Who Benefits Most from the New Waqf Act Amendments

Waqf Act amendments: नया वक़्फ़ बिल पास होने पर इन्हें होगा सबसे अधिक फायदा?

लोकसभा में आज वक्फ बिल को नए स्वरूप (Waqf Act amendments) में पेश कर दिया गया है। फ़िलहाल बिल चर्चा जारी है। संसद में वक्फ बिल को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा में वोटिंग के जरिए बहुमत की जरूरत है। इसमें सरकार को इस बिल को पास कराने हेत लोकसभा के 543 में से 272 और राज्यसभा के 245 में से 123 सांसदों का समर्थन जरूरी है। बात करें राज्यसभा के सांसदों की संख्या की राज्यसभा में अभी 9 सीटें खाली हैं। तो ऐसे में मौजूदा 236 में से 119 सांसदों का समर्थन जरूरी है। बीजेपी के पास 96 सांसद हैं। वहीं एनडीए की सहयोगी पार्टियों के पास 19 सांसद हैं। ऐसे में सरकार को 6 नॉमिनेट सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। ऐसे में यदि यह विधेयक संसद से पास हो जाता है तो यह बिल कानून बन जाएगा। साल 2006 की जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही एक्ट (Waqf Act amendments) में किए जा रहे हैं बदलाव  हालांकि वक्फ बिल पर केंद्र सरकार का कहना है कि “साल 2006 की जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही एक्ट (Waqf Act amendments) में बदलाव किए जा रहे हैं।” बता दें कि 8 अगस्त को लोकसभा में बिल पेश करते हुए संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि “इस बिल का उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं के कामकाज में दखलंदाजी करना नहीं है। बिल मुस्लिम महिलाओं और पिछड़े मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में हिस्सेदारी देने के लिए लाया गया है। अहम बात यह कि इसमें वक्फ प्रॉपर्टीज के विवाद 6 महीने के भीतर निपटाने का प्रावधान है। इससे वक्फ में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का हल निकलेगा।” जानकारी के मुताबिक नए बिल के कानून बन जाने के बाद वक्फ की संपत्ति का विवाद सुलझाने में राज्य सरकारों को पहले से अधिक शक्तियां मिल जाएँगी। ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि प्रस्तावित कानून का असर दरगाहों या मुसलमानों के धार्मिक संस्थानों और पुरानी मस्जिदों पर नहीं होगा, लेकिन बिल में किए गए परिवर्तनों में वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या में वृद्धि हो जरूर हो सकती है। नए बिल के मुताबि वक्फ बोर्ड के सदस्यों के अलावे अब बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। मौजूदा सरकार अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं। जैसे कि  अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ एक्ट (Waqf Act amendments) से जुड़ी तकरीबन 120 याचिकाएं की गईं हैं दायर  बता दें कि साल 2022 से अब तक देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ एक्ट (Waqf Act amendments) से जुड़ी तकरीबन 120 याचिकाएं दायर की गईं थीं। जिसमें मौजूदा वक्फ कानून में कई खामियां बताई गईं। इनमें से तकरीबन15 याचिकाएं तो खुद मुस्लिमों ने दायर कर रखी है। इन याचिकाओं में सबसे बड़ा तर्क यह कि वक़्फ़ एक्ट के सेक्शन 40 के मुताबिक, वक्फ किसी भी प्रॉपर्टी को अपनी प्रॉपर्टी घोषित कर सकता है। इसके खिलाफ कोई शिकायत भी वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल में ही की जा सकती है और इस पर अंतिम फैसला ट्रिब्यूनल का ही होता है। ऐसे में एक आम इंसान के लिए वक्फ के फैसले के कोर्ट में चैलेंज करना आसान नहीं है। इसे भी पढ़ें:- मुंबई में हिंदू युवकों की पिटाई पर मचा बवाल, बजरंग दल ने दी यह चेतावनी वक़्फ़ का इतिहास (Waqf Act amendments) ऐसे में सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वक्फ (Waqf Act amendments) कहते किसे हैं। दरअसल, वक्फ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है। जिसका अर्थ होता है, ठहरना या रोकना। कानूनी शब्दों में समझने की कोशिश करें तो वक्फ उसे कहते हैं, इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है, तो इसे प्रॉपर्टी को वक्फ कर देना यानी रोक देना कहते हैं। फिर वो चाहे कुछ रुपये हों या संपत्ति हो या फिर चाहे बहुमूल्य धातु हो, घर मकान ही या जमीन ही क्यों न हो? बता दें कि दान की गई ऐसी प्रॉपर्टी को अल्लाह की संपत्ति कहते हैं। और अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने वाले इंसान को वकिफा कहा जाता है। गौर करने वाली बात यह कि वकिफा द्वारा दान की गई या वक्फ की संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता। इसका उपयोग सिर्फ धर्म के लिए ही जा सकता। रही बात भारत में वक्फ के परंपरा की, तो बता दें कि इसका इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है। भारत में आजादी के बाद साल 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना था। फिर साल 1995 में इस एक्ट में कुछ संशोधन किए गए थे। और फिर संशोधन करने के बाद नया वक्फ एक्ट बना। इसके अलावा साल 2013 में भी इसमें कई बदलाव किए गए। Latest News in Hindi Today Hindi News Waqf Act amendments #WaqfAct #WaqfBill2024 #WaqfProperty #WaqfBoard #IndianLaw #MuslimCommunity #LegalReforms #IndiaNews #GovtPolicy #WaqfRights

आगे और पढ़ें
bidi smoking effects

Bidi vs cigarette health risk: सेहत के लिए बीड़ी पीना अधिक खतरनाक या सिगरेट, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट? 

