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चंदौली में 200 साल पुराने काली मंदिर को तोड़ते समय हादसा, गुंबद गिरने से मजदूर की मौत

चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 200 साल पुराने काली मंदिर को ध्वस्त करने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मंदिर का भारी गुंबद अचानक गिरने से मलबे में दबकर 45 वर्षीय मजदूर बलदेव यादव की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। मंदिर को हटाने का काम लोक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजना के तहत एक निजी ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा था। सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा था मंदिर यह मंदिर जीटी रोड के चौड़ीकरण परियोजना के निर्धारित मार्ग में आ रहा था। सड़क विस्तार का काम पिछले कई महीनों से चल रहा था। इसी परियोजना के तहत पुराने मंदिर को हटाने का निर्णय लिया गया था। अचानक गिरा मंदिर का गुंबद मंदिर के ध्वस्तीकरण के दौरान बुलडोजर की मदद से संरचना का एक हिस्सा तोड़ा जा रहा था। इसी बीच मंदिर का ऊपरी गुंबद अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से दो लोग मलबे में दब गए। बलदेव यादव की मौत, एक अन्य व्यक्ति घायल हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान 45 वर्षीय बलदेव यादव के रूप में हुई। बताया गया कि वह ध्वस्तीकरण के दौरान गाइड रोप संभाल रहे थे। हादसे में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, घटना में घायल हुए दूसरे व्यक्ति को भी बचाव दल ने मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। मंदिर को पहले ही किया गया था स्थानांतरित प्रशासन के अनुसार, पुराने मंदिर को हटाने से पहले पास में नया मंदिर बनाया गया था। पुरानी संरचना से मूर्तियों को नए मंदिर में स्थानांतरित करने के बाद प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद मंदिर समिति की सहमति से पुराने मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रशासन और पुलिस को नहीं दी गई थी पूर्व सूचना जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर का ध्वस्तीकरण शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। हादसे के बाद यह पहलू भी जांच के दायरे में आया। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद ध्वस्तीकरण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 35 फीट ऊंचे मंदिर के आसपास लगभग 20 फीट तक ही बैरिकेडिंग की गई थी। मजदूरों के हेलमेट और सुरक्षा जैकेट जैसे जरूरी उपकरण नहीं पहनने की बात भी सामने आई। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर भी सवाल रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की संरचना को चरणबद्ध तरीके से तोड़ने की योजना थी। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदार ने मशीनरी की मदद से संरचना को एक साथ गिराने की कोशिश की, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजामों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। DM ने PWD अधिकारियों को किया तलब हादसे के बाद चंदौली के जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तलब कर घटना की वजह और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी। घटना के तुरंत बाद ध्वस्तीकरण का काम भी रोक दिया गया। मृतक PWD का नियमित कर्मचारी नहीं था कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बलदेव यादव को PWD कर्मचारी बताया गया, लेकिन विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार वह विभाग के निजी ठेकेदार के साथ काम कर रहे मजदूर थे। इसलिए उन्हें PWD का नियमित कर्मचारी बताने के बजाय विभाग की परियोजना में कार्यरत मजदूर कहना अधिक सटीक है। सड़क परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा पर फिर सवाल इस हादसे ने सड़क चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा, पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं। पुराने और ऊंचे भवनों या धार्मिक संरचनाओं को गिराते समय नियंत्रित ध्वस्तीकरण प्रक्रिया, प्रशिक्षित कर्मचारियों और उचित सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। स्रोत: The Indian Express / Dainik Jagran / Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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एलन मस्क का बड़ा आरोप: भारत में Starlink की एंट्री में कौन डाल रहा है अड़ंगा? सरकार ने दिया जवाब

नई दिल्ली: SpaceX और Tesla के CEO एलन मस्क ने भारत में Starlink की कमर्शियल लॉन्चिंग में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं। मस्क ने सोशल मीडिया पर कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूहों पर Starlink की एंट्री में बाधा डालने का आरोप लगाया। बाद में उन्होंने Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी की ओर भी संकेत किया। हालांकि, मस्क ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है। दूसरी ओर, भारत सरकार ने पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि Starlink सहित सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों के लिए नियामकीय प्रक्रिया समान है। सरकार के मुताबिक, कमर्शियल सेवाएं शुरू करने से पहले जरूरी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करना अनिवार्य है। मस्क ने किस पर लगाए आरोप? एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह भारत में Starlink की लॉन्चिंग में बाधा डाल रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसा करने के पीछे टेलीकॉम बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने की मंशा हो सकती है। शुरुआत में मस्क ने किसी कारोबारी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन बाद की पोस्ट में मुकेश अंबानी को लेकर उनकी टिप्पणियों से विवाद बढ़ गया। फिलहाल, इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई सार्वजनिक ठोस सबूत सामने नहीं आया है। मुकेश अंबानी का नाम क्यों आया? Reliance Jio भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एक है। कंपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसी वजह से मस्क की टिप्पणियों को Reliance और दूसरे बड़े टेलीकॉम खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी कंपनी की बाजार में मौजूदगी या प्रतिस्पर्धी हित अपने आप में यह साबित नहीं करते कि उसने Starlink की मंजूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। सरकार ने आरोपों को किया खारिज केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार को बढ़ावा नहीं देता। सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए सभी ऑपरेटरों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। सुरक्षा मंजूरी, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य नियामकीय शर्तें पूरी होने के बाद ही कंपनियां अपनी सेवाएं व्यावसायिक रूप से शुरू कर सकती हैं। Starlink को किन