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रेलवे में 590 पैरामेडिकल पदों पर भर्ती शुरू, RRB ने खोला आवेदन पोर्टल

नई दिल्ली: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने भारतीय रेलवे में विभिन्न पैरामेडिकल पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। CEN 05/2026 के तहत कुल 590 रिक्तियों पर भर्ती की जाएगी। योग्य उम्मीदवार क्षेत्रीय RRB वेबसाइटों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर 2026 रात 11:59 बजे तय की गई है। 590 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत Nursing Superintendent, Pharmacist, Health & Malaria Inspector, Radiographer, Lab Assistant समेत कई पैरामेडिकल पद भरे जाएंगे। सभी RRB को मिलाकर कुल 590 पदों की घोषणा की गई है। किस पद पर कितनी वैकेंसी? भर्ती में सबसे ज्यादा 365 पद Nursing Superintendent के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा Pharmacist (Entry Grade) के 118 पद, Health & Malaria Inspector Grade-II के 43 पद, Lab Assistant Grade-II के 31 पद और Radiographer X-Ray Technician के 25 पद शामिल हैं। ECG Technician के 4 पद, Optometrist के 2 पद और Dialysis Technician तथा Audiologist & Speech Therapist के एक-एक पद पर भी भर्ती होगी। 14 अक्टूबर तक कर सकते हैं आवेदन RRB Paramedical Recruitment 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार 14 अक्टूबर 2026 रात 11:59 बजे तक आवेदन जमा कर सकेंगे। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 16 अक्टूबर निर्धारित की गई है। फॉर्म में सुधार का भी मिलेगा मौका आवेदन जमा करने के बाद उम्मीदवारों को अपने फॉर्म में जरूरी सुधार करने के लिए modification window भी दी जाएगी। यह सुविधा 17 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। उम्मीदवारों को आवेदन जमा करने से पहले सभी जानकारी सावधानी से जांचने की सलाह दी गई है। कितनी है आवेदन फीस? सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क ₹500 रखा गया है। CBT में शामिल होने के बाद इसमें से ₹400 वापस किए जाएंगे। SC, ST, Ex-Servicemen, PwBD, Female, Transgender और EBC उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹250 है। CBT में उपस्थित होने पर यह राशि लागू बैंक शुल्क काटने के बाद वापस की जाएगी। एक से ज्यादा आवेदन करने पर कार्रवाई RRB ने उम्मीदवारों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि एक ही या अलग-अलग RRB के लिए एक से अधिक आवेदन जमा न करें। एक से ज्यादा आवेदन मिलने पर उम्मीदवार की candidature रद्द की जा सकती है। साथ ही भविष्य की RRB या RRC परीक्षाओं से भी debar किया जा सकता है। CBT के जरिए होगा चयन पैरामेडिकल भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन Computer-Based Test यानी CBT के माध्यम से किया जाएगा। CBT की तारीख और आगे की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइटों पर बाद में जारी की जाएगी। योग्यता पद के अनुसार अलग-अलग हर पद के लिए शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है। Nursing, Pharmacy, Radiography, Laboratory और अन्य संबंधित मेडिकल क्षेत्रों के उम्मीदवार आवेदन से पहले अपने पद की eligibility, age limit और medical standard जरूर जांचें। आवेदन से पहले नोटिफिकेशन पढ़ना जरूरी उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले विस्तृत CEN notification पढ़ने की सलाह दी गई है। इसमें post-wise eligibility, pay level, medical standard, age limit, reservation और recruitment process की पूरी जानकारी दी गई है। रेलवे में मेडिकल क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए बड़ा मौका 590 पदों की यह भर्ती Nursing और Allied Health क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए रेलवे में सरकारी नौकरी पाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उम्मीदवारों को अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है। source – Railway Recruitment Board / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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‘बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक आतंक को मिला करारा जवाब’—PM मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ आतंकी कार्रवाई होने पर उसका जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की। सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उन्होंने इसे भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि उस कार्रवाई ने दुनिया के सामने भारत की नई counter-terrorism approach का उदाहरण पेश किया। बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक का किया जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते एक दशक में बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की नीति को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवादी भारत की तरफ आंख उठाते हैं तो उन्हें “करारा जवाब” दिया जाएगा। यह बयान भारत की मौजूदा आतंकवाद विरोधी नीति के संदर्भ में दिया गया। 