app-based cab services

App-based Cab Services अब होगी महंगी: क्या है केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन्स? 

आज के डिजिटल दौर में ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाएं (App-based Cab Services) आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। ऑफिस जाना हो, स्टेशन पहुंचना हो या किसी भी जगह जाने के लिए कैब चाहिए तो इन अलग-अलग कैब सेवाओं (Cab Service) की मदद से कहीं भी आना-जानाआसान बना दिया है। लेकिन अब इन सेवाओं का उपयोग आपकी जेब पर पहले से ज्यादा बोझ डाल सकता है। हाल ही में केंद्र सरकार (Central Government)  द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन्स से यह साफ होता है कि आने वाले दिनों में कैब और बाइक, टैक्सी की सवारी महंगी हो सकती है। App-based Cab Services: क्या हैं नई गाइडलाइन्स? सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे आगामी तीन महीनों में नई कैब एग्रीगेटर पॉलिसी (Cab Aggregator Policy) को लागू करें। इसके तहत ऐप-आधारित टैक्सी कंपनियों (App-based Cab Services) को पीक ऑवर्स (Peak Hours) के दौरान बेस फेयर का दो गुना तक किराया वसूलने की अनुमति दी गई है। इसे सर्ज प्राइजिंग कहा जाता है। अब तक यह सीमा 1.5 थी यानी अगर किसी शहर में बेस फेयर 100 रुपये है, तो कंपनियां 150 रुपये तक चार्ज कर सकती थीं। लेकिन अब यह सीमा 200 रुपये तक बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का कहना है कि यह फैसला कैब एग्रीगेटर्स को पीक ऑवर्स में ज्यादा ड्राइवर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही कंपनियों को अधिक लचीलापन (Flexibility) मिलेगा ताकि वे मांग के अनुसार सेवाएं दे सकें। बाइक टैक्सी सेवा को मिली मंजूरी नई गाइडलाइन में एक और अहम फैसला लिया गया है। अब नॉन-ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स (Non-Transport Vehicle) यानी सफेद नंबर प्लेट वाली निजी बाइक्स को भी शेयर्ड मोबिलिटी सर्विस देने की अनुमति दे दी गई है। पहले केवल येलो नंबर प्लेट वाली कमर्शियल बाइक्स (Commercial bike) ही टैक्सी सेवा (Taxi Service) दे सकती थीं, जिसके लिए भारी-भरकम टैक्स और रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती थी। इस फैसले के तहत कोई भी आम नागरिक, जिसके पास निजी बाइक है अब वे ओला (Ola), उबर (Uber) या रैपिडो (Rapido) जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रेवलर्स को लिफ्ट दे सकते हैं जिससे उनकी अर्निंग भी हो सकती है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राज्य सरकारें अब इन सेवाओं पर रोजाना, एक सप्ताह या फिर 15 दिनों पर फीस लगा सकती है, जिससे राजस्व भी बढ़ेगा। राइड कैंसिलेशन पर कड़ा जुर्माना नई गाइडलाइन में एक और बड़ा बदलाव यह है कि बिना वजह राइड कैंसिल (Ride Cancellation) करने पर ड्राइवर या यूज़र, दोनों पर 10% या ज्यादा से ज्यादा 100 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इससे यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की जिम्मेदारी तय होगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। ड्राइवरों के लिए इंश्योरेंस और ट्रेनिंग जरूरी ड्राइवरों की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी कैब ड्राइवरों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि: उन्हें 5 रुपये लाख का हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) और 10 लाख रुपये का टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term Life Insurance) मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें हर साल ट्रेनिंग लेना भी अनिवार्य होगा, जिससे न सिर्फ ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सर्विस भी बेहतर होगी। क्या कहना है सर्विस प्रोवाइडर का?  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रैपिडो (Rapido) ने इन गाइडलाइन्स को विकसित भारत की दिशा में मील का पत्थर कहा है और दावा किया है कि इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी। वहीं उबर ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि सभी राज्य समय पर इस गाइडलाइन को लागू करेंगे। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? क्या होगा आम जनता पर असर? इन गाइडलाइन्स का मिला-जुला असर देखा जा सकता है: सरकार द्वारा लागू की गई यह नई कैब पॉलिसी उपभोक्ताओं, ड्राइवरों और कंपनियों के लिए कई तरह के बदलाव लेकर आई है। हालांकि इससे तत्काल प्रभाव में यात्रा महंगी हो सकती है, लेकिन क्या यह नीतियां स्मार्ट मोबिलिटी, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं या नहीं ये तो आने वाले समय में पता चलेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi Rapido #cabfarehike2025 #appbasedcabs #govtrules #cabservicesindia #ridenews #taxihike #centralgovt #cabguidelines

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इटावा कांड के बाद ब्राह्मण विरोधी सियासत कहीं अखिलेश पर पड़ न जाए भारी! यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों का कितना वर्चास्व?

