चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो देवी दुर्गा (Devi Durga) की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह नवरात्रि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है और नवमी तिथि तक चलती है। साल 2025 में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होगी और 7 अप्रैल तक चलेगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जो देवी दुर्गा के आगमन का प्रतीक है। लेकिन कलश स्थापना का सही समय और मुहूर्त जानना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत मुहूर्त में कलश स्थापना करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2025 की तिथि और समय
साल 2025 में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) 30 मार्च से शुरू होगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी, जो 30 मार्च को होगी। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 29 मार्च को सुबह 6:14 बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 30 मार्च को सुबह 8:30 बजे
- कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त: 30 मार्च को सुबह 6:14 बजे से 10:28 बजे तक
कलश स्थापना का महत्व
कलश स्थापना (Kalash Sthapana) नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। कलश को देवी दुर्गा (Devi Durga) का प्रतीक माना जाता है, और इसे स्थापित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। कलश स्थापना के दौरान जल, नारियल, आम के पत्ते और लाल कपड़े का उपयोग किया जाता है। कलश स्थापना के बाद देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और नवरात्रि के नौ दिनों तक उनकी आराधना की जाती है।
कलश स्थापना के दौरान क्या करें?
- सुबह जल्दी उठें: कलश स्थापना के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- कलश स्थापना: कलश स्थापना (Kalash Sthapana) के लिए सही मुहूर्त का चयन करें और विधि-विधान से कलश स्थापित करें।
- देवी दुर्गा की पूजा: कलश स्थापना के बाद देवी दुर्गा (Devi Durga) की पूजा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
- मंत्र जाप: देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।
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चैत्र नवरात्रि और कलश स्थापना
चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जो देवी दुर्गा के आगमन का प्रतीक है। कलश स्थापना के बाद नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। कलश स्थापना के दौरान सही मुहूर्त का चयन करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत मुहूर्त में कलश स्थापना करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
कलश स्थापना (Kalash Sthapana) के नियम और विधि
- पूजा स्थल की शुद्धता: सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें। शुद्धता से ही सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
- अष्टदल बनाएं: कलश स्थापना से पहले अष्टदल (8 पंखुड़ियों वाला रूप) बनाएं। यह नक्षत्रों और देवी-देवताओं की आशीर्वाद को आकर्षित करता है।
- कलश की सामग्री: कलश सोना, चांदी, तांबा या मिट्टी से बना होना चाहिए। इन सामग्रियों से बने कलश को शुभ माना जाता है।
- दिशा का ध्यान रखें: कलश स्थापना उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में करना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में कलश रखने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
- स्वास्तिक चिन्ह बनाएं: कलश पर स्वास्तिक चिन्ह बनाएं। यह शुभता का प्रतीक होता है और देवी दुर्गा के आशीर्वाद को आकर्षित करता है।
- कलश को सजाएं: कलश पर मौली लपेटें, आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर एक नारियल रखें। यह विधि कलश को शुद्ध और संपूर्ण बनाती है।
- अनाज बोएं: एक पात्र में मिट्टी डालें और उसमें 7 प्रकार के अनाज बोएं। यह अनाज धरती की उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक होते हैं।
- कलश में पूजा सामग्री डालें: कलश में लौंग, हल्दी, अक्षत (चिउड़े), सिक्का, इलायची, पान और फूल डालें। ये सभी चीजें समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक मानी जाती हैं।
- दीपक जलाएं: कलश स्थापना के बाद, दीपक जलाएं और मां दुर्गा की पूजा अर्चना शुरू करें। दीपक से वातावरण में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।
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