देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस (Congress) के नेता राहुल गाँधी ने जातिगत जनगणना (Caste census) के मुद्दे को बड़े जोर-शोर उठाया था। यही नहीं, इस मुद्दे के सहारे बीजेपी पर दबाव भी बनाया था। वैसे भी कांग्रेस लंबे समय से जाति जनगणना की मांग कर रही थी। खैर, बाद में अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में जातिगत जनगणना कराने का फैसला कर सबको चौंका दिया है। कहने की जरूरत नहीं, मोदी सरकार का यह फैसला देश में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकता है। यह तो ठीक, लेकिन इसने सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस पार्टी दोनों के अंदर ही बेचैनी पैदा कर दी है। मजे की बात यह कि इस फैसले को लेकर दोनों दलों के नेताओं की अलग-अलग राय सामने आई है। कई नेता ऐसे भी हैं जो सवाल भी उठा (Caste census sparks internal revolt in Congress) रहे हैं। विशेषकर अगड़ी जातियों के नेताओं में इस बात की चिंता है कि इससे उनकी राजनीतिक ताकत कम हो सकती है। जानकारी के मुताबिक इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने इस बाबत एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के इस फैसले से कांग्रेस पार्टी के भीतर की फूट पड़ गई है।
कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की एक बैठक में अगड़ी जाति के नेता (Caste census sparks internal revolt in Congress) रहे नदारद

कांग्रेस पार्टी (Congress) में फूट का आलम यह है कि हाल में हुई कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की एक बैठक में अगड़ी जाति के नेता नदारद (Caste census sparks internal revolt in Congress) रहे। इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि ये नेता जाति जनगणना (Caste census) के पक्ष में नहीं हैं। जाति सर्वेक्षण की इन रिपोर्टों के मुताबिक अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी कहीं ज्यादा अधिक है। दरअसल, उनका कहना है कि “उन्हें डर है कि अगर जाति के आंकड़े सामने आए तो उनकी आबादी की तुलना में उनकी सियासी ताकत ज्यादा होने की बात उजागर हो जाएगी। जिससे उनका प्रभाव कम हो सकता है। बता दें कि तेलंगाना और बिहार में हाल ही में हुई जाति सर्वेक्षण की रिपोर्ट से यह बात उजागर हुई है कि गैर-पिछड़ी जातियां को इनमें अन्य जातियां या सामान्य वर्ग की कैटगरी में रखा गया है। आंकड़ों की माने तो इन राज्यों में इनकी आबादी सिर्फ 15 फीसदी हैं। ऐसे में यहाँ बड़ा सवाल यह कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ इसी तरह आंकड़े आते हैं, तो भविष्य में ऊपरी जातियों का प्रभाव कम हो सकता है। खैर, कांग्रेस के एक नेता ने राहुल गाँधी को चेतावनी देते हुए कहा कि “राहुल गांधी को वीपी सिंह का उदाहरण याद रखना चाहिए। वीपी सिंह ने मंडल कमीशन लागू किया लेकिन ओबीसी समुदाय ने उन्हें कभी अपना नेता नहीं माना क्योंकि वे राजपूत थे।”
इसे भी पढ़ें:- पहलगाम हमले के बाद पाक आर्मी में गजब का खौफ, इस वजह से लोगों से की 2 महीने का राशन जमा करने की अपील
कांग्रेस (Congress) ही नहीं, बीजेपी में भी है इस फैसले को (Caste census sparks internal revolt in Congress) लेकर असंतोष
कांग्रेस (Congress) ही नहीं, बीजेपी में भी इस फैसले को (Caste census sparks internal revolt in Congress) लेकर असंतोष की भावना बनी हुई है। हालांकि पार्टी ने साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि वह उस साल जाति जनगणना (Caste census) नहीं करेगी। अब इस फैसले को लेकर बीजेपी के अपने ही कुछ नेता सवाल उठाते हुए कह रहे हैं कि “पार्टी हमेशा से हिंदू एकता की बात करती रही है और जातिगत भेदभाव को खत्म करने की वकालत करती रही है। ऐसे में जाति जनगणना का समर्थन करना पार्टी की विचारधारा के खिलाफ लगता है।” यही नहीं उत्तर प्रदेश के एक बीजेपी नेता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “हमसे कहा जाता है कि वैश्विक नेतृत्व और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) की बात करें। एक हैं तो सेफ हैं जैसे नारे दें, देश को तोड़ने वाली साजिशों का विरोध करें, लेकिन अब हमें जाति जनगणना का समर्थन करना पड़ रहा है।” यही नहीं, बीजेपी के कई नेताओं को तो यह भी डर है कि कहीं कांग्रेस का यह आरोप सच न साबित हो जाये कि बीजेपी उनके विचारों को कॉपी कर रही है।”
Latest News in HindiToday Hindi news Caste census sparks internal revolt in Congress
#CasteCensus #CongressRift #RahulGandhi #PoliticalCrisis #IndianPolitics #UpperCasteLeaders #CongressNews #CastePolitics #CongressSplit #BharatJodo



