high paying nurse job

High-paying nurse jobs : ऑस्ट्रेलिया-ब्रिटेन समेत इन 5 देशों में है नर्सों की भारी डिमांड, 8 लाख महीने मिल सकती है तनख्वाह

हेल्थकेयर सेक्टर में नर्सों की अहम भूमिका होती है। उनके सहयोग के बिना यह हेल्थकेयर सेक्टर की कल्पना भी नहीं की जा सकती। बता दें कि नर्स का काम मरीजों की देखभाल करना होता है। याद करिए कोविड का वो दौर जब नर्सों ने पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन किया था। बेशक 19 महमारी के दौर में तो दुनिया ने नर्सों की अहमियत को बड़े अच्छे से समझा भी है। खैर, भारतीय हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए देश में नौकरी के अवसर तो होते ही हैं, साथ ही साथ दुनिया के कई देशों में भी जाकर वे काम कर सकते हैं। कुछ ऐसे देश हैं, जहां सबसे ज्यादा नर्सों की जरूरत है। अच्छी बात यह है कि यहां पर नर्सों को भारी भरकम तनख्वाह भी दी जा रही है। गौरतलब हो कि हाल ही में कई देशों में नर्सों की भारी कमी देखी गई है। जाहिर सी बात है, कमी होने की वजह से नर्सों की डिमांड बढ़नी ही है। सो, विदेशों में नर्सों को लाखों की सैलरी दी जा रही है। आपको बता दें कि दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहाँ नर्सों की बड़ी दरकार है और वो नर्सों को मोटी रकम देने के लिए भी तैयार हैं। आइये एक नजर डालते हैं उन देशों पर जहाँ भारतीय नर्सों की बड़ी डिमांड है।  इन टॉप 5 देशों में है नर्सों की सबसे अधिक डिमांड ऑस्ट्रेलिया में नर्सों को सालाना मिलते हैं तकरीबन 96 लाख रुपये  ऑस्ट्रेलिया में हेल्थकेयर इंडस्ट्री सबसे बड़ी इंडस्ट्री है। अन्य देशों के मुकाबले यहाँ नर्सों को अच्छी सैलरी भी दी जाती है। हैरत यह कि इन सब के बावजूद यहाँ नर्सों की भारी कमी है। एक आकलन के मुताबिक आगामी दस वर्षों में ऑस्ट्रेलिया को करीब 80 हजार नर्सों की जरूरत पड़ने वाली है। ऐसे में इस वक्त ऑस्ट्रेलिया में नर्सों की सबसे अधिक डिमांड है। यहां नर्स की औसतन वार्षिक सैलरी 82,942 डॉलर यानी लगभग 72 लाख रुपये है। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि अनुभवी नर्स की सैलरी 1,10,433 डॉलर लगभग 96 लाख रुपये तक है। इस तरह महीने की तनख्वाह तकरीबन 8 लाख रुपये होते हैं। आयरलैंड में नर्सों को नागरिकता लेने का भी मिलता है विकल्प  आयरलैंड में नर्सों की काफी डिमांड है। नर्सों के लिए यह देश लोकप्रिय होते जा रहा है। बता दें कि साल 2023 में यहाँ कुल 72,543 नर्सें थीं। बड़ी बात यह कि यहाँ विदेशी नर्सों को नागरिकता के लिए अप्लाई करने का भी विकल्प दिया जाता है। यही नहीं, नागरिकता मिलने पर पेंशन भी दी जाती है। यहां पर नर्सों की औसतन सालाना सैलरी 49,966 डॉलर यानी लगभग 43 लाख रुपये है।  