Eknath Shinde controversy

एकनाथ शिंदे के ‘जय गुजरात’ के नारे पर विपक्ष ने मचाया बवाल, मांगा इस्तीफा, बचाव में उतरे सीएम फडणवीस, शिंदे ने भी दी सफाई

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) द्वारा जय महाराष्ट्र के साथ जय गुजरात का नारा देने से राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने शिंदे के इस नारे को मराठी अस्मिता पर हमला बताते हुए माफी की है। विपक्ष के इस हमले के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) भी एकनाथ शिंदे के बचाव में उतर आए और सफाई देते हुए कहा कि मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि वह ‘जय गुजरात’ बोलने मात्रा से कमजोर पड़ जाएगी।  बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बीते शुक्रवार को पुणे में जयराज स्पोर्ट्स एंड कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और अजित पवार भी मौजूद थे। कार्यक्रम में भाषण के दौरान डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मंच से ही ‘जय हिंद, जय महाराष्ट्र, जय गुजरात’ का नारा लगाया। शिंदे के इसी नारे का विपक्षी दलों ने विरोध किया है।  हर्षवर्धन सपकाल ने एकनाथ शिंद से मांगा इस्तीफा  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हर्षवर्धन सपकाल (Harshvardhan Sapkal) ने एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के इस बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जय गुजरात’ का नारा सिर्फ चाटुकारिता नहीं है, बल्कि हर गौरवान्वित महाराष्ट्रवासी का अपमान है। मराठी मानुष के साथ इस ‘विश्वासघात’ के लिए शिंदे को इस्तीफा देना चाहिए। सपकाल ने यह भी कहा कि यह बहुत शर्म की बात है कि उपमुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठा व्यक्ति ‘जय महाराष्ट्र’ की जगह ‘जय गुजरात’ का नारा लगा रहा है। यह चाटुकारिता और सियासी गुलामी का प्रतीक है।  मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि ‘जय गुजरात’ बोलने से कमजोर पड़ जाए  विपक्ष के इस आलोचना के बाद एकनाथ शिंदे के समर्थन में उतरते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा, ” विपक्ष शायद भूल गया कि चिकोड़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण करते हुए शरद पवार ने भी ‘जय महाराष्ट्र, जय कर्नाटक’ का नारा लगाया था, तो क्या उन्हें कर्नाटक ज्यादा पसंद है?” फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने विपक्ष की सोच को संकुचित बताते हुए कहा कि हमारी मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि वह ‘जय गुजरात’ बोलने मात्रा से कमजोर पड़ जाएगी। मराठी मानुष की सोच बहुत विशाल है, विपक्ष उसे सीमित नहीं कर सकता है। सबसे पहले हम सभी भारतीय हैं और हमें महाराष्ट्र पर गर्व है। इसका यह मतलब नहीं होना चाहिए कि हम दूसरे राज्यों का अपमान करें। ‘एक भारत’ का विचार ही हमारी एकता और संस्कृति की मजबूती है और इस विभाजित करने की हर कोशिश को नाकाम किया जाएगा। सीएम फडणवीस ने इस दौरान भाषा विवाद पर सख्त लहजे में कहा, “मराठी भाषा पर हर किसी को  गर्व करना चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा करना स्वीकार्य नहीं है। मराठी न बोलने पर लोगों से मारपीट कर कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।  इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? गुजराती समुदाय के सम्मान में लगाया नारा- शिंदे एकनाथ शिंदे ने भी अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि, ”उन्होंने यह नारा कार्यक्रम में मौजूद गुजराती समुदाय के सम्मान में लगाया था। जिस भव्य खेल परिसर का उद्घाटना हुआ उसके  निर्माण में गुजराती लोगों का भी योगदार है। हमारे राज्य में मराठी और गुजराती लोग मिलकर एकजुटता के साथ रहते हैं। इसीलिए मैंने भाषण के दौरान ‘जय हिंद’, ‘जय महाराष्ट्र’ और ‘जय गुजरात’ का नारा लगाया। ‘जय हिंद’ जहां हमारे देश की शान है, तो वहीं ‘जय महाराष्ट्र’ हमारे राज्य का गर्व है।  ‘जय गुजरात’ का नारा इसलिए लगाया क्योंकि गुजराती समाज को उनके योगदान के लिए सम्मान देना चाहता था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #EknathShinde #JaiGujarat #PoliticalControversy #MaharashtraPolitics #DevendraFadnavis #OppositionDemand #ShindeClarification

आगे और पढ़ें
BJP and Terrorists Alike

भाजपा और आतंकवादी एक, दोनों धर्म पूछकर हमला करते हैं…कांवड़ यात्रा पर सपा नेता के बयाद से यूपी के सियासत में उबाल 

सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन इस यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश में में सियासी पारा अभी से हाई हो गया है। कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाली दुकान मालिकों के नाम और उनकी पहचान सार्वजनिक करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश जारी होने के बाद से वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (SP) और भाजपा (BJP) आमने-सामने हैं और एक दूसरे पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगा रही है। समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक रविदास मेहरोत्रा (Ravidas Mehrotra) ने तो भाजपा (BJP) पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा (BJP) नेताओं की तुलना आतंकवादियों से कर दी। जिसके बाद विवाद और बढ़ गया है।   सपा (SP) के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा (Ravidas Mehrotra) ने राज्य की योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के रास्ते में आने वाले दुकानदारों से उनकी जाति और धर्म पूछना नजायज है। यह सरकार जिस तरह से कार्य कर रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भाजपा और आतंकवादियों में कोई अंतर नहीं है। ये दोनों धर्म पूछकर आम जनता पर हमला करते हैं। सपा विधायक के इस विवादित बयान ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। सपा विधायक के बयान पर भाजपा ने भी आक्रामक जवाब दिया है।  भाजपा ने राक्षस से की सपा की तुलना   भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी (Rakesh Tripathi) ने कहा कि सपा के नेता मजहबी तुष्टीकरण से खास वर्ग को साधने के लिए जानबूझकर इस तरह के बयान दे रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपने नेताओं को सनातन विरोधी बयान देने का निर्देश दे रखा है कि वो हिन्दुओं की आस्था पर हमला करें। जिससे पवित्र कांवड़ यात्रा में विघ्न डाला जा सके। यह उसी तरह का कार्य है, जैसे सतयुग में राक्षस् हमारे संतों के हवन-यज्ञ में विघ्न डालते थे। सपा को सनातन विरोधी यह प्रयास महंगा पड़ेगा। सरकार ने बताया क्यों नेम प्लेट जरूरी  विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने भी पूरे मामले पर स्थिति साफ की है। राज्य सरकार ने बयान जारी कर बताया कि दुकानों पर उनके मालिक का नेम प्लेट लगाने का निर्देश सिर्फ कांवड़ यात्रा के लिए ही नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने, ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिए गया है। इस मामले में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि हर धर्म के त्योहार को शांतिपूर्वक संपन्न कराना हमारी सरकार का लक्ष्य है। जो व्यवस्था बनाई गई है वह किसी खास धर्म के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है। विपक्ष इसका  अनावश्यक विरोध कर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है।  इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? कांग्रेस भी भाजपा पर हुई हमलावर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Ravidas Mehrotra) ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या दुकानदारों द्वारा लाइसेंस नंबर दिखाना पर्याप्त नहीं है? क्या नेम प्लेट लगाने की अनिवार्यता होनी चाहिए? यह भाजपा द्वारा एक खास धर्म के लोगों पर निशाना साधने का प्रयास है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे राज्य की साझी विरासत पर हमला बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार राज्य की शांति को भंग करना चाहती है, इसीलिए इस तरह के नियम लागू किए जा रहे हैं। भाजपा के इन हरकतों को राज्य की जनता अच्छी तरह से पहचानती है। इसी तरह मौलाना तौकीर रजा ने भी कहा कि जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं, तब खुले में मांस बिक्री का मैं भी विरोध करता हूं, लेकिन नेम प्लेट का उद्देश्य क्या है? यह राज्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ravidas Mehrotra #BJP #SPLeader #KanwarYatra #UPPolitics #ReligiousPolitics #Controversy #BreakingNews #IndiaNews

आगे और पढ़ें
Patna industrialist murder

Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight: पटना के मशहूर उद्योगपति गोपाल खेमका का मर्डर, बाइक सवार अपराधियों ने मारी सिर में गोली

जंगलराज के लिए मशहूर बिहार में एक फिर मौत का तांडव देखने मिला है। बिहार की राजधानी पटना में बदमाशों ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और कारोबारी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना शुक्रवार देर रात पौने बारह की बताई जा रही है। वारदात को पटना के गांधी मैदान थाना से कुछ दूर ट्विन टॉवर के पास अंजाम दिया गया (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight) है। घटना के तुरंत बाद उन्हें पास के अस्पताल लेकर जाया गया जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बदमाशों ने इस वारदात को उस समय अंजाम दिया है जब खेमका ट्विन टॉवर स्थित अपने घर लौटे थे। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि गोपाल खेमका पर हमला करने वाले आरोपी बाइक से आए थे, आरोपियों ने खेमका को सिर में सटाकर गोली मारी है। पुलिस के मुताबिक घटनास्थल पर ही  गोपाल खेमका की मौत हो गई। मौके पर पुलिस पहुंची है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।  बाइक सवार अपराधियों ने बेहद नजदीक से उनके सिर में मारी (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight गोली  शहर के जाने-माने उद्योगपति गोपाल खेमका की शुक्रवार देर रात गोली मारकर हुई हत्या के बाद लोग सदमे में हैं। बता दें कि यह खौफनाक घटना गांधी मैदान थाना क्षेत्र के रामगुलाम चौक के पास स्थित होटल पनाश के समीप (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight) हुई। जानकारी के मुताबिक रात तकरीबन 11:45 बजे गोपाल खेमका होटल पनाश के पास अपने घर जा रहे थे, तभी बाइक सवार अपराधी अचानक वहां पहुंचे और बेहद नजदीक से उनके सिर में गोली मार दी। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दीघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने मौके से एक खोखा और एक कारतूस बरामद किया है। पुलिस इलाके की घेराबंदी कर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पुलिस अफसरों ने बताया कि “घटना को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया है और इसमें पेशेवर अपराधियों का हाथ हो सकता है।” गोपाल खेमका मशहूर मगध अस्पताल के मालिक (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight) थे बता दें कि गोपाल खेमका पटना शहर के बड़े मशहूर और प्रतिष्ठित कारोबारी माने जाते थे। वो न सिर्फ प्रतिष्ठित उद्योगपति बल्कि समाजसेभी थे। वो मशहूर मगध अस्पताल के मालिक भी (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight) थे। बेशक उनकी हत्या से शहर में शोक की लहर दौड़ गई (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight) है। कई व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने इस घटना की निंदा की है और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। ध्यान देने वाली बात यह कि साल 2018 में गोपाल खेमका के बेटे गुंजन खेमका की भी हाजीपुर इंड्रस्ट्रीयल एरिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, रंजिश, जमीन विवाद या फिर किसी अन्य व्यक्तिगत दुश्मनी इस हत्याकांड की वजह हो सकती है। फ़िलहाल पुलिस हर सभी संभावित पहलुओं पर गहराई से जांच कर रही है।  इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म इस तरह सरेआम हत्या होना बेशक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight) है। ऐसे में पटना में बढ़ते अपराध को लेकर एक बार फिर प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। राजधानी में एक नामी व्यवसायी की इस तरह सरेआम हत्या होना बेशक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता (Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight) है। घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि इस बीच पीड़ित परिजनों को आरोप है कि इस घटना की सूचना मिलने के बाद भी स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर डेढ़ घंटे बाद पहुंची। पुलिस फिलहाल इस घटना की जांच कर रही है।  Latest News in Hindi Today Hindi Patna Industrialist Gopal Khemka Shot Dead in Broad Daylight #PatnaMurder #GopalKhemka #CrimeNews #BiharNews #IndustrialistKilled #BreakingNews #BroadDaylightMurder #BikeBorneAttack