2019 में हुई थी बालाकोट एयर स्ट्राइक फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में कार्रवाई की थी। भारत ने उस समय कहा था कि इस कार्रवाई में आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री ने अपने हालिया संबोधन में बालाकोट का उल्लेख सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के साथ किया। ऑपरेशन सिंदूर को बताया नई नीति का हिस्सा प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में एक नया मानक बता चुके हैं। उनके मुताबिक भारत पर आतंकी हमला होने की स्थिति में जवाब भारत अपनी शर्तों और अपने समय के अनुसार देगा। उन्होंने आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले ढांचे के खिलाफ सख्त रुख की बात भी दोहराई। आतंकवाद पर Zero-Tolerance Policy की बात ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance Policy के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को अधिक स्पष्ट और जवाबी कार्रवाई केंद्रित बनाया है। दिल्ली और मुंबई आतंकी हमलों को भी किया याद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 13 सितंबर 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और उसी वर्ष हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक आतंकवादी हमलों का सामना करता रहा है और इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पिछले वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति मजबूत की है। सेना के साहस की की सराहना प्रधानमंत्री ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद करते हुए भारतीय सेना के जवानों के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की और मिशन के बाद सुरक्षित वापस लौटे। ऑपरेशन सिंदूर पर पहले भी दे चुके हैं बयान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कई बार बयान दे चुके हैं। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़ा है। उन्होंने पहलगाम हमले के बाद की कार्रवाई के संदर्भ में भी कहा था कि आतंकवाद से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत सख्त कार्रवाई करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का संदेश प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के दस वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर को जोड़ते हुए सरकार की आतंकवाद विरोधी नीति को दोहराया और कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। source – Prime Minister of India / Press Information Bureau जय राष्ट्र न्यूज़

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US-Iran तनाव से कच्चा तेल फिर चढ़ा, Brent $106 के करीब; वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों की चिंता फिर बढ़ा दी है। 29 सितंबर 2026 को Brent crude लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूत होकर करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं WTI crude भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। लगातार दूसरे दिन महंगा हुआ कच्चा तेल मंगलवार के शुरुआती कारोबार में Brent crude करीब 105.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि बाद के कारोबार में यह 106 डॉलर से ऊपर चला गया। US West Texas Intermediate यानी WTI crude भी बढ़कर करीब 93.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कीमतों को सहारा दे रही है। US-Iran तनाव से बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक किसी स्थायी समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है। हालिया घटनाक्रम के बाद निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति फिर प्रभावित हो सकती है। Strait of Hormuz पर टिकी दुनिया की नजर वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर Strait of Hormuz पर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग मध्य पूर्व से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल पहुंचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा या सैन्य तनाव से shipping costs बढ़ सकती हैं और crude oil supply पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस इलाके से जुड़ी हर नई खबर का असर तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। Middle East से निर्यात में सुधार सितंबर में मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादकों से crude exports बढ़कर करीब 12.8 million barrels per day पहुंचने के शुरुआती आंकड़े सामने आए हैं। सऊदी अरब और UAE से बढ़ी सप्लाई ने बाजार को कुछ राहत दी है, लेकिन वैकल्पिक shipping arrangements की ऊंची लागत के कारण स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। वैश्विक बाजारों में बढ़ी बेचैनी महंगा तेल केवल energy market तक सीमित नहीं है। इससे दुनिया भर के शेयर बाजारों, currencies और bond markets पर भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी 10-year Treasury yield करीब 5.24% तक पहुंच गई है। तेल की बढ़ती कीमतों से inflation फिर तेज होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। डॉलर हुआ मजबूत मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी bond yields में तेजी के बीच डॉलर भी मजबूत बना हुआ है। Dollar Index करीब दो महीने के उच्च स्तर के आसपास पहुंच गया है। निवेशक अब अमेरिका के आने वाले inflation और employment data पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि इनके आधार पर Federal Reserve की आगे की ब्याज दर नीति का संकेत मिल सकता है। भारत पर भी पड़ सकता है असर भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। ऐसे में crude oil की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के import bill, inflation और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। तेल महंगा होने से transport, aviation, logistics और manufacturing कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। ₹96 प्रति डॉलर के करीब रुपया कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। सोमवार को रुपया करीब ₹95.