देश में ऐसे करोड़ों लोग हैं जो रोजाना बेख़ौफ़ होकर सिगरेट और बीड़ी पीते हैं। वो इस बात को जानते भी हैं कि इसे पीने से कैंसर जैसी जानलेवा घातक बीमारी हो सकती है। कमाल की बात यह कि यह जानते-बुझते हुए भी कि इससे जान जा सकती है, फिर भी धड़ल्ले से लोग सुट्टा मरते हैं। सुबह आँख खुलने से लेकर रात को सोने से पहले तक लोग सिगरेट पीते हैं। वो तो भला हो नींद का, जो 6-7 घंटे के लिए आ जाती है, जिसके चलते कम से कम वो समय बच जाता है। अन्यथा लोगों की सिगरेट के प्रति दीवानगी इस कदर है कि वो सोते-सोते भी पिएं। खैर, कहने की जरूरत नहीं कि वो चाहे बीड़ी हो या सिगरेट, दोनों का सेवन करने से जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। खैर, अक्सर इस बात को लेकर बड़ी चर्चा होती है कि बीड़ी ज्यादा खतरनाक होती है या सिगरेट (Bidi vs cigarette health risk)? बीड़ी पीने वाले सिगरेट को अधिक नुकसानदायक मानते हैं और सिगरेट पीने वाले बीड़ी को अधिक खतरनाक मानते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि बीड़ी और सिगरेट में से कौन सी चीज शरीर के लिए अधिक नुकसानदायक हो सकती है?  बीड़ी और सिगरेट दोनों का इस्तेमाल हर हाल में सेहत के लिए नुकसानदायक (Bidi vs cigarette health risk) होता है स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बीड़ी और सिगरेट दोनों का इस्तेमाल हर हाल में सेहत के लिए नुकसानदायक (Bidi vs cigarette health risk) होता है। बात करें सिगरेट और बीड़ी के अंतर की, तो बीड़ी का धुआं सिगरेट के धुएं की तुलना में कहीं ज्यादा जहरीला और नुकसानदायक होता है। ऐसा इसलिए कि बीड़ी में मौजूद तंबाकू और अन्य हानिकारक तत्व जलते ही धुएं में घुलमिल जाते हैं। इसके चलते शरीर में कार्सिनोजिक यानी कैंसर पैदा करने वाले तत्वों की मात्रा अधिक हो जाती है। और फिर लगातार सेवन के चलते मुंह,फेफड़ों और गले के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अब इसका अर्थ यह नहीं ही है कि सिगरेट पीने से कुछ नहीं होता। एक्सपर्ट की मानें तो सिगरेट के धुएं में भी ऐसे हानिकारक रसायन होते हैं जो कैंसर, दिल की बीमारियों और फेफड़ों की समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो सिगरेट के धुएं में निकोटीन नामक पदार्थ होता है। इसी निकोटीन की वजह से लोगों को सिगरेट पीने की लत लग जाती है। बता दें कि इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड और टार जैसी हानिकारक सामग्री भी होती है, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स बीड़ी और सिगरेट का लगातार सेवन करना होता है सेहत के लिए बेहद खतरनाक (Bidi vs cigarette health risk)  कुल-मिलाकर बीड़ी और सिगरेट दोनों में ही निकोटीन की मात्रा बहुत होती है। दोनों के सेवन से फेफड़ों में खतरनाक तत्व जमा होते जाते हैं। आग चलकर इसका परिणाम यह होता है कि सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। नलियां सिकुड़ने से ऑब्सट्रक्टिव डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बीड़ी और सिगरेट के सेवन से फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यही नहीं, कई रिसर्च में तो 1 बीड़ी को 2 सिगरेट के बराबर खतरनाक बताया गया है। ऐसे में बीड़ी और सिगरेट का लगातार सेवन करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक (Bidi vs cigarette health risk) होता है। इन दोनों का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। विशेषकर फेफड़ों के लिए इन चीजों को ज्यादा घातक माना जाता है। आपको बता दें कि बीड़ी पत्तियों से बनाई जाती है। इस दौरान इसमें तंबाकू और कुछ अन्य पदार्थ भरे जाते हैं। रही बात सिगरेट की तो सिगरेट में तंबाकू को कागज की परत में लपेटा जाता है। तंबाकू के साथ-साथ इसमें कई अन्य रसायन और प्रिजर्वेटिव्स भी होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह कि सिगरेट को मशीन से तैयार किया जाता है, जबकि बीड़ी को हाथों से तैयार किया जाता है। दोनों ही उत्पादों में तंबाकू और अन्य खतरनाक तत्व होते हैं। और यही खतरनाक तत्व स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Bidi vs cigarette health risk #BidiVsCigarette #SmokingRisks #HealthHazards #TobaccoDangers #LungHealth #QuitSmoking #BidiSmoke #CigaretteAddiction #ExpertOpinion #HealthyLiving

