Aurangzeb’s Tomb Sparks Rift in Mahayuti Alliance

औरंगजेब की कब्र को लेकर महायुति में बढ़ता मतभेद

महाराष्ट्र में मुग़ल शासक औरंगजेब (Mughal ruler Aurangzeb) की कब्र को लेकर विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है, जिसमें महायुति के विभिन्न दलों के बीच मतभेद और तनाव देखने को मिल रहे हैं। यह विवाद खासतौर पर एनसीपी और हिंदू संगठनों जैसे वीएचपी और बजरंग दल के बीच बढ़ रहा है। एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा और इस कब्र को बचाने के पक्ष में बोलते हुए हिंदू संगठनों को कड़ी फटकार लगाई। उनका मानना है कि यह कब्र शिवाजी महाराज के संघर्ष का प्रतीक है और इसे हटाना ऐतिहासिक दृष्टिकोण से गलत होगा। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी का बयान एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने इस विवाद पर अपना स्पष्ट रुख पेश करते हुए कहा कि यह कब्र हमारी शौर्य की प्रतीक है और हमें इसे बचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह कब्र उस संघर्ष की याद दिलाती है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुआ था। इसे हटाना हमारी ऐतिहासिक धरोहर को मिटाने जैसा होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने कब्र को हटाने का अल्टीमेटम दिया है, वे इसका कोई हल नहीं निकाल सकते। मुख्यमंत्री ने पहले ही कह दिया था कि कब्र का निर्णय ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के पास है, न कि किसी राजनीतिक दल के पास। मिटकरी ने कहा, “यदि कोई यह कहता है कि हम इसे तोड़ देंगे, तो ऐसा नहीं होगा। हम थोड़ा धैर्य रखें और अपने वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।” अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में इस समय किसानों की समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन हिंदू संगठन इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे इस तरह के विवादित मुद्दों को उठाकर राज्य के असली मुद्दों से ध्यान हटा रहे हैं। “किसानों की सेवा करो, कार सेवा करने की बजाय किसानों के लिए प्रदर्शन करो, तभी लोगों से आशीर्वाद मिलेगा,” उन्होंने कहा। मिटकरी ने जोर दिया कि कब्र को रहने दिया जाए, लेकिन औरंगजेब का महिमामंडन न हो, क्योंकि यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने जैसा होगा। एनसीपी और एसपी का रुख महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र पर विवाद बढ़ने के बाद, NCP और SP ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। NCP-SP के उपाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने सांगली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे अब बातचीत की शुरुआत ‘जय शिवराय’ से करें, न कि ‘हेलो’ से। शिंदे ने यह भी कहा, “हम सभी शिवाजी महाराज के मावले हैं, और यही हमारी पहचान है।” इस आदेश से यह स्पष्ट है कि NCP और SP अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं और हिंदू समुदाय के सम्मान को बनाए रखने के लिए शिवाजी महाराज के नाम का प्रचार कर रहे हैं। यह कदम भी औरंगजेब की कब्र के विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, क्योंकि शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच का संघर्ष महाराष्ट्र के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर विशेष रूप से संवेदनशील है और अपने कार्यकर्ताओं के बीच एकता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट का बयान महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के बीच भी जुबानी जंग हुई। महाराष्ट्र विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने कहा कि कब्र की मौजूदगी महाराष्ट्र के इतिहास को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह बताना चाहिए कि औरंगजेब यहां आए थे और इसी भूमि पर उन्हें दफनाया गया।” दानवे ने जोर देते हुए कहा कि यह कब्र हमारी संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है, और इसे हटाने की मांग एक साजिश है, जो इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है। “अगर किसी को हिम्मत है तो वे जाकर इसे हटाकर दिखाएं,” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार राजनीतिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक महत्व औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) पर विवाद ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर हिंदू संगठनों का मानना है कि औरंगजेब की कब्र को हटाकर इस भूमि को ‘स्वतंत्रता’ का प्रतीक बनाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इस कब्र को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि यह कब्र उन संघर्षों और पराजयों का प्रतीक है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुए थे, और हमें इसे एक ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। यह विवाद सिर्फ एक कब्र का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी मुद्दा बन गया है। यह सवाल उठता है कि क्या हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहर को सही संदर्भ में स्वीकार करना चाहिए, या इसे अपने वर्तमान राजनीतिक और सांस्कृतिक रुख के अनुसार बदलने की कोशिश करनी चाहिए। यह निश्चित रूप से एक जटिल सवाल है, जो भविष्य में और भी राजनीतिक चर्चाओं और विवादों को जन्म दे सकता है। औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) को लेकर चल रहे इस विवाद ने महायुति की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। जहां एक ओर कुछ नेता इसे महाराष्ट्र के इतिहास और संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे से राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर प्रभाव पड़ेगा, और यह निश्चित रूप से आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Mughal ruler Aurangzeb #AurangzebTombDispute #MahayutiPolitics #ShivSenaVsBJP #MaharashtraPolitics #HinduSentiments #HistoryDebate #AurangzebGrave #PoliticalConflict #MarathaPride #HindutvaAgenda

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Father-Son Kills Mother-Daughter

Father-Son Kills Mother-Daughter: सिर्फ इस एक छोटी सी वजह के चलते बाप-बेटे ने मिलकर की मां-बेटी की हत्या

