14-Year-Old Girl Attacked with Acid

Girl attacked with acid: धर्म विशेष के चार युवकों ने 14 साल की लड़की से 2 महीने तक की हैवानियत, जबरन खिलाया बीफ, डाला तेजाब

बीतते समय के साथ-साथ लोगों की इंसानियत भी दम तोड़ती नजर आने लगी है। लोगों में दया नाम की चीज रह ही नहीं गई है। इसका ताजा उदाहरण देखने मिला है उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में, जहाँ एक दलित नाबालिग के साथ विशेष धर्म के चार लोगों ऐसी दरिंदगी की है कि सुनकर ही रौंगटे खड़े हो जाएँ। जानकारी के मुताबिक चार युवकों ने 14 साल की लड़की को जबरन अगवा कर दो महीने तक उसके साथ पहले तो सामूहिक दुष्कर्म किया। और फिर उसे तरह-तरह की यातनाएं दी। यही नहीं, उसके हाथ पर बने ॐ के टैटू को मिटाने के लिए उसपर तेज़ाब (Girl attacked with acid) उड़ेल दिया। अचरज की बात यह कि हैवानियत का यह नंगा नाच योगी की उस सरकार में घटित हुआ है जो महिला सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का दंभ भर्ती है। हैवानियत का आलम यह था कि जब उस लड़की ने दरिंदों से कुछ खाने को माँगा तो दरिंदों ने उसे जबरन बीफ खिला दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार नाबालिग दलित लड़की के साथ यह दरिंदगी करीब 2 महीने तक चलती रही। इस बीच पीड़िता की मौसी ने इस मामले की शिकायत भगतपुर थाने में की। शिकायत के बाद पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड सहिंता की धारा 137(2), 70(1), 123, 127(4), 299, 351(3), 124(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। यही नहीं, पुलिस ने इस घिनौने अपराध में शामिल मुख्य आरोपी सलमान को भी गिरफ्तार कर लिया है। जबकि अन्य की तलाश जारी है।  दो महीने तक बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक (Girl attacked with acid) किया दुष्कर्म   पुलिस की माने तो पीड़िता की मौसी ने शिकायत में बताया कि 2 जनवरी 2025 को उसकी भाभी की 14 वर्षीय बेटी दर्जी से कपड़े सिलवाने के लिए बाजार जा रही थी। रास्ते में उसी गांव के रहने वाले राशिद, सलमान, जुबैर और आरिफ नामक युवकों ने उसे जबरदस्ती कार में खींच लिया। इसके बाद उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद जब लड़की को होश आया तो वह एक कमरे में थी और उसके शरीर पर कोई कपड़े नहीं थे यानी वो पूरी तरह निर्वस्त्र थी। कमरे में अकेला पाकर आरोपियों ने दो महीने तक बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म  (Girl attacked with acid) किया। इस बीच दो महीने बाद पीड़िता जब बदतर हालत में घर लौटी, तो पीड़िता की मौसी ने बताया कि “लड़की के लापता होने के बाद उसकी काफी तलाश की गई लेकिन वह नहीं मिली। हमने 3 जनवरी को पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई लेकिन उसकी कोई खबर नहीं मिली।” इसके बाद लड़की किसी तरह 2 मार्च को घर पहुंची। उसकी हालत काफी खराब थी। जब भी उसे होश आता तो उसके साथ दुष्कर्म होता और जब भी वह खाना मांगती तो उसे गोमांस दिया जाता। उन्होंने आगे बताया कि “घर पहुंचने पर बेटी ने बताया कि आरोपियों ने उसके साथ दो महीने तक दरिंदगी की। जब भी वह होश में आती और खाना मांगती तो आरोपी उसे गोमांस खिला देते। जब भी नाबालिग पीड़िता मना करती तो उसे जबरदस्ती गोमांस खिला दिया जाता।” इसे भी पढ़ें:- इस वजह से हुई कांग्रेस कार्यकर्ता हिमानी नरवाल की हत्या, आरोपी ने खोले कई राज़ ओम का टैटू मिटाने के लिए आरोपियों ने डाला तेजाब (Girl attacked with acid)  बता दें कि शिकायत में कहा गया है कि “पीड़िता के हाथ पर ओम का टैटू बना हुआ था, जिसे आरोपियों ने तेजाब  (Girl attacked with acid) डालकर मिटा दिया। उसने उसके चेहरे पर तेजाब फेंकने की भी धमकी दी।” खैर, पिछले दो महीने से पीड़िता को प्रताड़ित करने के बाद आरोपियों ने उसे भोजपुर में छोड़ दिया और धमकी दी कि अगर उसने घर पर किसी को बताया तो उसे और उसकी चाची का अपहरण कर लिया जाएगा। इस पूरे मामले में एसपी (ग्रामीण) कुंवर आकाश सिंह ने कहा कि “3 मार्च को एक शिकायत मिली थी, जिसमें कहा गया था कि एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। जब वह बाजार गई थी, तो चार लोग उसे जबरन उठाकर ले गए। उसके साथ दो महीने तक दुष्कर्म किया गया। इस मामले में भगतपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।” यह तो ठीक लेकिन इन सब के बीच अहम बात यह कि जब दो महीने पहले ही पीड़िता की मौसी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी तो दो महीने तक योगी की पुलिस क्या कर रही थी? पुलिस ने आखिर क्यों दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की? इन सब के बीच बड़ा सवाल यह कि एक दलित समाज की लड़की 2 महीने तक गायब रहती है और इस बीच न कोई दलितों का रहनुमा उसके सपोर्ट में दिखाई दिया और न ही जय भीम-जय मीम का भोंपू बजाने वाले नेताओं की भांड टोली ही दिखाई दी। मुख्य बात यह कि आखिर शासन और प्रशासन ऐसा क्या करे जिससे कि अपराधियों के मन में कानून का भय हो? क्या वजह है जो लोग बेख़ौफ़ होकर इस तरह के खौफनाक वारदात को अंजाम दे देते हैं? Latest News in Hindi Today Hindi News Girl attacked with acid #AcidAttack #JusticeForVictim #CrimeAgainstWomen #StopViolence #ForcedConversion #BeefControversy #ReligiousCrime #ProtectGirls #HumanRights #PunishTheGuilty

