Anu Sharma

Shatavari benefits

प्राकृतिक तरीके से महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने इस तरह के फायदेमंद है शतावरी

महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ यानी प्रजनन स्वास्थ्य उनके शारीरिक, मानसिक और सामान्य स्वास्थ्य से संबंधित है। इनमें रिप्रोडक्टिव सिस्टम का स्वास्थ्य, मेंस्ट्रुअल हेल्थ, प्रेग्नेंसी, कंट्रासेप्शन, सेक्शुअल हेल्थ आदि शामिल है। महिलाओं के लिए अपनी रिप्रोडक्टिव हेल्थ का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए महिलाओं के लिए जागरूक रहना चाहिए और उनके लिए रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराना और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना भी जरूरी है। इसके लिए कुछ प्लांट भी फायदेमंद हो सकते हैं। ऐसा ही एक प्लांट है शतावरी (Shatavari), जिसे सब्जी के रूप में खाया जाता है। आयुर्वेदिक मेडिसिन में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए वरदान माना गया है। आइए महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health) के बारे में। महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी(Shatavari for women’s reproductive health): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार शतावरी (Shatavari) को अस्परगस ऑफिसिनैलिस (Asparagus officinalis) भी कहा जाता है। यह एक सब्जी है जो सफेद, हरे और पर्पल रंग में मिलती है। इसका प्रयोग कई तरह की डिशेस बनाने में किया जाता है। महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health) के फायदे इस प्रकार हैं: हॉर्मोनल बैलेंस : ऐसा माना गया है कि शतावरी (Shatavari) यानी अस्परगस ऑफिसिनैलिस फीमेल रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन्स को रेगुलेट और बैलेंस करने के लिए फायदेमंद है। इसके साथ ही यह भी पाया गया है कि अनियमित पीरियड्स और पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम्स जैसी समस्याओं के लिए यह फायदेमंद है। फर्टिलिटी शतावरी (Shatavari) ओवेरी के कार्यों को सुधारने के लिए भी जाना जाता है यानी वो फर्टिलिटी को सपोर्ट करने में फायदेमंद है। इसके साथ ही इससे एग्स की गुणवत्ता भी सुधरती है।  स्ट्रेस को करे कम शतावरी (Shatavari) यानी अस्परगस ऑफिसिनैलिस (Asparagus officinalis) को हमारे मेंटल हेल्थ के लिए भी लाभदायक पाया गया है। इससे स्ट्रेस कम होने में मदद मिलती है। ऐसा पाया गया है कि चिंता और स्ट्रेस से महिलाओं की रिप्रोडक्टिव पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसका इस्तेमाल एंडोमेट्रियोसिस, दर्दनाक पीरियड्स और मेनोपॉज के लक्षणों को दूर करने में भी किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक पोस्टपार्टम फायदे महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health)  के फायदे पोस्टपार्टम सपोर्ट से भी जुड़े हुए हैं। स्तनपान कराने वाली महिलाओं में शतावरी (Shatavari) मिल्क प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करती है और इससे पोस्टपार्टम के लक्षण भी दूर होते हैं। यह तो थे महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए शतावरी (Shatavari for women’s reproductive health) के फायदे। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी चीज के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। शतावरी (Shatavari) यानी अस्परगस ऑफिसिनैलिस (Asparagus officinalis) के बारे में भी अभी और रिसर्च की जानी जरूरी है। इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें और इसके साइड-इफेक्ट्स के बारे में भी जान लें। अपनी मर्जी से किसी भी चीज का सेवन करना हानिकारक सिद्ध हो सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Shatavari #shatavari #womenshealth #reproductivehealth #naturalremedies #hormonebalance #ayurveda #fertilitybooster

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insulin plant

डायबिटीज के लिए इंसुलिन प्लांट; डायबिटीज को मैनेज करने का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प