आगे और पढ़ें
Chaiti Chhath Mahaparv 2025

चैती छठ महापर्व 2025: सूर्य देव की पूजा और उपवास का पवित्र अवसर

भारत में छठ पूजा (Chhath Puja) का महत्व अत्यधिक है, और इसे विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, और देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। हालांकि, छठ पूजा का मुख्य पर्व कार्तिक मास में मनाया जाता है, वहीं चैती छठ पूजा भी बहुत श्रद्धा और धूमधाम से मनाई जाती है। चैती छठ विशेष रूप से वसंत ऋतु में मनाई जाती है, और यह खासकर उत्तर भारत में मनाई जाती है। इस साल चैती छठ महापर्व (Chhath Puja) का आयोजन 2025 में बहुत धूमधाम से होने जा रहा है। इस लेख में हम चैती छठ पूजा की तिथियों, महत्व, और मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानेंगे। चैती छठ पूजा का महत्व चैती छठ पूजा (Chhath Puja) का आयोजन मुख्य रूप से सूर्य देव (Lord Sun) की पूजा के लिए किया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से व्रति द्वारा सूर्यदेव और चंद्रदेव की आराधना के रूप में की जाती है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाएँ अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान सुख, और अपने घर के सभी सदस्य की भलाई के लिए करती हैं। चैती छठ का आयोजन वसंत ऋतु में होता है और यह हिंदू पंचांग के चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन व्रति अपने परिवार के सुख और समृद्धि के लिए सूर्योदय से पहले उबटन, स्नान, और फिर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। चैती छठ 2025 की तिथियाँ चैती छठ पूजा 2025: महत्वपूर्ण तिथियां और मुहूर्त चैती छठ (Chaiti Chhath) महापर्व 2025 का आयोजन मंगलवार, 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। पंचांग के अनुसार, यह पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर सप्तमी तिथि को समाप्त होता है। इस दिन से व्रति अपने घरों में नहाय-खाय का आयोजन करते हैं, जिसमें कद्दू, चना दाल और अरवा चावल का सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। आइए जानते हैं चैती छठ की महत्वपूर्ण तिथियां और मुहूर्त: 1. खरना (Kharna) – 2 अप्रैल 2025 (बुधवार) खरना पूजा चैती छठ के दूसरे दिन होती है। यह दिन व्रति के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन से छठ पूजा की मुख्य शुरुआत होती है। खरना के दिन व्रति दिनभर उपवासी रहते हैं और शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद बनाते हैं। इसके बाद व्रति संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। खरना के साथ ही 36 घंटे के निर्जला उपवास की शुरुआत हो जाती है, जो अगले दिन सूर्यास्त और फिर सूर्योदय अर्घ्य तक जारी रहता है। इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व 2. सूर्यास्त अर्घ्य – 3 अप्रैल 2025 (शुक्रवार) सूर्यास्त के समय सूर्य देवता (Lord Sun) को अर्घ्य अर्पित करना एक अहम हिस्सा होता है। इस दिन व्रति नदी या जलाशय के किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह समय विशेष रूप से परिवार के लिए सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना का होता है। 3. सूर्योदय अर्घ्य – 4 अप्रैल 2025 (शनिवार) चैती छठ (Chaiti Chhath) का मुख्य दिन सूर्योदय अर्घ्य का होता है। इस दिन व्रति सूर्योदय से पहले नदी या तालाब के किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। व्रति इस दिन अपने 36 घंटे के उपवास का समापन करते हैं और परिवार की भलाई के लिए सूर्य देव (Lord Sun) का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह दिन विशेष रूप से सूर्य पूजा और परिवार के लिए आशीर्वाद लेने का होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chhath Puja #ChaitiChhath2025 #ChhathPuja #SunGodWorship #ChhathFestival #ChhathVrat #SuryaPuja #ChhathRituals #ChhathMahaparv #Devotion #FestivalsOfIndia

आगे और पढ़ें
US Reciprocal Tariffs May Cost India ₹26,000 Crore

US reciprocal tax impact on India: अमेरिका के रेसिप्रोकल टैक्स के चलते भारत को हो सकता है 26000 करोड़ का नुकसान

जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से दुनिया भर को उन्होंने अपने फैसलों से चौंका दिया है। कनाडा, चीन और भारत समेत सभी देशों को टेरिफ का टेरर दिखा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप आज यानी, 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाने जा रहे हैं। इस टैक्स का खामियाजा सभी को भुगतना पड़ सकता है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। जानकारी के मुताबिक रेसिप्रोकल टैक्स से भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर बड़ा असर (US reciprocal tax impact on India) पड़ सकता है। केयरएज रेटिंग्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के नए टैरिफ के चलते उत्तर अमेरिकी देश को होने वाले निर्यात पर भारत को तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (26000 करोड़ रुपये से ज्यादा) का नुकसान हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 अप्रैल को केयरएज रेटिंग्स की निदेशक स्मिता राजपुरकर ने मुंबई में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि “हालांकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 0.1 प्रतिशत (3.1 बिलियन डॉलर) पर सीमित है, लेकिन फिर भी इस जोखिमों को लेकर चिंता बनी हुई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ये क्या है रेसिप्रोकल टैक्स? तो आपको बता दें कि रेसिप्रोकल का शाब्दिक अर्थ है आप जैसा करोगे, वैसा ही हम करेंगे।   सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं बता दें कि ट्रंप ने पहले ही कई टैरिफ उपायों की घोषणा कर दी है, जिसमें चीन से आयातित सभी वस्तुओं पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ तो मैक्सिको और कनाडा से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल है, जबकि कनाडाई तेल पर 10 प्रतिशत की कम दर लागू होगी। दरअसल, प्रेसिडेंट ट्रंप का मानना है कि चीन, भारत, कनाडा और मैक्सिको, अमेरिका पर अधिक टैक्स लगाते हैं। कारण यही जो अब हम भी उन पर अधिक टैरिफ लगाएंगे। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हर देश एक-दूसरे से पेट्रोल-डीजल, गैस समेत अन्य वस्तुओं का आयात-निर्यात करते हैं। इस दौरान सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं।  इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है (US reciprocal tax impact on India) बात करें भारत रेसिप्रोकल टैक्स से होने वाले नुकसान की तो भारतीय निर्यात पर 8 प्रतिशत डिफरेंशियल टैरिफ और डॉलर के मुकाबले रुपये में 4 प्रतिशत एक्सचेंज रेट डेप्रिशिएशन के अनुमान के परिणामस्वरूप, करेंसी में उतार-चढ़ाव को एडजस्ट करते हुए, 4 बिलियन डॉलर का शुद्ध निर्यात प्रभाव देखने को मिलेगा। इस तरह सभी निर्यात श्रेणी में एक समान अतिरिक्त टैरिफ को ध्यान में रखते हुए तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (US reciprocal tax impact on India) होने का अनुमान है। अमेरिकी टैरिफ से भारत के ऑटो और फार्मा जैसे सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसके अलावा सेक्टर स्पेसिफिक टैरिफ भी लागू किए गए हैं, जैसे सभी स्टील और एल्युमीनियम आयातों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और ऑटोमोबाइल व कुछ ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ, साथ ही सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल्स सहित अन्य उद्योग भी रडार पर हैं। ऐसा नहीं कि भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है। गौरतलब हो कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले साल भारत ने वहां 78 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जो कुल निर्यात व्यापार का 18 प्रतिशत है।   Latest News in Hindi Today Hindi news US reciprocal tax impact on India #USReciprocalTariffs #IndiaExportLoss #TradeDeficit #ReciprocalTaxImpact #IndiaUSTradeRelations #ExportSectorsAffected #JewelryExports

आगे और पढ़ें
Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि में इन 7 दिव्य मंत्रों से होगी धन की प्राप्ति

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह समय मां दुर्गा (Maa Durga) की आराधना और आशीर्वाद पाने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं वे 7 चमत्कारी मंत्र जो आपको जीवनभर धनवान और खुशहाल बनाए रखेंगे। ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥  दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता॥ सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे।सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥ रोगानशेषानपहंसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।त्वामाश्रितानां न विपन्नराणांत्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥ सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥ इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व नवरात्रि में 9 देवियों के विशेष बीज मंत्र इस प्रकार हैं: दुर्गा सप्तशती पाठ चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस पवित्र ग्रंथ में 13 अध्याय और 700 श्लोक शामिल हैं, जो माता दुर्गा (Maa Durga) के तीन प्रमुख स्वरूपों का विवरण प्रस्तुत करते हैं। यदि कोई व्यक्ति नवरात्रि में संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में असमर्थ हो, तो केवल 7 विशेष मंत्रों का जाप करके भी मां दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaitra Navratri #ChaitraNavratri #Navratri2024 #DurgaPuja #DivineFeminine #ShaktiPower #SacredMantras #MantraMeditation #VedicWisdom #SpiritualGrowth

आगे और पढ़ें
Health issues in summer

Health issues in summer: गर्मी में होने वाली 5 सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं और उनसे सुरक्षित रहने के टिप्स

