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रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

रशियन महिला केसेनिया ने भारत के 6 बड़े मिथकों को तोड़ा: कार में सैंडविच खाते हुए वायरल वीडियो ने मचाया धूम!

भारतीय संस्कृति रियल रिव्यू गुरुग्राम: सोशल मीडिया पर इन दिनों रशियन महिला केसेनिया शकीरजियानोवा (@vegkseniia) का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। केसेनिया पिछले तीन साल से भारत में रह रही हैं और गुरुग्राम में बस चुकी हैं। कार में सैंडविच खाते हुए रिकॉर्ड किए गए इस कैजुअल वीडियो में उन्होंने भारत को लेकर विदेशियों की छह बड़ी गलतफहमियों को बेबाकी से खारिज किया है। वीडियो की शुरुआत में केसेनिया मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं भारत में लगभग तीन साल से रह रही हूं, और आज कुछ मिथकों को क्लियर करती हूं।” उनका यह ईमानदार और सहज अंदाज लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। केसेनिया ने तोड़े ये 6 मिथक: केसेनिया का मुख्य संदेश है कि भारत ने उन्हें नहीं बदला, बल्कि भारत को लेकर बनी रूढ़िवादी सोच को उन्होंने चुनौती दी है। वे कहती हैं कि भारत का जीवन विदेशियों की कल्पना से कहीं ज्यादा आधुनिक, विविध और सामान्य है। इस वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं कमाल की हैं। एक यूजर ने लिखा, “आपकी ईमानदारी के लिए थैंक यू, भारत की सच्ची इमेज दिखाने के लिए!” दूसरे ने कहा, “ये वीडियो हर विदेशी को दिखाना चाहिए।” कई लोगों ने इसे भारत की पॉजिटिव इमेज बनाने वाला बताया। केसेनिया का यह वीडियो न सिर्फ मनोरंजक है, बल्कि यह दुनिया को भारत की असली तस्वीर दिखा रहा है। अगर आप भी विदेशी नजर से भारत का रियल रिव्यू देखना चाहते हैं, तो इंस्टाग्राम पर @vegkseniia जरूर चेक करें! रशियन महिला केसेनिया का भारत प्रेम: पहले वीडियो ने भी मचाया था तहलका, हैदराबाद को बताया दुबई से बेहतर! केसेनिया शकीरजियानोवा हैदराबाद वीडियो | रशियन टूरिस्ट इंडिया रिव्यू | भारत मॉडर्न सिटी रशियन नजर केसेनिया शकीरजियानोवा सिर्फ मिथक तोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इससे पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने हैदराबाद की हाइटेक सिटी को देखकर कहा था, “हबीबी, ये दुबई नहीं, हैदराबाद है!” सनसेट व्यू और मॉडर्न आर्किटेक्चर देखकर वे हैरान रह गई थीं। यह वीडियो भी लाखों लोगों ने देखा और भारतीयों ने गर्व महसूस किया। केसेनिया जैसे विदेशी भारत की तेज विकास और विविधता की तारीफ कर दुनिया को नई नजर से देखने पर मजबूर कर रहे हैं।

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अरावली पहाड़ियां है खतरे में

अरावली पहाड़ियां: सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले से पर्यावरण पर खतरा, विरोध प्रदर्शन तेज