उत्तर प्रदेश की राजनीति को इन दिनों जातीय रंग में रंगी जा रही है। इटावा जिले के दांदरपुर इलाके में यादव कथावाचकों का सिर मुंडवा कर पिटाई करने और चुटिया काट के मूत्र का छिड़काव किए जाने की घटना के बाद से यहां कि सियासत यादव बनाम ब्राह्मण की हो चुकी है। जाति के इस सियायत में सबसे आगे समाजवादी पार्टी (SP) नजर आ रही है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अभी तक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए (PDA) की राजनीति करते नजर आ रहे थे, लेकिन इस घटना से वे पीडीए को भुला यादव समाज की राजनीति करते नजर आ रहे हैं।  यादव कथावाचकों के पक्ष में उतरे सपा (SP) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तो ब्राह्मण समाज को चेतावनी देते हुए यहां तक कह दिया कि कृष्ण भक्तों को अगर कथा कहने से रोका गया तो यह अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ब्राह्मणों पर तंज कसते हुए कहा कि प्रभुत्ववादी और वर्चस्ववादी लोग घोषित करें कि वो पीडीए समाज द्वारा दिया गए दान और चढ़ावा को नहीं लेंगे। अखिलेश (Akhilesh Yadav) के इस बयानबाजी के बाद अहीर रेजिमेंट समेत कई यादव संगठनों ने अब ब्राह्मणों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इटावा की इस घटना के बाद सपा पार्टी जिस तरह से इसे जातीय रंग देने में जुटी है, उससे सियासी जानकार कहने लगे हैं कि, कहीं अखिलेश यादव का यह एंटी ब्राह्मण कार्ड उन पर ही बैकफायर ना कर जाए? आइये जानते हैं कि यूपी की राजनीति में ब्राह्मण समाज किस तरह की भूमिका निभाती है।    यूपी में ब्राह्मण वोटर 10 फीसदी, लेकिन सियासत में वर्चस्व उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या (Brahmin Voters In UP) करीब 10 फीसदी है, लेकिन इसके बाद भी राज्य (Akhilesh Yadav) की सियासत में ब्राह्मणों का वर्चस्व हमेशा से रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यूपी की करीब सभी विधानसभा सीटों पर कम से कम पांच से 10 हजार ब्राह्मण वोटर हैं, जो जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, राज्य के करीब 30 जिलों की 100 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों (Brahmin Voters In UP) का दबदबा है, जो सूबे की सत्ता तक पहुंचने के लिए जरूरी 202 के जादुई आंकड़े का लगभग आधा है। राज्य के वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, बलिया, महराजगंज, गोंडा, बस्ती, अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कानपुर, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई और झांसी जैसे जिले ब्राह्मणों के गढ़ माने जाते हैं।  जिसके साथ गए ब्राह्मण, उसकी बनी सरकार यूपी में ब्राह्मण वोटर संख्या (Brahmin Voters In UP) में भले ही कम नजर आते हों, लेकिन राज्य की सत्ता तक वही पहुंचता है, जिसके साथ ये रहते हैं। ब्राह्मण समाज शुरुआती दिनों में कांग्रेस के साथ रही, जिसकी वजह से यह पार्टी लंबे समय तक यूपी की सत्ता में रही। लेकिन 1989 में भाजपा ने जब राम मंदिर आंदोलन शुरू किया और मंडल-कमंडल की राजनीति शुरू हुई तो ब्राह्मण भाजपा के साथ आ गए, जिससे इसने भी राज्य में सत्ता का स्वाद चखा। लेकिन साल 2002 में ठाकुर-ब्राह्मण राजनीति शुरू होने के कारण यह समाज भाजपा से नाराज हो गया। इसी दौरान मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने ब्राह्मण सम्मेलनों के जरिये इस समाज को अपने साथ लाने की कोशिश की। मायावती की 2007 के विधानसभा चुनाव में 56 ब्राह्मणों को अपनी पार्टी का टिकट दिया और इसमें से 41 ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। साथ ही बसपा ने भी पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाई। इसके बाद सपा ने भी ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश की और साल 2012 में इस समाज के बदौलत बड़ी जीत के साथ सत्ता में आई। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव से ब्राह्मण समाज का एक बड़ा वर्ग भाजपा के पास चला गया और अभी तक इस पार्टी के साथ बना हुआ है।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  अखिलेश के 5 विधायक और एक सांसद ब्राह्मण  यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में 52 ब्राह्मण जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे, इसमें से भाजपा के 46 विधायकों के बाद सबसे ज्यादा (5) ब्राह्मण विधायक सपा के पास हैं। इसके अलावा सपा के पास एक ब्राह्मण सांसद भी है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)बीते कुछ माह से ब्राह्मणों को पीडीए (PDA) के साथ जोड़कर नया गणित गढ़ने में जुटे थे, लेकिन इटावा की इस घटना के बाद अखिलेश यादव ब्राह्मणों के खिलाफ नजर आने लगे हैं। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि इस घटना को जातीयता के रंग में रंगने से अखिलेश यादव को नफा होगा या नुकसान?  Latest News in Hindi Today Hindi news  Akhilesh Yadav #AkhileshYadav #EtawahCase #BrahminPolitics #UPElections #SamajwadiParty #BrahminVoteBank #UttarPradesh

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Dalai Lama Successor Selection Process

How Dalai Lama’s Successor Is Chosen After His Death: मौत के बाद चुना जाएगा दलाई लामा का उत्तराधिकारी, इस तरह होता है चुनाव