गर्मी का महीना अपने साथ कड़कती धूप, लंबे दिन और छोटी रातें ले कर आता है। इन दिनों कई हेल्थ रिस्क्स का जोखिम भी रहता है। अधिक तापमान और ह्यूमिडिटी के कारण लोग कई बीमारियों का अनुभव कर सकते हैं। इनकी वजह से आंख, स्किन, बाल, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और न्यूलोजिकल प्रोब्लेम्स हो सकती हैं। इन हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचाव के लिए इनके बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानें गर्मी में हेल्थ इशूज के बारे में और यह भी जानकारी पाएं कि इस दौरान कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है? सबसे पहले गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) के बारे में जान लेते हैं। गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer): पाएं जानकारी वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (World health Organisation) के अनुसार हीट स्ट्रेस मौसम संबंधी डेथस का प्रमुख कारण है और यह डायबिटीज, मानसिक स्वास्थ्य, अस्थमा जैसी अंडरलायिंग डिजीज को बढ़ा सकता है और कुछ संक्रामक रोगों के ट्रांसमिटेड के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। गर्मी से संबंधित बीमारी एक मेडिकल एमर्जेन्सी है। गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) इस प्रकार हैं:  हीट स्ट्रोक (Heat stroke) हीट स्ट्रोक (Heat stroke) ऐसी ऐसी बीमारी है, जो अधिक गर्म टेम्प्रेचर की वजह से होती है। हाई टेम्प्रेचर के कारण इसे हाइपरथर्मिया भी कहा जाता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, जी मिचलाना और कमजोरी आदि शामिल हैं। यही नहीं, गंभीर मामलों में यह ऑर्गन फेलियर, बेहोशी और मृत्यु का कारण बन सकती है। बचाव के तरीके: अगर आपको गर्मी में हीट स्ट्रोक (Heat stroke) से बचना है तो दोपहर को घर से बाहर जाने से बचें। हल्के रंग और कॉटन के कपडे पहनें। बाहर जाते हुए छाते और हैट का इस्तेमाल करें। अगर आपको इसके लक्षण नजर आते हैं तो ठंडे स्थान पर और हाइड्रेट रहें। डॉक्टर की सलाह भी लें।  फूड पोइजनिंग (Food Poisoning) फूड पोइजनिंग गर्मियों में सबसे अधिक होने वाली बीमारियों में से एक है और यह समस्या दूषित फूड्स को खाने से होती है। गर्मियों में फूड पॉइजनिंग होने का कारण यह है कि गर्मी के महीने में ह्यूमिड मौसम बैक्टीरियल ग्रोथ आसानी से होती है। यह समस्या बैक्टेरिया, वायरस, केमिकल या टॉक्सिन्स के कारण फैलती है और इसके कारण डिस्कम्फर्ट, जी मिचलाना, उलटी आना और डायरिया जैसी समस्या हो सकती है। बचाव के तरीके: अपने आहार का खास ध्यान रखें। फलों और सब्जियों को खाने से पहले धोना जरूरी है। स्ट्रीट फूड और बासी खाने को खाने से बचें। पानी को भी अच्छे से फिल्टर करके या उबाल के पीएं। डिहाइड्रेशन (Dehydration) गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) में डिहाइड्रेशन (Dehydration) भी सामान्य है। इस रोग का कारण भी गर्म और ह्यूमिड कंडीशंस हैं। गर्मी में शरीर से पानी और नमक पसीने के माध्यम से बाहर निकल जाता है। इसके लक्षण हैं मुंह और जीभ का सुखना, थकावट, भूख न लगना, डार्क यूरिन और बहुत अधिक प्यास लगना आदि।  बचाव के तरीके: पानी और अन्य फ्लुइड्स को पर्याप्त मात्रा में पीएं, ताकि डिहाइड्रेशन (Dehydration) से बच सके। इसके साथ ही इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करें।  इन्फेक्शंस (Infections) मच्छरो और टिक के कारण होने वाले इन्फेक्शन, अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस और समर वायरस ऐसे संक्रमण हैं, जो गर्मियों में होते हैं। कई बीमारियां मल, ओरल और सांस के द्वारा बीमार लोगों से फैलती हैं।  बचाव के तरीके:  इस रोग से बचाव के लिए बार -बार हाथ धोएं खासतौर पर खाना खाने से पहले। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से बचें और साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स सनबर्न और स्किन रैशेज (Sunburn and skin rashes) बहुत अधिक पसीना आने के कारण हीट रैशेज हो सकते हैं।  इसके साथ ही अधिक समय तक धुप में रहने के कारण सनबर्न हो सकता है। इसके कारण स्किन में रेडनेस और अन्य समस्याएं हो सकती हैंl बचाव के तरीके: गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) में इस समस्या से बचाव के लिए कॉटन के कपडे पहनें ताकि यह पसीने को आसानी से सोख सके। इसके साथ ही घर से बाहर निकलते हुए SPF 30+ सनस्क्रीन को अप्लाई करें। अपनी त्वचा को फ्रेश और बैक्टीरिया फ्री रखने के लिए प्रतिदिन दो बार स्नान करें। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Health issues in summer #Dehydration #FoodPoisoning #healthissuesinsummer #Heatstroke

आगे और पढ़ें
Ghibli

चेहरे की पहचान का खतरा: एआई के साथ घिबली का मजा लेने से पहले जानें क्या हो सकते हैं जोखिम?