जय राष्ट्र न्यूज़, 24 दिसंबर 2025 – अरावली पहाड़ियां, जो दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक हैं, इन दिनों एक बड़े पर्यावरणीय और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने अरावली की परिभाषा को बदल दिया है, जिससे खनन और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अरावली की सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी गई है। जय राष्ट्र न्यूज़ आपको इस मुद्दे की पूरी जानकारी दे रहा है। अरावली पहाड़ियों का महत्व और वर्तमान स्थिति अरावली पहाड़ियां राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में फैली हुई हैं, जो लगभग 692 किलोमीटर लंबी हैं। ये पहाड़ियां न केवल जैव विविधता का खजाना हैं, बल्कि उत्तरी भारत में रेगिस्तानी फैलाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अरावली जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करती हैं और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण को नियंत्रित रखती हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अवैध खनन और निर्माण ने इन पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें अरावली की परिभाषा को एक समान बनाया गया। अब केवल 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियां ही ‘अरावली’ मानी जाएंगी और उन्हें कानूनी संरक्षण मिलेगा। इससे पहले, कोई स्पष्ट ऊंचाई सीमा नहीं थी, जिससे संरक्षण में असमंजस था। सुप्रीम कोर्ट का ‘100 मीटर नियम’ क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और रेंज की एकरूप परिभाषा तय की है। इस नियम के तहत: पर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अरावली में खनन पर कोई छूट नहीं दी गई है, लेकिन एनसीआर के निकटवर्ती इलाकों में कुछ हिस्सों पर प्रभाव पड़ सकता है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने भी सफाई दी है कि कोई अध्ययन यह नहीं कहता कि केवल 9% अरावली 100 मीटर से ऊपर है। कुल 2,43,000 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 1,23,000 वर्ग किलोमीटर स्थायी रूप से संरक्षित हैं, जिसमें शहर जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस फैसले के बाद उत्तरी भारत में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पर्यावरण के लिए खतरा मान रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अरावली की परिभाषा बदलकर खनन को बढ़ावा दे रही है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताया है। सोशल मीडिया पर #SaveAravalli हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, यह फैसला खनन से परे भी प्रभाव डाल सकता है, जैसे कि निर्माण और रियल एस्टेट पर। फ्रंटलाइन मैगजीन ने इसे ‘पारिस्थितिक अंधापन’ करार दिया है, क्योंकि इससे जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। पर्यावरणीय प्रभाव और भविष्य की चिंताएं पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि 100 मीटर नियम से अरावली के निचले हिस्सों में खनन बढ़ सकता है, जिससे मिट्टी का कटाव, जल संकट और वन्यजीवों का विनाश हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही प्रदूषण की समस्या है, और अरावली का क्षरण इसे और गंभीर बना सकता है। जय राष्ट्र न्यूज़ का मानना है कि अरावली को बचाना राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार को संरक्षण नीतियों को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। निष्कर्ष अरावली पहाड़ियां भारत की प्राकृतिक धरोहर हैं, और इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक ओर स्पष्टता लाता है, लेकिन दूसरी ओर पर्यावरणीय जोखिम बढ़ाता है। जय राष्ट्र न्यूज़ आपको ऐसी महत्वपूर्ण खबरों से अपडेट रखेगा। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें।

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ज्योति याराजी ने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीता: खाली स्टेडियम में रचा इतिहास

जय राष्ट्र न्यूज़, 23 दिसंबर 2025: भारतीय एथलेटिक्स की स्टार हर्डलर ज्योति याराजी ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। दक्षिण कोरिया के गुमी शहर में 29 मई 2025 को आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ज्योति याराजी ने महिलाओं की 100 मीटर हर्डल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया चैंपियनशिप रिकॉर्ड बनाया। ज्योति याराजी लेटेस्ट न्यूज़ में यह उपलब्धि सुर्खियां बटोर रही है, जहां उन्होंने 12.96 सेकंड का समय निकालकर अपना लगातार दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। ज्योति याराजी की जीत का भावुक पल: बारिश और सन्नाटे में तिरंगा फहराया एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 के दौरान भारी बारिश के कारण स्टेडियम लगभग खाली था। न कोई जयकारा, न तालियों की गूंज – सिर्फ ज्योति याराजी का जज्बा और देशभक्ति। स्वर्ण पदक जीतने के बाद ज्योति स्टेडियम में ही भावुक होकर बैठ गईं, और उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ज्योति याराजी समाचार में यह बताया जा रहा है कि उन्होंने न सिर्फ पदक जीता, बल्कि एशियाई स्तर पर भारत की धाक जमाई। ज्योति याराजी की यह जीत भारतीय एथलीट्स के लिए प्रेरणा स्रोत बनी है। ज्योति याराजी का सफर: राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक से एशियाई चैंपियन तक ज्योति याराजी भारत की सबसे तेज महिला हर्डलर हैं, जो 100 मीटर हर्डल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं। एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में उनकी यह जीत भारत के लिए गौरव का क्षण है, जहां भारतीय टीम ने कुल 3 स्वर्ण पदक जीते। ज्योति याराजी न्यूज़ इन हिंदी में उनके संघर्ष और सफलता की कहानी लाखों युवाओं को मोटिवेट कर रही है। ज्योति याराजी की यह उपलब्धि ओलंपिक 2028 की तैयारी में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ज्योति याराजी लेटेस्ट अपडेट के लिए जय राष्ट्र न्यूज़ से जुड़े रहें। अधिक जानकारी के लिए कमेंट करें या शेयर करें।

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जय राष्ट्र न्यूज़ स्पेशल: ‘धुरंधर’ का 26/11 सीन – रोंगटे खड़े कर देने वाला सच, सर्वाइवर का दिल दहला!

रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म धुरंधर (5 दिसंबर 2025 को रिलीज) ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। 400 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी इस धुरंधर स्पाई थ्रिलर के एक सीन ने पूरे देश को झकझोर दिया है – वो रेड स्क्रीन वाला 26/11 मुंबई आतंकी हमले का दृश्य! फिल्म में स्क्रीन खून-लाल हो जाती है और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों व पाकिस्तानी हैंडलर्स की असली इंटरसेप्टेड वॉइस रिकॉर्डिंग्स बजने लगती हैं। हैंडलर्स ठंडे खून से निर्देश देते हैं – बंधकों को बेरहमी से मारो, ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाओ। ये वो कड़वा सच है जो 2008 की उस भयानक रात को फिर से जिंदा कर देता है। सिनेमाघरों में सन्नाटा छा जाता है, दर्शक गुस्से, दर्द और बेबसी से भर जाते हैं। ताज होटल सर्वाइवर रजिता बग्गा का इमोशनल रिएक्शन: 26/11 की रात ताज होटल में अपने पति अजय बग्गा के साथ फंसी रहीं रजिता (श्री श्री यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट) ने एक्स पर लिखा, “मेरे लिए सबसे बोने-चिलिंग सीन रेड स्क्रीन वाला था। 17 साल बीत गए, लेकिन हैंडलर्स की आवाजें सुनकर शरीर में सिहरन दौड़ गई। कितना क्रूर, अमानवीय और घिनौना! धुरंधर टीम को सलाम, जिन्होंने 2-3 मिनट में नई पीढ़ी को 26/11 का पूरा सच बता दिया। रणवीर का वो लुक पूरी जनरेशन को सताएगा।” निर्देशक आदित्य धर ने जवाब दिया, “आपके शब्द याद दिलाते हैं कि ये कहानी क्यों बतानी जरूरी थी। ये सीन सच्चाई दिखाने के लिए बनाया गया। अगर ये निशान छोड़ता है, तो एकजुट होकर ऐसी अंधेरी रात कभी न लौटे। सर्वाइव करने, बोलने के लिए धन्यवाद।” अर्जुन रामपाल व टीम का खुलासा: अर्जुन (मेजर इकबाल) ने इसे करियर का सबसे मुश्किल सीन बताया। सेट पर 45 मिनट की रियल रिकॉर्डिंग सुनकर रणवीर, अक्षय खन्ना, सबकी आंखें नम हो गईं। रणवीर का किरदार हमजा (RAW एजेंट) पाकिस्तान में घुसा है, 26/11 देखकर अंदर से टूट जाता है – आंखों में दर्द, गुस्सा, बेबसी। एक्टर दानिश पंडोर बोले, “ये सीन आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर देता है – अगर आप वहां होते तो?” क्यों खास है ये सीन? कंधार हाईजैक, संसद हमला से प्रेरित फिल्म में 26/11 को रियल ऑडियो से जोड़ा गया। दर्शक X पर लिख रहे – “रोंगटे खड़े हो गए”, “गुस्सा आ गया”, “नई जनरेशन को याद दिलाया”। कुछ नेगेटिव कैंपेन भी चले, लेकिन सच ने जीत ली। जय राष्ट्र न्यूज़ अपील: ऐसी फिल्में राष्ट्रहित में हैं। धुरंधर देखें, शेयर करें। भारत माता की जय!

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बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद

बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद: पटना कार्यक्रम में मुस्लिम महिला डॉक्टर का नकाब हटाने पर भारी बवाल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पटना में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने नव नियुक्त आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब (नकाब) खींच दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है और महिलाओं की गरिमा तथा धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नीतीश कुमार हिजाब घटना के विवरण यह घटना 15 दिसंबर 2025 को पटना के मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में हुई, जहां 1,283 से अधिक आयुष डॉक्टरों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे। मंच पर डॉक्टर नुसरत परवीन नियुक्ति पत्र लेने आईं, जो चेहरे पर नकाब पहने हुई थीं। वीडियो में दिख रहा है कि नीतीश कुमार ने पहले पत्र सौंपा, फिर नकाब की ओर इशारा करते हुए “ये क्या है?” कहा और खुद इसे नीचे खींच दिया। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ अधिकारी हंसते नजर आए। डॉक्टर नुसरत इस घटना से इतनी आहत हुईं कि उन्होंने बिहार छोड़ दिया और कोलकाता अपने परिवार के पास चली गईं। उनके परिवार ने कहा कि वे अब सरकारी नौकरी जॉइन नहीं करेंगी। यह घटना महिलाओं की निजता, सहमति और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बिहार मुख्यमंत्री विवाद विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने वीडियो शेयर कर पूछा, “नीतीश जी को क्या हो गया? उनकी मानसिक स्थिति अब दयनीय हो गई है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो गए?” कांग्रेस ने इसे “घृणित कृत्य” बताते हुए नीतीश का तत्काल इस्तीफा मांगा। कश्मीर की पार्टियों ने भी निंदा की। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि नीतीश को पद छोड़ देना चाहिए। उमर अब्दुल्लाह ने इसे गलत बताया। पूर्व अभिनेत्री जायरा वसीम ने बिना शर्त माफी की मांग की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे महिला की गरिमा पर हमला बताया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इसे “शर्मनाक” कहा। जावेद अख्तर ने भी नीतीश से माफी मांगने को कहा। नीतीश की पार्टी जदयू और सहयोगी भाजपा का बचाव: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने कहा कि नीतीश ने “पिता जैसा स्नेह” दिखाया, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय की बेटी की सफलता दुनिया देखे। सोशल मीडिया बैकलैश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश है। कई सेलेब्रिटी और एक्टिविस्ट्स ने इसे महिलाओं की गरिमा पर हमला बताया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान और मानवाधिकार संगठनों ने निंदा की। कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन का राजनीतिक संदर्भ नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से अधिकतर बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा के प्रमुख सहयोगी हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत हुई। बिहार में 18% मुस्लिम आबादी है, इसलिए ऐसे मुद्दे संवेदनशील हैं। भाजपा का हिजाब पर पहले से विवादित रुख रहा है, जैसे कर्नाटक में बैन। फिलहाल नीतीश कुमार ने कोई माफी या बयान नहीं दिया है। जांच और प्रतिक्रियाएं जारी हैं। यह नीतीश कुमार मुस्लिम महिला डॉक्टर नकाब घटना भारत में धार्मिक पोशाक और महिलाओं के अधिकारों पर चल रही बहस को और गहरा कर रही है। जय राष्ट्र न्यूज पर इस विकासशील कहानी और अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए बने रहें।

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कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर: जासूसी की आशंका, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

कर्नाटक तट पर सीगल पक्षी पर मिला चीनी GPS ट्रैकर भारत में सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। कर्नाटक के कारवार तट पर एक सीगल पक्षी पकड़ा गया, जिसकी पीठ पर हाई-टेक चीनी GPS ट्रैकर लगा हुआ मिला। यह घटना दिसंबर 2025 में सामने आई है और इससे जासूसी की आशंका गहरा गई है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। चीनी GPS ट्रैकर वाली सीगल की घटना के विवरण यह सीगल पक्षी कारवार क्षेत्र में पकड़ा गया। पक्षी पर लगा ट्रैकर अत्याधुनिक तकनीक वाला है, जो चीन से जुड़ा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ट्रैकर पक्षियों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों की निगरानी या डेटा संग्रह के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब भारत में चीनी जासूसी उपकरणों की खबरें आई हैं, लेकिन पक्षी पर ट्रैकर मिलना एक नया और चौंकाने वाला मामला है।यह घटना भारत-चीन सीमा तनाव और समुद्री क्षेत्रों में निगरानी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और खुफिया एजेंसियां पहले से ही दक्षिण चीन सागर और भारतीय महासागर में चीनी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया और जांच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने तुरंत इस ट्रैकर को जब्त कर लिया है और इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ यह पता लगा रहे हैं कि यह ट्रैकर कितने समय से सक्रिय था और क्या कोई संवेदनशील डेटा भेजा गया। केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित मंत्रालयों को अलर्ट जारी किया गया है।पिछले कुछ वर्षों में भारत में चीनी ड्रोनों और जासूसी उपकरणों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। यह घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। सामाजिक मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस खबर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूजर्स ने इसे चीनी जासूसी का सबूत बताया, जबकि कुछ ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। विपक्षी दलों ने सरकार से संसद में इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भारत-चीन संबंधों का संदर्भ यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारत और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध सामान्य की दिशा में हैं, लेकिन सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।कर्नाटक तट भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां कई आधार हैं। इस घटना से समुद्री सुरक्षा पर फिर से बहस छिड़ गई है।फिलहाल, जांच जारी है और जल्द ही अधिक जानकारी सामने आएगी। जय राष्ट्र न्यूज इस घटना पर नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स लाता रहेगा।यह चीनी GPS ट्रैकर सीगल पक्षी मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें।