छह जुलाई 2025 को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा 90 साल के हो जाएंगे। दलाई लामा का यह जन्मदिन कई मायनों में बेहद अलग और खास है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि वह इस मौके पर अपने उत्तराधिकारी (Dalai Lama’s Successor) की घोषणा कर सकते हैं। इस मौके पर दुनियाभर के तिब्बती धर्मगुरु हिमाचल में उनके मठ एकजुट हो रहे हैं। तिब्बती मान्यताओं के अनुसार दलाई लामा का कोई चुनाव नहीं होता, बल्कि उन्हें खोजा जाता (How Dalai Lama’s Successor Is Chosen After His Death) है। यह प्रक्रिया इतनी रहस्यमयी है कि इसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। बता दें कि तिब्बती बौद्ध धर्म के मुताबिक जब वर्तमान दलाई लामा की मृत्यु होती है, इसके बाद उनका पुनर्जन्म होता है। दलाई लामा की मृत्यु से पहले कुछ वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं को यह बताकर जाते हैं कि उनका पुनर्जन्म कहां होने वाला है। इसलिए जब वर्तमान दलाई लामा की मृत्यु होती है, इसके बाद भिक्षु उनकी तलाश शुरू कर देते हैं। तिब्बती बौद्धों का मानना ​​है कि दलाई लामा का पुनर्जन्म उनकी आध्यात्मिक विरासत को जारी रखने के लिए होता है। गौरतलब हो कि मौजूदा दलाई लामा (तेनजिन ग्यात्सो) 14वें दलाई लामा हैं। छह जुलाई को 90 वर्ष के हो जाएंगे।  दलाई लामा की मृत्यु के 9 महीने बाद जन्में बच्चे को ढूंढा (How Dalai Lama’s Successor Is Chosen After His Death) जाता है बता दें कि दलाई लामा की मृत्यु के 9 महीने बाद जन्में बच्चे को ढूंढा (Dalai Lama’s Successor) जाता है। तिब्बती मान्यता के अनुसार दलाई लामा अपनी मृत्यु से पहले कुछ संकेत देते हैं। नए दलाई लामा की खोज के दौरान वरिष्ठ लामा अपने ध्यान और प्रार्थना के माध्यम से प्राप्त संकेतों को समझने की कोशिश करते हैं। वे ल्हामो लात्सो नामक पवित्र झील के किनारे ध्यान करते हैं। जहाँ उन्हें किसी गांव का नाम, दिशा या कोई विशिष्ट दृश्य जैसे संकेतों की अनुभूति होती है। इन दिव्य संकेतों के आधार पर पुनर्जन्म लेने वाले बालक की तलाश शुरू की जाती (How Dalai Lama’s Successor Is Chosen After His Death) है। यह खोज कई वर्षों तक चल सकती है। इस बीच जब किसी बच्चे पर नए दलाई लामा होने का शक जाता है, उसे सीधे सर्वोच्च पद पर नहीं बैठा दिया जाता। बल्कि उसकी कठिन परीक्षा ली जाती है। सबसे पहले वरिष्ठ लामा उसके व्यवहार पर कड़ी नजर रखते हैं। इसके बाद उसे पुराने लामा की चीजों जैसे माला, छड़ी और कपड़ों की पहचान करने के लिए दिया जाता है। अगर बच्चा सही चुनाव करता है, तो फिर उसे बौद्ध लाकर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। इसके बाद सालों तक उसे बौद्ध धर्म, संस्कृत, तिब्बती संस्कृति और दर्शन की शिक्षा दी जाती है। दलाई लामा ने इस साल प्रकाशित अपनी किताब ‘वॉइस फॉर द वॉइसलेस’ में बताया था कि “उनका उत्तराधिकारी चीन से बाहर स्वतंत्र दुनिया में जन्म लेगा।  मैं तिब्बती बौद्ध परंपराओं के उच्च लामाओं, तिब्बती जनता और तिब्बती बौद्ध धर्म का पालन करने वाले अन्य संबंधित लोगों से परामर्श (How Dalai Lama’s Successor Is Chosen After His Death) करूंगा खैर, इस बीच तिब्बती बौद्धों के आध्यात्मिक प्रमुख दलाई लामा ने बुधवार, 2 जुलाई को इस बात की पुष्टि कर दी कि दुनिया को अगला दलाई लामा मिलेगा। दरअसल, बुधवार को दलाई लामा ने वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं से मुलाकात की और उसके बाद उन्होंने अपना बयान (Dalai Lama’s Successor) जारी किया। बयान में उन्होंने यह भी बताया कि अगले दलाई लामा का चुनाव कैसे होगा। उनके बयान के मुताबिक “24 सितंबर 2011 को, तिब्बती आध्यात्मिक परंपराओं के प्रमुखों की एक बैठक में, मैंने तिब्बत के भीतर और बाहर साथी तिब्बतियों, तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुयायियों और तिब्बत- तिब्बतियों के साथ संबंध रखने वाले लोगों के सामने एक बयान दिया था कि क्या दलाई लामा की संस्था जारी रहनी चाहिए। मैंने कहा कि “1969 में ही, मैंने स्पष्ट कर दिया था कि संबंधित लोगों को यह निर्णय लेना चाहिए कि क्या दलाई लामा का पुनर्जन्म भविष्य में भी जारी रहना चाहिए?” मैंने यह भी कहा कि “जब मैं लगभग नब्बे वर्ष का हो जाऊंगा तो मैं तिब्बती बौद्ध परंपराओं के उच्च लामाओं, तिब्बती जनता और तिब्बती बौद्ध धर्म का पालन करने वाले अन्य संबंधित लोगों से परामर्श (How Dalai Lama’s Successor Is Chosen After His Death) करूंगा, ताकि यह फिर से मूल्यांकन किया जा सके कि दलाई लामा की संस्था जारी रहनी चाहिए या नहीं?”  इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? मैं इस बात को दोहराता हूं कि गैडेन फोडरंग ट्रस्ट के पास भविष्य के पुनर्जन्म को मान्यता देने का एकमात्र अधिकार है- दलाई लामा उन्होंने आगे कहा कि “भले इस मुद्दे पर मेरी कोई सार्वजनिक चर्चा नहीं हुई है, लेकिन पिछले 14 वर्षों में तिब्बत की आध्यात्मिक परंपराओं के नेताओं, निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों, विशेष आम सभा की बैठक में भाग लेने वालों, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सदस्यों, गैर सरकारी संगठनों, हिमालयी क्षेत्र के बौद्धों, मेनलैंड चीन, मंगोलिया, रूसी संघ के बौद्ध गणराज्यों और सहित एशिया में बौद्धों ने मुझे वजह बताते हुए पत्र लिखा है और आग्रह किया है कि दलाई लामा की संस्था जारी (Dalai Lama’s Successor) रहे। विशेष रूप से, मुझे तिब्बत में तिब्बतियों से विभिन्न चैनलों के माध्यम से यही अपील करने वाले मैसेज हुए हैं। इन सभी अनुरोधों के अनुसार, मैं पुष्टि कर रहा हूं कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी। वह प्रक्रिया जिसके द्वारा आने वाले दलाई लामा को खोजा जाएगा, 24 सितंबर 2011 के मेरे बयान में स्पष्ट रूप से स्थापित की गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसा करने की जिम्मेदारी विशेष रूप से परमपावन दलाई लामा के ऑफिस, गैडेन फोडरंग ट्रस्ट के सदस्यों की (How Dalai Lama’s Successor Is Chosen After His Death) होगी। उन्हें तिब्बती बौद्ध परंपराओं के विभिन्न प्रमुखों और विश्वसनीय शपथ-बद्ध धर्म रक्षकों से परामर्श लेना चाहिए जो दलाई लामाओं की वंशावली से अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं। उन्हें पिछली परंपरा के अनुसार खोज और पहचान की प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहिए। चयन की बात पर उन्होंने कहा कि “मैं इस बात को दोहराता हूं कि गैडेन फोडरंग ट्रस्ट के पास भविष्य के पुनर्जन्म को मान्यता… Read More