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International Women's Day 2025,

International Women’s Day: इतिहास, महत्व और 2025 की थीम

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के अधिकारों, उनके संघर्षों और समाज में उनके योगदान को पहचानने और सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दुनिया भर में इस दिन को समानता और सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। आज इस आर्टिकल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस  (International Women’s Day) के इतिहास, इस वर्ष की थीम और इस दिन के महत्व को समझेंगे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में हुई, जब महिलाओं ने अपने अधिकारों और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग के लिए आंदोलन शुरू किए। इसका पहला आधिकारिक आयोजन 1909 में अमेरिका में हुआ था, जब समाजवादी पार्टी ने न्यूयॉर्क में महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में एक रैली आयोजित की। 1910 में क्लारा ज़ेटकिन जो एक जर्मन समाजवादी नेता थीं, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया। इसके बाद 1911 में पहली बार ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आधिकारिक रूप से मनाया गया। महिलाओं को समान अधिकार मिलने की यह यात्रा लंबी थी। 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित किया और 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के रूप में मान्यता दी। तब से यह दिन दुनिया भर में व्यापक रूप से मनाया जाने लगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 की थीम हर साल संयुक्त राष्ट्र महिला दिवस के लिए एक नई थीम निर्धारित करता है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और समानता को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 की थीम है: “Invest in Women: Accelerate Progress” (महिलाओं में निवेश करें: प्रगति को तेज़ करें)। इस थीम का उद्देश्य समाज में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना, उनके आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास में निवेश करना और लैंगिक समानता को सुनिश्चित करना है। जब महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय संसाधनों और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, तो संपूर्ण समाज का विकास संभव होता है। महिला दिवस का महत्व अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की दशा और दिशा पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि महिलाओं को अभी भी किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और कैसे हम एक समान समाज का निर्माण कर सकते हैं। महिला दिवस के महत्व को समझने के लिए कुछ प्रमुख बिंदु: महिलाओं की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ इसे भी पढ़ें: खजूर के बेनेफिट्स: रमजान के दौरान स्वास्थ्य और एनर्जी का सबसे अच्छा स्रोत महिला सशक्तिकरण के लिए समाधान महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए हमें सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे-  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षिक स्थिति को सुधारने के लिए एक निरंतर प्रयास की याद दिलाता है। 2025 की थीम, “महिलाओं में निवेश करें: प्रगति को तेज़ करें,” हमें यह संदेश देती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो पूरा समाज आगे बढ़ता है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करें और उन्हें समान अवसर देने के लिए प्रयास करें। जब हम महिलाओं को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने का मौका देंगे, तब ही हम एक बेहतर और समृद्ध दुनिया का निर्माण कर पाएंगे। क्योंकि एक सशक्त महिला, एक सशक्त समाज की नींव होती है! Latest News in Hindi Today Hindi International Women’s Day #InternationalWomensDay #IWD2025 #WomensDay #GenderEquality #EmpowerWomen #WomenLeadership #WomensRights #SheInspires #WomenPower #BreakTheBias

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Creator of Universe

ब्रह्मा जी ने कैसे की सृष्टि की रचना? जानिए क्या है पौराणिक कहानी

हिंदू धर्म के अनुसार, सृष्टि (Universe) की रचना का रहस्य भगवान ब्रह्मा से जुड़ा हुआ है। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता (Creator of Universe) माना जाता है और उन्हें त्रिदेवों में से एक का स्थान प्राप्त है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना कैसे की थी? इसके पीछे की कथा न केवल रोचक है, बल्कि गहन दार्शनिक अर्थों से भरी हुई है। आइए, इस पौराणिक कथा को विस्तार से जानते हैं। प्रारंभ: शून्य से सृष्टि का आरंभ हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में केवल अंधकार और शून्य था। न कोई आकाश था, न धरती, न ही कोई जीवित प्राणी। इस अवस्था को “प्रलय” कहा जाता है। प्रलय के बाद, जब सृष्टि का निर्माण होना था, तब परमात्मा ने अपने निराकार रूप से साकार रूप धारण किया और ब्रह्मा के रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना का दायित्व सौंपा गया। ब्रह्मा जी का प्रकटन पुराणों के अनुसार, ब्रह्मा जी एक कमल के फूल से प्रकट हुए, जो भगवान विष्णु की नाभि से निकला था। इस कमल को “नाभि कमल” कहा जाता है। ब्रह्मा जी ने इस कमल पर बैठकर सृष्टि की रचना का कार्य प्रारंभ किया। यह कमल ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है और इससे जुड़ी कथा ब्रह्मा के प्रकटन की महत्ता को दर्शाती है। सृष्टि की रचना का प्रक्रिया ब्रह्मा जी (Lord Brahma) ने सृष्टि की रचना के लिए सबसे पहले पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का निर्माण किया। इन तत्वों के संयोजन से उन्होंने ब्रह्मांड (Universe) की रचना की। इसके बाद, उन्होंने समय की गणना के लिए युगों और कालचक्र की रचना की। ब्रह्मा जी ने सृष्टि को व्यवस्थित करने के लिए दस प्रजापतियों का निर्माण किया, जिन्हें उनके मानस पुत्र भी कहा जाता है। इन प्रजापतियों में मरीचि, अत्रि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वशिष्ठ, प्रचेता, भृगु और नारद शामिल हैं। इन प्रजापतियों ने ब्रह्मा जी की सहायता से विभिन्न प्राणियों और जीवों की रचना की। इसे भी पढ़ें:- कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्र, जानें मां दुर्गा के आगमन का संकेत मनुष्य की उत्पत्ति ब्रह्मा जी (Lord Brahma) ने मनुष्य की रचना के लिए अपने शरीर से दो शक्तियों को प्रकट किया। पहली शक्ति थी “स्वायंभुव मनु”, जो पहले मनुष्य थे, और दूसरी शक्ति थी “शतरूपा”, जो पहली स्त्री थीं। इन दोनों से ही मनुष्य जाति का विस्तार हुआ। स्वायंभुव मनु और शतरूपा को आदि मानव के रूप में जाना जाता है, जिनसे संपूर्ण मानव जाति की उत्पत्ति हुई। वेदों की रचना ब्रह्मा जी (Lord Brahma) ने सृष्टि की रचना के साथ-साथ ज्ञान और धर्म की नींव रखने के लिए वेदों की भी रचना की। वेदों को “अपौरुषेय” माना जाता है, यानी इनकी रचना किसी मनुष्य द्वारा नहीं की गई थी। ब्रह्मा जी ने वेदों के माध्यम से मनुष्यों को धर्म, कर्म और जीवन के मार्ग का ज्ञान दिया। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद यह चार वेद हैं, जो ब्रह्मा जी द्वारा प्रकट किए गए। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Universe #BrahmaCreation #HinduMythology #UniverseCreation #PuranicStories #VedicWisdom #SanatanDharma #DivineCreation #IndianMythology #BrahmaPuran #HinduBeliefs