मंजूरियों का इंतजार? Starlink को भारत में कुछ जरूरी लाइसेंस और अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित मंजूरियां मिल चुकी हैं। हालांकि, कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने से पहले सुरक्षा अनुपालन और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। सरकार के अनुसार, इन प्रक्रियाओं को पूरा करना लॉन्चिंग के लिए जरूरी है। ऐसे में कंपनी की सेवाएं शुरू होने की समय-सीमा अंतिम मंजूरियों पर निर्भर करती है। सैटेलाइट इंटरनेट में सुरक्षा मंजूरी क्यों जरूरी? सैटेलाइट इंटरनेट पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क से अलग तकनीक पर काम करता है। इसलिए सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा और निगरानी से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी होता है। इनमें वैधानिक निगरानी, यूजर की पहचान और डेटा से संबंधित निर्धारित आवश्यकताएं शामिल हो सकती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले इस क्षेत्र में सरकार इन शर्तों को पूरा करने पर जोर देती है। Starlink का दावा—नियमों का पालन किया मस्क का कहना है कि Starlink ने भारत के कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन किया है और कंपनी लंबे समय से लॉन्चिंग की मंजूरी का इंतजार कर रही है। उनका तर्क है कि Starlink भारत के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकती है, जहां पारंपरिक इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना मुश्किल है। हालांकि, कंपनी की ओर से नियमों के अनुपालन का दावा और सरकार की ओर से अंतिम मंजूरियों की आवश्यकता—दोनों अलग-अलग पक्ष हैं। सरकार का पक्ष—सभी कंपनियों के लिए समान नियम सरकार ने पक्षपात के आरोपों को निराधार बताया है। उसका कहना है कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी एक निर्धारित नियामकीय प्रक्रिया के तहत की जाती है। सरकार के अनुसार, किसी ऑपरेटर को विशेष लाभ देने के बजाय सभी कंपनियों को लागू नियमों और शर्तों के आधार पर मंजूरी दी जाती है। Jio और OneWeb भी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में भारत का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार केवल Starlink तक सीमित नहीं है। Reliance Jio और Bharti Enterprises समर्थित Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। इस बाजार में अलग-अलग कंपनियों की मौजूदगी से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। हालांकि, प्रत्येक ऑपरेटर को अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए लागू लाइसेंसिंग, सुरक्षा और स्पेक्ट्रम संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। मस्क-अंबानी विवाद पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा Starlink की लॉन्चिंग में देरी को लेकर मस्क की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा कारोबारी प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मस्क की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। इसके बाद भाजपा ने विपक्ष पर इस मुद्दे के जरिए विदेशी कारोबारी के पक्ष में विमर्श खड़ा करने का आरोप लगाया। इस तरह Starlink की मंजूरी का मामला कारोबारी और नियामकीय बहस के साथ राजनीतिक चर्चा में भी शामिल हो गया। Starlink की भारत में लॉन्चिंग की तारीख अभी तय नहीं Starlink ने भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की दिशा में तैयारियां की हैं। हालांकि, अंतिम सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना कंपनी कमर्शियल सेवाएं शुरू नहीं कर सकती। फिलहाल, भारत में Starlink की व्यावसायिक लॉन्चिंग की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। आगे की स्थिति संबंधित मंजूरियों और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी। भारत के लिए क्यों अहम है सैटेलाइट ब्रॉडबैंड? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की संभावनाएं खासकर उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जहां फाइबर नेटवर्क या मोबाइल टावर पहुंचाना कठिन है। दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में यह तकनीक कनेक्टिविटी बढ़ाने का विकल्प बन सकती है। Starlink, Jio और OneWeb जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा से इस क्षेत्र का विकास प्रभावित हो सकता है। हालांकि, सेवाओं की उपलब्धता और विस्तार इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां नियामकीय शर्तें कब पूरी करती हैं और अपनी सेवाएं किस तरह शुरू करती हैं। फिलहाल आरोप और सरकार के जवाब में अंतर एलन मस्क का आरोप है कि प्रभावशाली कारोबारी हित Starlink की भारत में एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। वहीं,…

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अभिजीत दीपके का सत्ता को संदेश—“सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी”; बोले, लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें भारत के लोगों की हैं। उन्होंने कहा कि जनता लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थाओं की जवाबदेही के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। “सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी” अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के पास सत्ता और संस्थागत ताकत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और मतदान के अधिकारों से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। “लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे” दीपके ने कहा कि CJP का आंदोलन किसी एक दिन या स्थान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया, तो वे उस स्थान पर भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे जहां उन्हें रोका जाएगा। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन ने मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की कवायद बताता रहा है। दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन नहीं किया गया। इसी बीच, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई तथा आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए। मेट्रो स्टेशनों और परिवहन पर असर प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने की सूचना भी सामने आई। CJP ने इन प्रतिबंधों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से लोगों को रोकने की कोशिश बताया, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी गई। दीपके बोले—“गिरफ्तार करना है तो करिए” पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच दीपके ने कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते। उन्होंने समर्थकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहने की अपील की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगें उठाना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद कथित तौर पर विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें CJP के नेता पुलिस कार्रवाई का विरोध करते और हिरासत में लिए जाने की बात कहते दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर जारी तनाव को और बढ़ा दिया। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उपायों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजकों ने इन कदमों पर सवाल उठाते हुए इन्हें विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया है। SIR को लेकर CJP के आरोप CJP का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। संगठन ने इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि, इन आरोपों और उनसे जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का बचाव किया है। आंदोलन जारी रखने का ऐलान हिरासत और प्रतिबंधों के बावजूद CJP ने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। दीपके का कहना है कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका जाता है, तो भी संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखने के अन्य तरीके तलाशेगा। लोकतांत्रिक अधिकार बनाम कानून-व्यवस्था की बहस इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच बहस को फिर से सामने ला दिया है। एक ओर CJP अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दे रही है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन और प्रदर्शन आयोजक इन परिस्थितियों से कैसे निपटते हैं। स्रोत: Reuters, The Indian Express, Hindustan, Jansatta, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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6 सीटों पर उपचुनाव की मतगणना जारी, बंगाल से तमिलनाडु तक बड़े सियासी मुकाबलों पर नजर

नई दिल्ली: देश के चार राज्यों में हुए उपचुनावों की मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है। कुल 6 सीटों के नतीजे आने हैं, जिनमें 5 विधानसभा सीटें और असम की नागांव लोकसभा सीट शामिल है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम में हो रहे इन मुकाबलों पर राजनीतिक दलों की नजर टिकी हुई है। किन 6 सीटों पर हो रही है मतगणना? पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर, तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम, पुडुचेरी की थट्टानचावडी विधानसभा सीट तथा असम की नागांव लोकसभा सीट पर मतगणना हो रही है। इन सभी सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान हुआ था। पश्चिम बंगाल में BJP की शुरुआती बढ़त शुरुआती रुझानों में पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के भवानीपुर सीट अपने पास रखने के बाद खाली हुई थी। ऐसे में इस सीट का परिणाम राज्य की नई BJP सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेजिनगर में BJP की बढ़त पर नजर शुरुआती रुझानों के मुताबिक, रेजिनगर सीट पर BJP के उम्मीदवार ने बढ़त बनाई है। इस सीट पर मुकाबला इसलिए भी अहम है, क्योंकि आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे भी चुनाव मैदान में हैं। हालांकि, शुरुआती रुझानों को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। तमिलनाडु में विजय की TVK की बड़ी परीक्षा तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम सीटों पर अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के प्रदर्शन पर सबकी नजर है। दोनों सीटों पर TVK ने पूर्व AIADMK नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में यह भी देखा जा रहा है कि इन उम्मीदवारों का पुराना वोट बैंक नई पार्टी के पक्ष में कितना समर्थन जुटा पाता है। धारापुरम में AIADMK आगे निर्वाचन आयोग के शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, धारापुरम सीट पर EVM की दूसरे राउंड की मतगणना के बाद AIADMK की उम्मीदवार बनुमति के. आगे चल रही थीं। उन्हें 5,573 वोट मिले थे, जबकि TVK की उम्मीदवार सत्याबामा पी. को 4,981 वोट मिले। इस चरण में दोनों के बीच 592 वोटों का अंतर था। आगे की मतगणना के साथ स्थिति बदल सकती है। मदुरांतकम सीट पर भी मुकाबला अहम मदुरांतकम सीट पर TVK, AIADMK और DMK के बीच मुकाबले पर नजर बनी हुई है। इस सीट का परिणाम तमिलनाडु की राजनीति में विजय की पार्टी के प्रभाव और चुनावी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। पुडुचेरी में AINRC आगे पुडुचेरी की थट्टानचावडी विधानसभा सीट पर शुरुआती आधिकारिक रुझानों में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) के उम्मीदवार अशोक आनंद आगे चल रहे थे। निर्वाचन आयोग के पहले EVM राउंड के आंकड़ों के अनुसार, अशोक आनंद को 3,209 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के ई. विनायगम 1,222 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थे। नागांव लोकसभा सीट पर BJP की नजर असम की नागांव लोकसभा सीट पर BJP, कांग्रेस और AIUDF के बीच मुकाबला है। शुरुआती रुझानों में BJP उम्मीदवार देवाशीष शर्मा के आगे होने की जानकारी सामने आई। इस सीट का परिणाम असम में BJP और कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पोस्टल बैलेट के बाद EVM की गिनती मतगणना की शुरुआत सुबह 8 बजे पोस्टल बैलेट की गिनती से हुई। इसके बाद EVM में दर्ज वोटों की गणना की जा रही है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, ऑनलाइन रुझान मतगणना केंद्रों से रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों पर आधारित होते हैं। अंतिम परिणाम फॉर्म-20 में जारी किया जाएगा। क्यों अहम हैं ये उपचुनाव? चार राज्यों की इन छह सीटों पर हो रहे उपचुनावों को राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में BJP सरकार, तमिलनाडु में विजय की TVK, पुडुचेरी में एन. रंगासामी सरकार और असम में BJP की चुनावी स्थिति के संदर्भ में इन नतीजों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, उपचुनावों के परिणामों को पूरे राज्य में मतदाताओं के रुझान का निर्णायक संकेत नहीं माना जा सकता। अंतिम नतीजों का इंतजार कई सीटों पर मतगणना के शुरुआती चरणों में रुझान सामने आए हैं। जैसे-जैसे अगले राउंड की गिनती आगे बढ़ेगी, उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होगी। अंतिम नतीजों के लिए निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अपडेट देखे जा सकते हैं। स्रोत: Election Commission of India, The Indian Express, The New Indian Express और Financial Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Prayagraj में 11 साल बाद शुरू हुई ‘Prayagphilex-2026’, दुर्लभ डाक टिकटों में दिखेगी भारत की विरासत और प्रगति