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Cancer

सिर और गर्दन के कैंसर के 5 शुरुआती संकेत जिन्हें कभी भी नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) यानी सिर और गले के कैंसर की शुरुआत सिर और गले के एरिया में होती है। ऐसे कई तरह के कैंसर (Cancer) हैं जो सिर और गले में हो सकते हैं। इनमे से हर एक ही शुरुआत कोशिकाओं की वृद्धि के रूप में शुरू होती है, जो हेल्दी टिश्यूज पर हमला कर उन्हें नष्ट कर सकती है। यह कैंसर को मुंह,गले, साइनस और स्लाइवरी ग्लेंड्स से शुरू होने वाले कैंसरस के रूप में जाना जाता है। हेड और नेक कैंसर का उपचार कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। इनमे कैंसर (Cancer) की लोकेशन, इसका साइज और सेल्स के प्रकार आदि शामिल हैं। इसके साथ ही उपचार के लिए डॉक्टर रोगी की सम्पूर्ण हेल्थ को भी कंसीडर करते हैं। इस समस्या के निदान और सही उपचार के लिए इसके लक्षणों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। आइए जानें हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) के बारे में।  हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) क्या हो सकते हैं? क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार दुनिया भर में पाए जाने वाले लगभग 4.5% हेड एंड नेक के कैंसर होते हैं। यह कैंसर (Cancer) अधिकतर पुरुषों को प्रभावित करता है। हेड एंड नेक कैंसर के लक्षण (Symptoms of Head and Neck Cancer) क्या इस प्रकार हो सकते हैं: गले, जबड़े या मुंह में गांठ हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) यानी सिर और गले के कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण है जबड़ों और मुंह में गांठ का होना। यह लम्पस रोगी के होंठों पर भी हो सकते हैं। हालांकि, गले में गांठ थायरॉइड कैंसर का लक्षण भी हो सकता है या ऐसा भी हो सकता है की ऐसा लिम्फ नोड के बढ़ने के कारण हो रहा हो। इस कैंसर (Cancer) का सबसे सामान्य लक्षण है एक या अधिक लिम्फ नोड्स में सूजन होना, इनमें माउथ कैंसर और स्लाइवरी ग्लेंड कैंसर भी शामिल है। अगर यह लम्पस बार-बार हो रहे हों और ठीक हो रहे हों तो यह कैंसर की वजह से नहीं हैं। क्योंकि, कैंसर में यह गांठ बनती है और फिर बढ़ती रहती है। जबड़ा हिलाने में समस्या होना हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) में जबड़ों की मसल्स, हड्डियां या नर्वज में समस्या भी शामिल हैं। इसके कारण रोगी को मुंह खोलने में समस्या हो सकती है। इसमें अधिकतर रोगी मुंह खोलने में असमर्थ होते हैं। अगर किसी को यह परेशानी होती है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। चबाने में परेशानी सिर और गले के कैंसर के कारण रोगी को खाना चबाने व निगलने में दर्द व बर्निंग सेंसेशन हो सकती है। इसमें रोगी को ऐसा भी महसूस हो सकता है जैसे फ़ूड गले में फंस गया है। इसके साथ ही रोगी की आवाज भी प्रभावित हो सकती है। ऐसा प्रतीत हो सकता है कि जैसे उन्हें- हुआ हो। मुंह में सफेद पैच इस कैंसर (Cancer) में रोगी को मुंह में सफेद पैच हो सकता है जिसे ल्यूकोप्लाकिया कहा जाता है। यह समस्या आमतौर पर जबड़ों में, गालों या जीभ के अंदर होती है। यह परेशानी स्मोकिंग और तंबाकू से हो सकती है जो कैंसर का कारण बनती है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन गले में दर्द गले में दर्द जो ठीक न हो रही हो ,वो भी इस कैंसर का एक लक्षण है। हेड एंड नेक कैंसर (Head and Neck Cancer) में रोगी के चेहरे पर भी दर्द होती है और उसमे कमजोरी आ सकती है। यही नहीं, यह कैंसर (Cancer) ब्रीदिंग को भी प्रभावित कर सकता है। नेजल कंजेशन इस समस्या का एक लक्षण हो सकता है। इसमें कुछ लोग नाक से खून आना जैसे समस्याओं का भी अनुभव कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Clevelandclinic #headandneckcancer #cancersymptoms #earlycancersigns #healthawareness #cancerprevention

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Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark

Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark: मौलाना कहे जाने पर भड़के तेजस्वी यादव ने बीजेपी को लेकर कही यह बात 

