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जय राष्ट्र न्यूज

इंदौर में राहुल गांधी का स्वागत, समर्थकों ने लगाए नारे; ‘छात्रों की गूंज’ में युवाओं से किया संवाद

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक कई स्थानों पर समर्थक जुटे और ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ तथा ‘घर-घर गांधी, राहुल गांधी जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए। राहुल गांधी 19 सितंबर को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्रों से शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बातचीत की। इंदौर एयरपोर्ट पर जुटे कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले ही देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जुटने लगे थे। स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट से होटल तक कई स्थानों पर व्यवस्थाएं की थीं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी के एयरपोर्ट पहुंचने पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने उनकी अगवानी की। एयरपोर्ट से रेडिसन होटल जाने वाले रास्ते में लवकुश चौराहा, एमआर-10 और विजय नगर समेत कई स्थानों पर स्वागत की तैयारियां की गई थीं। समर्थकों ने लगाए राहुल गांधी के समर्थन में नारे राहुल गांधी के काफिले के रास्ते और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने— “राहुल गांधी जिंदाबाद” और “घर-घर गांधी, राहुल गांधी जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। कुछ युवा ‘RAGA’ लिखा चश्मा पहनकर भी कार्यक्रम में पहुंचे। कार्यक्रम में ग्वालियर से पहुंची एक युवती अपने साथ “आपसे प्यार है इसलिए इंदौर आए हैं” लिखा पोस्टर लेकर आई थी। इस तरह के पोस्टर और नारे कार्यक्रम स्थल पर मौजूद समर्थकों के उत्साह का हिस्सा रहे। स्वागत के लिए बनाए गए थे कई मंच राहुल गांधी के दौरे से पहले कांग्रेस नेताओं ने एयरपोर्ट से होटल तक कई जगह स्वागत मंच तैयार किए थे। हालांकि राहुल गांधी का कार्यक्रम निर्धारित होने के कारण वे इन सभी मंचों पर नहीं रुके और उनका काफिला सीधे आगे बढ़ा। एयरपोर्ट और एमआर-10 इलाके में समर्थकों की भीड़ देखने को मिली। शहर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान भी लागू किया था। 13 मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित किया गया और कुछ हिस्सों को नो-व्हीकल जोन बनाया गया था। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुए राहुल गांधी इंदौर दौरे का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होना था। कार्यक्रम इंदौर के रीजनल पार्क के पास IDA मैदान में आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में छात्र और युवा पहुंचे। राहुल गांधी ने मंच से छात्रों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। यह ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का पांचवां आयोजन था। इससे पहले इस अभियान के कार्यक्रम कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में आयोजित किए जा चुके थे। छात्रों ने उठाए रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दे कार्यक्रम में युवाओं ने बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों में देरी, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं जैसे विषय उठाए। राहुल गांधी ने इन मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और कहा कि छात्रों को प्रश्न पूछने का अधिकार होना चाहिए। उनके ये बयान कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप और दृष्टिकोण थे। राहुल गांधी ने कार्यक्रम की शुरुआत में इंदौर में मिले स्वागत के लिए मौजूद लोगों का धन्यवाद भी किया। कार्यक्रम के बाहर राजनीतिक विरोध भी राहुल गांधी के स्वागत के साथ-साथ उनके दौरे को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला। कार्यक्रम से पहले इंदौर में कई जगह ‘झूठ की गूंज’ लिखे पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए थे। कांग्रेस ने इसके पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा की ओर से इसे छात्रों की प्रतिक्रिया बताया गया। इन दावों की जिम्मेदारी संबंधित राजनीतिक पक्षों की है। इस तरह राहुल गांधी का इंदौर दौरा एक तरफ कांग्रेस समर्थकों के स्वागत और नारेबाजी के कारण चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी जारी रही। राहुल गांधी ने स्वागत के लिए जताया आभार कार्यक्रम में राहुल गांधी ने इंदौर के लोगों और युवाओं को संबोधित करते हुए स्वागत के लिए धन्यवाद दिया। इसके बाद उन्होंने छात्रों के साथ शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। कार्यक्रम में पोस्टर, नारे, संगीत और छात्रों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। Times of India ने कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में युवाओं, पोस्टरों और नारेबाजी का उल्लेख किया है। इंदौर कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को राज्य के दूसरे जिलों तक ले जाने की घोषणा भी की।