डायबिटीज को एक भयानक बीमारी माना गया है, जिसमे रोगी का शरीर या तो जरूरी इंसुलिन को बना नहीं पाता है या सही से उसका इस्तेमाल नहीं कर पाता। कई मामलों में इसका कोई भी लक्षण रोगी में नजर नहीं आता है। आजकल यह समस्या सामान्य होती जा रही है। गंभीर बात यह है यह रोग इंसान के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस बीमारी को कुछ हद तक मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करना सबसे जरूरी है। कुछ हर्ब्स को भी इसके लिए फायदेमंद पाया गया है। इन्हीं में से एक है इंसुलिन प्लांट (Insulin plant)। आइए जानें इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) यानी कोस्टस इग्नियस (Costas Costus Igneus) के बारे में विस्तार से। क्या है इंसुलिन प्लांट (Insulin plant)?  इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) को कोस्टस इग्नियस (Costas Costus Igneus) के नाम से भी जाना जाता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो यह बहुत फायदेमंद प्लांट है और डायबिटीज में इसे फायदेमंद पाया गया है। हालांकि, अन्य उपायों के साथ ही रोगी के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी जरूरी है। हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार यह पौधा कुछ डायबिटीज के रोगियों में ग्लूकोज लेवल को कम करने में लाभदायक हो सकता है और रोगी निम्नलिखित तरीकों से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं: इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) यानी कोस्टस इग्नियस (Costas Costus Igneus) एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन को ठीक करने में भी फायदेमंद है। आइए जानें क्या यह डायबिटीज के रोगियों के लिए सुरक्षित है? क्या सच में इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) डायबिटीज के रोगियों के लिए सुरक्षित है? ऐसा माना गया है कि इंसुलिन प्लांट (Insulin plant) के पत्ते खाना डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक हो सकता है। स्टडी भी यह बताती हैं इसके सेवन से ब्लड ग्लूकोज लेवल में कमी आ सकती है। जो रोगी इंसुलिन लेते हैं, उनमे इसको लेने की आवश्यकता कम हो सकती है। लेकिन, इनका सेवन करना कुछ लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए जब भी इसका सेवन करना शुरू करें उससे पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें खासतौर पर अगर आप कोई और दवा ले रहे हैं या आपको कोई गंभीर बीमारी है। इंसुलिन प्लांट के साइड इफेक्ट्स (Insulin plant side effects) इस प्लांट का सेवन करना कुछ लोगों के लिए बुरा भी साबित हो सकता है। इंसुलिन प्लांट के साइड इफेक्ट्स (Insulin plant side effects) इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक हाइपोग्लाइसीमिया का जोखिम बढ़ना इसलिए, किसी भी दवा या हर्ब्स का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा अधिक समय तक इसका सेवन भी इंसुलिन प्लांट के साइड इफेक्ट्स (Insulin plant side effects) का कारण बन सकता है। इसके बारे में और अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Costas Costus Igneus #insulinplant #diabetesmanagement #naturaltreatment #bloodsugarcontrol #herbalremedy #costusigneus #healthylifestyle

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healthy fruits for liver

लीवर और किडनी को साफ करने वाले 5 फल, रोजाना सेवन से दूर होंगी बीमारियाँ

हेल्दी रहना है तो हेल्दी आहार का सेवन करना बहुत जरूरी है। इसलिए, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर यही सलाह देते हैं कि अपने आहार में फल (Fruit) सब्जियों, साबुत अनाज आदि को अवश्य शामिल करें। इसके साथ ही जंक फूड को जितना हो सके नजरअंदाज करना चाहिए। अगर बात की जाए फलों की, तो यह न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भी भरपूर होते हैं। यानी, इनका सेवन हेल्दी रहने में मददगार साबित हो सकता है। यह भी माना गया है कि फलों का नियमित सेवन लिवर और किडनी से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार है। आइए जानें लिवर और किडनी के लिए फायदेमंद फल (Fruits beneficial for liver and kidney) के बारे में।  लिवर और किडनी के लिए फायदेमंद फल (Fruits beneficial for liver and kidney): पाएं जानकारी हार्वर्ड हार्ट पब्लिशिंग (Harvard Heart Publishing) के अनुसार विभिन्न फलों की भी अलग-अलग न्यूट्रिएंट्स वैल्यू होती हैं यानी किसी फल (Fruit) में अधिक फाइबर होता है तो किसी में कम। जानिए फलों के बारे में जो लिवर और किडनी से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार हैं।  अनार (Pomegranate) अनार (Pomegranate) में पुनीकलागिन (Punicalagin) नामक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। ऐसा माना गया है कि यह एंटीऑक्सीडेंट किडनी स्टोन को बनने से रोक सकता है और इसके साथ ही सूजन को कम करने में भी फायदेमंद है। कुछ स्टडीज यह भी बताती हैं कि यह फल (Fruit) डायलिसिस से गुजरने वाले रोगियों में टॉक्सिन्स को कम करने में भी फायदेमंद है। ब्लड सर्कुलशन को बढ़ाने में भी अनार (Pomegranate) अच्छा माना गया है। तरबूज (Watermelon) लिवर और किडनी के लिए फायदेमंद फल (Fruits beneficial for liver and kidney) में तरबूज (Watermelon) का भी नाम है। यह फल (Fruit) माइल्ड ड्यूरेटिक की तरह काम करता है। इसको खाने से यूरिन फ्लो बढ़ता है और शरीर से खासतौर पर किडनी व लिवर से टॉक्सिन्स को बाहर निकलने में मदद मिलती है। इस फल में सिट्रूलाइन नामक एमिनो एसिड भी होता है जो ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और अमोनिया लेवल को कम करता है। संक्षेप में कहा जाए तो तरबूज (Watermelon) किडनी और लिवर दोनों के लिए फायदेमंद है। पपीता (Papaya) पपीता (Papaya) में एक ऐसा एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को ब्रेकडाउन करने में फायदेमंद है। इससे लिवर के मेटाबोलिक लोड को कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही पपीता (Papaya) में फ्लवोनोइड्स और विटामिन सी भी होते हैं जो फैटी लिवर डिजीज का जोखिम को कम करने के लिए जरूरी है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक क्रैनबेरी (Cranberry) क्रैनबेरी (Cranberry) यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन को कम करने में फायदेमंद पाई गयी है। किडनी हेल्थ को सपोर्ट करने में भी इसे बेनेफिशियल पाया गया है। क्रैनबेरी( Cranberry) में मौजूद प्रोएंथोसाइनिडिन हानिकारक बैक्टीरिया को यूरिनरी ट्रैक्ट लायनिंग से रिमूव करने में मदद करते हैं जिससे किडनी को सही से काम करने में मदद मिलती है। यह भी पाया गया है कि इसके सेवन से गंभीर किडनी रोगों को बढ़ने से रोकने में भी सहायता मिल सकती है। एवोकाडो (Avocado) एवोकाडो (Avocado) को लिवर और किडनी से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार पाया गया है। यह मोनोसेचुरेटेड फैट्स हानिकारक बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। इस फल (Fruit) से अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और ब्लड हेल्थ में सुधार होता है। इनमें बहुत अधिक विटामिन और मिनरल्स होते हैं इसमें विटामिन इ, सी और के आदि। इसके साथ ही इसमें एंटीक्सिडेंट्स भी होते हैं। एवोकाडो (Avocado) से हार्मफुल फ्री रेडिकल्स कम होते हैं जिससे सूजन भी कम होती है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Fruits beneficial for liver and kidney #liverdetox #kidneycleanse #naturalhealth #dailyhealthtips #healthylifestyle #detoxfruits #healthcare