आगे और पढ़ें
Nothing Phone 3

नथिंग फोन 3: प्रीमियम डिज़ाइन और फीचर्स के साथ आ रहा है यह फोन, जानिए क्या हैं इसके फीचर्स

नथिंग (Nothing) फोन कंपनी एक ब्रिटिश कंपनी है ,जो स्मार्टफोन (Smartphone) के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस का निर्माण करती हैं। इस कंपनी के मोबाइल फोन भारत के बाजार के लिए नए तो हैं, लेकिन यह कंपनी अपने फोन के डिजाइंस के लिए लोकप्रिय हो रही है। इन के मोबाइल फोन्स के फीचर्स भी अच्छे होते हैं। यह कंपनी अपने नए स्मार्टफोन (Smartphone) को लॉन्च करती रहती हैं। अभी भी नथिंग (Nothing) कंपनी ने एक नया फोन निकाला है। इसे खरीदने के इच्छुक लोग जल्द ही इसकी बुकिंग कर पाएंगे। जो भी लोग इसकी प्री-बुकिंग करते हैं उन्हें इस फोन  साथ नथिंग (Nothing) के अन्य ऑफर्स के साथ एयर वायरलेस एयरबड फ्री में दिए जा रहे हैं। आइए जानें इस कंपनी के नए फोन “नथिंग फोन 3 (Nothing phone 3)” के बारे में विस्तार से। नथिंग फोन 3 के फीचर्स (Nothing Phone 3 Features) और प्राइज के बारे में भी जानें। नथिंग फोन 3 के फीचर्स (Nothing Phone 3 Features): पाएं जानकारी  नथिंग फोन 3 (Nothing phone 3) का डिजाइन इसकी खासियत है। यह एक ट्रांसपेरेंट डिजाइन है और इसमें मेटल व ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। अगर बात की जाए इस फोन के बैक की तो इसकी बैक असिमेट्रिक है और इससे फोन का धूल और पानी से बचाव होता है। नथिंग फोन 3 के फीचर्स (Nothing Phone 3 Features) इस प्रकार हैं: डिस्प्ले  नथिंग फोन 3 (Nothing phone 3) में AMOLED डिस्प्ले है जो 6.67 इंच का है। इसमें पिक्सल रिजॉल्यूशन 260 x 2800 है और रिफ्रेश रेट एडीआर10+ और 120Hz है। कैमरा अगर बात करें इस फोन के कैमरे की तो इस फोन में यूजर्स को बहुत ही बेहतरीन कैमरा मिल रहा है। इस फोन में ट्रिपल कैमरा है ,जिसमें  50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप कैमरा, 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर और 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा है। यही नहीं इसमें अच्छे वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी मिल रही है। यानी अगर आपको फोटोग्राफी या वीडियो रिकॉर्डिंग का शौक है तो यह कैमेरा आपके लिए बहुत फायदेमंद है। बैटरी नथिंग फोन 3 (Nothing phone 3) में बैटरी जल्दी चार्ज हो जाती है और लम्बी चलती है। इसमें 5150mAh की बैटरी है। बस कुछ ही देर में यह पूरा चार्ज हो जाता है और आप पूरा दिन इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।  इसमें साथ ही इस फोन में  नथिंग (Nothing) ओएस 3.5 सॉफ्टवेयर है जो एंड्रायड है।  प्रोसेसर नथिंग फोन 3 (Nothing Phone 3) में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 8s जेन 4 प्रोसेसर है। इस स्मार्टफोन (Smartphone) में 8 कोर सीपीयू और एड्रेनो 825 जीपीयू भी आपको मिलेगा। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले कीमत नथिंग फोन 3 (Nothing phone 3) की कीमत अन्य ब्रांड के कीमती स्मार्टफोन (Smartphone) से भी अधिक है।  12GB RAM + 256GB स्टोरेज वाला यह फोन ग्राहकों को 79,999 रुपये में मिलेगा। लेकिन इसमें कुछ ऑफर्स भी मिल रहे हैं। बैंक और अन्य एक्सचेंज ऑफर्स के साथ यह कम कीमत में मिलेगा। अनुमान के मुताबिक उसके बाद यह आपको लगभग  63,000 रुपये का पड़ सकता है। जबकि 16GB RAM + 512GB स्टोरेज वाले फोन की कीमत 89,999 रुपये है। ऑफर्स के साथ यह ग्राहकों को 73,000 रुपये में मिलेगा। नथिंग फोन 3 (Nothing Phone 3) के लिए प्री आर्डर 15 जुलाई से शुरू हो रहे हैं। यह फोन फ्लिपकार्ट और कुछ ऑफलाइन स्टोर्स में उपलब्ध होंगे। यही नहीं, कंपनी प्री आर्डर करने वाले ग्राहकों को एक साल की एक्सटेंडेड वारंटी के साथ-साथ अन्य ऑफर्स भी दे रहे हैं। 4 जुलाई से आप इसे प्री आर्डर कर सकते हैं। अधिक जानकरी के लिए आप इनकी वेबसाइट को भी विजिट कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  Nothing Phone 3 #NothingPhone3 #PremiumDesign #TechLaunch #Smartphone2025 #NothingPhone #AndroidPhone #CarlPei

