Anu Sharma

ChatGPT

ChatGPT से पूछने से पहले सोचें, 5 सवाल जो आपको मुश्किल में डाल सकते हैं

चैटजीपीटी (ChatGPT) एक ऐसा नाम है, जिसके बारे में आजकल हर कोई जानता है। इस टूल को लगभग तीन साल पहले लांच किया गया था और उसके बाद से यह सबकी पहली पसंद बन चुका है। चाहे कोई रेसिपी जाननी हो या कोई पढाई से संबंधित सवाल हर प्रश्न का उत्तर है इस टूल के पास। ऐसा भी माना जा रहा है कि इससे हर रोज लगभग 10 करोड़ सवाल पूछे जाते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके इस्तेमाल से लोगों का जीवन आसान हुआ है। बस एक ही क्लिक कर आप किसी भी तरह की जानकारी पा सकते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि कुछ ऐसे सवाल भी हैं जिन्हें आपको चैटजीपीटी (ChatGPT) से नहीं पूछना चाहिए? यह सवाल आपके लिए समस्या का कारण बन सकते हैं। आइए जानें कौन सी हैं वो बातें जो चैटजीपीटी से कभी नहीं पूछनी चाहिए (Never ask these things to ChatGPT)? बातें जो चैटजीपीटी से कभी नहीं पूछनी चाहिए (Never ask these things to ChatGPT): पाएं जानकारी चैटजीपीटी (ChatGPT) स्मार्ट है और यह किसी भी सवाल का उत्तर दे सकता है, लेकिन इसे भी कुछ खास प्रश्नों का उत्तर देने की अनुमति नहीं है। दरअसल यह बहुत सख्त नियमों का पालन करता है कि किन सवालों का उत्तर इसे देना और किसका नहीं। आइए जानें कौन सी हैं वो बातें जो चैटजीपीटी से कभी नहीं पूछनी चाहिए (Never ask these things to ChatGPT): हेल्थ प्रॉब्लम्स से संबंधित सवाल अगर आप बीमार हैं या आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम है, तो चैटजीपीटी (ChatGPT) से इसके बारे में पूछने से बचें। यह टूल आपकी हेल्थ समस्या से जुड़े सवालों के जवाब देने की कोशिश तो करेगा लेकिन यह समाधान आपके लिए समस्या का कारण बन सकता है। क्योंकि, न तो यह डॉक्टर की तरह आपको एग्जामिन कर सकता है और न ही आपकी समस्या का निदान कर सकता है। इसलिए, फिजिकल प्रॉब्लम्स, स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि से जुड़े सवालों को इससे पूछने से बचें। फाइनेंस या टैक्स संबंधी सवाल चैटजीपीटी (ChatGPT) आपको केवल फाइनेंस की डेफिनेशन बता सकता है लेकिन इसे आपकी आय, खर्च और टेक्स स्थिति आदि के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे में चैटबोट (Chatbot) की सलाह बहुत ही पुरानी या नुकसानदायक हो सकती है। यह आपको गलत गाइड भी कर सकता है। यही नहीं, अगर आप इससे अपनी बैंक डिटेल्स या ऐसी अन्य डिटेल्स शेयर करते हैं तो यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके लिए हमेशा स्पेशलिस्ट से ही सलाह लें। कानून से जुड़ी जानकारी  चैटजीपीटी (ChatGPT) आपको सिर्फ लीगल टर्म्स के बारे में बता सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल कभी भी कानून से जुड़ी जानकारी लेने और अपनी वसीयत या लीगल कॉन्ट्रैक्ट्स लिखने के लिए न करें। कानून राज्य और काउंटी के अनुसार अलग हो सकते हैं और छोटी गलतियां भी इसे इनवैलिड बना सकती हैं। आप इस टूल का इस्तेमाल बेसिक चीजों को समझने के लिए कर सकते हैं लेकिन लीगल प्रोटेक्शन के लिए किसी लाइसेंस प्राप्त वकील द्वारा दस्तावेज तैयार करवाएं। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हिंसक जानकारी  कभी भी चैटजीपीटी (ChatGPT) से किसी हिंसक चीज के बारे में जानकारी न लें। क्योंकि यह गंभीर हो सकता है। अगर आप कोई हिंसक सवाल पूछते हैं, तो यह टूल इसके लिए तुरंत मना कर देता है। चैटबोट (Chatbot) को सख्त सुरक्षा और नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए प्रोग्राम किया गया है, इसलिए यदि आप कुछ अनुचित पूछ रहे हैं, तो यह मना कर सकता है। हैकिंग या किसी की प्राइवेट इंफॉर्मेशन  अगर आप चैटजीपीटी (ChatGPT) से हैकिंग या किसी की प्राइवेट इंफॉर्मेशन के बारे में पूछते हैं तो यह गलत है। हैकिंग के बारे में पूछना पूरी तरह से इलीगल है। इसके साथ ही किसी के फोन नंबर, एड्रेस या फाइनेंशियल डिटेल के बारे में भी पूछना भी सही नहीं है। चैटबोट (Chatbot) से यह सब पूछने पर वो इसका जवाब देने से मना कर देगा क्योंकि उसे ऐसे ही प्रोग्राम किया गया है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  ChatGPT #ChatGPT #AIquestions #AvoidAsking #OpenAIRules #AIEthics #ChatGPTTips #MisuseOfAI #ChatGPTWarning