देश भले ही इक्कीसवीं सदी में विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है लेकिन आज भी देश के लोग जात-पात के कुचक्र से निकल नहीं पाए हैं। देश में ऐसे कई सैकड़ों मामले हुए हैं जहाँ परिवार की प्रतिष्ठा और झूठी शान के नाम पर अपनों ने ही अपनों को मौत के घाट उतार दिया। इसी तरह का ताजा मामला है बिहार के रोहतास जिले का, जहाँ पत्नी और बेटी की हत्या करने के आरोप में एक व्यक्ति और उसके बेटे को गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, रोहतास जिले के चुटिया थाना क्षेत्र अंतर्गत पियाराकला गांव में रहने वाले पिता रामनाथ ने अपने पुत्र छोटू के साथ मिलकर अपनी ही बेटी व पत्नी की गला दबाकर कर निर्मम हत्या (Father-Son Kills Mother-Daughter) कर दी। उन्होंने ने सिर्फ हत्या की बल्कि इस पर पर्दा डालने की भी कोशिश की। पहले तो उन्होंने इसे बिजली के करंट से हुई मौत का मामला बता कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस के सामने उनकी चालाकी ज्यादा देर नहीं चल सकी और पुलिसिया डर से उन्होंने अपना अपराध काबूल कर लिया। गुनाह कबूल करने के बाद पुलिस ने बाप-बेटे को गिरफ्तार किया है।  सिर्फ अपनी झूठी शान (Father-Son Kills Mother-Daughter) के लिए हत्याकांड को दिया गया अंजाम  पुलिस के मुताबिक इस हत्याकांड को सिर्फ अपनी झूठी शान (Father-Son Kills Mother-Daughter) के लिए अंजाम दिया गया। दरअसल, बेटी अपने पिता द्वारा चुने गए व्यक्ति के बजाय अपनी पसंद के लड़के से शादी करना चाहती थी। हालांकि माँ शुरू में इस शादी के खिलाफ थी लेकिन बेटी की ख़ुशी के खातिर माँ ने भी हामी भर दी थी। भले ही माँ की सहमति थी लेकिन बाप और भाई इस शादी के सख्त खिलाफ थे। दरअसल, पिता-पुत्र मृतक प्रतिमा की शादी झारखंड में करना चाहते थे। लेकिन वो वहां शादी के लिए तैयार नहीं थी। इस बीच पिता ने बेटी को काफी समझाने की कोशिश की। लेकिन लाख समझाने के बाद भी वो पिता द्वारा तय किए गए जगह पर शादी नहीं करना चाहती थी। पुलिस के मुताबिक उसके बाद दोनों बाप बेटे ने मिलकर प्रतिमा कुमारी की हत्या करने की योजना बनाई।  बाप-बेटे ने मिलकर पार्वती देवी का भी गला घोंटकर हत्या कर (Father-Son Kills Mother-Daughter) दी जानकारी के मुताबिक 15 मार्च को लगभग सुबह 5 बजे प्रतिमा कुमारी अपनी मां पार्वती देवी के साथ कमरे में सो रही थी। योजना के तहत उस समय मौका देखकर रामनाथ राम एवं छोटू कुमार प्रतीमा कुमारी की दुपट्टे से ही गला घोंटने लगे। इस बीच आवाज सुनकर बगल में सो रही मां पार्वती देवी की नींद खुल गई। जब तक पार्वती  कुछ समझ पाती तबतक प्रतिमा की सांसे उखड़ चुकी थी। अपनी मृत बेटी को देखकर माँ पार्वती चिल्लाने लगी। उसे इस तरह चिल्लाता देख पकड़े जाने के भय से दोनों बाप-बेटे ने मिलकर पार्वती देवी का भी गला घोंटकर हत्या कर (Father-Son Kills Mother-Daughter) दी। दोनों इतने शातिर थे कि दोनों ने साड़ी के पल्लू से ही गला घोंट कर मौत के नींद सुला दिया। हत्या के बाद आरोपियों ने शवों को बिजली उपकेंद्र के नजदीक सुनसान जगह पर फेंक दिया ताकि इस हत्या को करंट लगने से हुई मौत बताया जा सके। चुटिया थाने के एसआई लक्ष्मी पासवान ने बताया कि “पुलिस को सूचना मिली की पियाराकला गांव में मां और बेटी की करंट लगने से मौत हो गई है। लेकिन जब पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर देखा तो दोनों मृतक के गर्दन पर गहरे निशान थे।” इसे भी पढ़ें:- बिहार के अररिया में गांजा तस्कर को पकड़ने गए दारोगा की इस वजह से हुई मौत पुलिसिया अंदाज में हुई पूछताछ में दोनों ने कबूला अपना गुनाह (Father-Son Kills Mother-Daughter)  पुलिस के मुताबिक शरीर और कपड़ों पर जगह-जगह खून के धब्बे थे और आसपास चूड़ियां भी टूटी हुई थी। जिससे प्रतीत होता है कि मौत से पहले दोनों ने खुद को बचाने का पूरा प्रयास किया है। घटना को लेकर विवाहिता के ससुर बिगन राम ने कहा कि “बहु बिजली के तार में उलझ गई थी और जब नातिन उसे बचाने के लिए गई तो, वह भी करंट की चपेट में आ गई। जिससे दोनों की मौत हो गई।” हालांकि दोनों शव के शरीर पर पड़े जख्म के निशान और खून के धब्बे साफ तौर से हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। इस हत्याकांड पर खुलासा करते हुए रोहतास के एसपी रौशन कुमार ने बताया कि “शुरू में पार्वती के पति और उनके छोटे बेटे ने दावा किया था कि घर के बाहर मोटर पंप चलाते समय करंट लगने से दोनों की मौत हो गई थी। लेकिन मृतका के शरीर पर गहरे घाव, खून के धब्बे और टूटी हुई चूड़ियां पुलिस को चौंकाने के लिए काफी थे। परिवार ने लोग घटना को दुर्घटना बताने की कोशिश कर रहे थे। पूछताछ के दौरान रामनाथ और छोटू के बयान आपस में मेल नहीं खाए। जिससे पुलिस को शक हुआ। चूँकि शव पर बाहरी चोट के निशान थे, सो पुलिस बाप-बेटे की थ्योरी पर भरोसा नहीं कर पा रही थी। खैर, शुरूआती पूछताछ में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने जब पुलिसिया अंदाज में तबियत से पूछताछ की तो दोनों टूट गए और अपना गुनाह कबूल (Father-Son Kills Mother-Daughter) कर लिया। गुनाह कबूल करने के बाद पार्वती के पति रामनाथ राम और उसके छोटे बेटे छोटू कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया गया है। पुलिस की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है।  Latest News in Hindi Today Hindi News Father-Son Kills Mother-Daughter #CrimeNews #FamilyMurder #ShockingCrime #FatherSonDuo #ViolentCrime #CrimeInvestigation #JusticeForVictims #MurderMystery #BreakingNews #CrimeAlert

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Yogi government crime control

