22 अप्रैल को जम्म-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुई कायराना आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद भारत ने 6 और 7 मई की दरम्यानी रात ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में एयर स्ट्राइक की। इस एयर स्ट्राइक में भारत ने 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। मजे की बात यह कि 3 दिन चली कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान को नाकों चने चबवा दिया। इस कार्रवाई में भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम बल्कि कई एयर बेस भी तबाह कर दिया। इस दौरान 100 से अधिक आतंकी मारे गए और कई लोग घायल हुए। इसे अलावा 40 से अधिक पाकिस्तानी जवान भी मारे गए थे। फ़िलहाल अपनी हर देख पाकिस्तान ने भारत से सीजफायर की गुहार लगाई। और फिर भारत अपनी शर्तों पर सीजफायर के लिए राजी हुआ। फ़िलहाल दोनों देशों की सरहदों पर शांति है। कहने की जरूरत नहीं इस पूरी कार्रवाई में पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा। खैर, इन सब के बीच ध्यान देने वाली बात यह कि इस पूरी कवायद में तुर्की और चीन पाकिस्तान के साथ खुलकर खड़े थे। चीन का तो समझ आता है कि चीन ने पाकिस्तान में इतना इन्वेस्ट कर दिया है कई उसका साथ देना मजबूरी बन गई है। लेकिन (Why Turkey is Supporting Pakistan) तुर्की?
तुर्की ने हथियार बनाने और बेचने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल (Why Turkey is Supporting Pakistan) की है

वो तुर्की, जिसकी भारत ने करोड़ों डॉलर की मदद की थी। तुर्की वही देश है जहां विनाशकारी भूकंप आने के बाद भारत ने फौरन सहायता भेजी थी। इतना कुछ करने के बाद भी तुर्की एहसान फरामोश निकला। भारत और पाकिस्तान में बीच युद्धजनक स्थिति में तुर्की ने पाकिस्तान की मदद की। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या यह महज दोस्ती का मामला है या फिर इसके पीछे कोई और मंशा (Why Turkey is Supporting Pakistan) है? आइये जानते हैं इसके पीछे की मंशा। दरअसल, हाल के वर्षों में तुर्की ने अपनी रक्षा उद्योग को मजबूत किया है। वो दुनिया के शीर्ष हथियार निर्यातकों में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। तुर्की हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक बनना चाहता है। तुर्की ने हथियार बनाने और बेचने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। तुर्की अब दुनिया का 11वां सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है। तीनों तरफ दुश्मनों से घिरे होने के कारण पाकिस्तान को रक्षा उपकरणों की हमेशा से दरकार रही है। इसी सिलसिले में पाकिस्तान के साथ तुर्की ने कई बड़े रक्षा सौदे किए हैं। जिनमें मिलगेम युद्धपोत, विभिन्न ड्रोन और टी-129 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
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तुर्की का पाकिस्तान को समर्थन सिर्फ एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि सोची-समझी (Why Turkey is Supporting Pakistan) रणनीति है
गौर करने वाली बात यह कि ये सौदे तुर्की के रक्षा उद्योग के लिए अरबों डॉलर की आमदनी का स्रोत (Why Turkey is Supporting Pakistan) हैं। बड़ी बात यह कि तुर्की का मकसद सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है बल्कि, वह दुनिया भर में अपने हथियार बेचने का इच्छुक है। अफ्रीका, मिडल ईस्ट और एशिया में तुर्की अपने रक्षा उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान जैसे देशों में मदद और सहयोग देकर, तुर्की इन बाजारों में अपनी पैठ मजबूत कर रहा है। बेशक, तुर्की का पाकिस्तान को समर्थन सिर्फ एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति है, जो उसके हथियार उद्योग को बढ़ावा देने में मदद करती है। आगामी वर्षों में, तुर्की इस रणनीति के जरिए अपने रक्षा उद्योग को और मजबूत करेगा।
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