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रहमान डकैत: कराची के ल्यारी इलाके का क्रूर अपराधी साम्राज्य

परिचयसर्दार अब्दुल रहमान बलोच, जिन्हें दुनिया रहमान डकैत के नाम से जानती है, पाकिस्तान के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में से एक थे। 1975 में कराची के ल्यारी इलाके में जन्मे रहमान ने अपराध की दुनिया में कम उम्र से ही कदम रखा और जल्द ही ल्यारी को अपने खौफनाक साम्राज्य का केंद्र बना लिया। ल्यारी, जो कराची का एक घनी आबादी वाला बलोच बहुल इलाका है, गरीबी, बेरोजगारी और राज्य की लापरवाही के कारण अपराध का गढ़ बन चुका था। रहमान ने यहां के गैंग वॉर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जहां हत्याएं, जबरन वसूली और ड्रग तस्करी आम बात हो गई। उनकी कहानी न केवल हिंसा की है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और जनता के बीच एक छवि बनाने की भी है। हाल ही में बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए उनके किरदार ने दुनिया भर में उनकी क्रूरता को फिर से चर्चा में ला दिया है। View this post on Instagram A post shared by Ranveer Singh (@ranveersingh) प्रारंभिक जीवन और अपराध में प्रवेशरहमान का जन्म 1975 में ल्यारी में एक अपराधी परिवार में हुआ। उनके पिता अबू मुहम्मद (जिन्हें दादल के नाम से भी जाना जाता था) और चाचा शेरू 1964 से ड्रग तस्करी में लिप्त थे। परिवार की इस पृष्ठभूमि ने रहमान को बचपन से ही अपराध की दुनिया से जोड़ दिया। मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली हिंसक घटना को अंजाम दिया, जब उन्होंने किसी व्यक्ति को चाकू मार दिया। किशोरावस्था में ही वे ड्रग्स बेचने लगे और ल्यारी की गलियों में अपनी पहचान बनाने लगे। उनके पिता की हत्या के बाद परिवार का बदला लेने की आग ने रहमान को और उग्र बना दिया। 1990 के दशक में अरशद पप्पू के पिता द्वारा उनके पिता की हत्या और कब्र की बेइज्जती ने एक लंबे गैंग वॉर को जन्म दिया, जो वर्षों तक चला। 19 साल की उम्र में रहमान ने एक ऐसी घटना की, जो उनकी क्रूरता का प्रतीक बन गई—उन्होंने अपनी मां खदीजा बीबी को गला घोंटकर मार डाला। कथित तौर पर, उनकी मां का किसी अन्य गैंगस्टर इकबाल से संबंध था, जिसने उनके पिता की हत्या की थी। इस घटना के बाद रहमान ने अपनी मां का शव पंखे से लटका दिया, जो उनकी बेरहम छवि को अमर कर गई। गैंग लीडर के रूप में उदय1990 के अंत में रहमान हाजी लालू के गैंग में शामिल हुए, जो ल्यारी का प्रमुख ड्रग लॉर्ड था। 2001 में लालू की गिरफ्तारी के बाद रहमान ने गैंग की कमान संभाली। उन्होंने अपने चचेरे भाई उजैर बलोच और सहयोगी बाबा लाडला के साथ मिलकर ल्यारी को अपना किला बना लिया। 2001 से 2009 तक का दौर रहमान के साम्राज्य का स्वर्णिम काल था। वे जबरन वसूली, अपहरण, ड्रग तस्करी, अवैध हथियारों की बिक्री और हत्या जैसे अपराधों में लिप्त रहे। रहमान ने ‘पीपुल्स अमन कमिटी’ (पीएसी) नामक संगठन की स्थापना की, जो सतह पर शांति का प्रतीक था, लेकिन वास्तव में उनका अपराधी साम्राज्य था। वे ल्यारी में एक फ्यूडल लॉर्ड की तरह शासन करते थे—राजनीतिक संरक्षण के साथ। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से उनके गहरे संबंध थे। कथित तौर पर, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की जान कई बार बचाई, खासकर 2007 के हमलों के दौरान। जब बेनजीर का काफिला क्लिफ्टन में विस्फोटों से घिर गया, तो रहमान के आदमियों ने उन्हें सुरक्षित निकाला। बदले में, पीपीपी ने उन्हें राजनीतिक छत्रछाया दी। उनकी क्रूरता की मिसालें कांपने वाली हैं। गैंग वॉर के दौरान वे दुश्मनों के सिर काटकर फुटबॉल की तरह खेलते थे। अरशद पप्पू के साथ उनके संघर्ष में सैकड़ों मौतें हुईं, जिनमें सिर काटना, कब्रें खोदना और सार्वजनिक हिंसा शामिल थी। 2012 के ल्यारी गैंग वॉर में 800 से अधिक मौतें हुईं, जो रहमान के दौर की देन थीं। राजनीतिक संबंध और जनता की छविरहमान केवल अपराधी नहीं थे; वे एक चतुर रणनीतिकार भी थे। वे खुद को ‘सर्दार अब्दुल रहमान बलोच’ कहलवाते थे, जो उनकी बलोच पहचान को मजबूत करता था। ल्यारी में वे रोबिन हुड की तरह देखे जाते थे—गरीबों की मदद करते, लेकिन बदले में वफादारी मांगते। उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता दर्शाता है। हालांकि, पाकिस्तानी पुलिस के अनुसार, वे केवल ल्यारी तक सीमित थे और शहर के अन्य हिस्सों में उतने प्रभावशाली नहीं थे। उनके राजनीतिक संबंधों ने उन्हें लंबे समय तक बचाए रखा। बेनजीर भुट्टो के अलावा, वे अन्य पीपीपी नेताओं से जुड़े थे। लेकिन यह संरक्षण उनके पतन का कारण भी बना। मौत और विरासत9 अगस्त 2009 को कराची पुलिस के साथ मुठभेड़ में रहमान की मौत हो गई। यह ऑपरेशन कराची के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसएसपी चौधरी असलम खान के नेतृत्व में किया गया था, जो पाकिस्तान के ‘सुपर कॉप’ के रूप में जाने जाते थे। पुलिस का दावा था कि यह एक वैध गोलीबारी थी, जिसमें रहमान और उनके दो सहयोगियों को मार गिराया गया। हालांकि, कई विवादास्पद रिपोर्ट्स में इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया गया, क्योंकि रहमान को करीब से गोली मारी गई थी। पूर्व गृह मंत्री जुल्फिकार मिर्जा ने दावा किया कि उन्होंने खुद रहमान को मारा था, लेकिन बाद में पछतावा जताया। कुछ स्रोतों के अनुसार, रहमान कथित रूप से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को हथियार बेचने में लिप्त थे, जिसके कारण उनकी हत्या एक सौदे के खराब होने का नतीजा हो सकती है। हालांकि, भारतीय जासूसों के शामिल होने का कोई पुष्ट साक्ष्य नहीं मिला। फिल्म ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह द्वारा निभाए गए भारतीय जासूस ‘हामजा’ के किरदार ने काल्पनिक रूप से रहमान के गिरोह में घुसकर उनकी कमजोरी उजागर की और अप्रत्यक्ष रूप से उनके पतन में भूमिका निभाई, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी तरह काल्पनिक है। रहमान की मौत के बाद उजैर बलोच ने कमान संभाली, लेकिन 2016 में उनकी गिरफ्तारी के साथ पीएसी कमजोर पड़ गया। रहमान की विरासत ल्यारी के गैंग वॉर और अपराध संस्कृति में बसी है, जो आज भी पाकिस्तान की शहरी समस्याओं को दर्शाती है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया है, जो उनकी क्रूरता को स्क्रीन पर जीवंत करता है। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया (पहले वीकेंड में… Read More