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था और बाजार की नजर अब ₹96 के महत्वपूर्ण स्तर पर है। रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए RBI की संभावित दखल पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। महंगाई बढ़ने का भी खतरा अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो इसका असर ईंधन से लेकर परिवहन और उत्पादन लागत तक दिखाई दे सकता है। इससे कई देशों में inflation पर दबाव बढ़ सकता है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। अब बातचीत के नतीजों पर नजर तेल बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत तथा Strait of Hormuz की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है तो कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं किसी नए टकराव की स्थिति में crude oil में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है। source – Reuters Investing.com Australia जय राष्ट्र न्यूज़

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चिराग पासवान ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल, बोले—‘शर्मिंदगी महसूस होती है’; जानिए वायरल बयान का पूरा सच

पटना: बिहार में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हाल में सामने आई घटनाओं के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई है। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इसी बीच उनका “ऐसी सरकार का समर्थन करने पर शर्मिंदगी महसूस होती है” वाला वीडियो भी वायरल हो रहा है, लेकिन यह वीडियो मौजूदा सम्राट चौधरी सरकार के समय का नहीं बल्कि 26 जुलाई 2025 का है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता 24 सितंबर 2026 को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने जमुई और समस्तीपुर में महिलाओं से जुड़ी घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि अपने ही प्रदेश की बेटियों को असुरक्षित देखकर उन्हें शर्म आती है और सरकार में शामिल कोई भी व्यक्ति जवाबदेही से नहीं भाग सकता। उन्होंने दोषियों के साथ उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की, जिनकी लापरवाही सामने आती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से की बात चिराग पासवान ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाना होगा कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों सामने आ रही हैं और स्थानीय प्रशासन इन्हें रोकने में कहां कमजोर पड़ रहा है। जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं का किया जिक्र चिराग ने जमुई में हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की। उन्होंने समस्तीपुर मामले में भी सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि बिहार की बेटियां कम से कम अपने ही राज्य में खुद को असुरक्षित महसूस न करें और इसके लिए पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ‘सरकार का हिस्सा होने पर शर्म’ वाला वीडियो पुराना सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में चिराग पासवान यह कहते दिखाई देते हैं कि उन्हें ऐसी सरकार का समर्थन करने पर शर्म आती है, जहां अपराध नियंत्रण से बाहर हो रहा है। फैक्ट-चेक में सामने आया कि यह वीडियो 26 जुलाई 2025 का है। उस समय बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार थी। इसलिए इसे सितंबर 2026 में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर दिया गया नया बयान बताना सही नहीं है। जुलाई 2025 में क्या कहा था चिराग ने? 2025 में बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर चिराग पासवान ने तत्कालीन सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने हत्या, लूट, अपहरण और अन्य आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने उस समय कहा था कि अपराधों पर नियंत्रण नहीं होने के कारण उन्हें ऐसी सरकार का समर्थन करने पर शर्म महसूस होती है और प्रशासन को समय रहते कदम उठाने चाहिए। 2026 में बयान के शब्द अलग सितंबर 2026 में दिए गए हालिया बयान में चिराग पासवान ने “सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी” वाला पुराना वाक्य दोहराने के बजाय कहा कि उन्हें अपने प्रदेश की बेटियों को असुरक्षित देखकर शर्म आती है। इसलिए दोनों बयानों का संदर्भ अलग-अलग है। पुराना वीडियो कानून-व्यवस्था को लेकर 2025 में तत्कालीन सरकार पर की गई टिप्पणी है, जबकि मौजूदा प्रतिक्रिया महिलाओं की सुरक्षा और हालिया घटनाओं पर प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी है। विपक्ष ने वायरल वीडियो को बनाया मुद्दा वीडियो दोबारा वायरल होने के बाद RJD और जन सुराज से जुड़े नेताओं ने इसे मौजूदा सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाया। हालांकि बाद में सामने आए फैक्ट-चेक में स्पष्ट हुआ कि जिस वीडियो को मौजूदा बयान के रूप में शेयर किया जा रहा था, वह एक साल से ज्यादा पुराना है। सरकार छोड़ने की कोई घोषणा नहीं चिराग पासवान NDA के सहयोगी हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। उपलब्ध जानकारी में उन्होंने बिहार की मौजूदा सरकार से समर्थन वापस लेने या NDA छोड़ने की कोई घोषणा नहीं की है। उनकी हालिया टिप्पणी मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही पर केंद्रित रही है। वायरल दावे और मौजूदा बयान में अंतर पूरे मामले में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी हैं। चिराग पासवान ने सितंबर 2026 में बिहार की महिला सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर चिंता जरूर जताई है, लेकिन सरकार का समर्थन करने पर “शर्मिंदगी” वाला वायरल वीडियो जुलाई 2025 का है। इसलिए पुराने वीडियो को मौजूदा सम्राट चौधरी सरकार के खिलाफ दिया गया नया बयान बताना भ्रामक होगा। source – ANI / ABP News / Navbharat Times / SouthCheck जय राष्ट्र न्यूज़