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viral fever symptoms

वायरल फीवर क्या है, इसके कारण, लक्षण और उपचार, जानिए किस तरह से करें इससे बचाव

वायरल फीवर (Viral fever) एक ऐसी हेल्थ कंडीशन है जो किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। इसका कारण कई वायरल इंफेक्शंस को माना जाता है। इस समस्या में रोगी के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जो हानिकारक वायरस के प्रति हमारे इम्यून सिस्टम के रिस्पांस का संकेत है। इस समस्या के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे शरीर में दर्द, थकावट आदि और गंभीर मामलों में इसके कारण रोगी को कई कॉम्प्लीकेशन्स का सामना भी करना पड़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए वायरल फीवर (Viral fever) चिंता का विषय हो सकता है। आइए जानें वायरल फीवर के लक्षणों (Symptoms of Viral Fever) के बारे में। इसके उपचार और बचने के तरीकों के बारे में भी जानें। वायरल फीवर के लक्षण (Symptoms of Viral Fever) हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार वायरल फीवर (Viral fever) में रोगी को हाई टेम्प्रेचर की समस्या हो सकती है। उनके शरीर का तापमान 103°F से भी अधिक बढ़ सकता है। मनुष्यों को कई तरह के वायरल इंफेक्शंस प्रभावित करते हैं। इनमें से कई इंफेक्शंस में रोगी को कम बुखार होता है जबकि कई वायरल इंफेक्शंस जैसे डेंगू में रोगी को हाई फीवर होता है। वायरल फीवर के लक्षण (Symptoms of Viral Fever) इस प्रकार हो सकते हैं: यह लक्षण अधिकतर रोगी में कुछ दिनों तक ही दिखाई देते हैं।  अब जानिए वायरल फीवर (Viral fever) के कारण क्या हो सकते हैं? वायरल फीवर के कारण दूषित फ़ूड और ड्रिंक्स भी इस इंफेक्शन (Infection) का कारण बन सकती हैं।  वायरल फीवर का उपचार ज्यादातर वायरल फीवर (Viral fever) के मामलों में खास उपचार की जरूरत नहीं होती है है। इसके उपचार के तरीकों में लक्षणों से आराम पाने पर फोकस किया जाता है। इसके सामान्य उपचार के तरीके इस प्रकार हैं: बुखार कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर दवाईयां लेना जैसे आइबूप्रोफेन और एसिटामिनोफेन आदि। इसे भी पढ़ें:- सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज वायरल फीवर से कैसे बचें? नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Viral fever #viralfever #feversymptoms #healthtips #viralprevention #fevertreatment

