बगलामुखी जयंती 2025: शत्रुनाशिनी देवी की आराधना से मिलती है विजय और सुरक्षा

Powerful goddess Baglamukhi

हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें से एक हैं मां बगलामुखी। इन्हें तंत्र साधना की देवी भी कहा जाता है। मां बगलामुखी की उपासना विशेष रूप से शत्रु नाश, वाद-विवाद में विजय, मुकदमे में सफलता और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए की जाती है। हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। यह तिथि 2025 में कब पड़ रही है और मां की उपासना का क्या महत्व है, आइए विस्तार से जानते हैं।

बगलामुखी जयंती 2025 में कब है?

मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवें स्थान पर आती हैं। इन्हें ‘पीताम्बरा देवी’ भी कहा जाता है क्योंकि इनका वस्त्र, श्रृंगार और आसन पीले रंग का होता है। पीला रंग मां का प्रिय रंग है, और यही रंग तंत्र साधना में भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मां का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और रौद्र है। उनके हाथ में एक गदा होती है, जिससे वे शत्रुओं का संहार करती हैं।

देवी पार्वती के उग्र रूप के रूप में पूजित मां बगलामुखी की जयंती (Baglamukhi Jayanti 2025) हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 5 मई को मनाया जाएगा।

पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की शुरुआत 4 मई को सुबह 7:18 बजे होगी और इसका समापन 5 मई को सुबह 7:35 बजे होगा। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए बगलामुखी जयंती 5 मई को मनाई जाएगी और इसी दिन मां की पूजा और विशेष साधना की जाएगी।

पीले रंग का महत्व
मां बगलामुखी का स्वरूप सुनहरे पीले रंग का होता है, इसलिए उनकी पूजा में पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूजा सामग्री भी अधिकतर पीले रंग की होती है। साधना शुरू करने से पहले हरिद्रा गणपति की पूजा और उनका आह्वान किया जाता है।

साधना का ज्ञान ब्रह्माजी ने दिया था
पौराणिक कथाओं के अनुसार, बगलामुखी साधना का प्रथम उपदेश ब्रह्माजी ने सनकादि ऋषियों को दिया था। उनसे प्रेरित होकर देवराज नारद ने मां बगलामुखी की उपासना की। आगे चलकर भगवान विष्णु ने यह दिव्य विद्या भगवान परशुराम को प्रदान की थी।

बगलामुखी जयंती पर क्या करें पूजा विधि?

बगलामुखी जयंती के दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनें और पीले फूल, हल्दी, चना दाल, बेसन के लड्डू आदि का उपयोग कर पूजन करें।

पूजन विधि:

  • स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें।
  • मां बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें।
  • उन्हें पीले फूल, पीली मिठाई, हल्दी और चने का भोग अर्पित करें।
  • “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन व्रत और हवन का भी विशेष महत्व होता है।

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युद्ध से पहले पांडवों ने की थी आराधना

पांडवों ने भी मां बगलामुखी की आराधना की थी। ऐसा कहा जाता है कि महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को रात के समय मां बगलामुखी की साधना करने का सुझाव दिया था, जिससे उन्हें विशेष सिद्धि प्राप्त हो सके। मां बगलामुखी के तीन प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर भारत में स्थित हैं—मध्य प्रदेश के दतिया और नलखेड़ा (आगर मालवा) में दो, और तीसरा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में।

नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।

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