भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में जैन धर्म का विशेष स्थान है। इस धर्म में नवकार मंत्र (Navkar Mantra) को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। नवकार मंत्र न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का मार्ग भी है। इसे “पंच परमेष्ठी” की आराधना कहा जाता है, जिसमें पांच महान आत्माओं को वंदना की जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या है नवकार मंत्र, इसका महत्व और इसे जपने से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
क्या है नवकार मंत्र?
नवकार मंत्र (Navkar Mantra) जैन धर्म (Jain Dharma) का सबसे प्राचीन और पवित्र मंत्र है। नवकार महामंत्र जैन धर्म से गहराई से जुड़ा हुआ है। सरल शब्दों में कहें तो जैन धर्म (Jain Dharma) के अनुयायी इस पवित्र मंत्र का जप सामूहिक रूप से करते हैं। इस मंत्र का उच्चारण विशेष ध्यान और एकाग्रता के साथ किया जाता है। नवकार महामंत्र को ‘नमस्कार मंगल’ या ‘परमेष्ठी मंत्र’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मंत्र जैन धर्म के संतों—जैसे साधु-साध्वी और मुनियों—की वंदना स्वरूप होता है और उनके प्रति गहन श्रद्धा को प्रकट करता है।
नवकार मंत्र का अर्थ और भाव
इस मंत्र का अर्थ केवल वंदना करना नहीं है, बल्कि यह आत्मा की ऊँचाई तक पहुँचने की प्रेरणा देता है। नवकार मंत्र हमें बताता है कि जीवन में सच्चा आदर्श क्या है और किसे अपना गुरु मानना चाहिए। यह मंत्र यह भी सिखाता है कि किसी धर्म विशेष के प्रति भक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति।
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नवकार मंत्र कितनी बार जपें?
जैन धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, नवकार महामंत्र (Navkar Mantra) का जाप विषम और सम—दोनों प्रकार की गिनती में किया जा सकता है। साधक अपनी सुविधा और साधना के स्तर के अनुसार 1 से 25 बार तक इसका जप कर सकते हैं। हालांकि, इस मंत्र का जप करते समय मन की एकाग्रता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। इसलिए, जप से पहले ध्यान की मुद्रा में बैठकर मन को शांत करना और फिर मंत्र का उच्चारण करना चाहिए, जिससे इसका पूर्ण प्रभाव प्राप्त हो सके।
नवकार मंत्र का ऐतिहासिक महत्व
इतिहास में नवकार महामंत्र (Navkar Mantra) का उल्लेख कई प्राचीन शिलालेखों में मिलता है। शुरुआती शिलालेखों में ‘नमो अरहंताणं’ और ‘नमो सवे सिद्धाणं’ जैसे अंश मिलते हैं, जबकि समय के साथ शिलालेखों में पूरे नवकार मंत्र का उल्लेख मिलने लगा। यह मंत्र जैन धर्म का अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसे व्यक्ति अकेले या समूह में सामूहिक रूप से भी जप सकते हैं। नवकार मंत्र को ‘सिद्धिकारक मंत्र’ माना जाता है, यानी यह मंत्र न केवल आत्मिक शुद्धि करता है, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की भावना से जुड़ा हुआ है।
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