SC Refuses Stay on Waqf Act, Next Hearing Date Revealed

SC refuses stay Waqf: सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई रोक, कही यह बड़ी बात, इस दिन होगी अगली सुनवाई

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि “बगैर सरकार का पक्ष सुने, वक्फ कानून पर स्टे नहीं लगाया (SC refuses stay Waqf) जाए। जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का वक्त दिया जाए।” इससे सहमत होते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। यही नहीं, सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाते हुए कहा कि “वक्फ या वक्फ बाय यूजर की जो संपत्तियां पहले से रजिस्टर्ड हैं, सरकार उन्हें गैर-अधिसूचित नहीं करेगी।  अगले आदेश तक वक्फ के स्टेट्स में कोई बदलाव (SC refuses stay Waqf) नहीं होगा-सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई के दौरान भारत के शीर्ष न्यायालय ने साथ ही यह भी कहा कि “इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।” इसके साथ ही वक्फ एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि “अगले आदेश तक वक्फ के स्टेट्स में कोई बदलाव (SC refuses stay Waqf) नहीं होगा। साथ ही सीजेआई ने आदेश में कहा कि “मामले में इतनी सारी याचिकाओं पर विचार करना असंभव, केवल पांच पर ही सुनवाई होगी। अगली सुनवाई से केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही न्यायालय में उपस्थित होंगे।” इस बीच अदालत ने साफ कहा है कि “सभी पक्ष आपस में तय करें कि उनकी पांच आपत्तियां क्या हैं। इसके साथ ही उन्होंने दोनों पक्षों को नोडल काउंसल नियुक्त करने का आदेश दिया गया है।” फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक नहीं लगाया है।  इसे भी पढ़ें:–  वक्फ कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, इस बात को लेकर है विरोध नए कानून के तहत अगले आदेश तक नहीं (SC refuses stay Waqf) होंगी नई नियुक्तियां कुल-मिलाकर केंद्र का जवाब आने तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी, यानी सरकार के जवाब तक यथास्थिति बनी रहेगी और नए कानून के तहत अगले आदेश तक नई नियुक्तियां नहीं (SC refuses stay Waqf) होगी। 5 मई को अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। बता दें कि सुनवाई के दौरान एसजी मेहता ने कहा कि “प्रतिवादी 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि “अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित यूजर्स द्वारा वक्फ सहित वक्फों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।” बता दें कि याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि “1995 के वक्फ अधिनियम और 2013 में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को इस सूची से अलग से दिखाया जाएगा।  2025 के मामले में रिट दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को विशेष मामले के रूप में जवाब दाखिल करने की स्वतंत्रता है। संघ और राज्य तथा वक्फ बोर्ड भी 7 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi news SC refuses stay Waqf #SupremeCourt #WaqfAct #WaqfLaw #IndianJudiciary #SCNews #WaqfCase #LawUpdate #SCVerdict #ConstitutionalLaw #LegalNews

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Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict

Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग

किसी महिला को गलत तरीके से पकड़ना और पजामा का नाड़ा तोड़ना, बलात्कार के अपराध के बराबर नहीं है। ये शर्मनाक बात किसी नेता-अभिनेता या समाजसेवक ने नहीं, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने अपने फैसले में कही है। गौरतलब हो कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि “लड़की को गलत तरीके से पकड़ना और उसके पजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार नहीं है।” हाई कोर्ट जज के इस फैसले के बाद से देश की महिलाओं में रोष व्याप्त है। इस पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) देते हुए कहा कि “ऐसे फैसलों से समाज में गलत संदेश जाएगा।” उन्होंने इस फैसले को शर्मनाक और बिल्कुल गलत बताया है। यही नहीं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 साल की लड़की से जुड़ा है। साल 2021 में दो लोग पवन और आकाश ने 11 वर्षीय लड़की पर हमला किया था। आरोपियों ने उसको गलत तरीके से पकड़ा, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया और उसे एक पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास किया था। इस बीच जब उसकी चीखें सुनकर लोग वहां पहुंचे तो आरोपी वहां से भाग निकले। इस तरह वो दुष्कर्म का शिकार होते-होते बच गयी थी।  यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict)  बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग के स्तन का स्पर्श और वस्त्र का नाड़ा तोड़ने को दुष्कर्म का प्रयास न मानते हुए गंभीर यौन उत्पीड़न माना था। दरअसल, न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की एकल पीठ ने कासगंज के स्पेशल जज (पोक्सो कोर्ट) का समन आदेश संशोधित कर नए सिरे से समन करने का आदेश दिया है। आपने आदेश में हाई कोर्ट ने निर्देशित किया कि आरोपितों के खिलाफ धारा 354-बी आइपीसी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के मामूली आरोप के साथ पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाया जाए। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद संसद के बाहर संवाददाताओं से हुई बातचीत में स्वाति मालीवाल ने कोर्ट के फैसले पर आपत्ति (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) जताते हुए कहा कि “यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है। वे समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं कि एक छोटी लड़की के साथ इस तरह की हरकत की जा सकती है और फिर भी इसे बलात्कार नहीं माना जाएगा?” इसे भी पढ़ें:- नक्सल के खिलाफ सुरक्षा बलों की नई रणनीति कामयाब, 80 दिन में किए 113 नक्सली ढेर सुप्रीम कोर्ट इस तरह के न्यायिक फैसलों के खिलाफ (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) करे सख्त कार्रवाई  यही नहीं, स्वाति मालीवाल ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप करने और ऐसी न्यायिक फैसलों के खिलाफ (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में बिना देरी किए हस्तक्षेप करना चाहिए और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।” गौर करने वाली बात यह कि स्वाति मालीवाल ही नहीं, बल्कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी सुप्रीम कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है। लोकसभा के बाहर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि “वह फैसले से पूरी तरह असहमत हैं। और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने का आह्वान किया।” इस बीच उन्होंने कहा कि “मैं इस फैसले के पूरी तरह खिलाफ हूं और सुप्रीम कोर्ट को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सभ्य समाज में इस तरह के फैसले के लिए कोई जगह नहीं है। कहीं न कहीं इसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और हम इस मामले पर आगे चर्चा करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi news Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict #SwatiMaliwal #AllahabadHC #SupremeCourt #LegalVerdict #JusticeForWomen #IndianJudiciary #CourtRuling #LegalRights #BreakingNews #SupremeCourtIntervention

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