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Importance of Taraweeh in Ramadan

रमजान में तरावीह नमाज का क्या है महत्व: जानिए क्यों है यह इबादत खास

रमजान (Ramadan) का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए इबादत, रहमत और मगफिरत का समय होता है। यह महीना न केवल रोजे रखने का होता है, बल्कि इसमें नमाज, कुरान तिलावत और दूसरे इबादतों का विशेष महत्व होता है। रमजान के दौरान तरावीह की नमाज का विशेष स्थान है। यह नमाज रमजान की रातों में पढ़ी जाती है और इसे पूरे महीने नियमित रूप से अदा किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तरावीह की नमाज क्यों पढ़ी जाती है और इसका क्या महत्व है? आइए, इसके बारे में जानते हैं। रमजान: इस्लाम का पवित्र महीना इस्लाम धर्म में रमजान (Ramadan) का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग रोजा रखते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। भारत में इस साल रमजान 2 मार्च से शुरू हो चुका है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, रमजान साल का नौवां महीना होता है, जिसे खास महत्व दिया जाता है। पूरे महीने रोजे रखे जाते हैं, और जब शव्वाल के महीने का चांद नजर आता है, तो पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। रमजान के दौरान किए गए अच्छे कामों का 70 गुना ज्यादा सवाब (पुण्य) मिलता है। इस महीने हर मुस्लिम को पांच वक्त की नमाज पढ़नी जरूरी होती है, लेकिन इसके अलावा तरावीह की नमाज भी पढ़ना सुन्नत माना जाता है। यह नमाज ईशा के बाद और वित्र से पहले पढ़ी जाती है। तरावीह की नमाज से अल्लाह के प्रति आस्था और गहरी होती है, जिससे व्यक्ति को अधिक सवाब मिलता है। तरावीह नमाज क्या है? तरावीह (Taraweeh) शब्द अरबी भाषा के शब्द “तरवीह” से लिया गया है, जिसका अर्थ है “आराम करना” या “विश्राम करना”। यह नमाज रमजान के महीने में रात के समय पढ़ी जाती है और इसमें लंबी किरात (कुरान की आयतें पढ़ना) के बाद छोटे-छोटे विराम लिए जाते हैं। तरावीह की नमाज ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है और इसमें आमतौर पर 8 या 20 रकात होती हैं। यह नमाज जमात के साथ मस्जिद में पढ़ी जाती है, हालांकि इसे अकेले भी पढ़ा जा सकता है। रमजान में तरावीह पढ़ना क्यों जरूरी है? मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कारी इसहाक गोरा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि रमजान (Ramadan) मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र महीना है, जिसकी महिमा कुरान और हदीसों में वर्णित है। इस महीने में किए गए हर नेक काम का सवाब (पुण्य) 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। रमजान के दौरान रोजे रखना हर बालिग मुसलमान के लिए अनिवार्य (फर्ज) माना गया है। जहां तक नमाज की बात है, तो रमजान में भी उतनी ही नमाज पढ़ी जाती है, जितनी आम दिनों में पढ़ी जाती है। नमाज हर मुसलमान पर फर्ज होती है, और इसे छोड़ने पर गुनाह माना जाता है। इसे भी पढ़ें:- कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्र, जानें मां दुर्गा के आगमन का संकेत नमाज से पहले तरावीह पढ़ना क्यों जरूरी है? रमजान (Ramadan) के दौरान नमाज के साथ एक खास इबादत जुड़ जाती है, जिसे तरावीह कहा जाता है। यह नमाज ईशा के बाद और वित्र से पहले अदा की जाती है। इसे विभिन्न इस्लामी परंपराओं में सुन्नत-ए-मुवक्किदा माना गया है, यानी इसे पढ़ना बेहद जरूरी है, और अधिकतर इस्लामी विद्वान भी इस पर सहमत हैं। रमजान का महीना पवित्र होता है, और इस दौरान किए गए हर अच्छे काम का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। इस महीने लोग दान (जकात) देते हैं, जिससे जरूरतमंदों की मदद की जा सके। रमजान की आध्यात्मिकता (रूहानियत) इतनी गहरी होती है कि इसका प्रभाव अन्य धर्मों के लोगों पर भी पड़ता है। जो लोग तरावीह नहीं पढ़ते, उनके बारे में अलग-अलग विचार हैं, लेकिन इस्लाम में जो चीज फर्ज कर दी गई है, उसे पूरा करना जरूरी होता है। इसे न मानने पर व्यक्ति गुनहगार माना जाता है। तरावीह नमाज कैसे पढ़ें? तरावीह (Taraweeh) की नमाज ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है। इसमें हर दो रकात के बाद थोड़ा विराम लिया जाता है, जिसमें तस्बीह, दुआ या कुरान की तिलावत की जा सकती है। तरावीह की नमाज को 8 या 20 रकात के रूप में पढ़ा जा सकता है, जो अलग-अलग मसलक (सुन्नी, हनफी, शाफई आदि) के अनुसार भिन्न हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Ramadan #Ramadan2025 #Taraweeh #IslamicPrayer #RamadanBlessings #NightPrayers #RamadanWorship #QuranRecitation #Spirituality #RamadanSpecial #MuslimFaith