ब्रिटेन में है नर्सों की बड़ी डिमांड  ब्रिटेन में नर्सिंग जॉब के लिए सबसे अधिक वैकेंसी निकली है। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल के अंत तक तकरीबन 10 हजार नर्सों की कमी हो सकती है। कारण यही है जो हेल्थकेयर सेक्टर में लगातार इनकी डिमांड बढ़ है और बढ़ती डिमांड को पूरा करने हेतु विदेशों से भी नर्सों की हायरिंग की जा रही है। बात करें लंदन जैसे शहर में नर्स की सालाना तनख्वाह की तो नर्स की औसतन सालाना तनख्वाह लगभग 30 हजार पाउंड (लगभग 33 लाख रुपये) से लेकर 47 हजार पाउंड (लगभग 51 लाख रुपये) तक है यानी के साल के लगभग 50 लाख रुपये। इसे भी पढ़े:– राजस्थान लोक सेवा आयोग में लेक्चरर पदों पर भर्ती: जानें आवेदन करने के लिए क्या है योग्यता? दुबई हेल्थ अथॉरिटी ने नर्सों को हायर करना शुरू कर दिया है  दुबई यूएई का सबसे बड़ा शहर है। जानकारी के मुताबिक साल 2040 तक दुबई की आबादी 58 लाख हो जाएगी। इस वजह से शहर के हेल्थकेयर सिस्टम  में सुधार किया जा रहा है। कारण यही जो यूएई में नर्सों की बढ़ती मांग को देखते हुए दुबई हेल्थ अथॉरिटी ने नर्सों को हायर करने के लिए प्रोग्राम भी शुरू किया है। इसी कड़ी में यूएई में नर्सों की डिमांड भी बढ़ रही है।यहां पर भी नर्सों की सैलरी पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है। सैलरी भी लगभग सऊदी अरब जितनी ही है।  सऊदी अरब में नर्स की नौकरी करने के हैं बहुत से फायदे मिडिल ईस्ट के इस देश में नर्स की नौकरी करने के बहुत से फायदे हैं, मसलन उन्हें रहने के लिए घर दिया जाता है। कंपनियां फ्री हवाई टिकट देती हैं, छुट्टियों के पैसे मिलते हैं और सबसे बड़ी बात यह कि आय पर कोई टैक्स भी नहीं लगता है। गल्साडोर के मुताबिक सऊदी अरब में नर्सों की औसतन मासिक सैलरी 1,414 डॉलर यानी लगभग 1.23 लाख रुपये है। कुछ नर्सों की सैलरी 1,551 डॉलर यानी कि लगभग 1.35 लाख रुपये तक भी पहुंच जाती है। Latest News in Hindi Today Hindi news High Paying Nurse Job #NursingJobsAbroad #NursesInDemand #UKNurseJobs #AustraliaNursing #HighSalaryNurses #GlobalNursing #HealthcareCareers #WorkAbroad #NurseSalary #NursingOpportunities

