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जंतर-मंतर विवाद के बाद महिला पत्रकार समेत 17 लोग हिरासत में, पत्रकारों की शिकायत Crime Branch को ट्रांसफर

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर कार्रवाई की मांग करने पहुंचे लोगों में से 17 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिनमें एक महिला पत्रकार भी शामिल थीं। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को जांच के लिए Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। Parliament Street Police Station के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी प्रदर्शनकारी महिला पत्रकारों की शिकायतों पर FIR और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने के बाहर पहुंचे थे। मौके पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। 17 लोगों को हिरासत में लिया गया रिपोर्टों के अनुसार कुल 17 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें एक महिला पत्रकार और प्रदर्शन से जुड़े अन्य लोग शामिल थे। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। महिला पत्रकारों ने लगाए गंभीर आरोप मामला जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज से जुड़ा है। तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार हुआ। ये आरोप फिलहाल शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। शिकायत Crime Branch को सौंपी गई दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि इससे जांच अधिक स्वतंत्र तरीके से की जा सकेगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा होगी। पत्रकार रोजी का मामला भी चर्चा में इस पूरे विवाद में स्वतंत्र पत्रकार रोजी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर कथित अनुचित स्पर्श और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था तथा on-camera apology और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। आरोपों की पुष्टि अभी जांच में होनी बाकी है। Press Club में भी उठा मामला महिला पत्रकारों के आरोपों के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र मीडिया समूहों ने भी प्रतिक्रिया दी। Press Club of India में भी इस मामले को लेकर चर्चा और कार्रवाई की मांग सामने आई। पत्रकारों ने कहा कि protest coverage के दौरान media professionals की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने कहा- जांच जारी दिल्ली पुलिस ने कहा है कि शिकायतों की जांच Crime Branch करेगी और उपलब्ध material के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस ने यह भी साफ किया कि केवल आरोप लगाए जाने से किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती; जांच के बाद ही निष्कर्ष निकलेगा। Jantar Mantar Protest से जुड़ा बड़ा विवाद यह विवाद उस व्यापक राजनीतिक और छात्र आंदोलन से जुड़ा है जिसमें SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर और आसपास कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा है। महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने protest coverage के दौरान महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस व्यवहार पर भी सवाल खड़े किए हैं। मीडिया संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में शिकायतों की पारदर्शी और समयबद्ध जांच की जाए। जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामला Crime Branch के पास है और जांच जारी है। महिला पत्रकारों के आरोपों, पुलिस अधिकारियों के पक्ष और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि किसी तरह की कानूनी या विभागीय कार्रवाई बनती है या नहीं। Source – The Indian Express / Delhi Police / PTI / Press Club of India जय राष्ट्र न्यूज़

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पत्रकार रोजी के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप, जवाब मांगने पहुंचे प्रदर्शनकारियों को थाने के बाहर रोका गया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज के दौरान स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने दिल्ली पुलिस के एक ACP पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। मामले में FIR और कार्रवाई की मांग को लेकर Parliament Street Police Station पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने थाने के बाहर ही रोक दिया और कई लोगों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायत को Crime Branch को जांच के लिए भेज दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान का है मामला घटना 3 अक्टूबर को उस समय की बताई जा रही है जब जंतर-मंतर के आसपास CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था। रोजी वहां प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की हिरासत को रिकॉर्ड कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर उनके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया। ACP