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Cancer

सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) यानी सिर और गले के कैंसर की शुरुआत सिर और गले के एरिया में होती है। ऐसे कई तरह के कैंसर (Cancer) हैं जो सिर और गले में हो सकते हैं। इनमे से हर एक ही शुरुआत कोशिकाओं की वृद्धि के रूप में शुरू होती है, जो हेल्दी टिश्यूज पर हमला कर उन्हें नष्ट कर सकती है। यह कैंसर को मुंह,गले, साइनस और स्लाइवरी ग्लेंड्स से शुरू होने वाले कैंसरस के रूप में जाना जाता है। हेड और नेक कैंसर का उपचार कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। इनमे कैंसर (Cancer) की लोकेशन, इसका साइज और सेल्स के प्रकार आदि शामिल हैं। इसके साथ ही उपचार के लिए डॉक्टर रोगी की सम्पूर्ण हेल्थ को भी कंसीडर करते हैं। इस समस्या के निदान और सही उपचार के लिए इसके लक्षणों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। आइए जानें हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) के बारे में।  हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) क्या हो सकते हैं? क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार दुनिया भर में पाए जाने वाले लगभग 4.5% हेड एंड नेक के कैंसर होते हैं। यह कैंसर (Cancer) अधिकतर पुरुषों को प्रभावित करता है। हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) क्या इस प्रकार हो सकते हैं: गले, जबड़े या मुंह में गांठ हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) यानी सिर और गले के कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण है जबड़ों और मुंह में गांठ का होना। यह लम्पस रोगी के होंठों पर भी हो सकते हैं। हालांकि, गले में गांठ थायरॉइड कैंसर का लक्षण भी हो सकता है या ऐसा भी हो सकता है की ऐसा लिम्फ नोड के बढ़ने के कारण हो रहा हो। इस कैंसर (Cancer) का सबसे सामान्य लक्षण है एक या अधिक लिम्फ नोड्स में सूजन होना, इनमें माउथ कैंसर और स्लाइवरी ग्लेंड कैंसर भी शामिल है। अगर यह लम्पस बार-बार हो रहे हों और ठीक हो रहे हों तो यह कैंसर की वजह से नहीं हैं। क्योंकि, कैंसर में यह गांठ बनती है और फिर बढ़ती रहती है। जबड़ा हिलाने में समस्या होना हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) में जबड़ों की मसल्स, हड्डियां या नर्वज में समस्या भी शामिल हैं। इसके कारण रोगी को मुंह खोलने में समस्या हो सकती है। इसमें अधिकतर रोगी मुंह खोलने में असमर्थ होते हैं। अगर किसी को यह परेशानी होती है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। चबाने में परेशानी सिर और गले के कैंसर के कारण रोगी को खाना चबाने व निगलने में दर्द व बर्निंग सेंसेशन हो सकती है। इसमें रोगी को ऐसा भी महसूस हो सकता है जैसे फ़ूड गले में फंस गया है। इसके साथ ही रोगी की आवाज भी प्रभावित हो सकती है। ऐसा प्रतीत हो सकता है कि जैसे उन्हें- हुआ हो। मुंह में सफेद पैच इस कैंसर (Cancer) में रोगी को मुंह में सफेद पैच हो सकता है जिसे ल्यूकोप्लाकिया कहा जाता है। यह समस्या आमतौर पर जबड़ों में, गालों या जीभ के अंदर होती है। यह परेशानी स्मोकिंग और तंबाकू से हो सकती है जो कैंसर का कारण बनती है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन गले में दर्द गले में दर्द जो ठीक न हो रही हो ,वो भी इस कैंसर का एक लक्षण है। हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) में रोगी के चेहरे पर भी दर्द होती है और उसमे कमजोरी आ सकती है। यही नहीं, यह कैंसर (Cancer) ब्रीदिंग को भी प्रभावित कर सकता है। नेजल कंजेशन इस समस्या का एक लक्षण हो सकता है। इसमें कुछ लोग नाक से खून आना जैसे समस्याओं का भी अनुभव कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Clevelandclinic #headandneckcancer #cancersymptoms #earlycancersigns #healthawareness #cancerprevention