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एक नाम, एक जज़्बा, एक अमर कहानी—शहीद भगत सिंह! 23 साल की उम्र में देश के लिए दे दी जान

नई दिल्ली: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रेरक क्रांतिकारियों में शामिल शहीद भगत सिंह की आज, 28 सितंबर को जयंती मनाई जा रही है। 1907 में पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव—जो अब पाकिस्तान में है—में जन्मे भगत सिंह ने महज 23 वर्ष की उम्र में देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। भारत सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 28 सितंबर 1907 और शहादत की तारीख 23 मार्च 1931 दर्ज है। बचपन से ही मिला देशभक्ति का माहौल भगत सिंह के पिता किशन सिंह और परिवार के अन्य सदस्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलनों से जुड़े थे। इसी माहौल का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा। युवावस्था में उन्होंने लाहौर के National College में पढ़ाई की और धीरे-धीरे क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गए। आगे चलकर वह नौजवान भारत सभा के प्रमुख आयोजकों और Hindustan Socialist Republican Association से जुड़े महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों में शामिल हुए। लाला लाजपत राय की मौत ने बदली दिशा 1928 में Simon Commission के विरोध के दौरान लाहौर में पुलिस लाठीचार्ज हुआ, जिसमें लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद भगत सिंह, शिवराम राजगुरु, सुखदेव और उनके साथियों ने पुलिस अधिकारी जेम्स स्कॉट को निशाना बनाने की योजना बनाई। पहचान में गलती के कारण 17 दिसंबर 1928 को सहायक पुलिस अधीक्षक जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या कर दी गई। असेंबली में बम फेंका, भागे नहीं 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की Central Legislative Assembly में बम फेंके। उनका उद्देश्य बड़ी संख्या में लोगों को मारना नहीं, बल्कि Public Safety Bill और Trade Disputes Bill के विरोध में ब्रिटिश सरकार का ध्यान खींचना था। बम फेंकने के बाद दोनों वहां से भागे नहीं। उन्होंने गिरफ्तारी दी और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाए। सरकारी ऐतिहासिक अभिलेखों में इस कार्रवाई को औपनिवेशिक शासन तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में दर्ज किया गया है। जेल में भी जारी रही लड़ाई गिरफ्तारी के बाद भगत सिंह ने जेल में भारतीय और यूरोपीय कैदियों के बीच कथित भेदभाव के खिलाफ अपने साथियों के साथ लंबी भूख हड़ताल की। उनकी मांगों में राजनीतिक कैदियों के साथ बेहतर व्यवहार, भोजन और स्वच्छता की उचित व्यवस्था तथा पढ़ने के लिए किताबों और अखबारों की सुविधा शामिल थी। यह आंदोलन जेल की परिस्थितियों को राष्ट्रीय चर्चा में ले आया। लाहौर षड्यंत्र केस में सुनाई गई फांसी सॉन्डर्स की हत्या से जुड़े Lahore Conspiracy Case में भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को मौत की सजा सुनाई गई। 23 मार्च 1931 को तीनों क्रांतिकारियों को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। उस समय भगत सिंह की उम्र केवल 23 वर्ष थी। आज 23 मार्च को उनकी स्मृति में शहीद दिवस भी मनाया जाता है। केवल क्रांतिकारी नहीं, विचारक भी थे भगत सिंह भगत सिंह की पहचान केवल हथियारबंद क्रांतिकारी के रूप में नहीं रही। वह लगातार पढ़ने और लिखने वाले युवा विचारक भी थे। उनकी जेल डायरी और लेखों में आजादी, समाजवाद, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर उनके विचार मिलते हैं। उन्होंने राजनीतिक बदलाव को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन से भी जोड़ा। 1929 की तस्वीर बनी पहचान टोपी और हल्की मूंछों वाली भगत सिंह की प्रसिद्ध तस्वीर 1929 में ली गई थी। यही तस्वीर आगे चलकर भारत में उनकी सबसे पहचानी जाने वाली छवियों में से एक बन गई। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उस समय उनकी उम्र करीब 21 वर्ष थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दी श्रद्धांजलि भगत सिंह की जयंती पर 28 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगत सिंह ने अपने साहस और शौर्य से स्वतंत्रता आंदोलन को नई धार दी और राष्ट्र के लिए उनका बलिदान युवाओं के साहस का प्रतीक है। क्यों आज भी जीवित है भगत सिंह का नाम? भगत सिंह का जीवन केवल 23 वर्षों का रहा, लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका ने उन्हें भारतीय इतिहास की स्थायी पहचान बना दिया। उनका नाम आज भी साहस, विद्रोह, देशभक्ति और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। यही कारण है कि उनकी जयंती और शहादत दिवस पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। source – Press Information Bureau / Ministry of Culture / Government of India जय राष्ट्र न्यूज़

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वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य की संदिग्ध मौत, जांच में जुटी पुलिस