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Blood Goddess

जब देश की हर महिला थी खून की कमी से जूझती, तब प्रकट हुईं रहस्यमयी रक्तदेवी

भारतवर्ष में देवी-देवताओं की कहानियां सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के गहरे संकेत भी देती हैं। एक ऐसी ही रहस्यमयी कथा जुड़ी है उस देवी से, जो तब प्रकट हुईं जब देश की अधिकांश महिलाएं “खून की कमी” यानी एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। कहा जाता है कि इस देवी का प्राकट्य न केवल आध्यात्मिक रूप से चमत्कारी था, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी क्रांतिकारी। अस्सी के दशक तक शुक्रवार का दिन खास तौर पर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था, क्योंकि उस समय यह दिन संतोषी माता की पूजा का था। शुक्रवार को महिलाएं पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ व्रत रखती, संतोषी माता की कथा सुनतीं और गुड़ चना का प्रसाद चढ़ाती थीं। व्रत खोलने से पहले प्रसाद को बड़े मन से ग्रहण किया जाता था और पूरे दिन घर में कोई भी झगड़ा या विवाद नहीं होता था। यह परंपरा पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जाती थी। धार्मिक आस्था में तर्क और विज्ञान की जगह नहीं होती संतोषी माता (Santoshi Mata) का उल्लेख किसी भी प्राचीन पुराण में नहीं मिलता, न ही वेदों में उनका नाम आता है, क्योंकि वेदों में केवल कुछ मुख्य देवताओं का ही वर्णन है। संतोषी माता का प्रचार-प्रसार करीब 1960 के दशक के मध्य से शुरू हुआ था। माना जाता है कि यह पूजा खासकर हिंदी भाषी प्रदेशों में किसी स्थानीय देवी की पूजा से प्रेरित हो सकती है। कुछ लोगों का कहना है कि संतोषी माता का यह उत्सव पश्चिम बंगाल से आया होगा, लेकिन बंगाली पूजा में आमतौर पर भव्य और रसयुक्त व्यंजन चढ़ाए जाते हैं, इसलिए गुड़ चना जैसे सादे प्रसाद का चढ़ावा वहां कम माना जाता है। धार्मिक आस्था में तर्क और विज्ञान की जगह नहीं होती, इसलिए इस सरल और सस्ते प्रसाद को भी इसकी विशेषता के रूप में देखा जाता है। बनी ‘रक्तदेवी’ की मंदिर कुछ लोग यह कहते हैं कि उस समय देश की औसत महिलाओं में खून में आयरन की कमी एक सामान्य समस्या थी, जिसे समाज ने स्वीकार भी किया था। उस दौर में हालात और भी खराब थे क्योंकि महिलाएं पहले अपने पूरे परिवार को खाना खिलाती थीं और खुद के लिए खाने को एक तरह से आशीर्वाद मानती थीं। जो लोग धर्म और विज्ञान को जोड़कर देखते हैं, उनका कहना है कि आयरन बढ़ाने के लिए आज भी गुड़ और चना से बेहतर प्राकृतिक उपाय कोई नहीं हो सकता। इसी कारण से संतोषी माता (Santoshi Mata) की पूजा और उनका प्रचार तेजी से बढ़ा। संतोषी माता से वैष्णो देवी तक: धार्मिक आस्था का बदलता रूप हम ऐसे देश के निवासी हैं जहाँ देवी-देवताओं पर आस्था के लिए किसी तर्क की जरूरत नहीं होती। जैसे ही कहीं यह खबर फैलती है कि किसी मूर्ति ने दूध पिया है, पूरा देश इसे आजमाने लगता है और हर कोई दावा करता है कि उसने भी वही किया है, यह हम सबने कई बार देखा है। देश में संतोषी माता (Santoshi Mata) की पूजा का प्रचार जबरदस्त हुआ। करीब 50 साल पहले, 30 मई 1975 को ‘जय संतोषी माता’ नामक फिल्म रिलीज हुई, जिसका बजट लगभग 5 से 12 लाख रुपये था। यह फिल्म कमाल की कमाई कर गई, और विभिन्न स्रोतों के अनुसार, इसने 5 से 25 करोड़ रुपये तक की कमाई की। उस समय यह फिल्म शोले के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक बनी। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय आज भी देश के कई हिस्सों में संतोषी माता के मंदिर मौजूद हैं वरिष्ठ पत्रकार और धर्म विशेषज्ञ इष्टदेव सांकृत्यायन का मानना है कि संतोषी माता का उद्भव शायद किसी स्थानीय देवी की लोकप्रियता से प्रेरित था। उन्होंने यह भी कहा कि संतोषी माता के प्रसार के बाद शुक्रवार का दिन वैभव लक्ष्मी को समर्पित हो गया, जिनकी पूजा और स्वरूप संतोषी माता से काफी मिलता-जुलता है। उनके अनुसार, “जब तक संतोष नहीं आएगा, तब तक समृद्धि नहीं आएगी। इसलिए संतोष का संदेश देने के लिए ही इस देवी की पूजा का प्रचार हुआ होगा।” आज भी देश के कई हिस्सों में संतोषी माता के मंदिर मौजूद हैं, जहाँ श्रद्धालु उनकी पूजा करते हैं। 1984 में दूरदर्शन के देशभर में प्रसारित होने के बाद धीरे-धीरे संतोषी माता का प्रचार कम होने लगा। इसी दौरान संचार और यातायात के बेहतर होने के साथ-साथ वैष्णो देवी की लोकप्रियता बढ़ने लगी। टी-सीरीज के गुलशन कुमार ने वैष्णो माता के कई वीडियो कैसेट जारी किए, और फिल्मों के माध्यम से भी उनका प्रचार व्यापक हुआ। इससे वैष्णो माता की भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ी और उनकी मनोकामनाएं पूरी होने लगीं। Latest News in Hindi Today Hindi news #bloodgoddess #anemiaawareness #womenshealth #mystery #divineintervention #indianmythology #healing #spiritualpower

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Aircraft Maintenance Engineering

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए पाएं यह जरूरी जानकारी

अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उड़ान सुरक्षा को लेकर कई चिंताएं जताई जा रही हैं। इस दुर्घटना में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। आपको बता दें कि विमानों की सुरक्षा और परफॉरमेंस को सुनिश्चित करने के लिए एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वो विमानों की देखभाल और रखरखाव करते हैं। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) यानी एएमई (AME) में अगर आप अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि इसके लिए आपको एयरक्राफ्ट (Aircraft) इंडस्ट्री में विशेषज्ञता प्राप्त करनी होगी। इसके साथ ही जरूरी लाइसेंस और सर्टिफिकेट प्राप्त करना भी जरूरी है। आइए जानें एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) या एएमई (AME) के बारे में। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) के बारे में जानें जैसे की पहले ही बताया गया है कि क्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की जिम्मेदारी होती है विमानों की सुरक्षा को पक्का करना और उसके रखरखाव में मदद करना। एएमई (AME) के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं: एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) के लिए कौन से कोर्स किए जाते हैं? अगर आप एएमई (AME) में करियर बनाना चाहते हैं तो आपके लिए यह जानकारी जरूरी है कि आप इसके लिए कौन से कोर्स कर सकते हैं? यह विकल्प इस प्रकार हैं: कहां से करें एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering)? एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) करने के लिए आप डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन द्वारा अप्रूव्ड किसी भी इंस्टिट्यूट से कोर्स पूरा कर सकते हैं। यह कुछ इंस्टिट्यूट इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) के लिए योग्यता इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए कुछ इंस्टिट्यूट एंट्रेंस टेस्ट लेते हैं। उसमें उत्तीर्ण कैंडिडेट्स को इसमें प्रवेश दिया जाता है। कुछ इंस्टिट्यूट मेरिट के अनुसार दाखिला देते हैं। कई इंस्टिट्यूट इसमें लिए इंटरव्यू भी लेते हैं। अगर आप इसके बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो आप इन इंस्टीटूट्स की आधिकारिक वेबसाइट्स पर विजिट कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi B.E/B.Tech in Aircraft Maintenance Engineering #aircraftmaintenance #engineeringcareer #aviationjobs #ame #careeropportunities #aviationindustry #technicalcareers