इन दिनों वक्फ कानून को लेकर बिहार की राजनीति खासी गरमाई हुई है। जिसे लेकर नेताओं में बयानबाजी जारी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधते हुए स्पष्ट कहा है कि “वे धर्म नहीं, कर्म की राजनीति में विश्वास रखते हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी के प्रवक्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों का भी मंच से जवाब देते हुए कहा कि “लगातार दिल्ली में बीजेपी के चिरकुट सब… संघी वाले, दो दिन से हमको गाली दे रहे (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। कभी नमाजवादी कह रहे हैं कभी ‘मौलाना’ कह रहे हैं।” दरअसल, तेजस्वी यादव मंगलवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित अब्दुल कय्यूम अंसारी की 120वीं जयंती के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि “हम मुद्दों की बात करते हैं, वे मुर्दों की बात करते हैं। नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।” हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) बनाएंगे पहचान- तेजस्वी यादव  बीजेपी की आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि “हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर पहचान बनाएंगे। मंदिर भी सजाएंगे और मस्जिद भी, हमारा और जनता का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, जज्बात का (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है। जब हमारी तकलीफ एक है तो हम अलग कैसे हो सकते हैं? अगर जनता का साथ मिला तो नागपुर से चल रही सरकार और नागपुरिया कानून को सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे।” जानकारी के मुताबिक इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते रविवार को तब हुई जब तेजस्वी यादव ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ रैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की ओर से लागू वक्फ कानून पर तीखा बयान देते हुए कहा कि “बिहार में मौजूदा सरकार सत्ता से बाहर होने की राह पर है। अगर राज्य में विपक्षी दलों की सरकार बनती है तो वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे।”  तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं- गौरव भाटिया (बीजेपी प्रवक्ता)  इसी बात को लेकर बीजेपी तेजस्वी यादव पर हमलावर है। तेजस्वी यादव के बयान के बाद बीजेपी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने बीते मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। ये शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। मौलाना तेजस्वी यादव संविधान को जानते नहीं हैं। आरजेडी बिहार में अगले 50 साल सत्ता में आने वाली नहीं है। हमारे लिए अंबेडकर जी पूजनीय हैं। तेजस्वी यादव और लालू यादव सांप्रदायिक राजनीति करते हैं। हिंदू और मुस्लिम राजनीति कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है- तेजस्वी यादव  इसके बाद पलटवार करते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “भाजपा के लोग दो दिन से मुझे गाली दे रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए हमारे प्रवक्ता ही काफी हैं। मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है।” यही नहीं, जेडीयू दफ्तर में पीएम मोदी की तस्वीर लगाये जाने पर तेजस्वी ने कहा कि “जेडीयू बीजेपी का प्रकोष्ठ बन गया है। जेडीयू को बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है। जदयू को तोड़ने की कोशिश तो शुरू से ही हो रही थी, अब यह दिखने लगा है। चाचा जब हमारे पास आए थे उसी समय बीजेपी ने जेडीयू को तोड़ना शुरू कर दिया था।  झारखंड-महाराष्ट्र में जब ऑपरेशन लोटस चल रहा था, उस समय बिहार में भी चल रहा था।” Latest News in Hindi Today Hindi news Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark #TejashwiYadav #BJP #MaulanaRemark #BiharPolitics #PoliticalNews

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caffeine anti-aging

क्या कैफीन एजिंग प्रोसेस को स्लो कर सकता है और रख सकता है आपको हमेशा यंग

अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं जिन्हें सुबह उठते ही कैफीन (Caffeine) की जरूरत होती है, तो याद रखें आप अकेले नहीं हैं क्योंकि अधिकतर लोगों के लिए सुबह उठते ही चाय या कॉफी पीना उनकी एक जरूरत है। कैफीन एक नेचुरल केमिकल है, जिसमें स्टीमुलेंट इफेक्ट्स होते हैं। यह चाय, कॉफी, कोकोआ आदि में पाया जाता है। कैफीन (Caffeine) से हमारा सेंट्रल नर्वस सिस्टम, हार्ट, मसल्स और वो सेंटर्स स्टिमुलेट होते हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं। कैफीन (Caffeine) से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और यह वाटर पिल की तरह काम करता है जिससे यूरिन फ्लो बढ़ता है। एक सवाल यह है कि क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है? तो आइए जानें कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में। कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging): पाएं जानकारी मायो क्लिनिक (MayoClinic) के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क के लिए दिन में 400 मिलीग्राम कैफीन लेना सुरक्षित माना गया है। इसलिए, इस बात को ध्यान रखें कि कैफीन (Caffeine) का सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए खासतौर पर एनर्जी ड्रिंक्स का। आइए कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में और जानें कि क्या कैफीन (Caffeine) उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है?  क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है? साइंटिस्ट के अनुसार कैफीन (Caffeine) सिर्फ एनर्जी को बढ़ाने का ही काम नहीं करती है बल्कि यह और भी बहुत सी चीजों में फायदेमंद है। यह हेल्दी एजिंग (Aging) में मददगार है। शोध के अनुसार कैफीन एएमपी को एक्टिव रखता है, जो स्ट्रेस और चिंता आदि से लड़ने में मददगार है। एएमपीके का अर्थ है एक्टिवेटेड प्रोटीन किनेज, जो एक सेलुलर एनर्जी सेंसर है और सेल्स के अंदर एनर्जी बैलेंस बनाये रखने में मदद करता है।  कैफीन (Caffeine) सेल्स के डिवीजन और डेवलपमेंट को भी प्रभावित करता है। इससे हमारे सेल्स को लम्बे समय तक सर्वाइव करने में मदद मिलती है और तनाव से बचाव होता है। तनाव से हमारे शरीर और दिमाग नेगेटिव प्रभाव पड़ता है लेकिन इससे बचाव से समय से पहले एजिंग (Aging) से भी बचा जा सकता है और यंग रहने में मदद मिलती है। लेकिन, इसके बारे में और शोध करने की जरूरत है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कैफीन के अन्य फायदे क्या हैं? कैफीन हमें सतर्क रखने और एनर्जी को सुधारने का काम करता है। इसके अन्य फायदे इस प्रकार हैं: कैफीन (Caffeine) को दर्द दूर करने वाली दवाईयों के साथ लेने से माइग्रेन के उपचार के लिए प्रभावी है।  कॉग्निटिव परफॉरमेंस को सुधारने में भी इसे फायदेमंद माना गया है। मूड को सुधारने और डिप्रेशन के रिस्क को कम करने में भी कैफीन लाभदायक है। लेकिन, इसका सेवन सही मात्रा में ही करना चाहिए। कुछ स्टडीज यह बताती है कि नियमित रूप से कैफीन (Caffeine) का सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज, पर्किंसन,स डिजीज आदि के डेवलप करने के जोखिम कम होता है। ऐसा माना गया है कि इसे लेने से हार्ट फेलियर के रिस्क को कम किया जा सकता है। लेकिन, कैफीन का सेवन सही और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। कैफीन को पीने से लिवर डैमेज और सिरोसिस के रिस्क के साथ भी लिंक किया जाता है। कैफीन (Caffeine) में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं जो सर्कुलेशन को सुधारने और झुर्रियों को कम करने में फायदेमंद हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Caffeine #caffeine #antiaging #stayyoung #youthfulskin #coffeehealth #skincare #healthtips