मथुरा: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। 25 सितंबर को वह वृंदावन के वाराह घाट क्षेत्र स्थित एक आश्रम की चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। अस्पताल ले जाने के बाद उनकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है, लेकिन परिवार की शिकायत और सामने आए अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की हर पहलू से जांच जारी है। जबलपुर के रहने वाले थे दीपक लोधी मृतक की पहचान मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी दीपक लोधी के रूप में हुई है, जिन्हें वृंदावन में रसिक दुलारी शरण के नाम से जाना जाता था। उनकी उम्र करीब 25 वर्ष बताई गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार वह कुछ वर्षों से वृंदावन में रह रहे थे और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े हुए थे। चौथी मंजिल से गिरने के बाद अस्पताल ले गए साधक घटना 25 सितंबर की सुबह करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। दीपक चौथी मंजिल से नीचे गिरे, जिसके बाद आश्रम से जुड़े लोग उन्हें अस्पताल लेकर गए। गंभीर चोटों के चलते उनकी जान नहीं बच सकी। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने शुरू किए। CCTV फुटेज की जांच कर रही पुलिस पुलिस ने आश्रम और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में लेकर जांच की है। अधिकारियों के अनुसार शुरुआती फुटेज में दीपक को चौथी मंजिल से गिरते हुए देखा गया है। पुलिस फिलहाल इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला मानकर जांच कर रही है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया? 28 सितंबर तक सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दीपक की मौत का कारण Haemorrhagic Shock यानी अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है। रिपोर्ट में शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटों का भी उल्लेख है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कौन-सी चोटें गिरने से लगीं और घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं। कमरे से मिला उपकरण, जांच का अहम हिस्सा पुलिस के मुताबिक दीपक के कमरे से एक ग्राइंडर जैसा उपकरण भी बरामद हुआ है। शरीर पर एक अलग तरह की गंभीर चोट सामने आने के बाद इस उपकरण को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस ने अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि उपकरण का इस्तेमाल किसने और किन परिस्थितियों में किया। फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। परिवार ने भी उठाए सवाल दीपक के परिवार को घटना की सूचना दी गई और उनके वृंदावन पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। परिवार की ओर से पुलिस को एक प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। पुलिस का कहना है कि परिवार द्वारा उठाए गए बिंदुओं को जांच में शामिल किया जा रहा है और दीपक के साथ रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की गई है। पुलिस को देर से सूचना मिलने की भी जांच शुरुआती रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई कि घटना के बाद पुलिस को तत्काल सूचना नहीं मिली थी और पहले दीपक को अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस इस टाइमलाइन की भी पड़ताल कर रही है कि घटना कब हुई, अस्पताल कब ले जाया गया और पुलिस को इसकी जानकारी किस समय दी गई। हत्या या आत्महत्या? अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने अभी हत्या की पुष्टि नहीं की है। CCTV फुटेज के आधार पर जांच फिलहाल आत्महत्या की संभावना की ओर संकेत कर रही है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, कमरे से मिली वस्तुओं और परिवार की शिकायत की अलग-अलग जांच की जा रही है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले मौत के कारण या किसी साजिश को लेकर निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा। जांच पूरी होने पर साफ होगी मौत की पूरी कहानी पुलिस अब CCTV रिकॉर्डिंग, मोबाइल डेटा, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम निष्कर्षों को जोड़कर घटना से पहले की परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है। फिलहाल पोस्टमार्टम में मौत का चिकित्सकीय कारण अत्यधिक रक्तस्राव सामने आया है, लेकिन दीपक ने यह कदम क्यों उठाया या घटना से पहले वास्तव में क्या हुआ—इन सवालों का जवाब विस्तृत पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। source – Mathura Police / Aaj Tak / Hindustan / Times of India / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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‘नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, ई-रिक्शा चलाओ’—बृजेश पाठक का बयान वायरल, विपक्ष ने साधा निशाना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का रोजगार और स्वरोजगार को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लखनऊ में ‘भारत टैक्सी’ सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान पाठक ने लोगों से कहा कि वे केवल नौकरी के पीछे न भागें, बल्कि अपनी गाड़ी चलाकर कमाई करें और परिवार को भी समय दें। सोशल मीडिया पर उनके बयान को “नौकरी मत ढूंढो, ई-रिक्शा चलाओ” के रूप में शेयर किया जा रहा है, जिसके बाद विपक्ष ने उन पर युवाओं के रोजगार के मुद्दे को लेकर निशाना साधा है। 23 सितंबर को ‘भारत टैक्सी’ कार्यक्रम में दिया बयान यह बयान 23 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित ‘भारत टैक्सी’ सेवा के औपचारिक शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान दिया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल समेत कई नेता मौजूद थे। ‘भारत टैक्सी’ एक cooperative-led ride-hailing platform है, जिसमें ड्राइवरों को ‘सारथी’ के रूप में सदस्य और हिस्सेदार बनाने की व्यवस्था है। सेवा उत्तर प्रदेश में लखनऊ के साथ गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी शुरू की गई। बृजेश पाठक ने आखिर क्या कहा? वायरल वीडियो में बृजेश पाठक लोगों को स्वरोजगार के फायदे बताते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी के चक्कर में ही न पड़े रहें, बल्कि कुछ घंटे अपनी गाड़ी चलाएं, कमाई करें और दोपहर में परिवार तथा बच्चों