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caffeine anti-aging

क्या कैफीन एजिंग प्रोसेस को स्लो कर सकता है और रख सकता है आपको हमेशा यंग

अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं जिन्हें सुबह उठते ही कैफीन (Caffeine) की जरूरत होती है, तो याद रखें आप अकेले नहीं हैं क्योंकि अधिकतर लोगों के लिए सुबह उठते ही चाय या कॉफी पीना उनकी एक जरूरत है। कैफीन एक नेचुरल केमिकल है, जिसमें स्टीमुलेंट इफेक्ट्स होते हैं। यह चाय, कॉफी, कोकोआ आदि में पाया जाता है। कैफीन (Caffeine) से हमारा सेंट्रल नर्वस सिस्टम, हार्ट, मसल्स और वो सेंटर्स स्टिमुलेट होते हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं। कैफीन (Caffeine) से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और यह वाटर पिल की तरह काम करता है जिससे यूरिन फ्लो बढ़ता है। एक सवाल यह है कि क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है? तो आइए जानें कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में। कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging): पाएं जानकारी मायो क्लिनिक (MayoClinic) के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क के लिए दिन में 400 मिलीग्राम कैफीन लेना सुरक्षित माना गया है। इसलिए, इस बात को ध्यान रखें कि कैफीन (Caffeine) का सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए खासतौर पर एनर्जी ड्रिंक्स का। आइए कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में और जानें कि क्या कैफीन (Caffeine) उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है?  क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है? साइंटिस्ट के अनुसार कैफीन (Caffeine) सिर्फ एनर्जी को बढ़ाने का ही काम नहीं करती है बल्कि यह और भी बहुत सी चीजों में फायदेमंद है। यह हेल्दी एजिंग (Aging) में मददगार है। शोध के अनुसार कैफीन एएमपी को एक्टिव रखता है, जो स्ट्रेस और चिंता आदि से लड़ने में मददगार है। एएमपीके का अर्थ है एक्टिवेटेड प्रोटीन किनेज, जो एक सेलुलर एनर्जी सेंसर है और सेल्स के अंदर एनर्जी बैलेंस बनाये रखने में मदद करता है।  कैफीन (Caffeine) सेल्स के डिवीजन और डेवलपमेंट को भी प्रभावित करता है। इससे हमारे सेल्स को लम्बे समय तक सर्वाइव करने में मदद मिलती है और तनाव से बचाव होता है। तनाव से हमारे शरीर और दिमाग नेगेटिव प्रभाव पड़ता है लेकिन इससे बचाव से समय से पहले एजिंग (Aging) से भी बचा जा सकता है और यंग रहने में मदद मिलती है। लेकिन, इसके बारे में और शोध करने की जरूरत है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कैफीन के अन्य फायदे क्या हैं? कैफीन हमें सतर्क रखने और एनर्जी को सुधारने का काम करता है। इसके अन्य फायदे इस प्रकार हैं: कैफीन (Caffeine) को दर्द दूर करने वाली दवाईयों के साथ लेने से माइग्रेन के उपचार के लिए प्रभावी है।  कॉग्निटिव परफॉरमेंस को सुधारने में भी इसे फायदेमंद माना गया है। मूड को सुधारने और डिप्रेशन के रिस्क को कम करने में भी कैफीन लाभदायक है। लेकिन, इसका सेवन सही मात्रा में ही करना चाहिए। कुछ स्टडीज यह बताती है कि नियमित रूप से कैफीन (Caffeine) का सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज, पर्किंसन,स डिजीज आदि के डेवलप करने के जोखिम कम होता है। ऐसा माना गया है कि इसे लेने से हार्ट फेलियर के रिस्क को कम किया जा सकता है। लेकिन, कैफीन का सेवन सही और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। कैफीन को पीने से लिवर डैमेज और सिरोसिस के रिस्क के साथ भी लिंक किया जाता है। कैफीन (Caffeine) में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं जो सर्कुलेशन को सुधारने और झुर्रियों को कम करने में फायदेमंद हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Caffeine #caffeine #antiaging #stayyoung #youthfulskin #coffeehealth #skincare #healthtips

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Motion Sickness

Motion Sickness: मोशन सिकनेस से हैं परेशान? जानिए इसके कारण और राहत पाने के आसान घरेलू उपाय

जब भी हम यात्रा करते हैं, तो कई बार चक्कर आना, उल्टी या जी मिचलाना जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। यह समस्याएं कार, बस या जहाज कहीं भी हो सकती हैं। क्या आप जानते हैं कि यह सब मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) हैं? यह वो कंडीशन है जो तब होती है जब हमारे आंखें, अंदरूनी कान और शरीर हमारे ब्रेन को विपरीत संदेश देते हैं। जैसा की पहले ही बताया गया है कि यह समस्या उस समय परेशान करती है जब हमारा शरीर तो स्थिर होता है लेकिन हम किसी वाहन द्वारा मूव कर रहे होते हैं। यही नहीं,  कुछ लोग मोशन सिकनेस (Motion sickness) तब भी अनुभव कर सकते हैं जब वो वीडियो गेम या कोई अन्य गेम खेल रहे होते हैं। आइए जानें कि कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness) और इससे कैसे बचा जा सकता है? कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness)?  मोशन सिकनेस (Motion sickness) के कई कारण हो सकते हैं। अगर आपको यह समस्या है तो इसके कारण इस प्रकार हो सकते हैं: मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) धीरे-धीरे भी विकसित हो सकते हैं या एकदम भी नजर आ सकते हैं। कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness), यह तो आप समझ ही गए होंगे। इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं: यह इस समस्या के सभी लक्षणों की लिस्ट नहीं है। इसके अलावा भी लोगों में मोशन सिकनेस (Motion sickness) के कुछ और लक्षण नजर आ सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन मोशन सिकनेस का उपचार मोशन सिकनेस (Motion sickness) के लक्षणों से राहत पाने के लिए यह उपाय काम में आ सकते हैं: मोशन सिकनेस से कैसे बचें? मोशन सिकनेस (Motion sickness) को नजरअंदाज करना संभव नहीं है लेकिन थोड़ी प्लानिंग से आप गंभीर लक्षणों से बच सकते हैं। जैसे अगर आप बस से सफर कर रहे हैं तो विंडो सीट लें और कार में आगे की सीट पर बैठे। यात्रा करते हुए हल्का भोजन और पेय पदार्थों का सेवन करें। भारी या मसालेदार भोजन का सेवन न करें। इसके साथ ही आप डॉक्टर की सलाह के बाद मोशन सिकनेस (Motion sickness) की दवाईयां ले सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  Motion sickness #motionSickness #homeRemedies #naturalCure #travelTips #nauseaRelief #dizzinessRelief #healthTips