विवेक भगत पर लगाया आरोप रोजी ने आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत ने उन्हें कथित तौर पर अनुचित तरीके से छुआ और पीछे की ओर धक्का दिया। उन्होंने कहा कि वह महिला प्रदर्शनकारियों को पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठा रही थीं। ये आरोप पत्रकार की शिकायत पर आधारित हैं और अभी जांच के अधीन हैं। तीन महिला पत्रकारों ने दी शिकायत मामला केवल रोजी तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली पुलिस के मुताबिक 3 अक्टूबर की law-and-order situation के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ sexual harassment के आरोप लगाए और लिखित शिकायतें दीं। Crime Branch को सौंपी गई जांच दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचे प्रदर्शनकारी रोजी और अन्य महिला पत्रकारों की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर पत्रकार, छात्र कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग Parliament Street Police Station के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और शिकायत की औपचारिक FIR दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने थाने के बाहर रोका सोमवार, 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। रोजी भी हिरासत में रिपोर्टों के अनुसार पत्रकार रोजी को भी FIR की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के दौरान हिरासत में लिया गया। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी दावा किया कि रोजी समेत प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों को Delhi Cantonment Police Station ले जाया गया। कैमरे पर माफी की मांग रोजी ने ACP विवेक भगत से on-camera apology और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को उसी तरह लिया जाना चाहिए जैसे किसी भी sexual harassment complaint को लिया जाता है। पत्रकार संगठनों में भी नाराजगी मामले के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र पत्रकारों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। 5 अक्टूबर को Press Club of India में भी इस मामले को लेकर पत्रकारों के जुटने और न्याय की मांग उठाने की खबर सामने आई। पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप अभी साबित नहीं रोजी और अन्य पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल ये शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य हैं और किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई बनती है या नहीं। source – Delhi Police / The Indian Express / Times Now Navbharat / Daily Jagran / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र | IAS अधिकारी ने अपने जुड़वां बेटों का कराया सरकारी आंगनबाड़ी में दाखिला, सरकारी व्यवस्था पर जताया भरोसा

नंदुरबार: महाराष्ट्र के नंदुरबार की जिला कलेक्टर और IAS अधिकारी मिताली सेठी ने अपने तीन साल के जुड़वां बेटों का दाखिला एक सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है। उनके इस फैसले ने लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि आम तौर पर वरिष्ठ अधिकारी और आर्थिक रूप से सक्षम परिवार निजी pre-school को प्राथमिकता देते हैं। मिताली सेठी ने कहा कि उन्होंने यह फैसला किसी प्रतीकात्मक संदेश के लिए नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मेहनत और बच्चों की देखभाल के तरीके पर भरोसा करके लिया। नंदुरबार की जिला कलेक्टर हैं मिताली सेठी मिताली सेठी महाराष्ट्र कैडर की IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में नंदुरबार जिले की कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। जब उनके जुड़वां बेटे तीन साल के हुए, तब उन्होंने उन्हें स्थानीय सरकारी आंगनबाड़ी में भेजने का फैसला किया। निजी स्कूल के बजाय चुनी आंगनबाड़ी मिताली सेठी के परिवार में शुरुआत में इस फैसले को लेकर कुछ सवाल और आशंकाएं थीं। लेकिन जिला कलेक्टर के तौर पर अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने वहां के कामकाज को करीब से देखा था। इसी अनुभव ने उन्हें अपने बच्चों के लिए भी सरकारी आंगनबाड़ी चुनने का भरोसा दिया। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बदली सोच मिताली सेठी ने बताया कि एक समर्पित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के काम ने उन पर खास प्रभाव डाला। बच्चों के साथ उसके व्यवहार, creative activities और सीखने के तरीके को देखकर उन्हें लगा कि यहां बच्चों के शुरुआती विकास के लिए अच्छा माहौल उपलब्ध है। ‘किसी को संदेश देने के लिए नहीं लिया फैसला’ IAS अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य इस फैसले के जरिए कोई राजनीतिक या प्रशासनिक संदेश देना नहीं था। उन्होंने कहा कि यह एक व्यक्तिगत निर्णय था, जो उन्होंने उपलब्ध सुविधा और वहां काम करने वाली टीम पर भरोसा देखकर लिया। Early Childhood Education में आंगनबाड़ी की बड़ी भूमिका भारत में आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण योजनाओं तक सीमित नहीं हैं। इन केंद्रों के जरिए बच्चों को pre-school education, nutrition, health monitoring और शुरुआती सामाजिक व cognitive development से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकारी व्यवस्था पर भरोसे की बनी मिसाल एक वरिष्ठ IAS अधिकारी द्वारा अपने बच्चों को सरकारी आंगनबाड़ी में भेजने के फैसले ने सरकारी pre-school system की गुणवत्ता और उसकी संभावनाओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है। यह मामला खास तौर पर इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि जिन सरकारी सुविधाओं की निगरानी अधिकारी खुद करते हैं, उनमें व्यक्तिगत स्तर पर भरोसा दिखाना अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। महाराष्ट्र में आंगनबाड़ी सुधार पर भी जोर महाराष्ट्र में स्कूल और आंगनबाड़ी infrastructure सुधारने के लिए सरकार अलग-अलग models पर काम कर रही है। हाल ही में पुणे जिला परिषद के education और anganwadi infrastructure model को राज्य के दूसरे जिलों में भी लागू करने की मंजूरी दी गई है। सोशल मीडिया पर फैसले की चर्चा मिताली सेठी का फैसला सोशल मीडिया और public discourse में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे सरकारी संस्थानों में विश्वास से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे इस बात की याद दिलाने वाला उदाहरण मान रहे हैं कि सरकारी व्यवस्थाओं की गुणवत्ता काफी हद तक स्थानीय implementation और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है। आंगनबाड़ी व्यवस्था के लिए सकारात्मक संदेश इस फैसले से यह भी सामने आता है कि सही resources, trained staff और committed workers मिलने पर सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र early childhood education का मजबूत विकल्प बन सकते हैं। मिताली सेठी ने अपने अनुभव के आधार पर यही भरोसा अपने बच्चों के लिए भी दिखाया है। source – The Times of India / Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ MNS और शिवसेना (UBT) का प्रदर्शन, चुनाव आयोग और SIR को लेकर जताई नाराजगी

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) ने मुंबई में संयुक्त प्रदर्शन किया। इस ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने किया। प्रदर्शन में हजारों लोग तिरंगा लेकर शामिल हुए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी राजनीतिक तस्वीर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का एक साथ सड़क पर उतरना रहा। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से मार्च का नेतृत्व किया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। यह दोनों ठाकरे गुटों की हाल के समय में महत्वपूर्ण संयुक्त राजनीतिक कार्रवाई मानी जा रही है। SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग MNS और शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी दलों का आरोप है कि voter-list revision में पारदर्शिता की कमी है और बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। ये विपक्षी दलों के आरोप हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा रहा। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा विवादों के बीच CEC को पद छोड़ना चाहिए। चुनाव आयोग ने विपक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। पार्टी झंडों की जगह तिरंगा इस मार्च की एक खास बात यह रही कि कार्यकर्ताओं से पार्टी के झंडे और प्रतीक नहीं लाने को कहा गया। प्रदर्शन में तिरंगा प्रमुख रूप से दिखाई दिया। आयोजकों ने इसे किसी एक पार्टी के बजाय चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकार से जुड़ा आंदोलन बताने की कोशिश की। हजारों प्रदर्शनकारी हुए शामिल रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और दक्षिण मुंबई की सड़कों पर मार्च किया। Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार हजारों प्रदर्शनकारी तिरंगा और चुनाव आयोग के खिलाफ लिखे placards लेकर BMC मुख्यालय तक पहुंचे। Paper Ballot की मांग भी उठी राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने EVM के बजाय ballot paper से चुनाव कराने की मांग भी उठाई। विपक्षी नेताओं ने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ा, जबकि चुनाव आयोग लंबे समय से EVM की सुरक्षा और विश्वसनीयता का बचाव करता रहा है। कांग्रेस और NCP (SP) के नेता भी पहुंचे प्रदर्शन में केवल MNS और शिवसेना (UBT) ही नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे के अन्य दलों के नेता भी शामिल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के प्रतिनिधियों ने भी मोर्चे में हिस्सा लिया। CJP ने भी किया समर्थन Cockroach Janta Party यानी CJP ने भी MNS-शिवसेना (UBT) के प्रदर्शन का समर्थन किया। CJP founder अभिजीत दीपके ने लोगों से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। BJP ने विपक्ष पर किया पलटवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे बंधुओं के प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक निराशा से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यह BJP का राजनीतिक पक्ष है। SIR विवाद पर देशभर में बढ़ रहा विरोध ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विरोध केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। दिल्ली समेत कई शहरों में भी प्रदर्शन हुए हैं और विपक्षी दल 7 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर संयुक्त विरोध की तैयारी कर रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया पर राजनीतिक टकराव तेज एक ओर विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR और voter-list revision पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए revision को मतदाता सूची साफ करने की प्रक्रिया बताता है। इस विवाद के चलते आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Reuters / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल | मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी 20 साल पुरानी जांच फिर चर्चा में, 2006 के मामले में Vigilance probe के आदेश

तिरुवनंतपुरम: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा करीब 20 साल पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। केरल सरकार ने 2006 के उस मामले में Vigilance and Anti-Corruption Bureau से जांच कराने का आदेश दिया है, जो उनके केरल के Public Works Department यानी PWD में सचिव रहते हुए सामने आया था। मामला एक मलेशियाई सिविल इंजीनियर की मौत और Kerala State Transport Project से जुड़े कथित भ्रष्टाचार आरोपों से संबंधित है। 2006 का है मामला यह मामला साल 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में PWD सचिव के पद पर कार्यरत थे। उस समय Kerala State Transport Project के तहत MC Road के upgradation का काम चल रहा था और एक Indo-Malaysian consortium PATI-BEL इस project से जुड़ा हुआ था। मलेशियाई इंजीनियर की मौत से जुड़ा केस मामला मलेशियाई civil engineer Lee See Been की मौत से भी जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार वह project के chief project manager थे और बाद में उनकी मौत suicide के रूप में दर्ज की गई। कथित suicide note में कुछ अधिकारियों और project से जुड़े विवादों का उल्लेख होने की बात सामने आई थी। कथित suicide note में ज्ञानेश कुमार का नाम मीडिया रिपोर्टों के अनुसार Lee See Been द्वारा छोड़े गए कथित suicide note में उस समय PWD Secretary रहे ज्ञानेश कुमार का नाम भी सामने आया था। हालांकि इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि नहीं हुई है और नई जांच का उद्देश्य इन्हीं पुराने तथ्यों और पूर्व जांच की प्रक्रिया की समीक्षा करना है। केरल के गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मामले में Vigilance जांच का आदेश दिया है। सरकार यह भी देखना चाहती है कि पिछली जांच निष्पक्ष तरीके से हुई थी या उस पर किसी तरह का बाहरी प्रभाव पड़ा था। ‘यह CEC पद के खिलाफ जांच नहीं’ केरल सरकार के एक मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच मौजूदा Chief Election Commissioner के संवैधानिक पद के खिलाफ नहीं बल्कि ज्ञानेश कुमार के पूर्व PWD Secretary के कार्यकाल से जुड़े आरोपों पर है। इसलिए जांच का दायरा 2006 के administrative decisions और संबंधित project तक सीमित बताया जा रहा है। पुराने भ्रष्टाचार आरोप भी जांच के दायरे में नई Vigilance inquiry में कथित भ्रष्टाचार और criminal misconduct से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी। जांच एजेंसी पुराने documents, project files, statements और पहले हुई जांच के records को दोबारा देख सकती है। उस समय क्या हुआ था? Kerala State Transport Project के तहत सड़क निर्माण और upgradation से जुड़े contractual और financial disputes सामने आए थे। इसी दौरान Lee See Been की मौत हुई और मामले ने राजनीतिक तथा प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया। बाद में जांच हुई, लेकिन अब राज्य सरकार ने लगभग दो दशक बाद इसे फिर से जांचने का फैसला किया है। SIR विवाद के बीच फिर चर्चा में मामला ज्ञानेश कुमार पहले से Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। इसी माहौल में केरल की पुरानी जांच दोबारा खुलने से मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा में आ गया है। आरोप साबित होना अभी बाकी Vigilance inquiry शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। जांच एजेंसी को अब उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह तय करना होगा कि मामले में किसी तरह की आपराधिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है या नहीं। आगे क्या होगा? Vigilance and Anti-Corruption Bureau पुराने case records की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। अगर जांच में prima facie criminal misconduct या भ्रष्टाचार के प्रमाण सामने आते हैं, तो आगे कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है। source – The Indian Express / The Economic Times / Times of India / NDTV / ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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वृंदावन से कैंची धाम तक… आखिर क्यों उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भारी भीड़?