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Raj Thackeray news

राज ठाकरे की धमकी, ‘हिंदी को मराठी से बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे लोग ध्यान रखें चुनाव और गठबंधन होते रहते हैं, लेकिन…’

महाराष्ट्र में तीसरी भाषा पर छिड़ा विवाद (Maharashtra Three Language Policy) अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को लागू करने का आदेश वापस ले लिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा है। मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने एक बार फिर राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, ‘मराठी भाषा (Marathi Language) के मुद्दे को राजनीति का नाम न दें। राज्य में राजनीतिक गठबंधन और चुनाव होते आए हैं और होते रहेंगे, लेकिन अगर एक बार मराठी भाषा (Marathi Language) खत्म हो गई तो समझ लीजिए सब कुछ खत्म हो जाएगा। इस मुद्दे को सभी राजनीतिक पार्टियों को एक चुनौती के रूप में देखना चाहिए।”  मनसे (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे (Raj Thackeray) मुंबई में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने इसी दौरान कहा कि, “मराठी भाषा को खत्म करने या इससे समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति का मैं खुलकर विरोध करूंगा। भले ही वह व्यक्ति किसी भी पार्टी का ही क्यों न हो, मैं उसके खिलाफ खड़ा होऊंगा और पूरी ताकत से लड़ंगा।” राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने मराठी भाषा पर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा, ”हिंदी भाषा देश में व्यापक रूप से बोली जाती है, लेकिन इसे अन्य राज्यों पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय भाषा नहीं है। इस भाषा को प्राचीन मराठी भाषा से ऊपर रखने का कोई भी प्रयास कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  मराठी भाषा का इतिहास 3,000 साल पुराना  राजा ठाकरे ने कहा कि हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ मराठी भाषा की रक्षा कर रहे हैं। हिन्दी भाषा का इतिहास 150 से लेकर 200 साल पुराना है, लेकिन इसे उस भाषा से बेहतर दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिसका इतिहास 3000 साल पुराना है। कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करने के लिए साजिश रच रहे हैं और हिन्दी भाषा को सर्वश्रेण दिखा रहे हैं। यह अस्वीकार्य है और महराष्ट्र की जनता यह नहीं होने देगी। सरकार अगर फिर से हिन्दी थोपने का प्रयास करेगी तो उसे इससे भी ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा।  हिंदी भाषा का विरोध बढ़ता देख सरकारी आदेश रद्द बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी (Maharashtra Three Language Policy) को शामिल किया था। सरकार के इस फैसले का राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जमकर विरोध किया। मनसे कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर हिन्दी भाषी लोगों के साथ मारपीट भी की। हिन्दी के खिलाफ विरोध बढ़ता देख देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुती सरकार ने ‘त्रि-भाषा’ नीति पर रोक लगाने के साथ एक समिति का गठन कर दिया, जो हिन्दी भाषा को लागू करना है या नहीं, इस बात का फैसला करेगी। राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने इस समिति को लेकर भी राज्य सरकार को धमकी दी है। उन्होंने कहा, ‘मैं फडणवीस सरकार को साफ शब्दों में कहना चाहता हूं, उनकी समिति की रिपोर्ट पक्ष में आए या विपक्ष में, लेकिन हिन्दी को दोबारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात सरकार को हमेशा अपने दिमाग में रखनी चाहिए।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोलने पर बुजुर्ग दुकानदार को पीटा  महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद में राज ठाकरे के कार्यकर्ता अब सरेआम गुंडागर्दी करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मनसे कार्यकर्ता मराठी न बोलने पर एक बुजुर्ग दुकानदार को पीटते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस दुकानदार को पीटा गया, वह मुंबई के मीरा रोड पर स्थित जोधपुर स्वीट्स का मालिक है। दुकानदार की सरेआम पिटाई के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत पैदा हो गया है। पुलिस ने मामले की गंभीर को देखते मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Raj Thackeray #RajThackeray #MarathiPride #MNS #MaharashtraPolitics #HindiVsMarathi #PoliticalWarning #LatestNews

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Trump Gaza ceasefire

Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees: ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास 