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SIM Shutdown Scam Govt Issues Warning & Safety Tips

SIM बंद होने के नाम पर हो रहा बड़ा घोटाला, सरकार की चेतावनी और बचाव के तरीके

पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन फ्रॉड (Online Fraud) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह एक ऐसा अपराध है जिसमें कोई व्यक्ति या ग्रुप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर के लोगों को लुटते हैं और उन्हें फाइनेंशियल नुकसान पहुंचाते हैं। यही कारण है कि लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जाती है। यही नहीं, लोगों यह भी बार-बार समझाया जाता है कि वो अपने पासवर्ड को सेफ रखें और अपनी पर्सनल जानकारी किसी के साथ भी शेयर न करें। आजकल एक और फ्रॉड चर्चा में है जिसका नाम है सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud)। इसके बारे में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिकेशन ने भी लोगों को सचेत रहने का आग्रह किया है। अब तक कई लोग इस फ्रॉड का शिकार बन चुके हैं। आइए जानें इस सिम स्वैप फ्रॉड के बारे में। सिम स्वैप फ्रॉड से कैसे बचें (How to avoid SIM swap fraud), यह भी जानें। क्या है सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud)? टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने अपने सोशल मीडिया पर एक जानकारी शेयर की है। इसमें उन्होंने लोगों को इस नए स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि यूजर फर्जी मेसेज और कॉल्स को रिपोर्ट करें। हम लोग अक्सर अपने बैंक अकाउंट और अन्य पर्सनल इंफॉर्मेशंस को लोगों के साथ शेयर नहीं करते और उन्हें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के माध्यम से सेफ रखते हैं। इसमें बिना वन टाइम पासवर्ड या ओटीपी के बिना कोई भी यूजर के एकाउंट्स को एक्सेस नहीं कर पाता है। लेकिन, अब अपराधियों ने लोगों के बैंक अकाउंट से पैसा उड़ाने के लिए नया तरीका निकाला है जिसका नाम है सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud)। जानिए क्या होता है इस फ्रॉड में? सिम स्वैप फ्रॉड से कैसे बचें (How to avoid SIM swap fraud)? इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud) होने के बाद क्या करें?  अगर किन्ही कारणों से आप इस फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत कार्यवाही करना जरूरी है। इसके लिए आपको यह पॉइंट्स ध्यान में रखना है: नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  SIM swap fraud #simscam #govtwarning #cyberfraud #scamalert #safetyfirst #mobilescam #simfraud #fraudprevention #indiaalerts #digitalsafety

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Discover key symptoms of epilepsy

एपिलेप्सी: जानिए कैसे पहचानें इसके लक्षण, अपनाएं बचाव के तरीके और पाएं एक स्वस्थ जीवन