नई दिल्ली: गांधी जयंती के लंबे वीकेंड के दौरान उत्तर भारत के कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से लेकर उत्तराखंड के कैंची धाम तक लंबी कतारें, ट्रैफिक जाम और भीड़ प्रबंधन की चुनौती सामने आई। कैंची धाम में भीड़ के पीछे लंबे वीकेंड के साथ हालिया फिल्म ‘Hanuman Ansh’ के बाद नीम करोली बाबा में बढ़ी दिलचस्पी को भी एक कारण माना जा रहा है। लंबे वीकेंड ने बढ़ाई धार्मिक यात्रा 2 अक्टूबर की छुट्टी और उसके बाद वीकेंड के कारण बड़ी संख्या में लोग दिल्ली-NCR और आसपास के क्षेत्रों से धार्मिक और पहाड़ी स्थलों की ओर निकले। इससे वृंदावन, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल और कैंची धाम समेत कई जगहों पर सामान्य से कहीं ज्यादा भीड़ दर्ज की गई। वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के बाहर भारी भीड़ वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में तीन दिन की छुट्टियों के चलते श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई। मंदिर के आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक जाम और दर्शन के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं। स्थानीय प्रशासन को वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। कैंची धाम में भीड़ ने तोड़े रिकॉर्ड उत्तराखंड के नैनीताल जिले स्थित कैंची धाम में भी पिछले कुछ दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। 3 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट में सुबह से ही मंदिर गेट से हाईवे तक भारी भीड़ दर्ज की गई और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर प्रबंधन और सुरक्षाकर्मियों को भीड़ नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ‘Hanuman Ansh’ के बाद बढ़ी Neem Karoli Baba में दिलचस्पी कैंची धाम की मौजूदा भीड़ को हालिया फिल्म ‘Hanuman Ansh’ की लोकप्रियता से भी जोड़ा जा रहा है। फिल्म में नीम करोली बाबा से जुड़े आध्यात्मिक संदर्भों के बाद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कैंची धाम को लेकर रुचि बढ़ी। वायरल वीडियो और ट्रैवल पोस्ट ने भी बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान इस स्थान की ओर खींचा। फिल्म के निर्देशक ने भी की अपील ‘Hanuman Ansh’ के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने श्रद्धालुओं से कैंची धाम जाने से पहले वहां की स्थिति जांचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भीड़ इतनी अधिक है कि महिलाओं और बच्चों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर अन्य धार्मिक स्थलों पर जाने का विकल्प भी सुझाया। घंटों तक जाम में फंसे वाहन कैंची धाम और आसपास के मार्गों पर भारी ट्रैफिक के कारण सामान्य यात्रा समय कई गुना बढ़ गया। कुछ रिपोर्टों में तीन घंटे की यात्रा को पूरा करने में करीब 11 घंटे तक लगने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी इससे परेशानी हुई। सोशल मीडिया भी बना crowd multiplier धार्मिक स्थलों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने के कारण भी pilgrimage tourism में अचानक वृद्धि देखने को मिल रही है। कैंची धाम जैसे स्थान पहले से लोकप्रिय थे, लेकिन फिल्मों, reels और celebrity references के कारण नई पीढ़ी के यात्रियों में भी इन जगहों को लेकर रुचि बढ़ी है। आस्था के साथ travel trend भी बड़ी वजह विशेषज्ञ धार्मिक यात्रा के इस पैटर्न को केवल आस्था तक सीमित नहीं देखते। Long weekend, आसान road connectivity, social media exposure और spiritual tourism का trend—इन सभी कारणों ने मिलकर एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को इन स्थलों तक पहुंचाया है। प्रशासन के सामने crowd management की चुनौती अचानक बढ़ी भीड़ के कारण प्रशासन के सामने parking, traffic diversion, medical emergency और सुरक्षित दर्शन व्यवस्था जैसी चुनौतियां बढ़ गई हैं। उत्तराखंड के कई पहाड़ी routes पर अतिरिक्त पुलिस बल और traffic restrictions लगाए गए ताकि जाम और दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सके। यात्रा से पहले स्थिति जांचने की सलाह मौजूदा भीड़ को देखते हुए यात्रियों को धार्मिक स्थलों की ओर निकलने से पहले स्थानीय traffic updates, parking arrangements और crowd situation जांचने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। source – India Today / Dainik Jagran / NDTV / The Economic Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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Jammu-Srinagar Vande Bharat ने पहली बार Chenab और Anji bridges पर 100 kmph की रफ्तार हासिल की