इजरायल और ईरान में सीजफायर कराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल और हमास में भी सीजफायर (GazaCeasefire) कराने का प्रयास कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इजरायल और हमास में 60 दिन का युद्धविराम हो सकता है। हालाँकि इससे पहले भी जनवरी 2025 में 15 महीने की जंग के बाद इजरायल और हमास के बीच 6 सप्ताह का युद्धविराम हुआ (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) था। खैर, इजरायल सीजफायर के लिए तैयार है, बात हमास को लेकर अटकी है। दोनों के बीच सीजफायर हो सके इसलिए वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इजरायल के रणनीतिक मामलों के मंत्री रान डर्मर से बातचीत भी की। बड़ी बात यह कि इस मुलाकात में इजरायल के मंत्री हमास के साथ सीजफायर की शर्तों को मानने के लिए राजी हो गए हैं। इस मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ]सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट लिखकर इजरायल और हमास में सीजफायर होने की उम्मीद जताई। गौरतलब हो कि “दोनों पक्षों में संघर्ष विराम की बात तब उठी, जब गाजा को खाली करने नया आदेश जारी हुआ।” जरायल ने 60 दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को फाइनल करने के लिए जरूरी शर्तों पर जता (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) दी है सहमति  राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की जानकारी अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट के रूप में दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि “अमेरिका के प्रतिनिधियों ने आज गाजा के साथ युद्धविराम के मुद्दे पर इजरायलियों के साथ लंबी बैठक की। इजरायल ने 60 दिन के युद्धविराम (GazaCeasefire) के प्रस्ताव को फाइनल करने के लिए जरूरी शर्तों पर सहमति जता (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) दी है। दोनों पक्षों में संघर्ष विराम तभी होगा, जब सभी मिलकर एक साथ प्रयास करेंगे। कतर और मिस्र सीजफायर के अंतिम प्रस्ताव को पेश करेंगे। उम्मीद है कि मध्य पूर्व की भलाई के लिए हमास सीजफायर के समझौते को स्वीकार करेगा, क्योंकि अगर युद्ध चलता रहा तो हालात और बदतर होते जाएंगे। इसलिए हमास भी संघर्ष विराम के लिए आगे आए।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर किया था (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) हमला  कहने की जरूरत नहीं कि गाजा में सीजफायर हेतु दुनिया की नजरें अब हमास के रुख पर (GazaCeasefire) टिकी हैं। हमास ने इससे पहले कहा था कि “वह इजरायली सैनिकों की पूर्ण वापसी और गाजा में युद्ध खत्म करने के बदले सभी बंधकों को रिहा करने को तैयार है।” लेकिन इजरायल ने अपनी सेना की वापसी और युद्ध पूरी तरह खत्म करने के हमास के प्रस्ताव को खारिज कर दिया (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) था। बता दें कि पिछले 20 महीने से इजरायल-हमास युद्ध चल रहा है। लगातार जारी युद्ध की वजह से हालात दिन-ब-दिन ख़राब होते जा रहे हैं। इस जंग का मकसद हमास के नेतृत्व वाले आतंकवादी संगठनों को खत्म करना हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया था, जिसमें 1200 इजरायली मारे गए और 250 से अधिक लोग बंधक बनाए गए। जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल ने गाजा में हवाई और जमीनी हमला किया। आज तक चले संघर्ष में गाज में रहने वाले 56000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस युद्ध में इजरायल के 726 सैनिक और 1200 लोगों ने जान गंवाई। खैर, ऐसे में एक पक्ष सीजफायर के लिए तैयार है। दूसरे पक्ष को अपना फैसला करना है। अब अमेरिका की शांति कराने की कोशिश किस हद तक सफल होती है, यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा, लेकिन बड़ी बात यह कि अमेरिका ने संघर्ष विराम के लिए इजरायल को मना लिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees #trump #gaza #ceasefire #israel #hamas #middleeast #gazawar #gazaceasefire #trumpnews #breakingnews

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Indore digital city

इंदौर बनेगा देश का पहली डिजिटल सिटी: हर घर को मिलेगा यूनिक डिजिटल एड्रेस

भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर अब एक और बड़ी उपलब्धि की ओर अग्रसर है। मध्य प्रदेश का यह शहर देश की पहली डिजिटल सिटी (Digital City) बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। स्वच्छता में छह बार नंबर वन रह चुके इंदौर ने अब टेक्नोलॉजी और स्मार्ट गवर्नेंस को मिलाकर नागरिक सुविधाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की योजना शुरू कर दी है। यह परियोजना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि प्रत्येक नागरिक को डिजिटल पहचान देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। क्या है डिजिटल सिटी प्रोजेक्ट? इस परियोजना के तहत इंदौर के हर घर को एक यूनिक डिजिटल एड्रेस (Digital Address) दिया जाएगा, जो GPS आधारित होगा। इस यूनिक एड्रेस (Unique Address) को एक QR कोड (QR Code) के माध्यम से घर के बाहर लगाया जाएगा। इस क्यूआर कोड (QR Code) को कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन से स्कैन (Scan) करेगा तो संबंधित संपत्ति की विस्तृत जानकारी तुरंत मोबाइल स्क्रीन (Mobile Screen) पर दिखेगी। इस डिजिटल पते में शामिल होगी: यह सभी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) पर उपलब्ध होगी, जिससे नागरिकों को सेवाएं पाने में सुविधा होगी और नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। वार्ड 82 से शुरुआत, पूरे शहर को कवर करने की तैयारी इंदौर में इस डिजिटल सिटी प्रोजेक्ट (Digital City Project) की शुरुआत वार्ड 82 से की गई है। पहले दिन इस योजना के तहत 20 घरों को जोड़ा गया और इसकी शुरुआत सुदामा नगर में साहित्यकार सदाशिव कौतुक के घर से की गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार अगले 20 दिनों में पूरे वार्ड के लगभग 7,000 घरों को इस योजना के तहत शामिल कर लिया जाएगा। इसके बाद इंदौर के बाकी 81 वार्डों में यह योजना एक साथ लागू की जाएगी, जिससे अगले दो महीनों में इंदौर पूरी तरह डिजिटल सिटी (Digital City Indore) बन जाएगा। दावा-आपत्ति और नागरिक शिकायतों के लिए भी तय समय सीमा के भीतर समाधान का प्रावधान रखा जाएगा, जिससे जनता की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। डिजिटल एड्रेस (Digital Address) का क्या होगा फायदा? स्मार्ट गवर्नेंस (Smart Governance): नगर निगम को अब घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की ज़रूरत नहीं होगी। QR कोड स्कैन (QR Code Scan) कर अधिकारी सीधे डिजिटल डेटा देख सकेंगे। नागरिकों को सुविधा: लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पानी-बिजली के बिल, टैक्स की स्थिति, अस्पताल से संबंधित सेवाएं एक क्लिक पर मिलेंगी। ट्रांसपरेंसी: डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) होने से टैक्स चोरी पर रोक लगेगी और शहरी विकास में वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकेंगे। आपातकालीन सेवाएं तेज़: किसी भी मकान की सही लोकेशन को क्यूआर कोड (QR Code) के ज़रिए तत्काल साझा किया जा सकेगा, जिससे एम्बुलेंस या फायर सर्विस जैसी सेवाएं जल्दी पहुंच सकेंगी। डिजिपिन से कनेक्टिविटी: यह पूरा प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के डिजिपिन प्लेटफॉर्म (Digipin Platform) से जुड़ा है। डिजिपिन यानी डिजिटल पिन (Digital Pin) के ज़रिए नागरिकों की पहचान और लोकेशन को एक साथ जोड़ दिया जाएगा। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  डिजिटल भारत की दिशा में अहम कदम इंदौर का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की डिजिटल इंडिया मुहिम (Digital India campaign) के तहत एक बड़ा मॉडल बन सकता है। जहां देशभर के शहर डिजिटल गवर्नेंस को लेकर योजनाएं बना रहे हैं, वहीं इंदौर इस पर वास्तविक काम कर रहा है और उदाहरण पेश कर रहा है। इससे पहले इंदौर ने स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट, सफाई ऐप्स और डिजिटल बिलिंग जैसी कई योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। अब डिजिटल एड्रेसिंग प्रणाली से यह शहर न सिर्फ स्मार्ट बनेगा, बल्कि यह भारत के अन्य शहरों को भी नई दिशा दिखाएगा। इंदौर का डिजिटल सिटी (Digital City) बनने का यह प्रयास सिर्फ एक तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह सिटी गवर्नेंस और नागरिक सुविधा का आधुनिक मॉडल बन रहा है। हर घर का डिजिटल एड्रेस (Digital Address) न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा, बल्कि नागरिकों के लिए भी जीवन अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य शहर भी इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। डिजिटल युग में इंदौर एक बार फिर देश को रास्ता दिखा रहा है और इस बार स्वच्छता नहीं, स्मार्ट नागरिक सेवाओं के जरिए। Latest News in Hindi Today Hindi news  Prime Minister Narendra Modi #indoredigitalcity #firstdigitalcity #smartcityindia #digitaladdress #indorenews