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Champions Trophy 2025

बारिश की वजह से Champions Trophy 2025 के 2 मुकाबले हो चुके हैं रद्द, भारत और न्यूजीलैंड मैच भी कहीं….

भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy 2025) में गजब का खेल दिखाया है। दोनों पड़ोसी मुल्कों को टीम इंडिया ने पहले जमकर धोया। पहले बांग्लादेश को पटखनी दी और फिर पाकिस्तान को ऐसी धूल चटाई कि दोनों टीमों का ही सेमीफइनल खेलने का सपना चकनाचूर हो गया। खैर, अब टीम इंडिया की भिड़ंत न्यूजीलैंड की टीम से होनी है। बता दें कि ग्रुप ए के आखिरी लीग मैच में इन दोनों ही टीमों के मुकाबले पर सबकी नजर गड़ी है। सबकी दिलचप्सी इस बात में है कि कौन बाजी मरेगा और अपने ग्रुप में टॉप पर पहुंचेगा। बता दें कि 2 मार्च (रविवार) को दुबई में भारत और न्यूजीलैंड के बीच चैंपियंस ट्रॉफी का आखिरी लीग मैच दुबई में खेला जाना है। इससे पहले खराब मौसम की वजह से 10 में 2 मैच रद्द हो चुके हैं। बरसात की वजह से एक भी गेंद डाले बिना मैचों को रद्द करना पड़ा। बता दें कि इस बीच ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान का मैच भी बारिश भेंट चढ़ गया और पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में प्रशंसकों के मन में यह सवाल जरूर कौंध रहा होगा कि भारत आखिरी मुकाबले में मौसम किस तरह होगा? क्या यह मुकाबला पूरा होगा यह फिर ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान मैच की तरह यह भी बारिश की भेंट चढ़ जाएगा। जाहिर सी बात है बरसात मैच का मजा किरकिरा कर देती है।  ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान का मैच बारिश की वजह से आधा ही खेला जा सका (Champions Trophy 2025) बता दें कि आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy 2025) में सबसे पहले साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया का रापलपिंडी में खेला जाने वाला मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ा। मैच में टॉस भी नहीं कराया जा सका और दोनों टीमों को 1-1 अंक बांटने पर मजबूर होना पड़ा। फिर इसके बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच खेला जाने वाला मुकाबला भी बारिश की वजह से नहीं हो पाया। हालांकि दोनों टीमें पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थी। ऐसे में मैच रद्द होने से खास असर नहीं पड़ा। ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान का मैच बारिश की वजह से आधा ही खेला जा सका। मैच पूरा नहीं होने की वजह से दोनों टीमों में बराबर के अंक बांटे गए और ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में पहुँच गई।  इसे भी पढ़ें:– अफगानिस्तान ने इंग्लैंड को किया सेमीफाइनल की रेस से बाहर, इस टीम से भिड़ेगी टीम इंडिया  भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला दुबई में होना है (Champions Trophy 2025) अहम बात यह कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला दुबई में होना है। एक्यू वेदर की माने तो रविवार 2 मार्च को दुबई में तापमान 24 डिग्री रहने वाला है और  ह्यूमिडिटी 47 फीसदी रहेगी। मैच के दौरान हवा 29 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है। कुल-मिलाकर रविवार को खेले जाने वाले इस मैच पर बारिश का साया नहीं है। जानकारी के मुताबिक पूरे दिन धूप खिली रहेगी। जानकारी के लिए बता दें कि मुकाबले के दौरान बारिश की संभावना महज 5 फीसदी ही जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार राहत भरी बात यह कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाने वाला मुकाबला बारिश की भेंट नहीं चढ़ेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi News Champions Trophy 2025 #ChampionsTrophy2025 #CricketUpdates #RainDelay #MatchCanceled #INDvsNZ #SportsNews #CricketFever #LiveCricket #TournamentUpdate #CricketLovers

