मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2025: अप्रैल में कब है व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि?

April Masik Janmashtami rituals

भगवान श्रीकृष्ण की मासिक जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami) हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है जो हर महीने श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की उपासना करते हैं और उनसे कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। अप्रैल 2025 में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस दिन व्रत, पूजन, भजन-कीर्तन और रात के समय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। आइए जानें अप्रैल में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2025 तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 20 अप्रैल को शाम 7 बजे से होगी और यह तिथि 21 अप्रैल को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस गणना के आधार पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और पूजन 20 अप्रैल को संपन्न किया जाएगा।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु जी का आठवां अवतार माना जाता है। माघ मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami) पर भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की पूजा करने से भक्त को यश, सम्मान, धन-वैभव, पराक्रम, संतान सुख, लंबी आयु और समृद्ध जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास एवं पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। इसलिए यह व्रत अत्यंत शुभ और फलदायक माना गया है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखकर और श्रीकृष्ण (Lord Krishna) का ध्यान करने से पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से महिलाएं इस व्रत को संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए करती हैं।

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मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत और पूजा विधि

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami) के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। फिर लड्डू गोपाल की मूर्ति को जल, दूध और दही से स्नान कराएं। स्नान के बाद उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाएं और तिलक करें। भगवान को पुष्पमाला अर्पित करें, देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और भक्ति भाव से मंत्रों का जप करें। इसके बाद फल, मिठाई और अन्य प्रसाद अर्पित करें। पूजा के अंत में जरूरतमंदों को दान देना पुण्यकारी माना जाता है।

दान और पुण्य का महत्व

इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। वस्त्र, अन्न, फल, मिश्री, घी, धन और तुलसी सहित पूजन सामग्री का दान करने से भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं। जरूरतमंदों को भोजन कराने से जीवन में शुभ फल और समृद्धि प्राप्त होती है।

नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।

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