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राहुल गांधी पर महिला की तीखी टिप्पणी, बोलीं- ‘राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है’

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर एक महिला की तीखी टिप्पणी चर्चा में है। सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रतिक्रिया में महिला को यह कहते हुए बताया जा रहा है कि “राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है।” यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब इंदौर में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। हालांकि महिला की उक्त टिप्पणी एक व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे राहुल गांधी की मानसिक स्थिति के बारे में किसी चिकित्सकीय तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। राहुल गांधी के हालिया ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बोलने की शैली की मिमिक्री की थी और राहुल गांधी भी उस दौरान मंच पर मौजूद थे। इस प्रस्तुति के कुछ हिस्सों को लेकर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक व्यंग्य के रूप में बचाव किया। महिला की टिप्पणी क्यों हुई चर्चा में? इस पूरे विवाद के बीच राहुल गांधी को लेकर आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक प्रतिक्रिया में उत्तर प्रदेश की एक महिला को राहुल गांधी की आलोचना करते हुए “राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है” कहते हुए बताया जा रहा है। महिला की यह टिप्पणी राजनीतिक नाराजगी की अभिव्यक्ति है। इस तरह की भाषा किसी व्यक्ति की वास्तविक मानसिक या चिकित्सकीय स्थिति साबित नहीं करती। उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स में इस exact टिप्पणी करने वाली महिला की पहचान और वीडियो के मूल स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। हालांकि राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम को लेकर महिलाओं की ओर से आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं आने की रिपोर्ट जरूर सामने आई है। Times Now Navbharat की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, देहरादून और बरेली समेत अलग-अलग जगहों पर महिलाओं ने कार्यक्रम की आलोचना की और राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाए। किस घटना को लेकर शुरू हुआ विवाद? 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं, फीस और युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को उठाना था। राहुल गांधी कार्यक्रम में मौजूद थे। इसी दौरान कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। प्रस्तुति में प्रधानमंत्री द्वारा एक बुजुर्ग महिला को कुर्सी दिए जाने से जुड़े प्रसंग का भी संदर्भ आया। इसके बाद भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तुति के जरिये प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां का अपमान किया गया। कांग्रेस और उसके समर्थकों ने इस व्याख्या से असहमति जताई है और कहा कि इसे राजनीतिक व्यंग्य तथा हास्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी साधा निशाना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इंदौर कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं और बुजुर्गों का सम्मान भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और कांग्रेस नेता के व्यवहार की आलोचना की। यह भाजपा का राजनीतिक पक्ष है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अन्य भाजपा नेताओं ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा ने पूरे विवाद को महिला सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस से जवाब मांगा। कांग्रेस ने क्या कहा? दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा की आलोचना का विरोध किया है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने सवाल किया कि राजनीतिक व्यंग्य और हास्य को लेकर भाजपा इतनी आपत्ति क्यों जता रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेताओं ने अतीत में कांग्रेस नेताओं को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं। हालांकि Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के अंदर भी कुछ नेताओं ने माना कि मिमिक्री का यह हिस्सा टाला जा सकता था, क्योंकि इससे छात्रों के मूल मुद्दों से ध्यान हट गया। रिपोर्ट में तीन कांग्रेस नेताओं के हवाले से ऐसी राय सामने आई। महिलाओं की प्रतिक्रियाएं भी आईं सामने विवाद के बाद कई महिलाओं की प्रतिक्रियाओं में यह कहा गया कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी नेता की मां या परिवार को राजनीतिक मजाक में शामिल करने से बचना चाहिए। Times Now Navbharat की रिपोर्ट के अनुसार कुछ महिलाओं ने राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाए और कहा कि सार्वजनिक मंच पर भाषा तथा व्यवहार की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी माहौल में राहुल गांधी के खिलाफ कथित तौर पर उत्तर प्रदेश की महिला की तीखी टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा में आई है। वायरल बयान को लेकर क्या सावधानी जरूरी? सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति का छोटा वीडियो तेजी से वायरल होने पर उसका पूरा संदर्भ कई बार सामने नहीं आता। इसलिए महिला के कथित “राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है” बयान को एक व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इस बयान के आधार पर राहुल गांधी की मानसिक स्थिति के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। साथ ही वीडियो के मूल स्रोत, महिला की पहचान और पूरी बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे व्यापक जनमत का प्रतिनिधित्व मानना भी सही नहीं होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हुई मिमिक्री ने भाजपा और कांग्रेस के बीच नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे महिला सम्मान और राजनीतिक मर्यादा से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस पक्ष इसे राजनीतिक व्यंग्य और छात्रों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है।

