iPhone 17 delay

Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline: Foxconn के इस कदम से iPhone 17 के प्रोडक्शन में हो सकती है देरी

आईफोन 17 का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आईफोन के प्रोडक्शन को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, आईफोन बनाने वाली बड़ी कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) ने 300 से अधिक चीनी इंजीनियर्स और टेक्नीशियंस से भारत छोड़ने को कहा है। गौरतलब फॉक्सकॉन,आईफोन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। जानकारी के मुताबिक ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका और चीन के बीच चल रही तनातनी को देखते हुए यह फैसला लिया गया (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) है। गौर करनेवाली बात यह है कि यह सब उस समय हो रहा है जब ऐपल भारत में अपना बिजनेस बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में भारत में आईफोन को असेंबल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। खबर तो यह भी है कि पिछले कई महीनों में चीनी कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़कर चीन वापिस लौट चुके हैं।  अमेरिका और चीन के बीच आए व्यापारिक तनाव के बाद आईफोन के कारोबार को वहां से शिफ्ट होने से रोकने की एक बड़ी (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) कोशिश है बता दें कि चीन की तरफ से लगातार इस बात का दबाव बनाया जा रहा था कि वे भारत और दक्षिण एशिया में आईफोन के प्रोडक्शन से जुड़े टेक्नोलॉजी को न भेजे और न ही प्रशिक्षित स्टाफ को ही वहां से (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) भेजे। ऐसा अमेरिका और चीन के बीच आए व्यापारिक तनाव के बाद आईफोन के कारोबार को वहां से शिफ्ट होने से रोकने की एक बड़ी कोशिश है। वर्तमान में एपल के कुल उत्पादन का पांचवां हिस्सा भारत में प्रोडक्शन हो रहा है। और ये सिर्फ चार साल के अंदर हुआ है। एपल की कोशिश थी कि अमेरिका में बिकने वाले ज्यादातर फोन का 2026 के आखिर तक भारत में ही प्रोडक्शन हो, लेकिन टेक्निकल स्टॉक की भारी कमी की वजह से अब इसके प्रोडक्शन में देरी हो सकती है।  चीनी कर्मचारी सबसे बड़ी मजबूरी (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) हैं क्योंकि दोनों में टेक्निकल स्किल गैप पैदा हो सकता है। फॉक्सकॉन के अनुभवी चीनी टेक्नीशियंस न सिर्फ प्रोडक्शन को मैनेज करते थे, बल्कि साथ ही वो लोकल वर्कफोर्स को ट्रेनिंग देते थे। अब उनकी गैरमौजूदगी में आईफोन जैसे हाई-एंड प्रोडक्ट्स को असेंबल करना चुनौतियों भरा हो सकता है। महत्वपूर्ण बात यह कि लंबे समय से आईफोन चीन में ही बनते आए हैं, ऐसे में चीनी कर्मचारी उनकी सबसे बड़ी मजबूरी (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) हैं। बेशक आईफोन बनाने का जितना अनुभव है चीनी कर्मचारियों के पास उतना भारतीयों के पास नहीं है। इससे प्रोडक्शन की स्पीड प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में जब तक भारत में उतनी ही अनुभवी लोकल टीम तैयार नहीं हो जाती, तब तक फॉक्सकॉन को कई ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कहने की जरूरत नहीं चीनी इंजीनियरों की वापसी से भारत की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स प्रभावित हो सकती है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के चलते फॉक्सकॉन के इस कदम से भारत में आईफोन का निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। और इसकी वजह से iPhone 17 के उत्पादन में देरी संभव है। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले फॉक्सकॉन और ऐपल आईफोन 17 की ज्यादा से ज्यादा यूनिट बनाने की तैयारी कर रहे हैं इस पूरे मामले पर विशेषज्ञों का कहना है कि “भारत में आईफोन 17 लाइनअप के प्रोडक्शन में देरी हो सकती है। ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन तमिलनाडु के ओरागदम में ईएसआर (ESR) इंडस्ट्रियल पार्क में एक नई यूनिट स्थापित की (Foxconn Move May Delay iPhone 17 Production Timeline) है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने भारत और साउथ-ईस्ट एशिया में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने और इंजीनियरों को भेजने पर रोक के लिए एजेंसियों और स्थानीय सरकारों पर दबाव बनाया है। जानकारों के मुताबिक, फॉक्सकॉन और ऐपल आईफोन 17 की ज्यादा से ज्यादा यूनिट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अगर अनुभवी चीनी कर्मचारियों को प्रोडक्शन के काम से वापिस बुलाया जाता है, तो नए मॉडल्स की प्रोडक्शन बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi  Foxconn #Foxconn #iPhone17 #AppleNews #iPhoneDelay #TechUpdate #AppleLeak #iPhone17Launch

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Thailand scam 2025

कंबोडियाई अंकल की धोखेबाजी में थाई प्रधानमंत्री सस्पेंड, किस विवाद से चर्चा में भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन थाईलैंड?