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RSS के तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस के जयंती पर अमित शाह ने किया नमन

आज RSS के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस की जयंती है इस अवसर पर अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कोटि-कोटि नमन किया। गृह मंत्री अमित शाह सोशल मीडिया एक्स पर उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बालासाहब के अमूल्य योगदान को किया याद केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आधिकारिक एक्स हेंडल पर लिखा, ‘ संघ के तृतीय सरसंघचालक, सामाजिक समरसता के प्रतीक बालासाहब देवरस जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।’ उन्होंने बालासाहब के योगदानों को याद करते हुए आगे लिखा कि संघ की शुरुआत से लेकर उसे एक विशाल संगठन बनाने और देशभर में विस्तार देने में बालासाहब देवरस जी का अमूल्य योगदान रहा। उन्होंने आपातकाल का डटकर मुकाबला किया। वो युवाओं को चरित्र निर्माण और राष्ट्र प्रथम के लिए प्रेरित करते रहे है। अमित शाह ने आगे कहा कि सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करने वाले बालासाहब जी का स्पष्ट मानना था कि यदि दुनिया में अस्पृश्यता पाप नहीं है, तो फिर कुछ भी पाप नहीं है। देश के राष्ट्रीय-सामाजिक जीवन में वे सदैव एक दीपस्तंभ के समान प्रकाशमान रहेंगे। कौन है बालासाहब देवरस? बालासाहब देवरस ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संगठन के प्रमुख श्रीगुरू के स्वर्गवास के बाद सरसंघचालक के दायित्व को ग्रहण किया। इस पद पर नियुक्ति होने के बाद वो संघठन के तीसरे प्रमुख के तौर पर सामने आए। उन्होंने 1973 से 1994 तक संगठन का नेतृत्व कर देश में उसके विस्तार को बढ़ाया. वे केवल एक विचारक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी नेता और समाजिक समरसता के प्रतीक रहे हैं। इसके अलावा, 1975 में लगे अपातकाल में जब संघ पर प्रतिबंध तो इन्होंने संघ को एक नई दिशा दी और एक विशाल सत्याग्रह चलाया। यही नहीं, उन्होंने सामाजिक भेदभाव और कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया और युवाओं को देश की सेवा के लिए प्रेरित किया।

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OMG! विक्रम भट्ट गिरफ्तार – 30 करोड़ का IVF घोटाला, पत्नी भी जेल, बॉलीवुड में भूचाल!

मुंबई/उदयपुर, 8 दिसंबर 2025: बॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को राजस्थान पुलिस ने 30 करोड़ रुपये के एक बड़े फ्रॉड केस में गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से जुड़ा एक निवेश घोटाले का है, जिसमें उदयपुर के प्रमुख डॉक्टर अजय मुर्दिया को धोखा देकर पैसे ऐंठे गए। गिरफ्तारी के बाद उदयपुर पुलिस ने दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर लिया है, और वे 9 दिसंबर तक हिरासत में रहेंगे। यह खबर बॉलीवुड सर्कल में भूचाल ला रही है, क्योंकि विक्रम भट्ट जैसी हस्ती का नाम ऐसे विवाद में जुड़ना किसी के लिए चौंकाने वाला है। IVF फ्रॉड केस का पूरा मामला: कैसे हुआ धोखा? कहानी की शुरुआत तब हुई जब डॉ. अजय मुर्दिया, इंदिरा IVF हॉस्पिटल के फाउंडर, ने विक्रम भट्ट की एक फिल्म प्रोजेक्ट में निवेश करने का फैसला किया। आरोप है कि भट्ट दंपति ने डॉ. मुर्दिया को लुभाने के लिए झूठे वादे किए और IVF टेक्नोलॉजी से जुड़े एक कथित प्रोजेक्ट में 30 करोड़ रुपये निवेश करवाए। लेकिन पैसा मिलने के बाद न तो फिल्म बनी और न ही IVF प्रोजेक्ट आगे बढ़ा। डॉ. मुर्दिया ने जब पैसे वापस मांगे, तो उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। उदयपुर पुलिस के अनुसार, यह ठगी का केस पिछले कई महीनों से चल रहा था। डॉ. मुर्दिया की शिकायत पर FIR दर्ज हुई, जिसमें विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी और छह अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने पहले ही दो अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है। लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद भट्ट दंपति को विदेश यात्रा पर रोक लगा दी गई थी, और उन्हें 8 दिसंबर तक पेश होने का आदेश दिया गया था। लेकिन वे मुंबई में छिपे हुए थे, जहां राजस्थान और मुंबई पुलिस की संयुक्त टीम ने उनकी सिस्टर-इन-लॉ के घर पर छापा मारा। बॉलीवुड कनेक्शन: विक्रम भट्ट कौन हैं? विक्रम भट्ट हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक-निर्माता हैं, जिन्होंने ‘राज़’, ‘1920’, ‘हॉन्टेड’ जैसी हिट हॉरर फिल्में बनाई हैं। वे भट्ट फैमिली के हिस्सा हैं, जिसमें मकड़ भट्ट और पूजा भट्ट जैसे नाम शामिल हैं। उनकी पत्नी श्वेतांबरी भी प्रोडक्शन से जुड़ी हुई हैं। इस गिरफ्तारी ने पूरे इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया पर #VikramBhattArrested ट्रेंड कर रहा है, और कई सितारे चुप्पी साधे हुए हैं। पुलिस की अगली कार्रवाई: क्या होगा कोर्ट में? बांद्रा कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी को उदयपुर ले जाया जाएगा, जहां आगे की पूछताछ होगी। पुलिस का दावा है कि फ्रॉड के सबूत मजबूत हैं, जिसमें बैंक ट्रांजेक्शन और कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल हैं। अगर आरोप साबित हुए, तो दोनों को लंबी सजा हो सकती है। उदयपुर SP ने कहा, “यह केस मनी लॉन्ड्रिंग और चीटिंग से जुड़ा है, हम पूरी सख्ती से जांच करेंगे।” प्रभाव: IVF इंडस्ट्री पर असर? यह मामला न केवल बॉलीवुड बल्कि IVF सेक्टर को भी प्रभावित कर सकता है। डॉ. मुर्दिया जैसे बड़े नाम का फंसना निवेशकों के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घोटाले स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को हतोत्साहित करेंगे। सोशल मीडिया पर रिएक्शन: फैंस स्तब्ध ट्विटर (X) पर यूजर्स विक्रम भट्ट की पुरानी फिल्मों के क्लिप शेयर कर रहे हैं, साथ ही सवाल उठा रहे हैं कि “क्या हॉरर फिल्मों के बाद असली हॉरर उनकी जिंदगी में आ गया?” कई मीम्स वायरल हो रहे हैं, जो इस घटना को सिनेमा से जोड़ रहे हैं। यह ब्रेकिंग न्यूज लगातार अपडेट हो रही है। अगर आपके पास कोई अतिरिक्त जानकारी है, तो कमेंट्स में शेयर करें। विक्रम भट्ट गिरफ्तार केस की लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमसे जुड़े रहें। कीवर्ड्स: विक्रम भट्ट गिरफ्तार, IVF फ्रॉड केस, 30 करोड़ ठगी, उदयपुर पुलिस, बॉलीवुड न्यूज, ब्रेकिंग न्यूज 8 दिसंबर 2025