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धीरेंद्र शास्त्री की ‘सोने की खड़ाऊ’ का दावा कितना सच? सामने आई सफाई

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उनके पैरों में नजर आई सुनहरे रंग की खड़ाऊ को लेकर दावा किया जाने लगा कि वह सोने की बनी हुई है। वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद अब खुद धीरेंद्र शास्त्री ने इस दावे पर सफाई देते हुए बताया है कि उनकी खड़ाऊ सोने की नहीं, बल्कि लकड़ी की है, जिस पर गोल्डन रंग किया गया है। सोशल मीडिया पर किसी तस्वीर या वीडियो के आधार पर किए गए दावे अक्सर तेजी से वायरल हो जाते हैं। ऐसा ही मामला अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की खड़ाऊ को लेकर सामने आया है। सितंबर 2026 में मुंबई दौरे के दौरान धीरेंद्र शास्त्री की कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। उनके पैरों में सुनहरे रंग की पारंपरिक खड़ाऊ दिखाई दी। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे ‘सोने की खड़ाऊ’ बताते हुए सवाल उठाने शुरू कर दिए। कहां से शुरू हुई ‘सोने की खड़ाऊ’ की चर्चा? यह मामला मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया में आयोजित गणेश उत्सव से जुड़ा है। कार्यक्रम में पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री कैमरों के सामने दिखाई दिए तो उनकी सुनहरे रंग की खड़ाऊ ने लोगों का ध्यान खींचा। तस्वीरों में खड़ाऊ चमकीले गोल्डन रंग में दिखाई दे रही थी। इसी के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा फैलने लगा कि बागेश्वर बाबा सोने की खड़ाऊ पहनते हैं। हालांकि, तस्वीर में किसी वस्तु का सुनहरे रंग का दिखाई देना अपने आप में उसके सोने का बना होने का प्रमाण नहीं है। क्या सच में सोने की थी खड़ाऊ? अब तक सामने आई विश्वसनीय रिपोर्टों में खड़ाऊ के असली सोने से बने होने की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसके उलट धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्वयं कहा है कि खड़ाऊ लकड़ी से बनी हुई है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। कुछ रिपोर्टों में भी इसे लकड़ी की पारंपरिक खड़ाऊ बताया गया है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर चल रहा ‘सोने की खड़ाऊ’ वाला दावा प्रमाणित नहीं होता। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या सफाई दी? विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने अपने अंदाज में इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि वे मुकेश अंबानी के घर गणेश उत्सव में शामिल होने गए थे, लेकिन कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा उनकी खड़ाऊ की होने लगी। शास्त्री के अनुसार, उनकी खड़ाऊ सामान्य लकड़ी की है और किसी ने उस पर गोल्डन पेंट कर दिया था। उसी रंग के कारण लोगों ने उसे सोने की खड़ाऊ मान लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इतना ज्ञान है कि सोना पैरों में नहीं पहना जाता। ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’ इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने मजाकिया अंदाज भी अपनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि अब अगर लोग उनकी खड़ाऊ को लेकर इतनी चर्चा कर रहे हैं तो अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बनवाने की सोचेंगे। उनका यह बयान व्यंग्यात्मक अंदाज में दिया गया था। इसके साथ ही उन्होंने आलोचकों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का भी जवाब दिया। तस्वीरों में क्यों लगी सोने की? वायरल वीडियो और तस्वीरों में खड़ाऊ पर चमकदार सुनहरी फिनिश दिखाई देती है। यही कारण माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर लोगों ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के उसे सोने का समझ लिया। 16 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी उपलब्ध तस्वीरों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर खड़ाऊ को लकड़ी का बताया गया था, जिस पर गोल्डन फिनिश थी। ऐसे में सिर्फ तस्वीरों के आधार पर खड़ाऊ के वास्तविक पदार्थ या उसकी कीमत के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। क्या है वायरल दावे की सच्चाई? दावा: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोने की खड़ाऊ पहनकर एंटीलिया पहुंचे थे। उपलब्ध तथ्य: वायरल खड़ाऊ के सोने से बने होने का कोई स्वतंत्र या आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि वह लकड़ी की खड़ाऊ है जिस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। इसलिए मौजूदा उपलब्ध जानकारी के आधार पर ‘धीरेंद्र शास्त्री ने सोने की खड़ाऊ पहनी थी’ वाला दावा पुष्ट नहीं है। पूरे विवाद की शुरुआत खड़ाऊ के सुनहरे रंग से हुई और बाद में सोशल मीडिया पर इसे असली सोने से जोड़कर पेश किया जाने लगा। धीरेंद्र शास्त्री की सफाई के बाद फिलहाल यही सामने आता है कि खड़ाऊ लकड़ी की थी, जिस पर गोल्डन पेंट या फिनिश किया गया था।