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 11 साल के अंतराल के बाद जिला स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी ‘Prayagphilex-2026’ की शुरुआत 9 अक्टूबर 2026 को हो रही है। तीन दिवसीय यह प्रदर्शनी 9 से 11 अक्टूबर तक नॉर्थ सेंट्रल जोन कल्चरल सेंटर (NCZCC) में आयोजित की जा रही है। इसका आयोजन इंडिया पोस्ट के प्रयागराज डिवीजन की ओर से किया जा रहा है। 2015 के बाद पहली बार आयोजन Prayagphilex का पिछला जिला स्तरीय संस्करण वर्ष 2015 में प्रयागराज में आयोजित हुआ था। इसके बाद अब 11 साल के अंतराल पर शहर को एक बार फिर इस प्रदर्शनी की मेजबानी का अवसर मिला है। तीन दिन चलेगी प्रदर्शनी Prayagphilex-2026 का आयोजन 9 से 11 अक्टूबर तक किया जाएगा। प्रदर्शनी में डाक टिकट संग्रहकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए विभिन्न प्रकार के डाक टिकट और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। ‘India Through Stamps’ है इस बार की थीम इस वर्ष प्रदर्शनी की थीम “India Through Stamps: Heritage, Culture and Progress” रखी गई है। इसके माध्यम से डाक टिकटों के जरिए भारत की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। दुर्लभ डाक टिकट होंगे आकर्षण का केंद्र प्रदर्शनी में दुर्लभ डाक टिकटों के साथ अन्य फिलेटेलिक सामग्री भी देखने को मिलेगी। इनके माध्यम से आगंतुकों को भारत के इतिहास, प्रमुख व्यक्तित्वों, सांस्कृतिक विरासत और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ी जानकारी मिलेगी। स्टांप कलेक्शन को बढ़ावा देने की पहल इंडिया पोस्ट का उद्देश्य केवल पुराने डाक टिकटों का प्रदर्शन करना ही नहीं, बल्कि फिलेटली यानी डाक टिकट संग्रह करने की रुचि को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। खास तौर पर स्कूली विद्यार्थियों को इस शौक से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। 10 अक्टूबर को विद्यार्थियों के लिए क्विज और वर्कशॉप प्रदर्शनी के दूसरे दिन, 10 अक्टूबर को स्कूली विद्यार्थियों के लिए फिलेटेलिक क्विज आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही डाक टिकट संग्रह से जुड़ी कार्यशाला भी होगी, जिसमें बच्चों को फिलेटली की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। कई स्कूलों को दिया गया आमंत्रण प्रयागराज के विभिन्न स्कूलों को प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। आयोजकों का उद्देश्य डाक टिकटों के माध्यम से विद्यार्थियों को इतिहास, भूगोल, कला, विज्ञान और संस्कृति जैसे विषयों से जोड़ना है। पोस्टमास्टर जनरल ने बताया खास अवसर पोस्टमास्टर जनरल राजीव उमराव के अनुसार, जिला स्तरीय फिलेटेलिक प्रदर्शनियां अलग-अलग जिलों में आयोजित की जाती हैं। प्रयागराज को एक दशक से अधिक समय बाद फिर से इस आयोजन की मेजबानी का अवसर मिला है। विश्व डाक दिवस के अवसर पर शुरुआत Prayagphilex-2026 की शुरुआत 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के अवसर पर हो रही है। इस दौरान डाक विभाग देशभर में डाक सेवाओं, वित्तीय समावेशन, डिजिटल पहलों और फिलेटली से संबंधित गतिविधियों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। डाक टिकट सिर्फ डाक भेजने का माध्यम नहीं डाक टिकटों को इतिहास और संस्कृति के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के रूप में भी देखा जाता है। पुराने और स्मारक डाक टिकटों के जरिए किसी देश के प्रमुख व्यक्तित्वों, ऐतिहासिक इमारतों, वन्यजीवों, उपलब्धियों और सांस्कृतिक पहचान के बारे में जानकारी मिलती है। नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने की कोशिश Prayagphilex-2026 को ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के साथ एक शैक्षिक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे आयोजन पारंपरिक शौक को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और विद्यार्थियों में इतिहास व संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। 11 अक्टूबर तक देख सकेंगे प्रदर्शनी प्रयागराज के निवासी और डाक टिकट संग्रह में रुचि रखने वाले लोग 11 अक्टूबर तक इस प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकेंगे। दुर्लभ डाक टिकटों और भारत की डाक विरासत को करीब से जानने के इच्छुक लोगों के लिए यह आयोजन खास अवसर है। स्रोत: The Times of India, India Voice और India Post जय राष्ट्र न्यूज़

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India-West Indies का दूसरा T20I आज Ranchi में, Team India 1-0 की बढ़त मजबूत करने उतरेगी

रांची: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की T20I सीरीज का दूसरा मुकाबला आज, 9 अक्टूबर 2026 को रांची के JSCA International Stadium Complex में खेला जाएगा। पहले मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज को 8 विकेट से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाई थी। अब टीम इंडिया की नजर दूसरा मैच जीतकर बढ़त 2-0 करने पर होगी, जबकि वेस्टइंडीज सीरीज में वापसी के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहला T20I भारत ने 8 विकेट से जीता सीरीज के पहले मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 171 रन बनाए थे। जवाब में भारतीय टीम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए लक्ष्य केवल 14.4 ओवर में हासिल कर लिया और 8 विकेट से जीत दर्ज की। भारत की जीत के हीरो कप्तान Shreyas Iyer रहे, जिन्होंने नाबाद 102 रन की शानदार पारी खेली। इस जीत से भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। Shreyas Iyer पर फिर रहेंगी नजरें पहले मैच में विस्फोटक शतक लगाने वाले Shreyas Iyer से दूसरे मुकाबले में भी बड़ी पारी की उम्मीद होगी। उन्होंने 43 गेंदों में नाबाद 102 रन बनाए और Ishan Kishan के साथ नाबाद 137 रन की साझेदारी की थी। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी भारत के शीर्ष क्रम को मजबूती देती है। रांची में भी टीम को उनसे ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद होगी। Ishan Kishan के लिए खास होगा रांची मुकाबला Ishan Kishan के लिए रांची में खेलना खास माना जा रहा है, क्योंकि यह उनका घरेलू मैदान है। उनकी वापसी और हालिया फॉर्म ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम को अतिरिक्त मजबूती दी है। पहले मुकाबले में Shreyas Iyer के साथ उनकी साझेदारी ने भारत को आसान जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। Sanju Samson पर बढ़ा दबाव पहले T20I में Sanju Samson केवल 11 रन बना सके थे। ऐसे में दूसरे मुकाबले से पहले उनकी जगह को लेकर चर्चा तेज हो गई है। टीम में मौजूद दूसरे विकल्पों और Ishan Kishan की वापसी के बीच Samson के लिए अच्छा प्रदर्शन करना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, अंतिम प्लेइंग इलेवन का फैसला टीम प्रबंधन ही करेगा। Vaibhav Sooryavanshi की प्लेइंग इलेवन में जगह पर चर्चा 15 वर्षीय Vaibhav Sooryavanshi ने रांची में अभ्यास सत्र के दौरान आक्रामक बल्लेबाजी की। उनके प्रदर्शन के बाद इस बात को लेकर चर्चा बढ़ गई है कि क्या उन्हें दूसरे T20I में खेलने का मौका मिलेगा। हालांकि, अभी उनकी प्लेइंग इलेवन में जगह की पुष्टि नहीं हुई है। टीम चयन को लेकर अंतिम फैसला मुकाबले से पहले सामने आ सकता है। भारतीय स्पिन गेंदबाजों से फिर उम्मीदें पहले मुकाबले में भारतीय