यस्त इलाके में स्थित बहुमंजिला इमारत में आग लगने से स्थिति गंभीर हो सकती थी। लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई के कारण अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और संबंधित एजेंसियां नुकसान तथा आग के वास्तविक कारण का आकलन कर रही हैं। source – PTI / The New Indian Express / ThePrint / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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ऑनलाइन बुकिंग के बाद ग्राहक के खाते से दो बार पैसे कटने का दावा, Svenska Design Hotel के खिलाफ शिकायत

मुंबई: मुंबई के Svenska Design Hotel को लेकर एक ग्राहक की ऑनलाइन शिकायत चर्चा में है। ग्राहक ने Trip.com पर प्रकाशित समीक्षा में दावा किया कि उसने होटल के लिए पहले ही ऑनलाइन भुगतान कर दिया था, लेकिन बाद में उससे दोबारा भुगतान कराया गया और यात्रा के बाद उसके कार्ड से एक और रकम काटी गई। हालांकि ये आरोप ग्राहक के व्यक्तिगत अनुभव और ऑनलाइन समीक्षा पर आधारित हैं तथा स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं हुई है। ऑनलाइन बुकिंग के समय किया था भुगतान Trip.com पर 5 अप्रैल 2026 को प्रकाशित समीक्षा के अनुसार ग्राहक ने 27 मार्च की शाम चेक-इन और 28 मार्च की सुबह करीब 4 बजे चेक-आउट के लिए कमरा बुक किया था। ग्राहक का दावा है कि उसने क्रेडिट कार्ड के जरिए ऑनलाइन ही भुगतान कर दिया था। होटल पहुंचने पर उसे बताया गया कि उसकी बुकिंग दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे की समयावधि के लिए थी और रात में उसके लिए कमरा उपलब्ध नहीं था। दोबारा कमरा खरीदने का किया दावा ग्राहक के मुताबिक उसे रात में ठहरने के लिए दोबारा कमरे का भुगतान करना पड़ा, जबकि उस समय होटल में कुछ कमरे उपलब्ध थे। समीक्षा में सवाल उठाया गया कि रात करीब 10:30 बजे ऐसी समयावधि के लिए बुकिंग और भुगतान कैसे स्वीकार हुआ जो पहले ही समाप्त हो चुकी थी। यह ग्राहक का दावा है और बुकिंग सिस्टम के तकनीकी रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। कार्ड से फिर पैसे कटने की शिकायत ग्राहक ने आगे दावा किया कि वापसी की उड़ान के दौरान उसके कार्ड पर होटल की ओर से एक और चार्ज दिखाई दिया। इसी आधार पर उसने आरोप लगाया कि एक ही ठहराव के लिए उससे कई बार भुगतान लिया गया। हालांकि सार्वजनिक समीक्षा में प्रत्येक लेनदेन की रकम, बैंक स्टेटमेंट या होटल के आंतरिक भुगतान रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वास्तविक वित्तीय स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। दूसरे ग्राहकों ने भी भुगतान को लेकर की शिकायत Svenska Design Hotel से जुड़ी कुछ अन्य ऑनलाइन समीक्षाओं में भी अतिरिक्त या अनधिकृत भुगतान के आरोप दिखाई देते हैं। Expedia पर जनवरी 2026 की एक verified review में एक ग्राहक ने दावा किया था कि उससे ₹6,000 अतिरिक्त लिए गए और होटल प्रबंधन ने विवाद के लिए बुकिंग प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार बताया। यह भी उस ग्राहक का आरोप है और इसका कोई स्वतंत्र निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है। होटल की सार्वजनिक सफाई नहीं मिली इस विशेष मार्च 2026 की शिकायत पर उपलब्ध Trip.com पेज में Svenska Design Hotel की कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया दिखाई नहीं देती। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि कथित अतिरिक्त चार्ज होटल, बुकिंग प्लेटफॉर्म, pre-authorisation hold या किसी अन्य payment-processing वजह से हुआ था। अंतिम स्थिति बैंक, होटल और booking platform के transaction records से ही स्पष्ट हो सकती है। ऑनलाइन होटल बुकिंग में भुगतान विवाद फिर चर्चा में यह मामला ऑनलाइन होटल बुकिंग के दौरान payment confirmation, booking timings और duplicate charges की जांच के महत्व की ओर ध्यान खींचता है। ऐसे मामलों में ग्राहक को booking confirmation, invoice और बैंक transaction details सुरक्षित रखने चाहिए। यदि एक ही सेवा के लिए वास्तव में दो बार रकम काटी गई हो तो संबंधित होटल, booking platform और कार्ड जारी करने वाले बैंक के dispute mechanism के जरिए शिकायत की जा सकती है। फिलहाल Svenska Design Hotel से जुड़ा यह मामला ग्राहक द्वारा सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर दर्ज आरोप के रूप में उपलब्ध है; किसी नियामक या अदालत द्वारा होटल को दोषी ठहराए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। source – Trip.com / Expedia जय राष्ट्र न्यूज़

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भारी बारिश के बाद सिक्किम में भूस्खलन; घरों को नुकसान, VIDEO सामने!