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सेलेब्रिटीज की ट्रोलिंग पर सलमान खान ने उठाए सवाल, बोले- हर मुद्दे पर हमसे जवाब क्यों?

उन्होंने इस तरह के कथित पेड प्रमोशन और पेड ट्रोलिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे किसी फिल्म या कलाकार के बारे में दर्शकों के बीच गलत धारणा बन सकती है। यह भी सलमान द्वारा कार्यक्रम में किया गया दावा है। सलमान की बात के समर्थन में आईं रिचा चड्ढा सलमान खान के बयान के बाद अभिनेत्री रिचा चड्ढा ने भी उनके बॉडी शेमिंग विरोधी रुख का समर्थन किया। रिचा ने खास तौर पर मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में आने वाले बदलावों को लेकर होने वाली ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया दी और महिलाओं के प्रति अधिक संवेदनशील रवैया अपनाने की बात कही। पूर्व केंद्रीय मंत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने भी ऑनलाइन ट्रोलिंग के मुद्दे पर सलमान की टिप्पणियों का समर्थन करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने की आजादी किसी व्यक्ति को अपमानित करने का आधार नहीं हो सकती। सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस सलमान खान के बयान के बाद से सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटीज की ट्रोलिंग, बॉडी शेमिंग और उनकी निजी सीमाओं को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक पक्ष का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों के काम पर आलोचना स्वाभाविक है, जबकि व्यक्तिगत रूप, उम्र या शरीर को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों को आलोचना से अलग माना जाना चाहिए। सलमान खान की टिप्पणी ने इसी अंतर पर ध्यान खींचा है—कि किसी कलाकार के काम की समीक्षा और उसकी निजी जिंदगी या शरीर पर व्यक्तिगत हमला दो अलग बातें हैं। फिलहाल बिग बॉस 20 के Weekend Ka Vaar से सामने आए सलमान के ये बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं और मनोरंजन जगत के कई लोगों ने ऑनलाइन ट्रोलिंग तथा बॉडी शेमिंग के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है।