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Man Lives 2 Days with Dead Lover After Murder in Love Fight

Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row: 3 साल का प्यार, 8 महीने का लिव-इन और अफेयर का शक, प्रेमिका की हत्‍या कर 2 दिन तक शव के साथ सोता रहा हत्यारा 

लोकबाग कहते हैं कि शक जानलेवा होता है। शक के चक्कर में न सिर्फ रिश्ते टूटते हैं बल्कि रिश्तों का खून भी हो जाता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक प्रेमी ने बॉस से अफेयर के शक में प्रेमिका की हत्‍या कर दी। हत्या के बाद  शव को कंबल में लपेटकर बेड पर रखा और उसके साथ सोता रहा। एक दिन उसने शराब के नशे में अपने दोस्त को प्रेमिका की हत्या वाली (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) बात बताई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। दिल को दहला देने वाला यह मामला है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बजरिया थाना क्षेत्र का। जहाँ, 29 साल की रितिका सेन की उसके लिव-इन पार्टनर सचिन राजपूत ने गला घोंटकर हत्या कर दी। और हत्या के बाद आरोपी सचिन ने न सिर्फ शव को कंबल में लपेटकर बेड पर रखा, बल्कि दो दिनों तक उसी कमरे में शव के पास सोता रहा, जैसे मानो कुछ हुआ ही न हो।   सचिन को लगता था कि रितिका का उसके बॉस के साथ अफेयर (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) है जानकारी के मुताबिक गायत्री नगर, यह बात है 27 जून की रात की, जब कररिया फार्म इलाके में रहने वाले दोनों के बीच उस रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच जमकर बहस हुई। दरअसल, रितिका एक प्राइवेट फर्म में काम करती थीं और सचिन इन दिनों बेरोजगार था। उसे लगता था कि रितिका का उसके बॉस के साथ अफेयर है। इसी के चलते वो शक करता था। इसी बात को लेकर बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर सचिन ने रितिका का गला दबा दिया और उसकी मौत हो गई। हैरत की बात यह कि हत्या के बाद सचिन ने रितिका के शव को कंबल और चादर में लपेटकर बेड पर रख दिया। उससे भी बड़ी बात यह कि वो उसी कमरे में रहा और शराब पीता (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) रहा। दो दिनों तक उसने न सिर्फ वहीं शराब पी बल्कि उसी शव के पास सोया भी।  सचिन ने अपने दोस्त अनुज को शराब के नशे में हत्या की बात (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) बताई इस बीच रविवार को सचिन ने अपने दोस्त अनुज को शराब के नशे में हत्या की बात बताई, लेकिन दोस्त ने उसे मजाक में लिया। सोमवार सुबह, जब फिर से वही बात दोहराई, तो अनुज को शक हुआ। उसने उसी दिन शाम 5 बजे डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। बजरिया थाना पुलिस जब मौके पर पहुंची तो दरवाजा खोलते ही कंबल में लिपटी रितिका की लाश बेड पर (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) मिली। पुलिस के मुताबिक सचिन पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। आरोपी पिछले कई वर्षों से युवती के साथ रिलेशनशिप में था। और कुछ महीने पहले ही दोनों साथ रहने लगे थे। इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म आठ महीने पहले दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और भोपाल में ही लिव-इन में रहने (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) लगे थे बजरिया थाना पुलिस के डीसीपी शशांक के मुताबिक  29 वर्षीय मृतका रितिका सेन बजरिया की कुशीनगर कॉलोनी की रहने वाली है तो वहीं, 32 वर्षीय आरोपी सचिन का संबंध विदिशा के सिरोंज से है। चार साल पहले दोनों एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे। इस दौरान दोनों की मुलाकात हुई और फिर दोस्ती हो गई। दोस्ती देखते ही देखते प्यार में बदल गई और दोनों रिलेशनशिप में आ गए। दोनों साढ़े तीन साल से रिलेशनशिप में थे। आठ महीने पहले दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और भोपाल में ही लिव-इन में रहने लगे। रितिका एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती थी। ऐसे में सचिन को शक था कि रितिका का उसके बॉस से अफेयर चल रहा है, जिसके कारण उसने रितिका की हत्या कर (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) दी।” पूछताछ में सचिन ने पुलिस को बताया, रितिका अक्सर अपने बॉस से फोन पर बात करती रहती थी। इसे लेकर दोनों के बीच में झगड़े होने लगे। 27 जून की शाम को भी इसी बात को लेकर दोनों में लड़ाई हुई।  Latest News in Hindi Today Hindi Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row #loveTriangleMurder #liveInCrime #DelhiMurder #affairSuspicion #girlfriendKilled

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