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Trump Zelensky conflict

Trump Zelensky conflict: ट्रंप हुई तीखी नोकझोंक के बाद जेलंस्की ने माफ़ी मानाने से किया इंकार, दंग रह गई दुनिया

28 फरवरी 2025 को ओवल ऑफिस में मीटिंग के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका को पूरी दुनिया के सामने जमकर खरी-खोटी (Trump Zelensky conflict) सुनाई। दरअसल, ओवल ऑफिस में जब मीटिंग हो रही थी तभी जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में जमकर बहस हुई। इस बहस का वीडियो अब जमकर वायरल हो रहा है। बहस के बाद जेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि वह कतई माफी नहीं मांगेगे। जेलेंस्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “यह स्थिति दोनों देशों के लिए ठीक नहीं थी। महत्वपूर्ण यह कि जेलेंस्की और ट्रंप के बीच यह बहस ओवल ऑफिस में कैमरों के सामने हुई। गौर करने वाली बात यह कि जब यह लड़ाई हुई तब अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओक्साना मार्करोवा ने सिर पर हाथ रख लिया। यह वीडियो अब वायरल हो गया है। लगभग 46 मिनट चली प्रेस कॉन्फ्रेंस में आखिरी 8 मिनट तक तीखी नोकझोंक हुई। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रंप और जेलेंस्की के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर मतभेद उभरे, जिससे बातचीत तनावपूर्ण हो गई। ट्रंप ने जेलेंस्की पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया था, जबकि जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के वादों पर सवाल उठाए। इस विवाद के बाद ट्रंप ने बैठक को समाप्त कर दिया और जेलेंस्की से व्हाइट हाउस छोड़ने के लिए कहा गया।  जेलेंस्की ने अपनी गलती मानने से किया इनकार (Trump Zelensky conflict)  बहस बाद जेलेंस्की ने फॉक्स न्यूज के साथ हुए साक्षात्कार में जब शो के होस्ट ब्रेट बेयर ने जेलेंस्की से पूछा कि क्या वह इस मीटिंग में जो कुछ हुआ उसके लिए माफी मांगेंगे? इस प्रश्न पर जेलेंस्की ने किसी भी गलती से इनकार (Trump Zelensky conflict) कर दिया। उन्होंने कहा कि “नहीं, मैं राष्ट्रपति और अमेरिकी जनता का सम्मान करता हूं। हमें खुला और ईमानदार रहना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि हमने कुछ गलत किया है। शायद कुछ चीजों पर मीडिया से अलग चर्चा करनी चाहिए।” खैर, जेलेंस्की से जब पूछा गया कि क्या यह बहस यूक्रेन के हित में रही? तो उन्होंने कहा कि “यह दोनों पक्षों के लिए सही नहीं थी। मैं स्पष्ट हूं कि अमेरिका और यूरोप हमारे सबसे अच्छे दोस्त हैं और रूस के राष्ट्रपति पुतिन हमारे दुश्मन हैं।” अपनी बात पर जोर देते हुए जेलेंस्की ने कहा कि “ट्रंप ही नहीं हम खुद इस युद्ध को रोकना चाहते हैं, क्योंकि हम इस युद्ध को लड़ रहे हैं और इससे पीड़ित हैं। ट्रंप पहले कहते रहे हैं कि वह इस युद्ध को रोक सकते हैं और हम चाहते हैं कि वह ऐसा करें। जेलेंस्की से जब पूछा गया कि क्या यह बातचीत बंद दरवाजों के पीछे होनी चाहिए थी और क्या उन्हें इसका अफसोस है? इसपर जेलेंस्की ने कहा कि “हां मुझे लगता है कि यह सही नहीं था।” ट्रंप यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता बंद (Trump Zelensky conflict) करने पर विचार कर रहे हैं- ट्रंप  प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस विवाद के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने यूक्रेन को दी जा रही सहायता में संभावित धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच तेज करने का निर्णय लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि एलन मस्क और उनकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी पहले से ही यूक्रेन को प्रदान की गई बड़ी आर्थिक और सुरक्षा सहायता में संभावित समस्याओं की जांच कर रहे थे, लेकिन अब इन प्रयासों में तेजी लाई जाएगी। इस अधिकारी ने यह भी कहा कि “वे पहले से ही समस्याएं खोज रहे हैं। यही नहीं, इसके अलावा ट्रंप यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता बंद (Trump Zelensky conflict) करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इस मीटिंग के बाद एलन मस्क ने भी इसकी जांच के संकेत दिए थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह पता लगाने का समय आ गया है कि यूक्रेन को भेजे गए सैकड़ों अरब डॉलर का वास्तव में आखिर क्या हुआ? इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल  लाखों लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने हेतु ट्रंप ने जेलेंस्की को लगाई कड़ी फटकार  बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को ओवल ऑफिस में एक मीटिंग के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पर जमकर (Trump Zelensky conflict) बरसे। उन्होंने लाखों लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने के लिए जेलेंस्की को फटकार लगाई। ट्रंप ने कहा कि “यूक्रेनी राष्ट्रपति की कार्रवाई तीसरा विश्व युद्ध भड़का सकती है। इसके बाद जेलेंस्की ने अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण खनिज समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना अचानक व्हाइट हाउस छोड़ दिया। ट्रंप ने इस समझौते की मांग की थी और कहा था कि “यह यूक्रेन को भविष्य के समर्थन के लिए एक शर्त है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Zelensky conflict #TrumpZelenskyConflict #ZelenskyTrumpClash #UkraineCrisis #TrumpVsZelensky #GlobalTensions #PoliticalShowdown #USUkraineRelations #WorldShocked #DiplomaticRift #BreakingNews