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आया। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि UGC Equity Regulations 2026 पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार नियमों की समीक्षा कर रही है, हालांकि उस समय यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अंतिम निर्णय क्या होगा। सुप्रीम कोर्ट ने UGC को इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था। ऐसे में शेर सिंह राणा और अन्य संगठनों की ओर से नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग ऐसे समय सामने आई है जब मामला न्यायिक समीक्षा और सरकारी पुनर्विचार—दोनों प्रक्रियाओं से गुजर रहा है। कई जगह जारी है UGC नियमों का विरोध UGC Equity Regulations को लेकर विरोध केवल बिजनौर तक सीमित नहीं रहा है। सितंबर 2026 में दिल्ली में भी करणी सेना ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। इसको लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा। वहीं 20 सितंबर को आगरा में भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी UGC नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने यमुना एक्सप्रेसवे की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। अब आगे क्या? UGC के 2026 Equity Regulations फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण लागू नहीं हैं और 2012 के नियम प्रभावी बने हुए हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने अदालत में कहा है कि 2026 के नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है। ऐसे में अब ध्यान केंद्र सरकार, UGC और सुप्रीम कोर्ट में जारी प्रक्रिया पर रहेगा। शेर सिंह राणा और विरोध कर रहे अन्य संगठनों ने जहां नियमों को वापस लेने की मांग की है, वहीं 2026 के नियमों का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों के समाधान और समानता की व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है।

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बंगाल उपचुनाव में बड़ा ट्विस्ट! नंदीग्राम से रेजीनगर तक बदले समीकरण

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। उम्मीदवारों के नाम वापस लेने, फैसले पलटने और गिरफ्तारियों ने दोनों सीटों के मुकाबले को नया रूप दे दिया है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया है, जबकि रेजीनगर में उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला बदल दिया। पश्चिम बंगाल की दो चर्चित विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। मतदान से पहले ही दोनों सीटों पर ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति को प्रभावित किया है। नंदीग्राम में उम्मीदवार हटा, कांग्रेस को मिला समर्थन नंदीग्राम में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इस फैसले के कारण नंदीग्राम में चुनावी मुकाबले की संरचना बदल गई और कांग्रेस उम्मीदवार पर राजनीतिक ध्यान बढ़ गया। लेकिन इसके तुरंत बाद एक और घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी के समय को लेकर राजनीतिक दबाव के आरोप लगाए, जबकि राज्य सरकार ने अदालत में मामलों और लंबित वारंट से जुड़ी जानकारी दी। ये आरोप राजनीतिक पक्षों के दावे हैं और इन पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। 22 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया कि मिलन प्रधान से संबंधित पांच मामलों को वापस लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान फिलहाल अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने मामले पर आगे सुनवाई के लिए तारीख तय की है। BJP ने हसीरानी रथ को उतारा मैदान में भारतीय जनता पार्टी ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। हसीरानी रथ चंद्रनाथ रथ की मां हैं। वहीं वाम मोर्चे की ओर से CPI उम्मीदवार शांतिगोपाल गिरि मैदान में हैं। इस तरह नंदीग्राम में उम्मीदवारों और दलों के बीच मुकाबले की तस्वीर पिछले कुछ दिनों में लगातार बदली है। नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से ही महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र रहा है। मौजूदा उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के यह सीट छोड़कर भवानीपुर सीट बरकरार रखने के बाद आवश्यक हुआ। रेजीनगर में कुछ घंटों में पलटा फैसला नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले उपचुनाव से हटने की घोषणा कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रबीउल ने चुनाव चिह्न और प्रचार से जुड़ी समस्याओं सहित कई कारण बताए थे। हालांकि कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना निर्णय बदल दिया और कहा कि वे रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे। ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व से बातचीत के बाद उनका यह फैसला सामने आया। इस यू-टर्न के बाद रेजीनगर में मुकाबले की तस्वीर फिर बदल गई और रबीउल आलम चौधरी चुनावी मैदान में बने हुए हैं। रेजीनगर में उम्मीदवार की गिरफ्तारी से बढ़ी राजनीतिक हलचल रेजीनगर में एक अन्य घटनाक्रम में निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प से जुड़े एक पुराने मामले में की गई। सैफुल इस्लाम का संबंध हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) से बताया गया है। AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने भी चुनाव से पहले पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए हैं और निर्वाचन आयोग में शिकायत की है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी से जुड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ये हुमायूं कबीर के आरोप हैं; पुलिस और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से घटनाओं की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। BJP ने यहां शाखरव सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि वाम मोर्चे की ओर से CPI(M) के सैयद असद अली चुनाव मैदान में हैं। नंदीग्राम से रेजीनगर तक क्यों बदले समीकरण? पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को देखें तो नंदीग्राम में तृणमूल खेमे के उम्मीदवार के हटने और कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन मिलने से पहले से घोषित मुकाबले की संरचना बदली है। दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बन गई है। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी के पहले पीछे हटने और फिर चुनाव लड़ने के फैसले ने वहां उम्मीदवारों की स्थिति को बदल दिया। इसके साथ निर्दलीय उम्मीदवार की गिरफ्तारी तथा हुमायूं कबीर के पुलिस कार्रवाई संबंधी आरोपों ने चुनावी बहस को और व्यापक बनाया है। इन घटनाओं का मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा, इसका स्पष्ट जवाब मतदान और मतगणना के बाद ही मिलेगा। फिलहाल दोनों सीटों पर राजनीतिक दल प्रचार, उम्मीदवारों और कानूनी घटनाक्रम के बीच अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। मुख्य बातें: नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे। नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे की उम्मीदवारी वापस होने के बाद कांग्रेस के मिलन प्रधान को ममता बनर्जी खेमे का समर्थन मिला है। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने की घोषणा के कुछ घंटे बाद चुनाव लड़ने का फैसला बरकरार रखा। दोनों सीटों पर गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं।