इस समय पूरा सोशल मीडिया घिबली (Ghibli) स्टाइल पोर्ट्रेट्स से भर चुका है और इसका पूरा श्रेय ओपनएआई (OpenAI) के चैटजीपीटी-4ओ को जाता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स प्लैटफॉर्म्स पर लोग अपने एआई (AI) द्वारा बनाए अवतारों को शेयर कर रहे हैं। लोग इस वायरल ट्रैंड का हिस्सा बनने के लिए अपनी और अपने बच्चों तक की तस्वीरों को अपलोड कर रहे हैं। यह अलग और अनोखी तस्वीरे क्यूट तो हैं, लेकिन यह अपने साथ कुछ परेशानियां भी ला सकती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि घिबली (Ghibli) हमारा फेस चुरा सकता है। यानी, यह मजा आपके लिए सजा भी बन सकता है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से। घिबली ट्रेंड क्या है? घिबली (Ghibli)  हाल ही में प्रचलित एक मशहूर एक ऐसा ट्रेंड है जिसमें लोग अपनी तस्वीरों को क्रिएटिव तरीके से एक अलग तस्वीर में बदल सकते हैं। बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज और हस्तियां अपनी तस्वीरों को बदलने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही हैं। असल में घिबली एक जापानी एनिमेशन स्टूडियो है, जो अपनी अनोखी और कल्पनाशील फिल्मों के लिए प्रसिद्ध है। इन्होने ही सामान्य तस्वीरों को इस तरह का क्रिएटिव लुक देना शुरू किया था। हयाओ मियाजाकी, इसाओ ताकाहाटा, और तोशियो सुजुकी ने 1985 में प्रसिद्ध जापानी एनिमेशन कंपनी कंपनी घिबली की स्थापना की है। यह ट्रेंड आजकल बहुत प्रसिद्ध हो रहा है। क्या घिबली (Ghibli) चुरा सकता है आपका चेहरा?  घिबली (Ghibli) जहां लोगों के लिए उत्साह का कारण है वहीं यह चिंता का विषय भी है। जो लोग इस टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं उनकी सुरक्षा और प्रिवेसी जोखिम में हो सकती है। कई डिजिटल प्राइवेसी से जुड़े लोगों ने ओपनएआई (OpenAI) के घिबली (Ghibli) को लेकर लोगों को सावधान किया है। कुछ लोगों का यह मानना है कि यह टूल ओपनएआई (OpenAI) के लिए हजारों पर्सनल फोटोज को प्राप्त करने की एक चाल हो सकती है। यानि इसका इस्तेमाल करने से यूजर की प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है।  एक्सपर्ट्स ने यह भी नोट किया है कि इन तस्वीरों का एआई (AI) द्वारा मिसयूज किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की अपलोड की गई तस्वीर का उपयोग मिसलीडिंग या अपमानजनक कंटेंट तैयार करने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए यूजर्स को सावधान रहने की आवश्यकता है ताकि वो भविष्य में किसी समस्या में न पड़ें। इसे भी पढ़ें: Taara chip launch: अब रोशनी से मिलेगी हाई स्पीड इंटरनेट किन बातों का रखें ध्यान? अगर आप अपनी बायोमेट्रिक आइडेंटिटी (Biometric Identity) की सुरक्षा करना चाहते हैं, तो इन बातों का खास ध्यान रखें इसके साथ ही जब जरूरी न हो तो कैमरा एक्सेस न दें। गवर्नमेंट से भी यह जानकारी लेना जरूरी है कि वो बायोमेट्रिक डेटा को कैसे इकठ्ठा करते हैं और उसक कैसे इस्तेमाल किया जाता है?। सरकार द्वारा इस सुविधा के इस्तेमाल को बंद करना चाहिए। बायोमेट्रिक आइडेंटिटी (Biometric Identity) की सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी है  एआई (AI) ने हमारी जिंदगी को आसान तो बनाया है, लेकिन इससे हम मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसलिए, डेटा लीक, आइडेंटिटी चोरी और साइबर धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे हमें घिबली (Ghibli) और अन्य टूल्स के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहना चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi  #BiometricIdentity #Ghibli #AI  #OpenAI

आगे और पढ़ें
Man with swords in Ajmer

Man with swords in Ajmer: अजमेर शरीफ दरगाह में तीन तलवार लेकर अंदर घुसा अर्धनग्न व्यक्ति, मचा हड़कंप 

