Muslim teacher leaves Islam: पहलगाम हमले से आहत पश्चिम बंगाल के मुस्लिम टीचर ने इस्लाम त्यागते हुए कही यह बड़ी बात

West Bengal Teacher News

 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना हमले में 26 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। कुल 28 टूरिस्टों ने इस हमले में जान गंवाई थी, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी थे। इस हमले में 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। निश्चित ही इस घटना को कभी भुलाया जा सकता है। इस घटना को लेकर देश के साथ-साथ दुनिया भर के अमन पसंद लोगों में रोष व्याप्त है। लोग इस बात को लेकर इस कदर चिंतित हैं कि भला कोई कैसे इस तरह धर्म पूछ कर किसी को मार सकता है? इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि दुनिया का सबसे बड़ा धर्म मानवता है। मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। पहलगाम की घटना का असर ऐसा कि लोग अपने आप विशेष धर्म से जोड़ने से भी शर्मिंदा महसूस करने लगे हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं पश्चिम बंगाल से जिनका ह्रदय इस कदर द्रवित हुआ कि उन्होंने अपना मजहब ही (Muslim teacher leaves Islam) छोड़ दिया। दरअसल, इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के एक मुस्लिम टीचर साबिर हुसैन ने इस्लाम मजहब छोड़ने का फैसला लिया है।

यह फैसला स्वतंत्र रूप से (Muslim teacher leaves Islam)  लिया है

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बता दें कि पहलगाम में आतंकियों ने लोगों का धर्म देखकर और कलमा पढ़वाकर निर्दोष लोगों को मारा था। इससे साबिर हुसैन इस कदर आहत हुए कि इस्लाम छोड़ने का ही मन बना लिया। वो दक्षिण 24 परगना जिले के बादुरिया स्थित निर्माण आदर्श विद्यापीठ में विज्ञान के शिक्षक हैं। स्कूल टीचर साबिर हुसैन ने कहा है कि “देश में आए दिन मजहब के नाम पर हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे वो बेहद दुखी हैं।” पहलगाम आतंकी हमले से आहत साबिर हुसैन ने इस्लाम छोड़ने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। साबिर हुसैन के मुताबिक उन्होंने यह फैसला स्वतंत्र रूप से (Muslim teacher leaves Islam)  लिया है और कहा है कि उनकी पत्नी और उनके बच्चे जो भी रास्ता चुने वह उन्हें पूरी आजादी देंगे।

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मैं सिर्फ एक इंसान के रूप में जाना जाना चाहता हूं, किसी धार्मिक पहचान की वजह से (Muslim teacher leaves Islam) नहीं

स्थनीय मीडिया से बात करते हुए साबिर हुसैन ने कहा कि “हिंसा फैलाने के लिए बार-बार धर्म का गलत इस्तेमाल किया जाता है, जो सही नहीं है।” उन्होंने इसपर आगे कहा कि “मैं किसी धर्म का अनादर नहीं कर रहा हूं। यह मेरा निजी फैसला है। मैंने देखा है कि किस तरह हिंसा फैलाने के लिए एक हथियार के रूप में धर्म का इस्तेमाल किया जाता है। कश्मीर में ऐसा कई बार हुआ है। मैं अब इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता।” व्यथित मन से उन्होंने आगे कहा कि “मैं सिर्फ एक इंसान के रूप में जाना जाना चाहता हूं, किसी धार्मिक पहचान की वजह से (Muslim teacher leaves Islam) नहीं। इसलिए मैं कोर्ट में आवेदन करने आया हूं। पहलगाम जैसी हिंसक घटनाओं में महजब का गलत इस्तेमाल किया जाता है। किसी को उसके धर्म की वजह से मारना कैसे ठीक है? ये मुझे बहुत आहत करता है।” वो यहीं नहीं रुके, साबिर ने आगे कहा कि “मौजूदा माहौल पर टिप्पणी करते हुए हुसैन ने कहा कि वह ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहते हैं, जहां सब कुछ मजहब के इर्द-गिर्द घूमता रहता है। आजकल सब कुछ धर्म के इर्द-गिर्द घूमता हुआ लगता है। मैं ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहता।” 

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