जम्मू: Jammu-Srinagar Vande Bharat Express ने बड़ा रेलवे milestone हासिल करते हुए पहली बार Chenab Railway Bridge और Anji Khad Bridge को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया। यह उपलब्धि Katra-Banihal rail section की maximum permissible speed को बढ़ाकर 100 kmph किए जाने के बाद सामने आई है। Katra-Banihal section की speed limit बढ़ी Indian Railways ने 111 किलोमीटर लंबे Shri Mata Vaishno Devi Katra-Banihal section पर maximum permissible speed बढ़ाकर 100 kmph कर दी है। इससे पहले इस route के अलग-अलग हिस्सों पर speed limit 75 से 85 kmph के आसपास थी। नई limit safety checks और operational clearance के बाद लागू की गई। पहली बार 100 kmph पर पार किया Chenab Bridge Vande Bharat Express ने पहली बार दुनिया के सबसे ऊंचे railway arch bridge, Chenab Bridge, को 100 kmph की रफ्तार से पार किया। यह bridge Chenab नदी के तल से लगभग 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी लंबाई करीब 1,315 मीटर है। Anji Bridge पर भी 100 kmph की रफ्तार इसी run के दौरान ट्रेन ने Anji Khad Bridge को भी 100 kmph की speed से पार किया। Anji Bridge भारत का पहला cable-stayed railway bridge है और यह USBRL project का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Ashwini Vaishnaw ने शेयर किया वीडियो रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस milestone का वीडियो साझा किया। उन्होंने इसे Jammu-Kashmir rail network के लिए अहम उपलब्धि बताया। वीडियो में Vande Bharat को दोनों बड़े bridges पर high speed से गुजरते देखा जा सकता है। USBRL project के लिए अहम उपलब्धि Chenab और Anji bridges, Udhampur-Srinagar-Baramulla Rail Link यानी USBRL project का हिस्सा हैं। यह project जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी के बीच all-weather rail connectivity मजबूत करने के लिए बनाया गया है। कम हो सकता है travel time Speed limit बढ़ने से Katra-Banihal section पर यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। Railway officials का कहना है कि इससे train operations ज्यादा smooth और efficient हो सकते हैं और यात्रियों को faster connectivity मिलेगी। safety checks के बाद मिली मंजूरी 100 kmph की operational speed लागू करने से पहले route पर required safety assessments किए गए। इसके बाद Railway Board ने revised speed को मंजूरी दी और Vande Bharat के जरिए इसे successfully test किया गया। Kashmir rail connectivity में नया चरण यह milestone सिर्फ speed record नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की rail connectivity में operational improvement का संकेत भी है। Chenab और Anji जैसे complex engineering structures पर 100 kmph operation शुरू होना Indian Railways के लिए महत्वपूर्ण technical achievement माना जा रहा है। source – Ministry of Railways / The Indian Express / India Today / Financial Express / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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IIT Bombay छात्र Sahil Wakode Death Case में प्रोफेसर Suryanarayana Doolla से Crime Branch ने करीब 8 घंटे पूछताछ की

मुंबई: IIT Bombay के छात्र Sahil Wakode की मौत के मामले में मुंबई Crime Branch ने प्रोफेसर Suryanarayana Doolla से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। जांच एजेंसी ने छात्र और प्रोफेसर के बीच शैक्षणिक संबंध, कथित विवाद और मृतक द्वारा पहले लगाए गए आरोपों से जुड़े सवाल पूछे। प्रोफेसर ने पूछताछ के दौरान जातिगत टिप्पणी या उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है। करीब आठ घंटे चली पूछताछ Crime Branch की टीम ने प्रोफेसर Doolla को पूछताछ के लिए बुलाया और उनसे कई घंटे तक सवाल किए। रिपोर्टों के अनुसार पूछताछ करीब आठ घंटे चली, जिसमें Sahil Wakode के academic record, supervision और दोनों के बीच हुई बातचीत के बारे में जानकारी ली गई। जातिगत टिप्पणी के आरोप से प्रोफेसर का इनकार जांच के दौरान प्रोफेसर से उन आरोपों के बारे में भी सवाल किए गए जिनमें कथित तौर पर casteist remarks का जिक्र था। प्रोफेसर ने ऐसे किसी भी बयान या भेदभाव से इनकार किया और कहा कि उनका छात्र के साथ व्यवहार अकादमिक दायरे तक सीमित था। Sahil Wakode की मौत के बाद शुरू हुई जांच IIT Bombay के छात्र Sahil Wakode की मौत के बाद परिवार और छात्र संगठनों ने मामले की गहराई से जांच की मांग की थी। इसके बाद पुलिस और Crime Branch ने कॉलेज प्रशासन, faculty members और अन्य संबंधित लोगों से जानकारी जुटानी शुरू की। Academic pressure और कथित harassment भी जांच के दायरे में जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि Sahil पर किसी तरह का academic pressure, harassment या discrimination था या नहीं। इन सभी पहलुओं की जांच statements, electronic records और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है। अभी किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। परिवार ने उठाए थे गंभीर सवाल Sahil के परिवार ने पहले आरोप लगाया था कि छात्र मानसिक दबाव में था और उसे संस्थान में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। परिवार की शिकायतों के बाद मामले ने व्यापक ध्यान खींचा और छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की। IIT Bombay प्रशासन से भी जानकारी ली जा रही Crime Branch संस्थान से संबंधित records और communication भी देख रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि Sahil ने किसी औपचारिक grievance mechanism का इस्तेमाल किया था या नहीं और क्या संस्थान को पहले किसी शिकायत की जानकारी थी। छात्र संगठनों का प्रदर्शन भी जारी मामले के बाद कई छात्र संगठनों ने campus में प्रदर्शन किए और पारदर्शी जांच की मांग उठाई। छात्र समूहों का कहना है कि academic institutions में grievance redressal और anti-discrimination mechanisms को मजबूत किया जाना चाहिए। ये छात्र संगठनों के दावे और मांगें हैं। Crime Branch आगे और लोगों से कर सकती है पूछताछ जांच एजेंसी मामले में अन्य faculty members, छात्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी सवाल कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका थी। अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी फिलहाल प्रोफेसर से पूछताछ जांच का हिस्सा है और इसे दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में लगाए गए आरोपों और अलग-अलग पक्षों के दावों की सत्यता पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी। Source – India Today / The Indian Express / Mumbai Police जय राष्ट्र न्यूज़

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Asian Games पुरुष क्रिकेट फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर गोल्ड जीता, 211/6 के जवाब में पाकिस्तान 192/6 पर रुका

आइची-नागोया: Asian Games 2026 के पुरुष क्रिकेट फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 211/6 का विशाल स्कोर बनाया, जो इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा टीम स्कोर रहा। जवाब में पाकिस्तान 20 ओवर में 192/6 तक ही पहुंच सका। इस जीत के साथ भारत ने पुरुष क्रिकेट में अपना Asian Games खिताब भी बरकरार रखा। अभिषेक शर्मा ने दी तेज शुरुआत भारत के लिए अभिषेक शर्मा ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने 28 गेंदों में 61 रन की तेज पारी खेली और पाकिस्तान के गेंदबाजों पर शुरुआती दबाव बना दिया। उनकी पारी ने भारत को बड़े स्कोर की मजबूत नींव दी। तिलक वर्मा ने संभाला मध्यक्रम अभिषेक शर्मा के आउट होने के बाद तिलक वर्मा ने भारतीय पारी को संभाला। उन्होंने 22 गेंदों में नाबाद 51 रन बनाए और आखिरी ओवरों में तेजी से रन जोड़कर भारत का स्कोर 211 तक पहुंचाया। पाकिस्तान को मिला 212 रन का लक्ष्य भारत ने निर्धारित 20 ओवर में छह विकेट खोकर 211 रन बनाए। यह टूर्नामेंट का सर्वोच्च स्कोर था और पाकिस्तान को gold medal जीतने के लिए 212 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य मिला। हसन नवाज ने अकेले संभाली पाकिस्तान की पारी पाकिस्तान की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, लेकिन हसन नवाज ने टीम को मैच में बनाए रखा। उन्होंने 51 गेंदों में 96 रन की शानदार पारी खेली और एक समय पाकिस्तान को मुकाबले में वापस ला दिया। हालांकि उन्हें दूसरे छोर से लगातार समर्थन नहीं मिला। आखिरी दो ओवर में पलटा मुकाबला पाकिस्तान को अंतिम दो ओवरों में तेज रन चाहिए थे। जसप्रीत बुमराह और भारतीय गेंदबाजों ने डेथ ओवरों में रन गति पर नियंत्रण रखा, जिससे पाकिस्तान लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। पाकिस्तान की टीम 192/6 पर रुक गई। 19 रन से जीता भारत पाकिस्तान 212 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 20 ओवर में 192 रन ही बना पाया। इस तरह भारत ने मुकाबला 19 रन से जीत लिया और gold medal अपने नाम किया। Shreyas Iyer की कप्तानी में खिताब बरकरार भारतीय पुरुष टीम की कप्तानी Shreyas Iyer कर रहे थे। इस जीत के साथ भारत ने 2023 के बाद लगातार दूसरी बार Asian Games पुरुष क्रिकेट का gold medal जीता। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने जीता Gold भारत के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि महिला क्रिकेट टीम भी इस Asian Games में पहले ही gold medal जीत चुकी थी। महिला टीम ने 22 सितंबर को श्रीलंका को हराकर gold जीता था, जिसके बाद पुरुष टीम ने पाकिस्तान को मात देकर भारत के लिए cricket double पूरा किया। श्रीलंका ने जीता Bronze पुरुष क्रिकेट में bronze medal श्रीलंका के नाम रहा। श्रीलंका ने bronze medal match में Bangladesh को 63 रन से हराया। भारत की medal tally में जुड़ा एक और Gold इस जीत के साथ भारत की Asian Games medal tally में एक और gold जुड़ गया। 