थाईलैंड…यह नाम सुनते ही ज्यादातर भारतीयों को नीले समुद्र तट, नाइट लाइफ और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड की याद आने लगती है। क्योंकि थाईलैंड छुट्टियां बिताने के लिए भारतीयों का पसंदीदा डेस्टिनेशन है। एक तो यह भारत से ज्यादा दूर नहीं और दूसरा यहां आने-जाने और रहने का खर्च कम। इसलिए थाइलैंड मिडिल क्लास भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन बन चुका है, लेकिन यह खूबसूरत देश इस समय अपने राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय तनाव के कारण चर्चा में है।  थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) को वहां की संवैधानिक कोर्ट ने एक लीक फोन कॉल विवाद के कारण सस्पेंड कर दिया है। दुनिया के किसी भी देश में कोर्ट द्वारा एक प्रधानमंत्री को ही सस्पेंड कर देना अपने आप में अभूतपूर्व उदाहरण है। कोर्ट के इस कार्रवाई के बाद फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) आज थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे हैं। इसकी जानकारी देते हुए थाईलैंड सरकार के प्रवक्ता जीरायु होंगसुब ने बताया कि फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) को महामहिम राजा शपथ दिलाएंगे। जिसके बाद वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर कार्य करेंगे आइए अब उस पूरे विवाद के बारे में जानते हैं, जिससे थाईलैंड की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है और पेटोंगटार्न शिनावात्रा का पीएम पद से सेस्पेंड कर दिया गया।  कंबोडियाई सीनेट अध्यक्ष ने कर ली फोन कॉल रिकॉर्ड  बता दें कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) का जो फोन कॉल लीक हुआ है उसमें व कंबोडियाई सीनेट के अध्यक्ष हुन सेन (Hun Sen) बातचीत करते हुए अपने ही देश के सेना और सैन्य जनरलों की आलोचना करती सुनी जा सकती है। दोनों के बीच यह बातचीत 15 जून को हुआ था, जिसे अब लीक किया गया। हुन सेन (Hun Sen) ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए बतया की उन्होंने इस बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया था। जिसे अब 80 से ज्यादा लोगों के साथ शेयर किया है। इस लीक कॉल रिकॉर्ड में सुना जा सकता है कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) और हुन सेन एक ट्रांसलेटर के माध्यम से थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर हुई सैन्य झड़प पर चर्चा कर रहे हैं। ये दोनों नेता बातचीत से घातक झड़प के बाद दोनों देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। पेटोंगटार्न इस कॉल में हुन सेन (Hun Sen) को अंकल संबोधित करते हुए कहती हैं कि वे थाईलैंड के सेना कमांडर की बात को न सुनें। थाई कमांडर ने सीमा विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से कंबोडिया की आलोचना करते हुए उन्हें “विरोधी” कहा था। इस दौरान पेटोंगटार्न ने हुन सेन से यह भी कहा कि वह उन्हें बताएं कि वे इस समस्या के समाधान के लिए क्या चाहते हैं और वे उसका समाधान करेंगी। गौरतलब है कि हुन सेन को पेटोंगटार्न के पिता और थाईलैंड के पूर्व पीएम थाकसिन शिनावात्रा का बेहद पुराना मित्र कहा जाता है। हुन सेन के बेटे हुन मानेत इस समय कंबोडिया के पीएम हैं।  इसे भी पढ़ें:-ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास थाईलैंड-कंबोडिया सीमा झड़प में एक सैनिक की मौत  बता दें कि दोनों देश बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं और यहां की रहन सहन और खान पान लगभग एक जैसी है, लेकिन सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच तनातनी हमेशा बनी रहती है। बीते मई माह में इन दो पड़ोसियों के बीच उस समय विवाद चरम पर पहुंच गया, जब एक थाई सैनिक की फायरिंग में कंबोडिया के एक सैनिक की मौत हो गई। इस विवाद को लेकर कंबोडिया की सेना ने बयान जारी कर कहा था कि बॉर्डर पर रुटीन पेट्रोलिंग कर रहे उनके जवानों पर थाईलैंड के सैनिकों ने फायरिंग कर दी थी। इस घटना में उसके एक जवान की मौत हो गई। वहीं थाई सेना का कहना है कि कंबोडिया के सैनिक पेट्रोलिंग के दौरान विवादित क्षेत्र में जबरदन घुस आए थे। थाईलैंड के जवान बातचीत के माध्यम से इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी कंबोडियाई सैनिकों ने गोली चला दी। जवाब में थाईलैंड आर्मी ने भी गोली चलाई। इस सैन्य झड़प के बाद दोनों देशों ने अपनी सीमा पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों का एक दूसरे के देश में आना-जाना लगभग बंद है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Patongtarn Shinawatra #thailandscam #thaipmsuspended #cambodianuncle #indiantravel #thailandcontroversy #travelnews2025 #tourismalert #thaipolitics

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Owaisi Slams UP Govt Over Kawad Yatra

Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses: कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे”