गेंदबाजों ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। Kuldeep Yadav और Axar Patel सहित गेंदबाजों ने मध्य ओवरों में रन बनाने के मौके सीमित किए। रांची की पिच पर भी स्पिन गेंदबाजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। भारतीय टीम की कोशिश वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को नियंत्रित रखकर सीरीज में अपनी पकड़ मजबूत करने की होगी। West Indies को बल्लेबाजी में सुधार की जरूरत पहले मैच में Shai Hope और Sherfane Rutherford ने अर्धशतक लगाए, लेकिन टीम के बाकी बल्लेबाज बड़ा योगदान देने में नाकाम रहे। सीरीज में वापसी करने के लिए वेस्टइंडीज को शीर्ष और मध्य क्रम से अधिक निरंतर प्रदर्शन की जरूरत होगी। टीम को भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ शुरुआती विकेट बचाने और अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाने पर ध्यान देना होगा। रांची की पिच पर बड़ा स्कोर बनाना आसान नहीं JSCA International Stadium Complex में खेले जाने वाले इस मुकाबले में पिच की भूमिका अहम होगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यहां खेले गए 10 रात्रिकालीन मुकाबलों में केवल एक बार स्कोर 200 रन के पार पहुंचा है। ऐसे में बल्लेबाजों को पारी की शुरुआत में परिस्थितियों को समझकर खेलना होगा। हालांकि, वास्तविक स्कोर पिच के मिजाज और दोनों टीमों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। ओस का असर भी डाल सकता है भूमिका शाम को होने वाले मुकाबले में दूसरी पारी के दौरान ओस का प्रभाव देखने को मिल सकता है। ओस के कारण गेंदबाजों के लिए गेंद पर पकड़ बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, जिससे लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को फायदा मिल सकता है। ऐसी परिस्थितियों में टॉस भी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। मैच शाम 7 बजे से शुरू होगा भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा T20I भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा। टॉस शाम 6:30 बजे होने का कार्यक्रम है। मुकाबला रांची के JSCA International Stadium Complex में खेला जाएगा। कहां देखें LIVE मुकाबला? दूसरे T20I का सीधा प्रसारण Star Sports Network पर देखा जा सकेगा, जबकि ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग JioHotstar पर उपलब्ध होगी। भारत के पास 2-0 की बढ़त लेने का मौका पहले मैच में आठ विकेट से मिली जीत के बाद भारतीय टीम आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगी। दूसरा मुकाबला जीतने पर भारत सीरीज में 2-0 की बढ़त बना लेगा और सीरीज जीतने की दिशा में मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगा। दूसरी ओर, वेस्टइंडीज के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है। हार की स्थिति में टीम पांच मैचों की सीरीज में 0-2 से पिछड़ जाएगी। ऐसे में दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है। स्रोत: BCCI, ICC, Reuters, ESPNcricinfo और India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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September Quarter में Indian Companies की कमाई बढ़ने की उम्मीद, Nifty 50 का मुनाफा 20% तक उछल सकता है

मुंबई: भारतीय कंपनियों के जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के नतीजों में मुनाफे की वृद्धि तेज रहने की उम्मीद है। विभिन्न ब्रोकरेज अनुमानों के मुताबिक, Nifty 50 कंपनियों का संयुक्त शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़ सकता है। कुछ अनुमानों में इससे भी अधिक वृद्धि की संभावना जताई गई है। घरेलू मांग, वित्तीय क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और ऑटोमोबाइल कंपनियों की मजबूत बिक्री से कंपनियों की कमाई को सहारा मिलने की उम्मीद है। Nifty 50 के मुनाफे में करीब 20% वृद्धि का अनुमान विश्लेषकों के अनुसार, सितंबर तिमाही में Nifty 50 कंपनियों के राजस्व और शुद्ध मुनाफे में अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है। करीब 20 प्रतिशत की अनुमानित सालाना वृद्धि से भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र में कमाई की रफ्तार बेहतर होने के संकेत मिलते हैं। हालांकि, वास्तविक प्रदर्शन कंपनियों के नतीजों, लागत और मांग की स्थिति पर निर्भर करेगा। Motilal Oswal का अनुमान और ज्यादा मजबूत Motilal Oswal Financial Services ने अपने विश्लेषण के दायरे में आने वाली कंपनियों के लिए मजबूत आय वृद्धि का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, Nifty 50 की कमाई सालाना आधार पर करीब 27 प्रतिशत बढ़ सकती है। यह अनुमान करीब 17 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि की संभावना की ओर इशारा करता है। बैंक और वित्तीय कंपनियां बन सकती हैं प्रमुख वजह वित्तीय क्षेत्र से कंपनियों की कमाई को बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है। कर्ज की अच्छी मांग और अपेक्षाकृत कम क्रेडिट लागत से बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रदर्शन को मजबूती मिल सकती है। ICICI Bank, State Bank of India और Bajaj Finance जैसी कंपनियों के नतीजे बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इनके प्रदर्शन का व्यापक कॉरपोरेट आय वृद्धि पर भी असर पड़ सकता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर से भी मजबूत संकेत ऑटोमोबाइल कंपनियों की बिक्री और वाहनों की मांग में सुधार से सितंबर तिमाही के नतीजों को समर्थन मिलने की संभावना है। बेहतर बिक्री से कंपनियों के राजस्व में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, कच्चे माल और कमोडिटी की बढ़ती कीमतें कुछ कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। इसलिए बिक्री में बढ़ोतरी के बावजूद सभी कंपनियों के मुनाफे में समान वृद्धि होना जरूरी नहीं है। Oil and Gas सेक्टर का मिला-जुला असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है। इसके विपरीत, तेल विपणन कंपनियों के लिए बढ़ी हुई इनपुट लागत चुनौती बन सकती है। इस वजह से ऑयल एंड गैस सेक्टर में कंपनियों के नतीजे अलग-अलग रह सकते हैं और पूरे क्षेत्र के प्रदर्शन का आकलन करते समय इन अंतरों पर ध्यान देना होगा। IT सेक्टर की तस्वीर रह सकती है कमजोर भारतीय IT कंपनियों के लिए सितंबर तिमाही अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण रहने की आशंका है। वैश्विक ग्राहकों के खर्च में सावधानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा मूल्य निर्धारण का दबाव और आर्थिक अनिश्चितता इस क्षेत्र की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में IT सेक्टर का प्रदर्शन बैंकिंग और कुछ घरेलू मांग पर निर्भर क्षेत्रों की तुलना में धीमा रह सकता है। TCS ने मजबूत नतीजों के साथ की शुरुआत Tata Consultancy Services (TCS) ने सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत की शुद्ध मुनाफा वृद्धि दर्ज