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मेरठ में सनसनीखेज वारदात, जीजा ने साले को गोली मारकर मौत के घाट उतारा

उत्तर प्रदेश के मेरठ के सदर बाजार इलाके में गुरुवार देर रात एक सनसनीखेज वारदात हुई. यहां एक युवक ने अपने ही साले को उसकी मां के सामने गोली मार दी. 23 वर्षीय मृतक केशव सोनकर एलएलबी का छात्र था. पुलिस ने मुख्य आरोपी जीजा अंश और उसके साथी आयुष को गिरफ्तार कर लिया है. उनके पास से तमंचा और स्कूटी भी बरामद की गई है. परिवारिक विवाद बना वजह वेस्टर्न रोड निवासी राधेश्याम सोनकर एमडीए में कर्मचारी हैं. उनका बेटा केशव एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था. राधेश्याम की बेटी टीना ने जनवरी 2025 में फाजलपुर निवासी अंश से कोर्ट मैरिज की थी. परिवार इस शादी के खिलाफ था और उस समय अपहरण का केस भी दर्ज कराया गया था. करीब तीन महीने पहले टीना को परिजन घर वापस ले आए थे, जिसके बाद उसका अंश से संपर्क टूट गया. इसी बात को लेकर दोनों परिवारों में तनाव बढ़ गया था. परिजनों का आरोप है कि कुछ दिन पहले अंश और उसके साथियों ने केशव को धमकी भी दी थी. सीने में मारी गोली गुरुवार रात अंश ने फोन कर केशव को घर के बाहर बुलाया. जैसे ही वह बाहर आया, अंश अपने साथियों के साथ पहले से मौजूद था. बहस के दौरान अंश ने अचानक तमंचा निकालकर केशव के सीने में गोली मार दी. मां सोनू यह सब अपनी आंखों के सामने देख रही थीं. घायल केशव को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इलाके में तनाव और विरोध हत्या की सूचना फैलते ही माहौल गरम हो गया. शुक्रवार को परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में फाजलपुर स्थित आरोपियों के घर पहुंच गए. भीड़ ने वाहनों में तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश भी की. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया. परिजनों ने वेस्टर्न रोड पर जाम भी लगाया और आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की मांग की. पुलिस की कार्रवाई परिजनों का कहना है कि पहले भी अंश ने तमंचा दिखाकर धमकी दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. वहीं, SSP मेरठ डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि मुख्य आरोपी अंश और आयुष को गिरफ्तार कर लिया गया है. पूछताछ में अंश ने स्वीकार किया कि विवाद और गाली-गलौज के चलते उसने गोली चलाई. फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और मामले की जांच जारी है.

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