आगे और पढ़ें
Krishna Janmbhoomi Case HC Rejects Plea

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका खारिज की, मामला सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद (Shri Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah dispute) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला, जिसमें अदालत ने हिंदू पक्ष की उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग की थी। इस निर्णय से जहां मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है, वहीं हिंदू पक्ष अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। यह मामला संवेदनशील धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक विवाद से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। क्या थी याचिका? हिंदू पक्ष की ओर से यह याचिका वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने दायर की थी, जो खुद इस मुकदमे में वादी हैं। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में सूट नंबर 13 के अंतर्गत एक एप्लीकेशन (A-44) दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) को अदालत की सभी कार्यवाहियों में विवादित ढांचा के रूप में संबोधित किया जाए। इस आवेदन में कोर्ट के स्टेनोग्राफर को निर्देश देने की भी अपील की गई थी कि जब तक मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मस्जिद का उल्लेख केवल विवादित ढांचे के रूप में किया जाए। लेकिन अदालत ने इस प्रार्थना पत्र को अस्वीकार कर दिया। मुस्लिम पक्ष को मिली राहत हाई कोर्ट (High Court) के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है। मुस्लिम पक्ष की ओर से इस आवेदन पर लिखित आपत्ति भी दायर की गई थी, जिसमें इस मांग को असंवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली बताया गया। अदालत ने यह स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी कि इस स्तर पर मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करना उचित नहीं है।  अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए बताया कि वे कोर्ट के डिटेल्ड ऑर्डर का अध्ययन करने के बाद इस मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में ले जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि उनका लक्ष्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता को न्यायिक रूप से स्थापित करना है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद यह विवाद भारत के सबसे पुराने और संवेदनशील धार्मिक विवादों में से एक माना जाता है। मथुरा में स्थित 11 एकड़ भूमि को लेकर यह विवाद है, जिसमें से 2.37 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) स्थित है और शेष हिस्सा श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पास है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1669-70 में प्राचीन केशवदेव मंदिर को नष्ट कर इस मस्जिद का निर्माण करवाया था। उनका कहना है कि यही वह स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) का जन्म हुआ था। इसलिए वे चाहते हैं कि मस्जिद को हटाकर उस स्थान को पूरी तरह से मंदिर के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए। वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे को नकारता है। उनका कहना है कि मस्जिद का निर्माण पूरी तरह वैध और कानूनी रूप से मान्य है और वह जमीन उन्हें किसी विवाद के तहत नहीं दी गई थी। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ यह मामला पहली बार 1968 में सुर्खियों में आया था, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और शाही ईदगाह ट्रस्ट के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने अपने-अपने अधिकारों को मान्यता दी थी और विवाद खत्म करने का प्रयास किया गया था। लेकिन हाल के वर्षों में इस समझौते को चुनौती (Shri Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah dispute) दी जा रही है और कई नए मुकदमे दायर किए गए हैं। 2020 के बाद से कई नए याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह मांग की है कि पुराने समझौते को रद्द कर मंदिर भूमि को पूरी तरह से हिंदू ट्रस्ट (Hindi Trust) को सौंपा जाए। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) द्वारा याचिका A-44 को खारिज किए जाने से यह स्पष्ट है कि अदालत फिलहाल कोई पूर्वग्रह या भावनात्मक आधार पर फैसला नहीं लेना चाहती। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर बढ़ रहा है, जहां इसे संविधान, इतिहास और कानून के परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह न केवल न्याय सुनिश्चित करती है बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी बनाए रखने में अहम योगदान देती है। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस ऐतिहासिक विवाद पर क्या रुख अपनाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Shri Krishna Janmabhoomi #KrishnaJanmbhoomi #ShahiEidgah #SupremeCourt #HighCourtVerdict #HinduMuslimDispute