UP law and order: योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आठ साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच पिछली सरकारों में गुंडाराज के लिए मशहूर यूपी के बदमाशों पर योगी सरकार (UP law and order) काल बनकर टूटी है। कारण यही जो योगी सरकार की पुलिस न सिर्फ यूपी, बल्कि पूरे देश में एक मॉडल के रूप में उभर रही है। नतीजतन विगत आठ वर्षों में प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए सुधारों से अपराध दर में भारी गिरावट आई है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यूपी सरकार ने न सिर्फ संगठित अपराधियों और माफिया पर शिकंजा कसा है, बल्कि आम नागरिकों के मन में सुरक्षा का भाव को भी जागृत किया है। कानून-व्यवस्था के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ज़ीरो टॉलरेंस की नीति का असर देखने को मिला। गौर करने वाली बात यह कि प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ अपराध से अर्जित करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की गई।  अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त (UP law and order) की कार्रवाई  पिछली सरकारों में अपराध के बल पर अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त कार्रवाई (UP law and order) की है। बता दें कि यूपी पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत तकरीबन 142 अरब से अधिक की संपत्ति को जब्त किया गया। यही नहीं, योगी सरकार के आठ साल में अपराधियों को सजा दिलवाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। यूपी पुलिस ने हरसंभव प्रयास किया कि अपराधी किसी भी हाल में कानूनी शिकंजे से छूटने न पाएं। योगी की पुलिस ने अपराधियों पर इस कदर शिंकजा कसा कि जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 तक ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 51 दोषियों को मृत्युदंड की सजा मिली। इसके अलावा 6,287 दोषियों को उम्रकैद तो वहीं, 1,091 अपराधियों को 20 वर्ष से अधिक की सजा हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक योगी सरकार के आठ सालों में पुलिस और एसटीएफ के साथ हुए एनकाउंटर में कुल 222 अपराधी मारे गए। इतना ही नहीं आठ साल में 130 आतंकवादी गिरफ्तार किये गए। न सिर्फ आतंकवादी बल्कि 171 अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा पिछले आठ वर्षों में 20,221 इनामी बदमाश गिरफ्तार किए गए तो वहीं 79,984 अपराधियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। प्रदेश को भयमुक्त बनाने हेतु 930 के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई हुई। मुठभेड़ में 20 हज़ार से अधिक इनामी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर हवालात भेज दिया।  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB का विरोध प्रदर्शन योगी सरकार (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से कराया मुक्त  डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि “योगी सरकार द्वारा गठित एंटी भू माफिया टास्क फोर्स (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। इस दौरान एटीएस ने 130 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया।” हालांकि डीजीपी ने यह भी दावा किया कि पिछले आठ सालों में प्रदेश को भयमुक्त बनाने में सफलता हासिल हुई है। उन्होंने यूपी पुलिस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि “अपराधियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई ने राज्य को सुरक्षित बनाने में मदद की है और राज्यवासियों को कानून के प्रति विश्वास दिलाया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news UP law and order #YogiAdityanath #UPLawAndOrder #CrimeFreeUP #YogiGovernment #UPPolice #UPCrimeControl #UPSafety #UPDevelopment #TerrorismArrest #CrimeDown

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International Masters League

सचिन तेंदुलकर की टीम ने वेस्टइंडीज को 6 विकेट से मात देकर जीती International Masters League

16 मार्च को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के पहले संस्करण का फाइनल मुकाबला इंडिया मास्टर्स और वेस्टइंडीज मास्टर्स के बीच खेला गया। जिसमें वेस्टइंडीज मास्टर्स  ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज मास्टर्स की टीम ने इंडिया मास्टर्स को 149 रनों का लक्ष्य दिया था। गौर करने वाली बात यह कि उसकी आधी टीम 85 के स्कोर पर ही आउट हो गई थी। ब्रायन लारा मात्र 6 रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद विलियम पर्किन्स 6 के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। इस बीच लड़खड़ाती पारी को संभालने क्रीज पर आये लेंडल सिमंस ने अकेले अपने दम पर 57 रनों की आतिशी पारी खेल वेस्टइंडीज मास्टर्स को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया। बता दें कि ड्वेन स्मिथ ने 35 गेंद पर 45 का स्कोर करके पारी का अंत किया। टीम के लिए स्मिथ और सिमंस के अलावा कोई और बड़ी पारी नहीं खेल पाया। शाहबाज नदीम टीम इंडिया के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने ओवर में 14 रन देकर 2 विकेट झटके।  सचिन तेंदुलकर की टीम ने इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के रोमांचक मुकाबले में दी वेस्टइंडीज मास्टर्स को मात इस बीच सचिन तेंदुलकर की टीम ने इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के रोमांचक मुकाबले में वेस्टइंडीज मास्टर्स की टीम को कड़ी पटखनी देते हुए और ट्रॉफी अपने नाम कर ली। मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर (25) और अंबाती रायुडू (74) की 67 रनों की साझेदारी ने लक्ष्य को आसान बना दिया। मजे की बात यह कि इंडिया मास्टर्स ने अपनी बल्लेबाजी से सबको चौंका दिया, इस दौरान क्योंकि तेंदुलकर और रायुडू ने पुराने स्ट्रोक्स खेले। तेंदुलकर ने जहां शानदार खेल दिखाया और अपने खास कवर ड्राइव तथा फ्लिक से दर्शकों से खचाखच भरे मैदान को हिला दिया। बता दें कि टीम इंडिया ने महज 4 विकेट खोकर इस आसान से लक्ष्य को हासिल किया। बेशक सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा जैसे दिग्गज क्रिकेटरों के बीच फाइनल मुकाबला हर क्रिकेट प्रेमी के लिए एक सपने जैसा ही है। बता दें कि इंटरनेशनल मास्टर्स लीग टी20 2025 में कुल 5 देशों की टीम ने हिस्सा लिया था। जिसमें इंडिया मास्टर्स ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में पहुंची थी तो वहीं वेस्टइंडीज मास्टर्स ने लीग के दूसरे सेमीफाइनल में श्रीलंका को हराकर मैच जीता था। दोनों टीमों के बीच फाइनल मुकाबला 16 मार्च को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया। मैच के दौरान फैंस को कांटे की टक्कर देखने को मिली। फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक रहा। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने इस मैच का भरपूर लुत्फ़ उठाया।  इसे भी पढ़ें:- WPL 2025 का फाइनल: दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस के बीच महामुकाबला आज बात करें इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के प्लेइंग 11 की तो  वेस्टइंडीज मास्टर्स: ब्रायन लारा, ड्वेन स्मिथ, विलियम पर्किन्स, दिनेश रामदीन, एश्ले नर्स, टिनो बेस्ट, लेंडल सिमंस, चैडविक वाल्टन, जेरोम टेलर, सुलेमान बेन, रवि रामपॉल इंडिया मास्टर्स: सचिन तेंदुलकर, अंबाती रायडू, यूसुफ पठान, इरफान पठान, पवन नेगी, युवराज सिंह, स्टुअर्ट बिन्नी, गुरकीरत सिंह मान, धवल कुलकर्णी, विनय कुमार, शाहबाज नदीम  Latest News in Hindi Today Hindi news International Masters League

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Why Abhimanyu Died in Chakravyuh

महाभारत कथा: गर्भ में ही अभिमन्यु को मिला था चक्रव्यूह भेदन का ज्ञान, फिर क्यों युद्ध में गंवानी पड़ी जान?