एपिलेप्सी (Epilepsy) यानी मिर्गी को सीजर डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। यह दिमाग से सम्बन्धित वो समस्या है जिसके कारण रोगी को बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों में यह समस्या किस वजह से होती है, यह बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि, कुछ लोगों में इसके कारण हो पहचाना जा सकता है। एपिलेप्सी (Epilepsy) की समस्या किसी भी उम्र, लिंग या बैकग्राउंड के लोगों को हो सकती है। इस दौरान होने वाले सिजर्स के लक्षण भी रोगियों में अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन, ऐसा जरूरी नहीं है कि एक बार दौरा पड़ने पर व्यक्ति को मिर्गी जैसी समस्या हो। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। आइए जानें एपिलेप्सी (Epilepsy) के बारे में विस्तार से। एपिलेप्सी के लक्षण (Symptoms of Epilepsy) और इससे बचाव के बारे में भी इंफॉर्मेशन पाएं। एपिलेप्सी के लक्षण (Symptoms of Epilepsy) वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के अनुसार एपिलेप्सी (Epilepsy) एक गंभीर नॉनकम्युनिकेबल डिजीज है, जिससे पूरी दुनिया भर में लगभग पांच करोड़ लोग प्रभावित हैं। एपिलेप्सी का मुख्य लक्षण है बार-बार दौर पड़ना। हालांकि, इसके लक्षण सीजर के टाइप पर भी निर्भर करते हैं। इस के लक्षण इस प्रकार हैं:  एपिलेप्सी के कारण एपिलेप्सी के लक्षण क्या हो सकते हैं (Symptoms of Epilepsy), यह जानने के बाद इसके कारणों के बारे में भी पता होना चाहिए। अधिकतर मामलों में इस परेशानी के कारणों के बारे में जानकारी नहीं होती। इसके कुछ कारण इस प्रकार हो सकते हैं: एपिलेप्सी (Epilepsy) के उपचार किसी व्यक्ति को एक दौरे (Seizures) के बाद उपचार की जरूरत नहीं होती। लेकिन, अगर किसी को बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं, तो उपचार जरूरी है। एपिलेप्सी (Epilepsy) के उपचार के विकल्प इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन एपिलेप्सी (Epilepsy) से कैसे बचें?  हालांकि, मिर्गी के अधिकतर कारण कंट्रोल से बाहर हैं और उनसे बचाव संभव नहीं है। लेकिन कुछ ऐसी स्थितियों के विकसित होने की संभावना को कम किया जा सकता है जो मिर्गी का कारण बन सकती हैं, जैसे: ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के रिस्क को कम करने के लिए हमेशा गाडी में सफर करते हुए सीटबेल्ट पहनें और बाइक चलाते हुए हेलमेट पहनें। इसके साथ ही ऐसी स्थितियों को भी नजरअंदाज करें जिसमें आपको चोट लग सकती है। स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए हेल्दी डायट लें, नियमित एक्सरसाइज करें और अपने वजन को सही बनाए रखें। एल्कोहॉल और अन्य इलीगल ड्रग्स ब्रेन को नुकसान पहुंचा सके हैं और एपिलेप्सी (Epilepsy) का कारण बन सकते हैं। इसलिए इनका सेवन करने से बचें। संक्षेप में कहा जाए तो एपिलेप्सी (Epilepsy) या मिर्गी ब्रेन में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के अनियंत्रित होने को कहा जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे सिर में चोट या सही से न सोना आदि। इस समस्या का उपचार पूरी तरह से संभव है। अगर आपको इस समस्या का कोई भी लक्षण नजर आता है और इसके हल्के में न लें। तुरंत मेडिकल हेल्प लें और जांच कराएं। क्योंकि, मिर्गी और दौरों से रोगी का जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Epilepsy #epilepsy #epilepsysymptoms #seizuredisorder #neurologicalhealth #healthylifestyle #epilepsyawareness