राजस्थान की प्रसिद्ध अजमेर शरीफ दरगाह में लाखों हिन्दू और मुस्लिम श्रद्धालु मत्था टेकने जाते हैं। वैसे तो अजमेर शरीफ की सुरक्षा चाकचौबंद होती है लेकिन एक शख्स ने सुरक्षा को धता बताते हुए एक दो नहीं बल्कि 3 तलवारों के साथ अंदर प्रवेश (Man with swords in Ajmer) कर गया। तीन तलवार लेकर घुसे अर्धनग्न व्यक्ति को देख मुस्लिम श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया। दरगाह के भीतर जब मौजूद लोगों ने उस शख्स को देखा तो उनके होश फाख्ता हो गए। मौके की नज़ाकत को समझते हुए लोगों ने त्वरित कार्रवाई की। अहम बात यह कि अजमेर शरीफ दरगाह की सुरक्षा में यह चूक ईद के ठीक अगले दिन हुई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक दरगाह के सभी 10 प्रवेश द्वारों पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। बता दें कि अजमेर शरीफ का मुख्य द्वार निजाम गेट कहलाता है। वहां पर आरएसी के तकरीबन10 जवान तैनात रहते हैं। इसके अलावा मेटल डिटेक्टर और बैग स्कैनर भी लगे हुए हैं। लेकिन, फिर भी व्यक्ति का अंदर तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता ही है।  एक स्थानीय व्यक्ति ने साहस दिखाया और संदिग्ध युवक से तलवार छीन (Man with swords in Ajmer) ली जानकारी के मुताबिक एक स्थानीय व्यक्ति ने साहस दिखाया और संदिग्ध युवक से तलवार छीन (Man with swords in Ajmer) ली। इस छीना-झपटी के दौरान युवक जख्मी हो गया। इस दौरान उसके हाथ से खून बहने लगा। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी और दिलेरी दिखाते हुए अन्य श्रद्धालुओं की मदद से अर्धनग्न व्यक्ति को पकड़कर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया। हालांकि पुलिस ने तुरंत आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वह व्यक्ति कौन था और उसके मंसूबे क्या थे? खैर, पुलिस घटना की गंभीरता से जांच कर रही है। साथ यह भी देखा जा रहा है कि सुरक्षा में चूक हुई तो भी कैसे हुई? हालाँकि इस घटना के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है और दरगाह की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। वो बात और है कि इस घटना के बाद से श्रद्धालुओं में डर का माहौल जरूर बना हुआ है। कुछ भी हो लेकिन एक अच्छी बात यह कि स्थानीय लोगों की सतर्कता और बहादुरी से एक संभावित बड़ी घटना टल गई।  इसे भी पढ़े:– अजमेर शरीफ पर पीएम मोदी के इस कदम से भड़की हिंदू सेना, कही यह बात प्रधानमंत्री से लेकर मशहूर हस्तियों ने यहाँ चादर भेजी और चढ़ाई है (Man with swords in Ajmer) बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह का निर्माण मुस्लिम शासक इल्तुतमिश के शासनकाल में हुआ था। जिसे बाद में मुगल सम्राट हुमायूं के शासनकाल में पूरा किया गया। दरगाह का यह स्थल, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। गौर करने वाली बात यह कि आज भी यह हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। यही नहीं, देश के प्रधानमंत्री से लेकर मशहूर हस्तियों ने यहाँ चादर भेजी और चढ़ाई है। लोगों का विश्वास है कि यहां मांगी गई मुराद कभी खाली नहीं जाती।  Latest News in Hindi Today Hindi news Man with swords in Ajmer AjmerSharif #AjmerDargah #BreakingNews #IndiaNews #SecurityBreach #AjmerIncident #DargahAlert #AjmerLatest #ReligiousSite #ViralNews

आगे और पढ़ें
Mumbai bomb blast verdict

Mumbai bomb blast verdict: मुंबई बम धमाके के 32 साल बाद विशेष अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला, टाइगर मेमन को लगा झटका

साल 1993 में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस कदर अचनाक हुए बम धमाकों से मुंबई दहल गई थी। इस हादसे के जख्म आज भी हरे हैं। आखिरकार 32 इस हमले के साजिशकर्ता टाइगर मेमन को लेकर मुंबई की एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला (Mumbai bomb blast verdict) दिया है। आदेश के मुताबिक, मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के कथित मुख्य साजिशकर्ता में से एक टाइगर मेमन तथा उसके परिवार की 14 संपत्तियां केंद्र सरकार को सौंपी जाएंगी। आतंकवादी और विध्वंसकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1987 (TADA) अदालत के आदेश के बाद ये संपत्तियां 1994 से बंबई उच्च न्यायालय के ‘रिसीवर’ के कब्जे में थीं। जानकारी के मुताबिक पिछले सप्ताह 26 मार्च को पारित अपने एक आदेश में विशेष टाडा अदालत के न्यायाधीश वी.डी. केदार ने कहा कि “अचल संपत्तियों का कब्जा केंद्र सरकार को सौंप दिया जाना चाहिए।” आदेश में कहा गया कि “केंद्र को सौंपी जाने वाली संपत्तियां ऋणभार से मुक्त हैं और इस तरह सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार 14 अचल संपत्तियों पर कब्जा पाने की हकदार है।”  केंद्र सरकार को उन्हें जब्त करने का (Mumbai bomb blast verdict ) देना है आदेश   खैर, इस बीच तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (संपत्ति समपहरण) अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी ने संपत्तियों को छोड़ने की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि “उपरोक्त अधिनियम का कार्य विदेशी मुद्रा छलसाधक और मादक पदार्थों के तस्करों की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों का पता लगाना और केंद्र सरकार को उन्हें जब्त करने का आदेश  (Mumbai bomb blast verdict ) देना है।” गौरतलब हो कि टाइगर मेमन की 14 संपत्तियों में बांद्रा (वेस्ट) की एक इमारत में एक फ्लैट, माहिम में एक कार्यालय परिसर, माहिम में ही एक भूखंड, सांताक्रूज (ईस्ट) में एक भूखंड और एक फ्लैट यही नहीं, इसके अलावा कुर्ला की एक इमारत में दो फ्लैट, मोहम्मद अली रोड पर एक कार्यालय, डोंगरी में एक दुकान और भूखंड, मनीष मार्केट में तीन दुकानें और मुंबई की शेख मेमन स्ट्रीट पर स्थित एक इमारत शामिल है। इसे भी पढ़ें:–चीन के इशारे पर नॉर्थईस्ट का कार्ड खेल दबाव बना रहा बांग्लादेश, पीएम मोदी से द्विपक्षीय बैठक को क्यों बेचैन युनूस विशेष अदालत ने (Mumbai bomb blast verdict ) बम धमाकों के मुख्य साजिशकर्ता टाइगर मेमन को दिया बड़ा झटका  बता दें कि मुंबई के अलग-अलग इलाकों में 12 मार्च 1993 को हुए सिलसिलेवार 13 बम धमाकों में 257 लोगों की जान चली गई थी और 700 से भी अधिक लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे चलकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी। सीबीआई के मुताबिक, साल 1993 के धमाकों की साजिश कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने आईएसआई के इशारे पर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने अपने साथी टाइगर मेमन और मोहम्मद दोसा की मदद से रची थी। ध्यान देने वाली बात यह कि दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन दोनों अब भी वांछित आरोपी हैं। टाइगर मेमन के भाई याकूब मेमन को इस मामले में दोषी ठहराया गया था और साल 2015 में उसे मृत्युदंड दिया गया था। खैर,एक तरह से 32 साल बाद ही सही मुंबई की एक विशेष अदालत ने  (Mumbai bomb blast verdict ) बम धमाकों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक, टाइगर मेमन तथा उसके परिवार को एक बड़ा झटका दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mumbai bomb blast verdict MumbaiBlasts #TigerMemon #MumbaiVerdict #JusticeServed #TerrorismTrial #CourtRuling #IndiaNews