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Lenovo Yoga Solar PC Concept

Yoga Solar PC Concept: Lenovo का लेटेस्ट सोलर एनर्जी से चलने वाला लैपटॉप

लेनोवो (Lenovo) एक ऐसी टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो कई तरह के प्रोडक्ट्स को बनाती है। इनमें लैपटॉप (Laptop), डेस्कटॉप, टेबलेट, स्मार्टफोन आदि शामिल हैं। इस कंपनी को अपने हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स, नई तकनीक, सिक्योरिटी आदि के लिए जाना जाता है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी पर्सनल कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी भी माना गया है। यह कंपनी समय-समय पर अपने कई नए प्रोडक्ट्स को बाजार में लाते रहते हैं। हाल ही में लेनोवो (Lenovo)ने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2025 (MWC 2025) में नए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट डिवाइसों का प्रदर्शन किया था। इसमें सबसे अधिक चर्चित रहा लेनोवो योगा सोलर पीसी कॉन्सेप्ट (Lenovo Yoga Solar PC Concept)। आइए जानें इसके बारे में और अधिक। लेनोवो योगा सोलर पीसी कॉन्सेप्ट (Lenovo Yoga Solar PC Concept) : पाएं जानकारी लेनोवो योगा सोलर पीसी कॉन्सेप्ट (Lenovo Yoga Solar PC Concept) एक सौर ऊर्जा से चलने वाला लैपटॉप (Laptop) है और यही इसकी खासियत है। इस लैपटॉप (Laptop) में एक सौर पैनल है जिसका कंवर्जन रेट 24 प्रतिशत है। कंपनी ने इस उत्पाद का निर्माण  फंक्शनलिटी और एनवायरनमेंट अवरेनेस के गैप को कम करने के लिए किया  है। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में यह नया और सुनहरा कदम है। यह कंपनी अपने प्रोडक्ट्स में इनोवेशन और रिन्यूएबल एनर्जी यानि अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल कर के एनवायरनमेंट की सुरक्षा करना चाहती है। इनका यह कदम एनवायरनमेंट अवरेनेस और इनोवेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेनोवो योगा सोलर पीसी कॉन्सेप्ट के फीचर्स लेनोवो योगा सोलर पीसी कॉन्सेप्ट (Lenovo Yoga Solar PC Concept) के फीचर्स अन्य लैपटॉप्स के मुकाबले अलग और अनोखे हैं। इनमे से कुछ इस प्रकार हैं  सोलर पावर सोलर पावर का इस्तेमाल इस प्रोडक्ट का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। लेनोवो योगा सोलर पीसी कॉन्सेप्ट (Lenovo Yoga Solar PC Concept) लैपटॉप (Laptop) के पीछे का कवर एक सौर पैनल के रूप में काम करता है, जो सौर ऊर्जा को अच्छे से कैप्चर करता है। इससे बैक कॉन्टैक्ट सेल तकनीक का लाभ उठाया जा सकता है।  यह तकनीक सौर ऊर्जा को अधिक प्रभावी रूप से एब्जॉर्ब करने में मदद करती है। इसमें सोलर सेल्स के पीछे मॉउंटिंग ब्रेकेट और ग्रिडलाइन्स को ट्रांसफर करना शामिल है, जिससे सोलर एनर्जी बेहतर तरीके से एब्जॉर्ब होती है। इससे  एक घंटे के वीडियो प्लेबैक के लिए पर्याप्त ऊर्जा  सिर्फ बीस मिनटों में मिल सकती है। यानी कम समय में अधिक फायदा होगा। डिजाइन यह लैपटॉप (Laptop) न केवल सौर ऊर्जा से चलने के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका डिजाइन भी बहुत स्टाइलिश है। लेनोवो (Lenovo) के योगा सीरीज को अपने स्टाइलिश और बेहतरीन डिजाइंस के लिए जाना जाता है और योगा सोलर कांसेप्ट भी इनमे से एक है। इस कंपनी आने वाले समय में ऐसे उत्पाद लाने वाले हैं जो नए और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी का अच्छा उदाहरण हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Apple iPad Air: M3 चिप और मैजिक कीबोर्ड के साथ मिल रहे हैं नए फीचर्स अन्य फीचर्स यह सौर ऊर्जा वाला लैपटॉप (Laptop) 6-इंच का पावरहाउस है, जिसे खासतौर पर क्रिएटर्स के लिए बनाया गया है। इसमें इंटेल कोर अल्ट्रा प्रोसेसर और आरटीएक्स 5070 जीपीयू है। इसमें मौजूद प्योरसाइट प्रो टैन्डेम ओएलईडी डिस्प्ले इम्प्रूव्ड एक्यूरेसी और विजुअल क्लेरिटी प्रदान करता है। इससे क्रिएटर्स का अनुभव बेहतरीन हो सकता है। इससे वो अपना काम सही से कर सकते हैं और उनकी प्रोडक्टिविटी भी बढ़ सकती है। इस लैपटॉप से एआई-संचालित कंप्यूटिंग अधिक आसान होती है। संक्षेप में कहा जाए तो लेनोवो (Lenovo) लैपटॉप (Laptop) अपनी उच्च गुणवत्ता, विश्वसनीयता और परफॉरमेंस में बेहतरीन माना गया है। विभिन्न यूजर्स के लिए इन्हे अच्छा विकल्प माना गया है। लेकिन, लेनोवो योगा सोलर पीसी कॉन्सेप्ट (Lenovo Yoga Solar PC Concept) का नया डिजाइन, एआई-संचालित टेक्नोलॉजी, हाई परफॉरमेंस और यूजर फ्रेंडली इंटरफेज इसे यूजर्ज के लिए और अधिक बेहतरीन बनाते हैं। इसकी विशेषताएंअधिक आसानी से और सटीकता से काम करने में मदद करती हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lenovo Yoga Solar PC Concept #laptop #LenovoYogaSolarPCConcept #Lenovo

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Champions Trophy

Champions Trophy: डेविड मिलर के शतक के बावजूद साउथ अफ्रीका फाइनल से बाहर, क्या फाइनल में भारत के सामने टिक पाएगा न्यूजीलैंड?

