हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास एक विशेष काल होता है जिसमें किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। यह तब शुरू होता है जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए व्यापार की शुरुआत, वाहन या संपत्ति खरीदने जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। 2025 में मार्च महीने में खरमास का प्रारंभ हो रहा है, जिससे कई धार्मिक और सामाजिक कार्यों पर अस्थायी विराम लग जाएगा।
मार्च 2025 में कब से शुरू होगा खरमास?
2025 में खरमास 14 मार्च से प्रारंभ होकर 13 अप्रैल तक रहेगा। इस एक महीने की अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। जैसे ही सूर्य अपनी राशि बदलकर मेष में प्रवेश करेंगे, खरमास समाप्त हो जाएगा और मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो सकेंगे।
खरमास की अवधि और महत्वपूर्ण तिथियां
- खरमास प्रारंभ: 14 मार्च 2025
- खरमास समाप्त: 13 अप्रैल 2025
- सूर्य का मीन राशि में प्रवेश: 14 मार्च 2025 को सुबह 07:45 बजे
- सूर्य का मेष राशि में प्रवेश: 13 अप्रैल 2025 को दोपहर 03:20 बजे
खरमास में क्यों वर्जित हैं शुभ कार्य?

खरमास के दौरान सभी शुभ कार्यों पर रोक लगाने के पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उनकी तेजस्विता और प्रभाव में कमी आ जाती है। हिंदू धर्म में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, लेकिन इस अवधि में उनका प्रभाव कमजोर होने के कारण शुभ कार्यों के लिए उचित समय नहीं माना जाता।
खरमास के दौरान किन कार्यों पर रोक होती है?
- विवाह: इस समय विवाह करना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि इस दौरान किए गए विवाह में वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ सकती हैं।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश करना इस समय वर्जित होता है, क्योंकि यह सुख-समृद्धि में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
- नए व्यापार की शुरुआत: खरमास के दौरान कोई नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना शुभ नहीं माना जाता।
- नवीन वाहन या संपत्ति खरीदना: इस अवधि में नया वाहन, मकान या अन्य संपत्तियां खरीदने से बचना चाहिए।
- मुंडन संस्कार: छोटे बच्चों के मुंडन संस्कार भी इस अवधि में नहीं किए जाते।
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खरमास में कौन से कार्य किए जा सकते हैं?
हालांकि खरमास के दौरान शुभ कार्यों पर रोक होती है, लेकिन यह समय धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए बेहद उत्तम माना जाता है। इस दौरान किए गए पुण्य कार्यों से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
- भगवान विष्णु की पूजा: खरमास में भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व है। श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम और श्रीमद्भागवत का पाठ करना शुभ होता है।
- दान-पुण्य: इस अवधि में अन्न, वस्त्र, गौदान, और जरूरतमंदों की सहायता करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
- गंगा स्नान: पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- रामायण और भागवत कथा का श्रवण: धार्मिक ग्रंथों का पाठ और सत्संग में भाग लेने से मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि होती है।
- साधना और ध्यान: इस समय भगवान के ध्यान, जप, तप और साधना करने से विशेष लाभ मिलता है।
खरमास समाप्त होने के बाद शुभ कार्य कब शुरू होंगे?
खरमास 13 अप्रैल 2025 को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। 14 अप्रैल 2025 से पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।
नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।
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