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Anti-Aging Medicines

एंटी एजिंग मेडिसिन का सच, यंग दिखने के हैं कुछ फायदे और बहुत से नुकसान

अभिनेत्री शैफाली जरीवाला की कार्डियक अटैक के कारण हुई मृत्यु आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि इस कार्डियक अटैक की वजह है एंटी एजिंग दवाईयां और इंजेक्शंस हो सकते हैं। शेफाली पिछले कई सालों से यंग दिखने के लिए इन्हें ले रही थी। सिर्फ शैफाली ही नहीं बहुत से सेलेब्रिटीज हमेशा जवान दिखने के लिए इन दवाईयों का इस्तेमाल करते हैं। एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) में इंजेक्शन और कई अन्य ट्रीटमेंट्स शामिल हैं। इनका उद्देश्य बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करके यंग दिखना है। इनके जहां कुछ फायदे हैं लेकिन बहुत से साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। आइए जानें एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) और इनके साइड इफेक्ट्स के बारे में।  एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine): पाएं जानकारी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National library of medicine) के अनुसार एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक रूप से युवा बनाए रखना है। इनसे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती है और जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है। एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) इस प्रकार हैं: झुर्रियों को करे कम  एंटी एजिंग इंजेक्शंस जैसे बोटॉक्स और फिलर्स से झुर्रियां और फाइन लाइंस कम होती है जिससे स्किन स्मूद बनती हैं और कॉम्प्लेक्शन में सुधार होता है। स्किन टेक्सचर में सुधार:  फिलर्स से स्किन टेक्सचर में सुधार होता है। इनके उपयोग से त्वचा में फुलाव आता है जिससे फाइन लाइन्स त्वचा की बनावट में इम्प्रूवमेंट होती है। यही नहीं एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) में से एक यह भी है कि फिलर चेहरे के खोये वॉल्यूम को वापस लाने में मदद करती हैं जिससे चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं और यंग दिखते हैं।  नॉन-सर्जिकल एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) और इंजेक्शंस का इस्तेमाल नॉन सर्जिकल होता है। इनसे कोई नुकसान नहीं होता और आप बहुत जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकते हैं। यही नहीं, इनके इस्तेमाल से चेहरे के फीचर्स को बढ़ाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines) एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines) भी हो सकते हैं। ऐसा माना गया है कि यह साइड इफेक्ट्स आमतौर पर माइल्ड और टेम्पररी होते हैं। जानिए इनके बारे में:  यह तो थे एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines)।  एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) के कुछ दुर्लभ और गंभीर साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे अन्धपन या आंखों की रोशनी का कम होना। यही नहीं, अगर फिलर्स ब्लड वेसल्स तक पहुंच जाएं तो इससे स्ट्रोक या ब्रेन डैमेज का रिस्क बढ़ सकता है। याद रखें, इनका इस्तेमाल करने से पहले अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और संभावित रिस्क के बारे में किसी क्वालिफाइड डॉक्टर से बात करें और उसके बाद ही इन्हें लें। (Anti aging medicine) नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Anti aging medicine #antiaging #lookyoung #skincare #youthfulglow #beautytruth #antiagingrisks #antiagingfacts

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Know the harmful effects of Giloy juice

गिलोय के जूस के हो सकते हैं बहुत से नुकसान, जानिए किन लोगों को नहीं करना चाहिए इसका सेवन

आयुर्वेद में ऐसी कई हर्ब्स हैं जिन्हें हेल्थ के लिए लाभदायक माना जाता है। उन्हीं में से एक है गिलोय (Giloy)। इसे अमृता या गुडुची के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना गया है कि यह हर्ब डायजेशन के लिए अच्छी है और इसके साथ ही इम्युनिटी को भी बढ़ाती है। यही नहीं, इस हर्ब में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके सेवन से बुखार कम करने में मदद मिलती है और शरीर को कई तरह के इंफेक्शंस से बचाव में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि आजकल गिलोय का जूस (Giloy juice) बड़ी सख्या में लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके बहुत से फायदे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं? आइए जानें कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार गिलोय (Giloy) सीजनल एलर्जीज में फायदेमंद होती है। इससे स्किन रैशेज कम हो सकते हैं। इसके साथ ही डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल आदि को मैनेज करने में भी यह मदद कर सकती है। लेकिन, कुछ लोगों को इनका सेवन करने से बचना चाहिए। जानें किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? ऑटोइम्यून डिजीज के रोगी:  गिलोय का जूस (Giloy juice) इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट करता है जिससे ल्यूपस, रुमेटीइड गठिया या क्रोहन रोग  से पीड़ित लोगों के लिए इसका सेवन उनकी स्थिति को और बदतर बना सकता है। गर्भवती महिलाएं गर्भवती महिलाओं को इस स्थिति में गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने की सलाह नहीं दी जाती है। यही नहीं उन्हें इस दौरान कुछ भी खाने या पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसका सेवन करना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाईयां लेने वाले लोग  गिलोय का जूस (Giloy juice) उन लोगों को भी नहीं पीना चाहिए, जो ब्लड प्रेशर लो करने वाली दवाईयां ले रहे हैं। क्योंकि गिलोय (Giloy) भी ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है। ऐसे में इन दोनों के कॉम्बिनेशन से रोगी का ब्लड प्रेशर लेवल बहुत अधिक कम हो सकता है। इससे उनकी समस्या बढ़ सकती है। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  लिवर की समस्या से पीड़ित रोगी ऐसा पाया गया है कि गिलोय (Giloy) लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जिन लोगों को लिवर संबंधी समस्याएं हैं या जिन्हें पीलिया के के लक्षणों का अनुभव हो रहा हो, उन्हें इनका सेवन करने से बचना चाहिए। यह तो आप जान ही गए होंगे कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)। यह भी सलाह दी जाती है कि गिलोय (Giloy) या गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने से पहले किसी एक्सपर्ट या डॉक्टर कि सलाह लें खासतौर पर अगर आप किसी अंडरलाइंग हेल्थ कंडीशन से गुजर रहे हों या कोई दवा ले रहे हैं।  गिलोय (Giloy) के कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। कुछ लोग इसके सेवन के बाद पेट में परेशानी या जी मिचलाना जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। ऐसा आमतौर पर इसकी अधिक मात्रा लेने से होता है। इस बात का खास ध्यान रखें कि गिलोय या गिलोय का जूस (Giloy juice) किसी भी बीमारी का मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है। इसलिए, कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Giloy #giloyjuice #sideeffects #ayurvedichealth #immunitybooster #healthalert #naturalremedies #giloywarning