लाहौर में खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) के दूसरे सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने टूर्नामेंट के इतिहास में 362 रन का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया था। साउथ अफ्रीकी टीम के सारे दिग्गज बल्लेबाज एक के बाद एक आउट होते चले गए। लेकिन बीच मिलर डटे रहे। इस दौरान चौके के साथ उन्होंने 46 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 50वें ओवर में जैमीसन पर दो चौके और एक छक्के के बाद आखिरी गेंद पर दो रन के साथ 67 गेंद में शतक पूरा किया। इधर डेविड मिलर की सेंचुरी पूरी हुई तो उधर साउथ अफ्रीका चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर हो गया। बेशक उन्होंने शतकीय पारी खेली लेकिन उनकी इस पारी का विशेष लाभ नहीं हुआ। क्योंकि उनकी टीम फाइनल से बाहर हो चुकी थी। इस तरह साउथ अफ्रीकी टीम का चैंपियंस ट्रॉफी जीतने का सपना चकनाचूर हो गया। 67 गेंद में 10 चौके और चार छक्के की मदद से 100 रन की नाबाद पारी खेलने वाले डेविड मिलर अपनी टीम को बुधवार रात न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में जीत नहीं दिला पाए। गौर करने वाली बात यह कि जब मिलर ने हेलमेट उतारा तो उनकी आंखों में आंसू थे। चेहरे पर निराशा साफ़ झलक रही थी। इस हार का गम डेविड मिलर के चेहरे पर साफ देखा जा सकता था। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब साउथ अफ्रीका आईसीसी के टूर्नामेंट से बाहर हुआ है। साल 2024 के टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में सूर्यकुमार यादव के कैच ने साउथ अफ्रीका को अपना पहला आईसीसी खिताब जीतने नहीं दिया था।  चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) टूर्नामेंट के इतिहास का है सर्वोच्च स्कोर  बता दें कि पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की टीम ने साउथ अफ्रीका को 362 रन का पहाड़ सा लक्ष्य दिया था। न्यूजीलैंड की टीम की तरफ से रविंद्र ने  101 गेंदों में 13 चौके और एक छक्के की मदद से 108 रन तो विलियमसन ने 94 गेंदों में 10 चौके और दो छक्के की मदद से 102 रन बनाए। दूसरे विकेट के लिए दोनों के बीच हुई 164 रन की साझेदारी की। इसके अलावा ग्लेन फिलिप्स ने नाबाद 49 रन बनाए। इस तरह न्यूजीलैंड ने छह विकेट पर 362 रन बनाए। गौर करने वाली बात यह कि यह चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) टूर्नामेंट के इतिहास का सर्वोच्च स्कोर है। खैर, 363 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सेंटनर 43 रन पर तीन विकेट झटके तो ग्लेन फिलिप्स 27 रन पर दो विकेट चटकाए। इस तरह साउथ अफ्रीका की टीम न्यूजीलैंड की धार-धार गेंदबाजी के सामने नौ विकेट पर 312 रन ही बना सका। साऊथ अफ्रीका के बाहर जाने के बाद चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भारत और न्यूजीलैंड की टीमें आमने-सामने होंगी।  भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) के सेमीफाइनल के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को दी थी पटखनी  बता दें कि भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) के सेमीफाइनल के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को हराया था। रविवार को भारत और न्यूजीलैंड की टीमें फाइनल में भिड़ेंगी। ऐसे में बड़ा सवाल क्या रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी जीत पाएगी? महत्वपूर्ण सवाल यह कि इस खिताबी मुकाबले में किस टीम का पलड़ा भारी है? बात करें भारत और न्यूजीलैंड के बीच वनडे में हुए मुकाबलों की तो अब तक वनडे फॉर्मेट में दोनों के बीच 119 बार भिड़ंत हो चुकी है। जिसमें भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 61 बार पटखनी दी है तो वहीं न्यूजीलैंड की ने टीम इंडिया को 50 बार हराया है। इसके अलावा दोनों टीमों के बीच 7 मैच बेनतीजा रहे हैं। गौरतलब हो कि पिछले दिनों चैंपियंस ट्रॉफी के ग्रुप स्टेज मैच में भारत और न्यूजीलैंड का आमना-सामना हुआ। इस मैच में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 44 रनों से मात दी थी। खैर, चैंपियंस ट्रॉफी में भारत और न्यूजीलैंड की 2 भिड़ंत हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह कि चैंपियंस ट्रॉफी 2000 के फाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को हराया था। इस तरह चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट में दोनों टीमों का पलड़ा बराबर रहा है।  इसे भी पढ़ें:-भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में बनाई जगह चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) में भारतीय टीम का प्रदर्शन लाजवाब रहा है रही बात चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) में भारतीय टीम के प्रदर्शन की तो चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद ही शानदार रहा है। रोहित शर्मा के नेतृत्व में टीम इंडिया ने  ग्रुप स्टेज मैच में बांग्लादेश, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड को हराया तो वहीं सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को बाहर का रास्ता दिखाया है। इस तरह अब तक भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अजेय रही है। बात करें न्यूजीलैंड की तो न्यूजीलैंड ने बांग्लादेश के अलावा पाकिस्तान को पटखनी दी है। इसके अलावा सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को हराया। इस टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड की टीम को सिर्फ भारत के खिलाफ ही हार का मुंह देखना पड़ा है। Latest News in Hindi Today Hindi news Champions Trophy #INDvsNZ #DavidMiller #SouthAfricaCricket #NZCricket #TeamIndia #CricketFinal #KohliVsWilliamson  #ChampionsTrophy  #ChampionsTrophy2025  #ChampionsTrophyFinal