के साथ समय बिताएं। उन्होंने दूसरे के अधीन नौकरी करने की तुलना में खुद का काम करने पर जोर दिया। उनकी टिप्पणी का संदर्भ ‘भारत टैक्सी’ के driver-owner model और स्वरोजगार से जुड़ा था। Times of India ने भी कार्यक्रम की रिपोर्ट में लिखा कि पाठक ने अपनी गाड़ी खुद चलाकर कमाई को स्थानीय परिवारों और अर्थव्यवस्था के भीतर रखने की बात कही थी। क्या उन्होंने सीधे ‘ई-रिक्शा चलाओ’ कहा था? कई सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ खबरों में बयान को “ई-रिक्शा चलाओ” के रूप में पेश किया गया है। हालांकि उपलब्ध विस्तृत रिपोर्ट में पाठक का सीधा उद्धरण “नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, अपना चार घंटा चलाओ” है और पूरा संदर्भ टैक्सी तथा अपनी गाड़ी चलाने से जुड़ा है। ‘भारत टैक्सी’ प्लेटफॉर्म में टैक्सी के साथ दो-पहिया और तीन-पहिया वाहन चालक भी जुड़ सकते हैं। इसलिए ई-रिक्शा वाली व्याख्या इसी व्यापक परिवहन मॉडल से जोड़ी जा रही है, लेकिन वायरल headline को पाठक का शब्दशः पूरा बयान मानना सही नहीं होगा। सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने किया पलटवार बृजेश पाठक के बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि देश का युवा देश चलाएगा और यदि उपमुख्यमंत्री को रिक्शा चलाने में रुचि है तो वह उन्हें एक रिक्शा उपहार में भेज सकते हैं। यह विपक्षी नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। कांग्रेस ने भी बयान पर उठाए सवाल कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी वायरल वीडियो शेयर करते हुए बृजेश पाठक की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि क्या उपमुख्यमंत्री अपने परिवार के युवाओं को भी यही सलाह देंगे। कांग्रेस की ओर से इस बयान को बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों के मुद्दे से जोड़कर देखा गया, जबकि पाठक का मूल भाषण ‘भारत टैक्सी’ के जरिए स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के संदर्भ में था। ‘भारत टैक्सी’ क्या है? केंद्र सरकार के अनुसार ‘भारत टैक्सी’ देश का पहला cooperative-led ride-hailing platform है। इसमें ड्राइवरों को केवल service provider नहीं बल्कि cooperative का stakeholder बनाने का मॉडल अपनाया गया है। प्लेटफॉर्म zero-commission मॉडल पर काम करता है, यानी ऐप के जरिए मिली ride के किराये में से driver-partner से commission नहीं काटा जाता। सरकार इसे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल के रूप में पेश कर रही है। उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में हुई शुरुआत 23 सितंबर को ‘भारत टैक्सी’ को उत्तर प्रदेश में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। लखनऊ के अलावा गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी सेवा की शुरुआत हुई। PIB के मुताबिक लॉन्च के समय उत्तर प्रदेश के लगभग 40 हजार ड्राइवर प्लेटफॉर्म से पंजीकृत हो चुके थे। कार्यक्रम में ड्राइवरों को cooperative model के जरिए आर्थिक भागीदारी देने पर जोर दिया गया। वायरल क्लिप बनाम पूरा संदर्भ बृजेश पाठक का बयान ऐसे समय वायरल हुआ है जब रोजगार और सरकारी नौकरियां उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय हैं। विपक्ष उनके शब्दों को युवाओं को नौकरी की जगह रिक्शा या टैक्सी चलाने की सलाह के रूप में पेश कर रहा है। दूसरी ओर पूरा कार्यक्रम और आधिकारिक संदर्भ देखें तो पाठक ‘भारत टैक्सी’ के driver-owner मॉडल और स्वरोजगार के विकल्प की बात कर रहे थे। इसलिए वायरल क्लिप का संदर्भ समझना जरूरी है—पाठक ने नौकरी के बजाय स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात जरूर कही, लेकिन “ई-रिक्शा चलाओ” वाला वाक्य सोशल मीडिया और मीडिया headlines में की गई संक्षिप्त व्याख्या है। source – PIB / Hindustan / ABP News / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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आज की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाए! दिल्ली में समर्थन में उतरे संगठन

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग उठी है। दिल्ली में अग्रवाल और वैश्य समाज से जुड़े संगठनों के साथ ग्लोबल वैश्य फेडरेशन, यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और अन्य संगठनों ने प्रदर्शन कर ज्ञानेश कुमार के कामकाज का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देकर उन्हें भारत रत्न देने की मांग की। दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन 27 सितंबर को दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किया गया। एक कार्यक्रम मंदिर मार्ग स्थित हिंदू महासभा भवन के सामने हुआ, जबकि जंतर-मंतर पर भी अग्रवाल और वैश्य समाज से जुड़े लोगों ने तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में नारे लगाए और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों का विरोध किया। भारत रत्न देने की रखी मांग प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की। इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन देने की बात भी सामने आई है। संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR में ज्ञानेश कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और इसी आधार पर वे उनके सम्मान की मांग कर रहे हैं। जय भगवान गोयल ने की CEC की तारीफ प्रदर्शन में शामिल जय भगवान गोयल ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए। गोयल ने SIR के जरिए मतदाता सूची में कथित रूप से अयोग्य नाम हटाए जाने का दावा किया और इसे महत्वपूर्ण काम बताया। हालांकि मतदाता सूची से बांग्लादेशी या रोहिंग्या नागरिकों