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दिल की सेहत के लिए अलर्ट, कार्डियक अरेस्ट के लक्षण और बचाव

पिछले कुछ सालों में कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कुछ सेलेब्रिटीज भी इसकी वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें सिद्धार्थ शुक्ला, सिंगर केके, पुनीत सुपरस्टार, राजू श्रीवास्तव आदि का नाम शामिल है। हाल ही में आई एक खबर के अनुसार अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की भी कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) की वजह से मौत हो गई। एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि कोविड महामारी के बाद से हार्ट से जुड़ी समस्याओं के कारण मृत्यु के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि, इसके बारे में कोई सुबूत मौजूद नहीं है कि इनका कारण कोविड 19 है। स्ट्रेस, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और अंडरलायिंग मेडिकल कंडीशन आदि को इस समस्या के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा सकता है। आइए पाएं जानकारी कार्डियक अरेस्ट के बारे में। यह भी जानें कि इससे कैसे बचा जा सकता है? कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) के बारे में पाएं जानकारी क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार यह समस्या तब होती है जब दिल धड़कना करना बंद कर देता है या इतनी तेजी से धड़कता है कि यह ब्लड पंप करना बंद कर देता है। चिंता की बात यह है कि इसके लक्षण बिना किसी चेतावनी के नजर आते हैं। इस स्थिति में ब्लड ब्रेन और अन्य जरूरी अंगों तक फ्लो करना बंद कर देता है। अगर इसका तुरंत उपचार न हो, तो कुछ ही मिनटों में रोगी की मृत्त्यु हो सकती है। लेकिन, तुरंत उपचार से रोगी का जीवन बच सकता है। कार्डियक अरेस्ट के कारण  कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) का प्राइमरी कारण हार्ट में इलेक्ट्रिकल मॉलफंक्शन्स को माना जाता है, जो जीवन के लिए हानिकारक एरिथमिया (Arrhythmia) का कारण बन सकता है। यह इलेक्ट्रिकल खराबी कई अंडरलाइंग हार्ट कंडीशंस या अन्य फैक्टर्स के कारण हो सकती है। यह अंडरलाइंग कारण इस प्रकार हैं: जानिए कार्डियक अरेस्ट के लक्षण (Cardiac arrest symptoms) क्या हो सकते हैं? कार्डियक अरेस्ट के लक्षण (Cardiac arrest symptoms) अधिकतर मामलों में इस कंडीशन का रोगी में कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है। कार्डियक अरेस्ट के लक्षण (Cardiac arrest symptoms) इस प्रकार हैं: कार्डियक अरेस्ट का उपचार (Cardiac arrest treatment) कार्डियक अरेस्ट का उपचार (Cardiac arrest treatment) संभव है लेकिन यह उपचार रोगी को तुरंत मिलना चाहिए। कार्डियक अरेस्ट का उपचार (Cardiac arrest treatment) इस तरह से संभव है: इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  कार्डियक अरेस्ट से कैसे बचें? अगर आपको कोरोनरी आर्टरी डिजीज या अन्य हार्ट डिजीज है, तो इनके सही समय पर इलाज से इस समस्या के जोखिम को कम किया जा सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Cardiac arrest #hearthealth #cardiacarrest #heartcare #healthalert #preventiontips #healthylifestyle

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