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Disease spread in Delhi

दिल्ली-एनसीआर में हेल्थ अलर्ट: 54% घरों में कोविड फ्लू, वायरल फीवर का प्रभाव

मौसम बदलने पर अक्सर हम कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का अनुभव करते हैं। इसका कारण यह है कि हमारे शरीर को एक निश्चित मौसम यानी जलवायु की आदत हो जाती है। जब मौसम बदलता है तो हमारे शरीर को एडजस्ट करने की कोशिश करनी पड़ती है। लेकिन, कभी-कभी शरीर को एडजस्ट करने में मुश्किल होती है, जिससे यह बीमारियां ट्रिगर हो सकती है। सीजनल फ्लू एक आम हेल्थ प्रॉब्लम है, जिसकी संभावना मानसून, ठंड या वसंत ऋतु में बढ़ जाती है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में लोग कोविड (Covid), फ्लू (Flu) और वायरल फीवर (Viral fever) के लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यहां 54% घरों में एक या एक से अधिक सदस्यों में यह लक्षण देखने को मिल रहे हैं। आइए जानें दिल्ली में फैली बीमारी (Disease spread in delhi) के बारे में। दिल्ली में फैली बीमारी (Disease spread in Delhi): पाएं जानकारी वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (World Health Organisation) के अनुसार अगर किसी को यह समस्या है और इसके लक्षण एक हफ्ते से अधिक तक रहें, तो ऐसे में मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है। कुछ लोगों के लिए यह कंडीशन घातक साबित हो सकती है। एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर में कम से कम 54% घरों में एक या एक से ज्यादा सदस्य कोविड (Covid), फ्लू (Flu) या वायरल फीवर (Viral fever) के लक्षणों से पीड़ित हैं। पाएं इसके बारे में और अधिक जानकारी। दिल्ली में फैली बीमारी (Disease spread in Delhi) के बारे में क्या कहता है सर्वे? इस बीमारी के बारे में किए गए सर्वे में दिल्ली और आसपास के लोगों से यह पूछा गया कि उनके घर में कितने लोगों में कोविड (Covid), फ्लू (Flu) या वायरल फीवर (Viral fever) के लक्षणों से पीड़ित हैं। इनके लक्षणों में बुखार, नाक का बहना, गले में समस्या, शरीर और सिर में दर्द (Headache), पेट सम्बन्धी प्रॉब्लम्स, जोड़ों में दर्द या सांस से जुडी समस्याएं शामिल है।  यह प्रश्न 13,938 लोगों से पूछा गया। इन लोगों में से 9% लोगों का कहना था कि उनके घर में चार या इससे अधिक लोगों में यह लक्षण हैं। 45 प्रतिशत लोगों के अनुसार उनके घर में 2-3 लोगों में यह लक्षण मौजूद हैं। 36% लोगों के अनुसार उनके घर में किसी भी व्यक्ति इन समस्याओं से पीड़ित नहीं है हालांकि 10% लोगों ने इस सवाल का कोई साफ उत्तर नहीं दिया। अगर पिछले साल किए सर्वे से इस साल के आंकड़ों की तुलना की जाए, तो यह पता चलता है कि इस साल इसमें वृद्धि हुई है। अगस्त 2024 में किए सर्वे में 38% घर के सदस्यों में यह लक्षण महसूस किए थे जबकि अब यह दर 54% है। अब जानते हैं कि इन समस्याओं से कैसे बचाव हो सकता है? इसे भी पढ़ें: खजूर के बेनेफिट्स: रमजान के दौरान स्वास्थ्य और एनर्जी का सबसे अच्छा स्रोत सीजनल डिजीज से बचाव कैसे संभव है?  इन समस्याओं के जोखिम से बचाव के लिए फ्लू वैक्सीन कराई जा सकती है।  इसके साथ ही इससे बचाव के अन्य तरीके इस प्रकार हैं: यह सर्वे लोकलसर्कल्स द्वारा किया गया है, जो एक प्रसिद्ध कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। अधिकतर लोग कोविड (Covid), फ्लू (Flu), बुखार आदि समस्याओं के लक्षणों को घर पर रह कर मैनेज कर सकते हैं। इन्हें ठीक होने के लिए कुछ दिन से एक हफ्ता तक लग सकता है। लेकिन, इसके लक्षणों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें। क्योंकि, यह कंडीशंस गंभीर स्थितियों में घातक हो सकती हैं। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Disease spread in Delhi #Viralfever #Covid #Flu #Diseasespreadindelhi

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Champions Trophy final 2025

ICC Champions Trophy 2025: भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में बनाई जगह