एक बार फिर कांवड़ यात्रा से पहले उत्तर प्रदेश में सियासत गरमा गई है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कुछ सख्त नियम जारी किए हैं। इसमें खाने-पीने की दुकानों पर मालिक के नाम की अनिवार्यता के साथ ही लाइसेंस और पहचान पत्र जरूरी कर दिया गया है। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने कहा है कि ढाबा और रेस्टोरेंट में मालिक और मैनेजर का नेमप्लेट जरूरी है। खैर, पिछले साल की तरह इस बार भी कांवड़ यात्रा के दौरान यूपी में बवाल मचा हुआ है। दरअसल, यूपी में उन दुकानों को बंद कराने की खबरें आ रही हैं, जिनके पास नाम और लाइसेंस नहीं हैं। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया। ओवैसी ने कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी की योगी सरकार पर निशाना साधते हुए (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) कहा कि “मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालय चलाने वाले दुकानदारों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।”  बीजेपी पर तंज करते हुए ओवैसी ने कहा कि “ये अफसोस की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल साफ तौर पर निर्देश दिए थे, फिर भी यूपी सरकार ऐसे विजिलेंटे ग्रुप्स को खुली छूट दे रही है। आखिर इनको रोका क्यों नहीं जा रहा?” सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ऐसे फैसलों पर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद ऐसा रवैया है, जो कि प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल है।” बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर खुले में मांस बिक्री ना होने के साथ ही ओवररेटिंग पर सख्ती के निर्देश और संचालक को अपना नाम लिखे होने के निर्देश दिए हैं। पहले कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होती थी, लोग श्रद्धालुओं का स्वागत करते थे, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) न हों सूबे की सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए ओवैसी ने कहा कि “पहले कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होती थी, लोग श्रद्धालुओं का स्वागत करते थे, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों न हों, लेकिन अब कुछ तत्व संगठित होकर यात्रा के बहाने अराजकता फैला रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि “मुजफ्फरनगर में बाईपास के पास पहले ऐसी कोई दिक्कत नहीं होती (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) थी। अब कोई ग्रुप बनाकर होटल वालों से आधार कार्ड मांगा जाता है। अरे तुम कौन होते हो पूछने वाले? न तुम एसपी हो, न आरडीओ, न एसडीएम।” इस बीच ओवैसी ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि “एक युवक से आधार कार्ड मांगने के बाद जब उसने नहीं दिखाया, तो उसका कपड़ा उतार दिया गया। बाद में पता चला कि उसका नाम गोपाल था।” इस कृत्य की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा कि वो चाहे वो गोपाल हो या कोई और हो, किसी को ये अधिकार नहीं कि वो इस तरह की गुंडागर्दी करे।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  पुलिस ने भले ही नोटिस दिया हो, लेकिन क्या वह इन लोगों को गिरफ्तार (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) करेगी? यही नहीं उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “पुलिस ने भले ही नोटिस दिया हो, लेकिन क्या वह इन लोगों को गिरफ्तार (Owaisi Questions UP Govt Over Kawad Yatra Shop Licenses) करेगी? क्या बुलडोजर का डर दिखाया जाएगा? सरकार की मंशा पर शक जताते हुए उन्होंने कहा कि “अगर सरकार की नीयत कमजोर है तो ये लोग खुद को सत्ता के संरक्षित मानकर जो चाहें करेंगे।” बता दें कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान बिना लाइसेंस वाले दुकानों को बंद करने की बात एक बार फिर उठ रही है। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार और प्रशासन पर करारा हमला किया। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ओवैसी ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद यूपी सरकार कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अराजकता फैलाने वाले तत्वों की कड़ी आलोचना की।” खैर, देखना दिलचस्प होगा कि आगे यह बवाल शांत होता है या फिर इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर इसे और तूल दिया जाता है? Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi #Owaisi #KawadYatra #UPGovt #ShopLicense #PoliticalNews #IndiaNews #Controversy

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Owaisi Slams EC

Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar: बिहार में चुनाव आयोग के इस प्रोसेस पर भड़के ओवैसी, कहा- “करोड़ों वोटर्स नहीं डाल सकेंगे वोट”

इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी माहौल के मद्देनजर राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। यहाँ सबसे बड़ी चर्चा यहां पर वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चर्चा जोरों पर है। अमूमन सभी विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। इस कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की योजना कर विरोध किया (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) है। न सिर्फ विरोध किया है बल्कि इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि “बूथ स्तर के अधिकारियों के लिए इतने कम समय में करोड़ों वोटर्स के रिकॉर्ड को अपडेट करना करीब-करीब असंभव है।” उन्होंने कहा, “आप चाहते हैं कि यह प्रक्रिया एक महीने में निपटा ली जाए। यह कैसे संभव है? आप इसे महज एक महीने में कैसे कर सकते हैं? इसके पीछे क्या तर्क है?” करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में ओवैसी ने यह चेतावनी भी दी कि इस संशोधन की वजह से वोटिंग लिस्ट से करोड़ों नाम छूट सकते हैं। ओवैसी ने कहा, “आप जल्दबाजी करके इन चीजों को रद्द नहीं कर सकते। अगर कल चुनाव होते हैं तो मुझे पूरा यकीन है कि इसमें कई नाम छूट जाएंगे। इसका दोष कौन लेगा? ऐसा करना अभी असंभव है और मेरी आशंका है कि हजारों नहीं, बल्कि लाखों, शायद करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे।” खैर, इस बीच एआईएमआईएम चीफ ने लाल बाबू हुसैन केस का भी हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस व्यक्ति का नाम पहले से ही वोटर लिस्ट में है, उसे बिना नोटिस और उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा गौरतलब हो कि चुनाव आयोग की तरफ से एसआईआर की प्रक्रिया 24 जून को अधिसूचित की गई थी। इसकी कड़ी आलोचना करते हुए एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने कहा कि “इसमें वोटर्स को नुकसान (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा। बिहार के ज्यादातर युवा पलायन कर चुके हैं। वे आर्थिक और अन्य वजहों से केरल, मुंबई, हैदराबाद, पंजाब और दिल्ली आदि राज्यों में चले जाते हैं, इसी तरह सीमांचल का अधिकांश क्षेत्र बाढ़ की वजह से करीब छह महीने तक कटा रहता है। अब, आप इसे एक महीने में करना चाहते हैं।” यही नहीं, चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए ओवैसी ने कहा कि “बीएलए आपके घर कितनी बार आएगा? शायद वह एक बार, दो बार और तीन बार आएगा। यह काफी चौंकाने वाला है कि चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है।” उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 8 करोड़ वोटर्स हैं। बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव होगा? यह मानवीय रूप से असंभव है।” ऐसा ही नहीं है कि ओवैसी ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने कल बुधवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस प्रक्रिया को कराने के समय से जुड़ी अपनी चिंताओं से अवगत कराया। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराई जा रही इस कवायद की वजह से राज्य के 2 करोड़ लोग वोट डालने का अधिकार खो सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi #Owaisi #BiharElections #ElectionCommission #VotingRights #AIMIM #BiharNews #IndianPolitics

