फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता एक सप्ताह बाद अस्पताल से डिस्चार्ज, घर लौटीं: न्याय की उम्मीद में परिवार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टर
द्वारा: विशेष संवाददाता
दिनांक: 07 जनवरी, 2026
फरीदाबाद, हरियाणा: फरीदाबाद में हुए दिल दहला देने वाले गैंगरेप मामले में पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। एक सप्ताह तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद वह अब घर लौट आई हैं। यह घटना दिसंबर 30, 2025 को हुई थी, जब दो आरोपियों ने एक 25 वर्षीय महिला को लिफ्ट देने के बहाने अपनी गाड़ी में बिठाया, उसका गैंगरेप किया और फिर चलती गाड़ी से फेंक दिया। पीड़िता तीन बच्चों की मां हैं और इस घटना ने पूरे देश में महिला सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का पूरा विवरण

यह दर्दनाक घटना फरीदाबाद के मेट्रो चौक के पास शुरू हुई। पीड़िता अपने पति से झगड़े के बाद मायके में रह रही थीं। घटना वाले दिन, वह अपनी मां से बहस के बाद घर से निकलीं और सेक्टर 23 में एक दोस्त के घर गईं। देर रात होने पर वह घर लौटने के लिए सार्वजनिक परिवहन की तलाश में थीं, लेकिन कोई बस या ऑटो नहीं मिला। ठंड और कोहरे के कारण सड़कें सूनी थीं। तभी एक सफेद मारुति सुजुकी ईको वैन (जो कुछ रिपोर्ट्स में एम्बुलेंस के रूप में बताई गई है) में सवार दो युवकों ने उन्हें लिफ्ट ऑफर की। पीड़िता ने सोचा कि यह सुरक्षित होगा, लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।

आरोपी उन्हें गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर एक सुनसान जगह ले गए, जहां उन्होंने बारी-बारी से लगभग 2-3 घंटे तक उनका गैंगरेप किया। एक आरोपी अंदर अपराध कर रहा था, जबकि दूसरा बाहर पहरा दे रहा था। अपराध के बाद, उन्होंने पीड़िता को राजा चौक के पास संजय गांधी मेमोरियल नगर में 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती गाड़ी से फेंक दिया। गिरने से पीड़िता को गंभीर चोटें आईं और वह खून से लथपथ हो गईं। कोहरे के कारण कोई मदद नहीं मिली, लेकिन उन्होंने किसी तरह अपनी बहन को फोन किया। बहन ने उन्हें उठाया और पहले बादशाह खान सिविल अस्पताल ले गईं, जहां से गंभीर हालत देखते हुए उन्हें फरीदाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया गया।

पीड़िता की चोटें और अस्पताल में इलाज

डॉक्टरों के अनुसार, पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी। उनकी दाहिनी आंख की सॉकेट फ्रैक्चर हो गई थी, कंधा फ्रैक्चर और डिस्लोकेट हो गया था। चेहरे पर दो गहरे कट लगे थे, जिनमें 20 से ज्यादा टांके लगाए गए। सूजन और खून बहने के कारण वह आईसीयू में भर्ती रहीं। इलाज करने वाले डॉक्टर अमित यादव ने बताया कि चोटें अपराध के दौरान विरोध करने और गाड़ी से फेंके जाने से लगीं। कंधे की सर्जरी की योजना थी, लेकिन पीड़िता की हालत स्थिर होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

अस्पताल में एक सप्ताह तक रहने के दौरान पीड़िता का परिवार उनके साथ था। बहन ने मीडिया को बताया कि यह घटना उनके परिवार के लिए सदमा थी, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें मजबूती दी। डॉक्टरों ने कहा कि पीड़िता अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा। मानसिक सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग की सलाह दी गई है।

अस्पताल से डिस्चार्ज और घर वापसी

7 जनवरी, 2026 को पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, जो घटना के ठीक एक सप्ताह बाद था। घर लौटने पर परिवार ने राहत की सांस ली। हालांकि, सुरक्षा के कारण उनका घर बदल दिया गया है और पुलिस सुरक्षा प्रदान कर रही है। पीड़िता की बहन ने कहा, “वह अब घर पर हैं, लेकिन डर अभी भी है। हम न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।” यह घर वापसी पीड़िता के लिए नई शुरुआत है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी बाकी है।

आरोपियों की पहचान और पुलिस कार्रवाई

डिस्चार्ज होने के अगले दिन, 8 जनवरी को पीड़िता ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड में दोनों आरोपियों को पहचान लिया। परेड ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई। आरोपी उत्तर प्रदेश के मथुरा और झांसी के रहने वाले हैं, जो एक प्राइवेट अस्पताल की एम्बुलेंस में ड्राइवर और हेल्पर के रूप में काम करते थे। पुलिस ने उन्हें घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया था और कोर्ट में पेश कर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया।

कोतवाली पुलिस स्टेशन में गैंगरेप, हमला और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस पीआरओ यशपाल यादव ने कहा कि गाड़ी बरामद कर ली गई है और फॉरेंसिक सैंपल लिए गए हैं। आरोपियों के ब्लड सैंपल से नशे की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज से भी सबूत मिले हैं। पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करने की योजना बना रही है।

महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर से सवाल उठाती है। हरियाणा जैसे राज्य में जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर ऊंची है, ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2024 में भारत में 31,000 से ज्यादा रेप केस दर्ज हुए, जिनमें से कई गैंगरेप थे। निर्भया मामले के बाद 2013 में कानून सख्त किए गए, जिसमें गैंगरेप के लिए उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है। लेकिन अमल में कमी दिखती है।

महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनीता शर्मा कहती हैं, “ऐसी घटनाओं में पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन समाज का रवैया बदलना जरूरी है। पुलिस को रात में गश्त बढ़ानी चाहिए और महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना चाहिए।” फरीदाबाद में इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जहां लोग न्याय की मांग कर रहे हैं।

परिवार की प्रतिक्रिया और समाज का समर्थन

पीड़िता का परिवार अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। बहन ने बताया कि घटना के बाद पूरे परिवार को सदमा लगा, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें संभाला। “वह बच्चों के लिए जीना चाहती हैं,” बहन ने कहा। स्थानीय एनजीओ ने पीड़िता को कानूनी और आर्थिक मदद देने का वादा किया है। सोशल मीडिया पर #JusticeForFaridabadVictim ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग समर्थन जता रहे हैं।

निष्कर्ष: न्याय की राह

फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता की घर वापसी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह अंत नहीं है। न्यायपालिका पर अब दबाव है कि आरोपियों को सख्त सजा मिले। यह घटना हमें याद दिलाती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधारना, सीसीटीवी बढ़ाना और जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। पीड़िता की कहानी हिम्मत की मिसाल है, जो अन्य महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित करेगी।

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