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 (ICC Champions Trophy 2025) के पहले सेमीफाइनल में भारतीय क्रिकेट टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हराकर फाइनल में अपनी जगह बना ली। 4 मार्च को दुबई में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में कप्तान रोहित शर्मा की अगुवाई में टीम इंडिया (Team India) ने शानदार खेल दिखाया और कंगारू टीम का इस टूर्नामेंट में सफर खत्म कर दिया। भारत को जीत के लिए 265 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे टीम ने 48.1 ओवर में हासिल कर लिया। इस जीत में विराट कोहली (84 रन) और श्रेयस अय्यर (45 रन) की पारियों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, भारतीय टीम की फील्डिंग भी बेहतरीन रही, जिसके चलते मुकाबले के बाद ‘बेस्ट फील्डर का मेडल’ भी दिया गया। बीसीसीआई ने इस खास पल का वीडियो भी साझा किया, जिसे फैन्स ने काफी पसंद किया। श्रेयस अय्यर बने बेस्ट फील्डर, रवि शास्त्री ने दिया मेडल भारतीय टीम की फील्डिंग इस सेमीफाइनल मुकाबले में शानदार रही। शुभमन गिल ने जहां ट्रेविस हेड का जबरदस्त रनिंग कैच पकड़ा, वहीं श्रेयस अय्यर की सटीक थ्रो ने एलेक्स कैरी को पवेलियन भेजा। श्रेयस अय्यर की जबरदस्त फील्डिंग के चलते उन्हें ‘बेस्ट फील्डर’ का मेडल दिया गया। यह खास सम्मान उन्हें भारतीय टीम के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में दिया। इस मौके पर रवि शास्त्री ने भारतीय टीम के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा, “जब मैदान पर दो बेहतरीन टीमें आमने-सामने होती हैं, तो असली कैरेक्टर सामने आता है। आज के मैच में वही देखने को मिला। पूरी टीम का प्रयास ही आपको जीत की ओर ले जाता है। अब फाइनल में भी इसी जज्बे के साथ खेलना होगा।” श्रेयस अय्यर ने अपने शानदार प्रदर्शन के लिए टीम को धन्यवाद दिया और कहा कि यह जीत पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है। उनके बेहतरीन फील्डिंग प्रयासों ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाया, जिससे टीम को जीत हासिल करने में मदद मिली। विराट कोहली और श्रेयस अय्यर की पारियों ने दिलाई जीत भारतीय टीम की बल्लेबाजी की बात करें तो लक्ष्य का पीछा करते हुए विराट कोहली ने एक बार फिर खुद को बड़े मैचों का खिलाड़ी साबित किया। उन्होंने 84 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, जिससे टीम की जीत आसान हो गई। श्रेयस अय्यर ने भी 45 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके अलावा, कप्तान रोहित शर्मा (Caption Rohit Sharma) ने भी तेजी से रन बटोरते हुए पारी को आगे बढ़ाने में मदद की। गेंदबाजी में भी भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। मोहम्मद सिराज, जसप्रीत बुमराह और कुलदीप यादव ने अहम विकेट चटकाए, जिससे ऑस्ट्रेलिया की टीम बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रही। फाइनल में भारत का सामना किससे होगा? भारत ने फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है, लेकिन उसका मुकाबला किस टीम से होगा, इसका फैसला 5 मार्च को होगा। दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा, जो लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में आयोजित होगा। फाइनल मुकाबला 9 मार्च को दुबई के मैदान पर खेला जाएगा, जहां भारतीय टीम अपनी बेहतरीन फॉर्म को जारी रखते हुए चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतने के इरादे से उतरेगी। इसे भी पढ़ें:- कांग्रेसी प्रवक्ता के इस बयान पर मचा सियासी घमासान, रोहित शर्मा को कहा मोटा तो बीजेपी ने की राहुल से तुलना क्या भारत दोबारा चैंपियन बन पाएगा? भारतीय क्रिकेट टीम पहले भी चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) जीत चुकी है और इस बार भी उनकी नजरें खिताब पर टिकी होंगी। टीम की मौजूदा फॉर्म, मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप, धारदार गेंदबाजी और शानदार फील्डिंग को देखते हुए भारत को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, फाइनल में न्यूजीलैंड या साउथ अफ्रीका में से किसी एक टीम से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। अगर भारतीय खिलाड़ी सेमीफाइनल जैसी ही ऊर्जा और रणनीति के साथ खेलते हैं, तो एक और चैंपियंस ट्रॉफी जीतने का सपना हकीकत में बदल सकता है। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 (ICC Champions Trophy 2025) के पहले सेमीफाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हराकर फाइनल का टिकट कटा लिया। विराट कोहली की शानदार बल्लेबाजी, श्रेयस अय्यर की बेहतरीन फील्डिंग और पूरी टीम के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने यह जीत दर्ज की। अब भारतीय टीम 9 मार्च को दुबई में होने वाले फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड या साउथ अफ्रीका से भिड़ेगी। अगर टीम इसी लय में खेलती रही, तो ट्रॉफी भारत की झोली में आना तय है। Latest News in Hindi Today Hindi news ICC Champions Trophy 2025 #ICCChampionsTrophy2025 #INDvsAUS #TeamIndia #CricketFinal #ChampionsTrophy #IndiaCricket #AUSvsIND #CricketNews #CricketLovers #BCCI