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Disha Salian Case

दिशा सालियान के साथ नहीं हुआ यौन हिंसा, आदित्य ठाकरे भी निर्दोष… महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट से बताई सच्चाई? 

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान केस (Disha Salian Case) में बड़ा मोड़ आ गया है। राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) को एक एफिडेविट दायर कर बताया है कि दिशा सालियान की मौत में किसी भी तरह के संदेह की संभावना नहीं है। क्योंकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृतक के साथ यौन या शारीरिक हमले का कोई सबूत नहीं मिला है। मेडिकल जांच में प्राइवेट पार्ट में न तो सीमन मिला और न ही कोई जख्म पाया गया। जिससे पता चलता है कि मृतका के साथ आखिरी क्षणों में कोई जबरदस्ती नहीं की गई। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में यह एफिडेविट राज्य सरकार की तरफ से मालवणी पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर शैलेन्द्र नागरकर ने दाखिल किया है। इस एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि मृतका के पिता द्वारा दायर किया गए याचिका में लगाए गए आरोप बेवुनियाद और आधारहीन हैं। क्योंकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इन आरोपों को लेकर कोई सबूत नहीं मिले। इस एफिडेविट में आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि उन्हें बेवजह बदनाम करने के लिए इस याचिका को दायर किया गया है।  12वीं मंजिल से गिर कर हुई थर दिशा सालियान की मौत  बता दें कि दिशा सालियान (Disha Salian Case) की 9 जून, 2020 को मलाड की एक बड़ी इमारत की 12वीं मंजिल से गिर कर मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि दिशा खुद वहां से कूदी, जबकि मृतका के पिता सतीश सालियान का दावा है कि उनकी बेटी का रेप करने के बाद उसकी हत्या की गई और इस पूरी मामले को राजनीतिक कारणों से दबाने की कोशिश की गई। इस मामले को लेकर दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर शिवसेना (UBT) के मुखिया उद्धव ठाकरे के बेटी आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के साथ आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए।  दिशा सालियान की फ्रेंड्स और बॉयफ्रेंड ने क्या कहा दिशा के पिता के इस याचिका का जवाब पेश करते हुए राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) को बताया कि मृतका के पिता द्वारा जो आरोप लगाए हैं, वे आधारहीन हैं। क्योंकि पुलिस SIT की जांच में दिशा की फ्रेंड्स ने बताया कि वह अपने परिवारिक विवाद और बिजनेस डील नहीं पूरी होने के कारण काफी परेशान थी। दिशा सालियान (Disha Salian Case) के बॉयफ्रेंड रोहन रॉय ने भी पुलिस को दिशा के फ्लैट से गिरने की परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया है। पुलिस के अनुसार, जिस दिन दिशा की मौत हुई, उस रात वह फ्लैट पर दोस्तों के साथ पार्टी कर रही थी। मौत से पहले दिशा बहुत ज्यादा नशे में थी। इन दावों की पुष्टि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने भी की है। राज्य सरकार के जवाब में कहा गया है कि उस रात मौजूद सभी गवाहों के बयान एक जैसे हैं। इन सबूतों को देखते हुए कहा जा सकता है कि दिशा ने आत्महत्या करने के लिए खुद ही खिड़की से छलांग लगा दी थी।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  आदित्य ठाकरे ने खुद को बताया निर्दोष दिशा सालियान केस में एक तरफ जहां राज्य सरकार ने आदित्य ठाकरे को निर्दोष बताया है, तो वहीं आदित्य ठाकरे ने खुद हाई कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने की मांग की है। आदित्य ठाकरने ने अपनी याचिका में कहा कि हाई कोर्ट के पूर्व के आदेशों से उन पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वे महाराष्ट्र के एक बहुत ही प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं। जिसकी वजह से उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस केस से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, जबरदन मुझ पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद इस केस की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। Latest News in Hindi Today Hindi news Bombay High Court #DishaSalianCase #AadityaThackeray #BombayHighCourt #MaharashtraGovernment #BreakingNews