महाभारत (Mahabharata) एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें धर्म, नीति, वीरता और बलिदान की अद्भुत कहानियां समाहित हैं। इस महाकाव्य के नायकों में से एक अभिमन्यु, अपनी वीरता और अदम्य साहस के लिए जाने जाते हैं। अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु (Abhimanyu) को चक्रव्यूह भेदन की कला मां के गर्भ में ही सीखने का अवसर मिला था, लेकिन युद्धभूमि में जब उन्होंने चक्रव्यूह भेदने का प्रयास किया, तो वे उसमें फंस गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। यह कहानी केवल एक योद्धा के बलिदान की नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और अधूरे ज्ञान के प्रभाव की भी एक महत्वपूर्ण सीख देती है। आइए जानते हैं कि अभिमन्यु ने गर्भ में कैसे सीखा चक्रव्यूह भेदन, और क्यों यह उनकी मृत्यु का कारण बन गया। गर्भ में ही सीख लिया था चक्रव्यूह भेदन का रहस्य महाभारत (Mahabharata) के अनुसार, जब सुभद्रा गर्भवती थीं, तब एक दिन अर्जुन उन्हें युद्ध कौशल और विभिन्न युद्धनीतियों की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चक्रव्यूह भेदन की जटिल प्रक्रिया बतानी शुरू की। गर्भ में पल रहे अभिमन्यु को भी यह शिक्षा सुनाई दी और उन्होंने इसे समझ लिया। लेकिन कथा के अनुसार, जब अर्जुन चक्रव्यूह (Chakravyuh) से बाहर निकलने का रहस्य बताने वाले थे, तब सुभद्रा को नींद आ गई और उन्होंने सुनना बंद कर दिया। इसी कारण अभिमन्यु केवल चक्रव्यूह में प्रवेश करने की कला सीख पाए, लेकिन बाहर निकलने का तरीका नहीं जान सके। यही अधूरी शिक्षा आगे चलकर उनकी मृत्यु का कारण बनी। क्या होता है चक्रव्यूह? चक्रव्यूह (Chakravyuh) एक विशेष प्रकार की सैन्य रचना होती थी, जिसे शत्रु को भ्रमित करने और उसे पराजित करने के लिए बनाया जाता था। यह कई घेरों में बना होता था और प्रत्येक घेरे में योद्धाओं की एक विशेष व्यवस्था होती थी। चक्रव्यूह (Chakravyuh) एक ऐसा रणनीतिक युद्ध विन्यास था, जिसमें प्रवेश करना आसान था, लेकिन बाहर निकलना बेहद कठिन। इसे भेदने की कला केवल कुछ महान योद्धाओं को ही आती थी, जिनमें श्रीकृष्ण (Shri Krishna), अर्जुन, द्रोणाचार्य और प्रद्युम्न शामिल थे। इनके अलावा, अभिमन्यु भी इस जटिल व्यूह के बारे में जानते थे। अभिमन्यु की वीरता और कुरुक्षेत्र युद्ध में उनका बलिदान महाभारत युद्ध के 13वें दिन, जब पांडवों के सामने चक्रव्यूह (Chakravyuh) को भेदने की चुनौती आई, तो अभिमन्यु (Abhimanyu) ने बिना किसी संकोच के इसमें प्रवेश करने का फैसला किया। अपनी अद्भुत वीरता और युद्ध कौशल के बल पर उन्होंने चक्रव्यूह के छह द्वार सफलतापूर्वक पार कर लिए, लेकिन सातवें द्वार पर आकर वे घिर गए और आगे बढ़ना कठिन हो गया। महाभारत (Mahabharata) के तेरहवें दिन, जब कौरवों ने चक्रव्यूह की रचना की, तब अर्जुन और श्रीकृष्ण (Shri Krishna) युद्ध में कहीं और व्यस्त थे। द्रोणाचार्य ने यह रणनीति बनाई थी ताकि पांडवों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सके। जब पांडवों को पता चला कि कौरवों ने चक्रव्यूह बना लिया है, तब इस सैन्य संरचना को भेदने के लिए अर्जुन के अलावा कोई अन्य योग्य योद्धा नहीं था। तभी अभिमन्यु ने कहा कि वे इस चक्रव्यूह को तोड़ने में सक्षम हैं। हालांकि, उन्हें पता था कि उन्हें बाहर निकलने की विधि नहीं मालूम, लेकिन उन्होंने निडरता से इस चुनौती को स्वीकार किया। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? अभिमन्यु का चक्रव्यूह में प्रवेश और फंस जाना अभिमन्यु (Abhimanyu) ने अपने बल और साहस से चक्रव्यूह के पहले छह द्वार भेद दिए। उन्होंने कौरवों के कई महारथियों – जयद्रथ, दु:शासन, कर्ण और द्रोणाचार्य को चुनौती दी और कई योद्धाओं को पराजित किया। लेकिन जब वे सातवें द्वार पर पहुंचे, तब कौरवों ने नियमों को तोड़ते हुए उन पर एक साथ हमला कर दिया। अभिमन्यु के चक्रव्यूह में प्रवेश करने के बाद, जयद्रथ ने पांडवों को भीतर जाने से रोक दिया, जिससे वे अकेले पड़ गए। इस स्थिति का लाभ उठाकर कौरवों के महारथी—द्रोणाचार्य, कर्ण, दु:शासन, कृतवर्मा, कृपाचार्य और अश्वत्थामा—ने उन पर एक साथ आक्रमण कर दिया। युद्ध के नियमों के विपरीत जाकर, कौरवों ने निहत्थे अभिमन्यु पर निर्ममता से हथियारों से प्रहार किया। अंततः, दु:शासन के पुत्र ने उनके सिर पर गदा से प्रहार किया, जिससे अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुए। अभिमन्यु की कथा से क्या सीख मिलती है? नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Abhimanyu Mahabharata #Mahabharat #Abhimanyu #Chakravyuh #KurukshetraWar #MahabharataStory #ArjunaSon #HinduMythology #EpicBattle #MahabharatKatha #AncientIndia

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Discover how Lord Ganesha got married and the crucial role of Narad Muni