गंगटोक: सिक्किम में लगातार भारी बारिश के बीच ग्यालशिंग जिले के रिंबी गांव में बड़ा भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टानें और मलबा नीचे आने से 30 से ज्यादा मकान और सरकारी क्वार्टर प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में भेजा गया है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तेजी से नीचे आता मलबा दिखाई दे रहा है। रिंबी गांव में रात को आया भारी मलबा भूस्खलन 24 सितंबर की देर रात पश्चिम सिक्किम के युकसोम-ताशीडिंग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रिंबी गांव में हुआ। लगातार बारिश के बाद ऊपरी पहाड़ियों से मिट्टी, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे की ओर आया और रिहायशी इलाके तक पहुंच गया। कई मकानों के हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि सरकारी आवासों को भी नुकसान पहुंचा है। दो मकान पूरी तरह बहने की सूचना स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक भूस्खलन से दो मकान पूरी तरह बह गए, जबकि कई अन्य घरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। 26 सितंबर तक सामने आई जानकारी के अनुसार रिंबी के करीब 32 परिवार अपने घर या रहने योग्य जमीन खो चुके हैं। प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। कुछ परिवार रिश्तेदारों के यहां भी रह रहे हैं। VIDEO में दिखा डरावना मंजर घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें पहाड़ी से भारी मात्रा में कीचड़, बड़े पत्थर और मलबा नीचे की ओर आते हुए दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई। लगातार बारिश की वजह से आसपास के दूसरे मकानों और सड़कों पर भी खतरा बना हुआ है। अगस्त से सक्रिय है भूस्खलन क्षेत्र रिंबी इलाके में यह समस्या अचानक शुरू नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन और सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक अगस्त से ही क्षेत्र में लगातार जमीन खिसकने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। सितंबर के मध्य में भी प्रशासन ने प्रभावित और संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण कर राहत शिविर बनाने तथा परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की थी। 128 लोगों को पहले ही किया गया था सुरक्षित सितंबर में स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन ने रिंबी क्षेत्र के कई प्रभावित घरों से लोगों को पहले ही निकालना शुरू कर दिया था। PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में करीब 28 मकानों से 128 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। लगातार बारिश के बाद अब प्रभावित घरों की संख्या और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने जताई चिंता सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने रिंबी की स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने, लगातार स्थिति की निगरानी करने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से भी मौसम और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। सड़क संपर्क पर भी पड़ा असर भूस्खलन के कारण स्थानीय सड़कों पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिससे इलाके में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री तथा अस्थायी आवास की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों को विशेष रूप से रात के समय अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। अब तक किसी मौत की सूचना नहीं इतने बड़े भूस्खलन के बावजूद अब तक किसी व्यक्ति की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का मुख्य फोकस संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालने और नए भूस्खलन की स्थिति में नुकसान कम करने पर है। लगातार बारिश के कारण रिंबी और आसपास के क्षेत्रों में खतरा फिलहाल टला नहीं है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने को कहा है। source – Government of Sikkim / The Indian Express / Hindustan Times / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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पटना हाई कोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, यौन अपराध मामले में ‘आपत्तिजनक टिप्पणियों’ पर जताई चिंता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है, जिसमें एक महिला के कपड़े उतारने की कोशिश और उसके साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़े कृत्यों को तथ्यों के आधार पर ‘बलात्कार के प्रयास’ के लिए पर्याप्त नहीं माना गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियों को “offending observations” बताते हुए आरोपी को नोटिस जारी किया है। 