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Avoid sharing these 4 dreams

इन 4 सपनों को किसी से न करें साझा, वरना बन सकता है नुकसान का कारण

हमारे शास्त्रों, पुराणों और विशेष रूप से स्वप्न शास्त्र (Dream Science) में सपनों को महज एक मानसिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य के संकेतों के रूप में देखा गया है। मान्यता है कि हमारे सपने कई बार ईश्वर या ब्रह्मांड द्वारा दिए गए संकेत होते हैं जो हमें चेतावनी, शुभ समाचार या दिशा देने के लिए आते हैं। लेकिन इन सपनों का प्रभाव केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हमने क्या देखा, बल्कि इस पर भी होता है कि हम उसके बारे में दूसरों से कैसा व्यवहार करते हैं। कुछ सपने (Dream) ऐसे होते हैं जिन्हें किसी से भी साझा नहीं करना चाहिए। ये सपने भले ही शुभ प्रतीत हों, लेकिन अगर इन्हें गलत समय या गलत व्यक्ति से साझा किया जाए, तो उसका लाभ खत्म हो सकता है और उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार कुछ सपने बेहद शुभ संकेत होते हैं, लेकिन उन्हें दूसरों से बताना लाभ को हानि में बदल सकता है। आइए जानते हैं ऐसे ही 4 सपनों के बारे में जिन्हें भूलकर भी किसी से नहीं कहना चाहिए। 1. भगवान के दर्शन सपने में भगवान का दर्शन होना बड़ी कृपा और शुभ संकेत माना जाता है, जो यह बताता है कि आपकी परेशानियां जल्द ही खत्म होने वाली हैं। लेकिन अगर इस पवित्र सपने को आप किसी के साथ साझा कर देते हैं, तो उसकी आध्यात्मिक शक्ति कमजोर पड़ सकती है और आपकी समस्याओं का समाधान देर से हो सकता है। इसलिए ऐसे सपनों को अपने तक ही रखना ही बेहतर होता है। 2. देवी-देवताओं का दर्शन अगर सपने में आप खुद को किसी राजा या उच्च पदाधिकारी के रूप में देखते हैं, तो यह आपके जीवन में बड़ी जिम्मेदारियों और सफलता के आने का संकेत है। यह सपना आपकी बढ़ती आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक भी है। लेकिन यदि आपने इस सपने को दूसरों के साथ साझा कर दिया, तो संभव है कि कोई आपकी योजनाओं में बाधा डालने की कोशिश करे या आपकी महत्वाकांक्षाओं को कमतर दिखाने का प्रयास करे। इसलिए ऐसे सपनों को गुप्त रखना ही बेहतर होता है। 3. फूलों से भरा बगीचा सपने (Dream Science) में रंगीन फूलों से भरा हुआ बगीचा दिखना बहुत शुभ माना जाता है, यह आपके जीवन में आने वाली खुशियों और अच्छे समाचारों का संकेत देता है। परंतु यदि आप इस सपने को दूसरों के साथ साझा कर देते हैं, तो वह आनंद या शुभ परिणाम किसी कारणवश रुक सकता है या उसकी दिशा बदल सकती है। इसलिए इस प्रकार के सपनों को भी गुप्त रखना बेहतर होता है। 4. चांदी से भरा कलश अगर आपको सपने में चांदी से भरे कलश दिखाई दें, तो यह आपके जीवन में धन, सुख और समृद्धि के आने का संकेत होता है। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार जब तक यह सपना पूरी तरह साकार न हो जाए, तब तक इसे किसी से बताना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि इससे इसका शुभ फल प्रभावित हो सकता है। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय ऐसे सपनों का जिक्र क्यों नहीं करना चाहिए? शास्त्रों के अनुसार कुछ सपनों में छुपी ऊर्जा बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण होती है। यदि आप उन्हें किसी के साथ साझा कर देते हैं, तो उस ऊर्जा की ताकत कम हो सकती है। कभी-कभी सामने वाला व्यक्ति आपकी बातों को हल्के में लेकर उनका मजाक भी बना सकता है, जिससे उन शुभ संकेतों का प्रभाव नकारात्मक हो सकता है। इसलिए, जब तक वह सपना पूरा न हो जाए, तब तक चुप रहना और उसे गुप्त रखना ही बुद्धिमानी होती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Dream Science #dreams #dreaminterpretation #spiritual #psychology #badluck #secret #lifeadvice #positivity #wellbeing #mindpower