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India-EU Free Trade

India-EU Free Trade: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हाई टैरिफ से जुड़ी लगातार धमकियों के बीच यूरोपियन यूनियन और भारत इस सहमति पर पहुंचे कि इस साल के आखिर तक द्विपक्षीय फ्री ट्रेड (India-EU Free Trade) एग्रीमेंट पर मुहर लग जाने की कोशिश की जाएगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि “दोनों देशों ने अपने अधिकारियों को इसे लेकर निर्देश दिए हैं।” तो वहीं उर्सुला डेर ने भी एक थिंक टैंक इंवेंट में कहा कि “दोनों पक्ष इसे आखिरी रूप देने पर विचार कर रहे हैं। यह दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा समझौता होगा।” इस बीच दोनों पक्षों और प्रतिनिधि स्तर की हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय के सचिव (वेस्ट) तन्मय लाल ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि “इसे लेकर द्विपक्षीय बातचीत बहुत गंभीर रवैये से हो रही है, दोनों नेताओं की ओर से राजनीतिक संदेश साफ है कि यह समझौता अहम है और जल्द ही जल्द इसपर अमल करना जरूरी है। बता दें कि प्रेसिडेंट उर्सला के साथ यूरोपीय संघ (ईयू) के 27 देशों में से 22 देशों के आयुक्त भारत दौरे पर आए हैं। बड़ी बात यह कि पहली बार ईयू का इतना बड़ा दल किसी दूसरे देश की यात्रा पर आया है। गौरतलब हो कि उर्सला की तरफ से यूरोपीय आयोग की सत्ता दोबारा संभालने के बाद पहली बार वह विदेश दौरे पर अपनी टीम के साथ निकली हैं।  जिओ पॉलिटिकल (India-EU Free Trade) चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों पक्षों को रणनीतिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाना होगा- प्रेसिडेंट उर्सला दिल्ली में अपनी यात्रा (India-EU Free Trade) के दूसरे दिन एक थिंक टैंक को संबोधित करते हुए उर्सुला ने इस पार्टनरशिप को लेकर साफ कहा कि “जिओ पॉलिटिकल चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों पक्षों को रणनीतिक संबंधों को अगले स्तर तक ले जाना होगा और यूरोपियन यूनियन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ किए गए समझौतों की तरह भारत के साथ भविष्य में सुरक्षा पार्टनरशिप की संभावनाएं तलाश रहा है।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस दौरे में ईयू के प्रतिनिधियों और भारत सरकार के मंत्रियों के बीच कई बैठकें हुई, इनमें व्यापार, निवेश,ग्रीन ग्रोथ, टेक्नोलॉजी, सेक्योरिटी और स्कीलिंग में सहयोग का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है। इस दौरान लाल ने बताया कि ट्रेड और टेक्नोलॉजी काउंसिल के तहत तीन वर्किंग ग्रुप्स ने भी खासी उपलब्धि हासिल की। ग्रीन एनर्जी, डिजिटल गवर्नेंस, रणनीतिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में प्रगति हासिल हुई है।  इंडो पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा को लेकर दोनों पक्ष एकमत (India-EU Free Trade) हुए हैं  इसके आलावा भारत- ईयू भारत -पश्चिम एशिया – यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए ठोस कदम उठाए जाने को लेकर भी सहमत हुए हैं। दोनों पक्ष डिफेंस और सेक्योरिटी के सेक्टर में भी और नज़दीक आए हैं। इंडो पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा को लेकर दोनों पक्ष एकमत (India-EU Free Trade) हुए हैं और ईयू ने इंडिया पैसिफिक ओशन्स इनीशिएटिव से जुड़ने का फैसला किया है। इसके साथ ही दोनों इंडो पैसिफिक और अफ्रीका में सस्टेनेबल विकास के लिए ट्रायंगुलर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर भी काम करेंगे। यही नहीं, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, हाई परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग, 6 जी, डीपीआई पर जोर दियाा गया है। इसके तहत इलेक्ट्रिक व्हिकल, ग्रीन/रिन्यूएबल हाइड्रोजन में सहयोग को लेकर आगे बढ़े हैं। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के एक करार को हरी झंडी दी गई है। इस बीच भारत 6 G अलायंस और ईयू 6 जी स्मार्ट नेटवर्क के बीच करार पर भी हस्ताक्षर हुए।  इसे भी पढ़ें :– सिम कार्ड खरीदना बना सकता है जी का जंजाल, हो सकती है 3 साल की जेल और लाखों जा जुर्माना दोनों पक्षों ने काउंटर टेररिज्म और आतंकवाद फायनेंसिंग के खिलाफ सहयोग को और गहरा करने पर बल दिया इसके अलावा दोनों पक्षों ने India-EU Free Trade) भारतीय नेवी और ईयू मैरीटाइम सेक्योरिटी एंटीटीज़ के बीच साझा अभ्यास को लेकर संतोष जताया। ईयू ने पेस्को (परमानेंट स्ट्रक्चर्ड को- ऑपरेशन प्रोजेक्ट ज्वाइन करने के भारत की रूचि का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने काउंटर टेररिज्म और आतंकवाद फायनेंसिंग के खिलाफ सहयोग को और गहरा करने पर बल दिया। इसके अलावा दीर्घकालिक वीजा स्कीम्स और मोबिलिटी और माइग्रेन के मैकेनिज्म की मजबूती पर बात हुई। दोनों पक्षों ने न सिर्फ फ्री और ओपन इंडो पैसिफिक को समर्थन देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन फोरम और ऑफशोर विंड एनर्जी समिट आयोजित करने का भी फैसला लिया। एक तरफ जहाँ दोनों पक्षों ने यूक्रेन में स्थाई शांति की वकालत की तो वहीं दूसरी तरफ इजरायल और फिलिस्तीन के मामले पर टू स्टेट सॉल्यूशन के साझे विजन को भी दोहराया। Latest News in Hindi Today Hindi news India-EU Free Trade #IndiaEUTrade #FreeTradeAgreement #IndiaEurope #TradeDeal #GlobalEconomy #FTA #IndiaTrade #EUIndiaRelations #EconomicGrowth #TradeBoost

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