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आज Petrol-Diesel Rates ज्यादातर शहरों में स्थिर; Brent Crude $104 से नीचे आने से Fuel Market को राहत

नई दिल्ली, 20 सितंबर 2026: India में आज petrol और diesel के rates ज्यादातर major cities में स्थिर बने हुए हैं। Delhi, Mumbai, Kolkata और Chennai समेत बड़े शहरों में पिछले दिन के मुकाबले कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। वहीं global market में Brent crude $104 प्रति barrel से नीचे आने से fuel market पर कुछ दबाव कम हुआ है। Delhi में Petrol ₹102.12, Diesel ₹95.20 आज के latest city-wise rates के मुताबिक: इन cities में rates broadly stable बने हुए हैं। Brent Crude $103–104 Range में Friday के global trading session में Brent crude करीब $103.87 per barrel पर था। इससे पहले Middle East tensions के कारण crude $105–107 range तक पहुंच गया था। Oil prices में हालिया नरमी Saudi Arabia की ओर से additional crude supply और Middle East supply disruptions को लेकर कुछ easing expectations से जुड़ी है। Retail Fuel Prices में अभी बड़ा Cut नहीं Brent crude नीचे आने के बावजूद India में petrol-diesel retail rates में आज कोई major nationwide reduction नहीं हुआ है। Retail prices पर global crude के अलावा rupee-dollar exchange rate, central और state taxes, transportation cost और oil marketing companies की pricing strategy का भी असर पड़ता है। Rupee की कमजोरी अभी भी चिंता India अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है। ऐसे में Rupee कमजोर होने पर imported crude की landed cost बढ़ जाती है। हाल के sessions में Rupee ₹96 प्रति Dollar के आसपास दबाव में रहा है, जिससे crude prices में गिरावट का पूरा फायदा domestic fuel prices तक पहुंचने में समय लग सकता है। Middle East Tension अभी खत्म नहीं Crude prices में फिलहाल कुछ नरमी आई है, लेकिन Strait of Hormuz, Saudi oil infrastructure और Houthi attacks को लेकर geopolitical risks अभी बने हुए हैं। इसलिए global oil prices में आगे भी volatility देखने को मिल सकती है। Consumers को फिलहाल राहत आज के rates में major hike नहीं होने से daily commuters को immediate राहत है। हालांकि Hyderabad, Kolkata और Mumbai जैसे cities में petrol अभी भी ₹110 प्रति litre से ऊपर बना हुआ है। source – Business Today / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Asian Games 2026 में India का Medal Account खुला; Women’s 10m Air Rifle Team ने Silver जीता