आगे और पढ़ें
Congress Sanitary Pad Scheme Sparks Controversy in Bihar Polls

बिहार चुनाव में महिलाओं को साधने की कोशिश: कांग्रेस की ‘सैनिटरी पैड स्कीम’ पर उठा विवाद

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने चुनावी वादों और अभियानों के ज़रिए जनता को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने राज्य की महिलाओं को साधने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। पार्टी ने माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) के तहत महिलाओं के बीच 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना बनाई है। हालांकि यह स्कीम अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है और विपक्ष खासतौर से बीजेपी (BJP) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। महिलाओं को जागरूक करने का दावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार (Rajesh Kumar, State Congress President) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को ध्यान में रखते हुए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश की 5 लाख महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Pads) पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो कि महिला कांग्रेस की अगुवाई में वितरित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है, जो आज भी एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। विवाद की वजह: पैकेट पर राहुल गांधी की तस्वीर इस सामाजिक अभियान पर विवाद तब शुरू हुआ जब वितरित किए जाने वाले सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर छपी हुई पाई (Rahul Gandhi photo on Sanitary Pads) गई। इससे इस योजना की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठने लगे। बीजेपी (BJP) ने इसे प्रचार का एक तरीका बताया है और कांग्रेस (Congress) पर चुनावी लाभ के लिए महिलाओं की समस्याओं का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने मीडिया से कहा कि यह कांग्रेस की चापलूसी की पराकाष्ठा और मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की तस्वीर सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर लगाकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने नेताओं को कहां स्थापित करना चाहती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर कांग्रेस केवल चुनावी स्टंट कर रही है। ‘माई बहिन मान योजना’ क्या है? कांग्रेस पार्टी की ‘माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) एक ऐसी सामाजिक और चुनावी पहल है, जिसके तहत पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया है। यह राशि विशेष रूप से वंचित, ग्रामीण और कामकाजी महिलाओं को दी जाएगी। इस योजना को पार्टी ने महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया है और कहा है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो इस योजना को लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सामाजिक आवश्यकता भारत जैसे विकासशील देश में विशेषकर बिहार जैसे राज्य में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता अब भी एक वर्जित विषय बना हुआ है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार बिहार में केवल 30% महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन का नियमित इस्तेमाल करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा और भी कम है। ऐसे में यदि कोई राजनीतिक पार्टी महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने का कार्य करती है, तो वह निश्चित रूप से एक ज़रूरी सामाजिक कदम कहा जा सकता है, बशर्ते इसमें राजनीतिक लाभ की मंशा हावी न हो। क्या है विशेषज्ञों की राय? स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता और शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसे राजनीतिक प्रचार के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना निंदनीय है।  कांग्रेस की 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल हो सकती थी, यदि इसे केवल महिलाओं की मदद और जागरूकता तक सीमित रखा जाता। लेकिन राजनीतिक छवि निर्माण के प्रयासों ने इस योजना को विवादों में ला खड़ा किया है। यह स्पष्ट है कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में महिलाएं एक बड़ा वोट बैंक बनकर उभरी हैं और सभी पार्टियां उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं। सवाल यह नहीं है कि सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटे जाएं या नहीं, सवाल यह है कि क्या महिलाओं की गरिमा को बनाए रखते हुए, उन्हें राजनीति से ऊपर रखकर सहायता प्रदान की जाएगी? चुनावी लाभ से परे जाकर महिलाओं के लिए सोचने का वक्त अब आ गया है। Latest News in Hindi Today Hindi Rahul Gandhi Sanitary Pads #BiharElections2025 #CongressScheme #SanitaryPadControversy #WomenVoters #PoliticalDebate

आगे और पढ़ें
A girl was brutally killed for refusing money demands;

Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter: बार-बार पैसे माँगने के चलते चाकू से रेता छात्रा का गला, पुलिस ने किया एनकाउंटर

