पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाके मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, हुगली और मालदा जिलों में बीते 10 अप्रैल से विरोध के नाम पर लगातार हिंसक (Why BJP not sacking Mamata) प्रदर्शन जारी है। जारी इस हिंसा में अबतक 3 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल बताए जा रहे हैं। मुर्शिदाबाद में जारी भयावह हिंसा का यह आलम है कि 500 से अधिक परिवारों को मजबूरन जान बचाकर पलायन करना पड़ा है। राज्य सरकार के अदृश्य सपोर्ट का नतीजा ही है जो उपद्रवी बेलगाम होते जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में 1,600 जवानों को तैनात किया गया है। दरअसल, वक़्फ़ संसोधन बिल पास होने के बाद ही पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में हिंसा और आगजनी होने का अंदाजा था। ख़ुफ़िया विभाग ने राज्य सरकार अराजक तत्वों द्वारा हिंसा फ़ैलाने का इनपुट पहले दिया था। लेकिन राज्य सरकार की नाकामी के चलते हिंसा भड़क उठी। इस बीच स्थित नियंत्रण के बाहर होती देख जिले में केंद्रीय सुरक्षा बल को तैनात किया गया है। गौर करने वाली बात यह कि हिंसा प्रभावित लोगों ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की है।
भारत के संविधान का अनुच्छेद-356, केन्द्र की संघीय सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने की देता है (Why BJP not sacking Mamata) अनुमति

ये तो रही हिंसा की बात। लेकिन ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर क्या वजह है, जो केंद्र, ममता बनर्जी की सरकार को बर्खास्त कर (Why BJP not sacking Mamata) राष्ट्रपति शासन नहीं लगा देती? वैसे भी भारत के संविधान का अनुच्छेद-356, केन्द्र की संघीय सरकार को राज्य में संवैधानिक तन्त्र की विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन की दशा में राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार देता है। जब रात दिन देश संविधान से चलेगा चिल्लाने वाले नेता कह ही रहे हैं कि देश बाबा साहेब के संविधान से चलेगा तो, फिर आखिर केंद्र सरकार क्यों नहीं संविधान के अनुच्छेद 356 का पालन करती? कहीं, केंद्र की मोदी सरकार खुद भी संविधान का पालन नहीं करना चाहती? ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर कब तक संसद से पारित कानून के विरोध के नाम पर राज्य में हिंसा होती रहेगी? पश्चिम बंगाल में हिंसा का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यह हिंसा की आग में झुलस चुका है। हैरत की बात यह कि केंद्र सरकार कठोर कदम उठाने के बजाय आँखमूंदे सब देख रही है। मोदी सरकार चाहे तो अर्धसैनिक बालों को लगाकर उपद्रवियों का अच्छे से इलाज कर सकती है।
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चुनावी मजबूरी के चलते कड़ी कार्रवाई (Why BJP not sacking Mamata) करने से डर रही है सरकार?
दरअसल, साल भर बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं। संभवतः चुनावी मजबूरी के चलते सरकार कड़ी कार्रवाई (Why BJP not sacking Mamata) करने से डर रही है? सरकार चाहे तो राष्टपति शासन लगाकर उपद्रवियों को ठंडा कर सकती है। लेकिन कहीं न कहीं सरकार भी डर रही है। डर इसलिए भी रही है क्योंकि सरकार को लगता है कि ममता बनर्जी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से कहीं बीजेपी को ही बड़ा नुकसान न उठाना पड़े। और एक डर यह भी कि भावनात्मक जुड़ाव के चलते बंगाली वोटर एकतरफा माँ माटी मानुष की बात करने वाली ममता के साथ न हो ले। क्योंकि ममता ने इसी माँ माटी और मानुष का कार्ड खेलकर लेफ्ट का किला भेदा था। कुल-मिलाकर ऐसा करने में नुकसान बीजेपी का ही है। ऐसे में हिंसा से हिंदुओं के मन में डर निर्माण होगा। और हिंदुओं का यही डर बंगाल में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत साबित होगी। खैर, जब बीजेपी जम्मू-कश्मीर में हालात काबू कर सकती है, तो पश्चिम बंगाल बीजेपी के लिए कोई बड़ी बात नहीं है।
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