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career after 10th,

दसवीं कक्षा के बाद सही स्ट्रीम चुनने से पहले ध्यान में रखें इन जरूरी बातों को

दसवीं कक्षा हर छात्र के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि इसके बाद उनका भविष्य तय होता है। दसवीं के बाद सही स्ट्रीम (Stream) का चुनाव करना बहुत जरूरी तो है, लेकिन यह कन्फ्यूजिंग भी हो सकता है। सही स्ट्रीम (Stream) से आगे की पढ़ाई और केरियर की मार्ग निर्धारित होता है। अगर आप सही स्ट्रीम का चुनाव (stream selection) करते हैं ,तो न केवल आपको अपनी पसंद के सब्जेक्ट्स पढ़ने में मजा आएगा बल्कि आप जीवन में अपने गोल्स को भी पा सकते हैं। छात्रों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आपको इसके लिए अपने टीचर्स, प्रियजनों और एक्सपर्ट्स की राय लें। इससे भी सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। जानें दसवीं के बाद स्ट्रीम का चयन कैसे करना चाहिए (How to choose stream after 10th)? दसवीं के बाद स्ट्रीम का चयन कैसे करना चाहिए (How to choose stream after 10th)? अपने लिए स्ट्रीम का चुनाव (stream selection) करते हुए आपको पहले अपनी रुचियों के बारे में पता होना चाहिए बल्कि इसके लिए रिसर्च और सही मार्गदर्शन भी जरूरी है। आइए जानें कि दसवीं के बाद स्ट्रीम का चयन कैसे करना चाहिए (How to choose stream after 10th)? खुद की रुचियों के बारे में जानें दसवीं के बाद स्ट्रीम (Stream) का चयन करे हुए सबसे पहले आपको पता होना चाहिए कि आपका दिलचस्पी किन सब्जेक्ट्स में हैं? अपनी हॉबीज के बारे में भी आपको पता होना चाहिए। इसके साथ ही अपने स्ट्रेंथ और वीकनेस को समझने के लिए विभिन्न विषयों में अपने मार्क्स को भी एनालाइज करें। भविष्य में आप क्या करना चाहते  हैं, इसके बारे में भी पहले ही सोच लें। इससे आपको दसवीं के बाद स्ट्रीम (Stream) के चुनाव में मदद मिलेगी।  रिसर्च करें विभिन्न स्ट्रीम्स (Stream) के बारे में भी आपको पता होना चाहिए। इनके बारे में पहले ही रिसर्च कर लें। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स आदि के सब्जेक्ट्स के बारे में भी थोड़ा जान लें। आपको यह भी पता होना चाहिए कि हर स्ट्रीम (Stream) में करियर ऑप्शंस क्या हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी सोच-विचार कर लें कि कौन सी स्ट्रीम के सब्जेक्ट आपके भविष्य और इंटरस्ट के साथ मैच कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक मार्गदर्शन दसवीं के बाद स्ट्रीम (Stream) का चयन करते हुए टीचर्स या काउंसलर का मार्गदर्शन आप ले सकते हैं। अपनी फॅमिली और दोस्तों से भी बात करें। इससे आपको सही करियर चुनने में मदद मिल सकती है। स्ट्रीम का चुनाव (stream selection) करते हुए आपको किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में आपको इसके बारे में जानकारी मिल गयी होगी। इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी प्रेशर में आ कर विषयों का चुनाव न करें। इस बात को ध्यान रख कर कभी चुनाव न करें कि कौन सी स्ट्रीम (Stream) लोकप्रिय है और किस स्ट्रीम को आपके दोस्त चुन रहे हैं। केवल खुद को और आपकी दिलचस्पियों पर फोकस करें। जब भी आप स्ट्रीम (Stream) चुनते हैं, तो उसके बाद अपनी पढ़ाई का प्लान करें और जीवन में सफलता प्राप्त करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi stream selection #careerafter10th #streamselection #studentguide #educationtips #careerplanning #futuregoals #careerpath #10thclassstudents