की। कंपनी का मुनाफा 13,884 करोड़ रुपये रहा, जबकि राजस्व लगभग 11.8 प्रतिशत बढ़कर 74,525 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का वार्षिकीकृत AI राजस्व भी 3 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया। TCS के नतीजे बाजार को IT क्षेत्र की मांग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कारोबार की संभावनाओं के बारे में अहम संकेत दे सकते हैं। घरेलू मांग बनी हुई है बड़ा सहारा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की घरेलू मांग कंपनियों की कमाई के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। त्योहारी सीजन से पहले इन्वेंटरी बढ़ाने, उपभोक्ता मांग और कुछ कमोडिटी की अनुकूल कीमतों से विभिन्न कारोबारों को फायदा मिल सकता है। घरेलू खपत मजबूत रहने पर कंपनियों को बाहरी बाजारों की सुस्ती के असर से कुछ हद तक राहत मिल सकती है। वैश्विक जोखिम अब भी बरकरार मुनाफे में वृद्धि की उम्मीदों के बावजूद बाजार के सामने कई जोखिम बने हुए हैं। विदेशी निवेशकों की निकासी, कमजोर मानसून का ग्रामीण मांग पर असर, मध्य पूर्व में तनाव और महंगाई का दबाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। इन कारकों से कंपनियों की लागत, बिक्री और भविष्य की वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। बाजार के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है असर यदि Nifty 50 कंपनियां अनुमान के मुताबिक मजबूत मुनाफा दर्ज करती हैं, तो इससे भारतीय शेयर बाजार के वैल्यूएशन को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों की नजर केवल मुनाफे की वृद्धि पर नहीं होगी। कंपनियों के मार्जिन, प्रबंधन की भविष्य संबंधी टिप्पणियों और वैश्विक मांग के अनुमान भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। आने वाले हफ्तों में नतीजों पर रहेगी नजर सितंबर तिमाही के नतीजों के दौरान बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, ऑयल एंड गैस और टेलीकॉम सेक्टर के आंकड़े खास तौर पर महत्वपूर्ण होंगे। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि करीब 20 प्रतिशत मुनाफा वृद्धि के अनुमान वास्तविक नतीजों में कितने सही साबित होते हैं और कंपनियां आने वाली तिमाहियों के लिए कैसी संभावनाएं पेश करती हैं। स्रोत: Reuters, The Economic Times और Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

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US Green Card Suspension पर TCS का बड़ा बयान, Hiring Strategy पर असर नहीं; 15,000 अमेरिकी नौकरियों के लक्ष्य पर कायम

नई दिल्ली: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अमेरिका में Permanent Labor Certification यानी PERM कार्यक्रम से अपने निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इससे उसकी वर्कफोर्स रणनीति और ग्राहकों के साथ चल रहे प्रोजेक्ट्स पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने यह भी दोहराया कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती के अपने लक्ष्य पर कायम है। US ने TCS समेत कई टेक कंपनियों पर लगाई रोक अमेरिकी प्रशासन ने TCS समेत कई बड़ी टेक्नोलॉजी और IT सर्विसेज कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस सूची में Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। इस कार्रवाई से संबंधित कंपनियों की नई और कुछ लंबित PERM अर्जियों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर विशेष रूप से उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के जरिए अमेरिका में स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया में हैं। क्या है PERM कार्यक्रम? PERM यानी Permanent Labor Certification, अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। PERM प्रक्रिया में रुकावट आने से उन विदेशी कर्मचारियों के स्थायी निवास की योजनाओं में देरी हो सकती है, जिनके मामले इस प्रक्रिया पर निर्भर हैं। TCS ने कहा—वर्कफोर्स रणनीति नहीं बदलेगी TCS का कहना है कि PERM कार्यक्रम से निलंबन के बावजूद उसकी अमेरिकी वर्कफोर्स रणनीति में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी। कंपनी के मुताबिक, उसका भर्ती मॉडल स्थानीय प्रतिभाओं और विश्वविद्यालयों से कैंपस भर्ती पर भी आधारित है। ऐसे में PERM कार्यक्रम पर उसकी निर्भरता सीमित रहने के कारण इस फैसले का तत्काल परिचालन प्रभाव कम रहने की उम्मीद है। पिछले दो वर्षों में PERM आवेदन बेहद कम TCS ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उसने PERM प्रक्रिया के तहत बहुत कम आवेदन दाखिल किए थे। कंपनी का मानना है कि इसी वजह से मौजूदा निलंबन का उसके दैनिक कामकाज पर सीमित असर पड़ेगा। हालांकि, इस फैसले से प्रभावित कर्मचारियों के व्यक्तिगत इमिग्रेशन मामलों में देरी या अनिश्चितता बनी रह सकती है। अमेरिका में 15,000 नौकरियों का लक्ष्य बरकरार TCS ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की अपनी योजना दोहराई है। कंपनी स्थानीय प्रतिभाओं, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती माध्यमों के जरिए अमेरिकी वर्कफोर्स का विस्तार करने पर जोर दे रही है। यह लक्ष्य कंपनी की अमेरिकी बाजार में दीर्घकालिक मौजूदगी और स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को नियुक्त करने की रणनीति का हिस्सा है। Client projects पर भी असर की उम्मीद नहीं TCS ने कहा है कि PERM निलंबन से उसके मौजूदा ग्राहक प्रोजेक्ट्स और सेवाओं पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करेगी। फिलहाल कंपनी अपने परिचालन और ग्राहक सेवाओं को सामान्य रूप से जारी रखने को लेकर आश्वस्त है। भारतीय IT कंपनियों पर क्या हो सकता है असर? PERM निलंबन का प्रभाव कंपनियों के दैनिक कामकाज की तुलना में उन कर्मचारियों पर अधिक पड़ सकता है, जो रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया में हैं। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी होने से कुछ कुशल विदेशी कर्मचारियों के दीर्घकालिक इमिग्रेशन प्लान प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर प्रत्येक कर्मचारी की मौजूदा स्थिति और उसके आवेदन के चरण पर निर्भर करेगा। अमेरिकी सरकार ने क्यों की कार्रवाई? रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को प्राथमिकता देने और वेतन पर दबाव डालने से जुड़े आरोप लगाए हैं। PERM कार्यक्रम पर निलंबन इसी व्यापक इमिग्रेशन नीति से जुड़ा कदम बताया जा रहा है। H-1B और PERM में क्या है अंतर? PERM पर रोक का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों में काम कर रहे सभी H-1B वीजा धारकों की नौकरियां तुरंत प्रभावित हो जाएंगी। H-1B एक अस्थायी रोजगार वीजा है, जबकि PERM रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक चरण है। हालांकि, स्थायी निवास के लिए PERM प्रक्रिया पर निर्भर कर्मचारियों को देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। TCS के तिमाही नतीजे भी मजबूत इसी बीच TCS ने सितंबर तिमाही के मजबूत वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये रहा, जबकि राजस्व लगभग 11.8 प्रतिशत बढ़कर 74,525 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को उसके कारोबार की स्थिति के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जा रहा है। AI कारोबार में भी तेज वृद्धि TCS का वार्षिकीकृत AI राजस्व 3 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में विस्तार पर ध्यान दे रही है। 