कैसे हुई विघ्नहर्ता की शादी? जानिए नारद मुनि की महत्वपूर्ण भूमिका

भगवान गणेश (Lord Ganesha) को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजा जाता है। गणपति बप्पा की कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान गणेश का विवाह कैसे हुआ और इसमें देवर्षि नारद की क्या भूमिका थी? पौराणिक कथाओं में गणेश विवाह से जुड़ी कई रोचक बातें मिलती हैं, जो इस रहस्य को उजागर करती हैं। आइए जानते हैं कि भगवान गणेश की शादी कब और कैसे हुई। गणेश जी के विवाह में आई बाधा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश (Lord Ganesha) के विवाह को लेकर एक रोचक कथा प्रचलित है। जब भगवान गणेश बड़े हुए, तो उनके विवाह को लेकर एक समस्या उत्पन्न हो गई। दरअसल, शिव-पार्वती के बड़े पुत्र होने के बावजूद गणेश जी का विवाह नहीं हो पा रहा था। इसकी मुख्य वजह यह थी कि उनके छोटे भाई भगवान कार्तिकेय विवाह में सबसे आगे रहना चाहते थे। भगवान कार्तिकेय (Lord Kartikeya) का मानना था कि पहले उन्हीं का विवाह होना चाहिए, क्योंकि वे बड़े पराक्रमी और तेजस्वी थे। इधर, देवताओं को भी यह चिंता सताने लगी कि यदि गणेश जी विवाह कर लेते हैं, तो वे हर कार्य में पहले पूजे जाने वाले देवता बन जाएंगे, जिससे बाकी देवताओं की महत्ता कम हो सकती है। नारद मुनि की भूमिका जब भगवान गणेश (Lord Ganesha) के विवाह को लेकर माता पार्वती चिंतित हुईं, तब देवर्षि नारद (Sage Narada) ने एक योजना बनाई। नारद मुनि हमेशा किसी न किसी लीला के सूत्रधार रहे हैं, और इस बार भी उन्होंने ऐसी ही एक युक्ति निकाली जिससे भगवान गणेश का विवाह संभव हो सके। नारद मुनि (Sage Narada) ने गणेश जी के माता-पिता को बताया कि गणपति को शीघ्र विवाह करना चाहिए, अन्यथा यह देवताओं और संसार के लिए अच्छा नहीं होगा। लेकिन समस्या यह थी कि कार्तिकेय पहले विवाह करना चाहते थे। तब एक शर्त रखी गई कि जो भी संपूर्ण ब्रह्मांड की सबसे पहले परिक्रमा करेगा, उसका विवाह पहले होगा। गणेश जी की बुद्धिमानी और विवाह भगवान कार्तिकेय(Lord Kartikeya) ने तुरंत अपना वाहन मोर लिया और पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। लेकिन भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) था, जो तेज गति से ब्रह्मांड की परिक्रमा करने में असमर्थ था। ऐसे में गणेश जी ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए माता पार्वती और भगवान शिव की सात बार परिक्रमा कर ली। उन्होंने यह तर्क दिया कि माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं और उनकी परिक्रमा करने से ही संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा हो जाती है। उनकी इस बुद्धिमानी से देवगण और ऋषि-मुनि प्रसन्न हुए और निर्णय लिया कि गणेश जी का विवाह पहले होगा। गणेश जी की दो पत्नियां – ऋद्धि और सिद्धि भगवान गणेश (Lord Ganesha) के विवाह के लिए प्रजापति विश्वरथ की दो पुत्रियों ऋद्धि और सिद्धि को चुना गया। ऋद्धि और सिद्धि बुद्धि, समृद्धि और सफलता की प्रतीक मानी जाती हैं। विवाह के पश्चात भगवान गणेश को दो पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई – शुभ और लाभ। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? गणेश विवाह का महत्व भगवान गणेश (Lord Ganesha) के विवाह की कथा हमें यह सिखाती है कि केवल शारीरिक बल ही नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक से भी हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। यही कारण है कि भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और विवेक का देवता माना जाता है। गणेश जी के विवाह के बाद से ही उनका पूजन सबसे पहले करने की परंपरा शुरू हुई। आज भी किसी भी शुभ कार्य या विवाह से पहले गणपति की पूजा की जाती है, ताकि सभी बाधाएं दूर हों और कार्य निर्विघ्न संपन्न हो। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Ganesha #GaneshMarriage #VighnahartaWedding #NaradMuniRole #GaneshKatha #HinduMythology #GanpatiStory #ShivaParvati #DivineMarriage #MythologicalTales #GaneshBhakti