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ChatGPT

ChatGPT से पूछने से पहले सोचें, 5 सवाल जो आपको मुश्किल में डाल सकते हैं

चैटजीपीटी (ChatGPT) एक ऐसा नाम है, जिसके बारे में आजकल हर कोई जानता है। इस टूल को लगभग तीन साल पहले लांच किया गया था और उसके बाद से यह सबकी पहली पसंद बन चुका है। चाहे कोई रेसिपी जाननी हो या कोई पढाई से संबंधित सवाल हर प्रश्न का उत्तर है इस टूल के पास। ऐसा भी माना जा रहा है कि इससे हर रोज लगभग 10 करोड़ सवाल पूछे जाते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके इस्तेमाल से लोगों का जीवन आसान हुआ है। बस एक ही क्लिक कर आप किसी भी तरह की जानकारी पा सकते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि कुछ ऐसे सवाल भी हैं जिन्हें आपको चैटजीपीटी (ChatGPT) से नहीं पूछना चाहिए? यह सवाल आपके लिए समस्या का कारण बन सकते हैं। आइए जानें कौन सी हैं वो बातें जो चैटजीपीटी से कभी नहीं पूछनी चाहिए (Never ask these things to ChatGPT)? बातें जो चैटजीपीटी से कभी नहीं पूछनी चाहिए (Never ask these things to ChatGPT): पाएं जानकारी चैटजीपीटी (ChatGPT) स्मार्ट है और यह किसी भी सवाल का उत्तर दे सकता है, लेकिन इसे भी कुछ खास प्रश्नों का उत्तर देने की अनुमति नहीं है। दरअसल यह बहुत सख्त नियमों का पालन करता है कि किन सवालों का उत्तर इसे देना और किसका नहीं। आइए जानें कौन सी हैं वो बातें जो चैटजीपीटी से कभी नहीं पूछनी चाहिए (Never ask these things to ChatGPT): हेल्थ प्रॉब्लम्स से संबंधित सवाल अगर आप बीमार हैं या आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम है, तो चैटजीपीटी (ChatGPT) से इसके बारे में पूछने से बचें। यह टूल आपकी हेल्थ समस्या से जुड़े सवालों के जवाब देने की कोशिश तो करेगा लेकिन यह समाधान आपके लिए समस्या का कारण बन सकता है। क्योंकि, न तो यह डॉक्टर की तरह आपको एग्जामिन कर सकता है और न ही आपकी समस्या का निदान कर सकता है। इसलिए, फिजिकल प्रॉब्लम्स, स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि से जुड़े सवालों को इससे पूछने से बचें। फाइनेंस या टैक्स संबंधी सवाल चैटजीपीटी (ChatGPT) आपको केवल फाइनेंस की डेफिनेशन बता सकता है लेकिन इसे आपकी आय, खर्च और टेक्स स्थिति आदि के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे में चैटबोट (Chatbot) की सलाह बहुत ही पुरानी या नुकसानदायक हो सकती है। यह आपको गलत गाइड भी कर सकता है। यही नहीं, अगर आप इससे अपनी बैंक डिटेल्स या ऐसी अन्य डिटेल्स शेयर करते हैं तो यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके लिए हमेशा स्पेशलिस्ट से ही सलाह लें। कानून से जुड़ी जानकारी  चैटजीपीटी (ChatGPT) आपको सिर्फ लीगल टर्म्स के बारे में बता सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल कभी भी कानून से जुड़ी जानकारी लेने और अपनी वसीयत या लीगल कॉन्ट्रैक्ट्स लिखने के लिए न करें। कानून राज्य और काउंटी के अनुसार अलग हो सकते हैं और छोटी गलतियां भी इसे इनवैलिड बना सकती हैं। आप इस टूल का इस्तेमाल बेसिक चीजों को समझने के लिए कर सकते हैं लेकिन लीगल प्रोटेक्शन के लिए किसी लाइसेंस प्राप्त वकील द्वारा दस्तावेज तैयार करवाएं। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हिंसक जानकारी  कभी भी चैटजीपीटी (ChatGPT) से किसी हिंसक चीज के बारे में जानकारी न लें। क्योंकि यह गंभीर हो सकता है। अगर आप कोई हिंसक सवाल पूछते हैं, तो यह टूल इसके लिए तुरंत मना कर देता है। चैटबोट (Chatbot) को सख्त सुरक्षा और नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए प्रोग्राम किया गया है, इसलिए यदि आप कुछ अनुचित पूछ रहे हैं, तो यह मना कर सकता है। हैकिंग या किसी की प्राइवेट इंफॉर्मेशन  अगर आप चैटजीपीटी (ChatGPT) से हैकिंग या किसी की प्राइवेट इंफॉर्मेशन के बारे में पूछते हैं तो यह गलत है। हैकिंग के बारे में पूछना पूरी तरह से इलीगल है। इसके साथ ही किसी के फोन नंबर, एड्रेस या फाइनेंशियल डिटेल के बारे में भी पूछना भी सही नहीं है। चैटबोट (Chatbot) से यह सब पूछने पर वो इसका जवाब देने से मना कर देगा क्योंकि उसे ऐसे ही प्रोग्राम किया गया है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  ChatGPT #ChatGPT #AIquestions #AvoidAsking #OpenAIRules #AIEthics #ChatGPTTips #MisuseOfAI #ChatGPTWarning

