26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों (26/11 Mumbai Terror Attack) की भयावह यादें आज भी भारतवासियों के मन में ताजा हैं। इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। यह हमला पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar E Taiba) द्वारा सुनियोजित रूप से अंजाम दिया गया था। इस हमले से जुड़े कई किरदारों के नाम सामने आ चुके हैं, जिसमें से एक प्रमुख नाम तहव्वुर हुसैन राणा (Tahawwur Hussain Rana) का भी है। हाल ही में इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा किए गए पूछताछ में राणा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे हमलों की साजिश का अंदाजा मिलने के साथ-साथ पाकिस्तान की भूमिका भी सामने आई है।
पाकिस्तानी सेना का ‘भरोसेमंद’ व्यक्ति
तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) इस समय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कस्टडी में है और उससे मुंबई क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) ने अप्रैल 2025 में गहन पूछताछ की। राणा ने दावा किया कि वह कभी पाकिस्तानी सेना का भरोसेमंद व्यक्ति था। उसने यह भी बताया कि 1990 में इराक द्वारा कुवैत पर हमले के समय उसे सऊदी अरब में एक गुप्त सैन्य मिशन पर भेजा गया था। इससे साफ होता है कि उसे पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) के भीतर एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली थी। राणा ने बताया कि उसने 1986 में रावलपिंडी स्थित आर्मी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और फिर क्वेटा में सेना के डॉक्टर के रूप में तैनात हुआ। इसके अलावा उसने पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों जैसे सिंध, बलूचिस्तान, बहावलपुर और सियाचिन-बालोतरा सेक्टर में भी सेवा दी।
कट्टर विचारधारा और पुराने बयान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राणा मानसिक रूप से अभी भी अपने पुराने बयानों पर अडिग है। वह जानकारी तो दे रहा है, लेकिन उसकी बातचीत में उसकी कट्टरपंथी विचारधारा की झलक साफ दिखती है। उसकी बातों से यह भी समझा जा सकता है कि वह अब भी भारत के खिलाफ नकारात्मक भावनाएं रखता है।
अन्य साजिशकर्ताओं से संबंध
26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) ने पूछताछ में माना कि वह 26/11 के अन्य प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल साजिद मीर, मेजर इकबाल और अब्दुल रहमान पाशा को जानता था। ये तीनों पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं और लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar E Taiba) के अहम सदस्य है। भारत में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले में इन सभी की भूमिका को पहले ही दस्तावेजी तौर पर दर्ज किया जा चुका है।
डेविड हेडली से जुड़ी जानकारियां
26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) ने अमेरिकी-पाकिस्तानी नागरिक डेविड हेडली के बारे में भी कई खुलासे किए। उसने बताया कि हेडली ने 2003-2004 के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar E Taiba) के तीन प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया था। हालांकि वह इन कोर्सों के नाम स्पष्ट रूप से नहीं बता सका। जब मुंबई में खुले इमिग्रेशन सेंटर के विचार पर सवाल किया गया, तो राणा ने दावा किया कि यह विचार उसका था, न कि हेडली का। उसने यह भी कहा कि उसने हेडली को जो पैसे भेजे, वे व्यवसायिक खर्चों के लिए थे। हालांकि, वह यह स्वीकार करता है कि मुंबई में दफ्तर होने के बावजूद ग्राहकों को आकर्षित करने में समस्याएं आ रही थीं।
सैन्य करियर और बर्खास्तगी
26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा ने अपने सैन्य करियर के बारे में बताते हुए कहा कि सियाचिन पोस्टिंग के दौरान उसे पल्मोनरी एडिमा (फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति) हो गई थी, जिससे वह लंबे समय तक ड्यूटी पर नहीं लौट सका। इस कारण उसे पाकिस्तानी सेना द्वारा भगोड़ा घोषित कर दिया गया और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
अमेरिका से भारत तक का सफर
तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) मूल रूप से पाकिस्तान का निवासी है लेकिन बाद में कनाडा की नागरिकता ले ली थी और अमेरिका में बस गया था। वह एक व्यवसायी के रूप में अमेरिका में कार्य कर रहा था। राणा की अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अप्रैल 2024 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राणा की अपील खारिज कर दी और उसका भारत प्रत्यर्पण सुनिश्चित हुआ।
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26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) से हुई पूछताछ भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद अहम है। उसके बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका 26/11 जैसे हमलों में कितनी गहरी है। राणा जैसे व्यक्ति, जो पहले डॉक्टर थे और सेना में सेवा कर चुके थे, किस प्रकार आतंकवाद की ओर मुड़े, यह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कट्टरपंथ कैसे शिक्षित और प्रशिक्षित लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) से और भी खुलासे होने की संभावना है, जो इस हमले से जुड़े शेष रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं। साथ ही, यह भारत के लिए वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के खिलाफ ठोस सबूत भी प्रस्तुत कर सकता है।
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