नई शिक्षा नीति के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा स्कूलो में कक्षा 1 से कक्षा 5 तक हिंदी पढ़ाए जाने के ऐलान के बाद महाराष्ट्र में हिंदी भाषा का विवाद पुनः गर्माता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने इसका खुलकर विरोध किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “वह हिंदू हैं लेकिन हिंदी स्वीकार नहीं हैं।’ खबर है कि इससे जुड़े मुद्दों पर राज ठाकरे के घर आज (Hindi language dispute) पार्टी के नेता चर्चा करने वाले हैं। खबर के मुताबिक राज ठाकरे ने एमएनएस के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई है। शुक्रवार सुबह 11 बजे राज ठाकरे के घर शिवतीर्थ पर ये बैठक होगी। इस बैठक पर में महाराष्ट्र में लागू किए गए नई शिक्षा नीति के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। कहा जा रहा है कि हिंदी विरोध के मुद्दे पर जनता के बीच कैसे जाएं? कैसे मराठी लोगों और मराठी संगठनों को इस मुद्दे के साथ जोड़ा जाए? इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन के बाद, 2025-26 शैक्षणिक वर्ष से मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी अनिवार्य तीसरी भाषा होगी। इसको लेकर तमिलनाडु के बाद अब महाराष्ट्र में विरोध होने लगा है।
स्कुलों में पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने का विरोध कर (Hindi language dispute) रहे हैं राज ठाकरे

दरअसल, मनसे प्रमुख राज ठाकरे स्कुलों में पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने का विरोध कर (Hindi language dispute) रहे हैं। राज ठाकरे का कहना है की “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं। सरकार अगर फैसले को पीछे नहीं लेती है, तो संघर्ष अटल है।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुरुवार को मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रूप में चित्रित करने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है। अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको लगेगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आगामी चुनावों में मराठी और गैर-मराठी लोगों के बीच संघर्ष पैदा करने और इसका फायदा उठाने की कोशिश है?’ हालाँकि इस बीच राज ने यह भी कहा कि “हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है, फिर इसे महाराष्ट्र में छात्रों को शुरू से ही क्यों पढ़ाया जाना चाहिए।” ठाकरे ने एक्स पर लिखा कि “आपका त्रिभाषी फॉर्मूला जो भी हो, उसे सरकारी मामलों तक सीमित रखें, शिक्षा में न लाएं।”
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राज्य सरकार के फरमान के बाद सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ना (Hindi language dispute) होगा अनिवार्य
गौरतलब हो कि पिछले दिनों दक्षिण भारत के तमिलनाडु में हिंदी को लेकर विवाद हुआ था। अब महाराष्ट्र भी इसकी जद में आ गया (Hindi language dispute) है। राज्य सरकार के फरमान के बाद सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ना अनिवार्य होगा। आदतन राज्य सरकार के इस फैसले का राज ठाकरे ने विरोध किया है। ठाकरे ने अपने एक बयान में कहा है कि “मैं स्पष्ट शब्दों में कहता हूं कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस अनिवार्यता को बर्दाश्त नहीं करेगी।” इस बीच राज ने आरोप लगाया कि “यह कदम महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा को कमजोर करने का प्रयास है। महाराष्ट्र की एक पहचान है और हम मराठी भाषा के सम्मान की रक्षा करेंगे।” अहम बात यह कि राज ठाकरे की यह नाराजगी ऐसे वक्त पर सामने आई है जब फडणवीस सरकार के फैसले सफाई दे चुके हैं। बता दें कि इससे पहले उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज ठाकरे से मुलाकात की थी। ऐसे में देखना दिलचस्प यह कि हिंदी विरोध का यह मामला किस ओर करवट लेता है।
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