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 What's Apps new feature

WhatsApp का नया फीचर: अब प्रोफाइल में जोड़ सकेंगे सोशल मीडिया लिंक

WhatsApp अपने यूजर्स के लिए नए-नए फीचर्स लॉन्च करते रहता है, जिससे यूजर्स को बेहतरीन अनुभव मिल सके। हाल ही में कंपनी ने एक नए फीचर की टेस्टिंग शुरू की है, जिससे यूजर्स अपने WhatsApp प्रोफाइल में सोशल मीडिया लिंक ऐड कर सकेंगे। यह नया अपडेट फिलहाल कुछ बीटा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही इसे सभी यूजर्स के लिए भी रोलआउट किया जा सकता है। आइए जानते हैं इस नए WhatsApp फीचर के बारे में विस्तार से। कैसे काम करेगा यह नया फीचर? WhatsApp के अपडेट्स पर नजर रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo के अनुसार Android 2.25.7.9 अपडेट में इस नए फीचर को स्पॉट किया गया है। इस फीचर का उपयोग करने के लिए यूजर्स को इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा: यह फीचर खासतौर पर उन यूजर्स के लिए फायदेमंद होगा जो अपने बिजनेस, ब्रांड प्रमोशन यापर्सनल प्रोफाइल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं। अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का भी होगा सपोर्ट फिलहाल इस फीचर में केवल Instagram लिंक जोड़ने का विकल्प दिया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार WhatsApp जल्द ही इसमें अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) जैसे: फेसबुक, ट्विटर (X), लिंकडिन, स्नैपचैट और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी ऐड करने का ऑप्शन दे सकता है। इससे WhatsApp एक मल्टी-फंक्शनल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित होगा, जहां यूजर्स को अपनी डिजिटल उपस्थिति को एक ही जगह से नियंत्रित करने की सुविधा मिलेगी। प्राइवेसी कंट्रोल का भी मिलेगा ऑप्शन WhatsApp हमेशा से अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर सजग रहा है। इस नए फीचर में भी प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा गया है। यूजर्स अपनी प्रोफाइल में जोड़ा गया सोशल मीडिया लिंक किन लोगों को दिखाना चाहते हैं, इसे कस्टमाइज कर सकते हैं। इसमें निम्न विकल्प शामिल होंगे: इससे यूजर्स को अपने सोशल मीडिया लिंक की विजिबिलिटी पर पूरा कंट्रोल मिलेगा, जिससे उनकी सुरक्षा और प्राइवेसी को बनाए रखना आसान हो जाएगा। स्टेटस सेक्शन में मिलेगा नया अपडेट WhatsApp सिर्फ सोशल मीडिया लिंक जोड़ने तक ही सीमित नहीं है। कंपनी एक और खास फीचर की टेस्टिंग कर रही है, जो जल्द ही स्टेटस सेक्शन में जोड़ा जा सकता है। इस फीचर के तहत यूजर्स को अपने स्टेटस को सेव करने की सुविधा दी जाएगी। यह फीचर काफी हद तक Instagram Stories Archive फीचर जैसा होगा। इससे यूजर्स अपने पसंदीदा स्टेटस को सेव कर सकेंगे और बाद में उन्हें दोबारा पोस्ट या साझा कर पाएंगे। इसे भी पढ़ें: Apple iPhone 17 Air: अब तक का सबसे पतला iPhone कब होगा लॉन्च?  WhatsApp के नए फीचर्स का उद्देश्य WhatsApp का यह नया अपडेट खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो अपने बिजनेस, प्रोफेशनल नेटवर्किंग या व्यक्तिगत प्रोफाइल को प्रमोट करना चाहते हैं। इस फीचर के जरिए WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म को ज्यादा इंटरैक्टिव और सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके अलावा, स्टेटस सेविंग फीचर यूजर्स को अपने महत्वपूर्ण स्टेटस को सेव करके दोबारा उपयोग करने की सुविधा देगा, जिससे यूजर्स को अपनी मेहनत से बनाए गए कंटेंट को सुरक्षित रखने का मौका मिलेगा। WhatsApp का यह नया फीचर सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को प्रमोट करने के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इससे व्यवसायियों, इन्फ्लुएंसर्स और आम यूजर्स को अपने संपर्कों के साथ जुड़ने का नया अवसर मिलेगा। WhatsApp के ये नए अपडेट्स इसे सिर्फ मैसेजिंग ऐप से बढ़ाकर एक मल्टी-फीचर प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। आने वाले दिनों में यह फीचर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा, जिसका इंतजार करोड़ों लोग कर रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news What’s Apps new feature #WhatsAppsnewfeature #Whatsappfeature #Whatsapp #socialmedia

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Foods To Avoid Empty Stomach

जानिए इन 7 फूड्स के बारे में जिन्हें खाली पेट खाने से करना चाहिए नजरअंदाज

व्यस्त जीवनशैली के कारण हम में से अधिकतर लोग नाश्ते स्किप कर देते हैं, जो पूरी तरह से गलत है। ब्रेकफास्ट हमारे दिन का सबसे महत्वपूर्ण मील है, क्योंकि इसमें हम 10 से 12 घंटे बाद कुछ खाते हैं। जब इतने अंतर के बाद जब हम कुछ खाते हैं, तो सावधानियां बतरनी बहुत जरूरी हैं। दिन की शुरूआत में जो चीज सबसे पहले आपके पेट में जाती है, वही तय करती है कि आपका बाकी दिन कैसा बीतेगा? क्या आप जानते हैं कि जब हम खाली पेट (Empty Stomach) कुछ फूड्स का सेवन करते हैं, तो चाहे वो हेल्दी हों लेकिन पेट और डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स का कारण बन सकती हैं? जबकि कुछ फूड्स खाली पेट खाना सेहत के लिए अच्छा होता है। आइए जानें कौन से हैं वो फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach)? फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार जब बात कई सामान्य नाश्तों की आती है, तो उनमें प्रोटीन और फाइबर की कमी होती है, जिससे आपको खाने के अगले मौके से पहले ही भूख लगने लगती है। वहीं, दूसरी चीजें फैट से भरी होती हैं और पेट को भरा और असहज महसूस करा सकती हैं। ऐसे में इस बात का पता होना चाहिए कि कौन से हैं वो फूड्स जिन्हें खाली पेट नहीं खाना चाहिए (Foods To Avoid Empty Stomach)?  1. खट्टे फल (Citrus fruits) खट्टे फल (Citrus fruits) खाने में स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन यह कई बार समस्या के कारण भी बन सकते हैं। खट्टे फल (Citrus fruits) जैसे संतरा, निम्बू, चकोतरा आदि को खाली पेट (Empty Stomach) खाने से बचना चाहिए। इनमें सिट्रिक एसिड बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे पेट में एसिडिटी बढ़ सकती है। सुबह खाली पेट इन्हें खाने से पेट में एसिडिटी बढ़ती है जिससे हार्टबर्न और अन्य कई समस्याएं हो सकती हैं।  2. चाय (Tea) अधिकतर लोग खाली पेट (Empty Stomach) सुबह उठते ही चाय (Tea) पीना पसंद करते हैं। इसी से उनके दिन की शुरुआत होती है। लेकिन, खाली पेट इसे पीना हानिकारक हो सकता है। स्टडीज की मानें तो अधिकतर लोग सुबह खाली पेट (Empty Stomach) चाय (Tea) पीने से परेशानियों का सामना कर सकते हैं। ऐसा भी माना गया है कि खाली पेट इसे पीने से जी मिचलाने और हार्टबर्न जैसे समस्याएं हो सकती हैं। इसका कारण यह है कि इसके टैनिन के कारण पैंक्रियाज ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन रिलीज करता है। इस प्रक्रिया से थकान और भूख बढ़ सकती है। 3. मसालेदार आहार (Spicy food) सुबह खाली पेट (Empty Stomach) मसालेदार आहार का सेवन करने से भी बचना चाहिए। यह मसालेदार आहार पेट की लायनिंग में समस्या का कारण बन सकता है। इससे डायजेशन प्रभावित हो सकता है और इसके साथ ही इससे कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। 4. कॉफी (Coffee) कॉफी उन प्रसिद्ध पेय पदार्थों में से एक है, जिसे बहुत से लोग सुबह उठते ही पीना पसंद करते हैं। लेकिन, यह बिलकुल भी हेल्दी नहीं है। कॉफी में कैफीन होता है जिसे इसकी अलर्टनेस को बढ़ाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। लेकिन, जब इसे खाली पेट (Empty Stomach) पिया जाता है, जो इसका प्रभाव उल्टा भी हो सकता है। इसके कारण लोग एंग्जायटी और घबराहट महसूस कर सकते हैं। 5. दही (Yogurt) दही खाने का एक हेल्दी विकल्प है, क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम होता है। लेकिन, जब इसे खाली पेट (Empty Stomach) खाया जाता है तो पेट का एसिडिक एन्वॉयर्नमेंट हेल्दी गट बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है, जिससे उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू कम हो सकती है। 6. तला हुआ भोजन (Oily food) पूरी, पकोड़े, भटूरे जैसे पसंदीदा नाश्ते को भी खाली पेट (Empty Stomach) खाना नुकसानदायक हो सकता है। तले हुए आहार में फैट कंटेंट अधिक होता है जिससे ब्लोटिंग व अपच जैसी परेशानियां हो सकती है और सुस्ती आ सकती है। इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे 7. अधिक मीठी चीजें (Sugary food) अगर आपको मीठी चीजें खाना पसंद है और आप अक्सर मिठाईयां, पेस्ट्रीज या मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, तो ध्यान रखें इन्हें नजरअंदाज करना बहुत जरूरी है। खासतौर पर इन्हें खाली पेट (Empty Stomach) नहीं खाना चाहिए। इससे इंसुलिन और ब्लड शुगर लेवल एकदम से बढ़ सकते हैं। इससे बाद में सुस्ती और थकावट का अनुभव हो सकता है। इसके साथ ही इससे डायरिया होने की संभावना भी बढ़ सकती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें।  Latest News in Hindi Today Hindi  Foods To Avoid Empty Stomach #FoodsToAvoidEmptyStomach #EmptyStomach #Citrusfruits #Tea