लोग चंद पैसों के खातिर किसी का खून करने से भी बाज नहीं आते। ताजा मामला है उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र का जहाँ, बुधवार को रूपापुर में हाईवे किनारे स्थित विधान बसेरा ढाबा के कमरे में कंबल में लिपटा एक शव मिला था। शव की पहचान मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के मेंहदीगंज की रहने वाली 22 वर्षीय अलका बिंद के रूप में (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) हुई। शव मिलने से हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ढाबा में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को कब्जे में ले कर फुटेज खंगाल रही है। जानकारी के मुताबिक अलका बिंद रूपापुर (खोचवां) स्थित महाविद्यालय में एमएससी प्रथम वर्ष की छात्रा थी। रोज की तरह घर से महाविद्यालय जाने के लिए सुबह नौ बजे निकली। महाविद्यालय न जाकर विधान बसेरा ढाबा पर चली गई। वहां वो पहले से मौजूद युवक से मिली। दोनों ने साथ में नाश्ता किया। इसके बाद युवक ने ढाबा के कर्मचारी झल्लर यादव से एक रूम का इंतजाम करने के लिए कहा। उसने ढाबा परिसर में बने कमरे की चाभी उसे दे दिया।  शव का गला धारदार हथियार से रेता गया था और बिस्तर पर व कमरे में खून फैला हुआ (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) था इस बीच शाम को जब सफाईकर्मी प्रदीप कमरे की सफाई करने पहुंचा तब उसने युवती का शव कंबल में लिपटा देखा। शव का गला धारदार हथियार से रेता गया था। बिस्तर पर व कमरे में खून फैला हुआ (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) था। शव देखकर वो डर गया। ढाबा मालिक की सूचना पर डीसीपी आकाश पटेल, एसीपी  अजय श्रीवास्तव, थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय, फोरेंसिक टीम व डाग स्क्वायड मौके पर पहुंचे शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पूछताछ के लिए ढाबा के कर्मचारी को हिरासत में लिया। खैर, इस बीच पौधों की नर्सरी चलाने वाले चंद्रशेखर बिंद बेटी अलका के देर तक घर नहीं लौटने पर चिंतित हो उठे। इस बीच वो अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ उसकी तलाश करने लगे। हर जगह थक हारकर जब कहीं कुछ पता नहीं चला तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सोची। बेटी की गुमशुदगी की दर्ज कराने जब मिर्जामुराद थाना गए तो वहां उन्हें एक युवती का शव ढाबा में मिलने की सूचना मिली। आनन-फानन में वो उस ढाबे पर भी गये जहाँ शव होने की बात पता चली थी। उन्होंने उस कमरे में भी जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें मना कर दिया। इस बीच मोबाइल कवर व बैग से युवती की पहचान अलका के रूप में हुई। देखते ही देखते ढाबा पर ग्रामीणों के भीड़ जमा हो गई। शव न दिखाए जाने पर स्वजन ने हंगामा भी किया।  चाकू से गला रेतकर हत्या करने के बाद उसे आत्महत्या देने का रूप देने की कोशिश (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) की  युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने ढाबा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। सीसीटवी में पुलिस देखा कि एक युवक आटो में सवार होकर सुबह 9.08 बजे ढाबा पर (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) पहुंचा। युवती भी आटो से 9.23 आई थी। फुटेज में दोनों आते दिखाई दे रहे हैं लेकिन जाते हुए नजर नहीं आ रहा है। फुटेज में उसका चेहरा भी स्पष्ट नहीं हो रहा है। पुलिस ढाबा संचालक व एक कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस को कमरे में सब्जी काटने वाला चाकू मिला। पंखे की कुंडी से बंधा हुआ दुपट्टा का फंदा था। पुलिस को आशंका है कि युवक ने अलका की चाकू से गला रेतकर हत्या करने के बाद उसे आत्महत्या देने का रूप देने की कोशिश किया होगा। काशी-प्रयागराज हाइवे किनारे संचालित होने वाले कई ढाबों पर इसी तरह बिना किसी जांच-परख के युवक-युवतियों को कमरा दिया (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) जाता है इस बीच हैरत की बात यह कि अलका और उसके साथ आए युवक को कमरे देने के दौरान ढाबा के कर्मचारी ने उनसे कोई आइ़़डी नहीं ली। उनका नाम-पता भी किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) था। इसकी वजह से पुलिस को युवक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली पा रही थी। एसीपी अजय श्रीवास्तव ने आशंका व्यक्त किया है कि “ढाबा में बिना किसी रिकार्ड के कमरे दिए जाने की जानकारी अलका के साथ आए युवक को रही होगी। उसीने साजिश के तहत घटना को अंजाम दिया होगा।” स्थानीय लोगों की माने तो काशी-प्रयागराज हाइवे किनारे संचालित होने वाले कई ढाबों पर इसी तरह बिना किसी जांच-परख के युवक-युवतियों को कमरा दिया जाता है। बदले में उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। शव के पास से चाकू, मोबाइल कवर, चप्पल, हेयर क्लचर, ब्लड स्वैब, लैपटॉप बैग, डायरी एवं अन्य वस्तुएं मौके से बरामद किये (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) गए  शव के पास से चाकू, मोबाइल कवर, चप्पल, हेयर क्लचर, ब्लड स्वैब, लैपटॉप बैग, डायरी एवं अन्य वस्तुएं मौके से बरामद कर विधिक रूप से सील की गईं। इस बीच घटना के संबंध में मृतका के पिता द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में एफआईआर (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) दर्ज कर ली गई। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, होटल रजिस्टर में दर्ज विवरण, तकनीकी सर्विलांस व मृतका के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल्स के आधार पर आरोपी साहब बिंद पुत्र डंगर बिंद, निवासी ग्राम बरैनी, थाना कछवा बाजार, जनपद मिर्जापुर को इस हत्याकांड में नामजद कर उसकी तलाश शुरू कर दी। अभियुक्त की लोकेशन भदोही में स्थित अपनी बहन के घर पाई गई, जहां से उसे आज 03 जुलाई 2025 को मिर्जामुराद पुलिस टीम द्वारा हिरासत में लिया गया। इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म दोनों के मध्य प्रेम संबंध स्थापित हो (Girl Killed Over Money Demand, Accused Shot in Encounter) गए थे   गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त से… Read More

आगे और पढ़ें
CM Yogi Adityanath approves 'UPCOS'