के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जाने संबंधी उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं की गई है। विपक्ष पर भी साधा निशाना प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी नारे लगाए। संगठनों का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बना रहा है। यह प्रदर्शनकारी संगठनों का राजनीतिक आरोप है। अप्रैल में हिमंत बिस्वा सरमा भी कर चुके हैं ऐसी मांग यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग उठी है। अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कहा था कि SIR में योगदान के लिए ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। उनका बयान राजनीतिक प्रचार के दौरान दिया गया था। दूसरी ओर CEC के खिलाफ भी जारी है विरोध ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग ऐसे समय उठी है जब दूसरी ओर विपक्षी दल और कुछ नागरिक संगठन उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक विवाद बढ़ा है। ज्ञानेश कुमार के समर्थन और विरोध में अलग-अलग प्रदर्शन भी हुए हैं। इसलिए भारत रत्न की मौजूदा मांग को भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। मांग से तेज हुई नई राजनीतिक बहस एक तरफ ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगने वाले समूह प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थक अब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग लेकर सामने आए हैं। फिलहाल यह कुछ संगठनों और राजनीतिक समर्थकों की मांग है। भारत रत्न देने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से ज्ञानेश कुमार के नाम पर किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। source – Dainik Jagran / Navbharat Times / ABP News / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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शिवाजी पार्क में CJP के 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को अनुमति नहीं, अभिजीत दीपके ने किया ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान

मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिली है। मुंबई पुलिस ने कहा कि मौजूदा अदालती आदेशों और महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत वह शिवाजी पार्क में इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति देने के लिए अधिकृत नहीं है। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग से जुड़े सुधारों की मांग को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित करना चाहती थी। 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में होना था प्रदर्शन CJP ने गांधी जयंती के दिन मुंबई से अपने देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। संगठन की योजना शिवाजी पार्क में प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अपनी मांगें उठाने की थी। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के लिए आवेदन 26 सितंबर को कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे की ओर से जमा किया गया था। इसके बाद शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन ने आयोजकों को लिखित जवाब भेजा। पुलिस ने 2013 के हाई कोर्ट आदेश का दिया हवाला मुंबई पुलिस ने अपनी प्रतिक्रिया में 4 जनवरी 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और उसके बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। पुलिस का कहना है कि शिवाजी पार्क का इस्तेमाल मुख्य रूप से खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित है और वहां सार्वजनिक कार्यक्रमों पर सीमाएं लागू हैं। आयोजकों ने मैदान के इस्तेमाल के लिए आवश्यक BMC अनुमति भी जमा नहीं की थी। ट्रैफिक और ‘साइलेंस जोन’ भी बना वजह पुलिस ने कहा कि शिवाजी पार्क एक आवासीय क्षेत्र और silence zone के अंतर्गत आता है। बड़े प्रदर्शन से ध्वनि प्रदूषण और यातायात जाम की स्थिति पैदा हो सकती है। पुलिस ने यह भी कहा कि भीड़ और ट्रैफिक के कारण आसपास के अस्पतालों तक मरीजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। आयोजकों को मुंबई में किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई है। अभिजीत दीपके ने जताई नाराजगी CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए इसे नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं दिया जाता है तो CJP गांधी जयंती के दिन मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगी। यह CJP का राजनीतिक आरोप और घोषित विरोध कार्यक्रम है। ‘2 अक्टूबर को आंदोलन होकर रहेगा’ अनुमति नहीं मिलने के बाद भी CJP ने प्रदर्शन का कार्यक्रम वापस लेने की घोषणा नहीं की है। दीपके ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कार्यकर्ता गिरफ्तारी देंगे। 28 सितंबर को उन्होंने दोबारा पोस्ट कर “Jail Bharo Andolan in Mumbai, October 2, Shivaji Park” का ऐलान किया। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके अलावा संगठन ने Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूची से जुड़ी पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग भी रखी है। CJP ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में संस्थागत सुधार की भी मांग की है। ये संगठन की राजनीतिक मांगें हैं। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद इस पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रियाओं से जुड़ी एक जांच रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न प्रक्रियात्मक मुद्दों पर कई बार लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और प्रमुख SIR फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। अब 2 अक्टूबर पर नजर मुंबई पुलिस ने आयोजकों को वैकल्पिक स्थान तलाशने की सलाह दी है, जबकि CJP ने शिवाजी पार्क से ही जेल भरो आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2 अक्टूबर को CJP अपने घोषित कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ती है या प्रशासन और आयोजकों के बीच किसी वैकल्पिक स्थल पर सहमति बनती है। फिलहाल शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति उपलब्ध नहीं है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Mumbai Police जय राष्ट्र न्यूज़