9 जुलाई के पटना हाई कोर्ट के फैसले का मामला मामला पटना हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के फैसले से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने आरोपी हिमांशु कुमार पाठक की उस दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था, जो IPC की धारा 376 के साथ धारा 511 यानी बलात्कार के प्रयास से संबंधित थी। हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर कहा था कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने जैसी हरकतें, बिना ऐसे स्पष्ट कृत्य के जो बलात्कार करने के इरादे को निर्णायक रूप से दिखाए, ‘attempt to rape’ के अपराध को स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। हालांकि कोर्ट ने इन कृत्यों को महिला की गरिमा भंग करने से जुड़ा अपराध माना था। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणियों को बताया ‘आपत्तिजनक’ 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि फैसले में कुछ “आपत्तिजनक टिप्पणियां” हैं और उन्हें हटाने या फैसला रद्द करने से पहले संबंधित आरोपी का पक्ष सुनना आवश्यक है। आरोपी हिमांशु पाठक को जारी हुआ नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी हिमांशु पाठक को नोटिस जारी किया है। पीठ ने बिहार के एडवोकेट जनरल से स्थानीय पुलिस के माध्यम से यह सुनिश्चित करने को कहा कि आरोपी तक नोटिस पहुंचाया जाए, ताकि अगली सुनवाई में उसका पक्ष भी कोर्ट के सामने आ सके। 2008 की घटना से जुड़ा है मामला यह मामला 19 जनवरी 2008 की घटना से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक महिला अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने आरोपी के स्टूडियो गई थी। आरोप था कि आरोपी ने महिला के पिता को कंप्यूटर पर फोटो देखने के लिए कहा और इसके बाद स्टूडियो का दरवाजा बंद कर महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार किया। महिला द्वारा शोर मचाने पर उसके पिता पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया। ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा निचली अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 376/511 और 342 के तहत दोषी ठहराया था। उसे बलात्कार के प्रयास के मामले में तीन साल की कठोर कैद और गलत तरीके से बंद रखने के मामले में छह महीने की सजा सुनाई गई थी। बाद में पटना हाई कोर्ट ने बलात्कार के प्रयास वाली दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मामले से भी जुड़ा संदर्भ इस मामले का जिक्र इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में उस समय भी हुआ था, जब अदालत इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक अन्य यौन अपराध संबंधी फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी। उस मामले में भी हाई कोर्ट की ओर से यौन अपराध के प्रयास को लेकर की गई व्याख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी। शीर्ष अदालत ने बाद में वह फैसला रद्द करते हुए न्यायाधीशों के लिए यौन अपराध मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी दृष्टिकोण को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पटना हाई कोर्ट के फैसले को अंतिम रूप से रद्द नहीं किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संबंधित आरोपी को सुनने के बाद ही इस पर आगे फैसला लिया जाएगा। मामले को SMW (Crl) No. 5/2026 के रूप में दर्ज किया गया है। आने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि पटना हाई कोर्ट की टिप्पणियों और कानूनी निष्कर्षों में किस हद तक हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। source – Supreme Court Proceedings / LiveLaw / Bar & Bench / Hindustan Times / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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लक्जरी कार से ₹4 करोड़ से ज्यादा की नकदी बरामद! सीट के नीचे बने सीक्रेट चेंबर से मिले नोटों के बंडल

खैरागढ़: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में पुलिस की वाहन चेकिंग के दौरान एक स्कॉर्पियो से ₹4 करोड़ 4 लाख 50 हजार नकद बरामद किए गए थे। रकम कार की सीटों के नीचे बने एक गुप्त चेंबर में छिपाई गई थी। कार में सवार गुजरात के दो लोग नकदी से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके, जिसके बाद पुलिस ने रकम और वाहन जब्त कर आयकर विभाग को सूचना दी। यह घटना 14 अगस्त 2025 की है, जिसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल हुआ। चेकिंग के दौरान पुलिस को हुआ शक स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था के तहत खैरागढ़ पुलिस इतवारी बाजार MCP प्वाइंट पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान महाराष्ट्र नंबर की एक स्कॉर्पियो को रोका गया। पुलिस के मुताबिक कार में बैठे लोगों के जवाब और व्यवहार संदिग्ध लगे, जिसके बाद वाहन की गहन तलाशी ली गई। सीट के नीचे बना था सीक्रेट चेंबर तलाशी के दौरान पुलिस को स्कॉर्पियो की सीटों के नीचे एक विशेष रूप से बनाया गया गुप्त खांचा