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Hepatitis A Kerala

केरल में हेपेटाइटिस ए का प्रकोप, जानिए इसके लक्षण और बचाव के बारे में

हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) का कारण है हेपेटाइटिस ए वायरस, जो बहुत अधिक संक्रामक होता है। यह वो वायरस है जिसके कारण लिवर में समस्या हो सकती है और लिवर का कार्य प्रभावित होता है। ऐसा माना गया है कि यह बीमारी गंदे पानी या खाने से होती है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ कर भी यह समस्या हो सकती है। केरल में हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A in Kerala) के केसेस लगातार बढ़ रहे हैं, जो एक चिंता का विषय है। अब तक इसके 3000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 16 मौते भी हो चुकि हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इससे बचाव के लिए साफ पानी पीने और सही आहार का सेवन करना जरूरी है। आइए जानें केरल में हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A in Kerala) के बारे में विस्तार से। केरल में हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A in Kerala): पाएं जानकारी जैसा की पहले ही बताया गया है कि केरल में हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A in Kerala) के मामले बढ़ते जा रहे हैं खासतौर पर केरल के एर्नाकुलम, मलप्पुरम, कोझिकोड और त्रिशूर जिलों में। इससे पब्लिक हेल्थ के लिए चिंता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। मानसून के आते ही बढ़ते इन मामलों में हेल्थ एक्सपर्ट्स ने भी और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। अप्रैल तक इसके 3,227 मामले आये थे जबकि सिर्फ मई के महीने में 50 से अधिक केसेस आ चुके हैं। एक्सपर्ट्स ने इसका कारण दूषित पानी और खाने को माना है। हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) से बचाव से पहले इसके लक्षणों के बारे में जान लेते हैं।  हेपेटाइटिस ए के लक्षण (Hepatitis A Symptoms) यू एस. सेंटर्स फॉर डिजीज (U.S. Centers for disease) के अनुसार इस रोग के लक्षण हर रोगी के लिए एक जैसे नहीं होती है। हेपेटाइटिस ए के लक्षण (Hepatitis A Symptoms) वायरस के संपर्क में आने के कुछ हफ्तों बाद नजर आ सकते हैं। हेपेटाइटिस ए के लक्षण (Hepatitis A Symptoms) इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक हेपेटाइटिस ए से बचाव  हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) से बचने का सबसे अच्छा तरीका है इसकी वैक्सीन। इनकी दो डोज लगवाना जरूरी है। अगर आप किसी ऐसी जगह पर ट्रैवल करने वाले हैं, जहां इसके फैलने की संभावना अधिक रहती है, तो ट्रेवल से दो हफ्ते पहले वैक्सीनेशन जरुरी है। हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) से बचाव के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: बाहर का खाना खाने से बचें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Hepatitis A #keralaoutbreak #hepatitisa #keralahealth #viralhepatitis #healthalert #hepatitissymptoms #diseaseprevention #keralanews #waterbornedisease

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Vice Principal Recruitment 2025

वाईस प्रिंसिपल भर्ती 2025, जाने क्या है योग्यता और कैसे करें अप्लाई

बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन (Bihar Public Service Commission) यानी बीपीएससी (BPSC) द्वारा वाईस प्रिंसिपल पोस्ट्स (Vice Principal Posts) के लिए नोटिफिकेशन जारी की गई हैं। यह रिक्रूटमेंट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट यानी आईटीआई के लिए है। अगर अप इसके लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आपको बता दें कि इसके लिए कुल 50 पोस्ट्स निकाली गई हैं। आप इसके लिए आसानी से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते है और इसके बारे में अधिक जानकारी आपको बीपीएससी (BPSC) की ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी। यह जानकारी भी आवश्यक है कि इसके लिए आवेदन 10 जून से लिए जाने शुरू हो गए हैं। आइए जानें बीपीएससी द्वारा निकाली वाईस प्रिंसिपल पोस्ट्स (Vice Principal posts by BPSC) के बारे में। बीपीएससी द्वारा निकाली वाईस प्रिंसिपल पोस्ट्स (Vice Principal posts by BPSC) अगर आप इन पोस्ट्स के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो यह भी जान लें कि इसके लिए आप 3 जुलाई तक ही अप्लाई कर सकते हैं। इसके बाद आप इसके लिए एप्लीकेशन्स नहीं भेज सकते हैं। जानिए इसके बारे में और अधिक: आयु सीमा बीपीएससी द्वारा निकाली वाईस प्रिंसिपल पोस्ट्स (Vice Principal posts by BPSC) के लिए एज लिमिट मिनिमम 22 साल निर्धारित की गई है। जनरल श्रेणी के पुरुषों के लिए इसके लिए मैक्सिमम एज 37 साल है जबकि जनरल श्रेणी की महिलाओं के लिए यह उम्र सीमा 40 साल है। एससी और इबीसी के पुरुषों और महिलाओं के लिए यह उम्र सीमा 40 साल रखी गई है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए यह एज लिमिट 42 साल है। अधिक जानकारी के लिए बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन (Bihar Public Service Commission) की ऑफिशियल वेबसाइट विजिट करें। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन  वाईस प्रिंसिपल पोस्ट्स  (Vice Principal Posts) के लिए एलिजिबल कैंडिडेट्स के लिए किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट से इंजीनियर डिग्री या इसके समान डिग्री होना जरूरी है। विशिष्ट क्वालिफिकेशन के तौर पर एमटेक डिग्री अथवा एमई या एमएस होना भी आवश्यक है। फीस  बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन (Vice Principal posts by BPSC) द्वारा वाईस प्रिंसिपल पोस्ट्स (Vice Principal Posts) के लिए अप्लाई करने के लिए जनरल कैटोगरी और बिना आरक्षण के कैंडिडेट्स के लिए फीस 750 रुपए निर्धारित की गई है। अनुसूचित जाति और जनजाति के कैंडिडेट्स, बिहार की महिलाओं और डिसेबल लोगों के लिए यह फीस केवल 200 रुपए है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक बीपीएससी (BPSC) द्वारा निकाली वाईस प्रिंसिपल पोस्ट्स (Vice Principal Posts) के लिए कैसे करें अप्लाई? नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Vice Principal posts by BPSC #viceprincipalrecruitment2025 #govtjobs2025 #educationjobs #applyonline #sarkarinaukri #jobvacancy #eligibilitycriteria #careerupdate