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viral fever symptoms

वायरल फीवर क्या है, इसके कारण, लक्षण और उपचार, जानिए किस तरह से करें इससे बचाव

वायरल फीवर (Viral fever) एक ऐसी हेल्थ कंडीशन है जो किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। इसका कारण कई वायरल इंफेक्शंस को माना जाता है। इस समस्या में रोगी के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जो हानिकारक वायरस के प्रति हमारे इम्यून सिस्टम के रिस्पांस का संकेत है। इस समस्या के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे शरीर में दर्द, थकावट आदि और गंभीर मामलों में इसके कारण रोगी को कई कॉम्प्लीकेशन्स का सामना भी करना पड़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए वायरल फीवर (Viral fever) चिंता का विषय हो सकता है। आइए जानें वायरल फीवर के लक्षणों (Symptoms of Viral Fever) के बारे में। इसके उपचार और बचने के तरीकों के बारे में भी जानें। वायरल फीवर के लक्षण (Symptoms of Viral Fever) हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार वायरल फीवर (Viral fever) में रोगी को हाई टेम्प्रेचर की समस्या हो सकती है। उनके शरीर का तापमान 103°F से भी अधिक बढ़ सकता है। मनुष्यों को कई तरह के वायरल इंफेक्शंस प्रभावित करते हैं। इनमें से कई इंफेक्शंस में रोगी को कम बुखार होता है जबकि कई वायरल इंफेक्शंस जैसे डेंगू में रोगी को हाई फीवर होता है। वायरल फीवर के लक्षण (Symptoms of Viral Fever) इस प्रकार हो सकते हैं: यह लक्षण अधिकतर रोगी में कुछ दिनों तक ही दिखाई देते हैं।  अब जानिए वायरल फीवर (Viral fever) के कारण क्या हो सकते हैं? वायरल फीवर के कारण दूषित फ़ूड और ड्रिंक्स भी इस इंफेक्शन (Infection) का कारण बन सकती हैं।  वायरल फीवर का उपचार ज्यादातर वायरल फीवर (Viral fever) के मामलों में खास उपचार की जरूरत नहीं होती है है। इसके उपचार के तरीकों में लक्षणों से आराम पाने पर फोकस किया जाता है। इसके सामान्य उपचार के तरीके इस प्रकार हैं: बुखार कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर दवाईयां लेना जैसे आइबूप्रोफेन और एसिटामिनोफेन आदि। इसे भी पढ़ें:- सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज वायरल फीवर से कैसे बचें? नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Viral fever #viralfever #feversymptoms #healthtips #viralprevention #fevertreatment

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90 करोड़ का कर्ज और 2000 करोड़ की संपत्ति: नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया-राहुल गांधी पर ED के गंभीर आरोप

नेशनल हेराल्ड मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस बहुचर्चित केस की सुनवाई बुधवार को शुरू हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट में जो दलीलें रखीं, उन्होंने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। नेशनल हेराल्ड केस (National Herald case) में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी (Sonia Gandhi and Rahul Gandhi) समेत कई वरिष्ठ नेताओं को आरोपी बनाया गया है। क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? नेशनल हेराल्ड अखबार (National Herald Newspaper) की स्थापना पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1938 में की थी। इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के जरिए होता था। समय के साथ अखबार का संचालन बंद हो गया, लेकिन AJL के पास देशभर में करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियां थीं। आरोप है कि कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने AJL को 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया, जो बाद में वापस नहीं लिया गया। इसके बाद 2010 में यंग इंडिया (Young India) नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी (Sonia Gandhi and Rahul Gandhi) की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसी यंग इंडिया को AJL के सारे शेयर ट्रांसफर कर दिए गए, जिससे संपत्ति का मालिकाना हक कांग्रेस नेताओं के पास चला गया। ईडी का आरोप: कर्ज के बहाने संपत्ति पर कब्जा ASG एसवी राजू ने कोर्ट में कहा कि यह पूरा मामला एक योजनाबद्ध साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि AJL घाटे में चल रही कंपनी थी, लेकिन संपत्ति थी। कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने उसे 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया और बाद में ‘यंग इंडिया’ कंपनी के जरिए इस कर्ज के नाम पर 2000 करोड़ की संपत्ति अपने नियंत्रण में ले ली। ईडी (ED) के अनुसार यह पूरा लेनदेन कागजों पर ही हुआ और असल में न कर्ज की वसूली हुई, न कोई वाणिज्यिक उद्देश्य था। सिर्फ राजनीतिक और निजी लाभ के लिए इसे अंजाम दिया गया। किराया और चंदे में फर्जीवाड़े के आरोप ED ने यह भी दावा किया कि AJL को कई सालों तक फर्जी किराया और चंदा मिलता रहा, जिसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर ट्रांसफर किया गया। एजेंसी ने कहा कि ये पैसे भी एक प्रकार से अपराध की आय (Proceeds of crime) हैं। तफ्तीश के दौरान यह बात भी सामने आई कि कुछ नामी नेताओं जैसे डीके शिवकुमार, रेवंत रेड्डी और दिवंगत नेता ऑस्कर फर्नांडिस और मोतीलाल वोरा ने भी इस मामले में चंदा या शेयर ट्रांसफर के रूप में भूमिका निभाई थी। कोर्ट में क्या हुआ? सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने पूछा कि क्या यह मामला अभी केवल अपराध के संज्ञान तक सीमित है, तो ASG राजू ने कहा कि हां, इस चरण पर सिर्फ संज्ञान लिया जाना चाहिए। समन की प्रक्रिया बाद में डिस्चार्ज एप्लिकेशन पर निर्भर करेगी। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि वे जल्द ही अपनी बहस पूरी करेंगे, जिसके बाद अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कांग्रेस का पक्ष कांग्रेस पार्टी (Congress Party) इन आरोपों को पहले से ही राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। पार्टी का कहना है कि यह मामला 2012 से ही राजनीतिक प्रतिशोध का प्रतीक बन चुका है, और यह केवल विपक्षी नेताओं को दबाने की एक रणनीति है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने पहले भी संसद और सार्वजनिक मंचों से यह बात कही है कि बीजेपी उनके और उनके परिवार के खिलाफ झूठे मामलों का सहारा ले रही है, ताकि वे जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटका सकें। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मामला कैसे शुरू हुआ? यह केस सबसे पहले बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी (BJP Leader Subramanian Swamy) की शिकायत पर 2012 में सामने आया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यंग इंडिया के जरिए गांधी परिवार ने 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा किया है। इसके बाद मामला कोर्ट और ईडी (ED) के पास गया और अब सालों बाद इसकी सुनवाई एक निर्णायक मोड़ पर पहुंची है। आगे क्या हो सकता है? कोर्ट में अभी केवल प्रारंभिक बहस हो रही है, लेकिन अगर मामले में अपराध का संज्ञान लिया जाता है और समन जारी होता है, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी (Sonia Gandhi and Rahul Gandhi) को अदालत में पेश होना पड़ सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अदालत इस पूरे प्रकरण को केवल वित्तीय लेनदेन मानेगी या इसके पीछे राजनीतिक साजिश की परतें भी खोलेगी? नेशनल हेराल्ड मामला (National Herald case) एक बार फिर सुर्खियों में है और यह देखना दिलचस्प होगा कि कानूनी प्रक्रिया आगे क्या मोड़ लेती है। क्या गांधी परिवार निर्दोष साबित होंगे या यह मामला उनके राजनीतिक करियर पर एक और बोझ बन जाएगा? इस केस की हर सुनवाई अब राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण से अहम होती जा रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Rahul Gandhi #SoniaGandhi #RahulGandhi #NationalHeraldCase #EDInvestigation #Congress #2000CroreAssets #90CroreDebt #BreakingNews #IndianPolitics