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Bedroom Vastu Tips

Bedroom Vastu Tips: बेडरूम में नेगेटिव एनर्जी से बचने के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स

वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम (Bedroom) घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि यहां हम अपना अधिकांश समय आराम और नींद में बिताते हैं। लेकिन कई बार बेडरूम डिजाइन करते समय लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो नेगेटिव एनर्जी को आकर्षित करती हैं। इससे न केवल नींद प्रभावित होती है, बल्कि जीवन में तनाव और समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। आइए जानते हैं कि बेडरूम बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कैसे नेगेटिव एनर्जी से बचा जा सकता है। बेडरूम के लिए जरूरी चीजें शास्त्रों के अनुसार बेडरूम का आरामदायक और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए सबसे पहले एक अच्छी क्वालिटी का गद्दा होना चाहिए, जो पीठ दर्द और शरीर के दर्द से बचाव करता है। इसके अलावा, कमरे में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए, लेकिन बहुत तेज रोशनी से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह नींद को प्रभावित कर सकती है। नाइट लैंप का उपयोग करने से कमरे में शांति बनी रहती है। बेडरूम के रंग (Bedroom Color) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हल्के और सौम्य रंग मानसिक शांति प्रदान करते हैं, जबकि अधिक गहरे रंग तनाव बढ़ा सकते हैं। साथ ही, कमरे में अच्छी सुगंध का होना भी आवश्यक है, जिसके लिए सुगंधित मोमबत्तियां या एसेंशियल ऑयल डिफ्यूज़र का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, अच्छी क्वालिटी के परदे भी जरूरी हैं, जो कमरे में पर्याप्त अंधेरा बनाए रखते हैं और गोपनीयता सुनिश्चित करते हैं। बेडरूम के लिए वास्तु टिप्स (Bedroom Vastu Tips) 1. बेडरूम की दिशा और स्थान वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह दिशा स्थिरता और शांति का प्रतीक मानी जाती है। अगर बेडरूम उत्तर-पूर्व दिशा में बनाया जाता है, तो यह नेगेटिव एनर्जी को आकर्षित करता है और जीवन में अशांति लाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार बेडरूम कभी भी घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं होना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और व्यक्ति की मानसिक शांति प्रभावित होती है। 2. बेड की सही पोजिशनिंग बेडरूम में बेड की सही पोजिशनिंग बेहद जरूरी है। वास्तु के अनुसार, बेड हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर सिर करके लगाना चाहिए। इससे नींद अच्छी आती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर बेड उत्तर दिशा की ओर सिर करके लगाया जाता है, तो यह नेगेटिव एनर्जी (Negative Energy) को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, बेड कभी भी खिड़की या दरवाजे के ठीक सामने नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का रिसाव होता है। 3. दर्पण का गलत प्लेसमेंट बेडरूम (Bedroom) में दर्पण का गलत प्लेसमेंट भी नेगेटिव एनर्जी को आकर्षित करता है। वास्तु के अनुसार, दर्पण कभी भी बेड के सामने नहीं लगाना चाहिए। इससे व्यक्ति की ऊर्जा प्रभावित होती है और नींद में बाधा आती है। अगर बेडरूम में दर्पण लगाना जरूरी हो, तो इसे बेड के साइड में लगाएं और सोते समय इसे कपड़े से ढक दें। इससे नेगेटिव एनर्जी (Negative Energy) से बचा जा सकता है। 4. बेडरूम की सफाई और वेंटिलेशन है जरूरी राजाराम के अनुसार, बेडरूम को अधिक आरामदायक बनाने के लिए उसमें पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह होना आवश्यक है। यदि कमरे में खिड़की नहीं है या वेंटिलेशन सही नहीं है, तो यह सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, ताजी हवा के लिए उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था करना जरूरी है। साथ ही, बेडरूम में अनावश्यक सामान और गंदगी इकट्ठा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) बढ़ सकती है। एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित कमरा सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा, ताजगी बनाए रखने के लिए कमरे में एक छोटा इनडोर प्लांट लगाना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे भी पढ़ें:- दो बार बन रहा है यह दुर्लभ योग, जानें किनके लिए है विशेष शुभ 5. पौधों का चयन बेडरूम (Bedroom) में पौधे लगाना अच्छा माना जाता है, लेकिन कुछ पौधे नेगेटिव एनर्जी को बढ़ावा देते हैं। वास्तु के अनुसार, बेडरूम में कांटेदार पौधे या सूखे हुए पौधे नहीं रखने चाहिए। बेडरूम में तुलसी, मनी प्लांट या लकी बांस जैसे पौधे रख सकते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करते हैं। 6. प्रकाश का सही उपयोग बेडरूम (Bedroom) में प्रकाश का सही उपयोग भी बेहद जरूरी है। वास्तु के अनुसार, बेडरूम में तेज रोशनी वाले बल्ब या ट्यूब लाइट नहीं लगाने चाहिए। इससे मन अशांत होता है और नींद प्रभावित होती है। बेडरूम में हल्की और मध्यम रोशनी का उपयोग करना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news #BedroomVastu #VastuTips #PositiveEnergy #VastuForHome #BedroomDecor #VastuShastra #HomeEnergy #VastuRemedies #HealthyLiving #VastuForPeace