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स भर्ती के लिए नया नियम: मुख्यमंत्री योगी ने दिया ‘UPCOS’ को मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों और उनके हितों की रक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (Universal Pharma-Coding System {UPCOS}) के गठन को मंजूरी दे दी गई है। यह निगम कंपनी एक्ट के तहत गठित किया जाएगा और इसका उद्देश्य न केवल आउटसोर्स भर्ती में पारदर्शिता लाना है, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। क्या है यूपीकॉस (UPCOS)? UPCOS यानी Uttar Pradesh Corporation for Outsourced Services राज्य का एक नया सरकारी निकाय होगा, जो अब राज्य में होने वाली सभी आउटसोर्स भर्तियों की निगरानी और काम-काज की देखभाल करेगा। यह निगम कंपनी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टरकिया जाएगा और एक स्वतंत्र नियामक संस्था (Independent Regulatory Body) की तरह काम करेगा। इसकी स्थापना से पहले आउटसोर्स भर्तियाँ निजी एजेंसियों के माध्यम से की जाती थीं, जिन पर कई बार पारदर्शिता और शोषण के आरोप लगे हैं। भर्ती प्रक्रिया में आएगा बदलाव अब यूपी में आउटसोर्स के ज़रिए की जाने वाली सभी नियुक्तियाँ UPCOS के माध्यम से ही होंगी। इसमें खास बात यह है कि भर्ती में SC, ST, OBC, EWS, महिलाओं, दिव्यांगजनों और पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं तलाकशुदा महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे सामाजिक रूप से पिछड़े और हाशिए पर खड़े वर्गों को समान अवसर मिल सके। मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष UPCOS की प्रशासनिक संरचना भी काफी स्पष्ट है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार निगम के अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव होंगे। इसके साथ ही एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और एक डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी। राज्य स्तर पर ही नहीं, मंडल और जिला स्तर पर भी भर्ती समितियों का गठन किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया सुचारु रूप से हो सके। भर्ती के लिए निजी एजेंसियों का चयन GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के जरिए किया जाएगा और ये एजेंसियाँ 3 साल की अवधि के लिए नियुक्त की जाएंगी। भर्ती में अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। UPCOS की एक खास भूमिका यह भी होगी कि यह रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करेगा। इसका मतलब है कि यह निगम केवल भर्ती ही नहीं करेगा, बल्कि भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखेगा। यदि कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है, तो निगम उन्हें ब्लैकलिस्ट, डिबार या दंडित कर सकेगा। इस कदम से एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और कर्मचारियों के साथ शोषण या भेदभाव की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि नियमित पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जाएगी, ताकि सरकारी ढांचे की स्थिरता बनी रहे और नियमित नियुक्तियाँ बाधित न हों। इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? क्यों जरूरी था UPCOS का गठन? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने बताया कि पिछले काफी समय से आउटसोर्स कर्मियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। वेतन कटौती, EPF/ESI का लाभ न मिलना, ओवरटाइम के बावजूद भुगतान न होना और अनुचित कार्य-घंटों जैसी समस्याएं आम थीं। इन समस्याओं के पीछे मुख्य रूप से भर्ती एजेंसियों की लापरवाही और मनमानी थी। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया कि एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए जो कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कर सके।  सामाजिक न्याय की दिशा में कदम UPCOS सामाजिक न्याय की दिशा में एक बेहतर निर्णय माना जा रहा है । इसमें वंचित वर्गों को न केवल भागीदारी दी गई है, बल्कि उन्हें प्राथमिकता भी दी गई है। इस तरह राज्य सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विकास और अवसर सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए। उत्तर प्रदेश में UPCOS का गठन आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल आउटसोर्स कर्मियों को अधिकार मिलेगा, बल्कि भर्ती प्रणाली में अनुशासन और स्थिरता भी आएगी। यह योजना सामाजिक समानताऔर श्रमिक हितों की रक्षा का एक संतुलित मॉडल पेश करती है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Yogi Adityanath #UPCOS #YogiAdityanath #UttarPradeshJobs #OutsourcingRecruitment #UPJobs #UPNews #GovernmentJobs

आगे और पढ़ें
Owaisi's Absence

Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?: क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी?