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Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute: जमीन और जेवर देख ललचाई बहु ने सास की करवाई हत्या, इस बात से थी नाराज

कहने की जुरूरत नहीं कि आजकल रिश्तों की कोई मर्यादा बची ही नहीं है। कभी अवैध संबंधों के चलते तो कभी प्रॉपर्टी के चलते अपने ही अपनों की जान के प्यासे बने हुए हैं। ताजा मामला यूपी के झांसी का है, जहाँ एक कलयुगी बहू ने अपने हिस्से की जमीन को हथियाने और घर पर रखे जेवरात पर हाथ साफ़ करने के इरादे से अपनी सास की हत्या करवा दी। घटना के 5 दिन बाद पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा किया (Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute) है। जानकारी के मुताबिक घटना झाँसी स्थित टहरौली थाना क्षेत्र के कुम्हरिया गांव की है, जहाँ एक बहू ने अपनी बहन के प्रेमी के साथ मिलकर लाखों के जेवर और अपने हिस्से की जमीन को हथियाने चक्कर में अपनी सास की हत्या करवा दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हत्यारोपी बहू और उसकी बहन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।  सास सुशीला जमीन बेचने से साफ इनकार कर रही (Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute) थी हत्या के पीछे संपत्ति का विवाद खुलकर आया। दरअसल, मृतका सुशीला के छोटे बेटे संतोष की पत्नी पूजा चाहती थी कि परिवार की 16 बीघे की जमीन में से उसे 8 बीघे का हिस्सा दे दिया जाए। इसे बेचकर वह पति के साथ ग्वालियर में बसना चाहती थी। इस बात पर पूजा के पति संतोष और ससुर अजय की सहमति तो थी, लेकिन सुशीला जमीन बेचने से साफ इनकार कर रही (Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute) थी। इसे लेकर पिछले एक साल से घर में विवाद चल रहा था। सास के रुख से नाराज पूजा ने खतरनाक योजना बनाई और ग्वालियर में रहने वाली अपनी बहन कमला को अपनी सास की हत्या के लिए राजी किया। सास की हत्या का शक न हो इसके लिए पूजा अपने मायके चली गई और अपने ससुर को भी मायके बुला लिया। ताकि सास घर में अकेली बचे। प्लान के मुताबिक 24 जून को अनिल और पूजा की छोटी बहन कमला रात के अंधेरे में घर में गए और घर में अकेली रह रही सास सुशीला को जहरीला इंजेक्शन लगाने के बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। सुशीला की हत्या करने के बाद अनिल और कमला दोनों 8 लाख रुपये की कीमत के जेवरात लेकर मौके से फरार हो गए।  वह अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेचकर ग्वालियर में रहना चाहती (Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute) थी इस हत्या से इलाके में हड़कंप मच गया। मृतका सुशीला के पति ने पूरे मामले की रिपोर्ट टहरौली थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने जैसे ही पूरे मामले की जांच-पड़ताल शुरू की, सबसे पहले शक की सुई बहू पूजा पर ही गई। जांच के दौरान पुलिस को जब कुछ सबूत हाथ लगे, तो पूजा को हिरासत में ले लिया। शुरुआत में तो उसने पुलिस को छकाने की खूब कोशिश की, लेकिन पुलिसिया पूछताछ में टूट गई और उसने सास की हत्या करवाने का जुर्म कबूल कर लिया।  कहने की जरूरत नहीं, 55 साल की सुशीला देवी की हत्या के लिए उसकी अपनी ही बहू ने जो प्लान बनाया उसको सुनकर पुलिस भी सन्न रह गई। पूजा ने बताया कि जेठ और ससुर के पास 16 बीघा जमीन (Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute) है। वह अपने हिस्से की 8 बीघा जमीन बेचकर ग्वालियर में रहना चाहती थी। जेठ और ससुर तैयार थे, लेकिन सास सुशीला मना कर रही थी। इसीलिए उसकी हत्या करवा दी।  इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म पुलिस ने आरोपी के पास से जेवरात बरामद कर लिए (Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute) हैं हत्या के बाद से बहन का प्रेमी फरार चल रहा था। इस बीच पुलिस पिछले कई दिनों से उसकी छोटी बहन कमला के प्रेमी अनिल वर्मा की तलाश में जुटी थी कि देर रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली की हत्यारोपी अनिल वर्मा लूट के जेवरात को लेकर अपने किसी परिचित के घर मोटरसाइकिल से बेचने जा रहा है। मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने जैसे ही अनिल को रोकने की कोशिश की उसने पुलिस पर फायरिंग कर (Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute) दी। जवाबी फायरिंग में अनिल को पुलिस की गोली लग गई। इलाज के लिए आरोपी को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया है। पुलिस ने उसके पास से जेवरात बरामद कर लिए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Daughter-in-law Kills Over Property, Jewelry Dispute #daughterinlaw #murdercase #propertydispute #familycrime #crimealert #jewelrydispute #indianews #shockingcrime