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Study about beer and brain

अगर आप बीयर पीने के शौकीन हैं, तो हो जाएं सतर्क

बीयर (Beer) को दुनिया का सबसे पुराना ऐल्कोहॉल ड्रिंक माना जाता है, जिसकी उत्पत्ति 5000 ईसा पूर्व से हुई थी। यही नहीं, बीयर दुनिया का सबसे अधिक पीने वाला एल्कोहॉलिक पेय पदार्थ भी है। अधिक मात्रा में इसका सेवन हेल्थ के लिए नुकसानदायक और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का कारण बन सकता है। इसलिए, इसे सही मात्रा में पीना ही हमारे लिए फायदेमंद है। एक स्टडी के अनुसार कम मात्रा में बीयर (Beer) पीना यानी दिन में दो बियर पीना ब्रेन के लिए हानिकारक है। इसका माना जा रहा है कि इससे हमारा ब्रेन (Brain) समय से पहले ही 10 साल तक बूढ़ा हो सकता है। आइए पाएं जानकारी बीयर और ब्रेन के बारे में स्टडी (Study about beer and brain) के बारे में। बीयर और ब्रेन के बारे में स्टडी (Study about beer and brain): पाएं जानकारी मायोक्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार किसी भी मात्रा में एल्कोहॉल का सेवन स्वास्थ्य को खतरा होता है। जबकि मध्यम मात्रा में इसका सेवन करने पर जोखिम कम होता है। हाल ही में हुई स्टडी के अनुसार एल्कोहॉल का सेवन करने से ब्रेन को नुकसान हो सकता है और इसके बारे में पहले से ही पता ,है लेकिन एक नई स्टडी  की मानें तो एल्कोहॉल यानी बीयर (Beer) की कम मात्रा हमारे ब्रेन (Brain) को शरिंक कर सकता है। यानी, दिन में दो बियर बीने से ब्रेन को सिकोड़ सकता है और ब्रेन (Brain) की उम्र 10 साल तक बढ़ सकती है। यह स्टडी 36,678 मरीजों के ब्रेन के एमआरआई स्कैन (MRI Scan) पर आधारित है।  इस स्टडी में यह पाया गया है कि जो लोग दिन में दो या इससे अधिक बीयर (Beer) पीते हैं, उनके दिमाग को नुकसान हो सकता है। यह इफेक्ट एल्कोहॉल की मात्रा के अनुसार बढ़ सकता है। इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि बीयर (Beer) या एल्कोहॉल के सेवन का प्रभाव ब्रेन (Brain) पर एक जैसा नहीं होता है। अगर आप इस समस्या से बचना चाहते हैं तो शराब या बीयर (Beer) के सेवन से बचें, ताकि आपके ब्रेन की हेल्थ सही रहे। किसी भी मात्रा में एल्कोहॉल का सेवन करने से कैंसर का खतरा बढ़ता है और इससे इम्युनिटी भी कम होती है। लेकिन, यह नई स्टडी बियर पीने वाले लोगों के लिए एक और चिंता का कारण है। उन्हें एल्कोहॉल के सेवन से पहले खास ध्यान रखना चाहिए।  यह तो थी बीयर और ब्रेन के बारे में स्टडी (Study about beer and brain) के बारे में जानकारी। कुछ अन्य फूड्स भी हैं जो हमारे ब्रेन (Brain) की उम्र को बढ़ा सकते हैं। अब जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।  इसे भी पढ़ें: Antioxidant: फिट एंड फाइन रहने के लिए एंटीऑक्सीडेंट क्यों जरूरी है? फूड्स जो ब्रेन की उम्र बढ़ाएं ब्रेन (Brain) की उम्र को केवल एल्कोहॉल ही नहीं बल्कि अन्य कई फ़ूड भी बढ़ा सकते हैं। इनके अधिक सेवन ब्रेन सिकुड़ कर सकते हैं। आइए जानें इन फूड्स के बारे में। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Study about beer and brain #Studyaboutbeerandbrain #beer #brain #alcohol

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Holi Hindu Festival

होली 2025: इस साल होली के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें इसका आपके जीवन पर क्या होगा प्रभाव

होली (Holi) का त्योहार रंगों, उत्साह और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। लेकिन इस साल होली (Holi) का त्योहार एक दुर्लभ खगोलीय घटना के साथ मनाया जाएगा। 14 मार्च 2025 को होली के दिन चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लगेगा, जो इस त्योहार को और भी खास बना देगा। चंद्र ग्रहण का यह संयोग कई लोगों के मन में सवाल उठा रहा है कि इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं कि होली पर चंद्र ग्रहण का क्या महत्व है और इसका हमारे जीवन पर क्या असर हो सकता है। चंद्र ग्रहण क्या है और क्यों लगता है? चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा (Moon) के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का प्रकाश कुछ समय के लिए मंद पड़ जाता है। चंद्रग्रहण का ज्योतिषीय, धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका कारण राहु-केतु को माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, यह ग्रहण केतु के प्रभाव से लगेगा। राहु और केतु को सांप के समान माना जाता है, जिनके डसने से ग्रहण होता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब राहु और केतु चंद्रमा को ग्रसने का प्रयास करते हैं, तब चंद्रग्रहण घटित होता है। चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) तीन प्रकार के होते हैं: पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और उपच्छाया चंद्र ग्रहण। 14 मार्च 2025 को लगने वाला चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा (Moon) पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा। होली और चंद्र ग्रहण का संयोग भारत में इस वर्ष होलिका दहन 13 मार्च को और होली का उत्सव 14 मार्च को मनाया जाएगा। इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भी लगेगा। हालांकि, चूंकि यह ग्रहण भारत में दिन के समय पड़ेगा, इसलिए यह यहां दिखाई नहीं देगा। ग्रहण नजर न आने के कारण इसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं होगा, और होली (Holi) के त्योहार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इसे भी पढ़ें:- कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्र, जानें मां दुर्गा के आगमन का संकेत क्या भारत में सूतक रहेगा इस वर्ष होली के दिन, 14 मार्च को आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार, उपछाया ग्रहण सुबह 9:27 बजे शुरू होगा, जबकि आंशिक ग्रहण 10:39 बजे प्रारंभ होकर 11:56 बजे समाप्त हो जाएगा। चूंकि ग्रहण दिन के समय पड़ेगा, इसलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा और इसका कोई प्रभाव भी नहीं पड़ेगा। हालांकि, इसका असर मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, यूरोप के कई क्षेत्रों, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, तथा अफ्रीका के बड़े हिस्सों में देखा जाएगा। राशि पर क्या होगा असर वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आते हैं। इस स्थिति में पृथ्वी सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है, जिससे चंद्रग्रहण होता है। 14 मार्च को लगने वाला यह चंद्रग्रहण कन्या राशि में होगा, इसलिए इस राशि के जातकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि यह ग्रहण उनके लिए अशुभ प्रभाव ला सकता है। ग्रहण के समय चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि सूर्य और शनि चंद्रमा के सातवें भाव में रहकर उस पर पूर्ण सप्तम दृष्टि डालेंगे, जिससे इसका प्रभाव और अधिक तीव्र होगा। केतु चंद्रमा (Moon) के द्वितीय भाव में रहेगा, जिससे मानसिक तनाव की स्थिति बन सकती है। वहीं, राहु, बुध और शुक्र चंद्रमा के आठवें भाव में स्थित होंगे, जिससे कुछ राशियों पर मिश्रित प्रभाव पड़ेगा। दूसरी ओर, गुरु ग्रह (बृहस्पति) चंद्रमा के दशम भाव में रहेगा, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्तियों में वृद्धि होगी। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Lunar Eclipse #Holi2025 #LunarEclipse2025 #HoliFestival #ChandraGrahan #HoliImpact #HoliCelebration #Astrology2025 #HinduFestival #SpiritualEffects #FestivalVibes

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