आइची-नागोया, जापान, 20 सितंबर 2026: Asian Games 2026 में India ने अपना पहला medal जीत लिया है। Women’s 10m Air Rifle Team event में Elavenil Valarivan, Sonam Maskar और Vidarsa Vinod की भारतीय trio ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Silver Medal अपने नाम किया। Indian shooters ने कुल 1898.0 points के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। China ने Gold, India ने Silver जीता Women’s 10m Air Rifle Team event में China ने 1904.2 points के world-record score के साथ Gold Medal जीता। India 1898.0 points के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि host Japan ने 1897.1 points के साथ Bronze Medal हासिल किया। India और Japan के बीच सिर्फ 0.9 point का अंतर रहा। Sonam Maskar ने बनाए सबसे ज्यादा Points Indian team की ओर से Sonam Maskar ने 634.1 points के साथ सबसे मजबूत performance दिया। Elavenil Valarivan ने 633.5 points, जबकि Vidarsa Vinod ने 630.4 points score किए। तीनों के combined score ने India को podium पर पहुंचाया। Sonam और Elavenil Individual Final में भी पहुंचीं Team Silver के बाद India के लिए individual medal की उम्मीद भी बनी हुई है। Sonam Maskar और Elavenil Valarivan ने Women’s 10m Air Rifle individual final के लिए qualify कर लिया है। इससे India को shooting में और medals जीतने का मौका मिलेगा। Asian Games 2026 में India का पहला Confirmed Medal यह Aichi-Nagoya Asian Games में India का पहला confirmed medal है। Day 1 medal-less रहने के बाद shooting contingent ने दूसरे दिन देश का medal account खोला। India को MMA में भी Medal Assured India को Women’s Traditional 60kg Mixed Martial Arts में भी medal assured है। Suchika Tariyal semifinal में पहुंच चुकी हैं, जिससे India के medal tally में जल्द एक और medal जुड़ना तय है। source – The Indian Express / Business Standard / The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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IIT Bombay Student Death Case में Professor के खिलाफ Abetment और SC/ST Act के तहत FIR; Institute ने Caste Discrimination के आरोप से इनकार किया

मुंबई, 20 सितंबर 2026: IIT Bombay के second-year BTech student Sahil Wakode की मौत के मामले में Powai Police ने institute के Professor Suryanarayana Doolla और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ abetment to suicide तथा Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act के तहत FIR दर्ज की है। Sahil के parents ने professor और institute officials पर caste-based harassment का आरोप लगाया है। मामले की जांच अब Mumbai Crime Branch को transfer कर दी गई है। Parents ने Caste Harassment का लगाया आरोप Sahil के पिता ने police complaint में आरोप लगाया कि उनके बेटे को पिछले कुछ महीनों से caste-related remarks और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। उनका दावा है कि Sahil ने परिवार को professor द्वारा कथित caste-based harassment की जानकारी पहले भी दी थी। ये आरोप फिलहाल investigation का हिस्सा हैं और court में साबित नहीं हुए हैं। Exam के दौरान Mobile मिलने के बाद हुआ था घटनाक्रम 20 वर्षीय Sahil IIT Bombay के Department of Energy Science and Engineering में second-year student था। Friday को mid-semester examination के दौरान उसके पास mobile phone मिलने और question paper को AI platform पर upload करने का आरोप सामने आया था। इसके कुछ घंटों बाद वह hostel में मृत मिला। Professor Suryanarayana Doolla का नाम FIR में Reports के मुताबिक exam के दौरान Professor Suryanarayana Doolla invigilator थे। Sahil के पिता की complaint के आधार पर Powai Police ने professor को FIR में named accused बनाया है। Police ने Bharatiya Nyaya Sanhita के abetment-related provisions के साथ SC/ST Act की धाराएं भी लगाई हैं। IIT Bombay ने Caste Discrimination से किया इनकार IIT Bombay administration ने Sahil के साथ caste discrimination या suspension की धमकी दिए जाने के आरोपों से इनकार किया है। Institute का कहना है कि Sahil ने अपने समय के दौरान SC/ST Cell या administration के पास caste discrimination से जुड़ी कोई complaint दर्ज नहीं कराई थी। IIT Bombay ने यह भी कहा कि वह police investigation में पूरा सहयोग करेगा। Students ने Campus में किया Protest Sahil की मौत के बाद campus में बड़ी संख्या में students ने protest किया। Students ने institute की handling और disciplinary processes को लेकर सवाल उठाए और transparency की मांग की। Protests के बाद ongoing mid-semester examinations भी postpone किए गए। Investigation Crime Branch को Transfer Powai Police द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद late Saturday मामले की investigation Mumbai Crime Branch को सौंप दी गई। अब investigators parents के allegations, institute records, exam-related घटनाक्रम और संबंधित लोगों के statements की जांच करेंगे। source – Mumbai Police / The Indian Express / Times of India / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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Saudi Arabia का दावा—Houthis ने Riyadh पर Ballistic Missile दागी; Air Defence ने किया Intercept