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Health Ministry confirms no link between COVID-19

No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks: स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा बयान, “कोरोना वैक्सीन का हार्ट अटैक से कोई संबंध नहीं” 

बीते दिनों दिल का दौरा पड़ने से मौतों के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोरोना वैक्सीन का हार्ट अटैक से कोई संबंध नहीं है। दरअसल, कर्नाटक में पिछले महीने में दिल का दौरा पड़ने से 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसके लिए कनार्टक की सरकार ने कोरोना वैकसीन को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके बाद कोरोना वैक्सीन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी। अचानक दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतों की वजह वैक्सीन को बताते हुए सवाल उठाए जा रहे थे। इस बीच मंत्रालय ने इन सवालों का जवाब एक मेडिकल रिसर्च के आधार पर दे दिया है। इस मुद्दे पर देश की दो सबसे बड़ी मेडिकल संस्थाओं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने बड़ी और गहरी जांच की है, जिसमें साफ कहा गया है कि “कोविड वैक्सीन और अचानक मौतों का कोई सीधा संबंध नहीं (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) है।”  अचानक हुई मौतें कोरोना वैक्सीन का दुष्प्रभाव नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली और पुरानी बीमारी मौत होने का प्रमुख कारण (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) है बता दें कि आईसीएमआर और एम्स की रिसर्च में स्पष्ट हो गया है कि कोरोना वैक्सीन और कर्नाटक में हो रही अचानक मौतों का कोई संबंध (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) नहीं है। दरअसल, यह रिसर्च कोरोना काल के बाद अचानक हुई मौतों को लेकर की गई थी। रिसर्च में निष्कर्ष निकला कि अचानक हुई मौतें कोरोना वैक्सीन का दुष्प्रभाव नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली और पुरानी बीमारी मौत होने का प्रमुख कारण है। इस रिपोर्ट को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि “देश में कई एजेंसियों के माध्यम से अचानक होने वाली मौतों के मामलों की जांच की गई है, जिनसे यह साबित हो गया है कि कोविड-19 टीकाकरण और देश में अचानक होने वाली मौतों की खबरों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि इस रिपोर्ट से पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी कहा था कि “अचानक मौत की वजह कोविड वैक्सीन नहीं है। उस दौरान नड्डा ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि वैक्सीनेशन से जोखिम बढ़ा नहीं बल्कि कम हुआ है।  इसे भी पढ़ें:- सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज कर्नाटक के हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से 20 से जयादा लोगों की हो (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) चुकी है मौत  गौरतलब हो कि मई-जून 2025 के बीच कर्नाटक के हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से 20 से जयादा लोगों की मौत हो चुकी है। अचानक हुई इन मौतों का कारण कोरोना वैक्सीन का साइड इफेक्ट बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कोविड वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभावों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की। इस समिति का नेतृत्व जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. केएस रविंद्रनाथ करेंगे। जांच 10 दिन में पूरी करके रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। कर्नाटक के CM सिद्धारमैया ने भी सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने कहा कि “दुनियाभर में हुई रिसर्च में साबित हुआ है कि कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभाव होते हैं। जल्दबाजी में वैक्सीन को परमिशन दी गई, जो अचानक हो रही मौतों का कारण हो सकती है।” कनार्टक के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2 साल में हासन जिले में 507 हार्ट अटैक के मरीज रिकॉर्ड हुए। इनमें से 190 लोगों की मौत हुई है। कहने की जरूरत नहीं, कोरोना महामारी के बाद हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोगों ने कोविड वैक्सीन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था लेकिन,आईसीएमआर और एम्स की ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि वैक्सीन और हार्ट अटैक के बीच कोई सीधा संबंध नहीं (No Link Between COVID Vaccine and Heart Attacks) है।  Latest News in Hindi Today Hindi news COVID Vaccine #covidvaccine #heartattack #healthministry #vaccinesafety #covid19update #govtstatement #coronavirusnews #vaccinefacts #healthnews #covidtruth

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