मिला। जब चेंबर को खोला गया तो उसमें ₹500 के नोटों के बंडल रखे हुए थे। गिनती के बाद कुल रकम ₹4,04,50,000 निकली। पुलिस ने स्कॉर्पियो की कीमत लगभग ₹18 लाख आंकी थी। गुजरात के दो लोग थे कार में सवार पुलिस के मुताबिक कार में 36 वर्षीय पारस पटेल, निवासी वडोदरा और 30 वर्षीय अक्षय पटेल, निवासी पाटन, गुजरात सवार थे। दोनों से बरामद नकदी के स्रोत और इसे ले जाने से संबंधित कागजात मांगे गए, लेकिन वे पुलिस के सामने वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। पुलिस ने नकदी और कार की जब्त दस्तावेज नहीं मिलने पर खैरागढ़ पुलिस ने नकदी और वाहन को जब्त कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक BNSS की धारा 106 के तहत कार्रवाई की गई। मामले की जानकारी आयकर विभाग को दी गई ताकि रकम के वास्तविक स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच की जा सके। क्या हवाला से जुड़ी थी रकम? मामले के सामने आने के बाद इतनी बड़ी नकदी को लेकर कई तरह के सवाल उठे। कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में इसके हवाला नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि पुलिस या आयकर विभाग की ओर से उपलब्ध शुरुआती जानकारी में यह पुष्टि नहीं की गई थी कि रकम हवाला कारोबार से ही जुड़ी थी। इसलिए इसे फिलहाल जांच का विषय ही माना जाना चाहिए। पुरानी घटना का वीडियो फिर हुआ वायरल इस मामले का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर फिर वायरल हुआ, जिसके चलते कई यूजर्स ने इसे हाल की घटना समझा। हालांकि विश्वसनीय रिपोर्ट्स के अनुसार मूल कार्रवाई 14 अगस्त 2025 को हुई थी। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी वाहन के गुप्त चेंबर से नोटों के बंडल निकालते दिखाई देते हैं। रकम के स्रोत की जांच बनी अहम सवाल ₹4 करोड़ से ज्यादा की नकदी एक गुप्त चेंबर में रखकर ले जाने और उससे जुड़े दस्तावेज न मिलने के कारण मामले ने पुलिस और आयकर विभाग दोनों का ध्यान खींचा। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध शुरुआती रिपोर्ट्स में इस नकदी के अंतिम मालिक या स्रोत को लेकर कोई निर्णायक आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया था। source – NDTV Madhya Pradesh-Chhattisgarh / Dainik Jagran / CG Now जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह अल्टीमेटम 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था। 26 सितंबर को समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अब 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। SIR विवाद को लेकर CJP ने खोला मोर्चा CJP ने यह कदम मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। 48 घंटे में इस्तीफा देने की रखी मांग 24 सितंबर को CJP ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं तो संगठन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा। अभिजीत दिपके ने दिल्ली में फिर से बड़े प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ तक ले जाने की बात कही थी। आगामी चुनाव रोकने की भी मांग CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की। संगठन ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची को पहले की स्थिति में बहाल करने जैसी मांगें भी रखीं। India Today के मुताबिक संगठन ने SIR से जुड़े रिकॉर्ड को स्वतंत्र निगरानी में रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद यह अल्टीमेटम उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form 6, electoral database तक पहुंच और SIR प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्र किसी नीति विवाद से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दी सफाई चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी चरणबद्ध कार्यक्रमों को भी आयोग ने सामूहिक रूप से मंजूरी दी। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। 48 घंटे की समयसीमा खत्म, अब 2 अक्टूबर से आंदोलन CJP का दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम 26 सितंबर को खत्म हो गया। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का आजाद मैदान संभावित स्थल है, हालांकि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति अभी अंतिम रूप से सुनिश्चित नहीं हुई है। CJP का कहना है कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। चुनाव आयोग विवाद पर राजनीतिक बहस तेज SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर CJP के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। फिलहाल CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। आगे इस विवाद का असर चुनावी और राजनीतिक बहस में किस तरह दिखाई देता है, इस पर नजर रहेगी। source – India Today / Hindustan Times / The Economic Times / The Statesman जय राष्ट्र न्यूज़

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