3 अक्टूबर के अंत तक भारत के खाते में 81 पदक थे, जिनमें 19 gold, 26 silver और 36 bronze शामिल थे। India-Pakistan final बना दिन का सबसे बड़ा मुकाबला भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ यह मुकाबला Asian Games के सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल रहा। High-scoring final में दोनों टीमों ने आक्रामक क्रिकेट खेला, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के बड़े स्कोर और आखिरी ओवरों की नियंत्रित गेंदबाजी ने अंतर पैदा किया। source – Reuters / Olympics.com / The Indian Express / Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

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म्यांमार में एयरस्ट्राइक से 50 लोगों की मौत, ASEAN चेयर फिलीपींस ने जताई चिंता; मदद के लिए बातचीत को तैयार

मनीला/नेपीडॉ: म्यांमार के रखाइन राज्य में हुए घातक हवाई हमले को लेकर ASEAN के मौजूदा अध्यक्ष फिलीपींस ने चिंता जताई है। 28 सितंबर को Kyauktaw इलाके में हुए इस एयरस्ट्राइक में कम से कम 50 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है। फिलीपींस ने कहा है कि वह म्यांमार संकट पर ASEAN सदस्य देशों के बीच बातचीत को सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार है। रखाइन राज्य के Kyauktaw में हुआ हमला यह एयरस्ट्राइक 28 सितंबर को बांग्लादेश की सीमा के पास स्थित रखाइन राज्य के Kyauktaw इलाके में हुई थी। स्थानीय सहायता कर्मियों और क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले Arakan Army से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हमले में बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। 50 लोगों की मौत, दर्जनों घायल ताजा जानकारी के अनुसार हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 50 हो गई। संयुक्त राष्ट्र ने भी घटना को लेकर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 58 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि कई अन्य लोगों को भी चोटें आईं। फिलीपींस ने कहा- घटनाक्रम पर हमारी नजर ASEAN Chair के रूप में फिलीपींस ने कहा कि वह म्यांमार में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है। Philippines Foreign Affairs Department की ASEAN मामलों की अधिकारी Ana Marie Hernando ने कहा कि हमले से हुई तबाही, जानमाल के नुकसान और घायलों की स्थिति को लेकर मनीला चिंतित है। ASEAN में चर्चा कराने को तैयार फिलीपींस फिलीपींस ने कहा कि वह ASEAN के भीतर म्यांमार की मदद के संभावित तरीकों पर चर्चा को facilitate करने के लिए तैयार है। मनीला ने कहा कि किसी भी समाधान को ASEAN के consensus-based approach के अनुरूप और म्यांमार के नेतृत्व में आगे बढ़ना चाहिए। ‘Myanmar-owned and led’ समाधान पर जोर फिलीपींस ने म्यांमार संकट का समाधान ऐसा होने की बात कही है जो देश के लोगों द्वारा स्वीकार किया गया हो और जिसका नेतृत्व भी म्यांमार के भीतर से हो। ASEAN लंबे समय से Myanmar crisis को लेकर Five-Point Consensus के जरिए हिंसा कम करने, संवाद बढ़ाने और humanitarian assistance पहुंचाने की कोशिश करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई गंभीर चिंता United Nations ने भी Kyauktaw एयरस्ट्राइक की खबरों पर चिंता जताई है। UN Secretary-General Antonio Guterres ने हिंसा रोकने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और humanitarian workers को सुरक्षित तथा बिना बाधा के प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच देने की मांग की है। 2021 से गृहयुद्ध जैसी स्थिति म्यांमार में फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से संघर्ष लगातार जारी है। सैन्य शासन और विभिन्न armed groups के बीच लड़ाई में देश के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं। अनुमान के मुताबिक संघर्ष में अब तक लगभग एक लाख लोगों की मौत हो चुकी है और 35 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। Arakan Army और सेना के बीच संघर्ष रखाइन राज्य में Arakan Army म्यांमार की सेना के खिलाफ लंबे समय से लड़ रही है और राज्य के बड़े हिस्सों पर उसका नियंत्रण है। ताजा एयरस्ट्राइक को हाल के महीनों में रखाइन में हुए सबसे घातक हवाई हमलों में से एक बताया जा रहा है। ASEAN पर बढ़ा दबाव फिलीपींस के बयान के बाद म्यांमार संकट को लेकर ASEAN की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। क्षेत्रीय संगठन पर हिंसा रोकने, नागरिकों की सुरक्षा और राजनीतिक समाधान की दिशा में अधिक प्रभावी कदम उठाने का दबाव लगातार बना हुआ है। source – Reuters / United Nations / Channel News Asia / The Straits Times जय राष्ट्र न्यूज़

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