हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है। इनमें से एक महत्वपूर्ण व्रत है प्रदोष व्रत, जो भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए किया जाता है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और यह व्रत भक्तों को भगवान शिव (Lord Shiva) की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। जानते हैं कि प्रदोष व्रत का क्या महत्व है, इसकी पूजा विधि क्या है और इससे जुड़ी कथा क्या है।
कब है फाल्गुन मास का प्रदोष व्रत
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 11 मार्च को सुबह 8:12 बजे शुरू होगी और 12 मार्च को सुबह 9:11 बजे समाप्त होगी। इसलिए, प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) 11 मार्च को रखा जाएगा। चूंकि यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह मार्च महीने का पहला और फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत होगा।
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए किया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव (Lord Shiva) की विशेष पूजा की जाती है और उनकी कृपा प्राप्त की जाती है। इस व्रत को करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह व्रत भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। इस व्रत को करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) की पूजा विधि अत्यंत सरल और पवित्र मानी जाती है। इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
- सुबह स्नान:
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। - पूजा स्थल की सजावट:
अपने पूजा स्थल को फूलों और रंगोली से सजाएं। भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। - दीपक जलाएं:
पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती से भगवान शिव की आरती करें। - शिवलिंग की पूजा:
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद बिल्व पत्र, धतूरा और अकुआ के फूल चढ़ाएं। - मंत्रों का जाप:
भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। - कथा सुनें:
प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष व्रत कथा सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस कथा को सुनने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। - प्रसाद वितरण:
पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें। इस दिन भगवान शिव को प्रसाद के रूप में फल, मिठाई और पंचामृत अर्पित करें।
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प्रदोष व्रत के लाभ
प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं। यह व्रत भगवान शिव (Lord Shiva) की कृपा पाने का एक उत्तम साधन माना जाता है। इसे रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं। प्रदोष व्रत के माध्यम से भक्त अपने पापों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होते हैं। यह व्रत न केवल आत्मिक शुद्धि प्रदान करता है, बल्कि मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी देता है। साथ ही, इसे करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है।
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