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आशुतोष रांका की हिरासत पर NCP-SP ने उठाए सवाल, अनीश गवांडे ने कार्रवाई को बताया ‘असंवैधानिक’

गुवाहाटी: असम में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनके साथ कई कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में लिए जाने पर अब NCP (शरदचंद्र पवार) ने भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीश गवांडे ने पुलिस कार्रवाई को “अवैध और असंवैधानिक” बताते हुए रांका और अन्य कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की थी। रांका और उनके साथ हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को बाद में रविवार रात रिहा कर दिया गया। गुवाहाटी में बैठक से पहले हिरासत 27 सितंबर को CJP ने गुवाहाटी में अपनी पहली क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक आयोजित करने की योजना बनाई थी। पार्टी के मुताबिक बैठक शांतिपूर्ण तरीके से एक निजी परिसर में होनी थी, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले आशुतोष रांका और कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट्स में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्ट्स में 30 से अधिक, जबकि अन्य में 40 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई। NCP-SP प्रवक्ता अनीश गवांडे ने उठाए सवाल NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीश गवांडे ने गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिरासत का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रांका और अन्य CJP कार्यकर्ताओं को एक निजी आवास से बिना कानूनी नोटिस या स्पष्ट कारण बताए हिरासत में लिया गया। गवांडे ने इसे “illegal and unconstitutional” कार्रवाई बताते हुए सभी को तत्काल रिहा करने की मांग की। यह NCP-SP नेता का आरोप था; हिरासत को किसी अदालत ने अवैध घोषित नहीं किया है। ‘जंगल राज’ वाला आरोप भी लगाया गवांडे ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार की आलोचना करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर कड़ी टिप्पणी की और इसे कथित तौर पर “जंगल राज” से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि सरकार असहमति की आवाजों से डर रही है। ये NCP-SP प्रवक्ता के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। CJP ने भी हिरासत को बताया गलत CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि रांका और उनकी टीम को हिरासत में लेते समय कोई स्पष्ट कानूनी कारण नहीं बताया गया। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया गया तो वह खुद अन्य CJP सदस्यों के साथ असम पहुंचेंगे। रांका ने भी पुलिस वाहन से जारी वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर उन्हें असम के स्कूलों, काजीरंगा और अन्य स्थानीय मुद्दों को उठाने से रोकने का आरोप लगाया। बैठक की जगह भी बदलनी पड़ी CJP की बैठक पहले अथगांव के Assam Shree Parshuram Seva Sadan में होने वाली थी। बाद में आयोजकों ने आरोप लगाया कि दबाव के कारण आयोजन स्थल बदलकर असम सचिवालय के सामने Chowdhury Tilla करना पड़ा। वहीं दोपहर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनीश गवांडे के साथ CJP नेता सैफुर रहमान और नागरिक संगठन Asom Nagarik Sanmilan के परेश मालाकार भी मौजूद रहे। पुलिस ने नहीं दिया विस्तृत सार्वजनिक कारण 27 सितंबर को घटना के समय उपलब्ध प्रमुख रिपोर्ट्स में गुवाहाटी पुलिस की ओर से हिरासत का विस्तृत सार्वजनिक आधार सामने नहीं आया था। The Week ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि पुलिस ने उस समय हिरासत की वजह पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया था। 12 घंटे से ज्यादा बाद हुई रिहाई आशुतोष रांका और अन्य CJP कार्यकर्ताओं को 12 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखने के बाद रविवार रात रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद रांका ने पुलिस कार्रवाई को “illegal detention” बताते हुए कहा कि उन्हें उसी जगह वापस छोड़ा जाए जहां से हिरासत में लिया गया था। “अवैध हिरासत” उनका दावा है और इस पर किसी अदालत का निर्णय सामने नहीं आया है। हिरासत के दौरान भूख हड़ताल का दावा CJP ने दावा किया कि काहिलीपाड़ा स्थित पुलिस परिसर में रखे जाने के दौरान रांका और अन्य कार्यकर्ताओं ने हिरासत के विरोध में भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। पार्टी ने इस कार्रवाई को अपने राजनीतिक और सामाजिक अभियान को रोकने की कोशिश बताया। असम की राजनीति में बढ़ी हलचल रांका की हिरासत का विरोध केवल CJP तक सीमित नहीं रहा। NCP-SP के साथ कांग्रेस नेताओं ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल रांका और अन्य कार्यकर्ता रिहा हो चुके हैं, लेकिन यह घटनाक्रम असम में राजनीतिक बैठकों, विरोध के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई की सीमाओं को लेकर नई बहस का विषय बन गया है। source – Hindustan / Northeast Now / The Week / Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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