9 अक्टूबर को कंपनी के शेयरों में भी तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की नजर कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार, AI से होने वाली आय और भविष्य की वृद्धि की संभावनाओं पर बनी हुई है। फिलहाल परिचालन पर सीमित असर TCS के बयान से संकेत मिलता है कि कंपनी फिलहाल PERM निलंबन को अपने अमेरिकी कारोबार के लिए बड़ा परिचालन झटका नहीं मान रही है। स्थानीय भर्ती और कैंपस हायरिंग के जरिए कंपनी अपने विस्तार की योजना जारी रखना चाहती है। हालांकि, PERM प्रक्रिया पर निर्भर कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड मिलने की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। स्रोत: Reuters, The Economic Times, The Indian Express और India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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Operation Sindoor ने दुनिया को दिखाई IAF की तेज Combat Readiness: Air Chief Marshal AP Singh

गाजियाबाद: भारतीय वायुसेना प्रमुख Air Chief Marshal A.P. Singh ने कहा है कि Operation Sindoor ने भारतीय वायुसेना (IAF) की तेज परिचालन क्षमता और युद्ध के लिए तैयार रहने की ताकत को प्रदर्शित किया। उन्होंने 8 अक्टूबर 2026 को हिंडन एयरबेस पर वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल में एयर पावर की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है और IAF किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। Operation Sindoor से मिली अहम सीख Air Chief Marshal AP Singh के मुताबिक, पिछले वर्ष हुए Operation Sindoor ने भारतीय वायुसेना की परिचालन गति, आपसी समन्वय और combat preparedness को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वायुसेना बेहद कम समय में अपने संसाधनों को सक्रिय कर सकती है और मिशन की आवश्यकताओं के अनुसार तेजी से कार्रवाई कर सकती है। इस ऑपरेशन से मिली सीख भविष्य की रणनीति और सैन्य तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। हर चुनौती के लिए तैयार है IAF वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताएं लगातार मजबूत हो रही हैं। बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और नई सैन्य तकनीकों के बीच वायुसेना को सतर्क और युद्ध के लिए तैयार रहना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षण, समन्वय और संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Network-centric force बन रही भारतीय वायुसेना AP Singh ने भारतीय वायुसेना को तेजी से विकसित होती नेटवर्क-केंद्रित सैन्य शक्ति बताया। आधुनिक युद्ध में लड़ाकू विमानों के साथ सेंसर, निगरानी प्रणालियों, संचार नेटवर्क और हथियार प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर तालमेल जरूरी हो गया है। इन प्रणालियों का प्रभावी एकीकरण वायुसेना को तेजी से जानकारी जुटाने, परिस्थितियों का आकलन करने और सटीक निर्णय लेने में मदद करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है Air Power वायुसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा माहौल में एयर पावर की भूमिका केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा, संभावित विरोधियों को रोकने और संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक हालात के बीच मजबूत वायु शक्ति देश की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनी हुई है। Operation Sindoor में IAF की भूमिका Operation Sindoor के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपने लड़ाकू और सहायक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए सैन्य अभियानों में भाग लिया था। Air Chief के अनुसार, इस ऑपरेशन से मिले अनुभव भविष्य की परिचालन योजनाओं और सैन्य आधुनिकीकरण में उपयोगी साबित हो सकते हैं। ऑपरेशन ने कम समय में तैयारी करने, विभिन्न सैन्य संसाधनों के बीच तालमेल और मिशन के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने की अहमियत को भी रेखांकित किया। आधुनिक तकनीक पर बढ़ रहा फोकस भारतीय वायुसेना पारंपरिक लड़ाकू विमानों के साथ आधुनिक तकनीकों को भी अपनी युद्ध क्षमता में शामिल करने पर जोर दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, उन्नत मिसाइलें, एकीकृत एयर डिफेंस नेटवर्क और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म भविष्य के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल से निगरानी, लक्ष्य की पहचान, संचार और परिचालन समन्वय को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। Fighter squadron की संख्या बनी चुनौती भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता के बावजूद लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। वायुसेना को अपनी आवश्यक परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए नए लड़ाकू विमानों की समय पर आपूर्ति और पुराने विमानों के स्थान पर आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल करने की जरूरत है। Air Chief पहले भी कह चुके हैं कि आवश्यक स्तर बनाए रखने के लिए भारत को हर साल लगभग 36 से 40 लड़ाकू विमान शामिल करने की आवश्यकता है। Tejas Mk-1A की डिलीवरी में देरी पर चिंता Tejas Mk-1A कार्यक्रम में देरी ने वायुसेना के आधुनिकीकरण की योजनाओं पर दबाव बढ़ाया है। लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या निर्धारित स्तर से कम होने के कारण नए विमानों की समय पर डिलीवरी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में स्वदेशी लड़ाकू विमानों को शामिल करना वायुसेना की क्षमता बढ़ाने और परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से अहम होगा। Future warfare के लिए तैयारी Air Chief ने भविष्य के युद्धों में गति, सटीकता, खुफिया जानकारी और तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। वायुसेना पारंपरिक एयर पावर के साथ साइबर, अंतरिक्ष, मानवरहित प्रणालियों और नेटवर्क आधारित अभियानों पर भी ध्यान बढ़ा रही है। आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुरूप तैयारी करना वायुसेना की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय वायुसेना का 94वां स्थापना दिवस भारतीय वायुसेना ने 8 अक्टूबर 2026 को अपना 94वां स्थापना दिवस मनाया। हिंडन एयरबेस पर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और पूर्व वायुसेना प्रमुखों सहित कई गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर वायुसेना की उपलब्धियों, बदलती परिचालन जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों पर जोर दिया गया। जवानों की ट्रेनिंग और अनुशासन को बताया ताकत Air Chief Marshal AP Singh ने वायुसेना के कर्मियों की पेशेवर क्षमता, समर्पण और अनुशासन की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विमान और आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी सैन्य बल की वास्तविक ताकत उसके जवानों के प्रशिक्षण, अनुशासन और तैयारी में होती है। Operation Sindoor का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वायुसेना को भविष्य में भी तेज प्रतिक्रिया और मजबूत combat readiness बनाए रखने की दिशा में काम करना होगा। स्रोत: Hindustan Times, The Times of India, The Economic Times और Bharat Shakti जय राष्ट्र न्यूज़