रियाद, 20 सितंबर 2026: Saudi Arabia ने कहा है कि Yemen के Houthi rebels ने राजधानी Riyadh की ओर ballistic missile दागी, जिसे Saudi air defence forces ने intercept और destroy कर दिया। हमला 19 सितंबर की सुबह हुआ था और आज इसकी विस्तृत जानकारी सामने आई है। Saudi-led coalition के मुताबिक यह हालिया escalation में Riyadh पर पहला बड़ा missile attack था। Riyadh में सुनी गई तेज Explosion Residents ने Riyadh में तेज धमाके की आवाज सुनने और King Khalid International Airport के आसपास smoke देखने की जानकारी दी। Saudi authorities ने कहा कि intercepted missile के कारण कोई confirmed casualty या major damage report नहीं हुआ। Houthis ने Riyadh पर हमले की जिम्मेदारी ली Houthi military spokesperson Yahya Saree ने दावा किया कि group ने Riyadh के “sensitive sites” पर ballistic और cruise missiles के साथ drones से हमला किया। Houthis ने यह भी दावा किया कि Saudi Aramco की Yanbu facilities को target किया गया। इन claims के सभी details की independent confirmation नहीं हुई है। Yanbu, Taif और Farasan पर भी Attack Attempts Saudi-led coalition का कहना है कि air defence systems ने Yanbu, Taif, Baysh और Farasan की ओर किए गए अन्य Houthi attack attempts को भी नाकाम किया। Yanbu Saudi Arabia का महत्वपूर्ण Red Sea oil hub है, इसलिए वहां किसी major disruption का global energy supply पर असर पड़ सकता है। Riyadh में जारी हुए Emergency Alerts Attack के दौरान Riyadh और Al-Kharj में emergency warning alerts जारी किए गए। Residents को safe places में रहने और open areas से दूर रहने की सलाह दी गई। Situation control में आने के बाद Saudi Civil Defence ने all-clear message जारी किया। Airport Operations भी हुए प्रभावित Attack के दौरान Riyadh के King Khalid International Airport की कई flights delay या cancel हुईं। Social media और verified footage में airport के आसपास black smoke दिखाई दिया। Saudi-Houthi Conflict में नया Escalation हाल के दिनों में Houthis ने Saudi territory पर attacks तेज किए हैं। दूसरी तरफ Saudi Arabia ने भी Yemen में Houthi positions पर military action किया है। Red Sea और Bab el-Mandeb के आसपास Houthi territorial gains और attacks ने regional security के साथ global shipping routes को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। Oil Supply और Shipping Routes पर नजर Saudi-Houthi confrontation ऐसे समय बढ़ा है जब Middle East के प्रमुख oil और shipping routes पहले ही तनाव में हैं। Analysts और governments अब Saudi oil infrastructure, Red Sea shipping और regional energy supply की security पर करीब से नजर रख रहे हैं। source – Saudi-led Coalition / Associated Press / Reuters / Al Arabiya जय राष्ट्र न्यूज़

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