इस साल यानी 30 जून 2025 से कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Yatra) की शुरुआत होने जा रही है। भारी तादाद में श्रद्धालु कैलास मानसरोवर के दर्शन हेतु जाते हैं। इस दौरान कैलाश दर्शन के साथ ही लोग मानसरोवर झील (Mansarovar Lake) और राक्षस ताल (Rakshas Tal) के भी दर्शन करते हैं। यह दोनों झीलें 2-3 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति हैं। सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह कि मानसरोवर झील और राक्षस ताल एक ही वातावरण, एक जैसी ऊंचाई पर होने के बावजूद भी दोनों एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। कारण यही जो सदियों से लोग जानना चाहते हैं कि एक स्थान पर होने के बावजूद भी ये दोनों झीलें इतनी अलग क्यों हैं। महत्वपूर्ण बात यह कि धार्मिक शास्त्रों में बताए गए तथ्यों को विज्ञान नहीं मानता। यह तो ठीक, लेकिन विज्ञान भी इस बात का जवाब नहीं दे पाया है कि आखिर एक स्थान पर होने के बावजूद भी ये मानसरोवर और राक्षस ताल में इतना फर्क क्यों है? ऐसे में आइये जानते हैं दोनों में क्या है अंतर?
- हिंदू धर्म की मान्यताओं (Hindu mythology) के अनुसार मानसरोवर झील (Mansarovar Lake) भगवान शिव और माता पार्वती की झील है, जबकि राक्षस ताल का संबंध रावण से माना जाता है।
- तिब्बती राक्षस ताल को शापित झील और मानसरोवर को पवित्र झील मानते हैं।
- एक तरफ जहाँ मानसरोवर झील के जल को पीने के लिए कतारें लगती हैं तो वहीं राक्षस ताल के ज्यादा निकट कोई नहीं जाता।
- कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कई सारे लोग मानसरोवर झील के पास ध्यान लगाते हैं तो वहीं राक्षस झील के पास जाने से भी कतराते हैं।
- मानसरोवर झील के बीच कोई द्वीप नहीं हैं जबकि राक्षस ताल के पास डोला, दोशारबा, लचाटो नाम के द्वीप भी हैं।
- राक्षस ताल (Rakshas Tal) का पानी अत्यंत अशांत और मन को विचलित करने वाला माना जाता है।
राक्षस ताल (Rakshas Tal) एक तरह से खारे पानी की झील है

बता दें कि राक्षस ताल (Rakshas Tal) एक अर्धचंद्राकार खारे पानी की झील है। अर्धचंद्राकार आकार अंधेरे का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक यह वही स्थान है, जहां राक्षस राजा रावण ने भगवान शिव की तपस्या और उनकी आराधना की थी। कहा जाता है कि भगवान शिव के अनन्य भक्त रावण ने खुद राक्षस ताल का निर्माण किया था। रावण अपनी इच्छा पूरी करने हेतु कैलाश पर्वत गया था। कैलाश जाने से पहले उसने राक्षस ताल में स्नान किया और वहीं ध्यान लगाया। इस बीच जब रावण ने राक्षस ताल में डुबकी लगाई, तो झील आसुरी शक्तियों के कब्जे में आ गई और नकारात्मकता से भर गई। कहते हैं कि राक्षस झील का पानी इतना खारा कि इसके अंदर मछली या कोई दूसरा जानवर रह ही नहीं सकता। झील का हल्के धूसर रंग का है। लोगों का दावा तो यहाँ तक है कि कुछ महीनों बाद राक्षस झील के पानी का रंग बदल जाता है।
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किसी को भी राक्षस ताल (Rakshas Tal) के पास जाने की नहीं है इजाजत

यही नहीं, राक्षस ताल (Rakshas Tal) के ठीक करीब एक छोटी नदी भी है। जिसे गंगचु नदी कहते हैं। यह नदी मानसरोवर झील (Mansarovar Lake) और राक्षस ताल को जोड़ती है। ऐसी मान्यता है कि मानसरोवर से पवित्र जल ले जाने हेतु इस नदी को ऋषियों द्वारा बनाया गया था। राक्षस ताल का पानी खारा होने के साथ-साथ विषैला भी है। जानकारों की माने तो इसमें स्नान करने अथवा इसका पानी पीने से जान तक जा सकती है। कारण यही जो राक्षस ताल के इर्द गिर्द चीन सरकार ने बाड़ लगाकर राक्षस ताल के क्षेत्र को घेर रखा है। किसी को भी इस झील के पास जाने की इजाजत नहीं है। इसे सिर्फ दूर से ही देखा जा सकता है। बता दें कि राक्षस ताल, कैलाश पर्वत के पश्चिम में तकरीबन 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस ताल के आसपास डोला, लाचतो, तोपसरमा और दोशर्बा नामक 4 द्वीप हैं। तिब्बती भाषा में इसे लांगगर चो या ल्हानाग त्सो के नाम से जाना जाता है। इसका है जहर की काली झील। ऐसा इसलिए कि तिब्बतियों का ऐसा मानना है कि इसका पानी शापित है। इसे छूने मात्र से भी बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिये लोग इसके आसपास भी नहीं भटकते।
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