आगे और पढ़ें
street namaz controversy

street namaz controversy: हिंदुओं से सीखें धार्मिक अनुशासन, सड़क पर नमाज न पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कही यह बड़ी बात

इन दिनों देश में हिन्दू-मुस्लिम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। आए दिन नेतागण किसी न किसी बहाने हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों को भुनाने का एक भी मौका नहीं गंवाना चाहते। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर होने वाली नमाज (street namaz controversy) को लेकर साफ़ तौर पर कहा है कि ये नहीं हो सकती है। दरअसल, समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “सड़कें चलने के लिए होती हैं और जो लोग ऐसा कह रहे हैं उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। प्रयागराज में 66 करोड़ लोग आए। कहीं कोई लूटपाट नहीं हुई, कहीं कोई आगजनी नहीं हुई, कहीं कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं हुई, कहीं कोई अपहरण नहीं हुआ, यही अनुशासन है, यही धार्मिक अनुशासन है। वे श्रद्धा के साथ आए, महास्नान में भाग लिया और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए। त्योहार और उत्सव या ऐसे कोई भी आयोजन उदंडता का माध्यम नहीं बनने चाहिए। अगर आप सुविधा चाहते हैं, तो उस अनुशासन का पालन करना भी सीखें।”   नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? इस पर उन्होंने आगे कहा कि “ईद में कौन सा प्रदर्शन करेंगे? नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? नमाज पढ़ने के लिए ईदगाह और मस्जिद हैं, न कि सड़क। इसके लिए ठीक तो बोला जा रहा है। और वैसे भी मैं किसी एक वर्ग विशेष के लिए सभी को असुविधा में नहीं डाल सकता। मुझे पूरे प्रदेश के लोगों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध करानी है।” इस बीच सड़क पर नमाज की तुलना कांवड़ यात्रा से करने पर सीएम ने कहा कि “कांवड़ यात्रा से तुलना की जा रही है, कावंड़ यात्रा हरिद्वार से लेकर गाजियाबाद और एनसीआर के क्षेत्रों तक जाती है। वो सड़क पर ही चलेगी। क्या हमने कभी परंपरागत मुस्लिम जुलूस को रोक, कभी भी नहीं रोक। मुहर्रम के जुलूस निकलते हैं। हां, ये जरूर कहा है कि ताजिया का साइज थोड़ा छोटा रखें क्योंकि तुम्हारी सुरक्षा के लिए है। रास्ते में हाईटेंशन तार होंगे, जोकि आपके लिए बदले नहीं जाएंगे। हाईटेंशन की चपेट में आने से मर जाओगे। यही होता है, कांवड़ यात्रा में भी यही बोला जाता है कि डीजे का साइज छोटा करो, जो ऐसा नहीं करता है तो सख्ती की जाती है। कानून सभी के लिए बराबर लागू होता है। फिर कैसे तुलना की जा रही है।”  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में हो सकता है पेश, राज्यसभा में मिलेगी चुनौती  सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है वक्फ (संशोधन) विधेयक पर पूछे गए सवाल का प्रश्न का उत्तर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि “सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है। हर अच्छे काम का विरोध होता है।इसी तरह वक्फ संशोधन विधेयक पर भी हंगामा हो रहा है, जो लोग इस मुद्दे पर हंगामा कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूँ, क्या वक्फ बोर्ड ने कोई कल्याण किया है? सब कुछ छोड़िए, क्या वक्फ ने मुसलमानों का भी कोई कल्याण किया है? वक्फ निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है। यह किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बन गया है और सुधार समय की मांग है और हर सुधार का विरोध किया जाता है।” Latest News in Hindi Today Hindi news street namaz controversy YogiAdityanath #ReligiousDiscipline #Namaz #Hinduism #UttarPradesh #IndianPolitics #ReligiousFreedom

आगे और पढ़ें
Translate »