साल के अंत में बिहार में चुनाव होने हैं। चुनाव भले ही साल के अंत में होने हैं लेकिन सरगर्मियां अभी से गई हैं। सभी राजनीतिक दल अभी से अपना-अपना नफा नुकसान देखने लगे हैं। इसी कड़ी में हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी पैठ जमाने के लिए इंडिया गठबंधन में शामिल होना चाहते (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। इसके चलते एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने बाकायदा लालू यादव को पत्र लिखा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है जो ओवैसी लालू के साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? ओवैसी इंडिया गठबंधन में इसलिए भी शामिल होना हैं क्योंकि उनकी नजर मुस्लिम वोटों पर है। वैसे तो बिहार में हर बार की तरह इस बार भी सभी की नजर मुस्लिम वोटो पर है। हो भी क्यों न, बिहार में 50 से अधिक सीटों पर मुस्लिम वोटर्स काबिज जो हैं। बता दें कि मुस्लिम बिहार की कुल आबादी का 17 प्रतिशत है। ध्यान देने वाली बात यह कि बिहार में कभी भी मुस्लिम वोटर एकतरफा वोट कास्ट नहीं करते हैं। बिहार में मुस्लिम जेडीयू, आरजेडी को वोट करते रहे हैं। 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक इंडिया गठबंधन को मुस्लिम वोट सबसे ज्यादा मिलता रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को 87 प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट किया था। जबकि 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे। बात करें साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव की तो इस चुनाव में आरजेडी को ओवैसी की पार्टी ने काफी नुकसान पहुंचाया था। जिसका सीधा फायदा जेडीयू को हुआ था। जेडीयू पिछले चुनाव में मात्र 43 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। जिसके लिए वे चिराग पासवान की पार्टी को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि उनको जो सीटें मिली हैं उसमें सीमांचल का योगदान अधिक है। इसकी सबसे बड़ी वजह ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम थी। वैसे भी जिस राज्य में मुस्लिम आबादी अधिक होती है, वहां पर ओवैसी पहुंच जाते हैं और विपक्षी पार्टियों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं। कारण यही जो विरोधी दल उन्हें बीजेपी की बी भी कहते हैं। हालांकि ओवैसी और बीजेपी दोनों इसे सिरे से ख़ारिज करते हैं।  चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे कहने की जरूरत नहीं, साल 2020 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों के बिखरने से एनडीए को फायदा हुआ था। हालांकि ये बात आरजेडी ख़ारिज करती है। ऐसा इसलिए कि आरजेडी के मुखिया लालू यादव को लगता है कि बिहार में अमूमन अधिकतर मुस्लिम वोटर्स उन्हीं की पार्टी को वोट करता है। दरअसल, लंबे समय से लालू यादव बिहार में एमवाई समीकरण को साधे हुए (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। बड़ा कारण यही जो बिहार में उन्हें मुस्लिम वोटर्स के लिए किसी अन्य पार्टी से गठबंधन की जरूरत नहीं है। वो बात और है कि पिछली बार उन्हें कुछ सीटों का नुकसान हुआ था, लेकिन चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे। एक बड़ी वजह यह भी जो लालू यादव ओवैसी को बिहार में बड़ी चुनौती नहीं मानते।  इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) करेंगे वैसे भी बीजेपी कभी नहीं चाहेगी कि ओवैसी कभी इंडिया गठबंधन में शामिल हों। क्योंकि ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट करेंगे। इसमें नुकसान बीजेपी का (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) होगा। इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू ने वक्फ बिल का सपोर्ट किया था। ऐसे में इस बार उससे मुस्लिम वोटर्स के छिटकने का भी डर है। इसके बावजूद दोनों पार्टियों ने मुस्लिम वोटर्स को रिझाने की रणनीति बना ली है। दरअसल, बिहार की 17 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स की आबादी में से 10 प्रतिशत पसमांदा यानी अति पिछड़े मुस्लिम हैं। जेडीयू का मानना है कि नए वक्फ कानून से पसमांदा मुस्लिमों को फायदा होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू और बीजेपी का यह पैंतरा इंडिया गठबंधन के खिलाफ कितना कारगर सिद्ध होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi’ #Owaisi #LaluYadav #BiharElections2025 #AIMIM #BiharPolitics #Mahagathbandhan #MuslimVotes #PoliticalAnalysis

आगे और पढ़ें
SSC JE 2025

SSC Junior Engineer Recruitment 2025: इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए सुनहरा अवसर

अगर आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो आपके लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) ने जूनियर इंजीनियर (JE) के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। SSC जूनियर इंजीनियर रिक्रूटमेंट 2025 (SSC Junior Engineer Recruitment 2025) भर्ती सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा या डिग्री होल्डर्स के लिए सुनहरा मौका लेकर आई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 21 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। पदों की संख्या SSC की इस भर्ती प्रक्रिया (SSC Recruitment Process) के तहत कुल 1340 पदों के लिए वैकेंसी आई है। ये सभी पद जूनियर इंजीनियर (Junior Engineer) के हैं और इनका वर्गीकरण सिविल, मैकेनिकल तथा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अनुसार किया गया है। यह संख्या अस्थायी है और आवश्यकता के अनुसार इसमें बदलाव भी किये जा सकते हैं।  कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए वे सभी उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से सिविल, मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री प्राप्त की हो। इसके साथ ही उम्मीदवारों की आयु सीमा और अन्य पात्रता मापदंडों की विस्तृत जानकारी के लिए आयोग द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक है। आवेदन प्रक्रिया – स्टेप बाय स्टेप गाइड SSC JE भर्ती के लिए आवेदन ऑनलाइन मोड में किया जा सकता है। यहां नीचे बताए गए स्टेप्स को फॉलो करके उम्मीदवार आसानी से आवेदन कर सकते हैं: आवेदन शुल्क चयन प्रक्रिया SSC JE भर्ती की चयन प्रक्रिया में मुख्यतः दो चरण होते हैं: इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? क्यों है SSC JE एक बेहतर करियर विकल्प? SSC JE सरकारी क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित पद है। इसमें न सिर्फ स्थिरता मिलती है, बल्कि अच्छी सैलरी, प्रमोशन की संभावना, और विभिन्न भत्तों का भी लाभ मिलता है। यह पद तकनीकी पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को देश की आधारभूत संरचना के विकास में योगदान देने का अवसर प्रदान करता है। सरकारी नौकरी (Government Jobs) की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए SSC JE 2025 भर्ती (SSC Junior Engineer Recruitment 2025) एक सुनहरा अवसर है। भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और मेरिट-आधारित होती है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलता है। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त करें और अंतिम तिथि से पहले आवेदन कर दें। Latest News in Hindi Today Hindi SSC Junior Engineer Recruitment 2025 #SSCJE2025 #SSCRecruitment #JuniorEngineer #EngineeringJobs #GovernmentJobs #SSCJEVacancy #JE2025

आगे और पढ़ें
Translate »