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WPL2025Final

WPL 2025 का फाइनल: दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस के बीच महामुकाबला आज

विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) 2025 का आज फाइनल मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स वीमेन (DCW) और मुंबई इंडियंस वीमेन (MIW) के बीच होने वाला है। आज का मैच मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में शाम 8 बजे से खेला जाएगा। दोनों टीमें लीग चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक पहुंची हैं, जिससे फैंस को एक रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले की उम्मीद है। दिल्ली कैपिटल्स का लीग चरण में शानदार प्रदर्शन दिल्ली कैपिटल्स वीमेन की टीम का इस सीजन का प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा है। उन्होंने लीग चरण में कुल आठ मुकाबले खेले, जिसमें से पांच में जीत दर्ज की और तीन में हार का सामना करना पड़ा। इस प्रदर्शन के साथ दिल्ली कैपिटल्स ने 10 अंकों के साथ तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया और सीधे फाइनल में जगह बना ली। दिल्ली कैपिटल्स की कप्तान मेग लैनिंग ने इस सीजन में टीम को बेहतरीन ढंग से नेतृत्व दिया है। उनकी रणनीति और बल्लेबाजी ने टीम को कई मुकाबलों में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा जेमिमा रोड्रिग्स, शेफाली वर्मा और मरिजाने कैप जैसी खिलाड़ियों ने भी अपने प्रदर्शन से टीम को मजबूत किया है। गेंदबाजी में शिखा पांडे और राधा यादव की जोड़ी ने विपक्षी टीमों के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। मुंबई इंडियंस का प्रभावशाली प्रदर्शन मुंबई इंडियंस वीमेन की टीम का प्रदर्शन भी इस सीजन में शानदार रहा। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में मुंबई इंडियंस ने आठ मुकाबलों में पांच जीत दर्ज की और तीन मैचों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस प्रदर्शन के चलते मुंबई की टीम 10 अंकों और +0.192 नेट रन रेट के साथ पॉइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर रही। मुंबई इंडियंस की सफलता में कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ-साथ नेट साइवर-ब्रंट, पूजा वस्त्राकर और हेले मैथ्यूज का योगदान अहम रहा। वहीं, गेंदबाजी में इस्सी वोंग और अमेलिया केर की धारदार गेंदबाजी ने टीम को मुश्किल परिस्थितियों में जीत दिलाई। मुंबई इंडियंस ने एलिमिनेटर में दिखाई ताकत फाइनल में पहुंचने के लिए मुंबई इंडियंस को एलिमिनेटर मुकाबले में गुजरात जायंट्स का सामना करना पड़ा। इस मैच में मुंबई की टीम का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने गुजरात जायंट्स को 47 रनों के अंतर से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इस मुकाबले में मुंबई के बल्लेबाजों और गेंदबाजों ने संतुलित प्रदर्शन किया, जिससे टीम को एकतरफा जीत मिली। हेड टू हेड रिकॉर्ड: कौन है मजबूत दावेदार? अगर दिल्ली कैपिटल्स वीमेन और मुंबई इंडियंस वीमेन के अब तक के आमने-सामने के प्रदर्शन की बात करें तो दोनों टीमों के बीच कुल सात मुकाबले हुए हैं। इनमें से दिल्ली कैपिटल्स ने चार मुकाबले जीते हैं, जबकि मुंबई इंडियंस ने तीन मैचों में जीत हासिल की है। दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने अपने आक्रामक बल्लेबाजी क्रम के दम पर कई बार मुंबई इंडियंस को दबाव में डाला है। वहीं, मुंबई इंडियंस की टीम अपने मजबूत ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए जानी जाती है। ऐसे में दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है। दिल्ली और मुंबई के बीच अहम खिलाड़ी कौन होंगे? दिल्ली कैपिटल्स: मेग लैनिंग- अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान के रूप में लैनिंग का प्रदर्शन टीम के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। शेफाली वर्मा- अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर शेफाली दिल्ली की पारी को तेज शुरुआत देने में सक्षम हैं। जेमिमा रोड्रिग्स- मिडल ऑर्डर में स्थिरता देने वाली बल्लेबाज जेमिमा पर भी फैंस की निगाहें रहेंगी। मुंबई इंडियंस: हरमनप्रीत कौर- कप्तान के तौर पर हरमनप्रीत की अनुभवी नेतृत्व क्षमता टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकती है। नेट साइवर-ब्रंट- अपनी ऑलराउंड क्षमता के कारण साइवर-ब्रंट किसी भी समय मैच का रुख बदलने में सक्षम हैं। हेले मैथ्यूज- बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में प्रभावशाली प्रदर्शन करने वाली मैथ्यूज मुंबई के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकती हैं। इसे भी पढ़ें:-गिरिडीह में होली जुलूस पर पत्थरबाजी, हिंसक झड़प और आगजनी किसके पास है फाइनल जीतने का मौका? दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस के बीच अब तक के प्रदर्शन को देखते हुए फाइनल में कड़ी टक्कर होने की संभावना है। दिल्ली कैपिटल्स का मजबूत टॉप ऑर्डर और मुंबई इंडियंस का बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन इस मुकाबले को दिलचस्प बना सकता है। फैंस को उम्मीद है कि ब्रेबोर्न स्टेडियम में होने वाला यह महामुकाबला महिला क्रिकेट के स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा। दोनों टीमों के खिलाड़ी पूरे जोश के साथ मैदान में उतरेंगे, और दर्शकों को एक यादगार फाइनल देखने को मिलेगा। महिला प्रीमियर लीग 2025 का फाइनल मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए खास होने वाला है। दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस, दोनों ही टीमें शानदार फॉर्म में हैं और अपने-अपने मजबूत पक्षों के साथ फाइनल जीतने का दमखम रखती हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इस रोमांचक भिड़ंत में कौन सी टीम जीत का ताज अपने सिर सजाती है। Latest News in Hindi Today Hindi news WPL #WPL2025Final #DelhiCapitals #MumbaiIndians #WomenInCricket #MegLanning #HarmanpreetKaur #CricketFinal #WPLChampions #CricketFever #WomensCricket

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