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Riyadh Airport पर Houthi हमले के बाद Air India, IndiGo और Akasa Air ने उड़ानें रोकीं

रियाध: सऊदी अरब की राजधानी रियाध के King Khalid International Airport पर Houthi मिसाइल हमलों के बाद कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। Air India, Air India Express, IndiGo और Akasa Air ने रियाध आने-जाने वाली सेवाओं पर रोक लगाई है। वहीं, Lufthansa Group ने भी सुरक्षा चिंताओं के चलते अपनी उड़ानें स्थगित करने का फैसला किया है। Houthi समूह ने हमले की जिम्मेदारी ली यमन के ईरान समर्थित Houthi समूह ने रियाध एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला करने का दावा किया। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ मिसाइलों को रोकने की कार्रवाई की, लेकिन एयरपोर्ट परिसर में खड़े एक विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद क्षेत्र में विमानन सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। Saudia Airlines के विमान को भारी नुकसान रिपोर्टों के अनुसार, इंटरसेप्ट की गई मिसाइल या प्रोजेक्टाइल का मलबा एयरपोर्ट टर्मिनल के पास खड़े Saudia Airlines के विमान पर गिरा। इसके बाद विमान में आग लग गई और उसे काफी नुकसान पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों में उस समय विमान में यात्रियों की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की गई है। Air India ने 10 अक्टूबर तक उड़ानें रद्द कीं Air India ने सुरक्षा स्थिति को देखते हुए रियाध के लिए अपनी उड़ानें 10 अक्टूबर तक रद्द करने की घोषणा की। दिल्ली से रियाध जा रही Air India की फ्लाइट AI2243 को भी बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। विमान दिल्ली में सुरक्षित उतर गया। एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था और टिकट संबंधी विकल्प उपलब्ध कराने की जानकारी दी है। Air India Express की सेवाएं भी प्रभावित Air India Express ने भी रियाध से जुड़ी अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इससे सऊदी अरब और भारत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। एयरलाइन प्रभावित यात्रियों को मुफ्त रीशेड्यूलिंग या पूर्ण रिफंड जैसे विकल्प दे रही है। IndiGo ने 9 अक्टूबर तक उड़ानें रद्द कीं IndiGo ने रियाध आने-जाने वाली उड़ानों को 9 अक्टूबर तक रद्द करने का फैसला किया। एयरलाइन ने यात्रियों को एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का मौजूदा स्टेटस जांचने की सलाह दी है। सुरक्षा स्थिति के आधार पर उड़ानों के संचालन में आगे भी बदलाव हो सकता है। Akasa Air ने भी सेवाएं रोकीं Akasa Air ने भी रियाध में अपने उड़ान संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। Kochi-Riyadh मार्ग की उड़ानें भी इस फैसले से प्रभावित हुई हैं। एयरलाइन स्थिति पर नजर रख रही है और यात्रियों को अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी आधिकारिक माध्यमों से जांचने की सलाह दी गई है। Lufthansa ने 16 अक्टूबर तक बढ़ाया निलंबन जर्मन एयरलाइन समूह Lufthansa ने रियाध के लिए अपनी उड़ानें 16 अक्टूबर तक निलंबित करने की घोषणा की है। कंपनी ने मध्य पूर्व में सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम को इस फैसले की वजह बताया है। अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से घोषित निलंबन की अवधि अलग है, इसलिए यात्रियों को अपनी संबंधित उड़ान की जानकारी अलग से जांचनी चाहिए। बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित रियाध एयरपोर्ट पर हमले और उसके बाद लागू सुरक्षा उपायों के कारण कई उड़ानें प्रभावित हुईं। रिपोर्टों के मुताबिक, गुरुवार को निर्धारित आगमन और प्रस्थान सेवाओं के बड़े हिस्से पर असर पड़ा। कुछ समय के लिए एयरपोर्ट संचालन भी बाधित हुआ। इस व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के साथ-साथ भारत और सऊदी अरब के बीच यात्रा करने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सऊदी अरब के अन्य एयरपोर्ट भी निशाने पर रियाध के अलावा सऊदी अरब के अन्य हवाई अड्डों पर भी हाल के दिनों में हमलों की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस सप्ताह एयरपोर्ट से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। लगातार हो रही घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और नागरिक विमानन सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत ने हमलों की निंदा की भारत ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हुए हमलों की निंदा करते हुए उन्हें अस्वीकार्य बताया है। भारत सरकार ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई और सऊदी अरब की सुरक्षा तथा संप्रभुता के प्रति समर्थन दोहराया। भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी रियाध स्थित भारतीय दूतावास ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले संबंधित एयरलाइन से अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करें। जिन यात्रियों की यात्रा आने वाले दिनों में रियाध से जुड़ी है, उन्हें एयरलाइन की सूचनाओं और एयरपोर्ट के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। यमन संघर्ष से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव यमन में जारी संघर्ष और Houthi समूह की ओर से सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। इसका असर विमानन सेवाओं के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यात्रियों के लिए जरूरी सलाह रियाध की यात्रा करने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर जांचना चाहिए। उड़ान रद्द होने या समय में बदलाव की स्थिति में संबंधित एयरलाइन से रिफंड, रीशेड्यूलिंग और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था की जानकारी लें। सुरक्षा स्थिति के आधार पर उड़ानों के निलंबन की अवधि बढ़ाई जा सकती है, इसलिए यात्रा से पहले नवीनतम आधिकारिक अपडेट देखना जरूरी है। स्रोत: Reuters, The Indian Express और भारतीय दूतावास, रियाध जय राष्ट्र न्यूज़

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