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IGDTUW admissions 2025

IGDTUW में एडमिशन हुई शुरू: मिल रही है 7,000 से ₹5 लाख तक की स्कॉलरशिप

अच्छे भविष्य के लिए लोग आजकल इस बात कर बहुत अधिक ध्यान देते हैं कि उन्हें कौन से कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेनी चाहिए। एक अच्छी यूनिवर्सिटी हमें बेहतरीन शिक्षा, पर्सनल डेवलप्मेंट, रोजगार के अवसर प्रदान करती है। यानी, सफलता की दिशा की तरफ ले जाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए ऑनलाइन रिसर्च की जाती है व एडमिशन टेस्ट और इंटरव्यू की तैयारी भी की जाती है। महिलाओं के लिए इससे संबंधित एक अच्छी खबर है क्योंकि इंदिरा गाँधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन (Indira Gandhi Delhi Technical University for Women) यानी आईजीडीटीयूडब्ल्यू (IGDTUW) ने इस साल के लिए पोस्ट ग्रेजुएट और अन्य प्रोग्रामों के लिए एडमिशन प्रोसेस को शुरू कर दिया है। इसमें छात्रों को स्कॉलरशिप देने का भी प्रावधान किया गया है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से। इंदिरा गाँधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन (Indira Gandhi Delhi Technical University for Women) में एडमिशन: पाएं जानकारी जैसे की पहले ही बताया गया है कि आईजीडीटीयूडब्ल्यू (IGDTUW) में इस साल के लिए एडमिशंस स्टार्ट हो चुकी हैं। अगर कोई कैंडिडेट्स इसमें इंटरस्टेड हैं तो इसमें वो किसी भी कोर्स में एडमिशन के लिए अप्लाई कर सकता है जैसे इंजीनियरिंग, साइंस, ह्यूमैनिटीज, मैनेजमेंट आदि। यह जानकारी आपके लिए बहुत जरूरी है कि इसके लिए अंतिम तिथि 12 जून है। उसके बाद आप अप्लाई नहीं कर सकते हैं। समय बहुत कम है इसलिए बिना देर किए तुरंत इसके लिए आवेदन भेजें। आप अपनी एप्लीकेशन्स को आसानी से ऑनलाइन भेज सकते हैं। आईजीडीटीयूडब्ल्यू में स्कॉलरशिप (Scholarship at IGDTUW) भी दी जा रही है। आइए जानें इसके बारे में। आईजीडीटीयूडब्ल्यू में स्कॉलरशिप (Scholarship at IGDTUW) आईजीडीटीयूडब्ल्यू में स्कॉलरशिप (Scholarship at IGDTUW) की डिटेल इस प्रकार है:  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इस युनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएशन जैसे एमबीए, एमटेक  आदि के लिए भी कैंडिडेट्स अप्लाई कर सकते हैं। अगर आप इनमें से किसी भी प्रोग्राम में एडमिशन लेना चाहते हैं तो जल्दी ही इसके लिए अप्लाई करें। इनके बारे में पूरी जानकारी आपको यूनिवर्सिटी यानी आईजीडीटीयूडब्ल्यू (IGDTUW) की ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी। इन कोर्सों के लिए कॉउंसलिंग के बारे में अधिक इनफार्मेशन अभी नहीं दी गयी है। उम्मीद है की जल्दी ही इनके बारे में जानकारी दी जाएगी। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Scholarship at IGDTUW #igdtuw #admissions2025 #scholarship #engineeringcollege #delhiuniversity #girlseducation #higherstudies

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